Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди
Ат-Тавба 9:99–129
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وَمِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ مَن يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَيَتَّخِذُ مَا يُنفِقُ قُرُبَٰتٍ عِندَ ٱللَّهِ وَصَلَوَٰتِ ٱلرَّسُولِۚ أَلَآ إِنَّهَا قُرۡبَةٞ لَّهُمۡۚ سَيُدۡخِلُهُمُ ٱللَّهُ فِي رَحۡمَتِهِۦٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٩٩
Среди бедуинов есть и такие, которые веруют в Аллаха и Последний день и считают, что их пожертвования приблизят их к Аллаху и помогут заслужить молитвы Посланника. Воистину, они (пожертвования) действительно являются средством приближения. Аллах введет их в Свою милость, ведь Аллах - Прощающий, Милосердный.
देहात में रहने वालों में से कुछ ऐसे भी हैं, जो अल्लाह पर तथा क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं और अल्लाह के रास्ते में जो धन खर्च करते हैं, उसे अल्लाह की निकटता प्राप्त करने का ज़रिया तथा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की दुआ और क्षमायाचना की प्राप्ति का साधन समझते हैं। सुन लो, उसका अल्लाह के रास्ते में खर्च करना और रसूल का उसके लिए दुआ करना, निश्चय ही उसके लिए अल्लाह के पास निकटता प्राप्त करने का साधन है, जिसका अल्लाह के पास उसे यह प्रतिफल मिलेगा कि अल्लाह उसे अपनी विशाल दया में प्रवेश करेगा, जिसमें उसकी क्षमा और उसकी जन्नत शामिल है। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
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وَٱلسَّٰبِقُونَ ٱلۡأَوَّلُونَ مِنَ ٱلۡمُهَٰجِرِينَ وَٱلۡأَنصَارِ وَٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُم بِإِحۡسَٰنٖ رَّضِيَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُواْ عَنۡهُ وَأَعَدَّ لَهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي تَحۡتَهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۚ ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ١٠٠
Аллах доволен первыми из мухаджиров и ансаров, которые опередили остальных, и теми, которые последовали строго за ними. Они также довольны Аллахом. Он приготовил для них Райские сады, в которых текут реки. Они пребудут там вечно. Это - великое преуспеяние.
जिन लोगों ने सबसे पहले ईमान लाने में जल्दी की, चाहे वे मुहाजिरीन हों, जो अपना घर और देश छोड़कर अल्लाह की ओर निकल पड़े, या अंसार, जिन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की मदद की, तथा वे लोग जिन्होंने अक़ीदा, कथनों और कर्मों में अच्छाई के साथ ईमान की ओर पहल करने वाले मुहाजिरीन और अंसार का अनुसरण किया - अल्लाह इन सभी लोगों से खुश हो गया और उनकी आज्ञाकारिता को स्वीकार कर लिया, तथा वे लोग भी उससे प्रसन्न हो गए, क्योंकि उसने उन्हें अपना महान प्रतिफल प्रदान किया और उनके लिए ऐसी जन्नतें तैयार कर रखी हैं, जिनके महलों के नीचे नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदैव रहने वाले हैं। यह बदला ही महान सफलता है।
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وَمِمَّنۡ حَوۡلَكُم مِّنَ ٱلۡأَعۡرَابِ مُنَٰفِقُونَۖ وَمِنۡ أَهۡلِ ٱلۡمَدِينَةِ مَرَدُواْ عَلَى ٱلنِّفَاقِ لَا تَعۡلَمُهُمۡۖ نَحۡنُ نَعۡلَمُهُمۡۚ سَنُعَذِّبُهُم مَّرَّتَيۡنِ ثُمَّ يُرَدُّونَ إِلَىٰ عَذَابٍ عَظِيمٖ ١٠١
Среди бедуинов, которые живут вокруг вас, а также среди жителей Медины есть лицемеры. Они упорствуют в лицемерии, но ты не знаешь их. Мы же знаем их и подвергнем их мучениям дважды. А затем они будут возвращены в великие мучения.
देहात के वासियों में से जो लोग मदीना के आस-पास हैं, उनमें से कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं और मदीना वालों में से भी कुछ लोग मुनाफ़िक़ हैं, जो निफाक़ पर क़ायम और उसपर जमे हुए हैं। (ऐ रसूल!) आप उन्हें नहीं जानते, अल्लाह ही उन्हें भली-भाँति जानता है। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें दो बार यातना देगा : एक बार दुनिया में उनके पाखंड को उजागर करके तथा उन्हें क़त्ल किए जाने और बंदी बनाए जाने के द्वारा, तथा दूसरी बार आख़िरत में क़ब्र की यातना देकर। फिर वे क़ियामत के दिन जहन्नम के पाताल में एक बड़ी यातना की ओर लौटाए जाएँगे।
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وَءَاخَرُونَ ٱعۡتَرَفُواْ بِذُنُوبِهِمۡ خَلَطُواْ عَمَلٗا صَٰلِحٗا وَءَاخَرَ سَيِّئًا عَسَى ٱللَّهُ أَن يَتُوبَ عَلَيۡهِمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ ١٠٢
Есть и другие люди, которые признались в своих грехах. Они смешали праведные поступки со злыми. Возможно, Аллах примет их покаяния. Воистину, Аллах - Прощающий, Милосердный.
