Аль-МухтасарАль‑Араф · 7:184–206

Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди

Аль-Араф 7:184–206

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أَوَلَمۡ يَتَفَكَّرُواْۗ مَا بِصَاحِبِهِم مِّن جِنَّةٍۚ إِنۡ هُوَ إِلَّا نَذِيرٞ مُّبِينٌ ١٨٤

Неужели они не размышляют? Их товарищ не является бесноватым. Он не кто иной, как разъясняющий и предостерегающий увещеватель.

और क्या अल्लाह की आयतों और उसके रसूल को झुठलाने वाले इन लोगों ने अपनी बुद्धि को काम में लाते हुए ग़ौर नहीं किया कि उनके लिए यह स्पष्ट हो जाता कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पागल नहीं हैं। वह तो केवल अल्लाह के रसूल हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी यातना से खुले रूप से सावधान करने के लिए भेजा है।

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أَوَلَمۡ يَنظُرُواْ فِي مَلَكُوتِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا خَلَقَ ٱللَّهُ مِن شَيۡءٖ وَأَنۡ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ قَدِ ٱقۡتَرَبَ أَجَلُهُمۡۖ فَبِأَيِّ حَدِيثِۭ بَعۡدَهُۥ يُؤۡمِنُونَ ١٨٥

Неужели они не вглядываются в царствие небес и земли, а также всего, что сотворил Аллах? Быть может, их срок уже близок. В какой же рассказ после этого они уверуют?

क्या इन लोगों ने आकाशों तथा धरती में अल्लाह के राज्य को शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से नहीं देखा? और उन दोनों के अंदर अल्लाह ने जो जीव और निर्जीव चीज़ें पैदा की हैं, उनपर निगाह नहीं डाली? और अपने निर्धारित समय (आयु) पर ग़ौर नहीं किया, जिसका अंत हो सकता है बहुत निकट हो, इसलिए समय निकलने से पहले तौबा कर लेते? जब वे क़ुरआन और उसके वादों और धमकियों पर ईमान नहीं लाए, तो उसके अलावा किस किताब पर ईमान लाएँगे?

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مَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَلَا هَادِيَ لَهُۥۚ وَيَذَرُهُمۡ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ ١٨٦

Кого Аллах ввел в заблуждение, того никто не наставит на прямой путь. Он бросает их скитаться вслепую в их собственном беззаконии.

जिसे अल्लाह सत्य की ओर हिदायत से विफल कर दे और उसे सीधे रास्ते से भटका दे, तो उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं है, जो उसकी ओर उसका मार्गदर्शन कर सके।और अल्लाह उन्हें उनकी गुमराही और कुफ़्र में छोड़ देता है कि वे भटकते फिरते हैं, उन्हें कोई रास्ता सुझाई नहीं देता।

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يَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرۡسَىٰهَاۖ قُلۡ إِنَّمَا عِلۡمُهَا عِندَ رَبِّيۖ لَا يُجَلِّيهَا لِوَقۡتِهَآ إِلَّا هُوَۚ ثَقُلَتۡ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ لَا تَأۡتِيكُمۡ إِلَّا بَغۡتَةٗۗ يَسۡـَٔلُونَكَ كَأَنَّكَ حَفِيٌّ عَنۡهَاۖ قُلۡ إِنَّمَا عِلۡمُهَا عِندَ ٱللَّهِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يَعۡلَمُونَ ١٨٧

Они спрашивают тебя о Часе: «Когда он наступит?». Скажи: «Воистину, знание об этом принадлежит только моему Господу. Никто, кроме Него, не способен открыть время его наступления. Это знание тяжко для небес и земли. Он настанет внезапно». Они спрашивают тебя, словно тебе известно об этом. Скажи: «Воистину, знание об этом принадлежит одному Аллаху, но большая часть людей не знает этого».

