Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди
Аль-Бакара 2:174–197
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إِنَّ ٱلَّذِينَ يَكۡتُمُونَ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلۡكِتَٰبِ وَيَشۡتَرُونَ بِهِۦ ثَمَنٗا قَلِيلًا أُوْلَٰٓئِكَ مَا يَأۡكُلُونَ فِي بُطُونِهِمۡ إِلَّا ٱلنَّارَ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ ٱللَّهُ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمۡ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ ١٧٤
Воистину, те, которые скрывают ниспосланное Аллахом в Писании и покупают за это малую цену, наполняют свои животы огнем. Аллах не станет говорить с ними в День воскресения и не очистит их. Им уготованы мучительные страдания.
निःसंदेह जो लोग अल्लाह की उतारी हुई किताबों और उनमें मौजूद सत्य और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत के संकेत (प्रमाण) को छिपाते हैं, जैसा कि यहूदी और ईसाई करते हैं, तथा वे इसे छिपाकर थोड़ा मुआवज़ा जैसे सरदारी, या पद (प्रतिष्ठा), या धन प्राप्त करते हैं; वे वास्तव में अपने पेटों में इसके सिवा कुछ नहीं खाते जो उनके आग से यातना दिए जाने का कारण होगा। तथा अल्लाह क़ियामत के दिन उनसे ऐसी बात नहीं करेगा, जो उन्हें पसंद हो, बल्कि ऐसी बात करेगा जो उन्हें बुरी लगे। तथा न उन्हें पवित्र करेगा और न उनकी प्रशंसा करेगा और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
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أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱشۡتَرَوُاْ ٱلضَّلَٰلَةَ بِٱلۡهُدَىٰ وَٱلۡعَذَابَ بِٱلۡمَغۡفِرَةِۚ فَمَآ أَصۡبَرَهُمۡ عَلَى ٱلنَّارِ ١٧٥
Они купили заблуждение за верное руководство и мучения - за прощение. Насколько же они готовы терпеть Огонь!
जिन लोगों की विशेषता उस ज्ञान को छिपाना है जिसकी लोगों को आवश्यकता होती है, वही लोग हैं, जिन्होंने सच्चे ज्ञान को छिपाने के कारण हिदायत के बदले गुमराही और अल्लाह की क्षमा के बदले उसकी यातना को अपना लिया। तो ये लोग ऐसे कार्य को करने पर कितना धैर्य रखने वाले हैं, जो उनके लिए जहन्नम में प्रवेश करने का कारण बनता है, मानो कि वे उसमें पाई जाने वाली यातना की परवाह नहीं करते हैं, इस कारण उसपर धैर्य से काम ले रहे हैं।
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ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ نَزَّلَ ٱلۡكِتَٰبَ بِٱلۡحَقِّۗ وَإِنَّ ٱلَّذِينَ ٱخۡتَلَفُواْ فِي ٱلۡكِتَٰبِ لَفِي شِقَاقِۭ بَعِيدٖ ١٧٦
Это потому, что Аллах ниспослал Писание с истиной. А те, которые спорят относительно Писания, находятся в полном разладе с истиной.
ज्ञान और मार्गदर्शन को छिपाने का यह दंड इस कारण है कि अल्लाह ने ईश्वरीय पुस्तकों को सत्य के साथ उतारा है और इसकी अपेक्षा यह है कि उन्हें स्पष्ट किया जाए, न कि छिपाया जाए। निःसंदेह जिन लोगों ने ईश्वरीय पुस्तकों में मतभेद किया, चुनाँचे उनमें से कुछ पर ईमान लाए और उनमें से कुछ को छिपाया, निश्चय वे सत्य से बहुत दूर और विरोध में हैं।
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۞ لَّيۡسَ ٱلۡبِرَّ أَن تُوَلُّواْ وُجُوهَكُمۡ قِبَلَ ٱلۡمَشۡرِقِ وَٱلۡمَغۡرِبِ وَلَٰكِنَّ ٱلۡبِرَّ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ وَٱلۡكِتَٰبِ وَٱلنَّبِيِّـۧنَ وَءَاتَى ٱلۡمَالَ عَلَىٰ حُبِّهِۦ ذَوِي ٱلۡقُرۡبَىٰ وَٱلۡيَتَٰمَىٰ وَٱلۡمَسَٰكِينَ وَٱبۡنَ ٱلسَّبِيلِ وَٱلسَّآئِلِينَ وَفِي ٱلرِّقَابِ وَأَقَامَ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَى ٱلزَّكَوٰةَ وَٱلۡمُوفُونَ بِعَهۡدِهِمۡ إِذَا عَٰهَدُواْۖ وَٱلصَّٰبِرِينَ فِي ٱلۡبَأۡسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ وَحِينَ ٱلۡبَأۡسِۗ أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ صَدَقُواْۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُتَّقُونَ ١٧٧
Благочестие состоит не в том, чтобы вы обращали ваши лица на восток и запад. Но благочестив тот, кто уверовал в Аллаха, в Последний день, в ангелов, в Писание, в пророков, кто раздавал имущество, несмотря на свою любовь к нему, родственникам, сиротам, бедным, путникам и просящим, расходовал его на освобождение рабов, совершал намаз, выплачивал закят, соблюдал договора после их заключения, проявлял терпение в нужде, при болезни и во время сражения. Таковы те, которые правдивы. Таковы богобоязненные.
