Аль-МухтасарАль‑Анам · 6:39–73

Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди

Аль-Анам 6:39–73

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وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا صُمّٞ وَبُكۡمٞ فِي ٱلظُّلُمَٰتِۗ مَن يَشَإِ ٱللَّهُ يُضۡلِلۡهُ وَمَن يَشَأۡ يَجۡعَلۡهُ عَلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ٣٩

Те, которые считают ложью Наши знамения, глухи и немы во мраках. Аллах вводит в заблуждение, кого пожелает, и наставляет на прямой путь, кого пожелает.

जिन लोगों ने हमारी आयतों (निशानियों) को झुठलाया, वे उन बहरों के समान हैं जो सुनते नहीं, और गूँगों के समान हैं जो बोलते नहीं, इसके उपरांत वे अँधेरों में पड़े हुए हैं, उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। तो जिसकी ऐसी दशा है, वह मार्गदर्शन कैसे प्राप्त कर सकता है?! अल्लाह लोगों में से जिसे पथभ्रष्ट करना चाहता है, उसे पथभ्रष्ट कर देता है, और जिसे मार्गदर्शन प्रदान करना चाहता है, उसका मार्गदर्शन करते हुए उसे सीधे मार्ग पर लगा देता है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं होता।

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قُلۡ أَرَءَيۡتَكُمۡ إِنۡ أَتَىٰكُمۡ عَذَابُ ٱللَّهِ أَوۡ أَتَتۡكُمُ ٱلسَّاعَةُ أَغَيۡرَ ٱللَّهِ تَدۡعُونَ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٤٠

Скажи: «Скажите мне, станете ли вы призывать кого-либо наряду с Аллахом, если вас поразит наказание Аллаха или наступит Час, если только вы говорите правду?».

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मुझे बताओ यदि तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से कोई यातना आ जाए अथवा तुमपर वह क़ियामत आ जाए, जिसका तुमसे वादा किया गया है कि वह आने वाली है; तो क्या उस समय तुम अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे, ताकि वह तुमपर आने वाली विपत्ति और संकट को दूर करे? (बताओ) यदि तुम इस दावे में सच्चे हो कि तुम्हारे पूज्य लाभ पहुँचाते हैं या नुकसान को दूर करते हैं?!

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بَلۡ إِيَّاهُ تَدۡعُونَ فَيَكۡشِفُ مَا تَدۡعُونَ إِلَيۡهِ إِن شَآءَ وَتَنسَوۡنَ مَا تُشۡرِكُونَ ٤١

О нет! Вы будете призывать только Его. Если Он пожелает, то избавит вас от того, по поводу чего вы станете взывать к Нему, и тогда вы забудете о тех, кого приобщали в сотоварищи.

सच तो यह है कि उस समय तुम उस अल्लाह के अलावा किसी और को नहीं पुकारोगे, जिसने तुम्हें पैदा किया है, फिर यदि वह चाहेगा तो तुम से विपत्ति को दूर कर देगा और तुम्हारी हानि को हटा देगा। क्योंकि वही उसका ज़िम्मेदार और उसे करने में सक्षम है। रही बात तुम्हारे उन पूज्यों की, जिन्हें तुमने अल्लाह के साथ साझी बनाया है, तो तुम उन्हें छोड़ दोगे; क्योंकि तुम्हें मालूम है कि उनसे न कोई लाभ होता है और न ही हानि।

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وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰٓ أُمَمٖ مِّن قَبۡلِكَ فَأَخَذۡنَٰهُم بِٱلۡبَأۡسَآءِ وَٱلضَّرَّآءِ لَعَلَّهُمۡ يَتَضَرَّعُونَ ٤٢

Мы уже отправляли посланников к народам до тебя. Мы подвергали их нищете и недугам, дабы они проявили смирение.

और हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले कई समुदायों की ओर रसूल भेजे, लेकिन उन्होंने उन्हें झुठला दिया और वे जो कुछ उनके पास लेकर आए थे उससे मुँह फेर लिया, तो हमने उन्हें ग़रीबी जैसी कठिनाइयों के साथ, तथा बीमारी जैसी उनके शरीर को नुक़सान पहुँचाने वाली चीज़ों के साथ दंडित किया, ताकि वे अपने पालनहार के प्रति समर्पित हो जाएँ और उसके लिए विनम्र हो जाएँ।

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فَلَوۡلَآ إِذۡ جَآءَهُم بَأۡسُنَا تَضَرَّعُواْ وَلَٰكِن قَسَتۡ قُلُوبُهُمۡ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ٤٣

Почему же, когда их поражало Наше наказание, они не проявили смирение? Их сердца ожесточались, а дьявол приукрашивал для них то, что они совершали.

यदि उनपर हमारी विपत्ति आने के समय, वे अल्लाह के प्रति विनम्र हो जाते और उसके अधीन हो जाते, ताकि वह उन पर से विपत्ति को दूर कर दे, तो हम अवश्य उनपर दया करते, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया, बल्कि उनके दिल कठोर हो गए। चुनाँचे उन्होंने न सीख प्राप्त की और न उपदेश ग्रहण किया, तथा शैतान ने उनके लिए उसे सुशोभित कर दिया, जो कुफ्र तथा पाप वे किया करते थे। इसलिए वे उसी पर बने रहे जिसपर वे क़ायम थे।

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فَلَمَّا نَسُواْ مَا ذُكِّرُواْ بِهِۦ فَتَحۡنَا عَلَيۡهِمۡ أَبۡوَٰبَ كُلِّ شَيۡءٍ حَتَّىٰٓ إِذَا فَرِحُواْ بِمَآ أُوتُوٓاْ أَخَذۡنَٰهُم بَغۡتَةٗ فَإِذَا هُم مُّبۡلِسُونَ ٤٤

Когда они позабыли о том, что им напоминали, Мы распахнули перед ними врата ко всякой вещи. Когда же они возрадовались дарованному, Мы схватили их внезапно, и они пришли в отчаяние!

