Аль-МухтасарАн‑Ниса · 4:92–127

Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди

Ан-Ниса 4:92–127

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وَمَا كَانَ لِمُؤۡمِنٍ أَن يَقۡتُلَ مُؤۡمِنًا إِلَّا خَطَـٔٗاۚ وَمَن قَتَلَ مُؤۡمِنًا خَطَـٔٗا فَتَحۡرِيرُ رَقَبَةٖ مُّؤۡمِنَةٖ وَدِيَةٞ مُّسَلَّمَةٌ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦٓ إِلَّآ أَن يَصَّدَّقُواْۚ فَإِن كَانَ مِن قَوۡمٍ عَدُوّٖ لَّكُمۡ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَتَحۡرِيرُ رَقَبَةٖ مُّؤۡمِنَةٖۖ وَإِن كَانَ مِن قَوۡمِۭ بَيۡنَكُمۡ وَبَيۡنَهُم مِّيثَٰقٞ فَدِيَةٞ مُّسَلَّمَةٌ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦ وَتَحۡرِيرُ رَقَبَةٖ مُّؤۡمِنَةٖۖ فَمَن لَّمۡ يَجِدۡ فَصِيَامُ شَهۡرَيۡنِ مُتَتَابِعَيۡنِ تَوۡبَةٗ مِّنَ ٱللَّهِۗ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمٗا ٩٢

Верующему не подобает убивать верующего, разве что по ошибке. Кто бы ни убил верующего по ошибке, он должен освободить верующего раба и вручить семье убитого выкуп, если только они не пожертвуют им. Если верующий был из враждебного вам племени, то надлежит освободить верующего раба. Если убитый принадлежал к народу, с которым у вас есть договор, то надлежит вручить его семье выкуп и освободить верующего раба. Кто не сможет совершить этого, тому надлежит поститься в течение двух месяцев непрерывно в качестве покаяния перед Аллахом. Аллах - Знающий, Мудрый.

किसी मोमिन के लिए यह उचित नहीं है कि किसी मोमिन की हत्या करे, परन्तु यह कि चूक से ऐसा हो जाए। जो व्यक्ति गलती से किसी मोमिन की हत्या कर दे, वह अपने कृत्य के कफ़्फ़ारा के तौर पर एक मोमिन गुलाम आज़ाद करे और हत्यारे के वारिस रिश्तेदार हत व्यक्ति के वारिसों को दियत (खून की क़ीमत) दें। लेकिन अगर हत व्यकित के वारिस खून के पैसे माफ कर दें, तो दियत समाप्त हो जाएगी। यदि हत व्यक्ति तुमसे युद्ध कने वाली क़ौम से हो, और वह स्वयं मोमिन हो, तो हत्यारे पर (केवल) एक मोमिन ग़ुलाम आज़ाद करना अनिवार्य है, उसपर दियत अनिवार्य नहीं है। तथा यदि हत व्यक्ति ईमान वाला न हो, लेकिन वह ऐसी क़ौम से हो कि तुम्हारे और उनके बीच ज़िम्मियों की तरह कोई प्रतिज्ञा और समझौता हो, तो हत्यारे के वारिस रिश्तेदारों पर हत व्यक्ति के वारिसों को ख़ून की क़ीमत देना अनिवार्य है और हत्यारे को अपने कृत्य के कफ़्फ़ारा के तौर पर एक मोमिन ग़ुलाम आज़ाद करना होगा। यदि उसे आज़ाद करने के लिए ग़ुलाम न मिले अथवा वह ग़ुलाम की क़ीमत भुगतान करने में सक्षम न हो, तो वह लगातार दो महीने बिना किसी बाधा के इस तरह रोज़े रखे कि उनके बीच (बिना किसी कारण के) रोज़ा न तोड़े। ये प्रावधान इसलिए हैं, ताकि अल्लाह उसके किए को क्षमा कर दे। अल्लाह अपने बंदों के कृत्यों और उनके इरादों से अवगत, अपने विधान और प्रबंधन में हिकमत वाला है।

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وَمَن يَقۡتُلۡ مُؤۡمِنٗا مُّتَعَمِّدٗا فَجَزَآؤُهُۥ جَهَنَّمُ خَٰلِدٗا فِيهَا وَغَضِبَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِ وَلَعَنَهُۥ وَأَعَدَّ لَهُۥ عَذَابًا عَظِيمٗا ٩٣

Если же кто-либо убьет верующего преднамеренно, то возмездием ему будет Геенна, в которой он пребудет вечно. Аллах разгневается на него, проклянет его и приготовит ему великие мучения.

जो व्यक्ति किसी मोमिन को बिना किसी हक़ के जान-बूझकर क़त्ल कर दे; तो उसका बदला जहन्नम में प्रवेश है, जिसमें वह हमेशा के लिए रहेगा, यदि उसने उसे हलाल समझा या उससे तौबा नहीं किया। तथा अल्लाह उसपर क्रोधित है और उसे अपनी दया से निष्कासित कर दिया। तथा उसके इस महान पाप को करने के कारण, उसके लिए बड़ा अज़ाब तैयार कर रखा है।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا ضَرَبۡتُمۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَتَبَيَّنُواْ وَلَا تَقُولُواْ لِمَنۡ أَلۡقَىٰٓ إِلَيۡكُمُ ٱلسَّلَٰمَ لَسۡتَ مُؤۡمِنٗا تَبۡتَغُونَ عَرَضَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا فَعِندَ ٱللَّهِ مَغَانِمُ كَثِيرَةٞۚ كَذَٰلِكَ كُنتُم مِّن قَبۡلُ فَمَنَّ ٱللَّهُ عَلَيۡكُمۡ فَتَبَيَّنُوٓاْۚ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٗا ٩٤

О те, которые уверовали! Когда вы выступаете на пути Аллаха, то удостоверяйтесь и не говорите тому, кто приветствует вас миром: «Ты - неверующий», - стремясь обрести тленные блага мирской жизни. У Аллаха есть богатая добыча. Такими вы были прежде, но Аллах оказал вам милость, и посему удостоверяйтесь. Воистину, Аллах ведает о том, что вы совершаете.