(ऐ नबी!) ये हठी झुठलाने वाले आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह किस समय घटित होगी और उसका सटीक ज्ञान कब होगा? आप कह दें कि उसका ज्ञान न तो मेरे पास है और न मेरे अलावा किसी और के पास है। उसकी जानकारी केवल अल्लाह के पास है। उसे उसके निर्धारित समय पर केवल अल्लाह ही प्रकट करेगा। उसके प्रकट होने का मामला आकाश वालों तथा धरती वालों से छिपा है। वह तुम्हारे पास अचानक ही आएगी। वे आपसे क़ियामत के बारे में ऐसे पूछ रहे हैं, जैसे कि आप उसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं। हालाँकि उन्हें यह पता ही नहीं कि आप अपने रब से पूरी तरह अवगत होने के कारण उससे क़ियामत के बारे में नहीं पूछते हैं। (ऐ मुहम्मद!) उनसे कह दें कि क़ियामत की जानकारी केवल अल्लाह ही के पास है, लेकिन अधिकतर लोग इस बात से अवगत नहीं हैं।

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قُل لَّآ أَمۡلِكُ لِنَفۡسِي نَفۡعٗا وَلَا ضَرًّا إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُۚ وَلَوۡ كُنتُ أَعۡلَمُ ٱلۡغَيۡبَ لَٱسۡتَكۡثَرۡتُ مِنَ ٱلۡخَيۡرِ وَمَا مَسَّنِيَ ٱلسُّوٓءُۚ إِنۡ أَنَا۠ إِلَّا نَذِيرٞ وَبَشِيرٞ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ ١٨٨

Скажи: «Я не властен принести себе пользу или причинить себе вред, если того не пожелает Аллах. Если бы я знал сокровенное, то приумножил бы для себя добро, и зло не коснулось бы меня. Однако я - всего лишь предостерегающий увещеватель и добрый вестник для верующих людей».

(ऐ मुहम्मद!) आप कह दें : मैं न अपने लिए कोई भलाई प्राप्त कर सकता हूँ और न अपने आपसे कोई बुराई दूर कर सकता हूँ, सिवाय इसके कि अल्लाह चाहे। यह काम केवल अल्लाह का है। मैं केवल वही जानता हूँ, जो अल्लाह ने मुझे सिखाया है। चुनाँचे मैं ग़ैब की बात नहीं जानता। अगर मैं ग़ैब की बात जानता होता, तो चीज़ों को उनके होने से पहले जानने और उनके परिणाम से अवगत होने की वजह से अवश्य उन कारणों को अपनाया होता, जिन्हें मैं जानता हूँ कि वे मेरे हितों की पूर्ति करते और मुझसे बुराइयों को दूर करते हैं। मैं तो केवल अल्लाह की ओर से भेजा हुआ एक रसूल हूँ। उसकी दुखदायी यातना से डराता हूँ और उन लोगों को उसके उदार प्रतिफल की शुभ सूचना देता हूँ, जो इस बात पर विश्वास रखते हैं कि मैं अल्लाह का रसूल हूँ और मैं जो कुछ लेकर आया हूँ, उसे सच्चा मानते हैं।

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۞ هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَكُم مِّن نَّفۡسٖ وَٰحِدَةٖ وَجَعَلَ مِنۡهَا زَوۡجَهَا لِيَسۡكُنَ إِلَيۡهَاۖ فَلَمَّا تَغَشَّىٰهَا حَمَلَتۡ حَمۡلًا خَفِيفٗا فَمَرَّتۡ بِهِۦۖ فَلَمَّآ أَثۡقَلَت دَّعَوَا ٱللَّهَ رَبَّهُمَا لَئِنۡ ءَاتَيۡتَنَا صَٰلِحٗا لَّنَكُونَنَّ مِنَ ٱلشَّٰكِرِينَ ١٨٩

Он - Тот, Кто сотворил вас из одного человека. Он создал из него супругу, чтобы он нашел в ней покой. Когда же он вступил с ней в близость, она понесла легкое бремя и ходила с ним. Когда же она отяжелела от бремени, они вдвоем воззвали к Аллаху, своему Господу: «Если Ты даруешь нам праведного ребенка, то мы непременно будем в числе благодарных».

वही अल्लाह है, जिसने तुम्हें (ऐ पुरुषो और महिलाओ!) एक ही जान अर्थात् आदम अलैहिस्सलाम से पैदा किया और आदम अलैहिस्सलाम से उनकी पत्नी ह़व्वा को पैदा किया। ह़व्वा को आदम अलैहिस्सलाम की पसली से पैदा किया, ताकि आदम अलैहिस्सलाम उनसे सुकून हासिल करें और संतुष्ट रहें। फिर जब एक पति ने अपनी पत्नी के साथ संभोग किया, तो उसे हल्का सा गर्भ ठहर गया, जिसे वह महसूस नहीं करती थी। क्योंकि वह अपनी शुरुआत में था। वह अपनी इस गर्भावस्था पर रहते हुए अपनी ज़रूरत के काम-काज करती रही, उसे कोई बोझ महसूस नहीं होता था। फिर उसके पेट में गर्भ के बड़ा होने पर, उसे भारीपन महसूस हुआ, तो पति-पत्नी ने मिलकर अल्लाह से दुआ करते हुए कहा : (ऐ हमारे पालनहार!) अगर तूने हमें एक स्वस्थ बच्चा प्रदान किया, तो हम तेरी नेमतों का शुक्रिया अदा करने वालों में से होंगे।