जब उन्होंने गंभीर गरीबी तथा बीमारी के द्वारा उपदेश किए जाने को छोड़ दिया और अल्लाह के आदेशों के अनुसार काम नहीं किया, तो हमने उन्हें ढील देते हुए उनके लिए रोज़ी के द्वार खोल दिए, ग़रीबी के बाद उन्हें समृद्ध कर दिया और बीमारी के बाद उनके शरीर को स्वस्थ कर दिया, यहाँ तक कि जब वे अहंकार से ग्रस्त हो गए और उन्हें जो सुख-सुविधा प्राप्त था उसपर मगन हो गए, उनपर अचानक हमारी यातना आ गई, तो सहसा वे चकित और उस चीज़ से निराश थे, जिसकी वे आशा करते थे।

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فَقُطِعَ دَابِرُ ٱلۡقَوۡمِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْۚ وَٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٤٥

Беззаконники были уничтожены до основания. Хвала Аллаху, Господу миров!

काफिरों का पूरी तरह से सर्वनाश करके उनकी जड़ काट दी गई, और अल्लाह के रसूलों को विजय प्राप्त हुआ। और हर प्रकार का आभार और प्रशंसा अकेले अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का रब है कि उसने अपने शत्रुओं का नाश किया और अपने दोस्तों की सहायता की।

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قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِنۡ أَخَذَ ٱللَّهُ سَمۡعَكُمۡ وَأَبۡصَٰرَكُمۡ وَخَتَمَ عَلَىٰ قُلُوبِكُم مَّنۡ إِلَٰهٌ غَيۡرُ ٱللَّهِ يَأۡتِيكُم بِهِۗ ٱنظُرۡ كَيۡفَ نُصَرِّفُ ٱلۡأٓيَٰتِ ثُمَّ هُمۡ يَصۡدِفُونَ ٤٦

Скажи: «Как вы думаете, если Аллах отнимет ваш слух и ваше зрение и запечатает ваши сердца, какое божество, кроме Аллаха, вернет вам все это?». Посмотри, как Мы разъясняем знамения, однако они все еще отворачиваются.

ऐ रसूल! आप इन मुश्रिकों से कह दें : मुझे बताओ कि यदि अल्लाह तुमसे सुनने की शक्ति छीनकर तुम्हें बहरा कर दे, तुम्हारी दृष्टि छीनकर तुम्हें अंधा कर दे, और तुम्हारे दिलों पर मुहर लगा दे, फिर तुम कुछ भी न समझ सको; तो कौन-सा सत्य पूज्य है, जो तुम्हें ये खोई हुई चीज़ें वापस ला दे? ऐ रसूल! ग़ौर करें कि कैसे हम इन्हें विभिन्न प्रकार के प्रमाण दिखलाते हैं, फिर ये उनसे मुँह मोड़ लेते हैं!

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قُلۡ أَرَءَيۡتَكُمۡ إِنۡ أَتَىٰكُمۡ عَذَابُ ٱللَّهِ بَغۡتَةً أَوۡ جَهۡرَةً هَلۡ يُهۡلَكُ إِلَّا ٱلۡقَوۡمُ ٱلظَّٰلِمُونَ ٤٧

Скажи: «Как вы думаете, если наказание Аллаха поразит вас неожиданно или открыто, разве будет погублен кто-либо, кроме несправедливых людей?».

(ऐ रसूल!) आप इनसे कह दें : मुझे बताओ कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना तुम्हें उसका एहसास हुए बिना अचानक आ जाए, अथवा वह तुमपर खुल्लम-खुल्ला सबके देखते हुए आ जाए, तो उस यातना के शिकार केवल वही लोग होंगे, जो अल्लाह के साथ कुफ़्र करके तथा उसके रसूलों को झुठलाकर अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।

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وَمَا نُرۡسِلُ ٱلۡمُرۡسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَۖ فَمَنۡ ءَامَنَ وَأَصۡلَحَ فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ٤٨

Мы отправляем посланников только добрыми вестниками и предостерегающими увещевателями. Те, которые уверовали и совершали праведные деяния, не познают страха и не будут опечалены.

हम अपने रसूलों में से जिन्हें भेजते हैं, उन्हें केवल इसलिए भेजते हैं कि वे ईमान और आज्ञाकारिता वालों को उस स्थायी नेमत की शुभ सूचना दें, जो न कभी ख़त्म होगी और न बाधित होगी, एवं काफिरों तथा पापियों को हमारी कठोर यातना से डराएँ। फिर जो व्यक्ति रसूलों पर ईमान लाए और अपने कर्मों को ठीक कर ले, तो उनपर उस बारे में कोई भय नहीं, जो आख़िरत में उन्हें प्राप्त होगा और न ही वे उसपर दुखी एवं शोकग्रस्त होंगे, जो सांसारिक सुखों में से उनसे छूट गया है।

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وَٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَمَسُّهُمُ ٱلۡعَذَابُ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ ٤٩

А тех, которые считают ложью Наши знамения, коснутся мучения за то, что они были нечестивцами.

और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया, वे अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकल जाने के कारण यातना से पीड़ित होंगे।

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قُل لَّآ أَقُولُ لَكُمۡ عِندِي خَزَآئِنُ ٱللَّهِ وَلَآ أَعۡلَمُ ٱلۡغَيۡبَ وَلَآ أَقُولُ لَكُمۡ إِنِّي مَلَكٌۖ إِنۡ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰٓ إِلَيَّۚ قُلۡ هَلۡ يَسۡتَوِي ٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡبَصِيرُۚ أَفَلَا تَتَفَكَّرُونَ ٥٠

Скажи: «Я не говорю вам, что при мне сокровищницы Аллаха, и я не ведаю сокровенного. Я не говорю вам, что являюсь ангелом. Я следую лишь тому, что ниспосылается мне в откровении». Скажи: «Разве равны слепой и зрячий? Неужели вы не поразмыслите?».

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मैं तुमसे नहीं कहता : मेरे पास अल्लाह की रोज़ी के ख़ज़ाने हैं, इसलिए मैं उन्हें अपनी इच्छानुसार ख़र्च करता हूँ। और न ही मैं तुमसे यह कहता हूँ : मुझे ग़ैब का ज्ञान है, सिवाय उस वह़्य के जिससे अल्लाह ने मुझे सूचित किया है। और न मैं तुमसे यह कहता हूँ : मैं फ़रिश्तों में से एक फ़रिश्ता हूँ। क्योंकि मैं अल्लाह का रसूल हूँ। मैं केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है। मैं उसका दावा नहीं करता, जिसका मुझे अधिकार नहीं। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या वह काफ़िर जिसकी अन्तर्दृष्टि सत्य से अंधी हो गई है, और वह मोमिन जिसने सत्य को देखा और उसपर ईमान लाया, क्या दोनों बराबर हो सकते हैं? तो क्या (ऐ मुश्रिको!) तुम अपनी बुद्धियों से अपने चारों ओर फैली हुई निशानियों पर ग़ौर नहीं करते।

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وَأَنذِرۡ بِهِ ٱلَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحۡشَرُوٓاْ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ لَيۡسَ لَهُم مِّن دُونِهِۦ وَلِيّٞ وَلَا شَفِيعٞ لَّعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ ٥١

Предостерегай им тех, которые страшатся того, что они будут собраны перед своим Господом тогда, когда не будет у них, помимо Него, ни покровителя, ни заступника. Быть может, они устрашатся!

और (ऐ रसूल!) इस क़ुरआन के द्वारा उन लोगों को डराएँ, जो इस बात का भय रखते हैं कि वे क़ियामत के दिन अपने रब के पास एकत्र किए जाएँगे, उनके लिए अल्लाह के अलावा कोई संरक्षक नहीं होगा जो उन्हें लाभ पहुँचाए, और न कोई सिफारिश करने वाला होगा, जो उनसे हानि को दूर कर सके। ताकि वे अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरें। क्योंकि यही लोगो हैं, जो क़ुरआन से लाभान्वित होते हैं।

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وَلَا تَطۡرُدِ ٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ رَبَّهُم بِٱلۡغَدَوٰةِ وَٱلۡعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجۡهَهُۥۖ مَا عَلَيۡكَ مِنۡ حِسَابِهِم مِّن شَيۡءٖ وَمَا مِنۡ حِسَابِكَ عَلَيۡهِم مِّن شَيۡءٖ فَتَطۡرُدَهُمۡ فَتَكُونَ مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ ٥٢

Не прогоняй тех, которые взывают к своему Господу утром и перед закатом, стремясь к Его Лику. Ты нисколько не в ответе за них, и они нисколько не в ответе за тебя. Если же ты прогонишь их, то окажешься одним из беззаконников.

(ऐ रसूल!) आप उन ग़रीब मुसलमानों को अपनी सभा से दूर न करें, जो दिन की शुरुआत और उसके अंत में हमेशा अल्लाह की उपासना में लगे रहते हैं, उसी के लिए उपासना को विशिष्ट करने वाले होते हैं। आप प्रमुख बहुदेववादियों को लुभाने के लिए उन्हें दूर मत करें। इन ग़रीबों के हिसाब में से आपपर कुछ भी नहीं है। बल्कि उनका हिसाब उनके रब के पास है। तथा आपके हिसाब में से उनपर भी कुछ नहीं है। यदि आपने उन्हें अपनी सभा से दूर किया, तो आप अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वालों में से होंगे।

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وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعۡضَهُم بِبَعۡضٖ لِّيَقُولُوٓاْ أَهَٰٓؤُلَآءِ مَنَّ ٱللَّهُ عَلَيۡهِم مِّنۢ بَيۡنِنَآۗ أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَعۡلَمَ بِٱلشَّٰكِرِينَ ٥٣

Так Мы искушали одних из них другими, дабы они сказали: «Неужели среди нас Аллах оказал милость только этим?». Разве Аллах не лучше знает тех, кто благодарен?