अल्लाह के निकट पसंदीदा नेकी केवल पूर्व या पश्चिम की ओर मुँह कर लेना और उसके बारे में मतभेद करना नहीं है। बल्कि सारी की सारी अच्छाई उस व्यक्ति में है, जो अल्लाह पर उसे एकमात्र पूज्य मानते हुए ईमान लाए, तथा क़ियामत के दिन पर और सभी फ़रिश्तों पर, और सभी अवतरित की गई किताबों पर और सभी नबियों पर बिना किसी भेदभाव के ईमान लाए, तथा धन खर्च करे उसके मोह और लोभ के बावजूद अपने रिश्तेदारों पर, तथा व्यस्क होने से पहले अपने पिता को खो देने वाले पर, ज़रूरतमंदों, अपने परिवार और स्वदेश से कट जाने वाले परदेशी और उन लोगों पर जिन्हें किसी आवश्यकता के कारण लोगों से माँगना पड़ जाता है। तथा गुलामी और क़ैद से गर्दनों को छुड़ाने में पैसा खर्च करे। तथा अल्लाह की आज्ञा के अनुसार पूरी तरह से नमाज़ अदा करे, और अनिवार्य ज़कात का भुगतान करे। इसी तरह वे लोग, जो यदि वचन देते हैं तो अपने वचन को पूरा करते हैं, और जो लोग ग़रीबी और कठिनाई पर तथा बीमारी पर और भीषण युद्ध के समय धैर्य से काम लेते हैं, चुनाँचे वे भागते नहीं हैं। जो लोग इन विशेषताओं से सुसज्जित हैं, वही लोग हैं जो अपने ईमान और कर्मों में अल्लाह के प्रति सच्चे हैं, और वही परहेज़गार लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन किया और उसकी मना की हुई चीज़ों से परहेज़ किया।
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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ كُتِبَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡقِصَاصُ فِي ٱلۡقَتۡلَىۖ ٱلۡحُرُّ بِٱلۡحُرِّ وَٱلۡعَبۡدُ بِٱلۡعَبۡدِ وَٱلۡأُنثَىٰ بِٱلۡأُنثَىٰۚ فَمَنۡ عُفِيَ لَهُۥ مِنۡ أَخِيهِ شَيۡءٞ فَٱتِّبَاعُۢ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَأَدَآءٌ إِلَيۡهِ بِإِحۡسَٰنٖۗ ذَٰلِكَ تَخۡفِيفٞ مِّن رَّبِّكُمۡ وَرَحۡمَةٞۗ فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ ١٧٨
О те, которые уверовали! Вам предписано возмездие за убитых: свободный - за свободного, раб - за раба, женщина - за женщину. Если же убийца прощен своим братом, то следует поступить по справедливости и уплатить ему выкуп надлежащим образом. Таково облегчение от вашего Господа и милость. А кто преступит границы дозволенного после этого, того постигнут мучительные страдания.
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! उन लोगों के मामले में जो जानबूझकर और आक्रामकता में दूसरों हत्या कर देते हैं, हत्यारे को उसके अपराध के समान दंड देना तुमपर अनिवार्य कर दिया गया है। अतः आज़ाद आदमी को आज़ाद के बदले क़त्ल किया जाएगा, ग़ुलाम को ग़ुलाम के बदले क़त्ल किया जाएगा तथा नारी को नारी के बदले क़त्ल किया जाएगा। यदि वधित व्यक्ति अपनी मृत्यु से पहले क्षमा कर दे, या उसका अभिभावक दियत - वह धनराशि जो हत्यारा अपनी क्षमा के बदले में भुगतान करता है - लेकर क्षमा कर दे, तो क्षमा करने वाले को चाहिए कि क़ातिल से दियत (रक्त धन) की माँग अच्छे तरीक़े से करे, उपकार जतलाने तथा कष्ट देने से बचे। क़ातिल को भी चाहिए कि बिना टाल-मटोल के भले तरीक़े से दियत (ख़ून-बहा) अदा कर दे। यह क्षमा करना और ख़ून-बहा लेना, तुम्हारे पालनहार की ओर से तुमपर एक आसानी और इस उम्मत पर एक दया है। फिर जो व्यक्ति क्षमा करने और ख़ून-बहा लेने के बाद क़ातिल पर अत्याचार करे; तो उसके लिए अल्लाह की ओर से एक दर्दनाक सज़ा है।
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وَلَكُمۡ فِي ٱلۡقِصَاصِ حَيَوٰةٞ يَٰٓأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ ١٧٩
Возмездие спасает вам жизнь, о обладатели разума! Быть может, вы будете богобоязненны.
अल्लाह ने तुम्हारे लिए क़िसास का जो नियम निर्धारित किया है, उसमें तुम्हारे लिए जीवन है; क्योंकि इससे तुम्हारे ख़ून की रक्षा होती है और तुम्हारे बीच ज़्यादती (अत्याचार) को रोका जाता है। इसे वे बुद्धि वाले लोग महसूस करते हैं, जो अल्लाह की शरीयत का पालन करके और उसके आदेश के अनुसार कार्य करके उससे डरते हैं।
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كُتِبَ عَلَيۡكُمۡ إِذَا حَضَرَ أَحَدَكُمُ ٱلۡمَوۡتُ إِن تَرَكَ خَيۡرًا ٱلۡوَصِيَّةُ لِلۡوَٰلِدَيۡنِ وَٱلۡأَقۡرَبِينَ بِٱلۡمَعۡرُوفِۖ حَقًّا عَلَى ٱلۡمُتَّقِينَ ١٨٠
Когда смерть приближается к кому-либо из вас, и он оставляет после себя добро, то ему предписано оставить завещание родителям и ближайшим родственникам на разумных условиях. Такова обязанность богобоязненных.