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فَلَمَّآ ءَاتَىٰهُمَا صَٰلِحٗا جَعَلَا لَهُۥ شُرَكَآءَ فِيمَآ ءَاتَىٰهُمَاۚ فَتَعَٰلَى ٱللَّهُ عَمَّا يُشۡرِكُونَ ١٩٠

Когда же Он даровал им обоим праведного ребенка, они стали приобщать к Нему сотоварищей в том, чем Он одарил их. Аллах превыше того, что они приобщают в сотоварищи.

जब अल्लाह ने उन दोनों की प्रार्थना स्वीकार करके उन्हें एक स्वस्थ बच्चा प्रदान कर दिया, तो उन्होंने अल्लाह की दी हुई संतान में उसके साझीदार बना लिए। चुनाँचे उन्होंने अपने बेटे को अल्लाह के अलावा अन्य का बंदा बना दिया और उसका नाम अब्दुल ह़ारिस (हारिस का बंदा) रख दिया। तो अल्लाह हर साझी व शरीक से बहुत ऊँचा है। क्योंकि वह पालनहार और पूज्य होने में अकेला है।

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أَيُشۡرِكُونَ مَا لَا يَخۡلُقُ شَيۡـٔٗا وَهُمۡ يُخۡلَقُونَ ١٩١

Неужели они приобщают в сотоварищи к Аллаху тех, которые ничего не творят, тогда как сами были сотворены,

क्या वे इन मूर्तियों और इनके सिवा अन्य चीज़ों को इबादत में अल्लाह का साझी बनाते हैं, जबकि वे जानते हैं कि ये मूर्तियाँ कुछ पैदा नहीं करतीं, कि पूजा की हक़दार हों। बल्कि, वे स्वयं पैदा की गई हैं। तो फिर वे इन्हें कैसे अल्लाह का साझी ठहराते हैं?

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وَلَا يَسۡتَطِيعُونَ لَهُمۡ نَصۡرٗا وَلَآ أَنفُسَهُمۡ يَنصُرُونَ ١٩٢

которые не способны оказать им поддержку и не способны помочь даже самим себе?

ये पूज्य न अपने पूजकों की सहायता कर सकते हैं और न खुद अपनी सहायता कर सकते हैं, तो फिर वे इनकी इबादत कैसे करते हैं?!

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وَإِن تَدۡعُوهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ لَا يَتَّبِعُوكُمۡۚ سَوَآءٌ عَلَيۡكُمۡ أَدَعَوۡتُمُوهُمۡ أَمۡ أَنتُمۡ صَٰمِتُونَ ١٩٣

Если вы призовете их на прямой путь, они не последуют за вами. Для вас все равно, будете вы их призывать или будете молчать.

और अगर तुम (ऐ मुश्रिको!) इन मूर्तियों को, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूज्य बनाते हो, हिदायत की ओर बुलाओ, तो वे तुम्हें उसका जवाब नहीं देंगी जिनकी ओर तुमने उन्हें बुलाया है और न ही वे तुम्हारा अनुसरण करेंगी। अतः उनके निकट तुम्हारा उन्हें पुकारना या तुम्हारा चुप रहना दोनों बराबर है। क्योंकि वे मात्र निर्जीव वस्तुएं हैं; जो न समझती हैं, न सुनती हैं और न बोलती हैं।

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إِنَّ ٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ عِبَادٌ أَمۡثَالُكُمۡۖ فَٱدۡعُوهُمۡ فَلۡيَسۡتَجِيبُواْ لَكُمۡ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ١٩٤

Те, к кому вы взываете наряду с Аллахом, являются рабами, подобными вам самим. Взывайте к ним, и пусть они ответят вам, если вы говорите правду.

