Аль-МухтасарАш‑Шура · 42:40–53

Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди

Аш-Шура 42:40–53

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وَجَزَٰٓؤُاْ سَيِّئَةٖ سَيِّئَةٞ مِّثۡلُهَاۖ فَمَنۡ عَفَا وَأَصۡلَحَ فَأَجۡرُهُۥ عَلَى ٱللَّهِۚ إِنَّهُۥ لَا يُحِبُّ ٱلظَّٰلِمِينَ ٤٠

Воздаянием за зло является равноценное зло. Но если кто простит и установит мир, то его награда будет за Аллахом. Воистину, Он не любит беззаконников.

जो व्यक्ति अपना हक़ (बदला) लेना चाहे, उसे इसका अधिकार है। लेकिन वह ज़्यादती के बराबर ही होना चाहिए, उससे अधिक नहीं। तथा जो व्यक्ति बुरा व्यवहार करने वाले को क्षमा कर दे औैर उसके दुर्व्यवहार पर उसकी पकड़ न करे तथा अपने और अपने भाई के बीच सुधार कर ले, तो उसका प्रतिफल अल्लाह के पास है। निश्चय वह अत्याचार करने वालों को पसंद नहीं करता, जो लोगों पर उनकी जान, या उनके धन, या उनके सम्मान (सतीत्व) के मामले में अत्याचार करते हैं। बल्कि वह उनसे घृणा करता है।

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وَلَمَنِ ٱنتَصَرَ بَعۡدَ ظُلۡمِهِۦ فَأُوْلَٰٓئِكَ مَا عَلَيۡهِم مِّن سَبِيلٍ ٤١

Нет укора тем, которые мстят после того, как с ними поступили несправедливо.

जो व्यक्ति अपने ऊपर होने वाले अत्याचार का बदला लेता है, तो ऐसे लोगों पर अपना हक़ लेने के लिए कोई दोष नहीं है।

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إِنَّمَا ٱلسَّبِيلُ عَلَى ٱلَّذِينَ يَظۡلِمُونَ ٱلنَّاسَ وَيَبۡغُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّۚ أُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ ٤٢

Укора заслуживают только те, которые поступают несправедливо с людьми и бесчинствуют на земле без всякого права. Им уготованы мучительные страдания.

बल्कि पकड़ और सज़ा के पात्र वे लोग हैं, जो लोगों पर अत्याचार करते हैं और धरती पर पाप करते हैं। ऐसे लोगों के लिए आख़िरत में दर्दनाक यातना है।

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وَلَمَن صَبَرَ وَغَفَرَ إِنَّ ذَٰلِكَ لَمِنۡ عَزۡمِ ٱلۡأُمُورِ ٤٣

А если кто проявит терпение и простит, то ведь в этих делах надлежит проявлять решимость.

जो व्यक्ति किसी के द्वारा कष्ट दिए जाने पर धैर्य से काम लेता है और उसे माफ़ कर देता है, तो निश्चय वह धैर्य उसके लिए और समाज के लिए अच्छा होता है; और वह एक सराहनीय कार्य है। इसका सौभाग्य केवल उसी को प्राप्त होता है, जो महान भाग्य वाला है।

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وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن وَلِيّٖ مِّنۢ بَعۡدِهِۦۗ وَتَرَى ٱلظَّٰلِمِينَ لَمَّا رَأَوُاْ ٱلۡعَذَابَ يَقُولُونَ هَلۡ إِلَىٰ مَرَدّٖ مِّن سَبِيلٖ ٤٤

У того, кого Аллах ввел в заблуждение, после этого не будет покровителя. Ты увидишь, как беззаконники, увидев мучения, скажут: «Нет ли пути для возвращения?».

अल्लाह जिसे मार्गदर्शन करने से हाथ खींच ले और उसे सत्य मार्ग से पथभ्रष्ट कर दे, तो उसके बाद उसके मामले को संभालने के लिए उसका कोई संरक्षक नहीं है। तथा तुम कुफ़्र और अवज्ञाओं के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार करने वालों को देखोगे कि जब वे क़ियामत के दिन यातना को अपनी आँखों से देख लेंगे, तो कामना करते हुए कहेंगे : क्या दुनिया में वापसी का कोई रास्ता है कि हम अल्लाह के सामने तौबा कर सकें?

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وَتَرَىٰهُمۡ يُعۡرَضُونَ عَلَيۡهَا خَٰشِعِينَ مِنَ ٱلذُّلِّ يَنظُرُونَ مِن طَرۡفٍ خَفِيّٖۗ وَقَالَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَأَهۡلِيهِمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ أَلَآ إِنَّ ٱلظَّٰلِمِينَ فِي عَذَابٖ مُّقِيمٖ ٤٥

Ты увидишь, как их представят ему (Аду) смиренными от унижения и поглядывающими на него искоса. Те же, которые уверовали, скажут: «Воистину, потерпевшими убыток являются те, которые потеряли самих себя и свои семьи в День воскресения». Воистину, беззаконники пребудут в вечных мучениях.

(ऐ रसूल!) आप इन अत्याचारियों को देखेंगे कि जब वे जहन्नम के सामने इस दशा में लाए जाएँगे कि वे अपमानित और तिरस्कृत होंगे, तो वे जहन्नम से अपने डर की तीव्रता से लोगों को चुपके से देखेंगे। उस समय अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखने वाले कहेंगे : वास्तव में घाटा उठाने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने क़ियामत के दिन, अल्लाह की यातना का सामना करने के कारण, अपने आपको और अपने परिवार को घाटे में डाल दिया। सुन लो, कुफ़्र एवं अवज्ञाओं के द्वारा अपने ऊपर ज़ुल्म करने वाले लोग स्थायी यातना में होंगे, जो कभी समाप्त न होगी।

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وَمَا كَانَ لَهُم مِّنۡ أَوۡلِيَآءَ يَنصُرُونَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِۗ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن سَبِيلٍ ٤٦

У них не будет покровителей и помощников, которые бы помогли им вместо Аллаха. Нет пути тому, кого Аллах ввел в заблуждение.

और उनके लिए संरक्षक भी नहीं होंगे, जो क़ियामत के दिन उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने के लिए उनकी मदद कर सकें। तथा जिसे अल्लाह सत्य से हटाकर गुमराह कर दे, तो फिर उसके पास सच्चाई की ओर मार्गदर्शन करने के लिए हरगिज़ कोई रास्ता नहीं है।

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ٱسۡتَجِيبُواْ لِرَبِّكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا مَرَدَّ لَهُۥ مِنَ ٱللَّهِۚ مَا لَكُم مِّن مَّلۡجَإٖ يَوۡمَئِذٖ وَمَا لَكُم مِّن نَّكِيرٖ ٤٧

Ответьте вашему Господу прежде, чем наступит день от Аллаха, который невозможно отвратить (или день, который Аллах не отвратит). В тот день не будет для вас убежища, и вы не сможете отрицать свои грехи.

(ऐ लोगो!) अपने पालनहार की बात मान लो, इस प्रकार कि उसके आदेशों क पालन करने और उसके निषेधों से बचने में जल्दी करो और टालमटोल को छोड़ दो, इससे पहले कि क़ियामत का दिन आ जाए, जिसके आ जाने पर उसे कोई टाल नहीं सकता। उस दिन तुम्हारे पास कोई शरण स्थल न होगा, जहाँ तुम शरण ले सको और तुम दुनिया में अपने किए हुए गुनाहों का इनकार भी नहीं कर सकोगे।

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فَإِنۡ أَعۡرَضُواْ فَمَآ أَرۡسَلۡنَٰكَ عَلَيۡهِمۡ حَفِيظًاۖ إِنۡ عَلَيۡكَ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُۗ وَإِنَّآ إِذَآ أَذَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ مِنَّا رَحۡمَةٗ فَرِحَ بِهَاۖ وَإِن تُصِبۡهُمۡ سَيِّئَةُۢ بِمَا قَدَّمَتۡ أَيۡدِيهِمۡ فَإِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ كَفُورٞ ٤٨

Если же они отвернутся, то ведь Мы не посылали тебя их хранителем. На тебя возложена только передача откровения. Когда Мы даем человеку вкусить Нашу милость, он радуется ей. Когда же его поражает зло за то, что приготовили его руки, то человек становится неблагодарен.

फिर यदि वे आपके दिए हुए आदेशों से मुँह फेर लें, तो हमने (ऐ रसूल!) आपको उनके ऊपर संरक्षक बनाकर नहीं भेजा है कि आप उनके कार्यों को संरक्षित करें। आपका कर्तव्य तो केवल उस चीज़ को पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया है और उनका हिसाब अल्लाह के हवाले है। जब हम इनसान को अपनी ओर से समृद्धि और स्वास्थ्य आदि के रूप में दया का स्वाद चखाते हैं, तो वह खुशी से झूम उठता है। लेकिन अगर लोगों को उनके गुनाहों के कारण किसी विपत्ति का सामना होता है, तो उनका स्वभाव अल्लाह की नेमतों की कृतघ्नता तथा उनके प्रति आभार न व्यक्त करना और अल्लाह ने अपनी हिकमत के तहत जो कुछ नियत किया है उसपर असंतोष प्रकट करना होता है।

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لِّلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ يَهَبُ لِمَن يَشَآءُ إِنَٰثٗا وَيَهَبُ لِمَن يَشَآءُ ٱلذُّكُورَ ٤٩

Аллаху принадлежит власть над небесами и землей. Он творит, что пожелает. Он одаряет, кого пожелает, потомством женского пола, а кого пожелает - мужского.

आकाशों और धरती का राज्य अल्लाह ही का है। वह जो चाहे, पुरुष या महिला या इसके अलावा, पैदा करता है। वह जिसे चाहता है बेटियाँ देता है और बेटों से वंचित रखता है। तथा जिसे चाहता है बेटे देता है और बेटियों से वंचित रखता है। या जिसे चाहता है, बेटे और बेटियाँ दोनों एक साथ देता है। तथा जिसे चाहता है बाँझ बना देता है कि उसकी कोई संतान नहीं होती। निश्चय ही वह जानता है जो कुछ हो चुका और जो कुछ भविष्य में होगा। यह उसके पूर्ण ज्ञान और पूर्ण हिकमत का पता देता है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है और न ही वह किसी चीज़ में असमर्थ है।

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أَوۡ يُزَوِّجُهُمۡ ذُكۡرَانٗا وَإِنَٰثٗاۖ وَيَجۡعَلُ مَن يَشَآءُ عَقِيمًاۚ إِنَّهُۥ عَلِيمٞ قَدِيرٞ ٥٠

Или же Он сочетает потомство мужского и женского полов, а того, кого пожелает, Он делает бесплодным. Воистину, Он - Знающий, Всемогущий.

आकाशों और धरती का राज्य अल्लाह ही का है। वह जो चाहे, पुरुष या महिला या इसके अलावा, पैदा करता है। वह जिसे चाहता है बेटियाँ देता है और बेटों से वंचित कर देता है। तथा वह जिसे चाहता है बेटे देता है और बेटियों से वंचित कर देता है। या जिसे वह चाहता है बेटे और बेटियाँ दोनों एक साथ देता है। तथा जिसे वह चाहता है बाँझ बना देता है कि उसकी कोई संतान नहीं होती। निश्चय ही वह जानता है जो कुछ हो चुका और जो कुछ भविष्य में होगा। यह उसके ज्ञान की पूर्णता और उसकी हिकमत की पूर्णता से है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है और न ही कोई चीज़ उसे अक्षम कर सकती है।

42:51Страница 488

۞ وَمَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُكَلِّمَهُ ٱللَّهُ إِلَّا وَحۡيًا أَوۡ مِن وَرَآيِٕ حِجَابٍ أَوۡ يُرۡسِلَ رَسُولٗا فَيُوحِيَ بِإِذۡنِهِۦ مَا يَشَآءُۚ إِنَّهُۥ عَلِيٌّ حَكِيمٞ ٥١

Человек не достоин того, чтобы Аллах разговаривал с ним иначе, как посредством откровения или через завесу. Или же Он отправляет посланца, который с Его позволения внушает посредством откровения то, что Он желает. Воистину, Он - Возвышенный, Мудрый.

किसी इनसान के लिए उचित नहीं है कि अल्लाह उससे बात करे, सिवाय इसके कि वह़्य द्वारा उसके दिल में कोई बात डाल दे, या उससे ऐसे बात करे कि वह अल्लाह की बात तो सुनता हो लेकिन उसे देखता न हो, या उसकी ओर दूत के रूप में किसी फ़रिश्ते को भेजे, जैसे जिबरील अलैहिस्सलाम, और वह अल्लाह की अनुमति से मानव दूत (रसूल) की ओर उस चीज़ की वह़्य करे, जो अल्लाह उसकी ओर वह़्य करना चाहता है। निःसंदेह वह महिमावान (अल्लाह) अपने अस्तित्व एवं गुणों में सर्वोच्च, तथा अपनी रचना, नियति और शरीयत में हिकमत वाला है।

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وَكَذَٰلِكَ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ رُوحٗا مِّنۡ أَمۡرِنَاۚ مَا كُنتَ تَدۡرِي مَا ٱلۡكِتَٰبُ وَلَا ٱلۡإِيمَٰنُ وَلَٰكِن جَعَلۡنَٰهُ نُورٗا نَّهۡدِي بِهِۦ مَن نَّشَآءُ مِنۡ عِبَادِنَاۚ وَإِنَّكَ لَتَهۡدِيٓ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ٥٢

Таким же образом Мы внушили тебе в откровении дух (Коран) из Нашего повеления. Ты не знал, что такое Писание и что такое вера. Но Мы сделали его светом, посредством которого Мы ведем прямым путем того из Наших рабов, кого пожелаем. Воистину, ты указываешь на прямой путь -

जिस तरह हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले के नबियों की ओर वह़्य की थी, उसी तरह हमने आपकी ओर अपने पास से एक क़ुरआन की वह़्य की है। आप उससे पहले नहीं जानते थे कि रसूलों पर उतरने वाली आसमानी किताबें क्या हैं और न आप यह जानते थे कि ईमान क्या है? लेकिन हमने इस क़ुरआन को एक प्रकाश बनाकर उतारा है, जिसके द्वारा हम अपने बंदों में से जिसे चाहते हैं, मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। निश्चय ही आप लोगों को एक सीधा मार्ग दिखाते हैं जो कि इस्लाम धर्म है।

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صِرَٰطِ ٱللَّهِ ٱلَّذِي لَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ أَلَآ إِلَى ٱللَّهِ تَصِيرُ ٱلۡأُمُورُ ٥٣

путь Аллаха, Которому принадлежит то, что на небесах, и то, что на земле. Воистину, к Аллаху возвращаются дела.

उस अल्लाह का मार्ग कि जो कुछ आकाशों में हैं और जो कुछ धरती पर है, रचना, स्वामित्व और प्रबंधन में उसी का है। अनिवार्य रूप से, सभी मामले अपनी नियति और प्रबंधन में अकेले अल्लाह की ओर लौटते हैं।

Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии

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Аят аль-Курси36Аль-Кахфстр. 42джуз 15Бухари 1Муслим 2999

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