Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди
النمل
Ан-Намль
Муравьи · Мекканская · 93 аята
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طسٓۚ تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡقُرۡءَانِ وَكِتَابٖ مُّبِينٍ ١
Та. Син. Это - аяты Корана и ясного Писания,
(ता, सीन) सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। आपपर उतरने वाली ये आयतें क़ुरआन तथा एक स्पष्ट और असंदिग्ध पुस्तक की आयतें हैं। जो कोई भी इस (पुस्तक) पर विचार करता है, वह जान लेता है कि यह अल्लाह की ओर से है।
ये आयतें सत्य की ओर मार्गदर्शन करने वाली, उसकी ओर ले जाने वाली तथा अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखने वालों को ख़ुशख़बरी सुनाने वाली हैं।
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ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ يُوقِنُونَ ٣
которые совершают намаз, выплачивают закят и убеждены в Последней жизни.
जो पूर्णतम तरीक़े से नमाज़ अदा करते हैं, अपने माल की ज़कात निकाल कर उसके हक़दारों को देते हैं, तथा वे आख़िरत के सवाब और सज़ा पर विश्वास रखते हैं।
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إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمۡ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَهُمۡ يَعۡمَهُونَ ٤
Воистину, тем, которые не веруют в Последнюю жизнь, Мы представили их деяния прекрасными, и они блуждают в растерянности.
निःसंदेह जो काफ़िर आख़िरत तथा उसके सवाब और सज़ा पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके बुरे कामों को उनके लिए सुंदर बना दिया है। चुनाँचे वे उन्हें करते रहते हैं। इसलिए वे भटकते फिर रहे हैं, उन्हें सत्य या मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है।
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أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَهُمۡ سُوٓءُ ٱلۡعَذَابِ وَهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ هُمُ ٱلۡأَخۡسَرُونَ ٥
Они - те, которым уготованы злые мучения, а в Последней жизни они понесут наибольший убыток.
उक्त विशेषताओं वाले ही वे लोग हैं, जिनके लिए इस दुनिया में क़त्ल एवं क़ैद की बुरी यातना है, तथा वे आख़िरत में सबसे ज़्यादा घाटा उठाने वाले होंगे। क्योंकि वे क़ियामत के दिन खुद को और अपने परिवार को, उन्हें हमेशा के लिए जहन्नम का वासी बनाकर, घाटे में डाल देंगे।
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وَإِنَّكَ لَتُلَقَّى ٱلۡقُرۡءَانَ مِن لَّدُنۡ حَكِيمٍ عَلِيمٍ ٦
Воистину, ты получаешь Коран от Мудрого, Знающего.
और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आप अपने ऊपर उतरने वाले इस क़ुरआन को एक ऐसी हस्ती की ओर से प्राप्त कर रहे हैं, जो अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में पूर्ण हिकमत वाली है, सब कुछ जानने वाली है, उसके बंदों के हितों में से कोई भी वस्तु उससे छिपी नहीं है।
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إِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِأَهۡلِهِۦٓ إِنِّيٓ ءَانَسۡتُ نَارٗا سَـَٔاتِيكُم مِّنۡهَا بِخَبَرٍ أَوۡ ءَاتِيكُم بِشِهَابٖ قَبَسٖ لَّعَلَّكُمۡ تَصۡطَلُونَ ٧
Вот Муса (Моисей) сказал своей семье: «Воистину, я вижу огонь. Я принесу вам оттуда известие или горящую головню, чтобы вы могли согреться».
याद करो (ऐ रसूल!) जिस समय मूसा ने अपने घर वालों से कहा : निःसंदेह मैंने एक आग देखी है। मैं तुम्हारे पास उसे जलाने वाले से कोई ख़बर लाऊँगा, जिससे हमें रास्ते का पता चलेगा, अथवा तुम्हारे पास उससे आग का कोई अंगारा लेकर आऊँगा, ताकि तुम उसके द्वारा अपने आपको ठंड से गर्म कर सको।
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فَلَمَّا جَآءَهَا نُودِيَ أَنۢ بُورِكَ مَن فِي ٱلنَّارِ وَمَنۡ حَوۡلَهَا وَسُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٨
Когда он подошел туда, раздался глас: «Благословен тот, кто в огне, и тот, кто вокруг него. Пречист Аллах, Господь миров!
जब वह उस आग के स्थान पर पहुँचे, जो उन्होंने देखी थी, तो अल्लाह ने उन्हें पुकारा : बरकत वाला है वह जो इस आग में है, तथा जो इसके आस-पास फ़रिश्ते हैं। तथा सारे संसारों का पालनहार पवित्र और पाक है उन विशेषताओं से जो उसके योग्य नहीं हैं, जिनसे पथभ्रष्ट लोग उसे विशेषित करते हैं।
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يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّهُۥٓ أَنَا ٱللَّهُ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ٩
О Муса (Моисей)! Воистину, Я - Аллах, Могущественный, Мудрый.