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जब तुम अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए निकलो, तो छानबीन कर लिया करो कि किससे युद्ध कर रहे हो और जो तुम्हें अपने मुसलमान होने का सबूत दिखाए, उसे यह न कहो कि तुम मोमिन नहीं हो, बल्कि तुम केवल अपनी जान एवं माल की रक्षा के लिए मुसलमान होने का प्रदर्शन कर रहे हो। फिर तुम ग़नीमत के धन जैसे दुनिया के तुच्छ सामानों के लोभ में उसकी हत्या कर दो! सुनो, अल्लाह के पास बहुत-सी ग़नीमतें हैं, जो इससे बेहतर और बड़ी हैं। इससे पहले तुम भी इसी व्यक्ति की तरह थे, जो अपनी क़ौम से अपना ईमान छिपा रहा है। फिर अल्लाह ने इस्लाम की दौलत प्रदानकर तुमपर उपकार किया और तुम्हारे रक्त की रक्षा की। इसलिए छानबीन कर लिया करो। यक़ीनन अल्लाह से तुम्हारा कोई छोटे से छोटा कार्य भी छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

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لَّا يَسۡتَوِي ٱلۡقَٰعِدُونَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ غَيۡرُ أُوْلِي ٱلضَّرَرِ وَٱلۡمُجَٰهِدُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ بِأَمۡوَٰلِهِمۡ وَأَنفُسِهِمۡۚ فَضَّلَ ٱللَّهُ ٱلۡمُجَٰهِدِينَ بِأَمۡوَٰلِهِمۡ وَأَنفُسِهِمۡ عَلَى ٱلۡقَٰعِدِينَ دَرَجَةٗۚ وَكُلّٗا وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلۡحُسۡنَىٰۚ وَفَضَّلَ ٱللَّهُ ٱلۡمُجَٰهِدِينَ عَلَى ٱلۡقَٰعِدِينَ أَجۡرًا عَظِيمٗا ٩٥

Те из верующих, которые отсиживаются, не равны тем, которые сражаются на пути Аллаха своим имуществом и своими душами, кроме тех, кто испытывает тяготы. Аллах возвысил тех, которые сражаются своим имуществом и своими душами, над теми, которые отсиживаются, на целую степень, но каждому из них Аллах обещал Наилучшее (Рай). Аллах возвысил сражающихся над отсиживающимися благодаря великой награде -

उज़्र वालों जैसे कि बीमार और अंधे लोगों के अलावा अल्लाह के रास्ते में जिहाद छोड़कर घर बैठ रहने वाले मोमिन तथा अल्लाह के मार्ग में अपनी जानों और मालों के साथ जिहाद करने वाले बराबर नहीं हो सकते। अल्लाह ने जान एवं माल के साथ जिहाद करने वालों को पद के एतिबार से, जिहाद से बैठे रहने वालों पर प्रधानता प्रदान किया है। जबकि जिहाद करने वालों और उचित कारण की बिना पर जिहाद से बैठे रहने वालों में से प्रत्येक को उसका वह प्रतिफल मिलेगा जिसका वह वह हक़दार है।परंतु अल्लाह ने जिहाद करने वालों को अपनी ओर से महान प्रतिफल देकर उन्हें जिहाद से बैठ रहने वालों पर श्रेष्ठता प्रदान किया है।

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دَرَجَٰتٖ مِّنۡهُ وَمَغۡفِرَةٗ وَرَحۡمَةٗۚ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورٗا رَّحِيمًا ٩٦

ступеням от Него, прощению и милости. Аллах - Прощающий, Милосердный.

यह सवाब (स्वर्ग में) एक के ऊपर एक घरों, साथ ही साथ उनके पापों के क्षमादान और उनपर अल्लाह की दया के रूप में होगा। तथा अल्लाह अपने बंदों को बड़ा क्षमा करने वाला और उन पर दया करने वाला है।

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إِنَّ ٱلَّذِينَ تَوَفَّىٰهُمُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ ظَالِمِيٓ أَنفُسِهِمۡ قَالُواْ فِيمَ كُنتُمۡۖ قَالُواْ كُنَّا مُسۡتَضۡعَفِينَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ قَالُوٓاْ أَلَمۡ تَكُنۡ أَرۡضُ ٱللَّهِ وَٰسِعَةٗ فَتُهَاجِرُواْ فِيهَاۚ فَأُوْلَٰٓئِكَ مَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَسَآءَتۡ مَصِيرًا ٩٧

Тем, кого ангелы умертвят чинящими несправедливость по отношению к самим себе, скажут: «В каком положении вы находились?». Они скажут: «Мы были слабы и притеснены на земле». Они скажут: «Разве земля Аллаха не была обширна для того, чтобы вы переселились на ней». Их обителью станет Геенна. Как же скверно это место прибытия!

फ़रिश्ते जिन लोगाों के प्राण इस हाल में निकालते हैं कि वे कुफ़्र की नगरी से इस्लाम की नगरी की तरफ़ हिजरत न करके अपने ऊपर अत्याचार करने वाले होते हैं, तो फरिश्ते उनका प्राण निकालते समय उन्हें फटकार लगाते हुए कहते हैं : तुम किस हाल में थे? और तुम किस चीज़ के द्वारा मुश्रिकों से भिन्न थे? तो वे कारण बताते हुए जवाब देते हैं : हम कमज़ोर व असहाय थे, हमारे पास इतनी शक्ति और ताक़त नहीं थी जिससे हम अपना बचाव कर सकते। तो फ़रिश्ते उन्हें फटकारते हुए कहेंगे : क्या अल्लाह की धरती विस्तृत नहीं थी कि तुम उसमें हिजरत कर जाते ताकि तुम अपने धर्म और अपने आपको अपमान और उत्पीड़न से बचा सकते?! अतः वे लोग जिन्होंने हिजरत नहीं किया, उनका ठिकाना जहाँ वे रहेंगे, नरक है और वह उनके लिए बहुत ही बुरा ठिकाना है।

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إِلَّا ٱلۡمُسۡتَضۡعَفِينَ مِنَ ٱلرِّجَالِ وَٱلنِّسَآءِ وَٱلۡوِلۡدَٰنِ لَا يَسۡتَطِيعُونَ حِيلَةٗ وَلَا يَهۡتَدُونَ سَبِيلٗا ٩٨

Это не относится только к тем слабым мужчинам, женщинам и детям, которые не могут ухитриться и не находят правильного пути.

فَأُوْلَٰٓئِكَ عَسَى ٱللَّهُ أَن يَعۡفُوَ عَنۡهُمۡۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَفُوًّا غَفُورٗا ٩٩

Таких Аллах может простить, ведь Аллах - Снисходительный, Прощающий.

परंतु सज़ा की इस धमकी से उज़्र वाले कमज़ोर व लाचार पुरुष, स्त्री और बच्चे अलग हैं, जिनके पास अपने आपसे अत्याचार और उत्पीड़न को हटाने की शक्ति नहीं है तथा वे अपने उत्पीड़न से छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं पाते हैं। तो अल्लाह ऐसे लोगों को अपनी दया व कृपा से निश्चय ही माफ़ कर देगा। अल्लाह अपने बंदों को माफ़ करने वाला और उनमें से तौबा करने वालों को क्षमा करने वाला है।

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۞ وَمَن يُهَاجِرۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ يَجِدۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُرَٰغَمٗا كَثِيرٗا وَسَعَةٗۚ وَمَن يَخۡرُجۡ مِنۢ بَيۡتِهِۦ مُهَاجِرًا إِلَى ٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ ثُمَّ يُدۡرِكۡهُ ٱلۡمَوۡتُ فَقَدۡ وَقَعَ أَجۡرُهُۥ عَلَى ٱللَّهِۗ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورٗا رَّحِيمٗا ١٠٠

Кто совершает переселение на пути Аллаха, тот найдет на земле много пристанищ и изобилие. Если же кто-либо покидает свой дом, переселяясь к Аллаху и Его Посланнику, после чего его настигает смерть, то его награда ложится на Аллаха. Аллах - Прощающий, Милосердный.

जो व्यक्ति अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए कुफ़्र के देश से इस्लाम के देश की ओर हिजरत करेगा, वह उस भूमि में जिसमें उसने पलायन किया है एक नया स्थान और ज़मीन पाएगा, जहाँ उसे गौरव और व्यापक आजीविका प्राप्त होगी। तथा जो व्यक्ति अपने घर से अल्लाह और उसके रसूल की ओर हिजरत के उद्देश्य से निकलता है, फिर उसके अपने प्रवास स्थल पर पहुँचने से पहले उसकी मृत्यु हो जाती है, तो अल्लाह के यहाँ उसका सवाब निश्चित हो गया। इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि वह अपने प्रवास स्थल तक नहीं पहुँच सका। तथा अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है।

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وَإِذَا ضَرَبۡتُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَلَيۡسَ عَلَيۡكُمۡ جُنَاحٌ أَن تَقۡصُرُواْ مِنَ ٱلصَّلَوٰةِ إِنۡ خِفۡتُمۡ أَن يَفۡتِنَكُمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْۚ إِنَّ ٱلۡكَٰفِرِينَ كَانُواْ لَكُمۡ عَدُوّٗا مُّبِينٗا ١٠١

Когда вы странствуете по земле, то на вас не будет греха, если вы укоротите некоторые из намазов, если вы опасаетесь искушения со стороны неверующих. Воистину, неверующие являются вашими явными врагами.

जब तुम धरती में यात्रा करो और काफ़िरों की ओर से कोई कष्ट पहुँचने का डर हो, तो चार रक्अत वाली नमाज़ों को क़स्र (कम) करके दो रक्अत पढ़ने में तुमपर कोई गुनाह नहीं है। निःसंदेह काफ़िरों की तुमसे दुश्मनी बिल्कुल खुली हुई स्पष्ट है। तथा सहीह सुन्नत (हदीस) से साबित है कि सुरक्षा की स्थिति में भी यात्रा करने में नमाज़ को क़स्र करना जायज़ है।

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وَإِذَا كُنتَ فِيهِمۡ فَأَقَمۡتَ لَهُمُ ٱلصَّلَوٰةَ فَلۡتَقُمۡ طَآئِفَةٞ مِّنۡهُم مَّعَكَ وَلۡيَأۡخُذُوٓاْ أَسۡلِحَتَهُمۡۖ فَإِذَا سَجَدُواْ فَلۡيَكُونُواْ مِن وَرَآئِكُمۡ وَلۡتَأۡتِ طَآئِفَةٌ أُخۡرَىٰ لَمۡ يُصَلُّواْ فَلۡيُصَلُّواْ مَعَكَ وَلۡيَأۡخُذُواْ حِذۡرَهُمۡ وَأَسۡلِحَتَهُمۡۗ وَدَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡ تَغۡفُلُونَ عَنۡ أَسۡلِحَتِكُمۡ وَأَمۡتِعَتِكُمۡ فَيَمِيلُونَ عَلَيۡكُم مَّيۡلَةٗ وَٰحِدَةٗۚ وَلَا جُنَاحَ عَلَيۡكُمۡ إِن كَانَ بِكُمۡ أَذٗى مِّن مَّطَرٍ أَوۡ كُنتُم مَّرۡضَىٰٓ أَن تَضَعُوٓاْ أَسۡلِحَتَكُمۡۖ وَخُذُواْ حِذۡرَكُمۡۗ إِنَّ ٱللَّهَ أَعَدَّ لِلۡكَٰفِرِينَ عَذَابٗا مُّهِينٗا ١٠٢

Когда ты находишься среди них и руководишь их намазом, то пусть одна группа из них встанет вместе с тобой, и пусть они возьмут свое оружие. Когда же они совершат земной поклон, пусть они находятся позади вас. Пусть затем придет другая группа, которая еще не молилась, пусть они помолятся вместе с тобой, будут осторожны и возьмут свое оружие. Неверующим хотелось бы, чтобы вы беспечно отнеслись к своему оружию и своим вещам, дабы они могли напасть на вас всего один раз (покончить с вами одним разом). На вас не будет греха, если вы отложите свое оружие, когда испытываете неудобство от дождя или больны, но будьте осторожны. Воистину, Аллах приготовил неверующим унизительные мучения.

जब - ऐ रसूल! - आप दुश्मन से युद्ध के समय सेना के साथ रहें और लोगों को नमाज़ पढ़ाना चाहें, तो सेना को दो समूहों में विभाजित कर दें : एक समूह आपके साथ नमाज़ पढ़े और नमाज़ के समय हथियार अपने साथ रखे। दूसरा समूह तुम्हारी पहरेदारी करे। जब पहला समूह इमाम के साथ एक रक्अत पढ़ ले, तो अकेले नमाज़ पूरी कर ले। जब वह नमाज़ पढ़ चुके तो तुम्हारे पीछे दुश्मन की ओर खड़ा हो जाए और वह समूह आए जो पहरेदारी में लगे होने के कारण नमाज़ नहीं पढ़ सका था और इमाम के साथ एक रक्अत नमाज़ पढ़े। जब इमाम सलाम फेर दे, तो वह अपनी बाक़ी नमाज़ पूरी करे और दुश्मन से बचाव के लिए अपने हथियार उठाए रखे। क्योंकि काफ़िर चाहते हैं कि नमाज़ के समय तुम अपने हथियारों और सामानों से बेख़बर हो जाओ और वे तुमपर यकायक धावा बोल दें और तुम्हारी असावधानी की हालत में तुम्हें पकड़ लें। यदि वर्षा के कारण तुम्हें कष्ट हो अथवा तुम बीमार आदि हो, तो तुमपर कोई गुनाह नहीं है कि तुम अपने हथियार रख दो और उसे उठाए न रहो, परंतु जहाँ तक हो सके अपने दुश्मन से सावधान रहो। निःसंदेह अल्लाह ने काफ़िरों के लिए अपमानकारी यातना तैयार कर रखी है।

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فَإِذَا قَضَيۡتُمُ ٱلصَّلَوٰةَ فَٱذۡكُرُواْ ٱللَّهَ قِيَٰمٗا وَقُعُودٗا وَعَلَىٰ جُنُوبِكُمۡۚ فَإِذَا ٱطۡمَأۡنَنتُمۡ فَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَۚ إِنَّ ٱلصَّلَوٰةَ كَانَتۡ عَلَى ٱلۡمُؤۡمِنِينَ كِتَٰبٗا مَّوۡقُوتٗا ١٠٣

Когда вы завершите намаз, то поминайте Аллаха стоя, сидя или лежа на боках. Когда же вы окажетесь в безопасности, то совершайте намаз. Воистину, намаз предписан верующим в определенное время.

जब - ऐ मोमिनो - तुम नमाज़ अदा कर चुको, तो खड़े, बैठे और लेटे अपनी सभी परिस्थितियों में तस्बीह, तहमीद और तहलील के साथ अल्लाह को याद करो। फिर जब तुम्हारा भय दूर हो जाए और तुम निश्चिंत हो जाओ तो नमाज़ को उसके अर्कान, वाजिबात और मुस्तह़ब्बात के साथ पूर्ण रूप से अदा करो, जैसा कि तुम्हें आदेश दिया गया है। निःसंदेह नमाज़ मोमिनों पर एक नियत समय के साथ फ़र्ज की गई है। उसे बिना किसी कारण के उसके निर्धारित समय से विलंब करना जायज़ नहीं है। यह किसी स्थान पर निवास करने की स्थिति में है, लेकिन यात्रा की हालत में तुम्हारे लिए दो नमाजों को एक साथ पढ़ना तथा चार रक्अत वाली नमाज़ को क़स्र करके दो रक्अत पढ़ना जायज़ है।

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وَلَا تَهِنُواْ فِي ٱبۡتِغَآءِ ٱلۡقَوۡمِۖ إِن تَكُونُواْ تَأۡلَمُونَ فَإِنَّهُمۡ يَأۡلَمُونَ كَمَا تَأۡلَمُونَۖ وَتَرۡجُونَ مِنَ ٱللَّهِ مَا لَا يَرۡجُونَۗ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمًا ١٠٤

Не проявляйте слабости при преследовании врага. Если вы страдаете, то они тоже страдают так, как страдаете вы. Но вы надеетесь получить от Аллаха то, на что они не надеются. Аллах - Знающий, Мудрый.

- ऐ मोमिनो - अपने काफ़िर दुश्मनों का पीछा करने में कमज़ोर और आलसी न बनो। यदि तुम्हें अपने आपको पहुँचने वाले क़त्ल और आघात से तकलीफ़ महसूस होती है, तो इसी तरह वे भी तकलीफ़ महसूस करते हैं जिस तरह तुम तकलीफ़ महसूस करते हो, तथा उन्हें भी कष्ट पहुँचता है जिस तरह तुमहें कष्ट पहुँचता है। अतः उनका धैर्य तुम्हारे धैर्य से बढ़कर नहीं होना चाहिए। क्योंकि तुम्हें अल्लाह से जिस सवाब, सहायता और समर्थन की आशा है, उसकी आशा उन्हें नहीं है। और अल्लाह अपने बंदों की स्थितियों से अवगत, तथा अपने प्रबंधन और विधान-रचना में हिकमत वाला है।

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إِنَّآ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ بِٱلۡحَقِّ لِتَحۡكُمَ بَيۡنَ ٱلنَّاسِ بِمَآ أَرَىٰكَ ٱللَّهُۚ وَلَا تَكُن لِّلۡخَآئِنِينَ خَصِيمٗا ١٠٥

Мы ниспослали тебе Писание с истиной, чтобы ты разбирал тяжбы между людьми так, как тебе показал Аллах. Посему не препирайся за изменников.

हमने - ऐ रसूल - आपकी ओर सत्य पर आधारित क़ुरआन उतारा है; ताकि आप लोगों के बीच उनके सभी मामलों में उसके अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने आपको सिखाया और आपके दिल में डाला है, न कि अपने मन की आकांक्षा और राय के अनुसार। तथा आप स्वयं के साथ विश्वासघात करने वालों और अमानतों में ख़यानत करने वालों के तरफ़दार न बनें कि उनसे अधिकार माँगने वालों से उनका बचाव करें।

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وَٱسۡتَغۡفِرِ ٱللَّهَۖ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ غَفُورٗا رَّحِيمٗا ١٠٦

Проси прощения у Аллаха, ведь Аллах - Прощающий, Милосердный.

अल्लाह से क्षमा और माफ़ी की याचना करें। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदे को क्षमा करने वाला और उसपर दया करने वाला है।

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وَلَا تُجَٰدِلۡ عَنِ ٱلَّذِينَ يَخۡتَانُونَ أَنفُسَهُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ مَن كَانَ خَوَّانًا أَثِيمٗا ١٠٧

Не препирайся за тех, которые предают самих себя (ослушаются Аллаха), ведь Аллах не любит того, кто является изменником, грешником.

आप किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष न लें, जो विश्वासघात करता है और अपने विश्वासघात को छिपाने में अतिशयोक्ति करता है। और अल्लाह ऐसे व्यक्ति को पसंद नहीं करता जो बहुत विश्वासघात और पाप करने वाला है।

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يَسۡتَخۡفُونَ مِنَ ٱلنَّاسِ وَلَا يَسۡتَخۡفُونَ مِنَ ٱللَّهِ وَهُوَ مَعَهُمۡ إِذۡ يُبَيِّتُونَ مَا لَا يَرۡضَىٰ مِنَ ٱلۡقَوۡلِۚ وَكَانَ ٱللَّهُ بِمَا يَعۡمَلُونَ مُحِيطًا ١٠٨

Они укрываются от людей, но не укрываются от Аллаха, тогда как Он находится с ними, когда они произносят по ночам слова, которыми Он не доволен. Аллах объемлет то, что они совершают.

वे गुनाह करते समय भय और शर्म के कारण लोगों से छिपते हैं, परंतु अल्लाह से नहीं छिपते। हालाँकि अल्लाह अपने ज्ञान के द्वारा उनके साथ होता है। उससे उस समय उनकी कोई बात छिपी नहीं होती है, जब वे गुप्त रूप से ऐसी बात की योजना बनाते हैं, जो अल्लाह को पसंद नहीं है। जैसे कि दोषी का बचाव करना और निर्दोष पर आरोप लगाना। तथा वे जो कुछ गुप्त रूप से और सार्वजनिक रूप से करते हैं, अल्लाह उससे अच्छी तरह अवगत है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है और वह उन्हें उनके कार्यों का बदला देगा।

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هَٰٓأَنتُمۡ هَٰٓؤُلَآءِ جَٰدَلۡتُمۡ عَنۡهُمۡ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا فَمَن يُجَٰدِلُ ٱللَّهَ عَنۡهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ أَم مَّن يَكُونُ عَلَيۡهِمۡ وَكِيلٗا ١٠٩

Вот вы препираетесь за них в этом мире. Но кто станет препираться за них с Аллахом в День воскресения? Или кто будет их защитником?

सुनो, - ऐ इन अपराध करने वालों की परवाह करने वालो!- तुमने दुनिया के जीवन में इनकी ओर से झगड़ लिया ताकि तुम इनकी बेगुनाही साबित कर सको और उन्हें सज़ा से बचा सको। परंतु क़यामत के दिन इनकी ओर से अल्लाह के साथ कौन बहस करेगा, जबकि वह इनकी स्थिति की सच्चाई को जानता है?! तथा उस दिन इनका वकील कौन होगा?! इसमें कोई शक नहीं कि कोई भी ऐसा नहीं कर सकता।

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وَمَن يَعۡمَلۡ سُوٓءًا أَوۡ يَظۡلِمۡ نَفۡسَهُۥ ثُمَّ يَسۡتَغۡفِرِ ٱللَّهَ يَجِدِ ٱللَّهَ غَفُورٗا رَّحِيمٗا ١١٠

Если кто-либо совершит злодеяние или будет несправедлив по отношению к себе, а затем попросит у Аллаха прощения, то он найдет Аллаха Прощающим и Милосердным.

जो व्यक्ति कोई बुरा काम करे अथवा पाप करके अपने ऊपर अत्याचार करे, फिर वह अपने गुनाह को स्वीकारते हुए, उसपर पछतावा करते हुए और उसे छोड़ते हुए अल्लाह से क्षमा याचना करे, तो वह अल्लाह को हमेशा उसके गुनाहों को क्षमा करने वाला, उसपर दयावान पाएगा।

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وَمَن يَكۡسِبۡ إِثۡمٗا فَإِنَّمَا يَكۡسِبُهُۥ عَلَىٰ نَفۡسِهِۦۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمٗا ١١١

Кто совершил грех, тот совершил его во вред себе. Аллах - Знающий, Мудрый.

जो व्यक्ति कोई छोटा या बड़ा पाप करता है, तो उसकी सज़ा अकेले उसी पर है, उसके अलावा किसी और पर नहीं। तथा अल्लाह बंदों के कृत्यों को जानने वाला, अपने प्रबंधन और विधान-रचना में हिकमत वाला है।

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وَمَن يَكۡسِبۡ خَطِيٓـَٔةً أَوۡ إِثۡمٗا ثُمَّ يَرۡمِ بِهِۦ بَرِيٓـٔٗا فَقَدِ ٱحۡتَمَلَ بُهۡتَٰنٗا وَإِثۡمٗا مُّبِينٗا ١١٢

А кто совершил ошибку или грех и обвинил в этом невиновного, тот взвалил на себя бремя клеветы и очевидного греха.

जो व्यक्ति बिना सोचे समझे कोई ग़लती कर बैठे अथवा जानबूझकर कोई पाप कर ले, फिर उसका आरोप किसी ऐसे आदमी पर मढ़ दे जो उस पाप से निर्दोष है, तो उसने ऐसा करके गंभीर झूठ और खुले गुनाह का बोझ लाद लिया।

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وَلَوۡلَا فَضۡلُ ٱللَّهِ عَلَيۡكَ وَرَحۡمَتُهُۥ لَهَمَّت طَّآئِفَةٞ مِّنۡهُمۡ أَن يُضِلُّوكَ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّآ أَنفُسَهُمۡۖ وَمَا يَضُرُّونَكَ مِن شَيۡءٖۚ وَأَنزَلَ ٱللَّهُ عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَعَلَّمَكَ مَا لَمۡ تَكُن تَعۡلَمُۚ وَكَانَ فَضۡلُ ٱللَّهِ عَلَيۡكَ عَظِيمٗا ١١٣

Если бы не милосердие и милость Аллаха к тебе, то группа из них вознамерилась бы ввести тебя в заблуждение, однако они вводят в заблуждение только самих себя и ничем не вредят тебе. Аллах ниспослал тебе Писание и мудрость и научил тебя тому, чего ты не знал. Милость Аллаха к тебе велика!

और (ऐ रसूल!) यदि अल्लाह ने अपने अनुग्रह से आपको बचाया न होता, तो अपने साथ विश्वासघात करने वाले इन लोगों के एक समूह ने आपको सत्य से गुमराह करने का निर्णय कर लिया था, ताकि आप न्याय के बिना फ़ैसला करें। हालाँकि वास्तव में वे केवल अपने आपको गुमराह कर रहे हैं। क्योंकि उनके गुमराह करने के प्रयास का परिणाम उन्हीं को भुगतना पड़ेगा। और अल्लाह के आपको संरक्षण प्रदान करने के कारण वे आपको नुकसान नहीं पहुँचा सकते हैं। अल्लाह ने आप पर क़ुरआन एवं सुन्नत उतारी है और आपको हिदायत एवं प्रकाश का वह ज्ञान प्रदान किया है, जो आप उससे पहले नहीं जानते थे। तथा नुबुव्वत (ईश्दूतत्व) और संरक्षण द्वारा आपपर अल्लाह का अनुग्रह बहुत बड़ा था।

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۞ لَّا خَيۡرَ فِي كَثِيرٖ مِّن نَّجۡوَىٰهُمۡ إِلَّا مَنۡ أَمَرَ بِصَدَقَةٍ أَوۡ مَعۡرُوفٍ أَوۡ إِصۡلَٰحِۭ بَيۡنَ ٱلنَّاسِۚ وَمَن يَفۡعَلۡ ذَٰلِكَ ٱبۡتِغَآءَ مَرۡضَاتِ ٱللَّهِ فَسَوۡفَ نُؤۡتِيهِ أَجۡرًا عَظِيمٗا ١١٤

Многие из их тайных бесед не приносят добра, если только они не призывают раздавать милостыню, совершать одобряемое или примирять людей. Тому, кто поступает таким образом, стремясь к довольству Аллаха, Мы даруем великую награду.

बहुत-सी ऐसी बातें जो लोग छिपाकर करते हैं,उनमें कोई भलाई नहीं है और न उनसे कोई लाभ मिलता है। हाँ, अगर उनकी बात में दान का या किसी ऐसी बात (नेकी) का आदेश हो जो शरीयत द्वारा आई हो और बुद्धि ने उसकी पुष्टि की हो, या दो झगड़ने वालों के बीच सुलह-सफाई का आह्वान हो (तो यह भली बात है)। तथा जो व्यक्ति अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ऐसा करेगा, हम जल्द ही उसे बहुत बड़ा सवाब प्रदान करेंगे।

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وَمَن يُشَاقِقِ ٱلرَّسُولَ مِنۢ بَعۡدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُ ٱلۡهُدَىٰ وَيَتَّبِعۡ غَيۡرَ سَبِيلِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ نُوَلِّهِۦ مَا تَوَلَّىٰ وَنُصۡلِهِۦ جَهَنَّمَۖ وَسَآءَتۡ مَصِيرًا ١١٥

А того, кто воспротивится Посланнику после того, как ему стал ясен прямой путь, и последует не путем верующих, Мы направим туда, куда он обратился, и сожжем в Геенне. Как же скверно это место прибытия!

जो अपने सामने सत्य स्पष्ट हो जाने के बावजूद रसूल से दुश्मनी करेगा, उनके लाए हुए धर्म का विरोध करेगा और मोमिनों के मार्ग को छोड़कर दूसरे मार्ग पर चलेगा, हम उसे उसके चुने हुए मार्ग पर छोड़ देंगे। उसके जानबूझकर सत्य से मुँह फेरने के कारण हम उसे सत्य मार्ग की तौफ़ीक़ नहीं देंगे और उसे जहन्नम की आग में दाख़िल करेंगे, जहाँ वह उसके ताप को झेलेगा। यह उसमें रहने वालों का बुरा ठिकाना है।

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إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَغۡفِرُ أَن يُشۡرَكَ بِهِۦ وَيَغۡفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَآءُۚ وَمَن يُشۡرِكۡ بِٱللَّهِ فَقَدۡ ضَلَّ ضَلَٰلَۢا بَعِيدًا ١١٦

Воистину, Аллах не прощает, когда к Нему приобщают сотоварищей, но прощает все остальные (или менее тяжкие) грехи, кому пожелает. А кто приобщает к Аллаху сотоварищей, тот впал в глубокое заблуждение.

