Аль-МухтасарАт‑Тавба · 9:34–64

Аль-Мухтасар · Тафсир · на хинди

Ат-Тавба 9:34–64

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۞ يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلۡأَحۡبَارِ وَٱلرُّهۡبَانِ لَيَأۡكُلُونَ أَمۡوَٰلَ ٱلنَّاسِ بِٱلۡبَٰطِلِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۗ وَٱلَّذِينَ يَكۡنِزُونَ ٱلذَّهَبَ وَٱلۡفِضَّةَ وَلَا يُنفِقُونَهَا فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ فَبَشِّرۡهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٖ ٣٤

О те, которые уверовали! Воистину, многие из первосвященников и монахов незаконно пожирают имущество людей и сбивают их с пути Аллаха. Обрадуй же тех, которые накапливают золото и серебро и не расходуют их на пути Аллаха, мучительными страданиями.

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत का अनुसरण करने वालो! बहुत-से यहूदी विद्वान और बहुत-से ईसाई उपासक, लोगों के धनों को बिना किसी वैध अधिकार के लेते हैं। चुनाँचे वे उन्हें रिश्वत और अन्य अवैध ढंग से लेते हैं, और वे लोगों को अल्लाह के धर्म में प्रवेश करने से रोकते हैं। तथा जो लोग सोना-चाँदी जमा करके रखते हैं और अपने ऊपर अनिवार्य उसकी ज़कात नहीं देते, तो (ऐ रसूल!) आप उन्हें क़ियामत के दिन दर्दनाक यातना की सूचना दे दें, जिससे उन्हें बहुत तकलीफ़ होगी।

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يَوۡمَ يُحۡمَىٰ عَلَيۡهَا فِي نَارِ جَهَنَّمَ فَتُكۡوَىٰ بِهَا جِبَاهُهُمۡ وَجُنُوبُهُمۡ وَظُهُورُهُمۡۖ هَٰذَا مَا كَنَزۡتُمۡ لِأَنفُسِكُمۡ فَذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَكۡنِزُونَ ٣٥

В тот день они (накопленные ими сокровища) будут раскалены в огне Геенны, и ими будут заклеймены их лбы, бока и спины. Им будет сказано: «Вот то, что вы копили для себя. Вкусите же то, что вы копили!».

जो कुछ उन्होंने इकट्ठा किया और उसका हक़ रोक लिया, उसे क़ियामत के दिन जहन्नम की आग में तपाया जाएगा। जब वह बहुत गर्म हो जाएगा, तो उसे उनके माथों, पहलुओं और पीठों पर रखा जाएगा, और उन्हें फटकार के रूप में कहा जाएगा : ये हैं तुम्हारे धन, जो तुमने एकत्र किए थे लेकिन उनमें अनिवार्य अधिकारों का भुगतान नहीं किए थे। तो अब, जो कुछ तुम इकट्ठा कर रहे थे और उसके अधिकारों का भुगतान नहीं कर रहे थे, उसका कष्ट और उसके परिणाम का स्वाद चखो।

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إِنَّ عِدَّةَ ٱلشُّهُورِ عِندَ ٱللَّهِ ٱثۡنَا عَشَرَ شَهۡرٗا فِي كِتَٰبِ ٱللَّهِ يَوۡمَ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ مِنۡهَآ أَرۡبَعَةٌ حُرُمٞۚ ذَٰلِكَ ٱلدِّينُ ٱلۡقَيِّمُۚ فَلَا تَظۡلِمُواْ فِيهِنَّ أَنفُسَكُمۡۚ وَقَٰتِلُواْ ٱلۡمُشۡرِكِينَ كَآفَّةٗ كَمَا يُقَٰتِلُونَكُمۡ كَآفَّةٗۚ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلۡمُتَّقِينَ ٣٦

Воистину, число месяцев у Аллаха - двенадцать. Так было записано в Писании в тот день, когда Аллах сотворил небеса и землю. Четыре месяца из них - запретные. Такова правая религия, и посему не поступайте в них несправедливо по отношению к себе. Сражайтесь с многобожниками всеми вместе (или все вместе), подобно тому, как они сражаются с вами всеми вместе (или все вместе). Знайте, что Аллах - с богобоязненными.

निःसंदेह अल्लाह के निर्णय और फैसले के अनुसार वर्ष के महीनों की संख्या बारह है, जिसे उसने आकाशों और धरती की रचना के समय ही लौह़-ए-मह़फूज़ में लिख दिया था। इन बारह महीनों में से चार महीनों में अल्लाह ने लड़ने से मना किया है। इनमें से तीन महीने तगातार हैं : 'ज़ुलक़ादा, ज़ुलहिज्जा और मुहर्रम' और एक अकेला, जो कि 'रजब' है। यह जो वर्ष के महीनों की संख्या और उनमें से चार के हुरमत वाले होने का उल्लेख किया गया है, वही सीधा धर्म है। अतः इन हुरमत वाले महीनों के अंदर युद्ध करके और उनकी पवित्रता को भंग करके अपने प्राणों पर अत्याचार न करो। तथा बहुदेववादियों से सब मिलकर युद्ध करो, जैसे वे मिलकर तुमसे युद्ध करते हैं। और यह जान लो कि अल्लाह अपनी मदद और सुदृढ़ीकरण के द्वारा उन लोगों के साथ है, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते हैं। और जिसके साथ अल्लाह हो, उसे कोई पराजित नही कर सकता।

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إِنَّمَا ٱلنَّسِيٓءُ زِيَادَةٞ فِي ٱلۡكُفۡرِۖ يُضَلُّ بِهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يُحِلُّونَهُۥ عَامٗا وَيُحَرِّمُونَهُۥ عَامٗا لِّيُوَاطِـُٔواْ عِدَّةَ مَا حَرَّمَ ٱللَّهُ فَيُحِلُّواْ مَا حَرَّمَ ٱللَّهُۚ زُيِّنَ لَهُمۡ سُوٓءُ أَعۡمَٰلِهِمۡۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ ٣٧

Откладывание запретного месяца только увеличивает неверие. От этого неверующие впадают в заблуждение. В один год они объявляют его дозволенным, а в другой год объявляют его запретным, чтобы уравнять количество месяцев, которые Аллах сделал запретными. Они объявляют дозволенным то, что запретил Аллах, и их злодеяния кажутся им прекрасными. Аллах не ведет прямым путем неверующих людей.