अल्लाह ने उनसे कहा : ऐ मूसा! निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ। सब पर प्रभुत्वशाली हूँ, मुझे कोई पराजित नहीं कर सकता। अपनी रचना, नियति और विधान में पूर्ण हिकमत वाला हूँ।
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وَأَلۡقِ عَصَاكَۚ فَلَمَّا رَءَاهَا تَهۡتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنّٞ وَلَّىٰ مُدۡبِرٗا وَلَمۡ يُعَقِّبۡۚ يَٰمُوسَىٰ لَا تَخَفۡ إِنِّي لَا يَخَافُ لَدَيَّ ٱلۡمُرۡسَلُونَ ١٠
Брось свой посох!». Когда он увидел, как тот извивается, словно змея, то бросился бежать назад и не вернулся (или не обернулся). Аллах сказал: «О Муса (Моисей)! Не бойся, ибо посланникам нечего бояться, когда они находятся предо Мною.
और अपनी लाठी डाल दो। मूसा ने आदेश का पालन किया, लेकिन जब उसे साँप की तरह हिलते और रेंगते हुए देखा, तो उससे पीठ फेरकर भागे और पीछे मुड़कर नहीं देखा। तो अल्लाह ने उनसे कहा : इससे भय न खाओ l क्योंकि मेरे पास रसूल साँप या किसी और से नहीं डरते।
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إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسۡنَۢا بَعۡدَ سُوٓءٖ فَإِنِّي غَفُورٞ رَّحِيمٞ ١١
А если кто совершил несправедливость, а затем заменил зло добром, то ведь Я - Прощающий, Милосердный.
सिवाय उसके जिसने कोई पाप करके अपने ऊपर अत्याचार किया। फिर उसके बाद तौबा कर ली, तो निःसंदेह मैं उसे बहुत क्षमा करने वाला, उसपर बेहद दयालु हूँ।
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وَأَدۡخِلۡ يَدَكَ فِي جَيۡبِكَ تَخۡرُجۡ بَيۡضَآءَ مِنۡ غَيۡرِ سُوٓءٖۖ فِي تِسۡعِ ءَايَٰتٍ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَقَوۡمِهِۦٓۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ ١٢
Сунь свою руку за пазуху, и она выйдет белой (цвета молока, светящейся), без следов болезни. Вот некоторые из девяти знамений для Фараона и его народа. Воистину, они являются людьми нечестивыми».
और अपना हाथ अपनी कमीज़ के गरीबान में डालो, उसमें डालने के बाद वह कोढ़ (बरस) के बिना बर्फ़ की तरह सफ़ेद निकलेगा। यह उन नौ निशानियों में से एक है, जो आपकी सच्चाई की गवाही देती हैं। (ये नौ निशानियाँ : हाथ का चमकना, लाठी, अकाल, फलों की कमी, तूफान (बाढ़), टिड्डी, खटमल, मेंढक और खून हैं।) इन्हें फ़िरऔन तथा उसकी क़ौम के पास ले जाओ। वे अल्लाह का इनकार करने के कारण उसकी आज्ञाकारिता से निकलने वाले लोग हैं।
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فَلَمَّا جَآءَتۡهُمۡ ءَايَٰتُنَا مُبۡصِرَةٗ قَالُواْ هَٰذَا سِحۡرٞ مُّبِينٞ ١٣
Когда Наши знамения были наглядно показаны им, они сказали: «Это - очевидное колдовство».
फिर जब उनके पास हमारी ये निशानियाँ, जिनके साथ हमने मूसा का समर्थन किया था, स्पष्ट और साफ तौर पर आ गईं, तो उन्होंने कहा : ये निशानियाँ जिन्हें मूसा लेकर आया है, स्पष्ट जादू हैं।
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وَجَحَدُواْ بِهَا وَٱسۡتَيۡقَنَتۡهَآ أَنفُسُهُمۡ ظُلۡمٗا وَعُلُوّٗاۚ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ ١٤
Они отвергли их несправедливо и надменно, хотя в душе они были убеждены в их правдивости. Посмотри же, каким был конец распространявших нечестие!
उन्होंने इन स्पष्ट निशानियों का इनकार कर दिया और उन्हें मानने पर नहीं आए। हालाँकि उनके दिलों को इस बात का अच्छी तरह विश्वास था कि ये अल्लाह की ओर से हैं; ऐसा उन्होंने अत्याचार और सत्य से अहंकार के कारण किया। अतः (ऐ रसूल!) विचार करें कि अपने कुफ़्र और अवज्ञा के द्वारा घरती पर बिगाड़ पैदा करने वालों का परिणाम कैसा रहा! निश्चय हमने उन्हें नष्ट कर दिया और उन सबका विनाश कर दिया।
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وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا دَاوُۥدَ وَسُلَيۡمَٰنَ عِلۡمٗاۖ وَقَالَا ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي فَضَّلَنَا عَلَىٰ كَثِيرٖ مِّنۡ عِبَادِهِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ١٥
Мы даровали знание Давуду (Давиду) и Сулейману (Соломону), и они сказали: «Хвала Аллаху, который предпочел нас многим из Своих верующих рабов».
