Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди
Ан-Нур 24:39–64
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وَٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَعۡمَٰلُهُمۡ كَسَرَابِۭ بِقِيعَةٖ يَحۡسَبُهُ ٱلظَّمۡـَٔانُ مَآءً حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَهُۥ لَمۡ يَجِدۡهُ شَيۡـٔٗا وَوَجَدَ ٱللَّهَ عِندَهُۥ فَوَفَّىٰهُ حِسَابَهُۥۗ وَٱللَّهُ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ ٣٩
А деяния неверующих подобны мареву в пустыне, которое жаждущий принимает за воду. Когда он подходит к нему, то ничего не находит. Он находит вблизи себя Аллаха, который воздает ему сполна по его счету. Аллах скор в расчете.
और जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया, उनके किए हुए कर्मों का कोई प्रतिफल नहीं है। जिस तरह कि किसी निचली भूमि में नज़र आने वाला सराब (मरीचिका) होता है, जिसे प्यासा आदमी देखकर यह सोचता है कि वह पानी है। चुनाँचे वह उसकी ओर चल पड़ता है। यहाँ तक कि जब वहाँ आकर खड़ा होता है, तो वहाँ पानी बिलकुल नहीं पाता। इसी तरह, एक काफ़िर यह सोचता है कि उसके कर्मों से उसे लाभ होगा, यहाँ तक कि जब वह मर जाएगा और दोबारा उठाया जाएगा, तो वह उनका प्रतिफल नहीं पाएगा। और वह अपने रब को अपने समक्ष पाएगा। जो उसे उसके किए हुए कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा। और अल्लाह बहुत जल्द हिसाब करने वाला है।
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أَوۡ كَظُلُمَٰتٖ فِي بَحۡرٖ لُّجِّيّٖ يَغۡشَىٰهُ مَوۡجٞ مِّن فَوۡقِهِۦ مَوۡجٞ مِّن فَوۡقِهِۦ سَحَابٞۚ ظُلُمَٰتُۢ بَعۡضُهَا فَوۡقَ بَعۡضٍ إِذَآ أَخۡرَجَ يَدَهُۥ لَمۡ يَكَدۡ يَرَىٰهَاۗ وَمَن لَّمۡ يَجۡعَلِ ٱللَّهُ لَهُۥ نُورٗا فَمَا لَهُۥ مِن نُّورٍ ٤٠
Или же они подобны мраку в глубине морской пучины. Его покрывает волна, над которой находится другая волна, над которой находится облако. Один мрак поверх другого! Если он вытянет свою руку, то не увидит ее. Кому Аллах не даровал света, тому не будет света.
या उनके कर्म एक गहरे सागर में अँधेरों की तरह हैं, जिस (सागर) के ऊपर एक लहर हो, उस लहर के ऊपर एक और लहर हो, (तथा) उसके ऊपर बादल हो, जो तारों को ढाँप ले, जिनसे वह मार्ग पा सकता है। इस तरह, परत दर परत अंधेरे हों। इन अंधेरों में पड़ा हुआ इनसान अगर अपना हाथ निकाले, तो अँधेरे की तीव्रता के कारण शायद ही वह उसे देख सके। यही हाल काफ़िर का है। उसपर अज्ञानता, संदेह, भ्रम तथा हृदय पर मुहर के अँधेरे परत-दर-परत जमे हुए हैं। और जिसे अल्लाह गुमराही से निकालकर मार्गदर्शन और अपनी किताब का ज्ञान न प्रदान करे, तो उसके पास कोई मार्गदर्शन नहीं है, जिसके द्वारा वह मार्ग पा सके, और न ही कोई पुस्तक है, जिसके द्वारा वह प्रकाश प्राप्त कर सके।
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أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يُسَبِّحُ لَهُۥ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَٱلطَّيۡرُ صَٰٓفَّٰتٖۖ كُلّٞ قَدۡ عَلِمَ صَلَاتَهُۥ وَتَسۡبِيحَهُۥۗ وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِمَا يَفۡعَلُونَ ٤١
Разве ты не видел, что Аллаха славят те, кто на небесах и на земле, а также птицы с распростертыми крыльями? Каждый знает свою молитву и свое славословие. Аллах знает о том, что они совершают.
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि आकाशों और धरती में जो भी प्राणी हैं, सब अल्लाह की पवित्रता बयान करते हैं, तथा पक्षी हवा में अपने पंख फैलाए उसकी पवित्रता का गान करते हैं। इन प्राणियों में से जो नमाज़ पढ़ते हैं, जैसे इनसान, उनकी नमाज़ को तथा इनमें से जो पवित्रता का गान करते हैं, जैसे पक्षी, उनके पवित्रता गान को अल्लाह ने जान लिया है। और अल्लाह उसे पूरी तरह जानने वाला है, जो वे करते हैं। उनके कार्यों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
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وَلِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ وَإِلَى ٱللَّهِ ٱلۡمَصِيرُ ٤٢
Аллаху принадлежит власть над небесами и землей, и к Аллаху предстоит прибытие.
आकाशों और धरती का राज्य अकेले अल्लाह ही के लिए है। तथा क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए अकेले उसी की ओर लौटकर जाना है।
24:43Страница 355
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ يُزۡجِي سَحَابٗا ثُمَّ يُؤَلِّفُ بَيۡنَهُۥ ثُمَّ يَجۡعَلُهُۥ رُكَامٗا فَتَرَى ٱلۡوَدۡقَ يَخۡرُجُ مِنۡ خِلَٰلِهِۦ وَيُنَزِّلُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مِن جِبَالٖ فِيهَا مِنۢ بَرَدٖ فَيُصِيبُ بِهِۦ مَن يَشَآءُ وَيَصۡرِفُهُۥ عَن مَّن يَشَآءُۖ يَكَادُ سَنَا بَرۡقِهِۦ يَذۡهَبُ بِٱلۡأَبۡصَٰرِ ٤٣
Разве ты не видишь, что Аллах гонит облака, потом соединяет их, потом превращает их в кучу облаков, и ты видишь, как из расщелин ее изливается ливень. Он низвергает град с гор, которые на небе. Он поражает им, кого пожелает, и отвращает его, от кого пожелает. Блеск их молний готов унести зрение.
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह बादल को चलाता है। फिर उसके विभिन्न भागों को एक-दूसरे से मिला देता है। फिर उसे जमाकर तह-ब-तह कर देता है। फिर तुम देखते हो कि बारिश बादल के अंदर से निकल रही है। और वह आकाश की दिशा से, उसमें घनीभूत बादलों से जो अपनी भव्यता में पहाड़ों जैसा दिखते हैं, कंकड़ जैसे पानी के जमे हुए टुकड़े (ओले) उतारता है, फिर उस ओले को अपने बंदों में से जिसपर चाहता है, उतारता है और उनमें से जिससे चाहता है, उसे फेर देता है। बादल की बिजली की चमक इतनी तेज़ होती है कि लगता है कि आँखों को उचक ले जाएगी।
24:44Страница 356
يُقَلِّبُ ٱللَّهُ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبۡرَةٗ لِّأُوْلِي ٱلۡأَبۡصَٰرِ ٤٤
Аллах чередует день и ночь. Воистину, в этом - назидание для обладающих зрением.
अल्लाह रात और दिन को लंबे और छोटे तथा आगे और पीछे करता रहता है। निश्चय अल्लाह के पालनहार होने के प्रमाणों पर आधारित इन उल्लिखित निशानियों में उन लोगों के लिए शिक्षा (उपदेश) है, जो अल्लाह की शक्ति और उसके एकत्व की समझ-बूझ रखने वाले हैं।
24:45Страница 356
وَٱللَّهُ خَلَقَ كُلَّ دَآبَّةٖ مِّن مَّآءٖۖ فَمِنۡهُم مَّن يَمۡشِي عَلَىٰ بَطۡنِهِۦ وَمِنۡهُم مَّن يَمۡشِي عَلَىٰ رِجۡلَيۡنِ وَمِنۡهُم مَّن يَمۡشِي عَلَىٰٓ أَرۡبَعٖۚ يَخۡلُقُ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ٤٥
Аллах сотворил все живые существа из воды. Среди них есть такие, которые ползают на брюхе, такие, которые ходят на двух ногах, и такие, которые ходят на четырех. Аллах творит то, что пожелает. Воистину, Аллах способен на всякую вещь.
अल्लाह ने धरती पर चलने वाले प्रत्येक जीवधारी को वीर्य से पैदा किया। चुनाँचे उनमें से कुछ अपने पेट के बल रेंगकर चलते हैं, जैसे साँप, और उनमें से कुछ दो पैरों पर चलते हैं, जैसे मनुष्य और पक्षी, तथा उनमें से कुछ चार पैरों पर चलते हैं, जैसे मवेशी। अल्लाह उनमें से जो चाहे, पैदा करता है, जो उसने उल्लेख किया है और जो उसने उल्लेख नहीं किया है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।
24:46Страница 356
لَّقَدۡ أَنزَلۡنَآ ءَايَٰتٖ مُّبَيِّنَٰتٖۚ وَٱللَّهُ يَهۡدِي مَن يَشَآءُ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ٤٦
Мы уже ниспослали ясные знамения, и Аллах наставляет на прямой путь, кого пожелает.
