Al-MukhtasarFatir · 35:1–39

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

فاطر

Fatir

Originator · Meccan · 45 ayahs

35:1Page 434

ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ فَاطِرِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ جَاعِلِ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ رُسُلًا أُوْلِيٓ أَجۡنِحَةٖ مَّثۡنَىٰ وَثُلَٰثَ وَرُبَٰعَۚ يَزِيدُ فِي ٱلۡخَلۡقِ مَا يَشَآءُۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ١

[All] praise is [due] to Allāh, Creator of the heavens and the earth, [who] made the angels messengers having wings, two or three or four. He increases in creation what He wills. Indeed, Allāh is over all things competent.

सब प्रशंसा आकाशों तथा धरती को बिना किसी पूर्व उदाहरण के पैदा करने वाले अल्लाह के लिए है, जिसने फ़रिश्तों में से संदेशवाहक बनाए, जो उसके नियत किए हुए आदेशों को लागू करते हैं और उन्हीं में से कुछ फ़रिश्ते नबियों तक वह़्य पहुँचाने का काम करते हैं। अल्लाह ने उन्हें उनको सौंपी हुई ज़िम्मेदारियों को निभाने की शक्ति प्रदान की है। चुनाँचे उनमें से कुछ दो पंख वाले हैं, कुछ तीन और कुछ चार पंख वाले। वे उनके सहारे अल्लाह का आदेश लागू करने के लिए उड़ते हैं। अल्लाह अपनी सृष्टि में जिस किसी अंग, या सौंदर्य या आवाज की चाहता है, वृद्धि करता है। निश्चय अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

35:2Page 434

مَّا يَفۡتَحِ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ مِن رَّحۡمَةٖ فَلَا مُمۡسِكَ لَهَاۖ وَمَا يُمۡسِكۡ فَلَا مُرۡسِلَ لَهُۥ مِنۢ بَعۡدِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ٢

Whatever Allāh grants to people of mercy - none can withhold it; and whatever He withholds - none can release it thereafter. And He is the Exalted in Might, the Wise.

निःसंदेह हर चीज़ की कुंजी अल्लाह के हाथ में है। अतः वह लोगों के लिए जीविका, मार्गदर्शन, खुशी और अन्य नेमतों के जो द्वार खोल दे, तो कोई भी उसे रोक नहीं सकता। तथा उनमें से जिसे वह रोक ले, तो उसके रोकने के पश्चात कोई भी उसे नहीं भेज सकता। और वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। वह अपनी रचना, तक़दीर (नियति) और प्रबंध में पूर्ण हिकमत वाला है।

35:3Page 434

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡۚ هَلۡ مِنۡ خَٰلِقٍ غَيۡرُ ٱللَّهِ يَرۡزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِۚ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ فَأَنَّىٰ تُؤۡفَكُونَ ٣

O mankind, remember the favor of Allāh upon you. Is there any creator other than Allāh who provides for you from the heaven and earth? There is no deity except Him, so how are you deluded?

ऐ लोगो! तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमत को, अपने दिलों और ज़बानों से तथा अपने अंगों से कार्य के द्वारा, याद करो। क्या अल्लाह के अलावा तुम्हारा और कोई पैदा करने वाला है, जो तुम्हें आकाश से वर्षा उतारकर और धरती से फलों एवं फसलों और अन्य चीज़ों को उगाकर जीविका प्रदान करता है? उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। फिर इसके पश्चात तुम इस सत्य से कैसे फिर जाते हो और अल्लाह पर मिथ्यारोपण करते हो और यह दावा करते हो कि अल्लाह के कुछ साझीदार हैं। हालाँकि उसी ने तुम्हें पैदा किया और तुम्हें जीविका प्रदान की?!

35:4Page 435

وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدۡ كُذِّبَتۡ رُسُلٞ مِّن قَبۡلِكَۚ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرۡجَعُ ٱلۡأُمُورُ ٤

And if they deny you, [O Muḥammad] - already were messengers denied before you. And to Allāh are returned [all] matters.

और यदि (ऐ रसूल!) आपकी जाति के लोग आपको झुठलाते हैं, तो आप धैर्य से काम लें। क्योंकि आप पहले रसूल नहीं हैं, जिसे उसकी जाति के लोगों ने झुठलाया है। बल्कि आपसे पूर्व समुदायों ने भी अपने रसूलों को झुठलाया था, जैसे आद, समूद और लूत अलैहिस्सलाम की जाति। तथा सभी मामले अकेले अल्लाह ही की ओर लौटाए जाएँगे। फिर वह झुठलाने वालों को विनष्ट कर देगा तथा अपने रसूलों और ईमान वालों की सहायता करेगा।

35:5Page 435

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِٱللَّهِ ٱلۡغَرُورُ ٥

O mankind, indeed the promise of Allāh is truth, so let not the worldly life delude you and be not deceived about Allāh by the Deceiver [i.e., Satan].

ऐ लोगो! अल्लाह ने (क़ियामत के दिन मरणोपरांत पुनर्जीवन और बदले का) जो वादा किया है, वह सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। अतः सांसारिक जीवन की सुख-सुविधाएँ और उसकी इच्छाएँ तुम्हें अच्छे कार्य के द्वारा उस दिन की तैयारी करने से धोखे में न रखें, तथा शैतान असत्य और सांसारिक जीवन में लिप्त रहने को सुशोभित करके तुम्हें धोखे में न डाले।

35:6Page 435

إِنَّ ٱلشَّيۡطَٰنَ لَكُمۡ عَدُوّٞ فَٱتَّخِذُوهُ عَدُوًّاۚ إِنَّمَا يَدۡعُواْ حِزۡبَهُۥ لِيَكُونُواْ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلسَّعِيرِ ٦

Indeed, Satan is an enemy to you; so take him as an enemy. He only invites his party to be among the companions of the Blaze.

निःसंदेह शैतान (ऐ लोगो) तुम्हारा हमेशा का शत्रु है। अतः निरंतर उससे लड़ने की प्रतिबद्धता के साथ उसे अपना शत्रु समझो। वास्तव में, शैतान अपने अनुयायियों को अल्लाह के इनकार की ओर बुलाता है। ताकि उनका परिणाम क़ियामत के दिन दहकती आग में प्रवेश करना हो।

35:7Page 435

ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدٞۖ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٞ كَبِيرٌ ٧

Those who disbelieve will have a severe punishment, and those who believe and do righteous deeds will have forgiveness and great reward.

जिन लोगों ने शैतान का अनुसरण करते हुए अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, उनके लिए कठोर यातना है। और जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उनके लिए अल्लाह की ओर से उनके पापों की क्षमा है, तथा उनके लिए उसकी ओर से एक महान प्रतिफल है और वह जन्नत है।

35:8Page 435

أَفَمَن زُيِّنَ لَهُۥ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ فَرَءَاهُ حَسَنٗاۖ فَإِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۖ فَلَا تَذۡهَبۡ نَفۡسُكَ عَلَيۡهِمۡ حَسَرَٰتٍۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِمَا يَصۡنَعُونَ ٨

Then is one to whom the evil of his deed has been made attractive so he considers it good [like one rightly guided]? For indeed, Allāh sends astray whom He wills and guides whom He wills. So do not let yourself perish over them in regret. Indeed, Allāh is Knowing of what they do.

जिस व्यक्ति के लिए शैतान ने उसके बुरे कार्य को सुंदर बना दिया, तो वह उसे अच्छा समझने लगा, वह उस व्यक्ति के समान नहीं है, जिसके लिए अल्लाह ने सत्य को सुशोभित कर दिया है, तो वह उसे सत्य समझता है। क्योंकि अल्लाह जिसे चाहे, गुमराह कर देता है और जिसे चाहे, मार्गदर्शन प्रदान करता है, उसे कोई मजबूर करने वाला नहीं है। अतः (ऐ रसूल) आप इन गुमराहों की गुमराही पर शोक करते हुए अपने आपको हलकान न करें। निःसंदेह अल्लाह उनकी करतूतों को जानता है, उनके कार्यों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।

35:9Page 435

وَٱللَّهُ ٱلَّذِيٓ أَرۡسَلَ ٱلرِّيَٰحَ فَتُثِيرُ سَحَابٗا فَسُقۡنَٰهُ إِلَىٰ بَلَدٖ مَّيِّتٖ فَأَحۡيَيۡنَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۚ كَذَٰلِكَ ٱلنُّشُورُ ٩

And it is Allāh who sends the winds, and they stir the clouds, and We drive them to a dead land and give life thereby to the earth after its lifelessness. Thus is the resurrection.

तथा वह अल्लाह ही है, जो हवाओं को भेजता है। तो ये हवाएँ बादल को चलाती हैं। फिर हम बादल को ऐसे नगर की ओर ले जाते हैं, जहाँ कोई पौधा नहीं होता। फिर हम उसके पानी से भूमि को उसके सूखने के बाद, उसमें पौधे उगाकर, पुनर्जीवित कर देते हैं। तो जैसे हमने इस भूमि को उसके मरने के बाद, उसमें पौधे उगाकर, पुनर्जीवित किया है, उसी तरह क़ियामत के दिन मृतकों को फिर से जीवित किया जाएगा।

35:10Page 435

مَن كَانَ يُرِيدُ ٱلۡعِزَّةَ فَلِلَّهِ ٱلۡعِزَّةُ جَمِيعًاۚ إِلَيۡهِ يَصۡعَدُ ٱلۡكَلِمُ ٱلطَّيِّبُ وَٱلۡعَمَلُ ٱلصَّٰلِحُ يَرۡفَعُهُۥۚ وَٱلَّذِينَ يَمۡكُرُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ لَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدٞۖ وَمَكۡرُ أُوْلَٰٓئِكَ هُوَ يَبُورُ ١٠

Whoever desires honor [through power] - then to Allāh belongs all honor.1 To Him ascends good speech, and righteous work raises it.2 But they who plot evil deeds will have a severe punishment, and the plotting of those - it will perish.

जो व्यक्ति दुनिया अथवा आखिरत में सम्मान चाहता है, वह उसे अल्लाह के सिवाय किसी और से न माँगे। क्योंकि उन दोनों स्थानों में सम्मान केवल अल्लाह ही के लिए है। उसका (बंदों के द्वारा) पवित्र स्मरण उसी की ओर चढ़ता है और बंदों का अच्छा कर्म उसे अल्लाह की ओर ऊपर उठाता है। और जो लोग बुरी साज़िशें रचते हैं (जैसे कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हत्या करने का प्रयास) उनके लिए कठोर यातना है और इन काफ़िरों की साज़िश विफल होकर रहेगी और उन्हें कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा।

35:11Page 435

وَٱللَّهُ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٖ ثُمَّ مِن نُّطۡفَةٖ ثُمَّ جَعَلَكُمۡ أَزۡوَٰجٗاۚ وَمَا تَحۡمِلُ مِنۡ أُنثَىٰ وَلَا تَضَعُ إِلَّا بِعِلۡمِهِۦۚ وَمَا يُعَمَّرُ مِن مُّعَمَّرٖ وَلَا يُنقَصُ مِنۡ عُمُرِهِۦٓ إِلَّا فِي كِتَٰبٍۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٞ ١١

And Allāh created you from dust, then from a sperm-drop; then He made you mates. And no female conceives nor does she give birth except with His knowledge. And no aged person is granted [additional] life nor is his lifespan lessened but that it is in a register. Indeed, that for Allāh is easy.

अल्लाह ही है जिसने तुम्हारे पिता आदम को मिट्टी से पैदा किया, फिर उसने तुम्हें वीर्य से पैदा किया। फिर तुम्हें पुरुष एवं महिला बनाया, ताकि तुम आपस में विवाह करो। तथा जो भी महिला कोई गर्भ धारण करती है तथा वह अपने बच्चे को जन्म देती है, तो वह उस महिमावान के ज्ञान में होता है। उसमें से कोई भी चीज़ उससे लुप्त नहीं होती है। और उसकी सृष्टि में से किसी की आयु में जो भी वृद्धि या कमी की जाती है, तो वह 'लौहे महफ़ूज़' में अंकित है। निःसंदेह ये उल्लिखित चीज़ें (अर्थात् तुम्हें मिट्टी से पैदा करना और तुम्हें विभिन्न चरणों में पैदा करना तथा तुम्हारी आयु को 'लौहे महफ़ूज़' में लिखना) अल्लाह पर बहुत आसान है।

35:12Page 436

وَمَا يَسۡتَوِي ٱلۡبَحۡرَانِ هَٰذَا عَذۡبٞ فُرَاتٞ سَآئِغٞ شَرَابُهُۥ وَهَٰذَا مِلۡحٌ أُجَاجٞۖ وَمِن كُلّٖ تَأۡكُلُونَ لَحۡمٗا طَرِيّٗا وَتَسۡتَخۡرِجُونَ حِلۡيَةٗ تَلۡبَسُونَهَاۖ وَتَرَى ٱلۡفُلۡكَ فِيهِ مَوَاخِرَ لِتَبۡتَغُواْ مِن فَضۡلِهِۦ وَلَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ١٢

And not alike are the two seas [i.e., bodies of water]. One is fresh and sweet, palatable for drinking, and one is salty and bitter. And from each you eat tender meat and extract ornaments which you wear, and you see the ships plowing through [them] that you might seek of His bounty; and perhaps you will be grateful.

और दोनों सागर समान नहीं हो सकते। उनमें से एक बहुत मीठा है और मीठा होने के कारण उसका पानी पीने में रुचिकर है। जबकि दूसरा कड़वा और खारा है, जिसे उसके सख्त खारेपन के कारण पीना संभव नहीं है। उन दोनों सागरों से तुम ताज़ा माँस अर्थात मछली खाते हो तथा उनसे मोती और मूंगे निकालते हो, जिन्हें तुम अलंकरण के रूप में पहनते हो। और (ऐ देखने वाला) तू नावों को देखता है कि वे आती-जाती हुई सागर को चीरती हुई चलती हैं, ताकि तुम व्यापार करके अल्लाह का अनुग्रह तलाश करो और ताकि तुम अल्लाह की दी हुई अपार नेमतों पर, उसका शुक्रिया अदा करो।

35:13Page 436

يُولِجُ ٱلَّيۡلَ فِي ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِي ٱلَّيۡلِ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ كُلّٞ يَجۡرِي لِأَجَلٖ مُّسَمّٗىۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡ لَهُ ٱلۡمُلۡكُۚ وَٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ مَا يَمۡلِكُونَ مِن قِطۡمِيرٍ ١٣

He causes the night to enter the day, and He causes the day to enter the night and has subjected the sun and the moon - each running [its course] for a specified term. That is Allāh, your Lord; to Him belongs sovereignty. And those whom you invoke other than Him do not possess [as much as] the membrane of a date seed.

अल्लाह रात को दिन में दाखिल करके दिन को लंबा कर देता है और दिन को रात में दाखिल करके रात को लंबाई में बढ़ा देता है। और अल्लाह ने सूर्य एवं चाँद को उनके काम में लगा रखा है। उनमें से प्रत्येक एक निर्धारित समय के लिए चल रहा है, जिसे अल्लाह जानता है और वह क़ियामत का दिन है। ये सब चीज़ें जो निर्धारित करता और चलाता है, वह तुम्हारा पालनहार अल्लाह है; केवल उसी के लिए राज्य (बादशाही) है। जबकि तुम उसके सिवाय जिन मूर्तियों की पूजा करते हो, वे खजूर की गुठली के ऊपर पाए जाने वाले पतले छिलके के बराबर भी अधिकार नहीं रखती हैं। तो फिर तुम मुझे छोड़कर उनहें कैसे पूजते हो?!

35:14Page 436

إِن تَدۡعُوهُمۡ لَا يَسۡمَعُواْ دُعَآءَكُمۡ وَلَوۡ سَمِعُواْ مَا ٱسۡتَجَابُواْ لَكُمۡۖ وَيَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ يَكۡفُرُونَ بِشِرۡكِكُمۡۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثۡلُ خَبِيرٖ ١٤

If you invoke them, they do not hear your supplication; and if they heard, they would not respond to you. And on the Day of Resurrection they will deny your association.1 And none can inform you like [one] Aware [of all matters].

यदि तुम अपने पूज्यों को पुकारो, तो वे तुम्हारी पुकार नहीं सुनेंगे। क्योंकि वे निर्जीव वस्तुएँ हैं, जिनमें न जीवन है और न सुनने की शक्ति। और यदि (मान लिया जाए कि) वे तुम्हारी पुकार सुन ही लें, तो वे तुम्हारी पुकार का जवाब नहीं दे सकते। और क़ियामत के दिन वे तुम्हारे शिर्क एवं उपासना से पल्ला झाड़ लेंगे। अतः (ऐ रसूल!) आपको अल्लाह से अधिक सच्ची सूचना कोई नहीं दे सकता।

35:15Page 436

۞ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ أَنتُمُ ٱلۡفُقَرَآءُ إِلَى ٱللَّهِۖ وَٱللَّهُ هُوَ ٱلۡغَنِيُّ ٱلۡحَمِيدُ ١٥

O mankind, you are those in need of Allāh, while Allāh is the Free of need, the Praiseworthy.

ऐ लोगो! तुम अपने सभी मामलों में और सभी स्थितियों में अल्लाह के ज़रूरतमंद हो। और अल्लाह बेनियाज़ है। उसे किसी भी चीज़ में तुम्हारी आवश्यकता नहीं है। वह अपने बंदो के लिए जो निर्णय लेता है, उसपर वह दुनिया एवं आखिरत में प्रशंसित है।

35:16Page 436

إِن يَشَأۡ يُذۡهِبۡكُمۡ وَيَأۡتِ بِخَلۡقٖ جَدِيدٖ ١٦

If He wills, He can do away with you and bring forth a new creation.

यदि वह सर्वशक्तिमान तुम्हारा विनाशकर तुम्हें हटाना चाहे, तो वह तुम्हें हटा दे और तुम्हारे स्थान पर एक नई मख़लूक़ ले आए, जो केवल उसी की इबादत करने वाली हो, उसके साथ किसी भी चीज़ को साझी न ठहराने वाली हो।

35:17Page 436

وَمَا ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ بِعَزِيزٖ ١٧

And that is for Allāh not difficult.

और तुम्हारा विनाशकर तुम्हें हटाना और तुम्हारे स्थान पर दूसरी मख़लूक़ लाना, सर्वशक्तिमान अल्लाह के लिए असंभव नहीं है।

35:18Page 436

وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزۡرَ أُخۡرَىٰۚ وَإِن تَدۡعُ مُثۡقَلَةٌ إِلَىٰ حِمۡلِهَا لَا يُحۡمَلۡ مِنۡهُ شَيۡءٞ وَلَوۡ كَانَ ذَا قُرۡبَىٰٓۗ إِنَّمَا تُنذِرُ ٱلَّذِينَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُم بِٱلۡغَيۡبِ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَۚ وَمَن تَزَكَّىٰ فَإِنَّمَا يَتَزَكَّىٰ لِنَفۡسِهِۦۚ وَإِلَى ٱللَّهِ ٱلۡمَصِيرُ ١٨

And no bearer of burdens will bear the burden of another. And if a heavily laden soul calls [another] to [carry some of] its load, nothing of it will be carried, even if he should be a close relative. You can only warn those who fear their Lord unseen and have established prayer. And whoever purifies himself only purifies himself for [the benefit of] his soul. And to Allāh is the [final] destination.

कोई पापी व्यक्ति, दूसरे पापी के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। बल्कि हर पापी व्यक्ति को अपने गुनाह का बोझ खुद उठाना पड़ेगा। और यदि कोई अपने पापों के बोझ को उठाने से बोझिल व्यक्ति किसी और को अपने कुछ पापों को वहन करने के लिए पुकारेगा, तो कोई भी उसका बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं होगा, भले ही वह आमंत्रित व्यक्ति उसका कोई रिश्तेदार हो। आप तो (ऐ रसूल) केवल उन लोगों को अल्लाह की यातना से डराने वाले हैं, जो बिन देखे अपने पालनहार से डरते हैं और पूर्ण रूप से नमाज़ अदा करते हैं। क्योंकि यही लोग आपके डराने से लाभान्वित होते हैं। और जो व्यक्ति खुद को पापों से शुद्ध करता है - जिसमें से सबसे बड़ा बहुदेववाद है - तो वह अपने लिए ही शुद्धता अपनाता है। क्योंकि उसका लाभ उसी को मिलने वाला है। क्योंकि अल्लाह उसकी आज्ञाकारिता से बेनियाज़ है। और क़ियामत के दिन (सब को) हिसाब और बदले के लिए अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है।

35:19Page 437

وَمَا يَسۡتَوِي ٱلۡأَعۡمَىٰ وَٱلۡبَصِيرُ ١٩

Not equal are the blind and the seeing,

काफ़िर और मोमिन स्थान में समान नहीं हैं, जैसे अंधा और देखने वाला समान नहीं हैं।

35:20Page 437

وَلَا ٱلظُّلُمَٰتُ وَلَا ٱلنُّورُ ٢٠

Nor are the darknesses and the light,

तथा कुफ़्र और ईमान समान नहीं हो सकते, जैसे अंधकार और प्रकाश समान नहीं हैं।

35:21Page 437

وَلَا ٱلظِّلُّ وَلَا ٱلۡحَرُورُ ٢١

Nor are the shade and the heat,1

तथा जन्नत और जहन्नम अपने प्रभावों में समान नहीं हो सकते, जैसे छाया तथा गर्म हवा समान नहीं हैं।

35:22Page 437

وَمَا يَسۡتَوِي ٱلۡأَحۡيَآءُ وَلَا ٱلۡأَمۡوَٰتُۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُسۡمِعُ مَن يَشَآءُۖ وَمَآ أَنتَ بِمُسۡمِعٖ مَّن فِي ٱلۡقُبُورِ ٢٢

And not equal are the living and the dead. Indeed, Allāh causes to hear whom He wills, but you cannot make hear those in the graves.1

ईमान वाले तथा काफ़िर समान नहीं हो सकते, जैसे जीवित तथा मृत समान नहीं हो सकते। निःसंदेह अल्लाह जिसे सीधा रास्ता दिखाना चाहता है, उसे सुना देता है। और आप (ऐ रसूल) उन काफिरों को नहीं सुना सकते, जो क़ब्रों में पड़े मुर्दों की तरह हैं।

35:23Page 437

إِنۡ أَنتَ إِلَّا نَذِيرٌ ٢٣

You, [O Muḥammad], are not but a warner.

आप तो केवल उन्हें अल्लाह की यातना से डराने वाले हैं।

35:24Page 437

إِنَّآ أَرۡسَلۡنَٰكَ بِٱلۡحَقِّ بَشِيرٗا وَنَذِيرٗاۚ وَإِن مِّنۡ أُمَّةٍ إِلَّا خَلَا فِيهَا نَذِيرٞ ٢٤

Indeed, We have sent you with the truth as a bringer of good tidings and a warner. And there was no nation but that there had passed within it a warner.

निःसंदेह हमने आपको (ऐ रसूल!) उस सत्य के साथ भेजा है, जिसमें कोई संदेह नहीं। आप ईमान वालों को उस अच्छे बदले की शुभ सूचना देने वाले हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार कर रखा है, तथा काफ़िरों को उस दर्दनाक यातना से डराने वाले हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार कर रखी है। तथा पिछले समुदायों में से प्रत्येक समुदाय में अल्लाह की ओर से एक रसूल गुज़रा है, जो उन्हें उसकी यातना से डराता था।

35:25Page 437

وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدۡ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ جَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَبِٱلزُّبُرِ وَبِٱلۡكِتَٰبِ ٱلۡمُنِيرِ ٢٥

And if they deny you - then already have those before them denied. Their messengers came to them with clear proofs and written ordinances and with the enlightening Scripture.

और यदि (ऐ रसूल!) आपकी जाति के लोग आपको झुठलाते हैं, तो आप धैर्य से काम लें। क्योंकि आप पहले रसूल नहीं हैं, जिसे उसकी जाति के लोगों ने झुठलाया है। इनसे पूर्व समुदायों ने भी अपने रसूलों को झुठलाया था, जैसे आद, समूद और लूत अलैहिस्सलाम की जाति। उनके रसूल उनके पास अल्लाह की ओर से स्पष्ट प्रमाण लेकर आए थे, जो उनके सच्चे रसूल होने को इंगित करते थे। तथा उनके रसूल उनके पास ग्रंथों और ज्योतिमान करने वाली पुस्तक भी लेकर आए थे, उसके लिए जो उसपर चिंतन और मनन करने वाला हो।

35:26Page 437

ثُمَّ أَخَذۡتُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۖ فَكَيۡفَ كَانَ نَكِيرِ ٢٦

Then I seized the ones who disbelieved, and how [terrible] was My reproach.

इसके बावजूद उन्होंने अल्लाह और उसके रसूलों का इनकार किया और वे अल्लाह के पास से जो कुछ लेकर आए थे, उसमें उनपर विश्वास नहीं किया। परिणामस्वरूप, मैंने कुफ़्र करने वालों को विनष्ट कर दिया। अतः (ऐ रसूल) आप सोचें कि मैंने उनकी किस तरह पकड़ की, कि उन्हें विनष्ट कर दिया।

35:27Page 437

أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجۡنَا بِهِۦ ثَمَرَٰتٖ مُّخۡتَلِفًا أَلۡوَٰنُهَاۚ وَمِنَ ٱلۡجِبَالِ جُدَدُۢ بِيضٞ وَحُمۡرٞ مُّخۡتَلِفٌ أَلۡوَٰنُهَا وَغَرَابِيبُ سُودٞ ٢٧

Do you not see that Allāh sends down rain from the sky, and We produce thereby fruits of varying colors? And in the mountains are tracts, white and red of varying shades and [some] extremely black.

क्या (ऐ रसूल) आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से बारिश का पानी बरसाया। फिर हमने उस पानी से पेड़ों को सींचकर विभिन्न रंगों के फल पैदा किए, जिनमें लाल, हरे, पीले और अन्य रंगों के फल हैं। और पहाड़ों में सफेद रास्ते, लाल रास्ते और गहरे काले रास्ते (और धारियाँ) हैं।

35:28Page 437

وَمِنَ ٱلنَّاسِ وَٱلدَّوَآبِّ وَٱلۡأَنۡعَٰمِ مُخۡتَلِفٌ أَلۡوَٰنُهُۥ كَذَٰلِكَۗ إِنَّمَا يَخۡشَى ٱللَّهَ مِنۡ عِبَادِهِ ٱلۡعُلَمَٰٓؤُاْۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ غَفُورٌ ٢٨

And among people and moving creatures and grazing livestock are various colors similarly. Only those fear Allāh, from among His servants, who have knowledge. Indeed, Allāh is Exalted in Might and Forgiving.

उपर्युक्त चीज़ों की तरह मनुष्यों, जानवरों तथा मवेशियों (ऊँट, गाय, भेड़-बकरी) में से भी ऐसे हैं जिनके रंग अलग-अलग होते हैं। वास्तव में सर्वशक्तिमान अल्लाह के वैभव का सम्मान करने वाले और उससे डरने वाले वही लोग हैं, जो उस सर्वशक्तिमान का ज्ञान रखने वाले हैं; क्योंकि वे उसके गुणों, उसकी शरीयत और उसकी शक्ति के प्रमाणों को जानते हैं। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता, तथा अपने तौबा करने वाले बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है।

35:29Page 437

إِنَّ ٱلَّذِينَ يَتۡلُونَ كِتَٰبَ ٱللَّهِ وَأَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَأَنفَقُواْ مِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ سِرّٗا وَعَلَانِيَةٗ يَرۡجُونَ تِجَٰرَةٗ لَّن تَبُورَ ٢٩

Indeed, those who recite the Book of Allāh and establish prayer and spend [in His cause] out of what We have provided them, secretly and publicly, [can] expect a transaction [i.e., profit] that will never perish -

निःसंदेह जो लोग अल्लाह की उस पुस्तक का पाठ करते हैं, जिसे हमने अपने रसूल पर उतारा है और उसकी शिक्षाओं का पालन करते हैं, और नमाज़ को सर्वोत्तम तरीक़े से पूरा करते हैं, तथा हमने उन्हें जो कुछ प्रदान किया है, उसमें से ज़कात के रूप में एवं अन्य तरीकों से छिपे और खुले खर्च करते हैं, वे इन कार्यों से अल्लाह के निकट ऐसे व्यापार की आशा रखते हैं, जिसमें कभी घाटा नहीं होगा।

35:30Page 437

لِيُوَفِّيَهُمۡ أُجُورَهُمۡ وَيَزِيدَهُم مِّن فَضۡلِهِۦٓۚ إِنَّهُۥ غَفُورٞ شَكُورٞ ٣٠

That He may give them in full their rewards and increase for them of His bounty. Indeed, He is Forgiving and Appreciative.1

ताकि अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूर्ण प्रतिफल प्रदान करे, तथा अपनी कृपा से उन्हें अधिक प्रदान करे; क्योंकि वह इसका योग्य है। निःसंदेह अल्लाह इन गुणों से सुसज्जित बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला और उनके अच्छे कर्मों का क़द्रदान (गुणग्राही) है।

35:31Page 438

وَٱلَّذِيٓ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ مِنَ ٱلۡكِتَٰبِ هُوَ ٱلۡحَقُّ مُصَدِّقٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِۗ إِنَّ ٱللَّهَ بِعِبَادِهِۦ لَخَبِيرُۢ بَصِيرٞ ٣١

And that which We have revealed to you, [O Muḥammad], of the Book is the truth, confirming what was before it. Indeed Allāh, of His servants, is Aware and Seeing.

और हमने जो पुस्तक (ऐ रसूल) आपकी ओर उतारी है, वही सत्य है जो संदेह से परे है। जिसे अल्लाह ने पिछली पुस्तकों की सत्यता प्रकट करने के लिए उतारी है। निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों को भली-भाँति जानने और देखने वाला है। अतः वह हर समुदाय के रसूल की ओर उस चीज़ की प्रकाशना (वह़्य) करता है, जिसकी उसे अपने समय में आवश्यकता होती है।

35:32Page 438

ثُمَّ أَوۡرَثۡنَا ٱلۡكِتَٰبَ ٱلَّذِينَ ٱصۡطَفَيۡنَا مِنۡ عِبَادِنَاۖ فَمِنۡهُمۡ ظَالِمٞ لِّنَفۡسِهِۦ وَمِنۡهُم مُّقۡتَصِدٞ وَمِنۡهُمۡ سَابِقُۢ بِٱلۡخَيۡرَٰتِ بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَضۡلُ ٱلۡكَبِيرُ ٣٢

Then We caused to inherit the Book those We have chosen of Our servants;1 and among them is he who wrongs himself [i.e., sins], and among them is he who is moderate, and among them is he who is foremost in good deeds by permission of Allāh. That [inheritance] is what is the great bounty.

फिर हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत को, जिसे हमने दूसरी उम्मतों पर चुन लिया है, क़ुरआन प्रदान किया। चुनाँचे उनमें से कुछ लोग निषिद्ध कार्यों को करके और कर्तव्यों को छोड़कर खुद पर अत्याचार करने वाले हैं। तथा उनमें से कुछ लोग बीच का रास्ता अपनाने वाले हैं अर्थात् जो कर्तव्यों को करते और निषिद्ध चीजों को त्यागते हैं, लेकिन साथ ही कुछ वांछनीय चीजों को छोड़ देते हैं और कुछ नापसंद (मकरूह) चीज़ों को कर डालते हैं। जबकि उनमें से कुछ लोग अल्लाह की अनुमति से नेकी के कामों में पहल करने वाले हैं, इस प्रकार कि वे कर्तव्यों और वांछनीय कामों को करते हैं और निषिद्ध तथा नापसंद चीज़ों को त्याग कर देते हैं। यह जिसका उल्लेख किया गया है - अर्थात इस उम्मत को चुनना और इसे क़ुरआन प्रदान करना - ही वह महान अनुग्रह है, जिसकी तुलना किसी अन्य अनुग्रह के साथ नहीं की जा सकती।

35:33Page 438

جَنَّٰتُ عَدۡنٖ يَدۡخُلُونَهَا يُحَلَّوۡنَ فِيهَا مِنۡ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٖ وَلُؤۡلُؤٗاۖ وَلِبَاسُهُمۡ فِيهَا حَرِيرٞ ٣٣

[For them are] gardens of perpetual residence which they will enter. They will be adorned therein with bracelets of gold and pearls, and their garments therein will be silk.

सदा रहने के बाग़ हैं, जिनमें ये चुने हुए लोग प्रवेश करेंगे। जिनमें वे मोती तथा सोने के कंगन पहनेंगे और उनमें उनके वस्त्र रेशम के होंगे।

35:34Page 438

وَقَالُواْ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِيٓ أَذۡهَبَ عَنَّا ٱلۡحَزَنَۖ إِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٞ شَكُورٌ ٣٤

And they will say, "Praise to Allāh, who has removed from us [all] sorrow. Indeed, our Lord is Forgiving and Appreciative -

वे जन्नत में प्रवेश करने के बाद कहेंगे : सारी प्रशंसा उस अल्लाह के लिए है, जिसने हमसे उस ग़म को दूर कर दिया जो हमें जहन्नम में जाने के डर के कारण होता था। निःसंदेह हमारा पालनहार अपने तौबा करने वाले बंदों के पापों को क्षमा करने वाला तथा उनकी आज्ञाकारिता पर उनका गुणग्राही है।

35:35Page 438

ٱلَّذِيٓ أَحَلَّنَا دَارَ ٱلۡمُقَامَةِ مِن فَضۡلِهِۦ لَا يَمَسُّنَا فِيهَا نَصَبٞ وَلَا يَمَسُّنَا فِيهَا لُغُوبٞ ٣٥

He who has settled us in the home of duration [i.e., Paradise] out of His bounty. There touches us not in it any fatigue, and there touches us not in it weariness [of mind]."

जिसने हमें सदैव रहने के स्थान में - जिसके बाद कोई स्थानान्तरण नहीं है - मात्र अपनी कृपा से उतारा, हमारी ताकत या शक्ति से नहीं। यहाँ हमें कोई थकान या परेशानी नहीं होती है।

35:36Page 438

وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَهُمۡ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقۡضَىٰ عَلَيۡهِمۡ فَيَمُوتُواْ وَلَا يُخَفَّفُ عَنۡهُم مِّنۡ عَذَابِهَاۚ كَذَٰلِكَ نَجۡزِي كُلَّ كَفُورٖ ٣٦

And for those who disbelieve will be the fire of Hell. [Death] is not decreed for them1 so they may die, nor will its torment be lightened for them. Thus do We recompense every ungrateful one.

और जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, उनके लिए जहन्नम की आग है, जिसमें वे हमेशा रहेंगे। न उनपर मृत्यु का फैसला किया जाएगा कि वे मर जाएँ और यातना से आराम पा जाएँ, और न उनसे जहन्नम का अज़ाब ही कुछ हल्का किया जाएगा। इस प्रकार का बदला हम क़ियामत के दिन हर उस व्यक्ति को देंगे, जो अपने पालनहार की नेमतों का इनकार करने वाला है।

35:37Page 438

وَهُمۡ يَصۡطَرِخُونَ فِيهَا رَبَّنَآ أَخۡرِجۡنَا نَعۡمَلۡ صَٰلِحًا غَيۡرَ ٱلَّذِي كُنَّا نَعۡمَلُۚ أَوَلَمۡ نُعَمِّرۡكُم مَّا يَتَذَكَّرُ فِيهِ مَن تَذَكَّرَ وَجَآءَكُمُ ٱلنَّذِيرُۖ فَذُوقُواْ فَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِن نَّصِيرٍ ٣٧

And they will cry out therein, "Our Lord, remove us;1 we will do righteousness - other than what we were doing!" But did We not grant you life enough for whoever would remember therein to remember, and the warner had come to you? So taste [the punishment], for there is not for the wrongdoers any helper.

वे उसमें ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाएँगे और फ़रियाद करते हुए कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमें इस आग से निकाल ले, हम दुनिया में जो कुछ किया करते थे, उसके विपरीत अच्छे कार्य करेंगे, ताकि तेरी प्रसन्नता प्राप्त कर सकें और तेरी यातना से बच सकें। इसपर अल्लाह उन्हें उत्तर देगा : क्या हमने तुम्हें इतनी आयु नहीं दी, जिसमें शिक्षा ग्रहण करने वाला चाहता, तो शिक्षा ग्रहण कर लेता। चुनाँचे वह अल्लाह से तौबा करता और अच्छे कार्य करता। तथा तुम्हारे पास तुम्हें अल्लाह की यातना से सचेत करने वाला रसूल भी आया था?! इसलिए इन सब के बाद तुम्हारे लिए कोई तर्क और बहाना नहीं है। अतः तुम आग की सज़ा चखो। क्योंकि कुफ़्र तथा पापों के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार करने वालों का कोई सहायक नहींं है, जो उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सके या उनके लिए उसमें कुछ कमी कर सके।

35:38Page 438

إِنَّ ٱللَّهَ عَٰلِمُ غَيۡبِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٣٨

Indeed, Allāh is Knower of the unseen [aspects] of the heavens and earth. Indeed, He is Knowing of that within the breasts.

निःसंदेह अल्लाह आकाशों तथा धरती के परोक्ष अर्थात लोगों की दृष्टि से ओझल और छिपी हुई चीज़ों को जानने वाला है। उसमें से कोई भी चीज़ उससे छूटती नहीं है। निःसंदेह वह उसे भी जानता है जो उसके बंदे अपने सीनों में अच्छी और बुरी बातें छिपाए होते हैं।

35:39Page 439

هُوَ ٱلَّذِي جَعَلَكُمۡ خَلَٰٓئِفَ فِي ٱلۡأَرۡضِۚ فَمَن كَفَرَ فَعَلَيۡهِ كُفۡرُهُۥۖ وَلَا يَزِيدُ ٱلۡكَٰفِرِينَ كُفۡرُهُمۡ عِندَ رَبِّهِمۡ إِلَّا مَقۡتٗاۖ وَلَا يَزِيدُ ٱلۡكَٰفِرِينَ كُفۡرُهُمۡ إِلَّا خَسَارٗا ٣٩

It is He who has made you successors upon the earth. And whoever disbelieves - upon him will be [the consequence of] his disbelief. And the disbelief of the disbelievers does not increase them in the sight of their Lord except in hatred; and the disbelief of the disbelievers does not increase them except in loss.

वही (अल्लाह) है जिसने तुम्हें (ऐ लोगो) धरती पर एक-दूसरे का उत्तराधिकारी बनाया है, ताकि वह तुम्हारा परीक्षण करे कि तुम कैसे कार्य करते हो। फिर जिसने अल्लाह के साथ और रसूलों के लाए हुए संदेश के साथ कुफ़्र किया, तो उसके कुफ़्र का पाप और उसकी सज़ा उसी को भुगतनी होगी। उसके कुफ़्र से उसके पालनहार को कोई हानि नहीं पहुँचेगी। और काफिरों को उनका कुफ़्र उनके पालनहार के निकट सख्त घृणा और नाराज़गी ही में बढ़ाएगा। तथा काफिरों को उनका कुफ़्र उनके घाटे ही में वृद्धि करेगा। क्योंकि उनके ईमान लाने की स्थिति में अल्लाह ने उनके लिए जो कुछ जन्नत में तैयार किया था, उसे वे खो देंगे।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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