निःसंदेह हमने दाऊद तथा उनके पुत्र सुलैमान को ज्ञान प्रदान किया। उसी में पक्षियों की बातों का ज्ञान भी शामिल है। दाऊद और सुलैमान ने प्रभुत्वशाली और महान अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए कहा : हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें ज्ञान और नुबुव्वत (पैग़ंबरी) से सम्मानित करके अपने बहुत-से ईमान वाले बंदों पर श्रेष्ठता प्रदान की।
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وَوَرِثَ سُلَيۡمَٰنُ دَاوُۥدَۖ وَقَالَ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ عُلِّمۡنَا مَنطِقَ ٱلطَّيۡرِ وَأُوتِينَا مِن كُلِّ شَيۡءٍۖ إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡفَضۡلُ ٱلۡمُبِينُ ١٦
Сулейман (Соломон) наследовал Давуду (Давиду) и сказал: «О люди! Мы обучены языку птиц, и нам даровано от всего сущего. Это и есть явное превосходство (или явная милость)».
और सुलैमान नुबुव्वत (पैग़ंबरी), ज्ञान तथा राजत्व में अपने पिता दाऊद के उत्तराधिकारी बने और खुद अपने तथा अपने पिता पर अल्लाह के अनुग्रह का वर्णन करते हुए कहा : ऐ लोगो! अल्लाह ने हमें पक्षियों की आवाज़ों को समझना सिखाया और हमें हर उस चीज़ में से प्रदान किया, जो उसने नबियों और बादशाहों को प्रदान किया। निःसंदेह यह जो अल्लाह ने हमें प्रदान किया, निश्चय यही स्पष्ट अनुकंपा है।
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وَحُشِرَ لِسُلَيۡمَٰنَ جُنُودُهُۥ مِنَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ وَٱلطَّيۡرِ فَهُمۡ يُوزَعُونَ ١٧
И собраны были к Сулейману (Соломону) его воины из числа джиннов, людей и птиц. Они были разделены на боевые порядки.
और सुलैमान के लिए मनुष्यों, जिन्नों और पक्षियों में से उनके सैनिक इकट्ठे किए गए, फिर वे एक व्यवस्थित तरीके से चलाए जाते थे।
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حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَوۡاْ عَلَىٰ وَادِ ٱلنَّمۡلِ قَالَتۡ نَمۡلَةٞ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّمۡلُ ٱدۡخُلُواْ مَسَٰكِنَكُمۡ لَا يَحۡطِمَنَّكُمۡ سُلَيۡمَٰنُ وَجُنُودُهُۥ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ ١٨
Когда они прибыли в долину муравьев, муравьиха сказала: «О муравьи! Войдите в свои жилища, чтобы Сулейман (Соломон) и его воины не погубили вас, даже не почувствовав этого».
वे चलाए जाते रहे यहाँ तक कि जब वे चींटियों की एक घाटी (शाम - लेवंत - में एक जगह) में पहुँचे, तो एक चींटी ने कहा : ऐ चींटियो! अपने घरों में प्रवेश कर जाओ। ताकि सुलैमान और उसके सैनिक तुम्हें नष्ट न कर दें, जबकि उन्हें तुम्हारे बारे में पता भी न हो। क्योंकि अगर वे तुम्हारे बारे में जानते, तो वे तुम्हें नहीं रौंदते।
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فَتَبَسَّمَ ضَاحِكٗا مِّن قَوۡلِهَا وَقَالَ رَبِّ أَوۡزِعۡنِيٓ أَنۡ أَشۡكُرَ نِعۡمَتَكَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَٰلِدَيَّ وَأَنۡ أَعۡمَلَ صَٰلِحٗا تَرۡضَىٰهُ وَأَدۡخِلۡنِي بِرَحۡمَتِكَ فِي عِبَادِكَ ٱلصَّٰلِحِينَ ١٩
Он улыбнулся, рассмеявшись от ее слов. Он сказал: «Господи! Внуши мне быть благодарным за Твою милость, которую Ты оказал мне и моим родителям, и совершать праведные деяния, которыми Ты будешь доволен. Введи меня по Своей милости в число Своих праведных рабов».
जब सुलैमान अलैहिस्सलाम ने चींटी की बात सुनी, तो उसकी इस बात से हँसते हुए मुसकुराए और अपने पवित्र रब से प्रार्थना करते हुए कहने लगे : ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर और मुझे अपनी उस ने'मत के लिए आभारी होने की प्रेरणा दे, जो तूने मुझे और मेरे माता-पिता को प्रदान की है। तथा मुझे सामर्थ्य दे कि मैं नेक कार्य करूँ, जिससे तू पसंद करे। और मुझे अपनी दया से अपने सदाचारी बंदों के समूह में शामिल कर ले।
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وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيۡرَ فَقَالَ مَالِيَ لَآ أَرَى ٱلۡهُدۡهُدَ أَمۡ كَانَ مِنَ ٱلۡغَآئِبِينَ ٢٠
Осматривая птиц, он сказал: «Что со мной? Почему я не вижу удода? Или же он оказался в числе отсутствующих?
