Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди
Саба 34:38–54
34:38Страница 432
وَٱلَّذِينَ يَسۡعَوۡنَ فِيٓ ءَايَٰتِنَا مُعَٰجِزِينَ أُوْلَٰٓئِكَ فِي ٱلۡعَذَابِ مُحۡضَرُونَ ٣٨
А те, которые стараются ослабить Наши знамения, будут ввергнуты в мучения.
तथा जो काफ़िर, लोगों को हमारी आयतों से फेरने का अथक प्रयास करते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की कोशिश में लगे रहते हैं, वे दुनिया में घाटा उठाने वाले हैं तथा आखिरत में यातना से ग्रस्त किए जाएँगे।
34:39Страница 432
قُلۡ إِنَّ رَبِّي يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ وَيَقۡدِرُ لَهُۥۚ وَمَآ أَنفَقۡتُم مِّن شَيۡءٖ فَهُوَ يُخۡلِفُهُۥۖ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلرَّٰزِقِينَ ٣٩
Скажи: «Воистину, мой Господь увеличивает или ограничивает удел тому из Своих рабов, кому пожелает. Он возместит все, что бы вы ни израсходовали. Он - Наилучший из дарующих удел».
(ऐ रसूल) आप कह दीजिए : निःसंदेह मेरा पालनहार अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है, जीविका विस्तृत कर देता है और जिसके लिए चाहता है, उसे तंग कर देता है। और तुम अल्लाह के मार्ग में जो चीज़ भी खर्च करोगे, अल्लाह उसके बदले दुनिया में तुम्हें उससे बेहतर चीज़ प्रदान करेगा तथा आखिरत में भरपूर सवाब देगा। और अल्लाह ही सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है। अतः जिसे जीविका चाहिए, वह महिमावान अल्लाह का सहारा ले।
34:40Страница 433
وَيَوۡمَ يَحۡشُرُهُمۡ جَمِيعٗا ثُمَّ يَقُولُ لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ أَهَٰٓؤُلَآءِ إِيَّاكُمۡ كَانُواْ يَعۡبُدُونَ ٤٠
В тот день Он соберет их всех, а затем скажет ангелам: «Это они поклонялись вам?».
और (ऐ रसूल) याद करें, जिस दिन अल्लाह उन सभी को एकत्रित करेगा। फिर वह महिमावान अल्लाह बहुदेववादियों को फटकारने और डांटने के तौर पर, फरिश्तों से कहेगा : क्या यही लोग दुनिया में अल्लाह को छोड़कर तुम्हारी पूजा किया करते थे?
34:41Страница 433
قَالُواْ سُبۡحَٰنَكَ أَنتَ وَلِيُّنَا مِن دُونِهِمۖ بَلۡ كَانُواْ يَعۡبُدُونَ ٱلۡجِنَّۖ أَكۡثَرُهُم بِهِم مُّؤۡمِنُونَ ٤١
Они скажут: «Пречист Ты! Ты - наш Покровитель, а не они. Они поклонялись джиннам, и большинство их веровали именно в них».
फ़रिश्ते कहेंगे : तू पाक और पवित्र है! तू ही उनके सिवा हमारा संरक्षक है। हमारे और उनके बीच कोई दोस्ती नहीं है। बल्कि ये बहुदेववादी शैतानों की पूजा करते थे। शैतान उनके सामने फरिश्तों के रूप में आते थे, तो ये अल्लाह को छोड़कर उनकी पूजा करते थे। उनमें से अधिकतर लोग उनपर ईमान रखने वाले थे।
34:42Страница 433
فَٱلۡيَوۡمَ لَا يَمۡلِكُ بَعۡضُكُمۡ لِبَعۡضٖ نَّفۡعٗا وَلَا ضَرّٗا وَنَقُولُ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ ذُوقُواْ عَذَابَ ٱلنَّارِ ٱلَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ ٤٢
Сегодня вы не можете принести друг другу ни пользы, ни вреда. Мы скажем беззаконникам: «Вкусите мучения в Огне, который вы считали ложью!».
हश्र और हिसाब के दिन, उपास्यों के पास उन लोगों के लिए जो दुनिया में अल्लाह को छोड़कर उनकी उपासना किया करते थे, किसी लाभ और हानि का कोई अधिकार नहीं होगा। तथा हम उन लोगों से, जिन्होंने कुफ़्र तथा गुनाहों के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार किया, कहेंगे : उस आग की यातना चखो, जिसे तुम दुनिया में झुठलाया करते थे।
34:43Страница 433
وَإِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتُنَا بَيِّنَٰتٖ قَالُواْ مَا هَٰذَآ إِلَّا رَجُلٞ يُرِيدُ أَن يَصُدَّكُمۡ عَمَّا كَانَ يَعۡبُدُ ءَابَآؤُكُمۡ وَقَالُواْ مَا هَٰذَآ إِلَّآ إِفۡكٞ مُّفۡتَرٗىۚ وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمۡ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٞ مُّبِينٞ ٤٣
Когда им читают Наши ясные аяты, они говорят: «Это - всего лишь мужчина, который хочет удержать вас от того, чему поклонялись ваши отцы». Они говорят: «Это - всего лишь вымышленная ложь». А те, которые не уверовали в истину, когда она явилась к ним, говорят: «Это - всего лишь очевидное колдовство».
और जब इन झुठलाने वाले बहुदेववादियों के सामने, हमारे रसूल पर उतरने वाली स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, जिनमें कोई अस्पष्टता नहीं होती है, तो वे कहते हैं : यह व्यक्ति जो इसे लेकर आया है, एक ऐसा व्यक्ति है जो तुम्हें केवल तुम्हारे बाप-दादा के धर्म से हटाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा : यह क़ुरआन मात्र एक झूठ है, जो इसने अल्लाह पर मढ़ दिया है। तथा काफिरों के पास जब अल्लाह के पास से क़ुरआन आया, तो उन्होंने उसके बारे में कहा : यह तो स्पष्ट जादू है; क्योंकि यह पति-पत्नि और बाप-बेटे के बीच जुदाई डाल देता है।
34:44Страница 433
وَمَآ ءَاتَيۡنَٰهُم مِّن كُتُبٖ يَدۡرُسُونَهَاۖ وَمَآ أَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمۡ قَبۡلَكَ مِن نَّذِيرٖ ٤٤
Мы не даровали им Писаний, которые они могли бы изучить, и не посылали к ним до тебя предостерегающего увещевателя.
और हमने उन्हें पुस्तकें नहीं दी हैं, जिन्हें ये लोग पढ़ते हों, जो उन्हें यह बताएँ कि यह क़ुरआन झूठ है, जिसे मुहम्मद ने गढ़ लिया है। तथा (ऐ रसूल) आपको भेजने से पहले हमने उनकी ओर कोई रसूल नहीं भेजा है, जो उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराता।
34:45Страница 433
وَكَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ وَمَا بَلَغُواْ مِعۡشَارَ مَآ ءَاتَيۡنَٰهُمۡ فَكَذَّبُواْ رُسُلِيۖ فَكَيۡفَ كَانَ نَكِيرِ ٤٥
Те, которые были до них, сочли лжецами посланников. Они (мекканские многобожники) не получили даже десятой части того, что Мы даровали им, однако они сочли лжецами Моих посланников. Каким же было Мое обличение!
तथा पिछले समुदायों जैसे आद, समूद और लूत अलैहिस्सलाम की जाति ने भी झुठलाया था। जबकि आपकी जाति के बहुदेववादी लोग, शक्ति, अजेयता, धन और संख्या बल में पिछले समुदायों के दसवें भाग तक भी नहीं पहुँचे हैं। चुनाँचे उनमें से प्रत्येक जाति ने अपने रसूल को झुठलाया, तो उनके धन, शक्ति और संख्या ने उन्हें कोई लाभ नहीं दिया और अंततः उनपर मेरा अज़ाब आकर रहा। तो (ऐ रसूल!) देखो कि मेरा उनका खंडन करना कैसा रहा और मेरा उन्हें दंडित करना कैसा रहा।
34:46Страница 433
۞ قُلۡ إِنَّمَآ أَعِظُكُم بِوَٰحِدَةٍۖ أَن تَقُومُواْ لِلَّهِ مَثۡنَىٰ وَفُرَٰدَىٰ ثُمَّ تَتَفَكَّرُواْۚ مَا بِصَاحِبِكُم مِّن جِنَّةٍۚ إِنۡ هُوَ إِلَّا نَذِيرٞ لَّكُم بَيۡنَ يَدَيۡ عَذَابٖ شَدِيدٖ ٤٦
Скажи: «Я призываю вас только к одному: встаньте ради Аллаха по двое и по одному, а потом призадумайтесь. Ваш товарищ не является бесноватым. Он лишь предостерегает вас перед наступлением тяжких мучений».
(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दीजिए : मैं तुम्हें एक बात की सलाह और मशवरा देता हूँ; यह कि तुम अपनी इच्छाओं से अलग होकर अल्लाह के लिए दो-दो करके या अकेले-अकेले खड़े हो जाओ। फिर अपने साथी की जीवनी के बारे में, तथा तुम्हें उसके विवेक, सच्चाई और अमानतदारी के बारे में जो कुछ पता है उसमें मनन चिंतन करो; ताकि तुम्हें स्पष्ट रूप से पता चल जाए कि तुम्हारे साथी में कोई पागलपन नहीं है। वह तो केवल तुम्हें एक कठोर यातना के आने से पहले डराने वाला है, यदि तुमने अल्लाह के साथ शिर्क करने से तौबा नहीं किया।
34:47Страница 433
قُلۡ مَا سَأَلۡتُكُم مِّنۡ أَجۡرٖ فَهُوَ لَكُمۡۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٞ ٤٧
Скажи: «То вознаграждение, которое я прошу от вас, предназначено вам самим, а меня вознаградит только Аллах. Он - Свидетель всякой вещи».
(ऐ रसूल) आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से कह दीजिए : मैं तुम्हारे पास जो मार्गदर्शन और भलाई लेकर आया हूँ, उसपर मैंने तुमसे जो बदला या पारिश्रमिक माँगा है (यदि मान लिया जाए कि कुछ माँगा है), तो वह तुम्हारे लिए है। मेरा प्रतिफल तो केवल अल्लाह पर है। वह प्रत्येक वस्तु का गवाह है। वह गवाही देगा कि मैंने तुम्हें संदेश पहुँचा दिया है। तथा वह तुम्हारे कर्मों का भी साक्षी है। अतः वह तुम्हें उनका पूरा-पूरा बदला देगा।
34:48Страница 433
قُلۡ إِنَّ رَبِّي يَقۡذِفُ بِٱلۡحَقِّ عَلَّٰمُ ٱلۡغُيُوبِ ٤٨
Скажи: «Воистину, мой Господь ниспосылает истину (или бросает истину в ложь). Он - Ведающий сокровенное».
(ऐ रसूल) आप कह दीजिए कि वास्तव में मेरा पालनहार सत्य को असत्य पर हावी करके उसे नष्ट कर देता है और वह परोक्ष को खूब जानने वाला है। आकाशों तथा धरती में उससे कुछ भी छिपा नहीं है, और न ही उससे उसके बंदों के कार्य छिपे हैं।
34:49Страница 434
قُلۡ جَآءَ ٱلۡحَقُّ وَمَا يُبۡدِئُ ٱلۡبَٰطِلُ وَمَا يُعِيدُ ٤٩
Скажи: «Явилась истина, и ложь ничего больше не породит и не вернется».
(ऐ रसूल) आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से कह दें : सत्य अर्थात इस्लाम आ गया और असत्य (झूठ) जिसका कोई प्रभाव या शक्ति दिखाई नहीं देती, वह मिट गया और वह कभी अपने प्रभाव में वापस नहीं आएगा।
34:50Страница 434
قُلۡ إِن ضَلَلۡتُ فَإِنَّمَآ أَضِلُّ عَلَىٰ نَفۡسِيۖ وَإِنِ ٱهۡتَدَيۡتُ فَبِمَا يُوحِيٓ إِلَيَّ رَبِّيٓۚ إِنَّهُۥ سَمِيعٞ قَرِيبٞ ٥٠
Скажи: «Если я заблуждаюсь, то заблуждаюсь только во вред себе. Если же я следую прямым путем, то только благодаря тому, что внушил мне мой Господь. Воистину, Он - Слышащий, Близкий».
और (ऐ रसूल) आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से कह दें : यदि मैं तुम्हें जो संदेश पहुँचा रहा हूँ, उसमें सत्य मार्ग से भटका हुआ हूँ, तो मेरे भटकने का नुकसान मेरे तक ही सीमित है, उससे तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचेगी। और यदि मैं सीधे मार्ग पर हूँ, तो इसका कारण वह वह़्य है, जो मेरा पालनहार मेरी ओर उतारता है। वह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला और इतना निकट है कि मेरी बात सुनना उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं है।
34:51Страница 434
وَلَوۡ تَرَىٰٓ إِذۡ فَزِعُواْ فَلَا فَوۡتَ وَأُخِذُواْ مِن مَّكَانٖ قَرِيبٖ ٥١
Если бы ты видел, как они будут напуганы. Они не смогут сбежать и будут схвачены поблизости.
और यदि (ऐ रसूल) आप देखें, जब ये झुठलाने वाले क़ियामत के दिन यातना को अपने सामने देखकर घबराए हुए होंगे, तो उनके लिए भागने और शरण लेने का कोई स्थान नहीं होगा और वे पहली बार ही में एक नज़दीकी आसान जगह से पकड़ लिए जाएँगे। यदि आप इस स्थिति को देखें, तो आपको एक अद्भुत चीज़ नज़र आएगी।
34:52Страница 434
وَقَالُوٓاْ ءَامَنَّا بِهِۦ وَأَنَّىٰ لَهُمُ ٱلتَّنَاوُشُ مِن مَّكَانِۭ بَعِيدٖ ٥٢
Они скажут: «Мы уверовали в это!». Но как им обрести веру или заслужить прощение в таком далеком месте!
और जब वे अपना परिणाम देख लेंगे, तो कहेंगे : हम क़ियामत के दिन पर ईमान लाए। भला अब उनके लिए ईमान ग्रहण करना कैसे संभव है, जबकि ईमान की स्वीकृति का स्थान उनसे बहुत दूर हो गया है?! क्योंकि वे दुनिया के घर से, जो केवल कार्य करने का स्थान है, बदले का नहीं, (उससे) निकलकर आखिरत के घर में प्रवेश कर चुके हैं, जो केवल बदला दिए जाने का घर है, कार्य करने का नहीं।
34:53Страница 434
وَقَدۡ كَفَرُواْ بِهِۦ مِن قَبۡلُۖ وَيَقۡذِفُونَ بِٱلۡغَيۡبِ مِن مَّكَانِۭ بَعِيدٖ ٥٣
Они не верили в это прежде и делали предположения из далекого места.
और अब उनका ईमान लाना कैसे सही हो सकता तथा उसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है, जबकि वे सांसारिक जीवन में इसका इनकार कर चुके हैं, और सत्य को पहुँचने से दूर गुमान के आधार पर अटकल बातें करते रहे हैं, जैसा कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बारे में उनका यह कहना कि : वह जादूगर, काहिन और कवि हैं?!
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وَحِيلَ بَيۡنَهُمۡ وَبَيۡنَ مَا يَشۡتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِأَشۡيَاعِهِم مِّن قَبۡلُۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ فِي شَكّٖ مُّرِيبِۭ ٥٤
Между ними и тем, что они пожелают, будет воздвигнута преграда, что прежде произошло с подобными им. Воистину, они терзались смутными сомнениями.
और इन झुठलाने वालों को इनकी इच्छाओं की प्राप्ति, जैसे जीवन के सुखों, कुफ़्र से तौबा, आग से मुक्ति और सांसारिक जीवन में वापसी, से रोक दिया जाएगा, जैसा कि इनसे पहले झुठलाने वाले समुदायों में से इन जैसे लोगों के साथ किया जा चुका है। वे रसूलों की लाई हुई बातों, जैसे एकेश्वरवाद और मरणोपरांत पुनर्जीवन पर ईमान के संबंध में संदेह में पड़े हुए थे, एक ऐसा संदेह जो कुफ़्र का कारण बन गया।
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