निःसंदेह जिन लोगों की तुम (ऐ मुश्रिको!) अल्लाह के सिवा इबादत करते हो, वे अल्लाह ही के पैदा किए हुए हैं और उनका मालिक भी वही है। इस तरह वे इस बारे में तुम्हारे ही जैसे हैं। बल्कि तुम उनसे उत्तम स्थिति में हो। क्योंकि तुम ज़िंदा हो, बोलते हो, चलते-फिरते हो, सुनते हो और देखते हो। जबकि तुम्हारी मूर्तियों के पास ये शक्तियाँ नहीं हैं। अतः तुम उनको पुकारो और वे तुम्हारी पुकार का जवाब दें, यदि तुम उनके बारे में अपने दावे में सच्चे हो।

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أَلَهُمۡ أَرۡجُلٞ يَمۡشُونَ بِهَآۖ أَمۡ لَهُمۡ أَيۡدٖ يَبۡطِشُونَ بِهَآۖ أَمۡ لَهُمۡ أَعۡيُنٞ يُبۡصِرُونَ بِهَآۖ أَمۡ لَهُمۡ ءَاذَانٞ يَسۡمَعُونَ بِهَاۗ قُلِ ٱدۡعُواْ شُرَكَآءَكُمۡ ثُمَّ كِيدُونِ فَلَا تُنظِرُونِ ١٩٥

Есть ли у них ноги, на которых они ходят? Или у них есть руки, которыми они хватают? Или у них есть глаза, которыми они видят? Или у них есть уши, которыми они слышат? Скажи: «Призовите этих сотоварищей, а затем ухитритесь против меня и не предоставляйте мне отсрочки.

क्या इन मूर्तियों के, जिन्हें तुमने पूज्य बना रखा है, पाँव हैं, जिनसे वे चलती हैं, कि तुम्हारी ज़रूरतें पूरी करें? या उनके हाथ हैं, जिनसे वे तुम्हारा पूरी शक्ति से बचाव करें? या उनकी आँखें हैं, जिनसे वे उन चीज़ों को देखती हैं, जिन्हें तुम नहीं देख सकते कि तुम्हें उनसे अवगत करा सकें? या उनके कान हैं, जिनसे वे उन बातों को सुन लेती हैं, जिन्हें तुम नहीं सुन सकते, तो वे तुम्हें उनसे सूचित कर देती हैं? अगर वे इन सारी चीज़ों से खाली हैं, तो फिर तुम उन्हें लाभ प्राप्त करने या हानि से बचने की आशा में कैसे पूजते हो?! (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : उन लोगों को पुकारो, जिन्हें तुमने अल्लाह के बराबर बना रखा है, फिर तुम मुझे नुक़सान पहुँचाने का उपाय करो और मुझे कोई मोहलत न दो।

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إِنَّ وَلِـِّۧيَ ٱللَّهُ ٱلَّذِي نَزَّلَ ٱلۡكِتَٰبَۖ وَهُوَ يَتَوَلَّى ٱلصَّٰلِحِينَ ١٩٦

Воистину, моим Покровителем является Аллах, Который ниспослал Писание. Он покровительствует праведникам.

वास्तव में, मेरा मददगार और सहायक अल्लाह है, जो मेरा संरक्षण करता है। अतः मैं उसके अलावा किसी और से आशा नहीं रखता, और मुझे तुम्हारी मूर्तियों से कुछ भी डर नहीं है। क्योंकि वही (अल्लाह) है जिसने मुझपर क़ुरआन को लोगों के मार्गदर्शन के लिए उतारा है और वही अपने सत्कर्मी बंदों के सारे काम संभालता है। चुनाँचे उनका संरक्षण करता और उनकी सहायता करता है।

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وَٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَكُمۡ وَلَآ أَنفُسَهُمۡ يَنصُرُونَ ١٩٧

А те, к кому вы взываете вместо Него, не способны оказать вам поддержку и не способны помочь даже самим себе».

और इन मूर्तियों में से जिन्हें (ऐ मुश्रिको!) तुम पुकारते हो, वे न तुम्हारी सहायता करने में सक्षम हैं, और न ही वे स्वयं का समर्थन करने में सक्षम हैं। क्योंकि वे असहाय हैं। तो फिर तुम अल्लाह को छोड़कर उन्हें कैसे पुकारते हो?!