और सुलैमान ने पक्षियों का निरीक्षण किया, पर हुदहुद को नहीं देखा। तो इसपर कहा : क्या बात है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा हूँ? क्या किसी बाधा के कारण मैं उसे नहीं देख पा रहा हूँ अथवा वह अनुपस्थित है?
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لَأُعَذِّبَنَّهُۥ عَذَابٗا شَدِيدًا أَوۡ لَأَاْذۡبَحَنَّهُۥٓ أَوۡ لَيَأۡتِيَنِّي بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ ٢١
Я подвергну его суровым мучениям или же зарежу его, если он не приведет ясного довода».
जब उनके लिए उसकी अनुपस्थिति स्पष्ट हो गई, तो उन्होंने कहा : मैं उसे अनुपस्थित रहने की कड़ी सज़ा दूँगा अथवा उसे ज़बह कर डालूँगा, या फिर वह मेरे पास एक स्पष्ट तर्क लेकर आए, जो उसके अनुपस्थित होने के कारण को बयान करे।
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فَمَكَثَ غَيۡرَ بَعِيدٖ فَقَالَ أَحَطتُ بِمَا لَمۡ تُحِطۡ بِهِۦ وَجِئۡتُكَ مِن سَبَإِۭ بِنَبَإٖ يَقِينٍ ٢٢
Он оставался там недолго и сказал: «Я узнал о том, чего ты не знаешь. Я прибыл к тебе из Сабы (Савы) с достоверным известием.
हुदहुद लंबे समय तक अनुपस्थित नही रहा, फिर जब वह आया, तो सुलैमान अलैहिस्सलाम से कहा : मैं ऐसी बात से अवगत हुआ हूँ जिससे आप अवगत नहीं हैं। तथा मैं "सबा" वालों के विषय में एक सच्ची ख़बर लेकर आया हूँ, जिसमें कोई संदेह नहीं।
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إِنِّي وَجَدتُّ ٱمۡرَأَةٗ تَمۡلِكُهُمۡ وَأُوتِيَتۡ مِن كُلِّ شَيۡءٖ وَلَهَا عَرۡشٌ عَظِيمٞ ٢٣
Я обнаружил там женщину, которая царствует над ними. Ей даровано все, и у нее есть великий трон.
मैंने एक स्त्री को उनपर शासन करते पाया है और उस स्त्री को शक्ति एवं शासन के सारे साधन प्राप्त हैं और उसके पास एक बड़ा सिंहासन भी है, जिसपर बैठकर वह अपने लोगों के मामलों का प्रबंधन करती है।
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وَجَدتُّهَا وَقَوۡمَهَا يَسۡجُدُونَ لِلشَّمۡسِ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَصَدَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّبِيلِ فَهُمۡ لَا يَهۡتَدُونَ ٢٤
Я увидел, что она вместе со своим народом поклоняется солнцу вместо Аллаха. Дьявол представил им их деяния прекрасными и сбил их с пути, и они не следуют прямым путем.
मैंने उस स्त्री तथा उसकी जाति को पाया है कि वे पवित्र एवं सर्वशक्तिमान अल्लाह को छोड़कर सूरज को सजदा करते हैं। तथा शैतान ने उनके शिर्क एवं पाप के कार्यों को उनके लिए शोभनीय बना दिया है और उन्हें सत्य के मार्ग से हटा दिया है। अतः वे उसकी ओर मार्गदर्शन नहीं पाते।
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أَلَّاۤ يَسۡجُدُواْۤ لِلَّهِ ٱلَّذِي يُخۡرِجُ ٱلۡخَبۡءَ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَيَعۡلَمُ مَا تُخۡفُونَ وَمَا تُعۡلِنُونَ ٢٥
Это было сделано для того, чтобы они не поклонялись Аллаху, Который выявляет все сокрытое на небесах и на земле и знает то, что вы скрываете, и то, что вы обнаруживаете.
शैतान ने उनके शिर्क एवं पाप के कार्यों को उनके लिए सुंदर बना दिया है; ताकि वे अकेले अल्लाह को सजदा न करें, जो आकाश में छिपी वर्षा तथा धरती में छिपे पौधों को निकालता है, तथा वह उन कार्यों को जानता है, जो तुम छिपाते हो और जो तुम ज़ाहिर तरते हो। उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
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ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡعَظِيمِ۩ ٢٦
Нет иного божества, кроме Аллаха, Господа великого Трона».
अल्लाह वह है जिसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं, जो महान सिंहासन का रब है।
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۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقۡتَ أَمۡ كُنتَ مِنَ ٱلۡكَٰذِبِينَ ٢٧
Он сказал: «Посмотрим, сказал ли ты правду или же являешься одним из лжецов.
सुलैमान अलैहिस्सलाम ने हुदहुद से कहा : हम देखेंगे कि तू अपने दावे में सच्चा है अथवा तू झूठों में से है?
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ٱذۡهَب بِّكِتَٰبِي هَٰذَا فَأَلۡقِهۡ إِلَيۡهِمۡ ثُمَّ تَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَٱنظُرۡ مَاذَا يَرۡجِعُونَ ٢٨
Отправляйся с этим посланием от меня и брось его им. Затем встань поодаль и погляди, что они ответят».
सुलैमान अलैहिस्सलाम ने एक पत्र लिखा और उसे हुदहुद के हवाले करते हुए कहा : मेरा यह पात्र लेकर जाओ और इसे "सबा" वालों को पहुँचा देना और उनसे एक तरफ हटकर सुनते रहना कि वे इसके बारे में क्या जवाब देते हैं।
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قَالَتۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ إِنِّيٓ أُلۡقِيَ إِلَيَّ كِتَٰبٞ كَرِيمٌ ٢٩
Она сказала: «О знать! Мне было брошено благородное письмо.
रानी ने पत्र प्राप्त किया और कहा : ऐ सरदारो! मेरी ओर एक बहुत प्रतिष्ठित पत्र फेंका गया है।
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إِنَّهُۥ مِن سُلَيۡمَٰنَ وَإِنَّهُۥ بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ ٣٠
Оно - от Сулеймана (Соломона), и в нем сказано: «Во имя Аллаха, Милостивого, Милосердного!
सुलैमान की ओर से भेजे गए और "बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम" से प्रारंभ होने वाले इस पत्र का मज़मून यह है :
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أَلَّا تَعۡلُواْ عَلَيَّ وَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ ٣١
Не превозноситесь предо мною и явитесь ко мне покорными»».
यह कि तुम अभिमान न करो तथा अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसके साथ शिर्क को परित्याग करने के मेरे आह्वान को स्वीकार करते हुए, आज्ञाकारी बनकर, मेरे पास आ जाओ। क्योंकि तुमने अल्लाह के साथ सूर्य की पूजा की है।
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قَالَتۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ أَفۡتُونِي فِيٓ أَمۡرِي مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمۡرًا حَتَّىٰ تَشۡهَدُونِ ٣٢
Она сказала: «О знать! Посоветуйте, как мне поступить. Я никогда не принимала решений самостоятельно, пока вы находились рядом со мной».
रानी ने कहा : ऐ प्रमुखो एवं सज्जनो! मुझे मेरे मामले में सही हल बताओ। मैं किसी मामले का फ़ैसला करने वाली नहीं, यहाँ तक तुम मेरे पास उपस्थित हो और उसके बारे में अपनी राय व्यक्त करो।
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قَالُواْ نَحۡنُ أُوْلُواْ قُوَّةٖ وَأُوْلُواْ بَأۡسٖ شَدِيدٖ وَٱلۡأَمۡرُ إِلَيۡكِ فَٱنظُرِي مَاذَا تَأۡمُرِينَ ٣٣
Они сказали: «Мы обладаем силой и великой мощью, но решение остается за тобой. Подумай, что ты прикажешь делать».
उसकी जाति के सरदारों ने उससे कहा : हम बड़ी ताकत के मालिक हैं तथा युद्ध में प्रबल शक्ति रखते हैं। और राय वही है जो आप देखती हैं। इसलिए देखें कि आप हमें क्या करने का आदेश देती हैं। क्योंकि हम उसे लागू करने में सक्षम हैं।
27:34Страница 379
قَالَتۡ إِنَّ ٱلۡمُلُوكَ إِذَا دَخَلُواْ قَرۡيَةً أَفۡسَدُوهَا وَجَعَلُوٓاْ أَعِزَّةَ أَهۡلِهَآ أَذِلَّةٗۚ وَكَذَٰلِكَ يَفۡعَلُونَ ٣٤
Она сказала: «Когда цари вторгаются в селение, они разрушают его и превращают его самых славных жителей в самых униженных. Вот так они поступают.
रानी ने कहा : राजा जब किसी बस्ती में प्रवेश करते हैं, तो क़त्ल तथा लूट-पाट का बाज़ार गर्म करके उसे ख़राब कर देते हैं और उसके सरदारों और अशराफिया को अपमानित करते हैं, जबकि वे पहले उसमें प्रतिष्ठा और शक्ति वाले थे। तथा राजा हमेशा ऐसा ही करते हैं, जब वे किसी बस्ती को पराजित करते हैं; ताकि लोगों के दिलों में आतंक और दहशत पैदा कर सकें।
27:35Страница 379
وَإِنِّي مُرۡسِلَةٌ إِلَيۡهِم بِهَدِيَّةٖ فَنَاظِرَةُۢ بِمَ يَرۡجِعُ ٱلۡمُرۡسَلُونَ ٣٥
Я пошлю им дары и посмотрю, с чем вернутся послы».