तथा मदीना वालों में से कुछ अन्य लोग भी हैं, जो बिना किसी कारण (बहाने) के युद्ध से पीछे रह गए। लेकिन उन्होंने झूठे बहाने बनाने के बजाय, स्वयं स्वीकार कर लिया कि उनके पास (युद्ध में शामिल न होने का) कोई कारण (बहाना) नहीं था। उन्होंने अपने पिछले अच्छे कर्मों, जैसे अल्लाह की आज्ञाकारिता करने, उसके नियमों का पालन करने और उसके मार्ग में जिहाद करने के साथ एक बुरे काम को मिला दिया। उन्हें आशा है कि अल्लाह उनके पश्चाताप को स्वीकार करेगा और उन्हें क्षमा कर देगा। निःसंदेह अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदो को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
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خُذۡ مِنۡ أَمۡوَٰلِهِمۡ صَدَقَةٗ تُطَهِّرُهُمۡ وَتُزَكِّيهِم بِهَا وَصَلِّ عَلَيۡهِمۡۖ إِنَّ صَلَوٰتَكَ سَكَنٞ لَّهُمۡۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ١٠٣
Бери из их имущества пожертвования, чтобы ими очистить и возвысить их. Молись за них, ибо твои молитвы - успокоение для них. Воистину, Аллах - Слышащий, Знающий.
(ऐ रसूल!) आप उनके मालों में से ज़कात लें, जिसके द्वारा आप उन्हें अवज्ञा और पापों की गंदगी से शुद्ध करें और उसके साथ उनके अच्छे कर्मों को विकसित करें। तथा उसे उनसे लेने के बाद, उनके लिए दुआ करें। निःसंदेह आपकी दुआ उनके लिए दया और संतोष का कारण है। अल्लाह आपकी दुआ को सुनने वाला, उनके कार्यों और इरादों को जानने वाला है।
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أَلَمۡ يَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ هُوَ يَقۡبَلُ ٱلتَّوۡبَةَ عَنۡ عِبَادِهِۦ وَيَأۡخُذُ ٱلصَّدَقَٰتِ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ ١٠٤
Неужели они не знают, что Аллах принимает покаяния от Своих рабов и принимает пожертвования, что Аллах - Принимающий покаяния, Милосердный?
जिहाद से पीछे रह जाने वालों और पश्चाताप करके अल्लाह की ओर लौटने वालों को पता होना चाहिए कि अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों की तौबा क़बूल करता है, और यह कि वह दान को स्वीकार करता है, जबकि उसे उसकी कोई आवश्यकता नहीं है, तथा दान करने वाले को उसके दान का सवाब देता है। निःसंदेह पवित्र अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदो की तौबा क़बूल करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
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وَقُلِ ٱعۡمَلُواْ فَسَيَرَى ٱللَّهُ عَمَلَكُمۡ وَرَسُولُهُۥ وَٱلۡمُؤۡمِنُونَۖ وَسَتُرَدُّونَ إِلَىٰ عَٰلِمِ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ١٠٥
Скажи: «Трудитесь, и увидят ваши деяния Аллах, Его Посланник и верующие. Вы предстанете перед Ведающим сокровенное и явное, и Он поведает вам о том, что вы совершали».
तथा (ऐ रसूल!) आप इन जिहाद से पीछे रह जाने वालों और अपने पाप से तौबा करने वालों से कह दीजिए : जो चीज़ तुमसे छूट गई है, उसके नुक़सान की भरपाई करो, अपने कार्यों को अल्लाह के लिए ख़ालिस (विशुद्ध) रखो और उसे प्रसन्न करने वाले कार्य करो। अल्लाह, उसके रसूल और ईमान वाले तुम्हारे कार्यों को देखेंगे। तथा क़ियामत के दिन तुम अपने पालनहार की ओर लौटाए जाओगे, जो हर चीज़ का ज्ञान रखता है। वह जानता है जो कुछ तुम गुप्त रखते हो और जो कुछ तुम प्रदर्शित करते हो। फिर वह तुम्हें बता देगा जो कुछ तुम दुनिया में किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।
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وَءَاخَرُونَ مُرۡجَوۡنَ لِأَمۡرِ ٱللَّهِ إِمَّا يُعَذِّبُهُمۡ وَإِمَّا يَتُوبُ عَلَيۡهِمۡۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ ١٠٦
Есть и такие, которые выжидают веления Аллаха. Он либо накажет их, либо примет их покаяния. Аллах - Знающий, Мудрый.
तबूक की लड़ाई से पीछे रहने वालों में से कुछ दूसरे लोग भी हैं, जिनके पास कोई बहाना नहीं था। इनका मामला अल्लाह का फ़ैसला और इनके बारे में उसका आदेश आने तक स्थगित कर दिया गया है। अल्लाह उनके बारे में जो चाहे, फैसला करे : या तो वह उन्हें दंडित करे यदि वे तौबा न करें, या उनकी तौबा स्वीकार करे अगर वे तौबा कर लें। अल्लाह अच्छी तरह जानता है कि कौन उसके दंड का हक़दार है और कौन उसकी क्षमा के योग्य है। वह अपने विधान और प्रबंधन में हिकमत वाला है। ये लोग : मुरारा बिन रबी', कअब बिन मालिक और हिलाल बिन उमैया थे।
9:107Страница 204
وَٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مَسۡجِدٗا ضِرَارٗا وَكُفۡرٗا وَتَفۡرِيقَۢا بَيۡنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَإِرۡصَادٗا لِّمَنۡ حَارَبَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ مِن قَبۡلُۚ وَلَيَحۡلِفُنَّ إِنۡ أَرَدۡنَآ إِلَّا ٱلۡحُسۡنَىٰۖ وَٱللَّهُ يَشۡهَدُ إِنَّهُمۡ لَكَٰذِبُونَ ١٠٧
Те, которые построили мечеть для нанесения вреда, поддержания неверия, внесения раскола в ряды мусульман и создания заставы для тех, кто издавна сражается против Аллаха и Его Посланника, непременно будут клясться: «Мы не хотели ничего, кроме добра». Аллах свидетельствует, что они являются лжецами.
तथा मुनाफ़िक़ो में से वे लोग भी हैं, जिन्होंने एक मस्जिद बनाई पर अल्लाह की आज्ञाकारिता के लिए नहीं, बल्कि मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाने के लिए, मुनाफ़िक़ों को मज़बूत करके कुफ़्र का प्रदर्शन करने के लिए, ईमान वालों के बीच फूट डालने के लिए और उन लोगों को तैयारी का स्थान तथा घात स्थल प्रदान करने के लिए, जिन्होंने मस्जिद के निर्माण से पूर्व अल्लाह और उसके रसूल से लड़ाई की। निश्चय ये मुनाफ़िक़ तुमसे अवश्य ही क़समें खाकर कहेंगे : हमारा मक़सद तो केवल मुसलमानों के साथ आसानी (दयालुता) का था। जबकि अल्लाह गवाही देता है कि निश्चय वे अपने इस दावे में झूठे हैं।
9:108Страница 204
لَا تَقُمۡ فِيهِ أَبَدٗاۚ لَّمَسۡجِدٌ أُسِّسَ عَلَى ٱلتَّقۡوَىٰ مِنۡ أَوَّلِ يَوۡمٍ أَحَقُّ أَن تَقُومَ فِيهِۚ فِيهِ رِجَالٞ يُحِبُّونَ أَن يَتَطَهَّرُواْۚ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلۡمُطَّهِّرِينَ ١٠٨
Никогда не совершай в ней намаз. Мечеть, которая с первого дня была основана на богобоязненности, больше заслуживает того, чтобы ты выстаивал в ней. В ней есть мужи, которые любят очищаться. Воистину, Аллах любит очищающихся.
(ऐ नबी!) आप इस तरह की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने के लिए मुनाफ़िक़ों के आमंत्रण को स्वीकार न करें। क्योंकि क़ुबा की मस्जिद, जिसे शुरू ही से तक़्वा (धर्मपरायणता) पर स्थापित किया गया है, आपका उसमें नमाज़ पढ़ना इस मस्जिद की तुलना में अधिक उपयुक्त है, जिसे कुफ़्र पर स्थापित किया गया है। क़ुबा की मस्जिद में ऐसे लोग हैं, जो अशुद्धियों और गंदगियों से पानी के द्वारा और पापों से तौबा और क्षमायाचना के द्वारा शुद्ध रहना पसंद करते हैं, और अल्लाह अशुद्धताओं, गंदगियों और पापों से शुद्ध रहने वालों को पसंद करता है।
9:109Страница 204
أَفَمَنۡ أَسَّسَ بُنۡيَٰنَهُۥ عَلَىٰ تَقۡوَىٰ مِنَ ٱللَّهِ وَرِضۡوَٰنٍ خَيۡرٌ أَم مَّنۡ أَسَّسَ بُنۡيَٰنَهُۥ عَلَىٰ شَفَا جُرُفٍ هَارٖ فَٱنۡهَارَ بِهِۦ فِي نَارِ جَهَنَّمَۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّٰلِمِينَ ١٠٩
Тот ли, кто заложил основание своего строения на страхе перед Аллахом и стремлении к Его довольству, лучше или же тот, кто заложил его на самом краю обрыва, готового обвалиться, так что он обвалился вместе с ним в огонь Геенны? Воистину, Аллах не ведет прямым путем несправедливых людей.
क्या जिसने अपने भवन की आधारशिला अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उसके तक़्वा तथा अधिक से अधिक नेकी के कार्य करके अल्लाह की प्रसन्नता पर रखी है, वह उसके बराबर है, जिसने मुसलमानों को नुक़सान पहुँचाने, कुफ़्र को मज़बूत करने और ईमान वालों के बीच विभेद पैदा करने के लिए मस्जिद बनाई?! दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते। पहले व्यक्ति का भवन शक्तिशाली और मज़बूत है, जिसके गिरने का डर नहीं है। जबकि दूसरे व्यक्ति का उदाहरण उस व्यक्ति की तरह है, जिसने किसी गड्ढे के किनारे एक भवन बनाया, पर वह ढह गया और गिर गया और उसके साथ ही उसका भवन जहन्नम की गहराई में जा गिरा। सच्चाई यह है कि अल्लाह कुफ़्र और निफ़ाक़ वग़ैरह के ज़रिए अत्याचार करने वाले लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता।
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لَا يَزَالُ بُنۡيَٰنُهُمُ ٱلَّذِي بَنَوۡاْ رِيبَةٗ فِي قُلُوبِهِمۡ إِلَّآ أَن تَقَطَّعَ قُلُوبُهُمۡۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ١١٠
Строение, которое они построили, всегда будет порождать сомнения в их сердцах, пока их сердца не разорвутся. Аллах - Знающий, Мудрый.
उनकी यह मस्जिद, जिसे उन्होंने (मुसलमानों को) नुक़सान पहुँचाने के लिए बनाया है, सदा उनके दिलों में संदेह और निफ़ाक़ के रूप में बसी रहेगी, यहाँ तक कि मौत से अथवा तलवार के द्वारा वध से उनके दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ। अल्लाह अपने बंदों के कामों को जानने वाला, उनके अच्छे या बुरे कर्म का बदला देने में हिकमत वाला है।
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۞ إِنَّ ٱللَّهَ ٱشۡتَرَىٰ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ أَنفُسَهُمۡ وَأَمۡوَٰلَهُم بِأَنَّ لَهُمُ ٱلۡجَنَّةَۚ يُقَٰتِلُونَ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَيَقۡتُلُونَ وَيُقۡتَلُونَۖ وَعۡدًا عَلَيۡهِ حَقّٗا فِي ٱلتَّوۡرَىٰةِ وَٱلۡإِنجِيلِ وَٱلۡقُرۡءَانِۚ وَمَنۡ أَوۡفَىٰ بِعَهۡدِهِۦ مِنَ ٱللَّهِۚ فَٱسۡتَبۡشِرُواْ بِبَيۡعِكُمُ ٱلَّذِي بَايَعۡتُم بِهِۦۚ وَذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ١١١
Воистину, Аллах купил у верующих их души и имущество в обмен на Рай. Они сражаются на пути Аллаха, убивая и погибая. Таково Его обещание и обязательство в Таурате (Торе), Инджиле (Евангелии) и Коране. Кто выполняет свои обещания лучше Аллаха? Возрадуйтесь же сделке, которую вы заключили. Это и есть великое преуспеяние.
निःसंदेह अल्लाह ने (अपनी कृपा से) ईमान वालों से उनके प्राणों को एक उच्च क़ीमत अर्थात जन्नत के बदले में ख़रीद लिया है, (हालाँकि वे अल्लाह ही की संपत्ति हैं)। क्योंकि वे काफ़िरों से लड़ते हैं ताकि अल्लाह का वचन सर्वोच्च हो। चुनाँचे वे काफ़िरों को क़त्ल करते हैं और काफ़िर उन्हें क़त्ल करते हैं। अल्लाह ने इसका सच्चा वादा मूसा अलैहिस्सलाम की पुस्तक तौरात, ईसा अलैहिस्सलाम की पुस्तक इनजील और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पुस्तक क़ुरआन में किया है, तथा अल्लाह से बढ़कर अपना वादा पूरा करने वाला कोई नहीं है। अतः (ऐ ईमान वालो!) अपने इस सौदे से प्रसन्न हो जाओ, जो तुमने अल्लाह से किया है। क्योंकि तुमने इसमें बहुत लाभ कमाया है और यह सौदा ही बहुत बड़ी सफलता है।
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ٱلتَّٰٓئِبُونَ ٱلۡعَٰبِدُونَ ٱلۡحَٰمِدُونَ ٱلسَّٰٓئِحُونَ ٱلرَّٰكِعُونَ ٱلسَّٰجِدُونَ ٱلۡأٓمِرُونَ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَٱلنَّاهُونَ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَٱلۡحَٰفِظُونَ لِحُدُودِ ٱللَّهِۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ١١٢
Обрадуй верующих, которые каются и поклоняются, восхваляют и постятся (или путешествуют), кланяются и падают ниц, повелевают совершать одобряемое и запрещают предосудительное, и соблюдают ограничения Аллаха.
यह प्रतिफल प्राप्त करने वाले लोग वे हैं, जो अल्लाह को पसंद न आने वाली और उसे क्रोधित करने वाली चीज़ों की उपेक्षाकर उसे पसंद आने वाली तथा प्रसन्न करने वाली चीज़ों की ओर लौटने वाले हैं, जो अल्लाह के भय और विनम्रता के कारण विनयशील होकर उसकी आज्ञाकारिता में बहुत परिश्रम करते हैं, जो हर परिस्थिति में अपने रब की स्तुति करने वाले, रोज़े रखने वाले, नमाज़ पढ़ने वाले, अल्लाह ने या उसके रसूल ने जिसका आदेश दिया है उसका आदेश देने वाले, अल्लाह और उसके रसूल ने जिससे मना किया है उससे मनाही करने वाले, तथा अल्लाह के आदेशों की, उनका अनुपालन करके और उसके निषेधों की, उनसे बचकर रक्षा करने वाले हैं। (ऐ रसूल!) आप इन गुणों से विशेषित मोमिनों को उस चीज़ की सूचना दे दें, जो उन्हें दुनिया और आखिरत में प्रसन्न कर देगी।
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مَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَن يَسۡتَغۡفِرُواْ لِلۡمُشۡرِكِينَ وَلَوۡ كَانُوٓاْ أُوْلِي قُرۡبَىٰ مِنۢ بَعۡدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمۡ أَنَّهُمۡ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ ١١٣
Пророку и верующим не подобает просить прощения для многобожников, даже если они являются родственниками, после того, как им стало ясно, что они будут обитателями Ада.
नबी के लिए उचित नहीं है और न ही ईमान वालों के लिए उचित है कि वे मुश्रिकों के लिए अल्लाह से क्षमा याचना करें, भले ही वे उनके रिश्तेदार हों, जबकि उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि वे शिर्क की अवस्था में मरने के कारण जहन्नमियों में से हैं।
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وَمَا كَانَ ٱسۡتِغۡفَارُ إِبۡرَٰهِيمَ لِأَبِيهِ إِلَّا عَن مَّوۡعِدَةٖ وَعَدَهَآ إِيَّاهُ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۥٓ أَنَّهُۥ عَدُوّٞ لِّلَّهِ تَبَرَّأَ مِنۡهُۚ إِنَّ إِبۡرَٰهِيمَ لَأَوَّٰهٌ حَلِيمٞ ١١٤
А молитва Ибрахима (Авраама) о прощении для его отца была всего лишь исполнением обещания, которое он ему дал. Когда же ему стало ясно, что его отец является врагом Аллаха, он отрекся от него. Воистину, Ибрахим (Авраам) был смиренным, выдержанным.
इबराहीम अलैहिस्सलाम का अपने पिता के लिए क्षमायाचना करना केवल इस कारण था कि उन्होंने अपने पिता से वादा किया था कि वह उनके लिए अवश्य क्षमायाचना करेंगे; इस आशा में कि वह इस्लाम स्वीकार कर लेंगे। परंतु जब इबराहीम अलैहिस्सलाम के लिए यह स्पष्ट हो गया कि उनका पिता अल्लाह का दुश्मन है, क्योंकि उसे उनके उपदेश से कोई फायदा नहीं हुआ, या इसलिए कि उन्हें वह़्य के द्वारा मालूम हो गया था कि उसकी मृत्यु एक काफ़िर के रूप में होगी, तो वह उससे अलग हो गए। उनका अपने पिता के लिए क्षमायाचना करना उनका अपना इजतिहाद था, किसी आदेश का उल्लंघन नहीं था जिसकी अल्लाह ने उनकी ओर वह़्य की थी। निःसंदेह इबराहीम अलैहिस्सलाम अल्लाह के सामने अत्यधिक गिड़गिड़ाने वाले और अपनी अत्याचारी क़ौम को बहुत माफ़ करने वाले थे।
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وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُضِلَّ قَوۡمَۢا بَعۡدَ إِذۡ هَدَىٰهُمۡ حَتَّىٰ يُبَيِّنَ لَهُم مَّا يَتَّقُونَۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ ١١٥
Аллах не вводит в заблуждение людей, которым Он указал прямой путь, пока Он не разъяснит им, чего они должны опасаться. Воистину, Аллах знает о всякой вещи.
अल्लाह किसी जाति को मार्गदर्शन प्रदान करने के बाद उसके लिए पथभ्रष्टता का फ़ैसला नही करता, जब तक कि वह उनके लिए उन निषेधों को स्पष्ट नहीं कर देता जिनसे बचना अनिवार्य है। फिर यदि वे निषेध की व्याख्या करने के बाद उस कार्य को करें जो उनके लिए निषिद्ध ठहराया गया है, तो उनपर पथभ्रष्टता का फैसला कर देता है। निःसंदेह अल्लाह सब कुछ जानने वाला है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है। और उसने तुम्हें वह सिखाया है जो तुम नहीं जानते थे।
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إِنَّ ٱللَّهَ لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۖ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۚ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ ١١٦
Воистину, Аллаху принадлежит власть над небесами и землей. Он дарует жизнь и умерщвляет. Нет у вас, кроме Аллаха, ни покровителя, ни помощника.
निःसंदेह आकाशों और धरती का राज्य अल्लाह ही का है। उन दोनों में उसका कोई साझी नहीं, उन दोनों में उससे कुछ भी छिपा नहीं है। वह जिसे जीवन देना चाहता है, उसे जीवन देता है और जिसे मारना चाहता है, उसे मारता है। और (ऐ लोगो!) तुम्हारा अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं है, जो तुम्हारे मामलों का प्रभारी हो, और न तुम्हारा कोई सहायक है, जो तुमसे बुराई को दूर करे और तुम्हारे दुश्मन के खिलाफ तुम्हारी मदद करे।
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لَّقَد تَّابَ ٱللَّهُ عَلَى ٱلنَّبِيِّ وَٱلۡمُهَٰجِرِينَ وَٱلۡأَنصَارِ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُ فِي سَاعَةِ ٱلۡعُسۡرَةِ مِنۢ بَعۡدِ مَا كَادَ يَزِيغُ قُلُوبُ فَرِيقٖ مِّنۡهُمۡ ثُمَّ تَابَ عَلَيۡهِمۡۚ إِنَّهُۥ بِهِمۡ رَءُوفٞ رَّحِيمٞ ١١٧
Аллах принял покаяния Пророка, мухаджиров и ансаров, которые последовали за ним в трудный час, после того, как сердца некоторых из них чуть было не уклонились в сторону. Он принял их покаяния, ибо Он - Сострадательный, Милосердный.
अल्लाह ने पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को माफ़ कर दिया, जो आपने मुनाफ़िक़ों को तबूक के युद्ध से पीछे रहने की अनुमति प्रदान कर दी थी। तथा मुहाजिरों और अंसार को भी माफ़ कर दिया, जो उससे पीछे नहीं रहे, बल्कि भीषण गरमी, माली परेशानी और शक्तिशाली दुश्मन का सामना होने के बावजूद तबूक के युद्ध में आपके साथ निकल पड़े। जबकि उनमें से एक समूह के दिल विपरीत परिस्थितियों के कारण बहकने लगे थे, जो युद्ध छोड़ने का इरादा कर चुके थे। फिर अल्लाह ने उन्हें दृढ़ रहने और लड़ाई के लिए निकलने की तौफ़ीक़ प्रदान की और उनकी तौबा क़बूल कर ली। निःसंदेह अल्लाह उनपर कृपा करने वाला और दयावान् है और यह उसकी दया ही है कि उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी और उनकी तौबा क़बूल कर ली।
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وَعَلَى ٱلثَّلَٰثَةِ ٱلَّذِينَ خُلِّفُواْ حَتَّىٰٓ إِذَا ضَاقَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلۡأَرۡضُ بِمَا رَحُبَتۡ وَضَاقَتۡ عَلَيۡهِمۡ أَنفُسُهُمۡ وَظَنُّوٓاْ أَن لَّا مَلۡجَأَ مِنَ ٱللَّهِ إِلَّآ إِلَيۡهِ ثُمَّ تَابَ عَلَيۡهِمۡ لِيَتُوبُوٓاْۚ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ ١١٨
Аллах простил и тех троих, которым было отсрочено до тех пор, пока земля не стала тесной для них, несмотря на ее просторы. Их души сжались, и они поняли, что им негде укрыться от Аллаха, кроме как у Него. Затем Он простил их, чтобы они могли раскаяться. Воистину, Аллах - Принимающий покаяния, Милосердный.
अल्लाह ने उन तीनों व्यक्तियों अर्थात् कअब बिन मालिक, मुरारा बिन रबी' और हिलाल बिन उमय्यह को भी क्षमा कर दिया, जिनके अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ तबूक की ओर निकलने से पीछे रह जाने के बाद उनकी तौबा के क़बूल होने का मामला स्थगित कर दिया गया था। चुनाँचे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लोगों को इन तीनों से अलग-थलग रहने का आदेश दे दिया, जिसपर उन्हें दु:ख और शोक ने घेर लिया, यहाँ तक कि धरती अपने विस्तार के बावजूद उनपर तंग हो गई और उन्हें जिस अकेलेपन का सामना हुआ उसके कारण उनके दिल संकुचित हो गए और उन्होंने जान लिया कि एकमात्र अल्लाह के सिवा उनके लिए कोई शरण लेने का स्थान नहीं है। इसलिए अल्लाह ने उनपर दया करते हुए उन्हें तौबा की तौफ़ीक़ दी, फिर उनकी तौबा क़बूल फरमाई। निःसंदेह वह अपने बंदों की तौबा क़बूल करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَكُونُواْ مَعَ ٱلصَّٰدِقِينَ ١١٩
О те, которые уверовали! Бойтесь Аллаха и будьте с правдивыми.
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने, उसके रसूल का अनुसरण करने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर अल्लाह से डरो तथा उन लोगों के साथ रहो, जो अपने ईमान तथा अपने वचन और कर्म में सच्चे हैं। क्योंकि तुम्हारे लिए मोक्ष केवल सच्चाई में है।
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مَا كَانَ لِأَهۡلِ ٱلۡمَدِينَةِ وَمَنۡ حَوۡلَهُم مِّنَ ٱلۡأَعۡرَابِ أَن يَتَخَلَّفُواْ عَن رَّسُولِ ٱللَّهِ وَلَا يَرۡغَبُواْ بِأَنفُسِهِمۡ عَن نَّفۡسِهِۦۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ لَا يُصِيبُهُمۡ ظَمَأٞ وَلَا نَصَبٞ وَلَا مَخۡمَصَةٞ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَا يَطَـُٔونَ مَوۡطِئٗا يَغِيظُ ٱلۡكُفَّارَ وَلَا يَنَالُونَ مِنۡ عَدُوّٖ نَّيۡلًا إِلَّا كُتِبَ لَهُم بِهِۦ عَمَلٞ صَٰلِحٌۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ١٢٠
Не следовало жителям Медины и бедуинам из окрестностей оставаться позади Посланника Аллаха и отдавать предпочтение собственным жизням перед его жизнью. Это потому, что жажда, усталость и голод, постигающие их на пути Аллаха, и каждый шаг, вызывающий гнев неверующих, и каждое поражение, нанесенное врагу, непременно запишутся им как добрые дела. Воистину, Аллах не теряет вознаграждения творящих добро.
मदीना वालों तथा उनके आस-पास के देहात के वासियों के लिए उचित नहीं है कि जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम स्वयं जिहाद के लिए निकलें, तो वे आपसे पीछे रह जाएँ। उनके लिए यह भी उचित नहीं है कि वे अपने प्राणों के मामले में कंजूसी करें और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के प्राण की उपेक्षा कर अपने प्राणों की रक्षा करें। बल्कि उनके लिए अनिवार्य है कि आपके प्राण की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दें; क्योंकि उन्हें अल्लाह के मार्ग में जो भी प्यास, थकान या भूख पहुँचती है, तथा वे जिस स्थान पर भी उतरते हैं, जहाँ उनकी उपस्थिति काफ़िरों के क्रोध को भड़काती है, और वे किसी दुश्मन को क़त्ल, या क़ैद या पराजय से पीड़ित करते, या ग़नीमत का धन प्राप्त करते हैं - तो उसके बदले में अल्लाह उनके लिए एक सत्कर्म का सवाब लिख देता है जिसे वह उनसे स्वीकार करता है। निःसंदेह अल्लाह सत्कर्मियों के प्रतिफल को नष्ट नहीं करता, बल्कि उन्हें उसका पूर्ण बदला देता है और उससे भी बढ़ाकर देता है।
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وَلَا يُنفِقُونَ نَفَقَةٗ صَغِيرَةٗ وَلَا كَبِيرَةٗ وَلَا يَقۡطَعُونَ وَادِيًا إِلَّا كُتِبَ لَهُمۡ لِيَجۡزِيَهُمُ ٱللَّهُ أَحۡسَنَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ١٢١
Какое бы большое или скудное пожертвование они ни делали, какую бы долину они ни пересекали, это записывается им, дабы Аллах воздал им большим, чем то, что они совершили.
और वे जो भी थोड़ा या अधिक धन खर्च करते हैं और जो भी घाटी पार करते हैं, तो उनके उस खर्च करने और यात्रा को लिख लिया जाता है, ताकि अल्लाह उन्हें पुरस्कृत करे। चुनाँचे वह उन्हें आख़िरत में उनके सर्वोत्तम कार्यों का बदला प्रदान करेगा।
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۞ وَمَا كَانَ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ لِيَنفِرُواْ كَآفَّةٗۚ فَلَوۡلَا نَفَرَ مِن كُلِّ فِرۡقَةٖ مِّنۡهُمۡ طَآئِفَةٞ لِّيَتَفَقَّهُواْ فِي ٱلدِّينِ وَلِيُنذِرُواْ قَوۡمَهُمۡ إِذَا رَجَعُوٓاْ إِلَيۡهِمۡ لَعَلَّهُمۡ يَحۡذَرُونَ ١٢٢
Верующим не следует выступать в поход всем вместе. Почему бы не отправить из каждой группы по отряду, чтобы они могли изучить религию и увещевать людей, когда они вернутся к ним? Быть может, они будут остерегаться.
मोमिनों के लिए उचित नहीं है कि वे सब के सब लड़ाई के लिए निकल खड़े हों, ताकि ऐसा न हो कि यदि उनका दुश्मन उनपर गालिब आ जाए तो उनका सफ़ाया कर दिया जाए। इसलिए ऐसा क्यों नहीं किया गया कि उनका एक समूह जिहाद के लिए निकलता और एक समूह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ रहता। ताकि वे आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क़ुरआन और शरीयत के अहकाम सुनकर धर्म की समझ हासिल करते और अपनी जाति के लोगों को सचेत करते जब वे जो कुछ उन्होंने सीखा था उसे लेकर उनके पास लौटते; इस आशा में कि वे अल्लाह की यातना और उसके दंड से सावधान हो जाएँ तथा उसके आदेशों का पालन करने लगें और उसके निषेधों से बचने लगें। यह आयत उन सैन्यदलों के बारे में है, जिन्हें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आस-पास के क्षेत्रों में भेजते थे और उनके लिए अपने सहाबा के एक समूह का चयन करते थे।
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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ قَٰتِلُواْ ٱلَّذِينَ يَلُونَكُم مِّنَ ٱلۡكُفَّارِ وَلۡيَجِدُواْ فِيكُمۡ غِلۡظَةٗۚ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُتَّقِينَ ١٢٣
О те, которые уверовали! Сражайтесь с неверующими, которые находятся вблизи вас. И пусть они убедятся в вашей суровости. И знайте, что Аллах - с богобоязненными.
अल्लाह ने ईमान वालों को उन काफ़िरों से लड़ने का आदेश दिया है, जो उनके आस-पास रहते हैं; क्योंकि वे अपनी निकटता के कारण मोमिनों के लिए खतरे का कारण बनते हैं। इसी तरह उन्हें भयभीत करने और उनकी बुराई को दूर करने के लिए मुसलमानों को शक्ति और कठोरता दिखाने का भी आदेश दिया है। तथा सर्वशक्तिमान अल्लाह अपनी सहायता और समर्थन के साथ परहेज़गार मोमिनों के संग है।
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وَإِذَا مَآ أُنزِلَتۡ سُورَةٞ فَمِنۡهُم مَّن يَقُولُ أَيُّكُمۡ زَادَتۡهُ هَٰذِهِۦٓ إِيمَٰنٗاۚ فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ فَزَادَتۡهُمۡ إِيمَٰنٗا وَهُمۡ يَسۡتَبۡشِرُونَ ١٢٤
Когда ниспосылается сура, то среди них находится такой, который говорит: «Чья вера от этого стала сильнее?». Что касается тех, кто уверовал, то их вера от этого усиливается, и они радуются.
जब अल्लाह अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर कोई सूरत अवतरित करता है, तो मुनाफ़िक़ों में से कुछ लोग उपहास करते हुऐ पूछते हैं : इस अवतिरत होने वाली सूरत ने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के दुवारा लाई गई शरीयत पर किसके विश्वास को बढ़ायाॽ चुनाँचे जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूल को सच्चा माना, तो इस सूरत के अवतरण ने उनके पूर्व विश्वास में और वृद्धि कर दी, तथा वे उस अवतरित वह़्य (प्रकाशना) से प्रसन्न हैं; क्योंकि उसमें उनके दुनिया और आख़िरत के लाभ निहित हैं।
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وَأَمَّا ٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٞ فَزَادَتۡهُمۡ رِجۡسًا إِلَىٰ رِجۡسِهِمۡ وَمَاتُواْ وَهُمۡ كَٰفِرُونَ ١٢٥
А что касается тех, чьи сердца поражены недугом, то это добавляет сомнение к их сомнению, и поэтому они умрут неверующими.
जहाँ तक मुनाफ़िक़ों का संबंध है, तो अहकाम और कहानियों पर आधारित इस क़ुरआन का अवतरण उनके रोग और गंदगी को और बढ़ा देता है, क्योंकि वे उस उतरने वाली वह़्य को झुठलाते हैं। अतः क़ुरआन के अवतरण में वृद्धि के साथ उनके दिल की बीमारी बढ़ जाती है; क्योंकि जब भी कोई वह़्य उतरती थी, वे उसके बारे में संदेह करते थे और वे कुफ़्र ही की अवस्था में मर गए।
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أَوَلَا يَرَوۡنَ أَنَّهُمۡ يُفۡتَنُونَ فِي كُلِّ عَامٖ مَّرَّةً أَوۡ مَرَّتَيۡنِ ثُمَّ لَا يَتُوبُونَ وَلَا هُمۡ يَذَّكَّرُونَ ١٢٦
Неужели они не видят, что каждый год они подвергаются испытанию один или два раза? Они не раскаиваются после этого и не поминают назидание.
क्या ये मुनाफ़िक़ लोग सीख ग्रहण करते हुए नहीं देखते कि अल्लाह हर साल एक या दो बार उनकी हालत को प्रकट करके और उनके निफ़ाक़ का पर्दाफ़ाश करके उनकी परीक्षा लेता है?! फिर यह जानने के बावजूद कि अल्लाह ही उनके साथ ऐसा करता है, वे उसके समक्ष अपने कुफ़्र (अविश्वास) से तौबा नहीं करते हैं और अपने निफ़ाक़ को नहीं छोड़ते हैं और न ही उससे उपदेश ग्रहण करते हैं, जो उनके साथ घटित हुआ है और यह कि वह अल्लाह की ओर से है!
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وَإِذَا مَآ أُنزِلَتۡ سُورَةٞ نَّظَرَ بَعۡضُهُمۡ إِلَىٰ بَعۡضٍ هَلۡ يَرَىٰكُم مِّنۡ أَحَدٖ ثُمَّ ٱنصَرَفُواْۚ صَرَفَ ٱللَّهُ قُلُوبَهُم بِأَنَّهُمۡ قَوۡمٞ لَّا يَفۡقَهُونَ ١٢٧
Когда ниспосылается сура, они смотрят друг на друга: «Видит ли вас кто-нибудь?». А затем они отворачиваются. Аллах отвратил их сердца, потому что они - люди неразумные.
और जब अल्लाह अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर कोई सूरत उतारता है, जिसमें मुनाफ़िक़ों की स्थितियों का ज़िक्र होता है, तो कुछ मुनाफ़िक़ यह कहते हुए एक-दूसरे को देखते हैं : क्या तुम्हें कोई देख रहा है? यदि कोई उन्हें न देख रहा हो, तो मजलिस से चले जाते हैं। सुन लो! अल्लाह ने उनके दिलों को मार्गदर्शन और भलाई से फेर दिया है और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो नहीं समझते।
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لَقَدۡ جَآءَكُمۡ رَسُولٞ مِّنۡ أَنفُسِكُمۡ عَزِيزٌ عَلَيۡهِ مَا عَنِتُّمۡ حَرِيصٌ عَلَيۡكُم بِٱلۡمُؤۡمِنِينَ رَءُوفٞ رَّحِيمٞ ١٢٨
К вам явился Посланник из вашей среды. Тяжко для него то, что вы страдаете. Он старается для вас. Он сострадателен и милосерден к верующим.
निःसंदेह तुम्हारे पास (ऐ अरब के लोगो!) तुम्हारे ही वर्ग से एक रसूल आया है, वह तुम्हारी ही तरह एक अरबी है। उसके लिए वह बहुत कष्टदायक है, जिससे तुम्हें कष्ट पहुँचे। वह तुम्हारे मार्गदर्शन का बहुत इच्छुक और तुम्हारा बहुत ध्यान रखने वाला है तथा वह विशेष रूप से ईमान वालों के प्रति बहुत करुणा और दया वाला है।
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فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقُلۡ حَسۡبِيَ ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ عَلَيۡهِ تَوَكَّلۡتُۖ وَهُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡعَظِيمِ ١٢٩
А если они отвернутся, то скажи: «Мне достаточно Аллаха! Нет божества, кроме Него. Я уповаю только на Него, ибо Он - Господь великого Трона».
फिर अगर वे आपसे मुँह मोड़ें और उसपर ईमान न लाएँ, जो आप लेकर आए हैं, तो (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मेरे लिए अल्लाह ही काफ़ी है, जिसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं। मैंने उसी अकेले (अल्लाह) पर भरोसा किया और वही महिमावान महान सिंहासन (अर्श) का मालिक है।
Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии