Аль-МухтасарАль‑Анбия · 21:106–112

Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди

Аль-Анбия 21:106–112

21:106Страница 331

إِنَّ فِي هَٰذَا لَبَلَٰغٗا لِّقَوۡمٍ عَٰبِدِينَ ١٠٦

Воистину, в этом - послание для тех, кто поклоняется.

निःसंदेह हमारी उतारी हुई इस नसीहत में, उन लोगों के लिए लाभ और पर्याप्तता है, जो अपने रब के बताए हुए तरीक़े के अनुसार उसकी इबादत करने वाले हैं। क्योंकि वही लोग हैं जो इससे लाभान्वित होते हैं।

21:107Страница 331

وَمَآ أَرۡسَلۡنَٰكَ إِلَّا رَحۡمَةٗ لِّلۡعَٰلَمِينَ ١٠٧

Мы отправили тебя только в качестве милости к мирам.

और (ऐ मुह़म्मद!) हमने आपको समस्त मख़लूक़ के लिए दया बनाकर भेजा है, क्योंकि आप लोगों को सीधा रास्ता दिखाने और उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने के लिए बड़े उत्सुक हैं।

21:108Страница 331

قُلۡ إِنَّمَا يُوحَىٰٓ إِلَيَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ فَهَلۡ أَنتُم مُّسۡلِمُونَ ١٠٨

Скажи: «Мне внушено в откровении, что ваш Бог - Бог Единственный. Не станете ли вы мусульманами?».

(ऐ रसूल!) मेरी ओर, मेरे पालनहार की तरफ़ से, केवल यही वह़्य की जाती है कि तुम्हारा सच्चा पूज्य केवल एक पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है। इसलिए उसपर ईमान लाओ और उसकी आज्ञा का पालन करो।

21:109Страница 331

فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقُلۡ ءَاذَنتُكُمۡ عَلَىٰ سَوَآءٖۖ وَإِنۡ أَدۡرِيٓ أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٞ مَّا تُوعَدُونَ ١٠٩

Если они отвернутся, то скажи: «Я предупреждаю всех вас в равной мере, и я не знаю, рано или поздно настанет то, что вам обещано.

फिर अगर ये लोग उस संदेश से मुँह फेरें जो आप उनके पास लाए हैं, तो (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मैंने तुम्हें बता दिया है कि मैं और तुम अलगाव के एक समान मामले पर हैं। और मुझे नहीं पता कि अल्लाह ने अपनी जिस यातना का वादा किया है, वह तुम पर कब आएगी।

21:110Страница 331

إِنَّهُۥ يَعۡلَمُ ٱلۡجَهۡرَ مِنَ ٱلۡقَوۡلِ وَيَعۡلَمُ مَا تَكۡتُمُونَ ١١٠

Воистину, Он ведает о словах, которые произносят вслух, и ведает о том, что вы утаиваете.

निःसंदेह अल्लाह वह बात जानता है जो तुम खुल्लम-खुल्ला कहते हो और उसे भी जानता है जो तुम छिपाते हो। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

21:111Страница 331

وَإِنۡ أَدۡرِي لَعَلَّهُۥ فِتۡنَةٞ لَّكُمۡ وَمَتَٰعٌ إِلَىٰ حِينٖ ١١١

Я не знаю, может быть, это - искушение для вас или же возможность пользоваться благами до определенного времени».

मुझे नहीं पता शायद तुम्हें यातना देने में देरी करना, तुम्हारे लिए एक परीक्षा, ढील (प्रलोभन) और अल्लाह के ज्ञान में एक निर्धारित अवधि के लिए आपको लाभ उठाने का अवसर देना हो; ताकि तुम अपने कुफ़्र और गुमराही में अत्यधिक हो जाओ।

21:112Страница 331

قَٰلَ رَبِّ ٱحۡكُم بِٱلۡحَقِّۗ وَرَبُّنَا ٱلرَّحۡمَٰنُ ٱلۡمُسۡتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ ١١٢

Пророк сказал: «Господи! Рассуди по справедливости. У нашего Милостивого Господа надо просить помощи против того, что вы приписываете».

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा : ऐ मेरे रब! हमारे बीच और हमारे इस कुफ़्र पर क़ायम रहने वाले समुदाय के बीच सच्चे फैसले के साथ निर्णय कर दे। और हम तुम्हारे इनकार और झुठलाने पर अपने अत्यंत दयावान् पालनहार ही की सहायता माँगते हैं।

Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии

Содержание

Аят аль-Курси36Аль-Кахфстр. 42джуз 15Бухари 1Муслим 2999

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