मैं यह पत्र भेजने वाले तथा उसके लोगों के पास एक उपहार भेजने वाली हूँ और देखती हूँ कि दूत इस उपहार को भेजने के बाद क्या उत्तर लाते हैं।
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فَلَمَّا جَآءَ سُلَيۡمَٰنَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٖ فَمَآ ءَاتَىٰنِۦَ ٱللَّهُ خَيۡرٞ مِّمَّآ ءَاتَىٰكُمۚ بَلۡ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمۡ تَفۡرَحُونَ ٣٦
Когда они прибыли к Сулейману (Соломону), он сказал: «Неужели вы можете помочь мне богатством? То, что даровал мне Аллах, лучше того, что Он даровал вам. Нет, это вы радуетесь преподнесенным вам дарам.
जब रानी का दूत और उसके साथ उसके सहायक उपहार लेकर सुलैमान के पास आए, तो सुलैमान ने उनके उपहार भेजने को नकारते हुए कहा : क्या तुम धन से मेरी सहायता करते हो, ताकि मुझे अपनी ओर से फेर सको? (सुनो!) अल्लाह ने मुझे पैग़ंबरी, राजत्व तथा धन-दौलत के रूप में जो कुछ दिया है, वह उससे बेहतर है, जो उस ने तुम्हें दिया है। बल्कि, तुम ही लोग इस प्रकार के सांसारिक उपहारों के दिए जाने पर खुश होते हो।
27:37Страница 380
ٱرۡجِعۡ إِلَيۡهِمۡ فَلَنَأۡتِيَنَّهُم بِجُنُودٖ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخۡرِجَنَّهُم مِّنۡهَآ أَذِلَّةٗ وَهُمۡ صَٰغِرُونَ ٣٧
Возвращайся к ним, а мы обязательно прибудем с войском, перед которым они не устоят, и изгоним их оттуда униженными и ничтожными».
सुलैमान अलैहिस्सलाम ने रानी के दूत से कहा : तुम जो उपहार लेकर आए हो, उसे लेकर उनके पास वापस जाओ। यदि वे आज्ञाकारी बनकर मेरे पास नहीं आए, तो हम रानी तथा उसके लोगों पर ऐसी सेनाएँ लेकर आएँगे जिनका सामना करने की उनमें कोई शक्ति नहीं और हम अवश्य उन्हें 'सबा' से इस हाल में निकालेंगे कि वे वहाँ सम्मान पूर्ण रहने के बाद अपमानित और तिरस्कृत होंगे।
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قَالَ يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ أَيُّكُمۡ يَأۡتِينِي بِعَرۡشِهَا قَبۡلَ أَن يَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ ٣٨
Он сказал: «О знать! Кто из вас принесет мне ее трон до того, как они предстанут предо мною покорными?».
सुलैमान अलैहिस्सलाम ने अपने राज्य के प्रमुख लोगों को संबोधित करते हुए कहा : ऐ प्रमुखो! तुममें से कौन रानी का सिंहासन मेरे पास लेकर आएगा, इससे पहले कि वे आज्ञाकारी होकर मेरे पास आएँ?
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قَالَ عِفۡرِيتٞ مِّنَ ٱلۡجِنِّ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبۡلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَۖ وَإِنِّي عَلَيۡهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٞ ٣٩
Силач из числа джиннов сказал: «Я принесу его тебе прежде, чем ты встанешь со своего места (до окончания собрания). Я достаточно силен и заслуживаю доверия для этого».
एक बलवान सरकश जिन्न ने कहा : इससे पहले कि आप अपनी इस जगह से उठें, मैं उसका सिंहासन आपके पास ले आऊँगा, और निःसंदेह मैं उसके उठाने की पूरी शक्ति रखता हूँ तथा उसमें जो कुछ है, उसके प्रति अमानतदार हूँ। इसलिए मैं उसमें कोई कमियागीरी नहीं करूँगा।
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قَالَ ٱلَّذِي عِندَهُۥ عِلۡمٞ مِّنَ ٱلۡكِتَٰبِ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبۡلَ أَن يَرۡتَدَّ إِلَيۡكَ طَرۡفُكَۚ فَلَمَّا رَءَاهُ مُسۡتَقِرًّا عِندَهُۥ قَالَ هَٰذَا مِن فَضۡلِ رَبِّي لِيَبۡلُوَنِيٓ ءَأَشۡكُرُ أَمۡ أَكۡفُرُۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّمَا يَشۡكُرُ لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبِّي غَنِيّٞ كَرِيمٞ ٤٠
А тот, который обладал знанием из Писания, сказал: «Я принесу его тебе в мгновение ока». Увидев установленный перед ним трон, он сказал: «Мой Господь оказал мне эту милость для того, чтобы испытать меня, буду ли я благодарен или же буду непризнателен. Кто благодарен, тот благодарен во благо себе. А если кто непризнателен, то ведь мой Господь - Богатый, Великодушный».
सुलैमान के पास उपस्थित एक सदाचारी ज्ञानी व्यक्ति, जिसके पास आसमानी किताबों का ज्ञान था, जिसमें अल्लाह का वह "इस्मे आज़म" (महान नाम) भी शामिल है, जिसकी विशेषता यह है कि यदि उसके द्वारा दुआ की जाए तो अल्लाह क़बूल करता है, ने कहा : मैं आपके पलक झपकाने से पहले ही उसका सिंहासन आपके पास ले आऊँगा; इस तौर पर कि मैं अल्लाह से प्रार्थना करूँगा और वह उसे यहाँ ले आएगाl अतः उसने प्रार्थना की और अल्लाह ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। जब सुलैमान ने उसके सिंहासन को अपने पास हाज़िर देखा, तो कहा : यह मेरे पालनहार की कृपा से है; ताकि वह मेरी परीक्षा ले कि मैं उसकी नेमतों का शुक्र अदा करता हूँ या उनकी नाशुक्री करता हूँ? और जो अल्लाह का शुक्र अदा करता है, तो उसकी शुक्रगुज़ारी का लाभ उसी को मिलता है। क्योंकि अल्लाह बेनियाज़ है, बंदों की शुक्रगुज़ारी उसे नहीं बढ़ाती। तथा जिसने अल्लाह की नेमतों का इनकार किया और उनपर अल्लाह का शुक्र अदा नहीं किया, तो निश्चय मेरा पालनहार उसके शुक्र से बहुत बेनियाज़, बहुत उदार है। तथा यह उसकी उदारता है कि नेमतों की नाशुक्री करने वालों को भी प्रदान करता है।
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قَالَ نَكِّرُواْ لَهَا عَرۡشَهَا نَنظُرۡ أَتَهۡتَدِيٓ أَمۡ تَكُونُ مِنَ ٱلَّذِينَ لَا يَهۡتَدُونَ ٤١
Он сказал: «Переделайте ее трон так, чтобы она не узнала его, и мы посмотрим, следует она прямым путем или же является одной из тех, кто не следует прямым путем».
सुलैमान अलैहिस्सलाम ने कहा : उसके लिए उसके राज-सिंहासन का रूप बदल दो। ताकि हम देखें : क्या वह इस तथ्य को जान पाती है कि यह उसी का सिंहासन है, या कि वह उन लोगों में से हो जाती है जो अपनी वस्तुएँ भी नहीं पहचान पाते हैं?
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فَلَمَّا جَآءَتۡ قِيلَ أَهَٰكَذَا عَرۡشُكِۖ قَالَتۡ كَأَنَّهُۥ هُوَۚ وَأُوتِينَا ٱلۡعِلۡمَ مِن قَبۡلِهَا وَكُنَّا مُسۡلِمِينَ ٤٢
Когда она прибыла, ей сказали: «Таков ли твой трон?». Она сказала: «Будто это он и есть». Сулейман (Соломон) сказал: «Знание было даровано нам раньше, чем ей, и мы являемся мусульманами».
जब सबा की रानी सुलैमान के पास आई, तो उसकी परीक्षा करने के लिए उससे कहा गया : क्या यह तेरे सिंहासन के समान है? उसने प्रश्न के अनुसार उत्तर दिया : मानो यह वही है। तो सुलैमान ने कहा : अल्लाह ने हमें इससे पहले ही ज्ञान दे रखा था कि वह इस तरह के कार्यों को अंजाम देने की पूरी शक्ति रखता है। तथा हम अल्लाह के आदेश के अधीन थे और उसके प्रति आज्ञाकारी थे।
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وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعۡبُدُ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ إِنَّهَا كَانَتۡ مِن قَوۡمٖ كَٰفِرِينَ ٤٣
Ей мешало то, чему она поклонялась вместо Аллаха, ведь она принадлежала к неверующему народу.
और उसे अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) से उस चीज़ ने रोक रखा था जो वह अपनी जाति का अनुकरण करते हुए अल्लाह के अलावा पूजती थी। निःसंदेह वह उन लोगों में से थी जो अल्लाह का इनकार करने वाले थे। इसलिए वह (भी) उनके समान काफ़िर थी।
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قِيلَ لَهَا ٱدۡخُلِي ٱلصَّرۡحَۖ فَلَمَّا رَأَتۡهُ حَسِبَتۡهُ لُجَّةٗ وَكَشَفَتۡ عَن سَاقَيۡهَاۚ قَالَ إِنَّهُۥ صَرۡحٞ مُّمَرَّدٞ مِّن قَوَارِيرَۗ قَالَتۡ رَبِّ إِنِّي ظَلَمۡتُ نَفۡسِي وَأَسۡلَمۡتُ مَعَ سُلَيۡمَٰنَ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٤٤
Ей сказали: «Войди во дворец». Увидев его, она приняла его за водную пучину и обнажила свои голени. Он сказал: «Это - отшлифованный дворец из хрусталя». Она сказала: «Господи! Я была несправедлива к самой себе. Я покоряюсь вместе с Сулейманом (Соломоном) Аллаху, Господу миров».