जब तुममें से किसी की मृत्यु के लक्षण तथा कारण सामने आ जाएँ, और यदि उसने बहुत सारा धन छोड़ा है, तो उसपर माता-पिता और रिश्तेदारों के लिए शरीयत की निर्धारित की हुई मात्रा के अनुसार वसीयत करना ज़रूरी है, जो कि एक तिहाई धन से अधिक नहीं होना चाहिए। ऐसा करना उन लोगों पर एक पक्का अधिकार है जो सर्वशक्तिमान अल्लाह से डरने वाले हैं। ज्ञात रहे कि यह हुक्म मीरास की आयतें उतरने से पहले था। जब मीरास की आयतें उतरीं, तो उनके द्वारा स्पष्ट कर दिया गया कि मृतक का वारिस कौन होगा और उसे विरासत में कितना मिलेगा।
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فَمَنۢ بَدَّلَهُۥ بَعۡدَ مَا سَمِعَهُۥ فَإِنَّمَآ إِثۡمُهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ يُبَدِّلُونَهُۥٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٞ ١٨١
Если же кто-либо изменит завещание после того, как он выслушал его, то вина ложится только на тех, кто его изменил. Воистину, Аллах - Слышащий, Знающий.
फिर जो व्यक्ति वसीयत के बारे में जानने के बाद, कोई वृद्धि या कमी करके या उसे रोककर वसीयत में बदलाव कर दे; तो उस परिवर्तन का पाप परिवर्तन करने वालों पर होगा, वसीयतकर्ता पर नहीं। निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला और उनके कार्यों को जानने वाला है। उनकी स्थितियों में से कोई चीज़ उससे छूटती नहीं है।
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فَمَنۡ خَافَ مِن مُّوصٖ جَنَفًا أَوۡ إِثۡمٗا فَأَصۡلَحَ بَيۡنَهُمۡ فَلَآ إِثۡمَ عَلَيۡهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ١٨٢
Если же кто-либо опасается, что завещатель поступит несправедливо или совершит грех, и установит мир между сторонами, то на нем не будет греха. Воистину, Аллах - Прощающий, Милосердный.
जिस व्यक्ति को वसीयत करने वाले के बारे में सत्य से विचलन, या वसीयत में अन्याय (अनुचितता) का पता चले; फिर वह, वसीयतकर्ता ने जो अनुचित किया है उसे सलाह देकर उसका सुधार कर दे, तथा वसीयत के बारे में मतभेद करने वालों के बीच संधि (मेल-मिलाप) करा दे, तो उसपर कोई गुनाह नहीं है। बल्कि उसे संधि कराने का सवाब मिलेगा। निश्चय अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है।
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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ كُتِبَ عَلَيۡكُمُ ٱلصِّيَامُ كَمَا كُتِبَ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ ١٨٣
О те, которые уверовали! Вам предписан пост, подобно тому, как он был предписан вашим предшественникам, - быть может, вы устрашитесь.
ऐ अल्लाह पर ईमान लाने वालो और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! तुमपर तुम्हारे पालनहार की ओर से रोज़ा रखना फ़र्ज़ कर दिया गया है, जैसे तुमसे पहले समुदायों पर फ़र्ज़ किया गया था; ताकि तुम अल्लाह से डरो। अर्थात् अपने और उसके दंड के बीच अच्छे कर्मों को बचाव का साधन बना लो, और उनमें से एक महान कार्य रोज़ा रखना है।
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أَيَّامٗا مَّعۡدُودَٰتٖۚ فَمَن كَانَ مِنكُم مَّرِيضًا أَوۡ عَلَىٰ سَفَرٖ فَعِدَّةٞ مِّنۡ أَيَّامٍ أُخَرَۚ وَعَلَى ٱلَّذِينَ يُطِيقُونَهُۥ فِدۡيَةٞ طَعَامُ مِسۡكِينٖۖ فَمَن تَطَوَّعَ خَيۡرٗا فَهُوَ خَيۡرٞ لَّهُۥۚ وَأَن تَصُومُواْ خَيۡرٞ لَّكُمۡ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ١٨٤
Поститься следует считанное количество дней. А если кто из вас болен или находится в пути, то пусть постится столько же дней в другое время. А тем, которые способны поститься с трудом, следует в искупление накормить бедняка. А если кто добровольно совершает доброе дело, то тем лучше для него. Но вам лучше поститься, если бы вы только знали!
तुमपर अनिवार्य किया गया रोज़ा यह है कि तुम वर्ष में कुछ दिनों के रोज़े रखो। तुममें से जो कोई ऐसी बीमारी से पीड़ित है जिसके साथ रोज़ा रखना मुश्किल है, या वह एक यात्री है; तो उसके लिए रोज़ा तोड़ देना अनुमेय है, फिर वह उतने दिनों की क़ज़ा करेगा जिनके रोज़े उसने तोड़ दिए हैं। तथा जो लोग रोज़ा रखने की शक्ति रखते हैं, यदि वे रोज़ा तोड़ दें, तो उनपर फ़िदया अनिवार्य है, जो कि हर उस दिन के बदले जिसका वे रोज़ा तोड़ देते हैं, एक ग़रीब व्यक्ति को खाना खिलाना है। परंतु जो व्यक्ति एक से अधिक गरीबों को खाना खिलाए, या रोज़ा रखने के साथ खाना (भी) खिलाए, तो यह उसके लिए बेहतर है। हालाँकि, तुम्हारा रोज़ा रखना तुम्हारे लिए रोज़ा तोड़कर फ़िदया देने से बेहतर है, यदि तुम जानते हो कि रोज़े के क्या गुण हैं। ज्ञात होना चाहिए कि जब अल्लाह ने पहले पहल रोज़ा धर्मसंगत किया था, तो यही हुक्म था। चुनाँचे जो चाहता, रोज़ा रखता और जो चाहता, रोज़ा तोड़ देता और (उसके बदले) खाना खिलाता। फिर उसके बाद, अल्लाह ने रोज़े को अनिवार्य कर दिया और उसे हर व्यस्क (बालिग़) सक्षम व्यक्ति पर फ़र्ज़ क़रार दिया।
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شَهۡرُ رَمَضَانَ ٱلَّذِيٓ أُنزِلَ فِيهِ ٱلۡقُرۡءَانُ هُدٗى لِّلنَّاسِ وَبَيِّنَٰتٖ مِّنَ ٱلۡهُدَىٰ وَٱلۡفُرۡقَانِۚ فَمَن شَهِدَ مِنكُمُ ٱلشَّهۡرَ فَلۡيَصُمۡهُۖ وَمَن كَانَ مَرِيضًا أَوۡ عَلَىٰ سَفَرٖ فَعِدَّةٞ مِّنۡ أَيَّامٍ أُخَرَۗ يُرِيدُ ٱللَّهُ بِكُمُ ٱلۡيُسۡرَ وَلَا يُرِيدُ بِكُمُ ٱلۡعُسۡرَ وَلِتُكۡمِلُواْ ٱلۡعِدَّةَ وَلِتُكَبِّرُواْ ٱللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَىٰكُمۡ وَلَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ١٨٥
В месяц рамадан был ниспослан Коран - верное руководство для людей, ясные доказательства из верного руководства и различение. Тот из вас, кого застанет этот месяц, должен поститься. А если кто болен или находится в пути, то пусть постится столько же дней в другое время. Аллах желает вам облегчения и не желает вам затруднения. Он желает, чтобы вы довели до конца определенное число дней и возвеличили Аллаха за то, что Он наставил вас на прямой путь. Быть может, вы будете благодарны.