और इसी तरह हमने उनमें से कुछ का कुछ के साथ परीक्षण किया। चुनाँचे हमने उन्हें सांसारिक सुख-सुविधाओं में भिन्न-भिन्न कर दिया। हमने इसके द्वारा उनका परीक्षण किया ताकि धनवान काफ़िर, ग़रीब ईमान वालों से कहें : क्या यही ग़रीब लोग हैं, जिनपर अल्लाह ने हमारे बीच से मार्गदर्शन प्रदान किया है?! यदि ईमान अच्छा काम होता, तो वे इसमें हमसे पहल नहीं कर पाते, क्योंकि हम पहल करने वाले लोग हैं। क्या अल्लाह उन लोगों के बारे में अधिक जानने वाला नहीं है जो उसकी नेमतों के लिए आभारी हैं, इसलिए वह उन्हें ईमान का सामर्थ्य प्रदान करता है, तथा उनकी नाशुक्री करने वालों के बारे में अधिक जानने वाला नहीं है, इसलिए वह उन्हें विफल कर देता है, चुनाँचे वे ईमान नहीं लाते?! क्यों नहीं, निःसंदेह अल्लाह उन्हें सबसे अधिक जानने वाला है।

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وَإِذَا جَآءَكَ ٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِـَٔايَٰتِنَا فَقُلۡ سَلَٰمٌ عَلَيۡكُمۡۖ كَتَبَ رَبُّكُمۡ عَلَىٰ نَفۡسِهِ ٱلرَّحۡمَةَ أَنَّهُۥ مَنۡ عَمِلَ مِنكُمۡ سُوٓءَۢا بِجَهَٰلَةٖ ثُمَّ تَابَ مِنۢ بَعۡدِهِۦ وَأَصۡلَحَ فَأَنَّهُۥ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٥٤

Когда к тебе приходят те, которые уверовали в Наши знамения, говори им: «Мир вам! Ваш Господь предписал себе быть Милосердным, и если кто из вас сотворит зло по своему невежеству, а затем раскается и станет совершать праведные деяния, то ведь Он - Прощающий, Милосердный».

जब (ऐ रसूल!) आपके पास वे लोग आएँ, जो हमारी उन आयतों पर ईमान रखते हैं, जो आपके लाए हुए संदेश की सच्चाई की गवाही देती हैं, तो उनके सम्मान में उन्हें सलाम कहें और उन्हें अल्लाह की दया की विशालता की खुशख़बरी दें। क्योंकि अल्लाह ने अपने अनुग्रह से दया करना अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है। अतः तुममें से जो कोई भी अज्ञानता और मूर्खता की स्थिति में पाप कर बैठे, फिर वह उसे करने के बाद तौबा कर ले और अपने कर्मों को सुधार ले, तो निश्चय अल्लाह उसके किए हुए पाप को क्षमा कर देगा। क्योंकि अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, तथा उनपर दया करने वाला है।

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وَكَذَٰلِكَ نُفَصِّلُ ٱلۡأٓيَٰتِ وَلِتَسۡتَبِينَ سَبِيلُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ ٥٥

Таким образом Мы разъясняем знамения, чтобы стал ясен путь грешников.

जिस प्रकार हमने आपके लिए वे बातें स्पष्ट कीं, जिनका उल्लेख किया गया, उसी तरह हम असत्यवादियों के खिलाफ़ अपने प्रमाणों और तर्कों को स्पष्ट रूप से वर्णन करते हैं, तथा अपराधियों के मार्ग और उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए; ताकि उससे बचा जा सके और सावधान रहा जाए।

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قُلۡ إِنِّي نُهِيتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِۚ قُل لَّآ أَتَّبِعُ أَهۡوَآءَكُمۡ قَدۡ ضَلَلۡتُ إِذٗا وَمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُهۡتَدِينَ ٥٦

Скажи: «Мне запрещено поклоняться тем, к кому вы взываете наряду с Аллахом». Скажи: «Я не стану потакать вашим желаниям. В противном случае я собьюсь с пути и не окажусь в числе следующих прямым путем».

(ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह ने मुझे उनकी इबादत करने से मना कर दिया है जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो। (ऐ रसूल!) आप कह दें : मैं अल्लाह के अलावा किसी और की पूजा करने में तुम्हारी इच्छाओं का पालन नहीं करता। क्योंकि अगर मैं इस बारे में तुम्हारी इच्छाओं का पालन करू, तो मैं सत्य के मार्ग से भटका हुआ हूँगा, मैं उसकी ओर मार्गदर्शन नहीं पा सकूँगा। और यही हर उस व्यक्ति का मामला है, जो अल्लाह की ओर से किसी प्रमाण के बिना अपनी इच्छा का पालन करता है।

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قُلۡ إِنِّي عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّي وَكَذَّبۡتُم بِهِۦۚ مَا عِندِي مَا تَسۡتَعۡجِلُونَ بِهِۦٓۚ إِنِ ٱلۡحُكۡمُ إِلَّا لِلَّهِۖ يَقُصُّ ٱلۡحَقَّۖ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلۡفَٰصِلِينَ ٥٧

Скажи: «Я руководствуюсь ясным доказательством от моего Господа, а вы считаете это ложью. Я не владею тем, что вы торопите. Решение принимает только Аллах. Он изрекает истину и является Наилучшим из судий».

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : मैं अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर क़ायम हूँ, न कि मन की इच्छा पर। और तुमने इस प्रमाण को झुठला दिया है। मेरे पास वह यातना नहीं है, जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो और न ही चमत्कारी निशानियाँ जो तुमने माँगी हैं। बल्कि वह केवल अल्लाह के हाथ में है। क्योंकि निर्णय करना (जिसमें वह भी शामिल है जिसकी तुमने माँग की है) केवल अल्लाह का अधिकार है। वह सत्य कहता है और उसके द्वारा फैसला करता है। और वह महिमावान सबसे अच्छा है, जिसने सत्यवादियों और असत्यवादियों को खोलकर बयान किया और उनके बीच अंतर स्पष्ट किया।

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قُل لَّوۡ أَنَّ عِندِي مَا تَسۡتَعۡجِلُونَ بِهِۦ لَقُضِيَ ٱلۡأَمۡرُ بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡۗ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِٱلظَّٰلِمِينَ ٥٨

Скажи: «Если бы я владел тем, что вы торопите, то спор между мной и вами был бы уже решен. Но Аллаху лучше знать о беззаконниках.

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : यदि मेरे पास और मेरे अधिकार में वह यातना होती जिसके लिए तुम जल्दी कर रहे हो, तो मैं उसे तुमपर अवश्य उतार देता। और उस समय मेरे और तुम्हारे बीच मामले का फैसला कर दिया जाता। (लेकिन मामला अल्लाह के अधिकार में है) और अल्लाह अत्याचारियों को अधिक जानता है कि वह उन्हें कितनी मोहलत देगा और कब उन्हें दंडित करेगा।

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۞ وَعِندَهُۥ مَفَاتِحُ ٱلۡغَيۡبِ لَا يَعۡلَمُهَآ إِلَّا هُوَۚ وَيَعۡلَمُ مَا فِي ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِۚ وَمَا تَسۡقُطُ مِن وَرَقَةٍ إِلَّا يَعۡلَمُهَا وَلَا حَبَّةٖ فِي ظُلُمَٰتِ ٱلۡأَرۡضِ وَلَا رَطۡبٖ وَلَا يَابِسٍ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٖ ٥٩

У Него ключи к сокровенному, и знает о них только Он. Ему известно то, что на суше и в море. Даже лист падает только с Его ведома. Нет ни зернышка во мраках земли, ни чего-либо свежего или сухого, чего бы не было в ясном Писании.

केवल अल्लाह ही के पास ग़ैब (परोक्ष) के खज़ाने हैं, जिन्हें उसके अलावा कोई और नहीं जानता। भूमि पर जो भी मख़्लूक़ात जैसे जानवर, पौधे और निर्जीव चीज़ें हैं, वह उन्हें जानता है, तथा वह जानता है जो कुछ समुद्र में जानवर, पौधे और निर्जीव चीज़ें हैं। तथा न कहीं कोई पत्ता गिरता है, और न ज़मीन में छिपा हुआ कोई दाना है, और न कोई गीली चीज़ है और न कोई सूखी चीज़, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक अर्थात् 'लौह़े महफ़ूज़' में अंकित (संरक्षित) है।

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وَهُوَ ٱلَّذِي يَتَوَفَّىٰكُم بِٱلَّيۡلِ وَيَعۡلَمُ مَا جَرَحۡتُم بِٱلنَّهَارِ ثُمَّ يَبۡعَثُكُمۡ فِيهِ لِيُقۡضَىٰٓ أَجَلٞ مُّسَمّٗىۖ ثُمَّ إِلَيۡهِ مَرۡجِعُكُمۡ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٦٠

Он - Тот, Кто усыпляет вас ночью и знает, что вы делаете днем. Затем Он воскрешает вас днем, чтобы исполнился назначенный срок (завершился срок вашей жизни). Затем к Нему вам предстоит вернуться, и затем Он поведает вам о том, что вы совершали.

अल्लाह ही है जो सोते समय तुम्हारी आत्माओं को अस्थायी रूप से क़ब्ज़ कर लेता है, और वह जानता है कि तुमने दिन के दौरान अपनी सक्रियता के समय क्या कमाया है। फिर वह सोते समय तुम्हारी आत्माओं को क़ब्ज़ करने के बाद दिन में तुम्हें उठा देता है ताकि तुम अपने काम कर सको, यहाँ तक कि अल्लाह के यहाँ तुम्हारे जीवन की निर्धारित अवधि समाप्त हो जाएगी। फिर क़ियामत के दिन पुनः जीवित किए जाने के उपरांत तुम्हें उसी अकेले की ओर लौटना है। फिर वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम अपने दुनिया के जीवन में किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।

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وَهُوَ ٱلۡقَاهِرُ فَوۡقَ عِبَادِهِۦۖ وَيُرۡسِلُ عَلَيۡكُمۡ حَفَظَةً حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَحَدَكُمُ ٱلۡمَوۡتُ تَوَفَّتۡهُ رُسُلُنَا وَهُمۡ لَا يُفَرِّطُونَ ٦١

Он - Одолевающий и находится над Своими рабами. Он посылает к вам хранителей. Когда же к кому-нибудь из вас приходит смерть, Наши посланцы умерщвляют его, и они не делают упущений.