निःसंदेह अल्लाह इस बात को क्षमा नहीं करेगा कि किसी को उसका साझी बनाया जाए, बल्कि साझी बनाने वाले को हमेशा के लिए जहन्नम में डाल देगा। लेकिन शिर्क से कमतर गुनाहों को जिसके लिए चाहेगा अपनी दया एवं कृपा से माफ़ कर देगा। जो किसी को अल्लाह का साझी बनाता है, वह निश्चय ही सत्य मार्ग से भटक गया और उससे बहुत दूर हो गया; क्योंकि उसने सृष्टि और सृष्टिकर्ता को बराबर बना दिया।

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إِن يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦٓ إِلَّآ إِنَٰثٗا وَإِن يَدۡعُونَ إِلَّا شَيۡطَٰنٗا مَّرِيدٗا ١١٧

Они взывают вместо Аллаха лишь к существам женского рода. Они взывают лишь к мятежному дьяволу.

ये मुश्रिक (बहुदेववादी) अल्लाह के साथ जिनकी पूजा करते और पुकारते हैं, वे केवल महिलाओं के नाम की मूर्तियाँ हैं, जैसे कि लात और उज़्ज़ा,जो न लाभ पहुँचा सकती हैं, न हानि। वास्तव में, वे केवल एक ऐसे शैतान की पूजा करते हैं जो अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकला हुआ है और उसमें कोई अच्छाई नहीं है; क्योंकि उसी ने उन्हें मूर्तियों की पूजा करने का आदेश दिया है।

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لَّعَنَهُ ٱللَّهُۘ وَقَالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِنۡ عِبَادِكَ نَصِيبٗا مَّفۡرُوضٗا ١١٨

Аллах проклял его, и он сказал: «Я непременно заберу назначенную часть Твоих рабов.

इसलिए, अल्लाह ने उसे अपनी दया से निष्कासित कर दिया। इस शैतान ने क़सम खाकर अपने पालनहार से कहा था : मैं अवश्य तेरे बंदों में से एक ज्ञात हिस्सा अपने साथ कर लूँगा, जिन्हें सत्य से बहकाऊँगा।

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وَلَأُضِلَّنَّهُمۡ وَلَأُمَنِّيَنَّهُمۡ وَلَأٓمُرَنَّهُمۡ فَلَيُبَتِّكُنَّ ءَاذَانَ ٱلۡأَنۡعَٰمِ وَلَأٓمُرَنَّهُمۡ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلۡقَ ٱللَّهِۚ وَمَن يَتَّخِذِ ٱلشَّيۡطَٰنَ وَلِيّٗا مِّن دُونِ ٱللَّهِ فَقَدۡ خَسِرَ خُسۡرَانٗا مُّبِينٗا ١١٩

Я непременно введу их в заблуждение, возбужу в них надежды, прикажу им обрезать уши у скотины и прикажу им искажать творение Аллаха». Кто сделал дьявола своим покровителем и помощником вместо Аллаха, тот уже потерпел очевидный убыток.

मैं उन्हें ज़रूर तेरे सीधे मार्ग से रोकूँगा, उन्हें अवश्य उनकी गुमराही को सजाने वाले झूठे वादों के साथ उम्मीदें दिलाऊँगा। अल्लाह के हलाल किए हुए जानवरों को हराम करने के लिए, उन्हें जानवरों के कान काटने का आदेश दूँगा। तथा उन्हें अल्लाह की रचना और उसकी प्रकृति को बदलने के लिए भी ज़रूर आदेश दूँगा। तथा जो शैतान को अपना सहायक व दोस्त बनाकर, उससे दोस्ती निभाता और उसकी आज्ञा का पालन करता है, तो वह धिक्कारित शैतान से वफादारी करके एक स्पष्ट नुक़सान में पड़ गया।

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يَعِدُهُمۡ وَيُمَنِّيهِمۡۖ وَمَا يَعِدُهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ إِلَّا غُرُورًا ١٢٠

Он дает им обещания и возбуждает в них надежды. Но дьявол не обещает им ничего, кроме обольщения.

शैतान उनसे झूठे वादे करता है और उन्हें झूठी उम्मीदें दिलाता है। हालाँकि, वास्तव में, वह उनसे झूठा वादा करता है, जिसकी कोई सच्चाई नहीं होती है।

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أُوْلَٰٓئِكَ مَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنۡهَا مَحِيصٗا ١٢١

Их пристанищем будет Геенна, и они не найдут пути к спасению оттуда.

शैतान के नक्शेकदम और उसकी सिखाई हुई बातों का पालन करने वाले लोगों का ठिकाना जहन्नम की आग है, जिससे भाग निकलने का कोई स्थान नहीं पाएँगे जहाँ वे पनाह ले सकें।

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وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ سَنُدۡخِلُهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۖ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٗاۚ وَمَنۡ أَصۡدَقُ مِنَ ٱللَّهِ قِيلٗا ١٢٢

А тех, которые уверовали и совершали праведные деяния, Мы введем в Райские сады, в которых текут реки. Они пребудут там вечно по истинному обещанию Аллаха. Чья речь правдивее речи Аллаха?

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उससे क़रीब करने वाले अच्छे कार्य किए, हम उन्हें ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेंगे, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती है। वे उनमें हमेशा के लिए रहेंगे। यह अल्लाह का वचन है और उसका वचन सच्चा है। क्योंकि वह वचन को नहीं तोड़ता है और अल्लाह से बढ़कर वचन में सच्चा कोई नहीं।

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لَّيۡسَ بِأَمَانِيِّكُمۡ وَلَآ أَمَانِيِّ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِۗ مَن يَعۡمَلۡ سُوٓءٗا يُجۡزَ بِهِۦ وَلَا يَجِدۡ لَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيّٗا وَلَا نَصِيرٗا ١٢٣

Этого не достичь посредством ваших мечтаний или мечтаний людей Писания. Кто творит зло, тот получит за него воздаяние и не найдет для себя вместо Аллаха ни покровителя, ни помощника.

मोक्ष और सफलता का मामला - ऐ मुसलमानो! - तुम्हारी कामनाओं पर या अह्ले किताब की कामनाओं पर निर्भर नहीं है। बल्कि, यह मामला काम से जुड़ा है। इसलिए तुममें से जो भी बुरा काम करेगा, क़यामत के दिन उसका बदला पाएगा। उसे अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं मिलेगा, जो उसे लाभ पहुँचा सके और न उसे कोई सहायक मिलेगा, जो उससे नुक़सान को टाल सके।

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وَمَن يَعۡمَلۡ مِنَ ٱلصَّٰلِحَٰتِ مِن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَأُوْلَٰٓئِكَ يَدۡخُلُونَ ٱلۡجَنَّةَ وَلَا يُظۡلَمُونَ نَقِيرٗا ١٢٤

А те мужчины и женщины, которые совершают некоторые из праведных поступков, будучи верующими, войдут в Рай, и не будут обижены даже на величину выемки на финиковой косточке.

जो भी अच्छे कार्य करता है, चाहे नर हो या नारी और वह अल्लाह पर सच्चा ईमान भी रखने वाला है, तो ऐसे लोग जिन्होंने ईमान के साथ सत्कर्म भी किया, जन्नत में प्रवेश करेंगे। उनके कार्यों के प्रतिफल में कुछ भी कमी नहीं की जाएगी, भले ही वह खजूर की गुठली के ऊपरी भाग के गड्ढे जितना कम क्यों न हो।

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وَمَنۡ أَحۡسَنُ دِينٗا مِّمَّنۡ أَسۡلَمَ وَجۡهَهُۥ لِلَّهِ وَهُوَ مُحۡسِنٞ وَٱتَّبَعَ مِلَّةَ إِبۡرَٰهِيمَ حَنِيفٗاۗ وَٱتَّخَذَ ٱللَّهُ إِبۡرَٰهِيمَ خَلِيلٗا ١٢٥

Чья религия может быть прекраснее религии того, кто покорил свой лик Аллаху, творя добро, и последовал за верой Ибрахима (Авраама), ханифа? Ведь Аллах сделал Ибрахима (Авраама) Своим возлюбленным.

उस व्यक्ति से बेहतर धर्म किसी का नहीं है, जो बाहरी और आंतरिक रूप से अल्लाह के प्रति समर्पित हो जाए, अपनी नीयत को उसके लिए विशुद्ध कर ले, उसकी शरीयत का पालनकर अपने कार्य को अच्छा कर ले और शिर्क एवं कुफ़्र से कटकर तौहीद और ईमान की ओर एकाग्र होकर, इबराहीम अलैहिसस्सलाम के धर्म का अनुसरण करे, जो मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के धर्म का मूल है। अल्लाह ने अपने नबी इबराहीम अलैहिस्सलाम को सारे लोगों के बीच पूर्ण प्रेम के लिए चुन लिया है।

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وَلِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ وَكَانَ ٱللَّهُ بِكُلِّ شَيۡءٖ مُّحِيطٗا ١٢٦

Аллаху принадлежит то, что на небесах, и то, что на земле. Аллах объемлет всякую вещь.

आसमानों और ज़मीन की सारी चीज़ों का राज्य अकेले अल्लाह का है और अल्लाह अपनी सृष्टि की हर चीज़ को अपने ज्ञान, शक्ति और प्रबंधन के साथ घेरे हुए है।

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وَيَسۡتَفۡتُونَكَ فِي ٱلنِّسَآءِۖ قُلِ ٱللَّهُ يُفۡتِيكُمۡ فِيهِنَّ وَمَا يُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ فِي ٱلۡكِتَٰبِ فِي يَتَٰمَى ٱلنِّسَآءِ ٱلَّٰتِي لَا تُؤۡتُونَهُنَّ مَا كُتِبَ لَهُنَّ وَتَرۡغَبُونَ أَن تَنكِحُوهُنَّ وَٱلۡمُسۡتَضۡعَفِينَ مِنَ ٱلۡوِلۡدَٰنِ وَأَن تَقُومُواْ لِلۡيَتَٰمَىٰ بِٱلۡقِسۡطِۚ وَمَا تَفۡعَلُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِهِۦ عَلِيمٗا ١٢٧

Они просят тебя вынести решение относительно женщин. Скажи: «Аллах вынесет для вас решение относительно них и того, что читается вам в Писании по поводу осиротевших женщин, которым вы не даете того, что им предписано, размышляя о женитьбе на них, и по поводу слабых детей. А еще вы должны относиться к сиротам справедливо, и что бы вы ни сделали доброго, Аллаху известно об этом».

- ऐ रसूल - लोग आपसे स्त्रियों के मामले में तथा उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में पूछते हैं। आप उनसे कह दें : अल्लाह तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर देता है और तुम्हारे लिए कुरआन की वह आयतें भी बयान करता हैं, जो उन अनाथ स्त्रियों के विषय में तुम्हें पढ़कर सुनाई जाती हैं जो तुम्हारी अभिभावकता के अंतर्गत होती हैं और तुम उन्हें अल्लाह की ओर से उनके लिए निर्धारित किए गए महर या विरासत से वंचित रखते हो। तुम स्वयं उनसे शादी नहीं करना चाहते और उनके धन के लालच में उन्हें शादी करने से भी रोकते हो। वह तुम्हारे लिए कमज़ोर बच्चों के अधिकारों को भी स्पष्ट करता है कि उन्हें विरासत में उनका अधिकार दो और उनके धन पर क़ब्ज़ा जमाकर उन पर अत्याचार न करो। तथा तुम्हारे लिए यह दायित्व भी बयान करता है कि अनाथों के मामलों का न्याय के साथ इस तरह प्रबंधन करो, जिससे दुनिया एवं आख़िरत में उनका भला हो। तुम अनाथों और अन्य लोगों के लिए जो भी अच्छा करोगे, अल्लाह उससे अवगत है और तुम्हें उसका बदला देगा।

Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии

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Аят аль-Курси36Аль-Кахфстр. 42джуз 15Бухари 1Муслим 2999

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