हमने मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर सत्य के मार्ग को दर्शाने वाली स्पष्ट आयतें उतारी हैं। और अल्लाह जिसको चाहता है, टेढ़ापन से रहित सीधे रास्ते पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करता है। अंततः वह रास्ता उसे जन्नत में ले जाता है।
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وَيَقُولُونَ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَبِٱلرَّسُولِ وَأَطَعۡنَا ثُمَّ يَتَوَلَّىٰ فَرِيقٞ مِّنۡهُم مِّنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَۚ وَمَآ أُوْلَٰٓئِكَ بِٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٤٧
Они (лицемеры) говорят: «Мы уверовали в Аллаха и Посланника и повинуемся». Но после этого часть их отворачивается, и они не являются верующими.
मुनाफ़िक़ लोग कहते हैं : हम अल्लाह पर ईमान लाए और रसूल पर ईमान लाए, तथा हमने अल्लाह का आज्ञापालन किया और रसूल का आज्ञापालन किया। फिर उनमें से एक समूह मुँह फेर लेता है। चुनाँचे अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने और उनकी बात मानने का दावा करने के बाद, वे अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने के आदेश में अल्लाह और उसके रसूल का पालन नहीं करते हैं। और ये अल्लाह और उसके रसूल के आज्ञापालन से मुँह फेरने वाले, मोमिन नहीं हैं, भले ही वे दावा करें कि वे मोमिन हैं।
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وَإِذَا دُعُوٓاْ إِلَى ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ لِيَحۡكُمَ بَيۡنَهُمۡ إِذَا فَرِيقٞ مِّنۡهُم مُّعۡرِضُونَ ٤٨
Когда их зовут к Аллаху и Его Посланнику, чтобы он рассудил их, часть из них отворачивается.
और जब इन मुनाफ़िक़ों को अल्लाह और उसके रसूल की ओर बुलाया जाता है, ताकि रसूल उनके विवाद का निर्णय कर दें, तो अचानक वे अपने निफ़ाक़ के कारण आपके निर्णय से मुँह मोड़ने वाले होते हैं।
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وَإِن يَكُن لَّهُمُ ٱلۡحَقُّ يَأۡتُوٓاْ إِلَيۡهِ مُذۡعِنِينَ ٤٩
Будь они правы, они покорно явились бы к нему.
और अगर वे जानते हैं कि अधिकार उनका है, और यह कि रसूल उनके पक्ष में फैसला करेंगे, तो आपके पास बड़े आज्ञाकारी बनकर आते हैं।
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أَفِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ أَمِ ٱرۡتَابُوٓاْ أَمۡ يَخَافُونَ أَن يَحِيفَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمۡ وَرَسُولُهُۥۚ بَلۡ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ ٥٠
Неужели их сердца поражены недугом? Или же они сомневаются? Или же они опасаются того, что Аллах и Его Посланник несправедливо осудят их? О нет! Они сами поступают несправедливо!
क्या इन लोगों के दिलों में कोई अपरिहार्य रोग है, या उनको इसमें संदेह है कि आप अल्लाह के रसूल हैं, या उन्हें इस बात का डर है कि अल्लाह और उसके रसूल फैसले में उनपर अत्याचार करेंगे? यह उपर्युक्त में से किसी के कारण नहीं है। बल्कि, उनके आपके फ़ैसले से उपेक्षा करने और आपसे दुश्मनी के कारण, उनके दिलों ही में बीमारी की वजह से है।
24:51Страница 356
إِنَّمَا كَانَ قَوۡلَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ إِذَا دُعُوٓاْ إِلَى ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ لِيَحۡكُمَ بَيۡنَهُمۡ أَن يَقُولُواْ سَمِعۡنَا وَأَطَعۡنَاۚ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ ٥١
Когда верующих зовут к Аллаху и Его Посланнику, чтобы он рассудил их, они говорят: «Слушаем и повинуемся!». Именно они являются преуспевшими.
ईमान वालों की बात, जब वे अल्लाह की ओर और रसूल की ओर बुलाए जाएँ, ताकि वह उनके बीच निर्णय करें, केवल यह होती है कि वे कहते हैं : हमने उनकी बात सुनी और उनके आदेश का पालन किया। तथा इन गुणों से विशेषित लोग ही दुनिया और आख़िरत में सफल होने वाले हैं।
24:52Страница 356
وَمَن يُطِعِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَخۡشَ ٱللَّهَ وَيَتَّقۡهِ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡفَآئِزُونَ ٥٢
Те, которые повинуются Аллаху и Его Посланнику, боятся Аллаха и исповедуют богобоязненность, обрели успех.
जो अल्लाह का और उसके रसूल का आज्ञापालन करे, तथा उनके निर्णय को मान ले, और गुनाहों के परिणाम से भय रखे, और अल्लाह के आदेश का पालन करके और उसके निषेध से बचकर, उसकी यातना से डरे, तो केवल यही लोग दुनिया और आख़िरत की भलाइयों को प्राप्त कर सफल होने वाले हैं।
24:53Страница 356
۞ وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ لَئِنۡ أَمَرۡتَهُمۡ لَيَخۡرُجُنَّۖ قُل لَّا تُقۡسِمُواْۖ طَاعَةٞ مَّعۡرُوفَةٌۚ إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ ٥٣
Они (лицемеры) приносят величайшие клятвы именем Аллаха о том, что если бы ты приказал им, то они непременно выступили бы в поход. Скажи: «Не клянитесь! Такая покорность хорошо известна. Воистину, Аллаху ведомо о том, что вы совершаете».
मुनाफ़िक़ों ने अपनी सबसे मज़बूत क़समें खाईं, जितनी वे खा सकते थे : यदि आप उनको जिहाद के लिए निकलने को कहें, तो निश्चय वे अवश्य निकलेंगे। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम क़समें मत खाओ। क्योंकि तुम्हारे झूठ का हाल मालूम है और तुम्हारा तथाकथित आज्ञापालन सर्वज्ञात है। तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह उससे अवगत है। तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं रह सकता, चाहे तुम उन्हें कितना ही छिपा लो।
24:54Страница 357
قُلۡ أَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَۖ فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَإِنَّمَا عَلَيۡهِ مَا حُمِّلَ وَعَلَيۡكُم مَّا حُمِّلۡتُمۡۖ وَإِن تُطِيعُوهُ تَهۡتَدُواْۚ وَمَا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ ٥٤
Скажи: «Повинуйтесь Аллаху и повинуйтесь Посланнику». Если вы отвернетесь, то ведь он отвечает за то, что возложено на него, а вы отвечаете за то, что возложено на вас. Но если вы подчинитесь ему, то последуете прямым путем. На Посланника возложена только ясная передача откровения.
(ऐ रसूल!) आप इन मुनाफ़िक़ों से कह दें कि तुम बाहर और भीतर दोनों तरह से अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। अगर तुम उनके आज्ञापालन से मुँह फेरोगे, जिसका तुम्हें आदेश दिया गया है, तो रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसकी उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। तथा तुम्हारा दायित्व आज्ञापालन करना और रसूल के लाए हुए धर्म के अनुसार कार्य करना है। और अगर तुम उनकी बात मानकर उनके आदेशों का पालन करोगे और उनकी मना की हुई बातों से दूर रहोगे, तो सच्चा मार्ग प्राप्त कर लोगे। और रसूल का दायित्व केवल स्पष्ट रूप से पहुँचा देना है। उसका काम तुम्हें सही मार्ग पर लगा देना और उसपर मजबूर करना नहीं है।
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وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمۡ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَيَسۡتَخۡلِفَنَّهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ كَمَا ٱسۡتَخۡلَفَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ وَلَيُمَكِّنَنَّ لَهُمۡ دِينَهُمُ ٱلَّذِي ٱرۡتَضَىٰ لَهُمۡ وَلَيُبَدِّلَنَّهُم مِّنۢ بَعۡدِ خَوۡفِهِمۡ أَمۡنٗاۚ يَعۡبُدُونَنِي لَا يُشۡرِكُونَ بِي شَيۡـٔٗاۚ وَمَن كَفَرَ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡفَٰسِقُونَ ٥٥
Аллах обещал тем из вас, которые уверовали и совершали праведные деяния, что Он непременно сделает их наместниками на земле, подобно тому, как Он сделал наместниками тех, кто был до них. Он непременно одарит их возможностью исповедовать их религию, которую Он одобрил для них, и сменит их страх на безопасность. Они поклоняются Мне и не приобщают сотоварищей ко Мне. Те же, которые после этого откажутся уверовать, являются нечестивцами.