अल्लाह अपने बंदों पर ग़ालिब (हावी); उन्हें अपने अधीन रखने वाला है, हर प्रकार से उनसे ऊपर है। हर चीज़ उसके अधीनस्थ है। वह अपनी महिमा के योग्य अपने बंदों के ऊपर है। और (ऐ लोगो!) वह तुमपर सम्मानित फरिश्तों को भेजता है, जो तुम्हारे कामों को गिनकर रखते हैं यहाँ तक कि तुममें से किसी की अवधि, मृत्यु के फरिश्ते और उसके सहायकों द्वारा उसकी रूह़ क़ब्ज़ कर लेने के साथ समाप्त हो जाएगी। और वे उस काम में कोताही नहीं करते हैं जो उन्हें करने का आदेश दिया गया है।

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ثُمَّ رُدُّوٓاْ إِلَى ٱللَّهِ مَوۡلَىٰهُمُ ٱلۡحَقِّۚ أَلَا لَهُ ٱلۡحُكۡمُ وَهُوَ أَسۡرَعُ ٱلۡحَٰسِبِينَ ٦٢

Потом их возвращают к Аллаху, их Истинному Покровителю. Он один принимает решение, и Он - Самый быстрый в расчете.

फिर वे सभी लोग जिनके प्राण निकाल लिए गए हैं, अपने वास्तविक स्वामी अल्लाह की ओर लौटाए जाएँगे, ताकि वह उन्हें उनके कर्मों का बदला दे। उनके बीच उसी का प्रभावी फैसला और न्यायपूर्ण निर्णय है, और वही सबसे तेज़ी से तुम्हें गिनने वाला और तुम्हारे कर्मों का हिसाब रखने वाला है।

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قُلۡ مَن يُنَجِّيكُم مِّن ظُلُمَٰتِ ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِ تَدۡعُونَهُۥ تَضَرُّعٗا وَخُفۡيَةٗ لَّئِنۡ أَنجَىٰنَا مِنۡ هَٰذِهِۦ لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلشَّٰكِرِينَ ٦٣

Скажи: «Кто спасает вас от мраков на суше и на море, когда вы взываете к Нему смиренно и тайно, говоря: «Если Он спасет нас от этого, мы непременно будем благодарны!»»

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से पूछें : तुम्हें थल और समुद्र के अँधेरों में मिलने वाले खतरों से कौन बचाता और छुटकारा देता है? तुम उसी अकेले को गिड़गिड़ाते हुए विनयपूर्वक गुप्त रूप से तथा खुले तौर पर पुकारते हो : यदि हमारा पालनहार हमें इन विपत्तियों से छुटकारा प्रदान कर दे, तो हम अवश्य अपने ऊपर उसकी नेमतों के लिए आभार प्रकट करते हुए उसके सिवा किसी और की पूजा नहीं करेंगे।

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قُلِ ٱللَّهُ يُنَجِّيكُم مِّنۡهَا وَمِن كُلِّ كَرۡبٖ ثُمَّ أَنتُمۡ تُشۡرِكُونَ ٦٤

Скажи: «Аллах спасает вас от этого и от всех остальных скорбей. Но вы продолжаете приобщать сотоварищей».

(ऐ रसूल!) इनसे कह दें : अल्लाह ही है जो तुम्हें उससे बचाता है, तथा तुम्हें हर संकट से छुटकारा देता है। फिर तुम उसके उपरांत (भी) समृद्धि के समय उसके साथ दूसरों को साझी बनाते हो। तो जो तुम कर रहे हो उससे बड़ा अत्याचार (अन्याय) क्या है?!

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قُلۡ هُوَ ٱلۡقَادِرُ عَلَىٰٓ أَن يَبۡعَثَ عَلَيۡكُمۡ عَذَابٗا مِّن فَوۡقِكُمۡ أَوۡ مِن تَحۡتِ أَرۡجُلِكُمۡ أَوۡ يَلۡبِسَكُمۡ شِيَعٗا وَيُذِيقَ بَعۡضَكُم بَأۡسَ بَعۡضٍۗ ٱنظُرۡ كَيۡفَ نُصَرِّفُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَفۡقَهُونَ ٦٥

Скажи: «Он способен наслать на вас мучения сверху или из-под ваших ног, или привести вас в замешательство, разделив на группировки и дав одним из вас вкусить жестокость других». Посмотри, как Мы разъясняем знамения, чтобы они могли понять.

(ऐ रसूल!) आप इनसे कह दें : अल्लाह ही इस बात का सामर्थ्य रखता है कि तुमपर ऐसी यातना भेज दे, जो पत्थर, वज्र और बाढ़ की तरह तुम्हारे पास तुम्हारे ऊपर से आए, या वह तुम्हारे पास तुम्हारे नीचे से आए जैसे भूकंप और धरती में धंसना, या वह तुम्हारे दिलों में द्वन्द्व (असहमति) पैदा कर दे, तो तुममें से हर व्यक्ति अपनी इच्छा का पालन करने लगे, फिर तुम एक-दूसरे से लड़ने लगो। (ऐ पैग़ंबर!) ग़ौर कीजिए कैसे हम उनके लिए प्रमाणों और सबूतों में विविधता लाते हैं और उन्हें स्पष्ट करते हैं ताकि वे समझ सकें कि जो कुछ आप लाए हैं, वह सच है और जो उनके पास है वह झूठा है।

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وَكَذَّبَ بِهِۦ قَوۡمُكَ وَهُوَ ٱلۡحَقُّۚ قُل لَّسۡتُ عَلَيۡكُم بِوَكِيلٖ ٦٦

Твой народ счел его (Коран) ложью, хотя это - истина. Скажи: «Я не являюсь вашим попечителем и хранителем».

आपकी जाति ने इस क़ुरआन को झुठला दिया, हालाँकि वह सत्य है जिसके अल्लाह की ओर से होने में कोई संदेह नहीं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मुझे तुम्हारी निगरानी रखने का काम नहीं सौंपा गया है। मैं तो केवल तुम्हें एक कठोर यातना से पहले डराने वाला हूँ।

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لِّكُلِّ نَبَإٖ مُّسۡتَقَرّٞۚ وَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ ٦٧

Для каждого сообщения установлен срок, и вы узнаете об этом.

हर सूचना का एक समय है, जिसमें वह स्थिर हो जाता है और एक अंत है, जहाँ वह समाप्त हो जाता है, और इसी में से तुम्हारे अंजाम और परिणाम की सूचना है। इसलिए जब तुम क़ियामत के दिन उठाए जाओगे, तुम्हें उसका पता चल जाएगा।

6:68Страница 135

وَإِذَا رَأَيۡتَ ٱلَّذِينَ يَخُوضُونَ فِيٓ ءَايَٰتِنَا فَأَعۡرِضۡ عَنۡهُمۡ حَتَّىٰ يَخُوضُواْ فِي حَدِيثٍ غَيۡرِهِۦۚ وَإِمَّا يُنسِيَنَّكَ ٱلشَّيۡطَٰنُ فَلَا تَقۡعُدۡ بَعۡدَ ٱلذِّكۡرَىٰ مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ ٦٨

Когда ты увидишь тех, которые разглагольствуют о Наших знамениях, отвернись от них, пока они не увлекутся другим разговором. Если же дьявол заставит тебя забыть об этом, то не сиди с несправедливыми людьми после того, как вспомнишь.

जब (ऐ रसूल!) आप मुश्रिकों को देखें कि वे हमारी आयतों के विषय में व्यंग्य और उपहास के साथ बात करते हैं, तो आप उनसे दूर रहें यहाँ तक कि वे हमारी आयतों के उपहास और व्यंग्य से मुक्त बातचीत में लग जाएँ। यदि शैतान आपको भुला दे और आप उनके साथ बैठ जाएँ, फिर आपको याद आ जाए, तो उनकी सभा को छोड़ दें और इन ज़्यादती करने वालों के साथ न बैठें।

6:69Страница 136

وَمَا عَلَى ٱلَّذِينَ يَتَّقُونَ مِنۡ حِسَابِهِم مِّن شَيۡءٖ وَلَٰكِن ذِكۡرَىٰ لَعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ ٦٩

Те, которые богобоязненны, не несут никакой ответственности за их расчет. Они должны лишь напоминать им, - быть может, они устрашатся.

जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसके निषेधों से बचने के द्वारा उससे डरते हैं, उनके ज़िम्मे इन अत्याचारियों के हिसाब में से कोई चीज़ नहीं है। बल्कि उनकी ज़िम्मेदारी केवल उन्हें उन बुराइयों से रोकना है जो वे करते हैं, ताकि उनके हृदय में अल्लाह का डर पैदा हो जाए, फिर वे अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसके निषेधों से बचें।

6:70Страница 136

وَذَرِ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ دِينَهُمۡ لَعِبٗا وَلَهۡوٗا وَغَرَّتۡهُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَاۚ وَذَكِّرۡ بِهِۦٓ أَن تُبۡسَلَ نَفۡسُۢ بِمَا كَسَبَتۡ لَيۡسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيّٞ وَلَا شَفِيعٞ وَإِن تَعۡدِلۡ كُلَّ عَدۡلٖ لَّا يُؤۡخَذۡ مِنۡهَآۗ أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ أُبۡسِلُواْ بِمَا كَسَبُواْۖ لَهُمۡ شَرَابٞ مِّنۡ حَمِيمٖ وَعَذَابٌ أَلِيمُۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡفُرُونَ ٧٠

Покинь тех, которые считают свою религию забавой и потехой и обольщаются мирской жизнью. Но увещевай их этим, дабы душа не обрекла себя на погибель тем, что приобрела, когда не будет у нее покровителя и заступника, кроме Аллаха, и когда от нее ничего не будет принято, какой бы выкуп она ни предложила. Они обрекли себя на погибель тем, что приобрели. Им уготованы кипящее питье и мучительные страдания за то, что они были неверующими.

और ऐ रसूल! इन मुश्रिकों को छोड़ दें, जिन्होंने अपने धर्म को खेल-कूद और मनोरंजन बना लिया कि वे उसका मज़ाक उड़ाते और उपहास करते हैं, और इस दुनिया के जीवन ने उन्हें अपने नश्वर सुखों के साथ धोखे में डाल रखा है। (ऐ नबी!) क़ुरआन के साथ लोगों को उपदेश दें ताकि कोई भी प्राणी अपनी कमाई हुई बुराइयों के कारण विनाश की ओर न जाए, उसके लिए मदद माँगने के लिए अल्लाह के अलावा कोई सहयोगी न हो, और क़ियामत के दिन उससे अल्लाह की यातना को रोकने के लिए कोई सिफ़ारिश करने वाला न हो। तथा यदि वह कोई भी छुड़ौती देकर अल्लाह की यातना से छुटकारा लेना चाहे, तो वह उससे स्वीकार नहीं की जाएगी। यही लोग हैं, जो अपने पापों के कारण अपने आपके विनाश के हवाले कर दिए गए। उन्हें क़ियामत के दिन उनके कुफ़्र के कारण अत्यंत गरम पेय पिलाया जाएगा और दर्दनाक यातना दी जाएगी।

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قُلۡ أَنَدۡعُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَنفَعُنَا وَلَا يَضُرُّنَا وَنُرَدُّ عَلَىٰٓ أَعۡقَابِنَا بَعۡدَ إِذۡ هَدَىٰنَا ٱللَّهُ كَٱلَّذِي ٱسۡتَهۡوَتۡهُ ٱلشَّيَٰطِينُ فِي ٱلۡأَرۡضِ حَيۡرَانَ لَهُۥٓ أَصۡحَٰبٞ يَدۡعُونَهُۥٓ إِلَى ٱلۡهُدَى ٱئۡتِنَاۗ قُلۡ إِنَّ هُدَى ٱللَّهِ هُوَ ٱلۡهُدَىٰۖ وَأُمِرۡنَا لِنُسۡلِمَ لِرَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٧١

Скажи: «Разве мы станем поклоняться помимо Аллаха тому, что не приносит нам пользы и не причиняет вреда? Разве мы обратимся вспять после того, как Аллах наставил нас на прямой путь, подобно тому, кого дьяволы на земле обольстили и привели в замешательство, чьи товарищи призывают его на прямой путь: «Иди к нам!»». Скажи: «Путь Аллаха - единственно верный путь, и нам велено покориться Господу миров.

ऐ रसूल! आप इन मुश्रिकों से कह दें : क्या हम अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करने लगें, जो न किसी लाभ की मालिक हैं, कि हमें लाभ पहुँचाए और न किसी नुक़सान की मालिक हैं, कि हमें नुक़सान पहुँचा सकें। और हम ईमान से फिर जाएँ इसके बाद कि अल्लाह ने हमें उसका सामर्थ्य प्रदान किया है। फिर हम उस व्यक्ति के समान हो जाएँ, जिसे शैतानों ने पथभ्रष्ट करके चकित छोड़ दिया, उसे कोई रास्ता नहीं मिल रहा, तथा सीधे मार्ग पर उसके कुछ साथी हैं जो उसे सत्य की ओर बुलाते हैं, परंतु वह उनके बुलावे को स्वीकार करने से इनकार करता है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : अल्लाह का मार्गदर्शन ही सच्चा मार्गदर्शन है, और अल्लाह ने हमें आदेश दिया है कि हम उसके आगे झुक जाएँ, उसी को एकमात्र पूज्य मानें और उसी अकेले की इबादत करें, क्योंकि वही सारे संसारों का रब है।

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وَأَنۡ أَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَٱتَّقُوهُۚ وَهُوَ ٱلَّذِيٓ إِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ ٧٢

Совершайте намаз и бойтесь Его, ведь к Нему вы будете собраны».

उसने हमें सबसे उत्तम तरीक़े से नमाज़ स्थापित करने का आदेश दिया है, तथा उसने हमें अल्लाह के आदेशों का पालन करते हुए और उसके निषेधों से बचते हुए तक़वा अपनाने का आदेश दिया है, क्योंकि वही अकेला है जिसकी ओर क़ियामत के दिन सारे बंदे एकत्र किए जाएँगे, ताकि वह उन्हें उनके कर्मों का बदला दे।

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وَهُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۖ وَيَوۡمَ يَقُولُ كُن فَيَكُونُۚ قَوۡلُهُ ٱلۡحَقُّۚ وَلَهُ ٱلۡمُلۡكُ يَوۡمَ يُنفَخُ فِي ٱلصُّورِۚ عَٰلِمُ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِۚ وَهُوَ ٱلۡحَكِيمُ ٱلۡخَبِيرُ ٧٣

Он - Тот, Кто сотворил небеса и землю ради истины. В тот день Он скажет: «Будь!». - и это сбудется. Его Слово есть истина. Ему одному будет принадлежать власть в тот день, когда подуют в Рог. Он знает сокровенное и явное, и Он - Мудрый, Ведающий.

उसी महिमावान ने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया, (तथा उस दिन को याद करो) जिस दिन अल्लाह किसी वस्तु से कहेगा 'हो जा', तो वह हो जाएगी। जब वह क़ियामत के दिन कहेगा : उठ खड़े हो, तो सबके सब उठ खड़े होंगे। उसकी बात सत्य है, जो अनिवार्य रूप से होकर रहेगी और क़ियामत के दिन अकेले उसी महिमावान का राज्य होगा, जब इसराफील नरसिंघा में दूसरी बार फूँकेंगे। वह परोक्ष तथा प्रत्यक्ष का ज्ञानी है और वह अपनी रचना तथा प्रबंधन में हिकमत वाला है, हर चीज़ की ख़बर रखने वाला है, जिससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है। अतः उसके लिए, चीजों के अंदरूनी हिस्से उनके प्रत्यक्ष हिस्सों के समान हैं।

Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии

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Аят аль-Курси36Аль-Кахфстр. 42джуз 15Бухари 1Муслим 2999

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