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وَإِن تَدۡعُوهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ لَا يَسۡمَعُواْۖ وَتَرَىٰهُمۡ يَنظُرُونَ إِلَيۡكَ وَهُمۡ لَا يُبۡصِرُونَ ١٩٨

Если ты призовешь их на прямой путь, они не услышат этого. Ты видишь, как они смотрят на тебя, но они ничего не видят.

और (ऐ मुश्रिको!) यदि तुम अपनी मूर्तियों को, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो, सीधी राह की ओर बुलाओ, तो वे तुम्हारे बुलावे को नहीं सुनेंगी। और तुम उन्हें देखोगे कि वे तुम्हारी ओर तुम्हारी ही बनाई हुई आँखों से देख रही हैं, हालाँकि वे निर्जीव चीज़ें हैं, जो नहीं देखती हैं। दरअसल मुश्रिक लोग मनुष्यों या जानवरों के रूप में मूर्तियाँ बनाते थे, जिनके हाथ, पैर और आँखें होती थीं। लेकिन वे बेजान होती थीं, न उनके अंदर जीवन होता था न हरकत।

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خُذِ ٱلۡعَفۡوَ وَأۡمُرۡ بِٱلۡعُرۡفِ وَأَعۡرِضۡ عَنِ ٱلۡجَٰهِلِينَ ١٩٩

Будь снисходителен (или отдавай излишек; или принимай пожертвования, которые приносят тебе), вели творить добро и отвернись от невежд.

(ऐ रसूल!) आप लोगों के उन कार्यों और व्यवहारों को स्वीकार करें, जो वे खुशी मन से करें और जो उनके लिए आसान हों। उनपर ऐसे कार्य और व्यवहार का बोझ न डालें जिनकी उनके स्वभाव अनुमति नहीं देते हैं। क्योंकि यह उन्हें आपसे दूर करने का कारण बनेगा। और आप हर सुंदर बात तथा अच्छे कार्य का आदेश दें और अज्ञानी लोगों से उपेक्षा करें। इसलिए उनकी अज्ञानता का जवाब अज्ञानता से न दें। चुनाँचे जो आपको कष्ट दे, आप उसे कष्ट न दें और जो आपको वंचित करे, आप उसे वंचित न करें।

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وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ نَزۡغٞ فَٱسۡتَعِذۡ بِٱللَّهِۚ إِنَّهُۥ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ٢٠٠

А если дьявол станет наущать тебя, то прибеги к защите Аллаха, ведь Он - Слышащий, Знающий.

और यदि (ऐ रसूल!) आप महसूस करें कि शैतान आपके दिल में कोई ग़लत ख़याल डाल रहा है या आपको सत्कर्म से रोकने का प्रयास करता है, तो अल्लाह का शरण लें और उसे मज़बूती से पकड़ लें। क्योंकि वह आपकी बात को सुनने वाला और आपके शरण लेने को जानने वाला है। अतः वह शैतान से आपकी रक्षा करेगा।

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إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ إِذَا مَسَّهُمۡ طَٰٓئِفٞ مِّنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ تَذَكَّرُواْ فَإِذَا هُم مُّبۡصِرُونَ ٢٠١

Воистину, если богобоязненных людей коснется наваждение от дьявола, то они поминают назидание и прозревают.

वास्तव में, जो लोग अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से दूर रहकर, डरते हैं, जब वे शैतान की ओर से किसी बुरे ख़याल से पीड़ित होकर गुनाह कर बैठते हैं; तो वे अल्लाह की महानता, अवज्ञाकारियों के लिए उसकी सज़ा और आज्ञाकारियों के लिए उसके प्रतिफल को याद करते हैं। इसलिए वे अपने गुनाहों से तौबा करके अपने पालनहार की ओर लौट जाते हैं। फिर क्या देखते हैं कि वे सत्य मार्ग पर जम गए, ग़फ़लत से जाग गए और गुनाह से बाज़ आ गए।

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وَإِخۡوَٰنُهُمۡ يَمُدُّونَهُمۡ فِي ٱلۡغَيِّ ثُمَّ لَا يُقۡصِرُونَ ٢٠٢

А в своих братьях они (дьяволы) усиливают заблуждение, после чего они не останавливаются.

दुराचारियों और काफ़िरों जैसे शैतान के भाइयों को, शैतान एक के बाद एक पाप में लिप्त करके उन्हें गुमराही में बढ़ाते जाते हैं। वे रुकने का नाम ही नहीं लेते, न शैतान बहकाने और गुमराह करने से और न ही दुराचारी लोग उनकी बात मानने और बुराई करने से।

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وَإِذَا لَمۡ تَأۡتِهِم بِـَٔايَةٖ قَالُواْ لَوۡلَا ٱجۡتَبَيۡتَهَاۚ قُلۡ إِنَّمَآ أَتَّبِعُ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيَّ مِن رَّبِّيۚ هَٰذَا بَصَآئِرُ مِن رَّبِّكُمۡ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ ٢٠٣

Если ты не явишь им знамения, они скажут: «Почему ты не выбрал (не показал) его?». Скажи: «Я следую только за тем, что внушается мне в откровении от моего Господа. Это - очевидное знамение от Господа вашего, верное руководство и милость для верующих».

जब (ऐ रसूल!) आप कोई आयत (निशानी) लाएँ, तो वे आपको झुठला देते हैं और उससे मुँह फेर लेते हैं। और अगर आप उनके पास कोई आयत न लाएँ, तो वे कहते हैं : आपने अपनी ओर से कोई आयत क्यों न गढ़ ली? आप (ऐ रसूल!) ऐसे लोगों से कह दें : मुझे यह अधिकार नहीं कि मैं अपनी ओर से कोई आयत ले आऊँ। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ, जो अल्लाह मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) करता है। यह क़ुरआन जो मैं तुम्हारे सामने पढ़ता हूँ, अल्लाह की ओर से, जो तुम्हारा रचयिता और तुम्हारे सब काम संभालने वाला है, प्रमाण और दलील है, तथा उसके मोमिन बंदों के लिए मार्गदर्शन और दया है। रही बात ग़ैर मोमिनों की, तो वे गुमराह और दुर्भाग्य वाले लोग हैं।

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وَإِذَا قُرِئَ ٱلۡقُرۡءَانُ فَٱسۡتَمِعُواْ لَهُۥ وَأَنصِتُواْ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ ٢٠٤

Когда читается Коран, то слушайте его и храните молчание, - быть может, вас помилуют.

और जब क़ुरआन पढ़ा जाए, तो उसकी तिलावत को ध्यानपूर्वक सुनो तथा न बात करो और न किसी अन्य काम में व्यस्त हो, उम्मीद है अल्लाह तुमपर दया करे।

7:205Страница 176

وَٱذۡكُر رَّبَّكَ فِي نَفۡسِكَ تَضَرُّعٗا وَخِيفَةٗ وَدُونَ ٱلۡجَهۡرِ مِنَ ٱلۡقَوۡلِ بِٱلۡغُدُوِّ وَٱلۡأٓصَالِ وَلَا تَكُن مِّنَ ٱلۡغَٰفِلِينَ ٢٠٥

Поминай Аллаха с покорностью и страхом про себя и не громко по утрам и перед закатом и не будь одним из беспечных невежд.

और (ऐ नबी!) अल्लाह को, जो आपका पालनहार है, विनयपूर्वक और डरते हुए याद करें, और दुआ के समय अपनी आवाज़ मध्यम रखें, न बहुत ऊँची, न बहुत नीची, दिन के प्रथम और उसके अंतिम भाग में। क्योंकि इन दोनों समय की बड़ी फ़ज़ीलत है। और आप उन लोगों में से न हों, जो अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल रहते हैं।

7:206Страница 176

إِنَّ ٱلَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ عَنۡ عِبَادَتِهِۦ وَيُسَبِّحُونَهُۥ وَلَهُۥ يَسۡجُدُونَۤ۩ ٢٠٦

Те, которые находятся возле твоего Господа, не превозносятся над поклонением Ему, славословят Ему и падают перед Ним ниц.

निःसंदेह जो फ़रिश्ते (ऐ रसूल!) आपके पालनहार के पास हैं, वे उसकी इबादत (वंदना) से अभिमान नहीं करते, बल्कि उसके आज्ञापालन में समर्पित रहते हैं, उससे थकते नहीं हैं। तथा वे दिन-रात अल्लाह को उन बातों से पवित्र ठहराते रहते हैं, जो उसके लायक़ नहीं हैं और केवल उसी के आगे सजदा करते हैं।

Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии

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Аят аль-Курси36Аль-Кахфстр. 42джуз 15Бухари 1Муслим 2999

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