किसी हुरमत वाले महीने की पवित्रता को एक ग़ैर-हुरमत वाले महीने तक विलंब करना और इसे उसके स्थान पर रखना (जैसा कि पूर्व-इस्लामिक युग में अरब करते थे) उनके अल्लाह के साथ कुफ़्र पर कुफ़्र में वृद्धि है; क्योंकि उन्होंने हुरमत वाले महीनों के बारे में अल्लाह के आदेश का इनकार किया है। शैतान इसके द्वारा उन लोगों को गुमराह करता है, जिन्होंने अल्लाह का इनकार किया जब उसने उनके लिए यह बुरा तरीक़ा जारी किया। वे एक साल हुरमत वाले महीने को किसी हलाल महीने से बदलकर हलाल कर लेते हैं और एक साल उसकी हुरमत को बाक़ी रहने देते हैं, ताकि वे उन महीनों की संख्या के अनुरूप हों जिन्हें अल्लाह ने हुरमत वाला बनाया है, भले ही वे उनकी यथार्था के विपरीत हों। चुनाँचे वे किसी महीने को हलाल बनाते हैं, तो उसके स्थान पर एक महीने को हराम घोषित कर देते हैं। इस तरह वे अल्लाह के हराम किए हुए हुरमत वाले महीनों को हलाल कर लेते हैं और उसके आदेश का उल्लंघन करते हैं। दरअसल शैतान ने उनके लिए बुरे कामों को अच्छा बना दिया और वे उन्हें करने लगे। जिनमें से एक महीनों को आगे-पीछे करना भी है। और अल्लाह उन काफ़िरों को हिदायत नहीं देता, जो अपने कुफ़्र पर अडिग रहते हैं।

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يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَا لَكُمۡ إِذَا قِيلَ لَكُمُ ٱنفِرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ٱثَّاقَلۡتُمۡ إِلَى ٱلۡأَرۡضِۚ أَرَضِيتُم بِٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا مِنَ ٱلۡأٓخِرَةِۚ فَمَا مَتَٰعُ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا فِي ٱلۡأٓخِرَةِ إِلَّا قَلِيلٌ ٣٨

О те, которые уверовали! Почему, когда вас призывают выступить в поход на пути Аллаха, вы тяжело припадаете к земле? Неужели вы довольствуетесь мирской жизнью больше, чем Последней жизнью? Но преходящее удовольствие мирской жизни по сравнению с Последней жизнью ничтожно.

ऐ अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाने वालो और उसकी शरीयत का पालन करने वालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुम्हें अपने दुश्मन से लड़ने के लिए अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए बुलाया जाता है, तो तुम धीमे हो जाते हो और अपने घरों में स्थिरता को तरजीह देते हो?! क्या तुम आख़िरत (परलोक) के शाश्वत आनंद (सुख) के बदले, जो अल्लाह ने अपने मार्ग में जिहाद करने वालों के लिए तैयार कर रखा है, इस दुनिया के क्षणभंगुर जीवन के सुखों और समाप्त हो जाने वाले आनंदों से संतुष्ट हो गए हो?! तो (जान लो कि) आख़िरत के पक्ष में इस सांसारिक जीवन का आनंद बहुत तुच्छ है। फिर एक समझदार व्यक्ति नश्वर को शाश्वत पर, और महान पर तुच्छ को कैसे चुन सकता है?!

9:39Страница 193

إِلَّا تَنفِرُواْ يُعَذِّبۡكُمۡ عَذَابًا أَلِيمٗا وَيَسۡتَبۡدِلۡ قَوۡمًا غَيۡرَكُمۡ وَلَا تَضُرُّوهُ شَيۡـٔٗاۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ ٣٩

Если вы не выступите в поход, то Он подвергнет вас мучительным страданиям и заменит вас другим народом. Вы ничем не навредите Ему, ибо Аллах способен на всякую вещь.

यदि (ऐ मोमिनो!) तुम अपने दुश्मन से लड़ने के लिए अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने के लिए नहीं निकलोगे, तो अल्लाह तुम्हें उत्पीड़न, अपमान और अन्य चीजों से दंडित करेगा, तथा तुम्हारे स्थान पर ऐसे लोगों को ले आएगा, जो अल्लाह के आज्ञाकारी होंगे, जब उन्हें जिहाद के लिए निकलने को कहा जाएगा, तो निकल पड़ेंगे। और तुम उसके आदेश की अवहेलना करके उसे कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकोगे। क्योंकि वह तुमसे बेनयाज़ है और तुम उसके मोहताज हो। और अल्लाह हर चीज़ करने में समर्थ है। कोई चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती। अतः वह तुम्हारे बिना अपने धर्म और अपने नबी का समर्थन करने में सक्षम है।

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إِلَّا تَنصُرُوهُ فَقَدۡ نَصَرَهُ ٱللَّهُ إِذۡ أَخۡرَجَهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ثَانِيَ ٱثۡنَيۡنِ إِذۡ هُمَا فِي ٱلۡغَارِ إِذۡ يَقُولُ لِصَٰحِبِهِۦ لَا تَحۡزَنۡ إِنَّ ٱللَّهَ مَعَنَاۖ فَأَنزَلَ ٱللَّهُ سَكِينَتَهُۥ عَلَيۡهِ وَأَيَّدَهُۥ بِجُنُودٖ لَّمۡ تَرَوۡهَا وَجَعَلَ كَلِمَةَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱلسُّفۡلَىٰۗ وَكَلِمَةُ ٱللَّهِ هِيَ ٱلۡعُلۡيَاۗ وَٱللَّهُ عَزِيزٌ حَكِيمٌ ٤٠

Если вы не окажете ему (Мухаммаду) поддержки, то ведь Аллах уже оказал ему поддержку, когда неверующие изгнали его. Он был одним из тех двоих, которые находились в пещере, и сказал своему спутнику (Абу Бакру): «Не скорби, ибо Аллах - с нами». Тогда Аллах ниспослал ему спокойствие и поддержал его воинами, которых вы не видели. Аллах сделал слово неверующих нижайшим, тогда как Слово Аллаха превыше всего. Аллах - Могущественный, Мудрый.

यदि (ऐ मोमिनो!) तुम रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सहायता नहीं करते, और अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए उसके आह्वान का जवाब नहीं देते, तो अल्लाह ने तुम्हारे बिना ही उनकी सहायता उस समय की है, जब बहुदेववादियों ने उन्हें (मक्का से) निकाल दिया था। केवल वह और अबू बक्र थे। उनका कोई तीसरा नहीं था। जब वे दोनों 'साैर' नामी गुफा में उन काफ़िरों से छिपे हुए थे, जो उन दोनों को तलाश कर रहे थे। जब अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने साथी अबू बक्र सिद्दीक़ से, उन्हें मुश्रिकों द्वारा उनके पकड़े जाने का डर होने पर, कह रहे थे : दुखी मत हो। निःसंदेह अल्लाह अपने समर्थन और मदद के साथ, हमारे साथ है। तो अल्लाह ने अपने रसूल के दिल पर शांति उतार दी और आपपर ऐसे सैनिक उतारे जिन्हें तुम नहीं देखते, और वे फ़रिश्ते थे जो आपका समर्थन कर रहे थे। तथा उसने काफ़िरों की बात नीची कर दी, और अल्लाह की बात ही सर्वोच्च है जब उसने इस्लाम को ऊँचा कर दिया। और अल्लाह अपने अस्तित्व, अपनी प्रबलता और राज्य में प्रभुत्वशाली है, उसे कोई पराजित नहीं कर सकता, अपने प्रबंधन, नियति और विधान में पूर्ण हिकमत वाला है।

9:41Страница 194

ٱنفِرُواْ خِفَافٗا وَثِقَالٗا وَجَٰهِدُواْ بِأَمۡوَٰلِكُمۡ وَأَنفُسِكُمۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ٤١

Выступайте в поход, легко ли это вам будет или обременительно, и сражайтесь на пути Аллаха своим имуществом и своими душами. Так будет лучше для вас, если бы вы только знали.

(ऐ मोमिनो!) तुम कठिनाई और आराम में, युवा और बूढ़े अल्लाह के मार्ग में जिहाद के लिए निकल पड़ो और अपने धनों और अपनी जानों के साथ जिहाद करो। क्योंकि यह निकलना और धनों और जानों के साथ जिहाद करना, दुनिया एवं आख़िरत के जीवन में, घर में बैठे रहने और जान एवं माल की सुरक्षा से चिपके रहने से ज़्यादा फायदेमंद है। यदि तुम इसका ज्ञान रखते हो, तो इसके लालायित बनो।

9:42Страница 194

لَوۡ كَانَ عَرَضٗا قَرِيبٗا وَسَفَرٗا قَاصِدٗا لَّٱتَّبَعُوكَ وَلَٰكِنۢ بَعُدَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلشُّقَّةُۚ وَسَيَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ لَوِ ٱسۡتَطَعۡنَا لَخَرَجۡنَا مَعَكُمۡ يُهۡلِكُونَ أَنفُسَهُمۡ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ إِنَّهُمۡ لَكَٰذِبُونَ ٤٢

Если бы их ожидали близкая нажива и легкая дорога, то они последовали бы за тобой. Но расстояние показалось им дальним, и они будут клясться Аллахом: «Если бы мы могли, то непременно отправились бы с вами». Они губят себя, и Аллах знает, что они являются лжецами.

यदि आप जिसकी ओर उन मुनाफ़िक़ों को बुला रहे थे, जिन्होंने आपसे पीछे रहने की अनुमति माँगी थी, आसानी से प्राप्त होने वाला ग़नीमत का धन और बिना कठिनाई का सफ़र होता, तो वे (ऐ नबी!) आपका अवश्य अनुसरण करते। लेकिन वह फ़ासला जो आपने उनको शत्रु के पास जाने के लिए तय करने को कहा था, उनसे बहुत दूर था, सो वे पीछे रह गए। और जब आप (युद्ध से) उनके पास लौटेंगे, तो ये पीछे रहने की अनुमति माँगने वाले मुनाफ़िक़ अल्लाह की क़समें खाकर कहेंगे : अगर हम आपके साथ जिहाद में निकलने की ताक़त रखते, तो हम ज़रूर निकलते। वे जिहाद से पीछे रहकर और इन झूठी क़समों के कारण, खुद को अल्लाह की सज़ा के लिए पेश करके, अपनी तबाही मोल ले रहे हैं। जबकि अल्लाह जानता है कि निश्चय वे अपने दावे और अपनी इन क़समों में झूठे हैं।

9:43Страница 194

عَفَا ٱللَّهُ عَنكَ لِمَ أَذِنتَ لَهُمۡ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَكَ ٱلَّذِينَ صَدَقُواْ وَتَعۡلَمَ ٱلۡكَٰذِبِينَ ٤٣

Да простит тебя Аллах! Почему ты разрешил им остаться дома, пока тебе не стало ясно, кто говорит правду, а кто является лжецом?

अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपके उन्हें पीछे रहने की अनुमति देने के इज्तिहाद (निर्णय) को क्षमा कर दिया। आपने उन्हें इसकी अनुमति क्यों दी? यहाँ तक कि आपके लिए यह स्पष्ट हो जाता कि कौन लोग अपने बहाने में सच्चे हैं और कौन झूठे। ताकि आप उनमें से सच्चे लोगों को अनुमति देते, न कि झूठे लोगों को।

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لَا يَسۡتَـٔۡذِنُكَ ٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ أَن يُجَٰهِدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمۡ وَأَنفُسِهِمۡۗ وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلۡمُتَّقِينَ ٤٤

Те, которые веруют в Аллаха и в Последний день, не спрашивают у тебя дозволения на то, чтобы сражаться своим имуществом и своими душами. Ведь Аллах знает богобоязненных.

(ऐ रसूल!) जो लोग अल्लाह और क़ियामत के दिन पर सच्चा ईमान रखते हैं, उनका यह काम नहीं है कि अपने धनों और अपनी जानों के साथ अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने से पीछे रहने की आपसे अनुमति माँगें, बल्कि उनका हाल यह होना चाहिए कि जब उनसे निकलने को कहा जाए, तो निकल पड़ें और अपने धनों और अपनी जानों के साथ जिहाद करें। और अल्लाह अपने उन डर रखने वाले बंदों को जानता है, जो आपसे उसी समय अनुमति माँगते हैं, जब उनके साथ कोई ऐसी मजबूरी हो, जो उन्हें आपके साथ निकलने से रोकती हो।

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إِنَّمَا يَسۡتَـٔۡذِنُكَ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَٱرۡتَابَتۡ قُلُوبُهُمۡ فَهُمۡ فِي رَيۡبِهِمۡ يَتَرَدَّدُونَ ٤٥

У тебя просят дозволения остаться дома только те, которые не веруют в Аллаха и в Последний день, сердца которых испытывают сомнение. И по причине своего сомнения они пребывают в замешательстве.

(ऐ रसूल!) जो लोग आपसे अल्लाह की राह में जिहाद से पीछे रहने की अनुमति माँग रहे हैं, वे मुनाफ़िक़ लोग हैं, जो न अल्लाह पर ईमान रखते हैं और न क़ियामत के दिन पर ईमान रखते हैं, तथा उनके दिलों में अल्लाह के धर्म के बारे में शक है। अतः वे अपने संदेह में भ्रमित भटक रहे हैं, सत्य का मार्ग नहीं पाते हैं।

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۞ وَلَوۡ أَرَادُواْ ٱلۡخُرُوجَ لَأَعَدُّواْ لَهُۥ عُدَّةٗ وَلَٰكِن كَرِهَ ٱللَّهُ ٱنۢبِعَاثَهُمۡ فَثَبَّطَهُمۡ وَقِيلَ ٱقۡعُدُواْ مَعَ ٱلۡقَٰعِدِينَ ٤٦

Если бы они желали выступить в поход, то приготовились бы к этому. Однако Аллах не пожелал, чтобы они отправились в поход, и задержал их. Им было сказано: «Отсиживайтесь вместе с теми, кто остался отсиживаться».

यदि वे अपने इस दावे में सच्चे होते कि वे आपके साथ अल्लाह की राह में जिहाद के लिए निकलना चाहते थे, तो वे उपकरण तैयार करके अवश्य उसके लिए तैयारी करते। परंतु अल्लाह ने उनका आपके साथ निकलना पसंद नहीं किया। इसलिए उनके लिए निकलना भारी बना दिया यहाँ तक कि उन्होंने अपने घरों में बैठने को तरजीह दी।

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لَوۡ خَرَجُواْ فِيكُم مَّا زَادُوكُمۡ إِلَّا خَبَالٗا وَلَأَوۡضَعُواْ خِلَٰلَكُمۡ يَبۡغُونَكُمُ ٱلۡفِتۡنَةَ وَفِيكُمۡ سَمَّٰعُونَ لَهُمۡۗ وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِٱلظَّٰلِمِينَ ٤٧

Если бы они выступили в поход вместе с вами, то не прибавили бы вам ничего, кроме беспорядка, торопливо ходили бы между вами и сеяли бы между вами смуту. Среди вас найдутся такие, которые станут прислушиваться к ним. Аллах знает беззаконников.