अल्लाह ने तुममें से ईमान वालों और सुकर्म करने वालों से वादा किया है कि वह उनके शत्रुओं के खिलाफ उनकी सहायता करेगा तथा उनको धरती में ख़लीफ़ा बनाएगा, जिस तरह कि उनसे पहले के ईमान वालों को धरती में ख़लीफ़ा बनाया था। और उनसे यह वादा किया है कि उनके उस धर्म को जिसे उनके लिए पसंद किया है (और वह इस्लाम धर्म है), धरती में प्रभुत्व एवं शक्ति प्रदान कर देगा। तथा उनसे यह भी वादा किया है कि उन्हें उनके भय के पश्चात् शांति प्रदान कर देगा। वे केवल मेरी ही इबादत करेंगे, मेरे साथ किसी को साझी नहीं बनाएँगे। और जिसने इन नेमतों के बाद कुफ़्र किया, तो वही लोग अल्लाह के आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।
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وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ ٥٦
Совершайте намаз, выплачивайте закят и повинуйтесь Посланнику, - быть может, вы будете помилованы.
संपूर्ण तरीक़े से नमाज़ अदा करो, अपने धन की ज़कात दो, और रसूल की आज्ञा का पालन करते हुए उस चीज़ को करो, जिसका उन्होंने आदेश दिया है और उस चीज़ को त्याग कर दो, जिससे उन्होंने मना किया है; इस आशा में कि तुम्हें अल्लाह की दया प्राप्त हो।
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لَا تَحۡسَبَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مُعۡجِزِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ وَمَأۡوَىٰهُمُ ٱلنَّارُۖ وَلَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ ٥٧
Не думай, что неверующие могут спастись на земле. Их пристанищем будет Огонь. Как же скверно это место прибытия!
(ऐ रसूल!) आप उन लोगों को जिन्होंने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, हरगिज़ यह न समझें कि वे मुझसे बच निकलेंगे, यदि मैं उन्हें यातना से पीड़ित करना चाहूँ। और क़ियामत के दिन उनका ठिकाना जहन्नम है। और निश्चय उन लोगों का ठिकाना बहुत बुरा है, जिनका ठिकाना जहन्नम होगा।
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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لِيَسۡتَـٔۡذِنكُمُ ٱلَّذِينَ مَلَكَتۡ أَيۡمَٰنُكُمۡ وَٱلَّذِينَ لَمۡ يَبۡلُغُواْ ٱلۡحُلُمَ مِنكُمۡ ثَلَٰثَ مَرَّٰتٖۚ مِّن قَبۡلِ صَلَوٰةِ ٱلۡفَجۡرِ وَحِينَ تَضَعُونَ ثِيَابَكُم مِّنَ ٱلظَّهِيرَةِ وَمِنۢ بَعۡدِ صَلَوٰةِ ٱلۡعِشَآءِۚ ثَلَٰثُ عَوۡرَٰتٖ لَّكُمۡۚ لَيۡسَ عَلَيۡكُمۡ وَلَا عَلَيۡهِمۡ جُنَاحُۢ بَعۡدَهُنَّۚ طَوَّٰفُونَ عَلَيۡكُم بَعۡضُكُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ ٥٨
О те, которые уверовали! Пусть невольники, которыми овладели ваши десницы, и те, кто не достиг половой зрелости, спрашивают у вас разрешения войти в покои в трех случаях: до рассветного намаза, когда вы снимаете одежду в полдень и после вечернего намаза. Вот три времени наготы для вас. Ни на вас, ни на них нет греха за вход без разрешения, помимо этих случаев, ведь вы посещаете друг друга. Так Аллах разъясняет вам знамения. Аллах - Знающий, Мудрый.
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम्हारे ग़ुलाम, तुम्हारी लौंडियाँ और आज़ाद बच्चे, जो युवावस्था को न पहुँचे हों, तुमसे तीन समयों में अनुमति माँगें; फ़ज्र की नमाज़ से पहले, जो कि सोने के कपड़ों को उतारकर जागने के कपड़े पहनने का समय होता है, और दोपहर के समय, जब क़ैलूला के लिए तुम अपने कपड़े उतारते हो, और इशा की नमाज़ के बाद; क्योंकि यह तुम्हारे सोने तथा जागने के कपड़े उतारकर सोने के कपड़े पहनने का समय है। ये तीन समय, तुम्हारे लिए पर्दे के समय हैं। इन समयों में वे तुम्हारे पास तुम्हारी अनुमति के बिना नहीं आ सकते। इनके सिवा अन्य समयों में उनके बिना अनुमति लेकर आने में, न तुमपर कोई गुनाह है और न उनपर। वे तुम्हारे पास बहुत चक्कर लगाने वाले हैं, तुम एक-दूसरे के पास आते-जाते रहते हो। इसलिए उन्हें हर समय बिना अनुमति के प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता है। जिस तरह अल्लाह ने तुम्हारे लिए अनुमति लेने के नियमों को खोलकर बयान किया है, उसी तरह अल्लाह तुम्हारे लिए उन आयतों को खोलकर बयान करता है, जो तुम्हारे लिए उसके निर्धारित किए हुए नियमों को दर्शाती हैं। तथा अल्लाह अपने बंदों के हितों को भली-भाँति जानता है, उनके लिए जो नियम निर्धारित करता है, उसमें पूर्ण हिकमत वाला है।
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وَإِذَا بَلَغَ ٱلۡأَطۡفَٰلُ مِنكُمُ ٱلۡحُلُمَ فَلۡيَسۡتَـٔۡذِنُواْ كَمَا ٱسۡتَـٔۡذَنَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمۡ ءَايَٰتِهِۦۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ ٥٩
Когда дети из вашего числа достигнут половой зрелости, то пусть они спрашивают разрешения, как спрашивают разрешения те, кто старше их. Так Аллах разъясняет вам Свои знамения. Аллах - Знающий, Мудрый.
और जब तुममें से बच्चे युवावस्था को पहुँच जाएँ, तो उन्हें उन सभी समयों में घरों में प्रवेश करने के लिए अनुमति माँगनी चाहिए, जैसा कि पहले वयस्कों के बारे में बताया गया है। जिस तरह अल्लाह ने तुम्हारे लिए अनुमति लेने के प्रावधान को खोलकर बयान किया है, उसी तरह अल्लाह तुम्हारे लिए अपनी आयतों को खोलकर बयान करता है। तथा अल्लाह अपने बंदों के हितों को भली-भाँति जानने वाला, जो कुछ उनके लिए नियम निर्धारित करता है, उसमें पूर्ण हिकमत वाला है।
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وَٱلۡقَوَٰعِدُ مِنَ ٱلنِّسَآءِ ٱلَّٰتِي لَا يَرۡجُونَ نِكَاحٗا فَلَيۡسَ عَلَيۡهِنَّ جُنَاحٌ أَن يَضَعۡنَ ثِيَابَهُنَّ غَيۡرَ مُتَبَرِّجَٰتِۭ بِزِينَةٖۖ وَأَن يَسۡتَعۡفِفۡنَ خَيۡرٞ لَّهُنَّۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٞ ٦٠
Нет греха на престарелых женщинах, которые не надеются на замужество, если они снимут верхнюю одежду, не показывая своей красы. Но воздерживаться от этого лучше для них. Аллах - Слышащий, Знающий.
वे वृद्ध महिलाएँ जो अपने बुढ़ापे के कारण मासिक धर्म और गर्भावस्था से रहित होकर बैठ चुकी हैं, जो कि शादी की इच्छा नहीं रखती हैं, यदि वे अपने कुछ कपड़े, जैसे चादर और चेहरे का नकाब, उतारकर रख देती हैं, तो उनपर कोई गुनाह नहीं है। लेकिन शर्त यह है कि छिपी हुई ज़ीनत को ज़ाहिर न करें, जिसे छिपाने का आदेश दिया गया है। फिर भी उन कपड़ों को उतारने से बचना ही उनके हक़ में बेहतर है, ताकि पर्दा और पाक-दामनी का अधिक ख़याल रखा जा सके। अल्लाह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे कर्मों को जानने वाला है। उससे इनमें से कोई चीज़ छिप नहीं सकती और वह तुम्हें इनका बदला देगा।
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لَّيۡسَ عَلَى ٱلۡأَعۡمَىٰ حَرَجٞ وَلَا عَلَى ٱلۡأَعۡرَجِ حَرَجٞ وَلَا عَلَى ٱلۡمَرِيضِ حَرَجٞ وَلَا عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمۡ أَن تَأۡكُلُواْ مِنۢ بُيُوتِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ ءَابَآئِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ أُمَّهَٰتِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ إِخۡوَٰنِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ أَخَوَٰتِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ أَعۡمَٰمِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ عَمَّٰتِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ أَخۡوَٰلِكُمۡ أَوۡ بُيُوتِ خَٰلَٰتِكُمۡ أَوۡ مَا مَلَكۡتُم مَّفَاتِحَهُۥٓ أَوۡ صَدِيقِكُمۡۚ لَيۡسَ عَلَيۡكُمۡ جُنَاحٌ أَن تَأۡكُلُواْ جَمِيعًا أَوۡ أَشۡتَاتٗاۚ فَإِذَا دَخَلۡتُم بُيُوتٗا فَسَلِّمُواْ عَلَىٰٓ أَنفُسِكُمۡ تَحِيَّةٗ مِّنۡ عِندِ ٱللَّهِ مُبَٰرَكَةٗ طَيِّبَةٗۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُونَ ٦١
Не будет грехом для слепого, не будет грехом для хромого, не будет грехом для больного и для вас самих, если вы будете есть в ваших домах, или в домах ваших отцов, или в домах ваших матерей, или в домах ваших братьев, или в домах ваших сестер, или в домах ваших дядей по отцу, или в домах ваших теток по отцу, или в домах ваших дядей по матери, или в домах ваших теток по матери, или в тех домах, ключи которых в вашем распоряжении, или в доме вашего друга. Не будет грехом для вас, если вы будет есть вместе или в отдельности. Когда вы входите в дома, то приветствуйте себя (друг друга) приветствием от Аллаха, благословенным, благим. Так Аллах разъясняет вас знамения, - быть может, вы уразумеете.
उस अंधे पर कोई पाप नहीं जिसने अपनी दृष्टि खो दी हो, न तो लंगड़े पर कोई पाप है, और न बीमार ही पर कोई पाप है; अगर ये लोग कोई ऐसा शरई कार्य छोड़ दें, जिसे अंजाम देने में वे सक्षम न हों, जैसे अल्लाह के मार्ग में जिहाद करना। तथा (ऐ मोमिनो!) तुमपर अपने घरों से खाने में कोई पाप नहीं है, जिसमें तुम्हारे बच्चों के घर भी शामिल हैं। और न ही तुम्हारे पिताओं, या तुम्हारी माताओं, या तुम्हारे भाइयों, या तुम्हारी बहनों, या तुम्हारे चाचाओं, या तुम्हारी फूफियों, या तुम्हारे मामाओं, या तुम्हारी ख़ालाओं के घरों से खाने में कोई गुनाह है, या उन घरों से जिनके संरक्षण की तुम्हें ज़िम्मेदारी सौंपी गई हो, जैसे बाग़ का चौकीदार। तथा अपने दोस्त के घरों से खाने में कोई गुनाह नहीं है, क्योंकि वह आमतौर पर इससे प्रसन्न होता है। तुमपर कोई गुनाह नहीं है कि सब एक साथ मिलकर खाओ या अलग-अलग। फिर जब तुम उपर्युक्त घरों में या उनके सिवा अन्य घरों में प्रवेश करो, तो उनमें मौजूद लोगों को यह कहकर सलाम करो : السلام عليكم (तुमपर शांति हो)। अगर उनमें कोई न हो, तो अपने आप को यह कहकर सलाम करो : السلام علينا وعلى عباد الله الصالحين (हमपर और अल्लाह के सत्कर्मी बंदों पर शांति हो)। यह अल्लाह की ओर से बरकत वाला सलाम है, जिसे उसने तुम्हारे लिए निर्धारित किया है, क्योंकि यह तुम्हारे बीच प्रेम और स्नेह को फैलाता है। यह पवित्र (अच्छा) है, इससे सुनने वाले की आत्मा प्रसन्न होती है। इस सूरत में उल्लिखित इस स्पष्टीकरण ही की तरह अल्लाह आयतों को स्पष्ट करता करता है, ताकि तुम उन्हें समझो और उनमें जो कुछ है, उसके अनुसार कार्य करो।
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إِنَّمَا ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَإِذَا كَانُواْ مَعَهُۥ عَلَىٰٓ أَمۡرٖ جَامِعٖ لَّمۡ يَذۡهَبُواْ حَتَّىٰ يَسۡتَـٔۡذِنُوهُۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَسۡتَـٔۡذِنُونَكَ أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦۚ فَإِذَا ٱسۡتَـٔۡذَنُوكَ لِبَعۡضِ شَأۡنِهِمۡ فَأۡذَن لِّمَن شِئۡتَ مِنۡهُمۡ وَٱسۡتَغۡفِرۡ لَهُمُ ٱللَّهَۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٦٢
Верующими являются только те, которые уверовали в Аллаха и Его Посланника. Когда они находятся рядом с ним по общему делу, то не уходят, пока не попросят у него разрешения. Воистину, те, которые просят у тебя разрешения, действительно являются верующими в Аллаха и Его Посланника. Если они попросят у тебя разрешения по поводу некоторых из своих дел, то разрешай тому из них, кому пожелаешь, и проси Аллаха простить их. Воистину, Аллах - Прощающий, Милосердный.
अपने ईमान में सच्चे मोमिन वही लोग हैं, जो अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूल पर ईमान लाए, और जब वे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ किसी ऐसे काम में हों, जो उन्हें मुसलमानों के हित के लिए एकजुट करता हो, तो उस समय तक वापस नहीं होते, जब तक आपसे वापसी की अनुमति न ले लें। निःसंदेह जो लोग (ऐ रसूल!) आपसे लौटते समय अनुमति माँगते हैं, वही लोग वास्तव में अल्लाह पर ईमान रखते हैं और उसके रसूल पर ईमान रखते हैं। अतः जब वे अपने हित के किसी काम के लिए आपसे अनुमति माँगें, तो आप उनमें से जिसे अनुमति देना चाहें, अनुमति दें। और उनके गुनाहों के लिए (अल्लाह से) क्षमा याचना करें। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों के पापों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
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لَّا تَجۡعَلُواْ دُعَآءَ ٱلرَّسُولِ بَيۡنَكُمۡ كَدُعَآءِ بَعۡضِكُم بَعۡضٗاۚ قَدۡ يَعۡلَمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ يَتَسَلَّلُونَ مِنكُمۡ لِوَاذٗاۚ فَلۡيَحۡذَرِ ٱلَّذِينَ يُخَالِفُونَ عَنۡ أَمۡرِهِۦٓ أَن تُصِيبَهُمۡ فِتۡنَةٌ أَوۡ يُصِيبَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ ٦٣
Не равняйте обращение к Посланнику среди вас с тем, как вы обращаетесь друг к другу. Аллах знает тех из вас, которые уходят украдкой под прикрытием. Пусть же остерегаются те, которые противятся его воле, как бы их не постигло искушение или не постигли их мучительные страдания.
(ऐ ईमान वालो!) अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का सम्मान करो। इसलिए जब आपको बुलाओ, तो आपके नाम से न बुलाओ, जैसे यह न कहो : ऐ मुहम्मद! इसी तरह आपके बाप के नाम से भी न बुलाओ, जैसे यह न कहो : ऐ अब्दुल्लाह के बेटे! जैसा कि तुम आपस में एक-दूसरे के साथ करते हो। बल्कि इस तरह कहो : ऐ अल्लाह के रसूल!, ऐ अल्लाह के नबी!, और जब वह तुम्हें किसी सामान्य कार्य के लिए बुलाएँ, तो तुम उनके बुलाने को आपस में एक-दूसरे को किसी महत्वहीन काम के लिए बुलाने की तरह न समझो। बल्कि उसका जवाब देने में जल्दी करो। अल्लाह उन लोगों को अच्छी तरह जानता है, जो तुममें से बिना अनुमति के चुपके से निकल जाते हैं। अतः उन लोगों को डरना चाहिए जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आदेश का उल्लंघन करते हैं कि अल्लाह उन्हें किसी विपत्ति और परीक्षण से पीड़ित न कर दे, या उन्हें दर्दनाक यातना से पीड़ित न कर दे, जिसे वे सहन न कर सकें।
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أَلَآ إِنَّ لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ قَدۡ يَعۡلَمُ مَآ أَنتُمۡ عَلَيۡهِ وَيَوۡمَ يُرۡجَعُونَ إِلَيۡهِ فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُواْۗ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمُۢ ٦٤
Воистину, Аллаху принадлежит то, что на небесах и на земле. Он знает ваше положение и тот день, когда они будут возвращены к Нему. Он поведает им о том, что они совершили. Аллаху известно о всякой вещи.
सुन लो! आकाशों और धरती में जो कुछ है, सबका पैदा करने वाला, मालिक और प्रबंध करने वाला अकेला अल्लाह है। (ऐ लोगो!) वह तुम्हारी स्थितियों को जानता है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं रहता। तथा क़ियामत के दिन (जब वे मृत्यु के बाद दोबारा जीवित होकर अल्लाह के पास लौटेंगे), तो वह उन्हें दुनिया में उनके किए हुए कार्यों से सूचित कर देगा। और अल्लाह सब कुछ जानता है। आकाशों में या धरती पर कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии