Аль-МухтасарАль‑Маида · 5:92–120

Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди

Аль-Маида 5:92–120

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وَأَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَ وَٱحۡذَرُواْۚ فَإِن تَوَلَّيۡتُمۡ فَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ ٩٢

Повинуйтесь Аллаху, повинуйтесь Посланнику и остерегайтесь! Но если вы отвернетесь, то знайте, что на Нашего Посланника возложена только ясная передача откровения.

शरीयत के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो तथा अवज्ञा से सावधान रहो। फिर यदि तुम उससे मुँह मोड़ो, तो जान लो कि हमारे रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसका अल्लाह ने उन्हें पहुँचाने का आदेश दिया है और वह उसे पहुँचा चुके हैं। इसलिए यदि तुम मार्गदर्शन अपना लो, तो इसमें तुम्हारा ही लाभ है, और यदि बुरे कर्म करो, तो तुम्हारा ही नुक़सान होगा।

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لَيۡسَ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ جُنَاحٞ فِيمَا طَعِمُوٓاْ إِذَا مَا ٱتَّقَواْ وَّءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ ثُمَّ ٱتَّقَواْ وَّءَامَنُواْ ثُمَّ ٱتَّقَواْ وَّأَحۡسَنُواْۚ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٩٣

На тех, которые уверовали и совершают праведные деяния, нет греха за то, чем они питались, если они были богобоязненны, веровали и совершали праведные деяния, если после этого они опять были богобоязненны и веровали, если после этого они опять были богобоязненны и творили добро. Ведь Аллах любит творящих добро.

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, तथा उसकी निकटता प्राप्त करने के लिए अच्छे कर्म किए, उनपर उसमें कोई पाप नहीं जो उन्होंने शराब का उसके निषिद्ध होने से पहले सेवन किया था, यदि वे निषिद्ध चीज़ों से परहेज़ करते थे, अपने ऊपर अल्लाह के क्रोध से डरने वाले, उसपर ईमान रखने वाले, अच्छे कर्म करने वाले थे, फिर अल्लाह के प्रति उनका ध्यान बढ़ गया यहाँ तक कि वे उसकी इस तरह इबादत करने लगें, मानो कि वे उसे देख रहे हों, और अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसकी इस तरह इबादत करते हैं कि मानो वे उसे देख रहे हों; क्योंकि वे उसमें हमेशा अल्लाह के निरीक्षण का आभास करने वाले होते हैं। और यह स्थिति मोमिन को अपने काम को अच्छी तरह और पूर्ण रूप से करने के लिए प्रेरित करती है।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَيَبۡلُوَنَّكُمُ ٱللَّهُ بِشَيۡءٖ مِّنَ ٱلصَّيۡدِ تَنَالُهُۥٓ أَيۡدِيكُمۡ وَرِمَاحُكُمۡ لِيَعۡلَمَ ٱللَّهُ مَن يَخَافُهُۥ بِٱلۡغَيۡبِۚ فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ ٩٤

О те, которые уверовали! Аллах обязательно подвергнет вас испытанию охотничьей добычей, которую смогут достать ваши руки и копья, чтобы Аллах узнал тех, кто боится Его, не видя Его воочию (или втайне от людей). А кто преступит границы дозволенного после этого, тому будут уготованы мучительные страдания.

ऐ ईमान वालो! अल्लाह तुम्हारी इस तरह परीक्षा लेगा कि वह जंगली शिकार में से कुछ तुम्हारे पास ले आएगा, जबकि तुम एहराम की अवस्था में होगे। उनमें से छोटे शिकार को तुम अपने हाथों से पकड़ोगे और बड़े शिकार को अपने भालों से, ताकि अल्लाह जान ले (प्रत्यक्ष रूप से जानना जिसपर बंदों की पकड़ होती है) कि कौन अल्लाह के ज्ञान पर पूर्ण ईमान रखने की वजह से उससे बिन देखे डरता है। इसलिए वह अपने उस स्रष्टा के डर से शिकार करने से रुक जाता है, जिससे उसका कार्य छिपा नहीं रहता है। अतः जो हद से आगे बढ़े और ह़ज्ज या उम्रा के एहराम की हालत में शिकार करे, तो उसके लिए क़ियामत के दिन दर्दनाक अज़ाब है; क्योंकि उसने वह कार्य किया है जिससे अल्लाह ने मना किया था।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَقۡتُلُواْ ٱلصَّيۡدَ وَأَنتُمۡ حُرُمٞۚ وَمَن قَتَلَهُۥ مِنكُم مُّتَعَمِّدٗا فَجَزَآءٞ مِّثۡلُ مَا قَتَلَ مِنَ ٱلنَّعَمِ يَحۡكُمُ بِهِۦ ذَوَا عَدۡلٖ مِّنكُمۡ هَدۡيَۢا بَٰلِغَ ٱلۡكَعۡبَةِ أَوۡ كَفَّٰرَةٞ طَعَامُ مَسَٰكِينَ أَوۡ عَدۡلُ ذَٰلِكَ صِيَامٗا لِّيَذُوقَ وَبَالَ أَمۡرِهِۦۗ عَفَا ٱللَّهُ عَمَّا سَلَفَۚ وَمَنۡ عَادَ فَيَنتَقِمُ ٱللَّهُ مِنۡهُۚ وَٱللَّهُ عَزِيزٞ ذُو ٱنتِقَامٍ ٩٥

О те, которые уверовали! Не убивайте охотничью добычу, находясь в ихраме. Если кто-нибудь из вас убьет ее преднамеренно, то воздаянием за это будет скотина, подобная той, что он убил. Выносят решение о ней (о жертвенной скотине) двое справедливых мужей из вас, и эта жертва должна достичь Каабы. Или же для искупления этого следует накормить бедняков или соблюсти равноценный пост, дабы он вкусил пагубность своего поступка. Аллах простил то, что было прежде, но если кто-нибудь вернется к этому, то Аллах отомстит ему. Аллах - Могущественный, Способный на возмездие.

ऐ ईमान वालो! हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में जंगली शिकार न मारो। तथा तुममें से जो व्यक्ति जान-बूझकर शिकार मारे, तो उसने जो शिकार मारा है उसी के समान उसपर ऊँट, या गाय, या बकरी में से बदला (दंड) अनिवार्य है, जिसका निर्णय मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्ति करेंगे। और जिस पशु का वे निर्णय कर दें, उसके साथ वही किया जाएगा जो हज्ज की क़ुर्बानी के जानवर के साथ किया जाता है। अर्थात् उसे मक्का भेजा जाएगा और हरम में ज़बह किया जाएगा, या उस जानवर की क़ीमत के बराबर खाद्य पदार्थ हरम के निर्धनों को दिया जाएगा, हर निर्धन को आधा सा'। या हर आधे सा' खाद्य पदार्थ के बदले एक दिन रोज़ा रखना होगा। यह सब इसलिए कि शिकार करने वाला अपने किए के परिणाम का स्वाद चख ले। अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया, जो अतीत में हरम का शिकार मारा गया और एहराम की स्थिति में जो भूमि का शिकार मारा गया उसके हराम ठहराए जाने से पहले। जो व्यक्ति हराम घोषित होने के बाद भी ऐसा करेगा, अल्लाह उसे उसपर यातना देकर उससे बदला लेगा। अल्लाह बहुत शक्तिशाली, ताक़त वाला है और उसकी शक्ति में से एक यह है कि वह उससे बदला लेता है जो उसकी अवज्ञा करता है, यदि वह चाहे, उसे कोई ऐसा करने से रोक नहीं सकता।

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أُحِلَّ لَكُمۡ صَيۡدُ ٱلۡبَحۡرِ وَطَعَامُهُۥ مَتَٰعٗا لَّكُمۡ وَلِلسَّيَّارَةِۖ وَحُرِّمَ عَلَيۡكُمۡ صَيۡدُ ٱلۡبَرِّ مَا دُمۡتُمۡ حُرُمٗاۗ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ ٱلَّذِيٓ إِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ ٩٦

Вам дозволены морская добыча и еда во благо вам и путникам, но вам запрещена охотничья добыча на суше, пока вы находитесь в ихраме. Бойтесь Аллаха, к Которому вы будете собраны.

अल्लाह ने तुम्हारे लिए जलीय जानवरों का शिकार करना तथा उस जानवर को हलाल कर दिया है, जो समुद्र तुम्हारे लिए फेंक देता है, चाहे वह जीवित हो या मृत, यह तुममें से उसके लाभ के लिए है जो निवासी है या यात्री है जिसके साथ वह खुद की आपूर्ति करता है, तथा उसने तुमपर भूमि का शिकार करना हराम कर दिया है जब तक कि तुम हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में हो। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरो। क्योंकि उसी अकेले की ओर तुम क़ियामत के दिन लौटाए जाओगे, फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।

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۞ جَعَلَ ٱللَّهُ ٱلۡكَعۡبَةَ ٱلۡبَيۡتَ ٱلۡحَرَامَ قِيَٰمٗا لِّلنَّاسِ وَٱلشَّهۡرَ ٱلۡحَرَامَ وَٱلۡهَدۡيَ وَٱلۡقَلَٰٓئِدَۚ ذَٰلِكَ لِتَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ وَأَنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ ٩٧

Аллах сделал Каабу, Заповедный дом, а также запретный месяц, жертвенных животных и животных (или людей) с ожерельями опорой для людей. Это - для того, чтобы вы знали, что Аллаху известно о том, что на небесах, и том, что на земле, и что Аллах ведает о всякой вещи.

अल्लाह ने सम्मानित घर काबा को लोगों के लिए स्थापना का साधन बनाया है, जिसके साथ उनके धार्मिक हितों जैसे नमाज़, रोज़ा, ह़ज्ज एवं उम्रा की, तथा उनके सांसारिक हितों की स्थापना होती है, जैसे हरम में सुरक्षा एवं शांति और वहाँ हर चीज़ के फलों का पहुँचना। तथा उसने सम्मानित महीनों अर्थात् : ज़ुल-क़ा'दा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब को उनके लिए स्थापना का कारण बनाया है कि वे उनमें दूसरों कि ओर से लड़ाई से सुरक्षित रहते हैं, इसी तरह ह़ज्ज की क़ुर्बानी के जानवरों तथा उन पट्टों को जो यह इंगित करते हैं कि वे हरम के लिए ले जाए गए हैं, उनके लिए स्थापना का साधन बनाया है, क्योंकि वे अपने स्वामियों को हानि पहुँचाए जाने से बचाते हैं। अल्लाह ने तुमपर यह उपकार इसलिए किया ताकि तुम जान लो कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में तथा जो कुछ धरती में है, और यह कि अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है। क्योंकि उसका - तुम्हारे लिए हितों को लाने और तुमसे नुक़सान को उनके आने से पहले दूर करने के लिए - इन नियमों को बनाना, इस बात का प्रमाण है कि वह बंदों के हितों की चीज़ों को जानता है।

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ٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ وَأَنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٩٨

Знайте, что Аллах суров в наказании и что Аллах - Прощающий, Милосердный.

(ऐ लोगो!) यह जान लो कि निःसंदेह अल्लाह उसे बहुत कठोर दंड देने वाला है, जो उसकी अवज्ञा करे, तथा तौबा करने वाले को बहुत क्षमा करने वाला, उसपर बड़ा दयालु है।

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مَّا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُۗ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تُبۡدُونَ وَمَا تَكۡتُمُونَ ٩٩

На Пророка не возложено ничего, кроме передачи откровения. Аллах знает о том, что вы обнаруживаете, и том, что вы скрываете.

रसूल का दायित्व केवल यह है कि उस उपदेश को पहुँचा दे, जिसको पहुँचाने का अल्लाह ने उसे आदेश दिया है, उसकी यह ज़िम्मेदारी नहीं कि लोगों को हिदायत की तौफीक़ दे, क्योंकि यह केवल अल्लाह के हाथ में है, तथा अल्लाह उसे जानता है जो कुछ तुम मार्गदर्शन या पथभ्रष्टता में से प्रकट करते और छिपाते हो। और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

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قُل لَّا يَسۡتَوِي ٱلۡخَبِيثُ وَٱلطَّيِّبُ وَلَوۡ أَعۡجَبَكَ كَثۡرَةُ ٱلۡخَبِيثِۚ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ يَٰٓأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ ١٠٠

Скажи: «Скверное и благое не равны, даже если изобилие скверного понравилось тебе (или удивило тебя)». Бойтесь же Аллаха, обладатели разума, - быть может, вы преуспеете.

(ऐ रसूल!) आप कह दें कि कोई भी अपवित्र (बुरी) चीज़ किसी भी पवित्र (अच्छी) चीज़ के बराबर नहीं है, यद्यपि अपवित्र (बुरी) चीज़ की बहुतायत आपको भली लगे। क्योंकि उसकी बहुतायत उसकी श्रेष्ठता का संकेत नहीं देती है। अतः (ऐ बुद्धि वालो!) अपवित्र को छोड़कर और पवित्र को करके अल्लाह से डरो, ताकि तुम्हें जन्नत प्राप्त हो।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَسۡـَٔلُواْ عَنۡ أَشۡيَآءَ إِن تُبۡدَ لَكُمۡ تَسُؤۡكُمۡ وَإِن تَسۡـَٔلُواْ عَنۡهَا حِينَ يُنَزَّلُ ٱلۡقُرۡءَانُ تُبۡدَ لَكُمۡ عَفَا ٱللَّهُ عَنۡهَاۗ وَٱللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٞ ١٠١

О те, которые уверовали! Не спрашивайте о вещах, которые огорчат вас, если станут вам известны. А ведь они станут вам известны, если вы спросите о них, когда ниспосылается Коран. Аллах простил вам это, ибо Аллах - Прощающий, Выдержанный.

ऐ ईमान वालो! अपने रसूल से उन चीज़ों के संबंध में प्रश्न न करो, जिनकी तुम्हें कोई ज़रूरत नहीं है, और जो तुम्हारे धर्म के मामले में तुम्हारी मदद नहीं करती हैं। यदि वे तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँ, तो उनमें पाई जाने वाली कठिनाई के कारण तुम्हें बुरी लगेंगी। यदि तुम इन चीज़ों के बारे में जिनके बारे में पूछने से तुम्हें मना किया गया है उस समय प्रश्न करोगे जब रसूल पर वह़्य उतारी जाती है, तो वे तुम्हारे लिए स्पष्ट कर दी जाएँगी, और यह अल्लाह के लिए बड़ा आसान है। अल्लाह ने उन चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर दिया है जिनके बारे में क़ुरआन खामोश है। अतः उनके बारे में प्रश्न न करो, क्योंकि अगर तुम उनके बारे में प्रश्न करोगे, तो तुम्हें उनके आदेश का बाध्य कर दिया जाएगा। तथा अल्लाह अपने बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है यदि वे तौबा करते हैं, अत्यंत सहनशील है उन्हें उनपर दंडित नहीं करता है।

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قَدۡ سَأَلَهَا قَوۡمٞ مِّن قَبۡلِكُمۡ ثُمَّ أَصۡبَحُواْ بِهَا كَٰفِرِينَ ١٠٢

Люди до вас спрашивали о них и по этой причине стали неверующими (или затем стали неверующими в них).

तुमसे पहले भी कुछ लोगों ने इसी तरह की बातों के बारे में प्रश्न किए थे, फिर जब उन्हें उनका बाध्य कर दिया गया, तो उन्होंने उनके अनुसार कार्य नहीं किया। इसलिए वे उसके कारण काफ़िर हो गए।

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مَا جَعَلَ ٱللَّهُ مِنۢ بَحِيرَةٖ وَلَا سَآئِبَةٖ وَلَا وَصِيلَةٖ وَلَا حَامٖ وَلَٰكِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَۖ وَأَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ ١٠٣

Аллах не распоряжался относительно бахиры, саибы, васыли и хами. Но неверующие возводят навет на Аллаха, и большая часть их не разумеет.

अल्लाह ने चौपायों को हलाल किया है। चुनाँचे उसने उनमें से उन जानवरों को हराम नहीं किया है, जिन्हें मुश्रिकों ने अपनी मूर्तियों के लिए अपने ऊपर हराम ठहरा लिया है। जैसे कि बहीरा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसके कान एक निश्चित संख्या में बच्चे जनने के बाद काट दिए जाते थे। तथा साइबा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जो एक निश्चित उम्र तक पहुँचने पर उनकी मूर्तियों के लिए छोड़ दी जाती थी। तथा वसीला, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसने लगातार दो मादा बच्चे जने हों। तथा हामी, जो उस नर ऊँट को कहा जाता है, जिसकी पुश्त से कई ऊँट जन्म ले चुके हों। (अल्लाह ने इन्हें हराम नहीं किया), परंतु काफ़िरों ने झूठ-मूठ और मिथ्यारोपण करते हुए यह दावा किया कि अल्लाह ने उक्त जानवरों को हराम किया है, तथा अधिकांश काफ़िर सत्य और असत्य, हलाल और हराम के बीच अंतर नहीं करते हैं।

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وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ تَعَالَوۡاْ إِلَىٰ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ وَإِلَى ٱلرَّسُولِ قَالُواْ حَسۡبُنَا مَا وَجَدۡنَا عَلَيۡهِ ءَابَآءَنَآۚ أَوَلَوۡ كَانَ ءَابَآؤُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ شَيۡـٔٗا وَلَا يَهۡتَدُونَ ١٠٤

Когда им говорят: «Придите к тому, что ниспослал Аллах, и к Посланнику», - они отвечают: «Нам достаточно того, на чем мы застали наших отцов». Неужели они поступят так, даже если их отцы ничего не знали и не следовали прямым путем?

जब अल्लाह पर कुछ चौपायों को हराम ठहराने का झूठा आरोप लगाने वाले इन लोगों से कहा जाता है : अल्लाह के उतारे हुए क़ुरआन की ओर आओ, तथा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत की ओर आओ, ताकि तुम हलाल और हराम को पहचान सको, तो वे कहते हैं : हमने जिन विश्वासों, कथनों और कार्यों को अपने पूर्वजों से लिया है और हमें विरासत में मिला है, वही हमारे लिए काफ़ी हैं। उनके लिए यह कैसे काफ़ी है जबकि उनके पूर्वज कुछ नहीं जानते थे, और न तो उन्हें सत्य का मार्गदर्शन प्राप्त था?! इसलिए उनका अनुसरण वही करेगा, जो उनसे अधिक अज्ञानी और उनसे अधिक मार्ग से भटका हुआ होगा। अतः वे अज्ञानी और पथभ्रष्ट हैं।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ عَلَيۡكُمۡ أَنفُسَكُمۡۖ لَا يَضُرُّكُم مَّن ضَلَّ إِذَا ٱهۡتَدَيۡتُمۡۚ إِلَى ٱللَّهِ مَرۡجِعُكُمۡ جَمِيعٗا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ١٠٥

О те, которые уверовали! Позаботьтесь о себе. Если вы последовали прямым путем, то вам не причинит вреда тот, кто впал в заблуждение. Всем вам предстоит вернуться к Аллаху, и тогда Он поведает вам о том, что вы совершали.

ऐ ईमान वालो! तुम अपनी चिंता करो। अतः अपने आपको ऐसा कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध करो, जिससे तुम्हारा सुधार हो। यदि तुम स्वयं मार्गदर्शन पा चुके, तो लोगों में से जो व्यक्ति गुमराह हो गया और उसने तुम्हारी बात नहीं मानी, वह तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाएगा। तथा तुम्हारे मार्गदर्शन प्राप्त होने की अपेक्षा यह कि तुम भलाई का आदेश दो और बुराई से रोको। क़ियामत के दिन तुम्हें अकेले अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है, फिर वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ شَهَٰدَةُ بَيۡنِكُمۡ إِذَا حَضَرَ أَحَدَكُمُ ٱلۡمَوۡتُ حِينَ ٱلۡوَصِيَّةِ ٱثۡنَانِ ذَوَا عَدۡلٖ مِّنكُمۡ أَوۡ ءَاخَرَانِ مِنۡ غَيۡرِكُمۡ إِنۡ أَنتُمۡ ضَرَبۡتُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَأَصَٰبَتۡكُم مُّصِيبَةُ ٱلۡمَوۡتِۚ تَحۡبِسُونَهُمَا مِنۢ بَعۡدِ ٱلصَّلَوٰةِ فَيُقۡسِمَانِ بِٱللَّهِ إِنِ ٱرۡتَبۡتُمۡ لَا نَشۡتَرِي بِهِۦ ثَمَنٗا وَلَوۡ كَانَ ذَا قُرۡبَىٰ وَلَا نَكۡتُمُ شَهَٰدَةَ ٱللَّهِ إِنَّآ إِذٗا لَّمِنَ ٱلۡأٓثِمِينَ ١٠٦

О те, которые уверовали! Если к кому-нибудь из вас явится смерть, и он оставит завещание, то его свидетельствуют двое справедливых мужей из вас или двое других не из вас, если смерть постигнет вас, когда вы странствуете по земле. Задержите их обоих после намаза, и если вы усомнитесь, то они должны поклясться Аллахом: «Мы не покупаем за них мирскую выгоду, даже если он является нашим близким родственником, и не скрываем свидетельства Аллаха. В противном же случае мы принадлежим к числу грешников».

ऐ ईमान वालो! यदि तुममें से किसी की मृत्यु का समय मौत की किसी निशानी के प्रकट होने के साथ निकट आ जाए, तो वह अपनी वसीयत पर मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्तियों को, या मुसलमानों की अनुपस्थिति के कारण ज़रूरत पड़ने पर काफ़िरों में से दो आदमियों को गवाह बना दे, यदि तुम यात्रा कर रहे हो और तुमपर मृत्यु आ पहुँचे। यदि तुम्हें उन दोनों की गवाही के विषय में संदेह हो, तो किसी नमाज़ के बाद उन्हें रोक लो और वे दोनों अल्लाह की क़सम खाएँ कि : वे दोनों अल्लाह की ओर से मिले हुए अपने हिस्से (यानी अपनी क़सम) को किसी मुआवज़े के बदले नहीं बेचेंगे, और न उसके साथ किसी संबंधी का पक्ष लेंगे (लाभ पहुँचाएँगे), तथा वे दोनों अपने पास मौजूद अल्लाह की किसी गवाही को नहीं छिपाएँगे, और यदि उन्होंने ऐसा किया तो वे दोनों अल्लाह की अवज्ञा करने वाले पापियों में से होंगे।

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فَإِنۡ عُثِرَ عَلَىٰٓ أَنَّهُمَا ٱسۡتَحَقَّآ إِثۡمٗا فَـَٔاخَرَانِ يَقُومَانِ مَقَامَهُمَا مِنَ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَحَقَّ عَلَيۡهِمُ ٱلۡأَوۡلَيَٰنِ فَيُقۡسِمَانِ بِٱللَّهِ لَشَهَٰدَتُنَآ أَحَقُّ مِن شَهَٰدَتِهِمَا وَمَا ٱعۡتَدَيۡنَآ إِنَّآ إِذٗا لَّمِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ ١٠٧

Если будет обнаружено, что они оба повинны в грехе, то пусть двое других самых близких родственников из числа тех, кто имеет законные права, займут их место и поклянутся Аллахом: «Наше свидетельство вернее их свидетельства, и мы не преступаем границы дозволенного. В противном же случае мы принадлежим к числу беззаконников».

यदि क़सम खिलाने के बाद यह स्पष्ट हो जाए कि उन दोनों ने गवाही अथवा क़सम में झूठ बोला है, या उन दोनों की ख़यानत (विश्वासघात) प्रकट हो जाए; तो उनके स्थान पर मरे हुए व्यक्ति के निकटतम संबंधियों में से दो व्यक्ति खड़े होकर सत्य की गवाही दें या क़सम खाएँ। वे दोनों अल्लाह की क़सम खाते हुए कहें : निश्चय उनके झूठ और ख़यानत पर हमारी गवाही, उन दोनों की अपनी सच्चाई और अमानत पर गवाही से अधिक सच्ची है, और हमने झूठी क़सम नहीं खाई है। यदि हमने झूठी गवाही दी है, तो निश्चय हम उन अत्याचारियों में से होंगे जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।

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ذَٰلِكَ أَدۡنَىٰٓ أَن يَأۡتُواْ بِٱلشَّهَٰدَةِ عَلَىٰ وَجۡهِهَآ أَوۡ يَخَافُوٓاْ أَن تُرَدَّ أَيۡمَٰنُۢ بَعۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡۗ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱسۡمَعُواْۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡفَٰسِقِينَ ١٠٨

Поступить так лучше для того, чтобы они принесли истинное свидетельство или устрашились того, что другие клятвы будут принесены после их клятв. Бойтесь Аллаха и слушайте! Ведь Аллах не ведет прямым путем людей нечестивых.

दोनों गवाहों की गवाही में संदेह होने पर उन्हें नमाज़ के बाद क़सम खिलाने और उनकी गवाही को रद्द करने का जो उल्लेख किया गया है, यह इस बात के अधिक क़रीब है कि वे दोनों गवाही का निष्पादन उसके शरई तरीक़े के अनुसार करें। अतः वे गवाही को विकृत न करें या उसमें बदलाव न करें या ख़यानत (विश्वासघात) न करें। तथा यह इस तथ्य के अधिक क़रीब है कि वे इस बात से डरें कि वारिसों की क़सम उन दोनों की क़सम को ख़ारिज कर देगी, चुनाँचे वे लोग उन दोनों की गवाही के विपरीत क़सम खा लेंगे, इस तरह वे दोनों बेनक़ाब हो जाएँगे। गवाही और क़सम में झूठ और ख़यानत (विश्वासघात) को त्यागकर अल्लाह से डरो, तथा तुम्हें जिस बात का आदेश दिया गया है उसे सुनो और स्वीकार करो। और अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसके आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।

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۞ يَوۡمَ يَجۡمَعُ ٱللَّهُ ٱلرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبۡتُمۡۖ قَالُواْ لَا عِلۡمَ لَنَآۖ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلۡغُيُوبِ ١٠٩

В тот день, когда Аллах соберет посланников и скажет: «Что вам ответили?». - они скажут: «Мы не обладаем знанием. Воистину, Ты - Ведающий сокровенное».

ऐ लेगो! क़ियामत के दिन को याद करो, जब अल्लाह सभी रसूलों को इकट्ठा करेगा। फिर उनसे कहेगा : तुम्हारे उन समुदायों ने, जिनकी ओर तुम्हें भेजा गया था, तुम्हें क्या जवाब दिया? वे उसका जवाब अल्लाह को सौंपते हुए कहेंगे : हमें कुछ ज्ञान नहीं। बल्कि सारा ज्ञान - ऐ हमारे पालनहार! - केवल तुझे ही है, निःसंदेह तू ही एक अकेला है जो अनदेखी चीज़ों को जानता है।

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إِذۡ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ٱذۡكُرۡ نِعۡمَتِي عَلَيۡكَ وَعَلَىٰ وَٰلِدَتِكَ إِذۡ أَيَّدتُّكَ بِرُوحِ ٱلۡقُدُسِ تُكَلِّمُ ٱلنَّاسَ فِي ٱلۡمَهۡدِ وَكَهۡلٗاۖ وَإِذۡ عَلَّمۡتُكَ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَٱلتَّوۡرَىٰةَ وَٱلۡإِنجِيلَۖ وَإِذۡ تَخۡلُقُ مِنَ ٱلطِّينِ كَهَيۡـَٔةِ ٱلطَّيۡرِ بِإِذۡنِي فَتَنفُخُ فِيهَا فَتَكُونُ طَيۡرَۢا بِإِذۡنِيۖ وَتُبۡرِئُ ٱلۡأَكۡمَهَ وَٱلۡأَبۡرَصَ بِإِذۡنِيۖ وَإِذۡ تُخۡرِجُ ٱلۡمَوۡتَىٰ بِإِذۡنِيۖ وَإِذۡ كَفَفۡتُ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ عَنكَ إِذۡ جِئۡتَهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡهُمۡ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٞ مُّبِينٞ ١١٠

Аллах скажет: «О Иса (Иисус), сын Марьям (Марии)! Помни о милости, которую Я оказал тебе и твоей матери. Я поддержал тебя Святым Духом (Джибрилем), благодаря чему ты говорил с людьми в колыбели и будучи взрослым. Я научил тебя Писанию, мудрости, Таурату (Торе) и Инджилу (Евангелию). По Моему соизволению ты лепил изваяния птиц из глины и дул на них, и по Моему соизволению они становились птицами. По Моему соизволению ты исцелял слепого (или лишенного зрения от рождения; или обладающего слабым зрением) и прокаженного, по Моему соизволению ты выводил покойников живыми из могил. Я отвратил от тебя (защитил тебя от) сынов Исраила (Израиля), когда ты явился к ним с ясными знамениями, а неверующие из их числа сказали, что это - всего лишь очевидное колдовство».

तथा याद करो, जब अल्लाह (क़ियामत के दिन) ईसा अलैहिस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! तुम अपने ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो जब मैंने तुम्हें बिना पिता के बनाया था, और अपनी माता मरयम अलैहस्सलाम के ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो, जब मैंने उसे उसके समय की महिलाओं के ऊपर चुन लिया। तथा अपने ऊपर मेरी उस नेमत को याद करो जो मैंने तुम्हें उस समय प्रदान की, जब मैंने तुम्हें जिबरील (अलैहिस्सलाम) द्वारा शक्ति प्रदान की, तुम लोगों से बात करते थे - जबकि तुम दूध पीते बच्चे थे - उन्हें अल्लाह की ओर बुलाते थे, तथा तुम अपनी अधेड़ आयु में उनसे उस चीज़ के बारे में बात करते थे जिसके साथ मैंने तुम्हें उनकी ओर भेजा था। मैंने तुमपर एक अनुग्रह यह किया कि तुम्हें लिखना सिखाया और उस तौरात का ज्ञान प्रदान किया जो मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई थी और उस इंजील की शिक्षा दी जो तुमपर उतारी गई, और मैंने तुम्हें शरीयत के रहस्य, उसके फ़ायदे तथा उसकी हिकमतें बताईं। तुम्हारे ऊपर मेरी नेमतों में से एक यह है कि तुम मिट्टी से पक्षी के रूप समान आकृति बनाते थे, फिर उसमें फूँक मारते थे, तो वह पक्षी बन जाती थी। तथा तुम जन्म से अंधे को उसकी अंधता से चंगा कर देते थे और कोढ़ी को रोगमुक्त कर देते थे, तो उसकी त्वचा स्वस्थ हो जाती थी। तथा तुम मुर्दों को अल्लाह से उन्हें पुनर्जीवित करने की दुआ करके उन्हें पुनर्जीवित कर देते थे। यह सब मेरी अनुमति से संपन्न होता था। मैंने तुमपर जो उपकार किया, उनमें से एक यह भी है कि मैंने बनी इसराईल को उस समय तुमसे दूर कर दिया जब वे तुम्हें मार डालने ही वाले थे, जब तुम उनके पास स्पष्ट चमत्कार लेकर आए थे। तो उन्होंने उनका इनकार कर दिया, और कहा : यह ईसा जो कुछ लेकर आए हैं एक स्पष्ट जादू के सिवा कुछ नहीं।

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وَإِذۡ أَوۡحَيۡتُ إِلَى ٱلۡحَوَارِيِّـۧنَ أَنۡ ءَامِنُواْ بِي وَبِرَسُولِي قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَٱشۡهَدۡ بِأَنَّنَا مُسۡلِمُونَ ١١١

Я внушил апостолам: «Уверуйте в Меня и Моего посланника». Они сказали: «Мы уверовали! Засвидетельствуй же, что мы стали мусульманами».

तथा तुम अपने ऊपर मेरे इस उपकार को भी याद करो कि मैंने तुम्हें कुछ सहायक प्रदान किए जब मैंने हवारियों (साथियों) के दिल में यह बात डाल दी कि वे मुझ पर और तुम पर ईमान लाएँ। तो उन्होंने आज्ञा मानी और जवाब देते हुए कहा : हम ईमान लाए, और - ऐ हमारे रब! - तू गवाह रह कि हम तेरे आज्ञाकारी और अधीन हैं।

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إِذۡ قَالَ ٱلۡحَوَارِيُّونَ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ هَلۡ يَسۡتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَيۡنَا مَآئِدَةٗ مِّنَ ٱلسَّمَآءِۖ قَالَ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ ١١٢

Вот сказали апостолы: «О Иса (Иисус), сын Марьям (Марии)! Может ли твой Господь ниспослать нам трапезу с неба?». Он сказал: «Бойтесь Аллаха, если вы являетесь верующими».

उस समय को याद करो, जब हवारियों ने कहा कि क्या आपका पालनहार, यदि आप उससे दुआ करें, तो हमपर आकाश से एक थाल (भोजन सहित दस्तर-ख़्वान) उतार सकता है? तो ईसा (अलैहिस्सलाम) उन्हें अल्लाह से डरने और जो कुछ उन्होंने माँगा था, उसे त्यागने का आदेश देकर उन्हें उत्तर दिया। क्योंकि हो सकता है उसमें उनकी कोई परीक्षा हो, और उनसे कहा : जीविका की तलाश में अपने रब पर भरोसा करो, यदि तुम मोमिन हो।

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قَالُواْ نُرِيدُ أَن نَّأۡكُلَ مِنۡهَا وَتَطۡمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعۡلَمَ أَن قَدۡ صَدَقۡتَنَا وَنَكُونَ عَلَيۡهَا مِنَ ٱلشَّٰهِدِينَ ١١٣

Они сказали: «Мы хотим отведать ее, чтобы наши сердца успокоились, чтобы мы узнали, что ты сказал нам правду, и чтобы мы были свидетелями о ней».

हवारियों ने ईसा से कहा : हम चाहते हैं कि इस दस्तर-ख़्वान से खाएँ, और हमारे दिल अल्लाह की शक्ति की पूर्णता से और इस बात से आश्वस्त हो जाएँ कि आप उसके रसूल हैं, तथा हम निश्चित रूप से जान लें कि आप अल्लाह के पास से जो कुछ लेकर आए हैं, उसमें आपने हमसे सच्च कहा है, और हम उन लोगों के लिए इस बात के साक्षी बन जाएँ, जो यहाँ मौजूद नहीं हैं।

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قَالَ عِيسَى ٱبۡنُ مَرۡيَمَ ٱللَّهُمَّ رَبَّنَآ أَنزِلۡ عَلَيۡنَا مَآئِدَةٗ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ تَكُونُ لَنَا عِيدٗا لِّأَوَّلِنَا وَءَاخِرِنَا وَءَايَةٗ مِّنكَۖ وَٱرۡزُقۡنَا وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلرَّٰزِقِينَ ١١٤

Иса (Иисус), сын Марьям (Марии), сказал: «О Аллах, Господь наш! Ниспошли нам трапезу с неба, которая была бы праздником для всех нас, от первого до последнего, и знамением от Тебя. Надели нас уделом, ведь Ты - Наилучший из дарующих удел».

ईसा अलैहिस्सलाम ने उनके अनुरोध का उत्तर दिया और अल्लाह से यह कहते हुए दुआ की : हे हमारे रब! हमपर खाने का एक दस्तर-ख़्वान उतार दे, जिसके उतरने के दिन को हम एक पर्व बनाकर तेरे लिए आभार प्रकट करते हुए उसका सम्मान करें, तथा वह तेरे एकत्व (एकमात्र पूज्य होने) की निशानी और प्रमाण, तथा जिस चीज़ के साथ मैं भेजा गया हूँ उसकी सच्चाई का प्रमाण हो। तथा हमें ऐसी जीविका प्रदान कर, जो तेरी इबादत करने में हमारी मदद करे, और - ऐ हमारे रब! - तू सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।

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قَالَ ٱللَّهُ إِنِّي مُنَزِّلُهَا عَلَيۡكُمۡۖ فَمَن يَكۡفُرۡ بَعۡدُ مِنكُمۡ فَإِنِّيٓ أُعَذِّبُهُۥ عَذَابٗا لَّآ أُعَذِّبُهُۥٓ أَحَدٗا مِّنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ ١١٥

Аллах ответил: «Я ниспошлю ее вам, но если кто-либо после этого не уверует, то Я подвергну его таким мучениям, которым Я не подвергал никого из миров».

अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम की दुआ क़बूल कर ली और फरमाया : मैं यह दस्तर-ख़्वान उतारने वाला हूँ, जो तुमने अपने ऊपर उतारने की माँग की है। अतः जो कोई भी उसके उतरने के बाद कुफ्र करे, वह केवल खुद को दोषी ठहराए। क्योंकि मैं उसे ऐसी कड़ी यातना दूँगा, जो किसी और को नहीं दूँगा। क्योंकि उसने प्रकाशमान (स्पष्ट) निशानी देखी, इसलिए उसका कुफ़्र हठ का कुफ़्र है। तथा अल्लाह ने उनसे अपना वचन पूरा किया, सो उसे उनपर उतार दिया।

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وَإِذۡ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ءَأَنتَ قُلۡتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِي وَأُمِّيَ إِلَٰهَيۡنِ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ قَالَ سُبۡحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِيٓ أَنۡ أَقُولَ مَا لَيۡسَ لِي بِحَقٍّۚ إِن كُنتُ قُلۡتُهُۥ فَقَدۡ عَلِمۡتَهُۥۚ تَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِي وَلَآ أَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِكَۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلۡغُيُوبِ ١١٦

Вот сказал Аллах: «О Иса (Иисус), сын Марьям (Марии)! Говорил ли ты людям: «Примите меня и мою мать двумя богами наряду с Аллахом»?». Он сказал: «Пречист Ты! Как я мог сказать то, на что я не имею права? Если бы я сказал такое, Ты знал бы об этом. Ты знаешь то, что у меня в душе, а я не знаю того, что у Тебя в Душе. Воистину, Ты - Ведающий сокровенное.

और उस समय को याद करो, जब अल्लाह तआला क़ियामत के दिन ईसा बिन मरयम अलैहिमस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ ईसा बिन मरयम! क्या तुमने लोगों से कहा था : मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के अलावा पूज्य बना लो? तो ईसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार की पवित्रता बयान करते हुए कहेंगे : मेरे लिए उचित ही नहीं कि मैं उनसे सत्य के अलावा कुछ कहूँ। और यदि मान लिया जाए कि मैंने ऐसा कहा था, तो निश्चय तुझे उसका ज्ञान है, क्योंकि तुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। तू जानता है जो कुछ मैं अपने दिल में छिपाता हूँ, और मुझे नहीं पता जो तेरे मन में है। निश्चय अकेला तू ही है जो हर परोक्ष (अनुपस्थित), हर छिपी हुई और हर प्रत्यक्ष चीज़ को जानता है।

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مَا قُلۡتُ لَهُمۡ إِلَّا مَآ أَمَرۡتَنِي بِهِۦٓ أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمۡۚ وَكُنتُ عَلَيۡهِمۡ شَهِيدٗا مَّا دُمۡتُ فِيهِمۡۖ فَلَمَّا تَوَفَّيۡتَنِي كُنتَ أَنتَ ٱلرَّقِيبَ عَلَيۡهِمۡۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ ١١٧

Я не говорил им ничего, кроме того, что Ты мне велел: «Поклоняйтесь Аллаху, моему Господу и вашему Господу». Я был свидетелем о них, пока находился среди них. Когда же Ты упокоил меня, Ты стал наблюдать за ними. Воистину, Ты - Свидетель всякой вещи.

ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से कहा : मैंने उनसे केवल वही कहा, जो कुछ तूने मुझे कहने का आदेश दिया था कि उन्हें एकमात्र तेरी इबादत करने का आदेश दूँ। और जब तक मैं उनके बीच मौजूद था तो वे जो कुछ कहते थे मैं उसकी निगरानी करता था। फिर जब तूने मुझे जीवित आकाश पर उठाकर उनके बीच मेरे रहने की अवधि का समापन कर दिया, तो - ऐ मेरे रब! - तू ही उनके कर्मों का संरक्षक था, और तू हर चीज़ का साक्षी है, कोई भी चीज़ तुझसे छिपी नहीं। अतः जो कुछ मैंने उनसे कहा और जो कुछ उन्होंने मेरे बाद कहा, वह तुझसे छिपा नहीं।

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إِن تُعَذِّبۡهُمۡ فَإِنَّهُمۡ عِبَادُكَۖ وَإِن تَغۡفِرۡ لَهُمۡ فَإِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ١١٨

Если Ты подвергнешь их мучениям, то ведь они - Твои рабы. Если же Ты простишь им, то ведь Ты - Могущественный, Мудрый».

(ऐ मेरे पालनहार!) यदि तू उन्हें दंड दे, तो बेशक वे तेरे बंदे हैं, तू उनके साथ जो चाहे करे, और यदि तू उनमें से ईमान लाने वालों पर उपकार करते हुए उन्हें क्षमा कर दे, तो कोई तुझे उससे रोकने वाला नहीं। क्योंकि तू सबपर प्रभुत्वशाली है जिसे पराजित नहीं किया जा सकता, तथा अपने प्रबंधन में हिकमत वाला है।

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قَالَ ٱللَّهُ هَٰذَا يَوۡمُ يَنفَعُ ٱلصَّٰدِقِينَ صِدۡقُهُمۡۚ لَهُمۡ جَنَّٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۖ رَّضِيَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُواْ عَنۡهُۚ ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ١١٩

Аллах сказал: «Это - день, когда правдивым людям принесет пользу их правдивость. Им уготованы Райские сады, в которых текут реки. Они пребудут там вечно». Аллах доволен ими, и они довольны Им. Это - великое преуспеяние!

अल्लाह ईसा अलैहिस्सलाम से कहेगा : यह एक ऐसा दिन है जब सच्चे इरादों, कर्मों और बातों वालों को उनकी सच्चाई लाभ देगी। उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें प्रवाहित हैं, वे उनमें सदा सर्वदा के लिए रहेंगे, उन्हें कभी मृत्यु नहीं आएगी। अल्लाह उनसे प्रसन्न होगा, अतः वह उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा तथा वे शाश्वत आनंद प्राप्त होने के कारण अल्लाह से प्रसन्न होंगे। यह प्रतिफल और (अल्लाह का) उनसे प्रसन्न होना ही महान सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं।

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لِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا فِيهِنَّۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرُۢ ١٢٠

Аллаху принадлежит власть над небесами, землей и тем, что на них, и Он способен на всякую вещь.

आकाशों तथा धरती का राज्य अकेले अल्लाह ही का है, वही उनका स्रष्टा और उनके मामलों का प्रबंध करने वाला है, तथा उनमें विद्यमान् सभी प्राणियों का राज्य उसी का है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии

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Аят аль-Курси36Аль-Кахфстр. 42джуз 15Бухари 1Муслим 2999

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