इन मुनाफ़िक़ों का तुम्हारे साथ न निकलना ही अचछा था। यदि वे तुम्हरे साथ निकलते, तो तुम्हारी हिम्मत तोड़कर और संदेह पैदा करके, तुम्हारे अंदर बिगाड़ के सिवा कुछ न बढ़ाते, और तुम्हें विभाजित करने के लिए तुम्हारे बीच द्वेष की बातें फैलाते। और (ऐ नबी!) तुम्हारे अंदर ऐसे लोग भी मौजूद हैं, जो उनके फैलाए हुए झूठ को सुनते हैं, उसे स्वीकार करते हैं और फैलाते हैं। जिसके कारण तुम्हारे बीच मतभेद पैदा होता है। और अल्लाह उन अत्याचारी मुनाफ़िकों को भली-भाँति जानता है, जो ईमान वालों के बीच साज़िशें करते हैं और संदेह फैलाते हैं।

9:48Страница 195

لَقَدِ ٱبۡتَغَوُاْ ٱلۡفِتۡنَةَ مِن قَبۡلُ وَقَلَّبُواْ لَكَ ٱلۡأُمُورَ حَتَّىٰ جَآءَ ٱلۡحَقُّ وَظَهَرَ أَمۡرُ ٱللَّهِ وَهُمۡ كَٰرِهُونَ ٤٨

Они и раньше домогались смуты и замышляли против тебя козни, пока не явилась истина и не проявилось веление Аллаха, хотя это и было им ненавистно.

ये मुनाफ़िक़ लोग तबूक के युद्ध से पहले भी मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करके और उनकी एकता को भंग करके उपद्रव मचाने का प्रयास कर चुके हैं, तथा तरकीबों की व्यवस्था करके (ऐ रसूल!) आपके लिए मामलों में विविधता लाते रहे हैं और उलट-फेर करते रहे हैं, शायद उनकी चालें जिहाद करने के आपके संकल्प को प्रभावित कर दें, यहाँ तक कि आपके लिए अल्लाह की मदद और उसका समर्थन आ गया और अल्लाह ने अपने दीन को प्रभुत्व प्रदान किया और अपने दुश्मनों को वशीभूत कर दिया। जबकि वे इसे नापसंद करते थे; क्योंकि वे सत्य पर असत्य की जीत चाहते थे।

9:49Страница 195

وَمِنۡهُم مَّن يَقُولُ ٱئۡذَن لِّي وَلَا تَفۡتِنِّيٓۚ أَلَا فِي ٱلۡفِتۡنَةِ سَقَطُواْۗ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِٱلۡكَٰفِرِينَ ٤٩

Среди них есть и такой, который говорит: «Позволь мне остаться дома и не искушай меня!». Безусловно, они уже впали в искушение. Воистину, Геенна объемлет неверующих.

मुनाफ़िक़ों में से कुछ ऐसे हैं, जो गढ़े हुए बहाने पेश करते हैं और कहते हैं : ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे जिहाद से पीछे रहने की अनुमति प्रदान करें और मुझे अपने साथ निकलने पर मजबूर न करें, कहीं ऐसा न हो कि मैं रूमी शत्रुओं की स्त्रियों को देखकर किसी गुनाह में पड़ जाऊँ। सुन लो! वास्तव में, वे जो दावा करते हैं उससे कहीं अधिक बड़े फ़ितने में पड़ चुके हैं, जो कि निफ़ाक़ का फ़ितना और युद्ध से पीछे रहने का फ़ितना है। निःसंदेह क़ियामत के दिन जहन्नम काफ़िरों को अवश्य घेरने वाली है। उनमें से कोई भी उससे बच नहीं सकता और न ही वे उससे भागने की कोई जगह पाएँगे।

9:50Страница 195

إِن تُصِبۡكَ حَسَنَةٞ تَسُؤۡهُمۡۖ وَإِن تُصِبۡكَ مُصِيبَةٞ يَقُولُواْ قَدۡ أَخَذۡنَآ أَمۡرَنَا مِن قَبۡلُ وَيَتَوَلَّواْ وَّهُمۡ فَرِحُونَ ٥٠

Если тебе достается благо, это огорчает их. Если же тебя постигает беда, они говорят: «Мы заранее приняли меры предосторожности для себя». И они уходят, забавляясь.

यदि (ऐ अल्लाह के रसूल!) आपको विजय या ग़नीमत के धन के रूप में अल्लाह की ओर से कोई आनंदकर नेमत प्राप्त होती है, तो वे उसे नापसंद करते हैं और उसके लिए शोक मनाते हैं। और यदि कठिनाई या दुश्मन की विजय के रूप में आपपर कोई विपत्ति आ पड़ती है, तो ये मुनाफ़िक़ लोग कहते हैं : हमने अपने लिए सावधानी बरती और हमने उस समय समझदारी (विवेक) से काम लिया जब हम लड़ाई के लिए नहीं निकले, जिस तरह कि ईमान वाले निकले थे। जिसके कारण उन्हें क़त्ल और क़ैद का सामना करना पड़ा। फिर ये मुनाफ़िक़ लोग अपनी सुरक्षा से खुश अपने परिवारों की ओर लौटते हैं।

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قُل لَّن يُصِيبَنَآ إِلَّا مَا كَتَبَ ٱللَّهُ لَنَا هُوَ مَوۡلَىٰنَاۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ٥١

Скажи: «Нас постигнет только то, что предписано нам Аллахом. Он - наш Покровитель. И пусть верующие уповают на одного Аллаха».

(ऐ रसूल!) आप इन मुनाफ़िक़ों से कह दें : अल्लाह ने हमारे लिए जो कुछ लिख दिया है, उसके अलावा हमें कुछ भी नहीं पहुँचेगा। क्योंकि वही महिमावान हमारा मालिक और हमारा आश्रय है जिसका हम सहारा लेते हैं, और हम अपने मामलों में उसी पर भरोसा करते हैं। तथा ईमान वाले अपने मामलों को केवल उसी को सौंपते हैं। क्योंकि वही उनके लिए पर्याप्त, और सबसे अच्छा काम बनाने वाला है।

9:52Страница 195

قُلۡ هَلۡ تَرَبَّصُونَ بِنَآ إِلَّآ إِحۡدَى ٱلۡحُسۡنَيَيۡنِۖ وَنَحۡنُ نَتَرَبَّصُ بِكُمۡ أَن يُصِيبَكُمُ ٱللَّهُ بِعَذَابٖ مِّنۡ عِندِهِۦٓ أَوۡ بِأَيۡدِينَاۖ فَتَرَبَّصُوٓاْ إِنَّا مَعَكُم مُّتَرَبِّصُونَ ٥٢

Скажи: «Неужели вы ожидаете, что нам выпадет что-либо, кроме одного из двух благ? Мы тоже ждем, что Аллах поразит вас мучениями от Себя или же накажет вас нашими руками. Ждите, и мы подождем вместе с вами».

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम हमारे लिए जीत या शहादत के अलावा किसकी प्रतीक्षा कर रहे हो?! और हम तुम्हारे बारे में प्रतीक्षा कर रहे हैं कि अल्लाह तुम्हें अपने पास से कोई यातना दे, जो तुम्हें नष्ट कर दे या हमारे हाथों तुम्हें क़त्ल करवाकर या बंदी बनाकर सज़ा दे, यदि वह हमें तुमसे लड़ाई की अनुमति प्रदान कर दे। तो तुम हमारे परिणाम की प्रतीक्षा करो। हम भी तुम्हारे परिणाम की प्रतीक्षा करते हैं।

9:53Страница 195

قُلۡ أَنفِقُواْ طَوۡعًا أَوۡ كَرۡهٗا لَّن يُتَقَبَّلَ مِنكُمۡ إِنَّكُمۡ كُنتُمۡ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ ٥٣

Скажи: «Станете ли вы делать пожертвования по доброй воле или по принуждению - от вас все равно не будет принято, поскольку вы являетесь людьми нечестивыми».

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : जो कुछ तुम अपने धन में से खर्च करते हो, उसे स्वेच्छा से या अनिच्छा से खर्च करो। जो कुछ तुमने खर्च किया है वह तुम्हारे कुफ़्र और अल्लाह की अवज्ञा के कारण तुमसे कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

9:54Страница 195

وَمَا مَنَعَهُمۡ أَن تُقۡبَلَ مِنۡهُمۡ نَفَقَٰتُهُمۡ إِلَّآ أَنَّهُمۡ كَفَرُواْ بِٱللَّهِ وَبِرَسُولِهِۦ وَلَا يَأۡتُونَ ٱلصَّلَوٰةَ إِلَّا وَهُمۡ كُسَالَىٰ وَلَا يُنفِقُونَ إِلَّا وَهُمۡ كَٰرِهُونَ ٥٤

Тому, чтобы их пожертвования были приняты, мешает только то, что они не веруют в Аллаха и Его Посланника, лениво совершают намаз и нехотя делают пожертвования.

उनकी ख़र्च की हुई चीज़ों को स्वीकार न किए जाने के तीन कारण हैं : उनका अल्लाह और उसके रसूल का इनकार करना, उनका नमाज़ पढ़ते समय आलस्य और सुस्ती, तथा वे अपना धन स्वेच्छा से खर्च नहीं करते हैं, बल्कि उसे अनैच्छिक रूप से खर्च करते हैं; क्योंकि वे न तो अपनी नमाज़ों में प्रतिफल की आशा रखते हैं और न ही अपने खर्च करने में।

9:55Страница 196

فَلَا تُعۡجِبۡكَ أَمۡوَٰلُهُمۡ وَلَآ أَوۡلَٰدُهُمۡۚ إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيُعَذِّبَهُم بِهَا فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَتَزۡهَقَ أَنفُسُهُمۡ وَهُمۡ كَٰفِرُونَ ٥٥

Пусть не восхищают тебя их имущество и дети. Аллах желает только наказать их детьми и имуществом в мирской жизни, дабы они расстались со своими душами неверующими.

अतः (ऐ रसूल!) आपको इन मुनाफ़िक़ों के धन तथा उनकी संतान विस्मित न करें और न ही आप उन्हें अच्छा समझें। क्योंकि उनके धन एवं संतान का परिणाम बहुत बुरा है। अल्लाह उन्हें उनके लिए अज़ाब बना देगा कि उसे कमाने में कड़ी मेहनत करेंगे और थकान सहेंगे और दूसरी ओर अल्लाह उनमें विपत्तियाँ उतारता रहेगा यहाँ तक कि अल्लाह उनके कुफ़्र ही की हालत में उनके प्राण निकालेगा, फिर वे जहन्नम के सबसे निचले गड्ढे में अनंत काल के लिए यातना दिए जाएँगे।

9:56Страница 196

وَيَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ إِنَّهُمۡ لَمِنكُمۡ وَمَا هُم مِّنكُمۡ وَلَٰكِنَّهُمۡ قَوۡمٞ يَفۡرَقُونَ ٥٦

Они клянутся Аллахом, что принадлежат к вам. Однако они не принадлежат к вам. Напротив, они - боязливые люди.

(ऐ मोमिनो!) मुनाफ़िक़ तुम्हारे लिए अल्लाह की झूठी शपथ खाकर कहते हैं कि निःसंदेह वे अवश्य तुममें से हैं। हालाँकि वे अंदरूनी तौर पर तुममें से नहीं हैं, भले ही वे यह प्रकट करें कि वे तुममें से हैं। परंतु वे ऐसे लोग हैं जो डरते हैं कि उन्हें उसी क़त्ल और क़ैद का सामना न करना पड़े, जिसका सामना बहुदेववादियों को करना पड़ा। इसलिए वे बचने के लिए इस्लाम को प्रकट करते हैं।

9:57Страница 196

لَوۡ يَجِدُونَ مَلۡجَـًٔا أَوۡ مَغَٰرَٰتٍ أَوۡ مُدَّخَلٗا لَّوَلَّوۡاْ إِلَيۡهِ وَهُمۡ يَجۡمَحُونَ ٥٧

Если бы они нашли убежище, пещеру или укрытие, то они поспешно направились бы туда.

यदि इन मुश्रिकों को शरण लेने के लिए कोई क़िला मिल जाए, जिसमें वे अपनी रक्षा कर सकें, या पहाड़ों के अंदर गुफाएँ मिल जाएँ, जिनमें वे छिप सकें, या कोई सुरंग मिल जाए, जिसमें वे प्रवेश कर सकें, तो वे अवश्य उसमें शरण लेंगे ओर दौड़कर उसमें घुस जाएँगे।

9:58Страница 196

وَمِنۡهُم مَّن يَلۡمِزُكَ فِي ٱلصَّدَقَٰتِ فَإِنۡ أُعۡطُواْ مِنۡهَا رَضُواْ وَإِن لَّمۡ يُعۡطَوۡاْ مِنۡهَآ إِذَا هُمۡ يَسۡخَطُونَ ٥٨

Среди них есть такие, которые обвиняют тебя из-за милостыни. Если им достается что-либо из милостыни, то они остаются довольными, если же им ничего не достается, то они приходят в ярость.

मुनाफ़िक़ों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो सदक़ों के वितरण के बारे में (ऐ रसूल!) आपकी आलोचना करते हैं, जब उन्हें उनमें से वह चीज़ नहीं मिलती, जो वे चाहते हैं। यदि आप उन्हें वह चीज़ दे दें, जो वे माँगते हैं, तो वे आपसे प्रसन्न हो जाते हैं। और यदि आप उन्हें वह चीज़ न दें, जो वे माँगते हैं, तो वे नाराज़गी दिखाते हैं।

9:59Страница 196

وَلَوۡ أَنَّهُمۡ رَضُواْ مَآ ءَاتَىٰهُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَقَالُواْ حَسۡبُنَا ٱللَّهُ سَيُؤۡتِينَا ٱللَّهُ مِن فَضۡلِهِۦ وَرَسُولُهُۥٓ إِنَّآ إِلَى ٱللَّهِ رَٰغِبُونَ ٥٩

Лучше бы они довольствовались тем, что дали им Аллах и Его Посланник, и сказали: «Нам достаточно Аллаха. Аллах одарит нас из Своей милости, а также Его Посланник. Воистину, мы устремляемся к Аллаху!»

यदि ये मुनाफ़िक़, जो सदक़ों के विभाजन के बारे में आपकी आलोचना करते हैं, उससे संतुष्ट होते, जो अल्लाह ने उनके लिए नियत किया है और जो उसके रसूल ने उन्हें उनमें से दिया है, तथा वे कहते : अल्लाह हमारे लिए पर्याप्त है, अल्लाह हमें अपने अनुग्रह से जो चाहे, देगा और उसके रसूल भी हमें अल्लाह की दी हुई चीज़ों में से प्रदान करेंगे। हम केवल अल्लाह ही से आशा रखते हैं कि वह हमें अपने अनुग्रह से प्रदान करे। यदि उन्होंने ऐसा किया होता, तो यह उनके लिए आपकी आलोचना करने से बेहतर होता।

9:60Страница 196

۞ إِنَّمَا ٱلصَّدَقَٰتُ لِلۡفُقَرَآءِ وَٱلۡمَسَٰكِينِ وَٱلۡعَٰمِلِينَ عَلَيۡهَا وَٱلۡمُؤَلَّفَةِ قُلُوبُهُمۡ وَفِي ٱلرِّقَابِ وَٱلۡغَٰرِمِينَ وَفِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱبۡنِ ٱلسَّبِيلِۖ فَرِيضَةٗ مِّنَ ٱللَّهِۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ ٦٠

Пожертвования предназначены для неимущих и бедных, для тех, кто занимается их сбором и распределением, и для тех, чьи сердца хотят завоевать, для выкупа рабов, для должников, для расходов на пути Аллаха и для путников. Таково предписание Аллаха. Воистину, Аллах - Знающий, Мудрый.

अनिवार्य ज़कात फ़क़ीरों को दी जाएगी, इससे अभिप्राय वे ज़रूरतमंद हैं जिनके पास पेशे या नौकरी से प्राप्त कुछ धन है, लेकिन यह उनके लिए पर्याप्त नहीं है और उनकी स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाता है। और मिस्कीनों को, जिनके पास शायद ही कुछ होता है और वे अपनी दयनीय स्थिति या अपनी बात कहने के कारण लोगों से छिपे नहीं होते हैं। और ज़कात कर्मियों को, जिन्हें शासक ज़कात वसूल करने के कार्य पर नियुक्त करता है। और उन काफ़िरों को, जिन्हें परचाना अभीष्ट हो ताकि वे इस्लाम ले आएँ, या कमज़ोर ईमान वालों को, ताकि उनका ईमान मज़बूत हो जाए, या ऐसे व्यक्ति को, जिसकी बुराई को उसके द्वारा दूर किया जाए। और गुलामों को आज़ाद करने के लिए खर्च किया जाएगा, और बिना फ़िज़ूलखर्ची और अवज्ञा के क़र्ज़ लेने वालों को, यदि उनके पास अपना क़र्ज़ चुकाने का सामर्थ्य न हो। और अल्लाह के रास्ते में जिहाद करने वाले मुजाहिदों की तैयारी में खर्च किया जाएगा और उस यात्री पर, जिसका खर्च सफर के दौरान खत्म हो गया। ज़कात के व्यय को केवल इन्हीं लोगों तक सीमित रखना अल्लाह की ओर से एक दायित्व है, और अल्लाह अपने बंदों के हितों के बारे में जानने वाला, अपने प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।

9:61Страница 196

وَمِنۡهُمُ ٱلَّذِينَ يُؤۡذُونَ ٱلنَّبِيَّ وَيَقُولُونَ هُوَ أُذُنٞۚ قُلۡ أُذُنُ خَيۡرٖ لَّكُمۡ يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَيُؤۡمِنُ لِلۡمُؤۡمِنِينَ وَرَحۡمَةٞ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ مِنكُمۡۚ وَٱلَّذِينَ يُؤۡذُونَ رَسُولَ ٱللَّهِ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ ٦١

Среди них есть такие, которые обижают Пророка и говорят: «Он есть ухо (выслушивает любые новости)». Скажи: «Он слушает только то, что лучше для вас. Он верует в Аллаха и доверяет верующим. Он является милостью для тех, которые уверовали». Тем же, которые обижают Посланника Аллаха, уготованы мучительные страдания.

तथा मुनाफ़िक़ों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को अपने शब्दों के साथ कष्ट पहुँचाते हैं। वे आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सहनशीलता को देखकर कहते हैं : वह हर एक की बात सुनते हैं और उसपर विश्वास कर लेते हैं, और सत्य और झूठ के बीच अंतर नहीं करते हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : रसूल अच्छे के अलावा कुछ नहीं सुनते। वह अल्लाह पर विश्वास रखते हैं और सच्चे ईमान वाले जो कहते हैं उस पर विश्वास करते हैं और उनपर दया करते हैं। क्योंकि आपका रसूल बनाकर भेजा जाना उन लोगों के लिए दया है जो आपपर ईमान रखते हैं। और जो लोग आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को किसी भी तरह के दुर्व्यवहार से कष्ट पहुँचाते हैं, उनके लिए दर्दनाक यातना है।

9:62Страница 197

يَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ لَكُمۡ لِيُرۡضُوكُمۡ وَٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥٓ أَحَقُّ أَن يُرۡضُوهُ إِن كَانُواْ مُؤۡمِنِينَ ٦٢

Они клянутся Аллахом, чтобы угодить вам. Но для них было бы лучше, если только они являются верующими, угождать Аллаху и Его Посланнику.

(ऐ मोमिनो!) मुनाफ़िक़ तुम्हारे सामने अल्लाह की क़सम खाते हैं कि उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा, जो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कष्ट पहुँचाए। ऐसा तुम्हें खुश करने के लिए कह रहें। हालाँकि अल्लाह और उसके रसूल ईमान और सत्कर्म द्वारा खुश किए जाने के ज़्यादा हक़दार हैं, यदि ये लोग सच्चे ईमान वाले हैं।

9:63Страница 197

أَلَمۡ يَعۡلَمُوٓاْ أَنَّهُۥ مَن يُحَادِدِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَأَنَّ لَهُۥ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِدٗا فِيهَاۚ ذَٰلِكَ ٱلۡخِزۡيُ ٱلۡعَظِيمُ ٦٣

Разве они не знали, что тому, кто проявляет враждебность к Аллаху и Его Посланнику, навеки уготован огонь Геенны? Это - великое бесчестие.

क्या इन मुनाफ़िक़ों को नहीं पता कि वे ऐसा करने से अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करने वाले हैं, और यह कि जो भी उनसे दुश्मनी करेगा, वह क़ियामत के दिन जहन्नम की आग में प्रवेश करेगा, जिसमें वह हमेशा रहेगा?! यही बहुत बड़ा अपमान और रुसवाई है।

9:64Страница 197

يَحۡذَرُ ٱلۡمُنَٰفِقُونَ أَن تُنَزَّلَ عَلَيۡهِمۡ سُورَةٞ تُنَبِّئُهُم بِمَا فِي قُلُوبِهِمۡۚ قُلِ ٱسۡتَهۡزِءُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ مُخۡرِجٞ مَّا تَحۡذَرُونَ ٦٤

Лицемеры опасаются, что им будет ниспослана сура, которая поведает о том, что в их сердцах. Скажи: «Насмехайтесь! Аллах непременно выведет наружу то, чего вы опасаетесь».

मुनाफ़िक़ इस बात से डरते हैं कि अल्लाह अपने रसूल पर कोई ऐसी सूरत न उतार दे, जो मोमिनों को, उनके दिल के अंदर मौजूद कुफ़्र से अवगत करा दे। (ऐ रसूल!) आप कह दें : (ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुम मज़ाक़ उड़ाते और धर्म (इस्लाम) के अंदर दोष निकालते रहो। निश्चय अल्लाह कोई सूरत उतारकर अथवा अपने रसूल को उसके बारे में सूचित करके, उस बात को प्रकट करने वाला है, जिससे तुम डर रहे हो।

Текст: Quranic Universal Library (Tarteel) через spa5k/tafsir_api (MIT), в зафиксированной версии. Аяты: Quran Foundation. Источники и лицензии

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Аят аль-Курси36Аль-Кахфстр. 42джуз 15Бухари 1Муслим 2999

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