उससे कहा गया कि महल में प्रवेश कर जाओ, जो एक सतह के समान था। जब उसने महल को देखा, तो उसे कोई जलाशय समझ बैठी और उसमें उतरने के लिए अपनी दोनों पिंडलियाँ खोल दीं। सुलैमान अलैहिस्सलाम ने कहा : यह एक चिकना कांच का भवन है। फिर उसे इस्लाम की ओर आमंत्रित किया। और उसने उनके आमंत्रण को स्वीकार कर लिया, यह कहते हुए : ऐ मेरे पालनहार! मैंने तेरे साथ तेरे अलावा की पूजा करके अपने ऊपर अत्याचार किया है और (अब) मैं सुलैमान अलैहिस्सलाम के साथ सभी प्राणियों के पालनहार अल्लाह की आज्ञाकारिणी हो गई।
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وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحًا أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ فَإِذَا هُمۡ فَرِيقَانِ يَخۡتَصِمُونَ ٤٥
Мы послали к самудянам их брата Салиха, чтобы они поклонялись Аллаху, но они стали двумя препирающимися группами.
हमने समूद जाति की ओर उनके नसबी भाई सालेह अलैहिस्सलाम को भेजा कि तुम केवल एकमात्र अल्लाह की इबादत करो। परंतु उनके निमंत्रण के बाद वे दो समूह बन गए : एक ईमान लाने वाला समूह और दूसरा काफिर समूह, वे इस बात पर झगड़ने लगे कि उनमें से कौन सत्य पर है।
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قَالَ يَٰقَوۡمِ لِمَ تَسۡتَعۡجِلُونَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبۡلَ ٱلۡحَسَنَةِۖ لَوۡلَا تَسۡتَغۡفِرُونَ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ ٤٦
Он сказал: «О мой народ! Почему вы торопите зло прежде добра? Почему вы не просите у Аллаха прощения? Быть может, вы будете помилованы».
सालेह अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : तुम रहमत से पहले अज़ाब को क्यों जल्दी माँगते हो? तुम अपने पापों के लिए अल्लाह से क्षमा क्यों नहीं माँगते, इस आशा में कि वह तुमपर दया करे।
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قَالُواْ ٱطَّيَّرۡنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَۚ قَالَ طَٰٓئِرُكُمۡ عِندَ ٱللَّهِۖ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٞ تُفۡتَنُونَ ٤٧
Они сказали: «Мы видим дурное предзнаменование в тебе и тех, кто с тобой». Он сказал: «Ваше дурное предзнаменование - у Аллаха, но вы являетесь народом, который подвергают искушению».
उनके समुदाय ने सत्य से हठधर्म दिखाते हुए उनसे कहा : हम तुमसे तथा तुम्हारे साथ जो मोमिन हैं उनसे अपशकुन लेते हैं। सालेह अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : तुम अपने ऊपर आने वाली कठिनाइयों के कारण पक्षियों को उड़ाकर जो अपशकुन लेते हो, अल्लाह के पास उसका ज्ञान है, उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। बल्कि तुम्हें जो बड़ी मात्रा में भलाई प्रदान की जा रही है तथा तुम जो बुराइयों से ग्रस्त होते हो, उनके द्वारा तुम आज़माए जा रहे हो।
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وَكَانَ فِي ٱلۡمَدِينَةِ تِسۡعَةُ رَهۡطٖ يُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا يُصۡلِحُونَ ٤٨
В городе было девять человек, которые распространяли на земле нечестие и ничего не улучшали.
और "हिज्र" शहर में नौ आदमी थे, जो कुफ़्र और पापों के द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करते थे, तथा ईमान और अच्छे कर्मों के द्वारा उसमें सुधार नहीं करते थे।
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قَالُواْ تَقَاسَمُواْ بِٱللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُۥ وَأَهۡلَهُۥ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِۦ مَا شَهِدۡنَا مَهۡلِكَ أَهۡلِهِۦ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ ٤٩
Они сказали: «Поклянитесь друг другу Аллахом, что ночью мы обязательно нападем на Салиха и его семью, а потом скажем его близкому родственнику, что мы не присутствовали при убийстве его семьи и что мы говорим правду».
उन्होंने एक-दूसरे से कहा : हममें से प्रत्येक व्यक्ति अल्लाह की क़सम खाए कि हम अवश्य ही रात में उसके घर पर हमला करेंगे, फिर हम अवश्य ही उसे और उसके परिवार को क़त्ल कर देंगे। फिर हम अवश्य ही उसके खून के उत्तराधिकारी से कह देंगे : हम सालेह और उसके परिवार की हत्या के समय उपस्थित नहीं थे और हमने जो कहा, उसमें हम बिलकुल सच्चे हैं।
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وَمَكَرُواْ مَكۡرٗا وَمَكَرۡنَا مَكۡرٗا وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ ٥٠
Они замыслили хитрость, и Мы замыслили хитрость, но они не ощущали этого.
और उन्होंने सालेह तथा उनके ईमान वाले अनुयायियों को नष्ट करने के लिए एक छिपी हुई साजिश रची, तथा हमने भी उनकी मदद करने, उन्हें उन लोगों की साज़िश से बचाने और उनकी जाति के काफ़िरों को नष्ट करने के लिए गुप्त उपाय किया, और वे इसके बारे में नहीं जानते थे।
Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии