Al-MukhtasarAt‑Tin · 95:1–8

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

التين

At-Tin

The Fig · Meccan · 8 ayahs

95:1Page 597

وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيۡتُونِ ١

By the fig and the olive1

अल्लाह ने अंजीर की एवं ज़ैतून की तथा फिलिस्तीन की भूमि में उनके पैदा होने की जगह की क़सम खाई है, जहाँ ईसा अलैहिस्सलाम भेजे गए थे।

95:2Page 597

وَطُورِ سِينِينَ ٢

And [by] Mount Sinai

और सीना (सीनाई) पर्वत की क़सम खाई है, जिसके पास अल्लाह ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम से बात की थी।

95:3Page 597

وَهَٰذَا ٱلۡبَلَدِ ٱلۡأَمِينِ ٣

And [by] this secure city [i.e., Makkah],

तथा उसने बलद-ए-हराम (पवित्र नग) मक्का की क़सम खाई है, जिसमें जो कोई भी प्रवेश करेगा वह सुरक्षित रहेगा, जिसमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम नबी बनाकर भेजे गए थे।

95:4Page 597

لَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ فِيٓ أَحۡسَنِ تَقۡوِيمٖ ٤

We have certainly created man in the best of stature;1

हमने इनसान को सबसे अनुकूल संरचना और सबसे अच्छे रूप में पैदा किया है।

95:5Page 597

ثُمَّ رَدَدۡنَٰهُ أَسۡفَلَ سَٰفِلِينَ ٥

Then We return him to the lowest of the low,1

पिर हमने उसे दुनिया में बुढ़ापे और सठियाव की ओर लौटा दिया, इसलिए वह अपने शरीर से लाभ नहीं उठा सकता, जैसे कि अगर वह अपना स्वभाव बिगाड़ ले और जहन्नम में चला जाए, तो वह अपने शरीर से लाभ नहीं उठा सकेगा।

95:6Page 597

إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَلَهُمۡ أَجۡرٌ غَيۡرُ مَمۡنُونٖ ٦

Except for those who believe and do righteous deeds, for they will have a reward uninterrupted.

परंतु जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, वे यद्यपि बूढ़े हो जाएँ, उनके लिए हमेशा रहने वाला बदला है, जो कभी खत्म नहीं होगा और वह जन्नत है। क्योंकि उन्होंने अपने स्वभाव को शुद्ध किया।

95:7Page 597

فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعۡدُ بِٱلدِّينِ ٧

So what yet causes you to deny the Recompense?1

तो (ऐ इनसान!) तुझे कौन-सी चीज़ बदले के दिन को झुठलाने पर उकसाती है, जबकि तूने उसकी शक्ति एवं क्षमता की बहुत-सी निशानियाँ देखी हैं?

95:8Page 597

أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَحۡكَمِ ٱلۡحَٰكِمِينَ ٨

Is not Allāh the most just of judges?

क्या अल्लाह - क़ियामत के दिन को बदले का दिन बनाकर - सब हाकिमों से बड़ा और सबसे अधिक न्याय करनेवाला हाकिम नहीं है?! क्या यह उचित है कि अल्लाह अपने बंदों को उनके बीच फ़ैसला किए बिना व्यर्थ छोड़ दे, और अच्छा कार्य करने वाले को उसके अच्छे कार्य और बुरा कार्य करने वाले को उसकी बुराई का बदला न दे?!

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

Contents

Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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