Al-MukhtasarAl‑Baqarah · 2:1–37

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

البقرة

Al-Baqarah

The Cow · Medinan · 286 ayahs

2:1Page 2

الٓمٓ ١

Alif, Lām, Meem.1

{अलिफ़, लाम, मीम} ये उन अक्षरों में से हैं, जिनसे कुछ सूरतों (सूरत का बहुवचन) का आरंभ किया गया है। यह अरबी भाषा की वर्णमाला है जिसका अपने आप में कोई अर्थ नहीं है यदि वे इस तरह (अलिफ, बा, ता) अलग-अलग आएँ। लेकिन इनकी एक हिकमत और मतलब है; क्योंकि क़ुरआन में कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जिसकी कोई ह़िकमत न हो। इनकी सबसे महत्वपूर्ण हिक़मतों में से एक : क़ुरआन के द्वारा चुनौती की ओर संकेत है, जो उन्हीं अक्षरों से बना है, जिन्हें वे जानते और बोलते हैं; यही कारण है कि अक्सर इन अक्षरों के बाद क़ुरआन पाक का उल्लेख होता है, जैसा कि इस सूरत में है।

2:2Page 2

ذَٰلِكَ ٱلۡكِتَٰبُ لَا رَيۡبَۛ فِيهِۛ هُدٗى لِّلۡمُتَّقِينَ ٢

This is the Book about which there is no doubt, a guidance for those conscious of Allāh1 -

इस महान क़ुरआन में कोई संदेह नहीं। न इसके अल्लाह की ओर से उतरने के संदर्भ में, और न ही इसके शब्द और अर्थ के संदर्भ में। चुनाँचे यह क़ुरआन अल्लाह की वाणी है, जो परहेज़गारों का अल्लाह तक पहुँचाने वाले रास्ते का मार्गदर्शन करता है।

2:3–4Page 2

ٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡغَيۡبِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَمِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ يُنفِقُونَ ٣

Who believe in the unseen, establish prayer,1 and spend out of what We2 have provided for them,

وَٱلَّذِينَ يُؤۡمِنُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبۡلِكَ وَبِٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ يُوقِنُونَ ٤

And who believe in what has been revealed to you, [O Muḥammad], and what was revealed before you, and of the Hereafter they are certain [in faith].

जो लोग ग़ैब (परोक्ष, अनदेखी) पर ईमान लाते हैं। ग़ैब से अभिप्राय हर वह चीज़ है, जिसका बोध ज्ञानेंद्रियों द्वारा नहीं होता है और वह हमसे ओझल है, जिसके बारे में अल्लाह ने या उसके रसूल ने सूचना दी है, जैसे कि आख़िरत का दिन। तथा वही लोग नमाज़ की स्थापना करते हैं इस प्रकार कि अल्लाह द्वारा निर्धारित की गई शर्तों, अर्कान, वाजिबात और सुन्नतों के अनुसार उसकी अदायगी करते हैं। तथा वही लोग हैं, जो उसमें से खर्च करते हैं जो अल्लाह ने उन्हें प्रदान किया है, अर्थात् अल्लाह के सवाब की आशा में, अनिवार्य दान जैसे कि ज़कात अथवा ग़ैर-वाजिब जैसे कि स्वैच्छिक दान देते हैं। तथा वही हैं जो उस वह़्य पर जो अल्लाह ने - ऐ नबी! - आपपर उतारी है तथा आपसे पूर्व अन्य सभी नबियों पर उतारी है, बिना भेदभाव के ईमान लाते हैं। तथा वही लोग आख़िरत तथा उसके पुण्य एवं दंड पर दृढ़ विश्वास रखते हैं।

2:5Page 2

أُوْلَٰٓئِكَ عَلَىٰ هُدٗى مِّن رَّبِّهِمۡۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ ٥

Those are upon [right] guidance from their Lord, and it is those who are the successful.

इन विशेषताओं से परिपूर्ण लोग ही हिदायत के पथ पर चलने वाले हैं तथा यही लोग दुनिया एवं आख़िरत में, जिसकी वे आशा करते हैं उसे प्राप्त करके और जिस चीज़ से वे डरते हैं उससे मुक्ति पाकर, कामयाब हैं।

2:6Page 3

إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ سَوَآءٌ عَلَيۡهِمۡ ءَأَنذَرۡتَهُمۡ أَمۡ لَمۡ تُنذِرۡهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ ٦

Indeed, those who disbelieve1 - it is all the same for them whether you warn them or do not warn them - they will not believe.

जिन लोगों पर ईमान न लाने की अल्लाह की बात सिद्ध हो चुकी है, वे अपनी पथभ्रष्टता और हठ पर क़ायम रहने वाले हैं। इसलिए आपका उन्हें डराना और न डराना बराबर है।

2:7Page 3

خَتَمَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ وَعَلَىٰ سَمۡعِهِمۡۖ وَعَلَىٰٓ أَبۡصَٰرِهِمۡ غِشَٰوَةٞۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ عَظِيمٞ ٧

Allāh has set a seal upon their hearts and upon their hearing, and over their vision is a veil.1 And for them is a great punishment.

क्योंकि अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी है और उनमें मौजूद कुफ़्र सहित उन्हें बंद कर दिया है। तथा उनके कानों पर मुहर लगा दी है, अतः वे सत्य को उसे स्वीकारने और उसका अनुसरण करने की नीयत से नहीं सुनते हैं। तथा उनकी आँखों पर पर्दा डाल दिया है, अतः वे सत्य के स्पष्ट होने के बावजूद उसे नहीं देखते हैं, और उनके लिए आख़िरत में बहुत बड़ी यातना है।

2:8Page 3

وَمِنَ ٱلنَّاسِ مَن يَقُولُ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَبِٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَمَا هُم بِمُؤۡمِنِينَ ٨

And of the people are some who say, "We believe in Allāh and the Last Day," but they are not believers.

लोगों का एक समूह ऐसा है, जो यह दावा करता है कि वे ईमान वाले हैं। वे अपनी जान और अपने माल के डर से केवल अपनी ज़बान से ऐसा कहते हैं। जबकि अंदर से वे काफ़िर हैं।

2:9Page 3

يُخَٰدِعُونَ ٱللَّهَ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَمَا يَخۡدَعُونَ إِلَّآ أَنفُسَهُمۡ وَمَا يَشۡعُرُونَ ٩

They [think to] deceive Allāh and those who believe, but they deceive not except themselves and perceive [it] not.

वे अपनी अज्ञानतावश यह समझते हैं कि वे ईमान का प्रदर्शन करके और कुफ़्र को छिपाकर अल्लाह और मोमिनों को धोखा दे रहे हैं। लेकिन उन्हें इसका एहसास नहीं है; क्योंकि अल्लाह रहस्य और छिपी बातों को जानता है और उसने ईमान वालों को उनकी विशेषताओं और स्थितियों के बारे में सूचित कर दिया है।

2:10Page 3

فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٞ فَزَادَهُمُ ٱللَّهُ مَرَضٗاۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمُۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡذِبُونَ ١٠

In their hearts is disease, so Allāh has increased their disease;1 and for them is a painful punishment because they [habitually] used to lie.

कारण यह है कि उनके दिलों में संदेह है। इसलिए अल्लाह ने उनके संदेह में संदेह को और बढ़ा दिया; क्योंकि बदला कार्य ही के समान दिया जाता है। तथा उनके लिए जहन्नम के सबसे निचले गढ़े में दर्दनाक यातना है। इसलिए कि उन्होंने अल्लाह पर और लोगों पर झूठ कहा और मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए धर्म को झुठलाया।

2:11Page 3

وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ لَا تُفۡسِدُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ قَالُوٓاْ إِنَّمَا نَحۡنُ مُصۡلِحُونَ ١١

And when it is said to them, "Do not cause corruption on the earth," they say, "We are but reformers."

जब उन्हें कुफ़्र, पापों और अन्य चीजों के द्वारा धरती पर उपद्रव करने से मना किया जाता है, तो वे इनकार करते हैं और दावा करते हैं कि वे तो सदाचार और सुधार वाले हैं।

2:12Page 3

أَلَآ إِنَّهُمۡ هُمُ ٱلۡمُفۡسِدُونَ وَلَٰكِن لَّا يَشۡعُرُونَ ١٢

Unquestionably, it is they who are the corrupters, but they perceive [it] not.

जबकि वास्तविकता यह है कि वही उपद्रव करने वाले और उत्पात मचाने वाले हैं, लेकिन उन्हें इसका एहसास नहीं है, और न ही वे यह समझते हैं कि उनका यह कृत्य ही असल उपद्रव है।

2:13Page 3

وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ ءَامِنُواْ كَمَآ ءَامَنَ ٱلنَّاسُ قَالُوٓاْ أَنُؤۡمِنُ كَمَآ ءَامَنَ ٱلسُّفَهَآءُۗ أَلَآ إِنَّهُمۡ هُمُ ٱلسُّفَهَآءُ وَلَٰكِن لَّا يَعۡلَمُونَ ١٣

And when it is said to them, "Believe as the people have believed," they say, "Should we believe as the foolish have believed?" Unquestionably, it is they who are the foolish, but they know [it] not.

जब उन्हें मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों के ईमान लाने की तरह ईमान लाने का आदेश दिया जाता है, तो वे अस्वीकृति और उपहास के रूप में उसका उत्तर देते हुए कहते हैं : क्या हम अल्पबुद्धि वालों के ईमान लाने की तरह ईमान ले आएँ?! सच तो यह है कि वे स्वयं मूर्ख हैं, लेकिन वे इससे अनजान हैं।

2:14Page 3

وَإِذَا لَقُواْ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَإِذَا خَلَوۡاْ إِلَىٰ شَيَٰطِينِهِمۡ قَالُوٓاْ إِنَّا مَعَكُمۡ إِنَّمَا نَحۡنُ مُسۡتَهۡزِءُونَ ١٤

And when they meet those who believe, they say, "We believe"; but when they are alone with their evil ones, they say, "Indeed, we are with you; we were only mockers."

जब वे मोमिनों से मिलते हैं, तो उनके डर से कहते हैं : हम उसपर ईमान लाते हैं जिसपर तुम ईमान लाते हो। और जब वे ईमान वालों के पास से अपने सरदारों की ओर वापस लौटते हैं और उनके साथ एकांत में होते हैं, तो उनके साथ होने का विश्वास दिलाते हुए कहते हैं : निश्चय हम तुम्हारे साथ तुम्हारे मार्ग ही पर हैं। लेकिन हम ईमान वालों से ज़ाहिरी तौर पर, उनका मज़ाक़ उड़ाने और उपहास करने के लिए, सहमत हैं।

2:15Page 3

ٱللَّهُ يَسۡتَهۡزِئُ بِهِمۡ وَيَمُدُّهُمۡ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ ١٥

[But] Allāh mocks them and prolongs them in their transgression [while] they wander blindly.

उनके ईमान वालों का उपहास करने के मुक़ाबिले में, अल्लाह उनका मज़ाक़ उड़ाता है, उन्हें उनके कार्य ही के समान बदला देने के तौर पर। यही कारण है कि उनके लिए इस दुनिया में मुसलमानों के नियम लागू किए हैं, लेकिन आख़िरत में उन्हें उनके कुफ़्र तथा निफ़ाक़ का बदला देगा। तथा अल्लाह उन्हें ढील देता है, ताकि वे अपनी गुमराही और सरकशी में बने रहें। इस तरह वे अचंभे तथा असमंजस (दुविधा), में पड़े रहें।

2:16Page 3

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ ٱشۡتَرَوُاْ ٱلضَّلَٰلَةَ بِٱلۡهُدَىٰ فَمَا رَبِحَت تِّجَٰرَتُهُمۡ وَمَا كَانُواْ مُهۡتَدِينَ ١٦

Those are the ones who have purchased error [in exchange] for guidance, so their transaction has brought no profit, nor were they guided.

वे मुनाफ़िक़ जिन्हें इन विशेषताओं के साथ वर्णित किया गया है, वही लोग हैं जिन्होंने ईमान के बदले कुफ़्र को चुना। इसलिए उनके व्यापार से कोई लाभ नहीं हुआ; क्योंकि वे अल्लाह पर ईमान से हाथ धो बैठे और उन्हें सत्य मार्ग भी प्राप्त नहीं हुआ।

2:17Page 4

مَثَلُهُمۡ كَمَثَلِ ٱلَّذِي ٱسۡتَوۡقَدَ نَارٗا فَلَمَّآ أَضَآءَتۡ مَا حَوۡلَهُۥ ذَهَبَ ٱللَّهُ بِنُورِهِمۡ وَتَرَكَهُمۡ فِي ظُلُمَٰتٖ لَّا يُبۡصِرُونَ ١٧

Their example is that of one who kindled a fire, but when it illuminated what was around him, Allāh took away their light and left them in darkness [so] they could not see.

अल्लाह तआला ने इन मुनाफ़िक़ों (पाखंडियों) के दो उदाहरण पेश किए हैं : एक आग का उदाहरण, और दूसरा पानी का उदाहरण। उनका आग का उदाहरण यह है कि : वे (मुनाफ़िक़) उस आदमी की तरह हैं, जिसने रोशनी प्राप्त करने के लिए आग जलाई। जब उसकी रोशनी चमकी और उसने सोचा कि अब उससे लाभान्वित होगा, तो वह बुझ गई। चुनाँचे उसमें जो चमकने वाला तत्व था, वह समाप्त हो गया तथा जो कुछ उसमें जलाने का तत्व था, वह रह गया। इसलिए वे आग जलाने वाले अंधकार में पड़े रह गए। उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता और न वे कोई रास्ता ही पाते हैं।

2:18Page 4

صُمُّۢ بُكۡمٌ عُمۡيٞ فَهُمۡ لَا يَرۡجِعُونَ ١٨

Deaf, dumb and blind - so they will not return [to the right path].

वे बहरे हैं, सत्य को स्वीकार करने की नीयत से नहीं सुनते। वे गूँगे हैं, सत्य नहीं बोलते हैं। (वे) सत्य को देखने से अंधे हैं। इसलिए वे अपनी पथभ्रष्टता से वापस नहीं लौटते।

2:19Page 4

أَوۡ كَصَيِّبٖ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فِيهِ ظُلُمَٰتٞ وَرَعۡدٞ وَبَرۡقٞ يَجۡعَلُونَ أَصَٰبِعَهُمۡ فِيٓ ءَاذَانِهِم مِّنَ ٱلصَّوَٰعِقِ حَذَرَ ٱلۡمَوۡتِۚ وَٱللَّهُ مُحِيطُۢ بِٱلۡكَٰفِرِينَ ١٩

Or [it is] like a rainstorm from the sky within which is darkness, thunder and lightning. They put their fingers in their ears against the thunderclaps in dread of death. But Allāh is encompassing1 of the disbelievers.

जहाँ तक उनके पानी के उदाहरण का संबंध है : तो वे संचित अंधकार, गरज और बिजली (चमक) वाले बादलों से होने वाली बहुत अधिक बारिश के समान हैं, जो कुछ लोगों पर उतरती है, तो वे सख़्त घबराहट से ग्रस्त हो जाते हैं, और कड़कने वाले वज्र की तीव्रता के कारण मृत्यु के भय से अपनी उंगलियों से अपने कानों को बंद कर लेते हैं। हालाँकि अल्लाह काफ़िरों को घेरे हुए है, वे उसे विवश नहीं कर सकते।

2:20Page 4

يَكَادُ ٱلۡبَرۡقُ يَخۡطَفُ أَبۡصَٰرَهُمۡۖ كُلَّمَآ أَضَآءَ لَهُم مَّشَوۡاْ فِيهِ وَإِذَآ أَظۡلَمَ عَلَيۡهِمۡ قَامُواْۚ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَذَهَبَ بِسَمۡعِهِمۡ وَأَبۡصَٰرِهِمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ٢٠

The lightning almost snatches away their sight. Every time it lights [the way] for them, they walk therein; but when darkness comes over them, they stand [still]. And if Allāh had willed, He could have taken away their hearing and their sight. Indeed, Allāh is over all things competent.

निकट है कि बिजली अपनी चमक और रोशनी की तीव्रता के कारण उनकी आँखों को उचक ले जाए। जब भी बिजली चमकती और उनके लिए रोशनी करती है, तो वे आगे बढ़ते हैं और जब वह रोशनी नहीं करती है, तो वे अंधेरे ही में बने रहते हैं, अपनी जगह से हिल नहीं सकते। हालाँकि यदि अल्लाह चाहता, तो उनके सत्य से मुँह मोड़ने के कारण अपनी सर्वसमावेशी शक्ति के द्वारा उनके कान और उनकी दृष्टियों को छीन लेता, फिर वे उनके पास वापस नहीं लौटतीं। यहाँ बारिश क़ुरआन का उदाहरण है, बिजली की कड़क क़ुरआन की चेतावनियों का उदाहरण है, बिजली की रोशनी कभी-कभी उनके सामने सत्य के स्पष्ट होने का उदाहरण है, तथा बिजली की कड़क की तीव्रता से कानों को बंद कर लेने को उनके सत्य से मुँह मोड़ने और उसे स्वीकार न करने का उदाहरण बनाया गया है। मुनाफ़िक़ों और दोनों उदाहरणों वाले लोगों के बीच सादृश्य का बिंदु : लाभ न उठाना है। चुनाँचे आग के उदाहरण में : आग जलाने वाले को अंधेरे और जलने के सिवा कोई लाभ न हुआ, और पानी के उदाहरण में : बारिश में घिरे हुए लोगों ने भयंकर गरज और चमक के अलावा कोई लाभ नहीं उठाया। यही हाल मुनाफ़िक़ों का है, उन्हें इस्लाम के अंदर सख़्ती एवं कठोरता के सिवा कुछ नज़र नहीं आता।

2:21Page 4

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱعۡبُدُواْ رَبَّكُمُ ٱلَّذِي خَلَقَكُمۡ وَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ ٢١

O mankind, worship your Lord, who created you and those before you, that you may become righteous -

ऐ लोगो! अकेले अपने पालनहार की इबादत करो, उसके अतिरिक्त किसी और की नहीं; क्योंकि वही है जिसने तुम्हें पैदा किया और उन समुदायों को पैदा किया जो तुमसे पहले थे। इस आशा में कि तुम उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उसकी यातना से बचने का उपाय कर सको।

2:22Page 4

ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلۡأَرۡضَ فِرَٰشٗا وَٱلسَّمَآءَ بِنَآءٗ وَأَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجَ بِهِۦ مِنَ ٱلثَّمَرَٰتِ رِزۡقٗا لَّكُمۡۖ فَلَا تَجۡعَلُواْ لِلَّهِ أَندَادٗا وَأَنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ٢٢

[He] who made for you the earth a bed [spread out] and the sky a ceiling and sent down from the sky, rain and brought forth thereby fruits as provision for you. So do not attribute to Allāh equals while you know [that there is nothing similar to Him].

वही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को समतल बिछौना बनाया तथा उसके ऊपर आकाश को एक दृढ़ संरचना बनाया। तथा वही बारिश उतारकर उपकार करने वाला है। चुनाँचे उसने उसके द्वारा धरती से विभिन्न प्रकार के फल उगाए, ताकि वह तुम्हारी जीविका बन सके। अतः अल्लाह के लिए किसी तरह के साझीदार और उदाहरण न बनाओ, जबकि तुम जानते हो कि अल्लाह सर्वशक्तिमान के सिवा कोई स्रष्टा नहीं है।

2:23Page 4

وَإِن كُنتُمۡ فِي رَيۡبٖ مِّمَّا نَزَّلۡنَا عَلَىٰ عَبۡدِنَا فَأۡتُواْ بِسُورَةٖ مِّن مِّثۡلِهِۦ وَٱدۡعُواْ شُهَدَآءَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٢٣

And if you are in doubt about what We have sent down [i.e., the Qur’ān] upon Our Servant [i.e., Prophet Muḥammad (ﷺ)], then produce a sūrah the like thereof and call upon your witnesses [i.e., supporters] other than Allāh, if you should be truthful.

ऐ लोगो! यदि तुम्हें हमारे बंदे मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारे गए क़ुरआन के बारे में किसी प्रकार का संदेह है, तो हम तुम्हें चुनौती देते हैं कि उस जैसी एक सूरत ही लाकर उसका विरोध करो, भले ही वह उसकी छोटी से छोटी सूरत के बराबर ही क्यों न हो। तथा अपने समर्थकों में से जिसे भी बुला सकते हो, बुला लो, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो।

2:24Page 4

فَإِن لَّمۡ تَفۡعَلُواْ وَلَن تَفۡعَلُواْ فَٱتَّقُواْ ٱلنَّارَ ٱلَّتِي وَقُودُهَا ٱلنَّاسُ وَٱلۡحِجَارَةُۖ أُعِدَّتۡ لِلۡكَٰفِرِينَ ٢٤

But if you do not - and you will never be able to - then fear the Fire, whose fuel is people and stones, prepared for the disbelievers.

अगर तुमने ऐसा नहीं किया - और तुम ऐसा कभी नहीं कर पाओगे - तो उस आग से बचो, जो यातना के हक़दार लोगों और उन सभी प्रकार के पत्थरों से भड़काई जाएगी, जिन्हें वे पूजा करते थे। इस आग को अल्लाह तआला ने काफ़िरों के लिए तैयार किया है।

2:25Page 5

وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ كُلَّمَا رُزِقُواْ مِنۡهَا مِن ثَمَرَةٖ رِّزۡقٗا قَالُواْ هَٰذَا ٱلَّذِي رُزِقۡنَا مِن قَبۡلُۖ وَأُتُواْ بِهِۦ مُتَشَٰبِهٗاۖ وَلَهُمۡ فِيهَآ أَزۡوَٰجٞ مُّطَهَّرَةٞۖ وَهُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ ٢٥

And give good tidings to those who believe and do righteous deeds that they will have gardens [in Paradise] beneath which rivers flow. Whenever they are provided with a provision of fruit therefrom, they will say, "This is what we were provided with before." And it is given to them in likeness. And they will have therein purified spouses, and they will abide therein eternally.

अगर पिछली धमकी काफ़िरों के लिए थी; तो - ऐ नबी - आप सत्कर्म करने वाले मोमिनों को ऐसे बाग़ों की शुभ सूचना दे दें, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे नहरें बहती हैं। जब भी उन्हें उन बाग़ों के स्वादिष्ट फलों में से कोई फल दिया जाएगा, तो दुनिया के फलों से बिलकुल मिलता-जुलता होने के कारण वे कहेंगे : ये तो बिलकुल वैसे ही फल हैं, जो हमें पहले दिए गए थे। दरअसल उन्हें आकार तथा नाम में समरूप फल इसलिए दिए जाएँगे, ताकि जाने पहचाने फल होने के कारण, दिल उन्हें स्वीकार कर लें। लेकिन वे अपने स्वाद और ज़ायक़े में भिन्न होंगे। उनके लिए जन्नत में ऐसी पत्नियाँ होंगी, जो दुनिया के लोगों में कल्पना की जाने वाली हर उस चीज़ से पवित्र होंगी, जिससे मन भागता है और मानव स्वभाव घृणा करता है। वे दुनिया की बाधित होने वाली नेमतों के विपरीत, हमेशा बाक़ी रहने वाली नेमतों में होंगे, जो कभी ख़त्म नहीं होंगी।

2:26Page 5

۞ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَسۡتَحۡيِۦٓ أَن يَضۡرِبَ مَثَلٗا مَّا بَعُوضَةٗ فَمَا فَوۡقَهَاۚ فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ فَيَعۡلَمُونَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّهِمۡۖ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَيَقُولُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلٗاۘ يُضِلُّ بِهِۦ كَثِيرٗا وَيَهۡدِي بِهِۦ كَثِيرٗاۚ وَمَا يُضِلُّ بِهِۦٓ إِلَّا ٱلۡفَٰسِقِينَ ٢٦

Indeed, Allāh is not timid to present an example - that of a mosquito or what is smaller1 than it. And those who have believed know that it is the truth from their Lord. But as for those who disbelieve, they say, "What did Allāh intend by this as an example?" He misleads many thereby and guides many thereby. And He misleads not except the defiantly disobedient,

अल्लाह तआला किसी भी चीज़ के साथ उदाहरण देने से नहीं शरमाता है। चुनाँचे वह मच्छर तथा उससे भी छोटी या उससे भी बड़ी वस्तु के साथ उदाहरण देता है। जबकि इन उदाहरणों के प्रति लोगों के दो प्रकार हैं : मोमिन और काफ़िर। मोमिन लोग उनकी पुष्टि करते हैं और इस बात पर विश्वास रखते हैं कि उनके द्वारा उदाहरण देने के पीछे एक हिकमत है। परंतु काफ़िर लोग मज़ाक़ उड़ाते हुए एक-दूसरे से पूछते हैं कि अल्लाह ने मच्छर, मक्खी एवं मकड़ी जैसी इन तुच्छ प्राणियों के साथ उदाहरण क्यों दिया है? तो अल्लाह की तरफ से उसका उत्तर यह आता है : इन उदाहरणों में लोगों के लिए कई प्रकार के मार्गदर्शन, निर्देश और परीक्षण हैं। उनमें से कुछ को अल्लाह, उनके इन पर विचार करने से मुँह फेरने के कारण, गुमराह कर देता है। और ऐसे लोगों की संख्या बहुत है। तथा उनमें से कुछ का मार्गदर्शन करता है क्योंकि वे उनसे उपदेश ग्रहण करते हैं, और ये भी बहुत हैं। वह केवल उसी को गुमराह करता है, जो गुमराही का हक़दार हो। और वे उसकी आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले लोग हैं, जैसे कि मुनाफ़िक़ लोग।

2:27Page 5

ٱلَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهۡدَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ مِيثَٰقِهِۦ وَيَقۡطَعُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ ٢٧

Who break the covenant of Allāh after contracting it and sever that which Allāh has ordered to be joined and cause corruption on earth. It is those who are the losers.

जो लोग अल्लाह के उस वचन को तोड़ देते हैं, जो उसने उनसे लिया था कि वे केवल उसी की इबादत करेंगे तथा उसके उस रसूल का अनुसरण करेंगे, जिसके बारे में आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पहले के रसूलों ने सूचना दी थी। तथा वे उन रिश्तों-नातों को काटते हैं, जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है और पापों के माध्यम से पृथ्वी में भ्रष्टाचार फैलाने की कोशिश करते हैं, तो यही लोग दुनिया एवं आख़िरत में बहुत कम हिस्से वाले हैं।

2:28Page 5

كَيۡفَ تَكۡفُرُونَ بِٱللَّهِ وَكُنتُمۡ أَمۡوَٰتٗا فَأَحۡيَٰكُمۡۖ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يُحۡيِيكُمۡ ثُمَّ إِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ ٢٨

How can you disbelieve in Allāh when you were lifeless and He brought you to life; then He will cause you to die, then He will bring you [back] to life, and then to Him you will be returned.

ऐ काफ़िरो! तुम्हारा मामला बड़ा अद्भुत है! तुम अल्लाह का इनकार कैसे करते हो, जबकि तुम उसके सामर्थ्य की निशानियाँ खुद अपने अंदर देखते हो; क्योंकि तुम कुछ भी नहीं थे, तो उसने तुम्हें बनाया और जीवन दिया, फिर वह तुम्हें दूसरी मौत देगा, फिर तुम्हें दूसरा जीवन प्रदान करेगा, फिर वह तुम्हें अपनी ओर लौटाएगा, ताकि जो कुछ तुमने किया है उसका तुमसे हिसाब ले।

2:29Page 5

هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَ لَكُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗا ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰٓ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَسَوَّىٰهُنَّ سَبۡعَ سَمَٰوَٰتٖۚ وَهُوَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ ٢٩

It is He who created for you all of that which is on the earth. Then He directed Himself1 to the heaven, [His being above all creation], and made them seven heavens, and He is Knowing of all things.

अकेला अल्लाह ही है, जिसने धरती पर जो कुछ भी है, जैसे- नदियाँ, पेड़ और अन्य चीज़ें जिनकी गिनती नहीं की जा सकती, तुम्हारे लिए पैदा किया, तथा तुम उससे लाभान्वित होते और उसका आनंद लेते हो जो उसने तुम्हारे अधीन किया है। फिर वह आसमान की रचना करने की ओर मुतवज्जेह हुआ और उन्हें ठीक-ठाक सात आसमान बना दिया। तथा उसके ज्ञान ने हर वस्तु को अपने घेरे में ले रखा है।

2:30Page 6

وَإِذۡ قَالَ رَبُّكَ لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ إِنِّي جَاعِلٞ فِي ٱلۡأَرۡضِ خَلِيفَةٗۖ قَالُوٓاْ أَتَجۡعَلُ فِيهَا مَن يُفۡسِدُ فِيهَا وَيَسۡفِكُ ٱلدِّمَآءَ وَنَحۡنُ نُسَبِّحُ بِحَمۡدِكَ وَنُقَدِّسُ لَكَۖ قَالَ إِنِّيٓ أَعۡلَمُ مَا لَا تَعۡلَمُونَ ٣٠

And [mention, O Muḥammad], when your Lord said to the angels, "Indeed, I will make upon the earth a successive authority."1 They said, "Will You place upon it one who causes corruption therein and sheds blood, while we exalt You with praise and declare Your perfection?"2 He [Allāh] said, "Indeed, I know that which you do not know."

अल्लाह तआला सूचना दे रहा है कि उसने फ़रिश्तों से कहा कि वह धरती पर मनुष्य को पैदा करेगा, जो अल्लाह की आज्ञाकारिता पर धरती को आबाद करने के लिए एक-दूसरे के उत्तराधिकारी होंगे। तो फ़रिश्तों ने अपने पालनहार से - मार्गदर्शन और पूछताछ के तौर पर - आदम के बेटों को पृथ्वी पर उत्तराधिकारी बनाने की हिकमत के बारे में पूछा, जबकि वे धरती में बिगाड़ पैदा करेंगे और अन्यायपूर्वक खून बहाएँगे, यह कहते हुए : हालाँकि हम तेरे आज्ञाकारी हैं, तेरी प्रशंसा करते हुए तथा तेरे प्रताप एवं पूर्णता का महिमामंडन करते हुए हम तेरी पवित्रता बयान करते हैं, हम इसमें कोई सुस्ती नहीं करते। तो अल्लाह तआला ने उनके प्रश्न का उत्तर दिया : मैं उन्हें पैदा करने की शानदार हिकमतों तथा उनके उत्तराधिकार के महान उद्देश्यों के बारे में जो जानता हूँ, तुम नहीं जानते।

2:31Page 6

وَعَلَّمَ ءَادَمَ ٱلۡأَسۡمَآءَ كُلَّهَا ثُمَّ عَرَضَهُمۡ عَلَى ٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ فَقَالَ أَنۢبِـُٔونِي بِأَسۡمَآءِ هَٰٓؤُلَآءِ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٣١

And He taught Adam the names - all of them. Then He showed them to the angels and said, "Inform Me of the names of these, if you are truthful."

आदम अलैहिस्सलाम के स्थान (रुतबा) को स्पष्ट करने के लिए, अल्लाह तआला ने उन्हें सभी सजीव एवं निर्जीव वस्तुओं आदि के नाम अर्थात् उनके शब्द एवं अर्थ सिखा दिए। फिर उन वस्तुओं को फ़रिश्तों के सामने रखते हुए कहा : मुझे इनके नाम बताओ, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि तुम इस प्राणी से अधिक प्रतिष्ठित और उससे बेहतर हो!!

2:32Page 6

قَالُواْ سُبۡحَٰنَكَ لَا عِلۡمَ لَنَآ إِلَّا مَا عَلَّمۡتَنَآۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَلِيمُ ٱلۡحَكِيمُ ٣٢

They said, "Exalted are You; we have no knowledge except what You have taught us. Indeed, it is You who is the Knowing,1 the Wise."2

उन्होंने - अपनी कमी को स्वीकार करते हुए, अल्लाह को श्रेय देते हुए - कहा : ऐ हमारे पालनहार! हम तेरे फ़ैसले और विधान के बारे में तुझपर आपत्ति करने से तुझे पवित्र ठहराते और तेरा महिमामंडन करते हैं। क्योंकि तूने हमें जो ज्ञान दिया है, उसके सिवा हम और कुछ नहीं जानते। निःसंदेह तू सर्वज्ञ है, जिससे कुछ भी छिपा नहीं है, तू पूर्ण हिकमत वाला है, अपनी नियति और अपने विधान में चीजों को उनके उचित स्थान पर रखता है।

2:33Page 6

قَالَ يَٰٓـَٔادَمُ أَنۢبِئۡهُم بِأَسۡمَآئِهِمۡۖ فَلَمَّآ أَنۢبَأَهُم بِأَسۡمَآئِهِمۡ قَالَ أَلَمۡ أَقُل لَّكُمۡ إِنِّيٓ أَعۡلَمُ غَيۡبَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَأَعۡلَمُ مَا تُبۡدُونَ وَمَا كُنتُمۡ تَكۡتُمُونَ ٣٣

He said, "O Adam, inform them of their names." And when he had informed them of their names, He said, "Did I not tell you that I know the unseen [aspects] of the heavens and the earth? And I know what you reveal and what you have concealed."

तब अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम से कहा : उन्हें इन वस्तुओं के नाम बताओ। चुनाँचे जब आदम अलैहिस्सलाम ने उन्हें बता दिया जिस तरह उनके पालनहार ने उन्हें सिखाया था, तो अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों से कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था : निःसंदेह मैं आकाशों तथा धरती की छिपी हुई बातों को जानता हूँ, तथा मैं उसे भी जानता हूँ, जो तुम अपनी स्थितियों में से प्रकट करते हो और जो तुम अपने मन से बातें करते हो।

2:34Page 6

وَإِذۡ قُلۡنَا لِلۡمَلَٰٓئِكَةِ ٱسۡجُدُواْ لِأٓدَمَ فَسَجَدُوٓاْ إِلَّآ إِبۡلِيسَ أَبَىٰ وَٱسۡتَكۡبَرَ وَكَانَ مِنَ ٱلۡكَٰفِرِينَ ٣٤

And [mention] when We said to the angels, "Prostrate before Adam"; so they prostrated, except for Iblees.1 He refused and was arrogant and became of the disbelievers.

अल्लाह तआला बयान कर रहा है कि उसने फ़रिश्तों को आदम को सम्मान स्वरूप सजदा करने का आदेश दिया, तो उन्होंने अल्लाह के आज्ञापालन में ज़रा भी देर नहीं की, फौरन सजदे में गिर गए। इबलीस को छोड़कर जो कि जिन्नों में से था। उसने अल्लाह के सजदे के आदेश पर आपत्ति जताते हुए और आदम पर बड़ा बनते हुए, सजदा करने से मना कर दिया। इस कारण वह अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वालों में से हो गया।

2:35Page 6

وَقُلۡنَا يَٰٓـَٔادَمُ ٱسۡكُنۡ أَنتَ وَزَوۡجُكَ ٱلۡجَنَّةَ وَكُلَا مِنۡهَا رَغَدًا حَيۡثُ شِئۡتُمَا وَلَا تَقۡرَبَا هَٰذِهِ ٱلشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ ٣٥

And We said, "O Adam, dwell, you and your wife, in Paradise and eat therefrom in [ease and] abundance from wherever you will. But do not approach this tree, lest you be among the wrongdoers."

और हमने कहा : ऐ आदम! तुम और तुम्हारी पत्नी - ह़व्वा - जन्नत में रहो और उसमें से जन्नत के किसी भी भाग में एक सुखद और विस्तृत भोजन खाओ। तथा तुम दोनों इस पेड़ के पास मत जाना, जिससे मैंने तुम्हें खाने से मना किया है। अन्यथा तुम दोनों मेरी अवज्ञा करने के कारण अत्याचारियों में से हो जाओगे।

2:36Page 6

فَأَزَلَّهُمَا ٱلشَّيۡطَٰنُ عَنۡهَا فَأَخۡرَجَهُمَا مِمَّا كَانَا فِيهِۖ وَقُلۡنَا ٱهۡبِطُواْ بَعۡضُكُمۡ لِبَعۡضٍ عَدُوّٞۖ وَلَكُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُسۡتَقَرّٞ وَمَتَٰعٌ إِلَىٰ حِينٖ ٣٦

But Satan caused them to slip out of it and removed them from that [condition] in which they had been. And We said, "Go down, [all of you], as enemies to one another, and you will have upon the earth a place of settlement and provision for a time."

चुनाँचे शैतान लगातार दोनों को बहकाता और उनके लिए सुशोभित करता रहा, यहाँ तक कि उन्हें उस पेड़ से खाने के पाप में डाल दिया, जिससे अल्लाह ने उन्हें मना किया था। इसके परिणामस्वरूप, अल्लाह ने उन्हें उस जन्नत से निकाल दिया जिसमें वे दोनों थे, तथा अल्लाह ने उन दोनो से और शैतान से कहा : धरती पर उतर आओ। तुम एक-दूसरे के शत्रु हो। और जब तक तुम्हारी नियत जीवन अवधि समाप्त नहीं हो जाती और क़ियामत क़ायम नहीं हो जाती, तब तक तुम्हें उस धरती पर रहना और उसमें मौजूद अच्छी चीजों से फायदा उठाना है।

2:37Page 6

فَتَلَقَّىٰٓ ءَادَمُ مِن رَّبِّهِۦ كَلِمَٰتٖ فَتَابَ عَلَيۡهِۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ ٣٧

Then Adam received from his Lord [some] words,1 and He accepted his repentance. Indeed, it is He who is the Accepting of Repentance,2 the Merciful.

फिर आदम अलैहिस्सलाम ने वे शब्द सीख लिए, जो अल्लाह ने उनके दिल में डाल दिए थे और उनके साथ उन्हें दुआ करने के लिए प्रेरित किया था। ये वही शब्द हैं, जिनका उल्लेख अल्लाह के इस कथन में है : (الأعراف: 23)﴾قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ﴿ ''उन दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमने अपनी जानों पर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया और हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य नुक़सान उठाने वालों में से हो जाएँगे।'' (सूरतुल आराफ़ : 23) चुनाँचे अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल कर ली और उन्हें क्षमा कर दिया। क्योंकि वह महिमावान् अपने बंदों की तौबा बहुत ज़्यादा क़बूल करने वाला और उनपर दया करने वाला है।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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