रमज़ान का महीना वह है, जिसकी सम्मानित रात (लैलतुल क़द्र) में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर पवित्र क़ुरआन उतरना शुरू हुआ। अल्लाह ने इसे लोगों के लिए मार्गदर्शन के रूप में उतारा है। इसमें मार्गदर्शन तथा सत्य और असत्य के बीच अंतर करने के स्पष्ट प्रमाण हैं। अतः जो व्यक्ति रमज़ान के महीने में उपस्थित हो, इस हाल में कि वह स्वस्थ एवं निवासी हो (यात्रा पर न हो), तो वह अनिवार्य रूप से उसका रोज़ा रखे। तथा जो व्यक्ति ऐसी बीमारी से पीड़ित हो कि उसके लिए रोज़ा रखना कठिन हो, या वह मुसाफ़िर हो; तो उसके लिए रोज़ा न रखना अनुमेय है। यदि वह रोज़ा न रखे, तो उसके लिए अनिवार्य है कि (बाद में) उन दिनों की क़ज़ा करे जिनके रोज़े उसने नहीं रखे थे। अल्लाह के इन विधानों का मक़सद तुम्हारे लिए आसानी पैदा करना है, न कि कठिनाई। और ताकि तुम पूरे महीने के रोज़े की गिनती पूरी करो और ताकि रमज़ान का महीना समाप्त होने के बाद तथा ईद के दिन इस बात पर अल्लाह की महिमा का वर्णन करो कि उसने तुम्हें इसका रोज़ा रखने का सामर्थ्य दिया और उसे पूरा करने पर तुम्हारी मदद की, और ताकि तुम अल्लाह का इस धर्म के लिए तुम्हारा मार्गदर्शन करने पर शुक्रिया अदा करो, जिसे उसने तुम्हारे लिए पसंद किया है।
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وَإِذَا سَأَلَكَ عِبَادِي عَنِّي فَإِنِّي قَرِيبٌۖ أُجِيبُ دَعۡوَةَ ٱلدَّاعِ إِذَا دَعَانِۖ فَلۡيَسۡتَجِيبُواْ لِي وَلۡيُؤۡمِنُواْ بِي لَعَلَّهُمۡ يَرۡشُدُونَ ١٨٦
Если Мои рабы спросят тебя обо Мне, то ведь Я близок и отвечаю на зов молящегося, когда он взывает ко Мне. Пусть же они отвечают Мне и веруют в Меня, - быть может, они последуют верным путем.
और (ऐ नबी!) जब मेरे बंदे आपसे मेरी निकटता और उनकी दुआ को क़बूल करने के बारे में पूछें; तो निश्चय मैं उनके निकट हूँ, उनकी स्थितियों को जानता हूँ और उनकी दुआओं को सुनता हूँ। इसलिए उन्हें मध्यस्थों (बिचौलियों) की, या अपनी आवाज़ें ऊँची करने की आवश्यकता नहीं है। मैं पुकारने वाले की पुकार का जवाब देता हूँ जब वह मुझे अपनी दुआ में निष्ठा के साथ पुकारता है। इसलिए उन्हें चाहिए कि वे मेरा और मेरी आज्ञाओं का पालन करें, और अपने ईमान पर जमे रहें; क्योंकि यह मेरे उत्तर देने का सबसे लाभकारी तरीक़ा है। ताकि वे ऐसा करके अपने धार्मिक और सांसारिक मामलों में मार्गदर्शन के रास्ते पर चल सकें।
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أُحِلَّ لَكُمۡ لَيۡلَةَ ٱلصِّيَامِ ٱلرَّفَثُ إِلَىٰ نِسَآئِكُمۡۚ هُنَّ لِبَاسٞ لَّكُمۡ وَأَنتُمۡ لِبَاسٞ لَّهُنَّۗ عَلِمَ ٱللَّهُ أَنَّكُمۡ كُنتُمۡ تَخۡتَانُونَ أَنفُسَكُمۡ فَتَابَ عَلَيۡكُمۡ وَعَفَا عَنكُمۡۖ فَٱلۡـَٰٔنَ بَٰشِرُوهُنَّ وَٱبۡتَغُواْ مَا كَتَبَ ٱللَّهُ لَكُمۡۚ وَكُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكُمُ ٱلۡخَيۡطُ ٱلۡأَبۡيَضُ مِنَ ٱلۡخَيۡطِ ٱلۡأَسۡوَدِ مِنَ ٱلۡفَجۡرِۖ ثُمَّ أَتِمُّواْ ٱلصِّيَامَ إِلَى ٱلَّيۡلِۚ وَلَا تُبَٰشِرُوهُنَّ وَأَنتُمۡ عَٰكِفُونَ فِي ٱلۡمَسَٰجِدِۗ تِلۡكَ حُدُودُ ٱللَّهِ فَلَا تَقۡرَبُوهَاۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ ءَايَٰتِهِۦ لِلنَّاسِ لَعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ ١٨٧
Вам дозволено вступать в близость с вашими женами в ночь поста. Ваши жены - одеяние для вас, а вы - одеяние для них. Аллах знает, что вы предаете самих себя (ослушаетесь Аллаха и вступаете в половую близость с женами по ночам во время поста в рамадане), и поэтому Он принял ваши покаяния и простил вас. Отныне вступайте с ними в близость и стремитесь к тому, что предписал вам Аллах. Ешьте и пейте, пока вы не сможете отличить белую нитку рассвета от черной, а затем поститесь до ночи. Не вступайте с ними в близость, когда вы пребываете в мечетях. Таковы ограничения Аллаха, не приближайтесь к ним. Так Аллах разъясняет Свои знамения людям, - быть может, они устрашатся.
रोज़ा अनिवार्य होने की शुरुआत में, यदि कोई व्यक्ति रोज़े की रात में सो जाता, फिर फ़ज्र से पहले उठता, तो उसके लिए खाना-पीना अथवा अपनी पत्नी से सहवास करना हराम हो जाता था। तो अल्लाह ने इस हुक्म को निरस्त कर दिया। अब अल्लाह ने (ऐ मोमिनो!) तुम्हारे लिए रोज़े की रातों में अपनी पत्नियों से सहवास करना अनुमेय कर दिया है। क्योंकि वे तुम्हारे लिए परदा एवं सतीत्व की रक्षा का कारण हैं और तुम उनके लिए परदा और सतीत्व की रक्षा का कारण हो। तुम एक-दूसरे से अलग नहीं रह सकते। अल्लाह ने जान लिया कि जिससे उसने तुम्हें मना किया था, उसे करके तुम अपने आपसे ख़यानत करते थे। इसलिए उसने तुम पर दया करते हुए तुम्हारी तौबा क़बूल कर ली और तुम्हें राहत प्रदान की। अतः अब उनके साथ संभोग करो और अल्लाह ने तुम्हारे लिए जो कुछ संतान नियत की है, उसकी खोज करो और पूरी रात में खाओ और पियो, यहाँ तक कि तुम्हारे लिए फ़ज्र की सफ़ेदी और उसके रात के अंधेरे से अलग होने के साथ फ़ज्र-सादिक़ (सुबह सादिक़) का उदय होना स्पष्ट हो जाए। फिर फ़ज्र के उदय होने से सूर्यास्त तक रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों से परहेज़ करके रोज़ा पूरा करो। तथा जब तुम मस्जिदों में एतिकाफ़ में हो, तो स्त्रियों के साथ संभोग न करो; क्योंकि यह इसे अमान्य कर देता है। उपर्युक्त अह़काम हलाल एवं हराम के बीच अल्लाह की सीमाएँ हैं, इसलिए तुम उनके पास बिल्कुल भी न जाओ; क्योंकि जो कोई भी अल्लाह की सीमाओं के क़रीब गया, वह निषिद्ध (हराम) में पड़ने के निकट है। इन अहकाम (प्रावधानों) को इस तरह स्पष्ट रूप से बयान करने की तरह ही अल्लाह अपनी निशानियों को लोगों के सामने स्पष्ट रूप से बयान करता है, ताकि वे उसकी आज्ञा का पालन करके और उसके निषेध से बचकर, उससे डरें।
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وَلَا تَأۡكُلُوٓاْ أَمۡوَٰلَكُم بَيۡنَكُم بِٱلۡبَٰطِلِ وَتُدۡلُواْ بِهَآ إِلَى ٱلۡحُكَّامِ لِتَأۡكُلُواْ فَرِيقٗا مِّنۡ أَمۡوَٰلِ ٱلنَّاسِ بِٱلۡإِثۡمِ وَأَنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ١٨٨
Не пожирайте незаконно между собой своего имущества и не подкупайте судей, чтобы пожирать часть имущества людей, сознательно совершая грех.
तुम एक-दूसरे के धन को अवैध रूप से न लो, जैसे चोरी, जबरन क़ब्ज़ा और धोखाधड़ी। तथा उसके झगड़े को शासकों के पास न ले जाओ ताकि लोगों के धन का एक भाग अवज्ञा के साथ रंगे हाथ ले लो, जबकि तुम्हें पता है कि अल्लाह ने इसे ह़राम किया है। क्योंकि यह जानते हुए पाप करना कि यह निषिद्ध है, सबसे जघन्य है और उसका दंड सबसे कठोर है।
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۞ يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلۡأَهِلَّةِۖ قُلۡ هِيَ مَوَٰقِيتُ لِلنَّاسِ وَٱلۡحَجِّۗ وَلَيۡسَ ٱلۡبِرُّ بِأَن تَأۡتُواْ ٱلۡبُيُوتَ مِن ظُهُورِهَا وَلَٰكِنَّ ٱلۡبِرَّ مَنِ ٱتَّقَىٰۗ وَأۡتُواْ ٱلۡبُيُوتَ مِنۡ أَبۡوَٰبِهَاۚ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ ١٨٩
Они спрашивают тебя о новолуниях. Скажи: «Они определяют промежутки времени для людей и хаджа. Благочестие не в том, чтобы вы входили в дома с их задней стороны. Но благочестив тот, кто богобоязнен. Входите в дома через двери и бойтесь Аллаха, - быть может, вы окажетесь преуспевшими.
(ऐ रसूल!) लोग आपसे नये चाँदों के गठन और उनकी स्थितियों में परिवर्तन के बारे में पूछते हैं। आप उन्हें उसकी हिकमत के बारे में उत्तर देते हुए कह दीजिए : वे लोगों के लिए समय के निर्धारण का ज़रिया हैं, जिनके द्वारा वे अपनी इबादतों के समय को जानते हैं; जैसे हज्ज के महीने, रोज़े का महीना और ज़कात अदा करने के लिए साल पूरा होने का ज्ञान। तथा वे लेन-देन में अपना समय जानते हैं; जैसे रक्त धन और क़र्ज़ की अदायगी के समय का निर्धारण। तथा नेकी और अच्छाई यह नहीं है कि तुम ह़ज्ज अथवा उम्रा का एह़राम बाँधने की अवस्था में अपने घरों में उनके पीछे से प्रवेश करो - जैसा कि तुम जाहिलिय्यत (पूर्व-इस्लामिक युग) में गुमान करते थे - बल्कि वास्तविक नेकी उस व्यक्ति की नेकी है, जो परोक्ष और प्रत्यक्ष रूप से अल्लाह से डरे। तथा तुम्हारा घरों में उनके द्वारों से प्रवेश करना तुम्हारे लिए अधिक आसान और कठिनाई से बहुत दूर है। क्योंकि अल्लाह ने तुम्हें किसी ऐसे कार्य का बाध्य नहीं किया है, जिसमें तुम्हारे लिए कष्ट और कठिनाई हो। तथा अपने और अल्लाह के अज़ाब के बीच नेक कार्य को आड़ (बचाव) बना लो; ताकि तुम जो चाहते हो, उसे प्राप्त करने में सफल हो, और जिससे डरते हो उससे बच जाओ।
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وَقَٰتِلُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ٱلَّذِينَ يُقَٰتِلُونَكُمۡ وَلَا تَعۡتَدُوٓاْۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُعۡتَدِينَ ١٩٠
Сражайтесь на пути Аллаха с теми, кто сражается против вас, но не преступайте границы дозволенного. Воистину, Аллах не любит преступников.
तथा - अल्लाह के कलिमा को ऊँचा करने के लिए - उन काफ़िरों से युद्ध करो, जो तुम्हें अल्लाह के धर्म से रोकने के लिए तुमसे युद्ध करते हैं। परंतु बच्चों, महिलाओं और बूढ़ों को क़त्ल करके अथवा मरे हुए व्यक्तियों के अंगों को काटकर (शवों का उत्परिवर्तन करके) अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन न करो। निःसंदेह अल्लाह अपने निर्धारित किए हुए नियमों और आदेशों में सीमाओं का उल्लंघन करने वालों से प्रेम नहीं करता।
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وَٱقۡتُلُوهُمۡ حَيۡثُ ثَقِفۡتُمُوهُمۡ وَأَخۡرِجُوهُم مِّنۡ حَيۡثُ أَخۡرَجُوكُمۡۚ وَٱلۡفِتۡنَةُ أَشَدُّ مِنَ ٱلۡقَتۡلِۚ وَلَا تُقَٰتِلُوهُمۡ عِندَ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِ حَتَّىٰ يُقَٰتِلُوكُمۡ فِيهِۖ فَإِن قَٰتَلُوكُمۡ فَٱقۡتُلُوهُمۡۗ كَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلۡكَٰفِرِينَ ١٩١
Убивайте их (многобожников), где бы вы их ни встретили, и изгоняйте их оттуда, откуда они вас изгнали. Искушение хуже, чем убийство. Но не сражайтесь с ними у Заповедной мечети, пока они не станут сражаться с вами в ней. Если же они станут сражаться с вами, то убивайте их. Таково воздаяние неверующим!
उन्हें जहाँ पाओ, क़त्ल करो और उन्हें उस जगह - अर्थात् मक्का - से निकाल दो, जहाँ से उन्होंने तुम्हें निकाला है। मोमिन को उसके धर्म से रोकने और उसके कुफ़्र की ओर लौटने के परिणामस्वरूप सामने आने वाला फ़ितना क़त्ल से बड़ा है। और मस्जिदे-ह़राम का सम्मान करते हुए उसके पास उनसे लड़ाई की शुरूआत न करो, यहाँ तक कि वे उसमें तुमसे लड़ना शुरू कर दें। यदि वे मस्जिदे-ह़राम में तुमसे लड़ना शुरू कर दें, तो उन्हें क़त्ल करो। इसी तरह का बदला - अर्थात् मस्जिदे-ह़राम में उनके युद्ध करने पर उन्हें क़त्ल करना - काफ़िरों का बदला है।
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فَإِنِ ٱنتَهَوۡاْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ١٩٢
Но если они прекратят, то ведь Аллах - Прощающий, Милосердный.
यदि वे तुमसे लड़ना बंद कर दें और अपने कुफ़्र से बाज़ आ जाएँ, तो उनसे हाथ उठा लो। निःसंदेह अल्लाह तौबा करने वालों को क्षमा करने वाला है, इसलिए उनके पिछले गुनाहों पर उनकी पकड़ नहीं करता। उनपर दया करने वाला है, उन्हें दंड देने में जल्दी नहीं करता।
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وَقَٰتِلُوهُمۡ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتۡنَةٞ وَيَكُونَ ٱلدِّينُ لِلَّهِۖ فَإِنِ ٱنتَهَوۡاْ فَلَا عُدۡوَٰنَ إِلَّا عَلَى ٱلظَّٰلِمِينَ ١٩٣
Сражайтесь с ними, пока не исчезнет искушение и пока религия целиком не будет посвящена Аллаху. Но если они прекратят, то посягать можно только на беззаконников.
काफ़िरों से युद्ध करो, यहाँ तक कि वे शिर्क, लोगों को अल्लाह के मार्ग से रोकने और कुफ़्र से बाज़ आ जाएँ, तथा प्रभावी धर्म अल्लाह का धर्म हो जाए। यदि वे अपने कुफ़्र तथा अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आ जाएँ, तो उनसे लड़ाई करना छोड़ दो। क्योंकि कुफ़्र और अल्लाह के मार्ग से रोकने के द्वारा अत्याचार करने वालों के सिवा किसी पर कोई अत्याचार उचित नहीं है।
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ٱلشَّهۡرُ ٱلۡحَرَامُ بِٱلشَّهۡرِ ٱلۡحَرَامِ وَٱلۡحُرُمَٰتُ قِصَاصٞۚ فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ عَلَيۡكُمۡ فَٱعۡتَدُواْ عَلَيۡهِ بِمِثۡلِ مَا ٱعۡتَدَىٰ عَلَيۡكُمۡۚ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُتَّقِينَ ١٩٤
Запретный месяц - за запретный месяц, а за нарушение запретов - возмездие. Если кто посягнул на вас, то и вы посягните на него, подобно тому, как он посягнул на вас. Бойтесь Аллаха и знайте, что Аллах - с богобоязненными.
वर्ष 7 हिजरी का हुरमत वाला महीना, जिसमें अल्लाह ने तुम्हें हरम में प्रवेश करने और उम्रा अदा करने में सक्षम किया, उस हुरमत वाले महीने के बदले है, जिसमें मुश्रिकों ने तुम्हें वर्ष 6 हिजरी में ह़रम में प्रवेश कने से रोक दिया था। सभी हुरमत वाली चीज़ों - जैसे हुरमत वाले नगर की हुरमत, हुरमत वाले महीने की हुरमत और एह़राम की हुरमत - में ज़्यादती करने वालों पर क़िसास का नियम लागू होगा। अतः जिसने भी इनमें तुमपर ज़्यादती की है, उसके साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा उसने किया है, और समानता की सीमा से आगे न बढ़ो। निश्चय अल्लाह अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने वालों से प्रेम नहीं करता। तथा अल्लाह ने तुम्हें जो कुछ करने की अनुमति दी है, उससे आगे न बढ़ो, और जान लो कि अल्लाह सामर्थ्य एवं समर्थन के द्वारा उन लोगों के साथ है, जो उससे डरने वाले हैं।
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وَأَنفِقُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَا تُلۡقُواْ بِأَيۡدِيكُمۡ إِلَى ٱلتَّهۡلُكَةِ وَأَحۡسِنُوٓاْۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ١٩٥
Делайте пожертвования на пути Аллаха и не обрекайте себя на гибель. И творите добро, ведь Аллах любит творящих добро.
अल्लाह की आज्ञाकारिता के कार्यों, जैसे जिहाद आदि में धन खर्च करो, तथा अपने आपको विनाश में न डालो, इस प्रकार कि उसके रास्ते में जिहाद और खर्च करना छोड़ दो, या अपने आपको ऐसी चीज़ में डाल दो जो तुम्हारे विनाश का कारण हो। तथा अपनी इबादतों, मामलों और आचरण में अच्छा बनो। निःसंदेह अल्लाह अपने सभी मामलों में अच्छा करने वालों से प्यार करता है। इसलिए वह उनके सवाब को बढ़ा देता है और उन्हें सीधे रास्ते पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करता है।
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وَأَتِمُّواْ ٱلۡحَجَّ وَٱلۡعُمۡرَةَ لِلَّهِۚ فَإِنۡ أُحۡصِرۡتُمۡ فَمَا ٱسۡتَيۡسَرَ مِنَ ٱلۡهَدۡيِۖ وَلَا تَحۡلِقُواْ رُءُوسَكُمۡ حَتَّىٰ يَبۡلُغَ ٱلۡهَدۡيُ مَحِلَّهُۥۚ فَمَن كَانَ مِنكُم مَّرِيضًا أَوۡ بِهِۦٓ أَذٗى مِّن رَّأۡسِهِۦ فَفِدۡيَةٞ مِّن صِيَامٍ أَوۡ صَدَقَةٍ أَوۡ نُسُكٖۚ فَإِذَآ أَمِنتُمۡ فَمَن تَمَتَّعَ بِٱلۡعُمۡرَةِ إِلَى ٱلۡحَجِّ فَمَا ٱسۡتَيۡسَرَ مِنَ ٱلۡهَدۡيِۚ فَمَن لَّمۡ يَجِدۡ فَصِيَامُ ثَلَٰثَةِ أَيَّامٖ فِي ٱلۡحَجِّ وَسَبۡعَةٍ إِذَا رَجَعۡتُمۡۗ تِلۡكَ عَشَرَةٞ كَامِلَةٞۗ ذَٰلِكَ لِمَن لَّمۡ يَكُنۡ أَهۡلُهُۥ حَاضِرِي ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِۚ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ ١٩٦
Завершайте хадж и малое паломничество во имя Аллаха. Если вы будете задержаны, то принесите в жертву то, что сможете. Не брейте ваши головы, пока жертвенные животные не достигнут места заклания. А если кто из вас болен или из-за головы своей испытывает страдания, то он должен в качестве искупления поститься, или раздать милостыню, или принести жертву. Если же вы находитесь в безопасности, то всякий, кто совершает малое паломничество и прерываемый хадж, должен принести в жертву то, что сможет. Если же он не сможет сделать этого, то он должен поститься три дня во время хаджа и семь дней после его окончания - всего десять дней. Это распространяется на тех, чья семья не живет в Заповедной мечети. Бойтесь же Аллаха и знайте, что Аллах суров в наказании.
अल्लाह तआला की प्रसन्नता की तलाश में, ह़ज्ज और उम्रा संपूर्ण रूप से अदा करो। यदि बीमारी या दुश्मन या इसी प्रकार के अन्य कारणों से उन्हें पूरा करने से तुम्हें रोक दिया जाए; तो तुम्हें अपने एह़राम से हलाल होने के लिए - ऊँट या गाय अथवा बकरी में से - जो भी क़ुर्बानी का जानवर उपलब्ध हो, उसे ज़बह़ करना होगा। तथा उस समय तक अपने सिर न मुँडाओ या बाल न कटाओ, जब तक क़ुर्बानी उस स्थान पर न पहुँच जाए, जहाँ उसे ज़बह करना हलाल है। यदि उसे ह़रम पहुँचने से रोक दिया जाए, तो वहीं ज़बह़ कर दिया जाए, जहाँ उसे रोक दिया गया है। यदि ह़रम से नहीं रोका गया है, तो हरम में क़ुर्बानी के दिन और उसके बाद 'तशरीक़ के दिनों' में ज़बह किया जाना चाहिए। फिर तुममें से जो व्यक्ति बीमार हो, अथवा उसके सिर के बालों में कोई तकलीफ़ हो, जैसे जूँ आदि, और इसके कारण वह अपना सिर मुँडा ले, तो उसपर कोई गुनाह नहीं है। लेकिन उसके बदले उसे फ़िदया अदा करना पड़ेगा। फ़िदया के तौर पर या तो तीन रोज़े रखे, या ह़रम के निर्धनों में से तीन निर्धनों को खाना खिलाए, या एक बकरी ज़बह करके हरम के ग़रीबों में बाँट दे। फिर यदि तुम्हें कोई भय न हो, तो तुममें से जो व्यक्ति ह़ज्ज के महीनों में उम्रा अदा करने के बाद एह़राम खोलना चाहे और उसी साल ह़ज्ज का एहराम बाँधने तक उन वस्तुओं से लाभान्वित होना चाहे, जो एह़राम की अवस्था में हराम हैं; तो जो कुछ उसके पास उपलब्ध हो उसे ज़बह करे : एक बकरी ज़बह करे अथवा एक ऊँट या गाय में सात आदमी शरीक हो जाएँ। यदि वह क़ुर्बानी न कर सके, तो उसके बदले ह़ज्ज के दिनों में तीन रोज़े रखे और सात रोज़े अपने घर वापस आने के बाद रखे, ताकि कुल दस दिन पूरे हो जाएँ। क़ुर्बानी अथवा उसकी शक्ति न होने की स्थिति में रोज़े की अनिवार्यता के साथ उम्रा का यह लाभ उठाना उस व्यक्ति के लिए है, जो ह़रम का निवासी और हरम के आस-पास रहने वाला न हो। तथा अल्लाह की शरीयत का अनुसरण करके और उसकी सीमाओं का सम्मान करके उससे डरो और जान लो कि अल्लाह अपने आदेशों का उल्लंघन करने वालों को कठोर दंड देने वाला है।
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ٱلۡحَجُّ أَشۡهُرٞ مَّعۡلُومَٰتٞۚ فَمَن فَرَضَ فِيهِنَّ ٱلۡحَجَّ فَلَا رَفَثَ وَلَا فُسُوقَ وَلَا جِدَالَ فِي ٱلۡحَجِّۗ وَمَا تَفۡعَلُواْ مِنۡ خَيۡرٖ يَعۡلَمۡهُ ٱللَّهُۗ وَتَزَوَّدُواْ فَإِنَّ خَيۡرَ ٱلزَّادِ ٱلتَّقۡوَىٰۖ وَٱتَّقُونِ يَٰٓأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ ١٩٧
Хадж совершается в известные месяцы. Кто намеревается совершить хадж в эти месяцы, тот не должен вступать в половую близость, совершать грехи и вступать в споры во время хаджа. Что бы вы ни сделали доброго, Аллах знает об этом. Берите с собой припасы, но лучшим припасом является богобоязненность. Бойтесь же Меня, о обладающие разумом!
ह़ज्ज का समय कुछ ज्ञात महीने हैं, जो शव्वाल के महीने से शुरू होते हैं और ज़ुल-ह़िज्जा के दस दिनों के साथ समाप्त हो जाते हैं। जो व्यक्ति इन महीनों में अपने आपको ह़ज्ज के लिए बाध्य कर ले और उसका एहराम बाँध ले; उसके लिए संभोग और संभोग पूर्व क्रीड़ाएँ ह़राम हैं। तथा समय और जगह की महानता के कारण, उसके लिए पाप करके अल्लाह के आज्ञापालन से निकलने का निषेध (दोष) बढ़ जाता है। इसी तरह उसके लिए ऐसी बहस (वाद-विवाद) में पड़ना भी हराम है, जो क्रोध और झगड़े की ओर ले जाती है। तथा तुम जो भी अच्छा कार्य करोगे, अल्लाह उसे जान लेगा और तुम्हें उसका बदला प्रदान करेगा। तथा खाने-पीने की ज़रूरत की चीजें लेकर ह़ज्ज की अदायगी में मदद हासिल करो और जान लो कि तुम्हारे सभी मामलों में तुम्हारी मदद के लिए सबसे अच्छी चीज़ अल्लाह का तक़्वा (डर) है। अतः ऐ स्वस्थ बुद्धि वालो! मेरी आज्ञाओं का पालन करके और मेरे निषेधों से बचकर मुझसे डरो।
Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии