Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
المائدة
Al-Ma'idah
The Table Spread · Medinan · 120 ayahs
5:1Page 106
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَوۡفُواْ بِٱلۡعُقُودِۚ أُحِلَّتۡ لَكُم بَهِيمَةُ ٱلۡأَنۡعَٰمِ إِلَّا مَا يُتۡلَىٰ عَلَيۡكُمۡ غَيۡرَ مُحِلِّي ٱلصَّيۡدِ وَأَنتُمۡ حُرُمٌۗ إِنَّ ٱللَّهَ يَحۡكُمُ مَا يُرِيدُ ١
O you who have believed, fulfill [all] contracts.1 Lawful for you are the animals of grazing livestock except for that which is recited to you [in this Qur’ān] - hunting not being permitted while you are in the state of iḥrām.2 Indeed, Allāh ordains what He intends.
ऐ ईमान वालो! तुम उन सभी वचनों एवं प्रतिज्ञाओं को पूरा करो, जो तुमने अपने और अपने स्रष्टा के बीच तथा अपने और उसकी रचना के बीच किए हैं। अल्लाह ने तुमपर दया करते हुए तुम्हारे लिए पशुधन : (ऊँट, गाय तथा बकरी) को हलाल किया है, सिवाय उन जानवरों के जिनका हराम होना तुम्हें पढ़कर सुनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त हज्ज या उम्रा का एहराम बाँधे होने की स्थिति में तुमपर जंगली जानवरों का शिकार करना भी हराम है। अल्लाह अपनी हिकमत के अनुसार जो चाहता है हलाल या हराम होने का फैसला करता है। क्योंकि उसे कोई बाध्य करने वाला नहीं और न ही कोई उसके हुक्म पर आपत्ति कर सकता है।
5:2Page 106
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُحِلُّواْ شَعَٰٓئِرَ ٱللَّهِ وَلَا ٱلشَّهۡرَ ٱلۡحَرَامَ وَلَا ٱلۡهَدۡيَ وَلَا ٱلۡقَلَٰٓئِدَ وَلَآ ءَآمِّينَ ٱلۡبَيۡتَ ٱلۡحَرَامَ يَبۡتَغُونَ فَضۡلٗا مِّن رَّبِّهِمۡ وَرِضۡوَٰنٗاۚ وَإِذَا حَلَلۡتُمۡ فَٱصۡطَادُواْۚ وَلَا يَجۡرِمَنَّكُمۡ شَنَـَٔانُ قَوۡمٍ أَن صَدُّوكُمۡ عَنِ ٱلۡمَسۡجِدِ ٱلۡحَرَامِ أَن تَعۡتَدُواْۘ وَتَعَاوَنُواْ عَلَى ٱلۡبِرِّ وَٱلتَّقۡوَىٰۖ وَلَا تَعَاوَنُواْ عَلَى ٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَٰنِۚ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۖ إِنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ ٢
O you who have believed, do not violate the rites of Allāh or [the sanctity of] the sacred month or [neglect the marking of] the sacrificial animals and garlanding [them] or [violate the safety of] those coming to the Sacred House seeking bounty from their Lord and [His] approval. But when you come out of iḥrām, then [you may] hunt. And do not let the hatred of a people for having obstructed you from al-Masjid al-Ḥarām lead you to transgress. And cooperate in righteousness and piety, but do not cooperate in sin and aggression. And fear Allāh; indeed, Allāh is severe in penalty.
ऐ ईमान वालो! अल्लाह की उन हुर्मत वाली (सम्मानित) चीज़ों का अनादर न करो, जिनके सम्मान का उसने तुम्हें आदेश दिया है, तथा एहराम की अवस्था में निषिद्ध चीज़ों : जैसे सिले हुए कपड़े पहनने, तथा 'हरम' (की सीमा) के अंदर निषिद्ध चीज़ों, जैसे कि शिकार करने से दूर रहो। तथा सम्मानित महीनों अर्थात् ज़ुल-क़ादा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब में युद्ध को वैध न ठहराओ। जिन जानवरों को अल्लाह के नाम पर ज़बह करने के लिए हरम भेजा जाता है, उन्हें हथियाकर या उन्हें काबा जाने से रोककर उनका अनादर न करो। उन जानवरों का भी अपमान न करो, जिनके गले पर ऊन आदि के पट्टे डाले गए हों, ताकि पता चल जाए कि वे (हज्ज की) क़ुर्बानी के जानवर हैं। तथा उन लोगों का भी अनादर न करो, जो व्यापार के लाभ और अल्लाह की प्रसन्नता की तलाश में अल्लाह के सम्मानित घर की ओर जाते हैं। और जब तुम ह़ज्ज या उम्रा के एहराम से हलाल हो जाओ और हरम की सीमा से बाहर निकल जाओ, तो यदि चाहो तो शिकार करो। तथा जिन लोगों ने तुम्हें मस्जिदे-ह़राम से रोका है, उनसे दुश्मनी तुम्हें अत्याचार करने और उनके साथ न्याय करना छोड़ देने पर न उभारे। तथा (ऐ मोमिनो!) अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसके निषेधों से बचने में एक-दूसरे का सहयोग करो। और उन पापों में जिनका करने वाला गुनहगार होता है, तथा लोगों पर उनके खून, धन और सतीत्व के संबंध में ज़्यादती (आक्रमण) करने में सहयोग न करो। तथा अल्लाह की आज्ञाकारिता पर अडिग रहकर और उसकी अवज्ञा से दूर रहकर, उससे डरो। निःसंदेह अल्लाह उसे कठोर दंड देने वाला है जो उसकी अवज्ञा करने वाला है। इसलिए उसकी सज़ा से सावधान रहो।
5:3Page 107
حُرِّمَتۡ عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَيۡتَةُ وَٱلدَّمُ وَلَحۡمُ ٱلۡخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيۡرِ ٱللَّهِ بِهِۦ وَٱلۡمُنۡخَنِقَةُ وَٱلۡمَوۡقُوذَةُ وَٱلۡمُتَرَدِّيَةُ وَٱلنَّطِيحَةُ وَمَآ أَكَلَ ٱلسَّبُعُ إِلَّا مَا ذَكَّيۡتُمۡ وَمَا ذُبِحَ عَلَى ٱلنُّصُبِ وَأَن تَسۡتَقۡسِمُواْ بِٱلۡأَزۡلَٰمِۚ ذَٰلِكُمۡ فِسۡقٌۗ ٱلۡيَوۡمَ يَئِسَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن دِينِكُمۡ فَلَا تَخۡشَوۡهُمۡ وَٱخۡشَوۡنِۚ ٱلۡيَوۡمَ أَكۡمَلۡتُ لَكُمۡ دِينَكُمۡ وَأَتۡمَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ نِعۡمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمُ ٱلۡإِسۡلَٰمَ دِينٗاۚ فَمَنِ ٱضۡطُرَّ فِي مَخۡمَصَةٍ غَيۡرَ مُتَجَانِفٖ لِّإِثۡمٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٣
Prohibited to you are dead animals,1 blood, the flesh of swine, and that which has been dedicated to other than Allāh, and [those animals] killed by strangling or by a violent blow or by a head-long fall or by the goring of horns, and those from which a wild animal has eaten, except what you [are able to] slaughter [before its death], and those which are sacrificed on stone altars,2 and [prohibited is] that you seek decision through divining arrows. That is grave disobedience. This day those who disbelieve have despaired of [defeating] your religion; so fear them not, but fear Me. This day I have perfected for you your religion and completed My favor upon you and have approved for you Islām as religion. But whoever is forced by severe hunger with no inclination to sin - then indeed, Allāh is Forgiving and Merciful.
अल्लाह ने तुमपर वह जानवर हराम किया है, जो शरई तरीक़े से ज़बह किए बिना मर गया हो। तथा उसने तुमपर हराम किया है बहता हुआ रक्त, सूअर का माँस, वह जानवर जिसपर ज़बह करते समय अल्लाह के नाम के अलावा किसी और का नाम पुकारा जाए, तथा गला घुटने से मरा हुआ, चोट लगने से मरा हुआ, ऊँचे स्थान से गिरकर मरा हुआ, या दूसरे जानवर के सींग मारने के कारण मरा हुआ, तथा वह जानवर जिसे शेर, चीते और भेड़िये जैसे किसी हिंसक पशु (दरिंदे) ने फाड़ खाया हो। परंतु उक्त जानवरों में से जो तुम्हें जीवित मिले और तुम उसे ज़बह कर लो, तो वह तुम्हारे लिए हलाल है। तथा उसने तुमपर वह जानवर भी हराम किया है जो मूर्तियों के लिए ज़बह किया गया हो। तथा उसने तुमपर तीरों के द्वारा अपना भाग्य मालूम करना भी हराम किया है। ये दरअसल पत्थर या तीर होते थे, जिनमें (करो) या (मत करो) लिखा होता था, चुनाँचे भाग्य मालूम करने वाला उसी के अनुसार कार्य करता था, जो उसके लिए उससे निकलता था। उल्लिखित वर्जनाओं को करना अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर निकलना है। आज काफ़िर लोग इस्लाम धर्म की शक्ति को देखकर, तुम्हारे इस्लाम धर्म को त्याग देने से निराश हो गए। इसलिए उनसे मत डरो, अकेले मुझसे डरो। आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म इस्लाम को परिपूर्ण कर दिया, तथा तुमपर अपनी खुली तथा छिपी नेमत पूरी कर दी और तुम्हारे लिए इस्लाम को धर्म के रूप में चुन लिया। इसलिए मैं उसके सिवा कोई और धर्म स्वीकार नहीं करुँगा। अतः जो व्यक्ति सख़्त भूख के कारण मरे हुए जानवर का माँस खाने पर मजबूर कर दिया जाए जबकि उसका झुकाव पाप की ओर न हो, तो उसपर इसमें कोई पाप नहीं। निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।
5:4Page 107
يَسۡـَٔلُونَكَ مَاذَآ أُحِلَّ لَهُمۡۖ قُلۡ أُحِلَّ لَكُمُ ٱلطَّيِّبَٰتُ وَمَا عَلَّمۡتُم مِّنَ ٱلۡجَوَارِحِ مُكَلِّبِينَ تُعَلِّمُونَهُنَّ مِمَّا عَلَّمَكُمُ ٱللَّهُۖ فَكُلُواْ مِمَّآ أَمۡسَكۡنَ عَلَيۡكُمۡ وَٱذۡكُرُواْ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَيۡهِۖ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ ٤
They ask you, [O Muḥammad], what has been made lawful for them. Say, "Lawful for you are [all] good foods and [game caught by] what you have trained of hunting animals1 which you train as Allāh has taught you. So eat of what they catch for you, and mention the name of Allāh upon it, and fear Allāh." Indeed, Allāh is swift in account.
ऐ रसूल! आपके सहाबा आपसे पूछते हैं कि अल्लाह ने उनके लिए किन-किन चीज़ों का खाना हलाल किया है? (ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह ने तुम्हारे लिए अच्छी खाने की चीज़ें और उस शिकार को हलाल किया है, जिसे कुचली वाले जानवरों जैसे कुत्तों और तेंदुओं, तथा पंजे से शिकार करने वाले पक्षियों जैसे बाज़ों, में से प्रशिक्षित जानवरों ने पकड़ा है। तुम उन्हें उसमें से शिकार का ढंग सिखाते हो, जो अल्लाह ने तुम्हें उसके शिष्टाचार का ज्ञान प्रदान किया है। यहाँ तक कि वे इस तरह प्रशिक्षित हो जाएँ कि जब उन्हें आदेश दिया जाए, तो वे आदेश का पालन करें, तथा जब उन्हें रोका जाए, तो वे रुक जाएँ। फिर वे जो शिकार पकड़कर रोक रखें, भले ही वे उसे मार डालें, तो तुम उसे खाओ। तथा इन शिकारी जानवरों को छोड़ते समय अल्लाह का नाम लिया करो। तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर, डरते रहो। निःसंदेह अल्लाह कर्मों का बहुत शीघ्र हिसाब लेने वाला है।
5:5Page 107
ٱلۡيَوۡمَ أُحِلَّ لَكُمُ ٱلطَّيِّبَٰتُۖ وَطَعَامُ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ حِلّٞ لَّكُمۡ وَطَعَامُكُمۡ حِلّٞ لَّهُمۡۖ وَٱلۡمُحۡصَنَٰتُ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنَٰتِ وَٱلۡمُحۡصَنَٰتُ مِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِكُمۡ إِذَآ ءَاتَيۡتُمُوهُنَّ أُجُورَهُنَّ مُحۡصِنِينَ غَيۡرَ مُسَٰفِحِينَ وَلَا مُتَّخِذِيٓ أَخۡدَانٖۗ وَمَن يَكۡفُرۡ بِٱلۡإِيمَٰنِ فَقَدۡ حَبِطَ عَمَلُهُۥ وَهُوَ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٥
This day [all] good foods have been made lawful, and the food of those who were given the Scripture is lawful for you and your food is lawful for them. And [lawful in marriage are] chaste women from among the believers and chaste women from among those who were given the Scripture before you, when you have given them their due compensation,1 desiring chastity, not unlawful sexual intercourse or taking [secret] lovers. And whoever denies the faith - his work has become worthless, and he, in the Hereafter, will be among the losers.
आज अल्लाह ने तुम्हारे लिए अच्छी चीज़ों को खाना तथा अह्ले किताब यानी यहूदियों एवं ईसाइयों द्वारा ज़बह किए गए जानवरों को खाना हलाल कर दिया है। और तुम्हारे ज़बह किए हुए जानवर उनके लिए हलाल कर दिए गए हैं। तुम्हारे लिए ईमान वाली स्त्रियों में से पाक-दामन आज़ाद स्त्रियों तथा तुमसे पहले किताब दिए गए यहूदियों एवं ईसाइयों में से पाक-दामन आज़ाद स्त्रियों से शादी करना हलाल कर दिया गया है, जब तुम उन्हें उनके महर दे दो और तुम अनैतिक काम करने से परहेज़ करने वाले हो, उन्हें प्रेमिकाएँ बनाने वाले न हो कि तुम उनके साथ व्यभिचार करना चाहते हो। जो व्यक्ति उन विधानों का इनकार करे, जिन्हें अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निर्धारित किया है, तो निश्चय उसका कर्म, उसके क़बूल होने की शर्त अर्थात् ईमान न होने के कारण अमान्य (नष्ट) हो गया, तथा वह क़ियामत के दिन नुक़सान उठाने वाले लोगों में शामिल होगा, क्योंकि वह सदा-सर्वदा के लिए आग में प्रवेश करेगा।
5:6Page 108
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِذَا قُمۡتُمۡ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ فَٱغۡسِلُواْ وُجُوهَكُمۡ وَأَيۡدِيَكُمۡ إِلَى ٱلۡمَرَافِقِ وَٱمۡسَحُواْ بِرُءُوسِكُمۡ وَأَرۡجُلَكُمۡ إِلَى ٱلۡكَعۡبَيۡنِۚ وَإِن كُنتُمۡ جُنُبٗا فَٱطَّهَّرُواْۚ وَإِن كُنتُم مَّرۡضَىٰٓ أَوۡ عَلَىٰ سَفَرٍ أَوۡ جَآءَ أَحَدٞ مِّنكُم مِّنَ ٱلۡغَآئِطِ أَوۡ لَٰمَسۡتُمُ ٱلنِّسَآءَ فَلَمۡ تَجِدُواْ مَآءٗ فَتَيَمَّمُواْ صَعِيدٗا طَيِّبٗا فَٱمۡسَحُواْ بِوُجُوهِكُمۡ وَأَيۡدِيكُم مِّنۡهُۚ مَا يُرِيدُ ٱللَّهُ لِيَجۡعَلَ عَلَيۡكُم مِّنۡ حَرَجٖ وَلَٰكِن يُرِيدُ لِيُطَهِّرَكُمۡ وَلِيُتِمَّ نِعۡمَتَهُۥ عَلَيۡكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ٦
O you who have believed, when you rise to [perform] prayer, wash your faces and your forearms to the elbows and wipe over your heads and wash your feet to the ankles. And if you are in a state of janābah,1 then purify yourselves. But if you are ill or on a journey or one of you comes from the place of relieving himself or you have contacted women2 and do not find water, then seek clean earth and wipe over your faces and hands with it. Allāh does not intend to make difficulty for you, but He intends to purify you and complete His favor upon you that you may be grateful.
ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ अदा करने के लिए उठना चाहो, और तुम 'हदस-ए-असग़र' (छोटी नापाकी, बे-वुज़ू होने) की हालत में हो, तो वुज़ू कर लो, इस प्रकार कि अपने मुँह धो लो तथा अपने हाथों को कुहनियों समेत धो लो और अपने सिरों का मसह़ करो, तथा अपने पाँवों को टखनों समेत धो लो, जो पिंडली के जोड़ पर उभरे हुए होते हैं। यदि तुम 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी नापाकी, जिसके लिए ग़ुस्ल की आवश्यता होती है) की हालत में हो, तो स्नान कर लो। तथा यदि तुम बीमार हो, तुम्हें बीमारी के बढ़ने या ठीक होने में देरी होने का डर है, या तुम स्वस्थ होने की स्थिति में यात्रा कर रहे हो, या तुम उदाहरण के तौर पर शौचकर्म के कारण 'हदस-ए-असग़र' (छोटी अशुद्धता) की हालत में हो, या महिलाओं के साथ संभोग करके 'हदस-ए-अकबर' (बड़ी अशुद्धता) की हालत में हो, और खोजने के बाद भी तुम्हें पानी न मिले - जिससे अपने आपको शुद्ध (पाक) कर सको -, तो ज़मीन की सतह (मिट्टी) का क़सद करो और उसपर अपने हाथों को मारो और (उन्हें) अपने चेहरों पर फेरो तथा अपने हाथों पर फेरो (यानी मसह़ करो)। अल्लाह तुम्हें पानी का उपयोग करने के लिए बाध्य करके, जो तुम्हें नुक़सान पहुँचाता है, अपने प्रावधानों में तुमपर तंगी नहीं करना चाहता है। इसलिए किसी बीमारी या पानी न मिलने के कारण उसका उपयोग दुर्लभ होने के समय उसने तुम्हारे लिए उसका एक विकल्प निर्धारित किया है, ताकि वह तुमपर अपना अनुग्रह पूरा कर दे, तथा तुम अपने ऊपर अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा करो और उसकी नाशुक्री न करो।
5:7Page 108
وَٱذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ وَمِيثَٰقَهُ ٱلَّذِي وَاثَقَكُم بِهِۦٓ إِذۡ قُلۡتُمۡ سَمِعۡنَا وَأَطَعۡنَاۖ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٧
And remember the favor of Allāh upon you and His covenant with which He bound you when you said, "We hear and we obey"; and fear Allāh. Indeed, Allāh is Knowing of that within the breasts.
तथा अपने ऊपर अल्लाह के इस अनुग्रह को याद करो कि उसने तुम्हें इस्लाम का मार्गदर्शन प्रदान किया, और उसकी उस प्रतिज्ञा को याद करो, जो उसने तुमसे उस समय ली थी, जब तुमने नबी सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम से सुखद और अप्रिय चीज़ों में बात सुनने और मानने की बैअत करते हुए कहा था : 'हमने आपकी बात सुनी और हमने आपका आदेश मान लिया'। तथा अल्लाह के आदेशों (जिनमें उसके वचन भी हैं) का पालन करके तथा उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। निश्चय अल्लाह जो कुछ दिलों में है उसे ख़ूब जानने वाला है, अतः उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है।
5:8Page 108
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ كُونُواْ قَوَّٰمِينَ لِلَّهِ شُهَدَآءَ بِٱلۡقِسۡطِۖ وَلَا يَجۡرِمَنَّكُمۡ شَنَـَٔانُ قَوۡمٍ عَلَىٰٓ أَلَّا تَعۡدِلُواْۚ ٱعۡدِلُواْ هُوَ أَقۡرَبُ لِلتَّقۡوَىٰۖ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ إِنَّ ٱللَّهَ خَبِيرُۢ بِمَا تَعۡمَلُونَ ٨
O you who have believed, be persistently standing firm for Allāh, witnesses in justice, and do not let the hatred of a people prevent you from being just. Be just; that is nearer to righteousness. And fear Allāh; indeed, Allāh is [fully] Aware of what you do.
ऐ लोगो जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए हो! अपने ऊपर अनिवार्य अल्लाह के अधिकारों का निष्पादन करो उसके द्वारा उसकी प्रसन्नता तलाश करते हुए, तथा न्याय के गवाह बनो, अन्याय के नहीं। किसी जाति की शत्रुता तुम्हें न्याय को त्यागने के लिए प्रेरित न करे। क्योंकि न्याय करना मित्र और शत्रु दोनों के साथ आवश्यक है। इसलिए उन दोनों के साथ न्याय करो। क्योंकि न्याय अल्लाह से डरने के अधिक निकट है, और अन्याय अल्लाह के विरुद्ध दुस्साहस के अधिक निकट है। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, उससे डरो। तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह को उसकी पूरी ख़बर है। तुम्हारे कर्मों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका प्रतिफल देगा।
5:9Page 108
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَأَجۡرٌ عَظِيمٞ ٩
Allāh has promised those who believe and do righteous deeds [that] for them there is forgiveness and great reward.
अल्लाह (जो अपना वादा नहीं तोड़ता) ने उन लोगों से वादा किया है, जो अल्लाह तथा उसके रसूलों पर ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए कि उनके पापों को क्षमा कर देगा और उन्हें बड़ा सवाब (प्रतिफल) प्रदान करेगा और वह जन्नत में प्रवेश है।
5:10Page 109
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ ١٠
But those who disbelieve and deny Our signs - those are the companions of Hellfire.
जिन लोगों ने अल्लाह के साथ कुफ़्र किया तथा उसकी आयतों को झुठलाया, वही लोग आग वाले हैं जो अपने कुफ़्र और झुठलाने की सज़ा के रूप में उसमें प्रवेश करेंगे, जिसमें वे सदैव रहेंगे जैसे साथी अपने साथी के साथ हमेशा लगा रहता है।
5:11Page 109
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ هَمَّ قَوۡمٌ أَن يَبۡسُطُوٓاْ إِلَيۡكُمۡ أَيۡدِيَهُمۡ فَكَفَّ أَيۡدِيَهُمۡ عَنكُمۡۖ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ١١
O you who have believed, remember the favor of Allāh upon you when a people determined to extend their hands [in aggression] against you, but He withheld their hands from you; and fear Allāh. And upon Allāh let the believers rely.
ऐ ईमान वालो! अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अल्लाह के इस उपकार को याद करो कि उसने तुम्हें सुरक्षा प्रदान की और तुम्हारे दुश्मनों के दिलों में भय डाल दिया, जब उन्होंने तुम्हें पकड़ने और तुम्हारा उन्मूलन करने के लिए तुम्हारी ओर हाथ बढ़ाना चाहा। चुनाँचे अल्लाह ने उन्हें तुमसे फेर दिया और तुम्हें उनसे बचा लिया। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर उससे डरो। तथा मोमिनों को चाहिए कि वे अपने धार्मिक और सांसारिक हितों की प्राप्ति में केवल अल्लाह पर भरोसा करें।
5:12Page 109
۞ وَلَقَدۡ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَٰقَ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ وَبَعَثۡنَا مِنۡهُمُ ٱثۡنَيۡ عَشَرَ نَقِيبٗاۖ وَقَالَ ٱللَّهُ إِنِّي مَعَكُمۡۖ لَئِنۡ أَقَمۡتُمُ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَيۡتُمُ ٱلزَّكَوٰةَ وَءَامَنتُم بِرُسُلِي وَعَزَّرۡتُمُوهُمۡ وَأَقۡرَضۡتُمُ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا لَّأُكَفِّرَنَّ عَنكُمۡ سَيِّـَٔاتِكُمۡ وَلَأُدۡخِلَنَّكُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۚ فَمَن كَفَرَ بَعۡدَ ذَٰلِكَ مِنكُمۡ فَقَدۡ ضَلَّ سَوَآءَ ٱلسَّبِيلِ ١٢
And Allāh had already taken a covenant from the Children of Israel, and We delegated from among them twelve leaders. And Allāh said, "I am with you. If you establish prayer and give zakāh and believe in My messengers and support them and loan Allāh a goodly loan,1 I will surely remove from you your misdeeds and admit you to gardens beneath which rivers flow. But whoever of you disbelieves after that has certainly strayed from the soundness of the way."
निश्चय अल्लाह ने बनी इसराईल से उस बात का दृढ़ वचन लिया, जिसका शीघ्र ही उल्लेख किया जाएगा, तथा उसने उनपर बारह प्रमुख नियुक्त किए, जिनमें से प्रत्येक अपने अधीन रहने वालों की देखरेख करते थे। तथा अल्लाह ने बनी इसराईल से कहा : मैं सहायता और समर्थन के द्वारा तुम्हारे साथ हूँ, यदि तुम सबसे पूर्ण तरीक़े से नमाज़ अदा करते रहे, अपने धनों की ज़कात देते रहे, मेरे सभी रसूलों को उनके बीच भेदभाव (अंतर) किए बिना सत्य माना, उनका सम्मान किया, उनकी सहायता की और भले कामों पर खर्च किया। यदि तुमने यह सब किया, तो निश्चय मैं उन बुराइयों को तुमसे अवश्य दूर कर दूँगा, जो तुमने की हैं, तथा मैं क़ियामत के दिन तुम्हें ऐसे बाग़ों में अवश्य प्रवेश दूँगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। फिर जिसने इस दृढ़ वचन लिए जाने के बाद कुफ़्र किया, तो निश्चय वह जानबूझकर सत्य के मार्ग से अलग हो गया।
5:13Page 109
فَبِمَا نَقۡضِهِم مِّيثَٰقَهُمۡ لَعَنَّٰهُمۡ وَجَعَلۡنَا قُلُوبَهُمۡ قَٰسِيَةٗۖ يُحَرِّفُونَ ٱلۡكَلِمَ عَن مَّوَاضِعِهِۦ وَنَسُواْ حَظّٗا مِّمَّا ذُكِّرُواْ بِهِۦۚ وَلَا تَزَالُ تَطَّلِعُ عَلَىٰ خَآئِنَةٖ مِّنۡهُمۡ إِلَّا قَلِيلٗا مِّنۡهُمۡۖ فَٱعۡفُ عَنۡهُمۡ وَٱصۡفَحۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ١٣
So for their breaking of the covenant We cursed them and made their hearts hardened. They distort words from their [proper] places [i.e., usages] and have forgotten a portion of that of which they were reminded.1 And you will still observe deceit among them, except a few of them. But pardon them and overlook [their misdeeds]. Indeed, Allāh loves the doers of good.
उनके उस वचन का उल्लंघन करने के कारण, जो उनसे लिया गया था, हमने उन्हें अपनी दया से निष्कासित कर दिया, तथा उनके दिलों को कठोर और सख़्त बना दिया, जिस तक न तो कोई अच्छाई पहुँचती है और न ही उसे कोई नसीहत लाभ देती है। वे (अल्लाह के) शब्दों को उनके स्थानों से फेर देते हैं, इस प्रकार कि उनके शब्दों को बदल देते हैं और उनके अर्थों की व्याख्या इस तरह करते हैं जो उनकी इच्छाओं से मेल खाती है। तथा उन्होंने उनमें से कुछ बातों पर अमल करना छोड़ दिया, जिनका उन्हें उपदेश दिया गया था। (ऐ रसूल!) आपके पास उनकी अल्लाह तथा उसके मोमिन बंदों के साथ किसी न किसी विश्वासघात की ख़बर आती रहेगी। परंतु उनमें से कुछ लोगों को छोड़कर, जिन्होंने उस वचन को पूरा किया, जो उनसे लिया गया था। अतः आप उन्हें क्षमा कर दें, उनकी पकड़ न करें और उन्हें माफ़ कर दें। क्योंकि यह उपकार में से है और अल्लाह उपकार करने वालों से प्रेम करता है।
5:14Page 110
وَمِنَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّا نَصَٰرَىٰٓ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَهُمۡ فَنَسُواْ حَظّٗا مِّمَّا ذُكِّرُواْ بِهِۦ فَأَغۡرَيۡنَا بَيۡنَهُمُ ٱلۡعَدَاوَةَ وَٱلۡبَغۡضَآءَ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ وَسَوۡفَ يُنَبِّئُهُمُ ٱللَّهُ بِمَا كَانُواْ يَصۡنَعُونَ ١٤
And from those who say, "We are Christians" We took their covenant; but they forgot a portion of that of which they were reminded.1 So We caused among them2 animosity and hatred until the Day of Resurrection. And Allāh is going to inform them about what they used to do.
जिस तरह हमने यहूदियों से दृढ़ वचन लिया था, उसी तरह हमने उन लोगों से भी वचन लिया, जिन्होंने अपनी पवित्रता जताते हुए कहा कि वे ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वाले हैं। फिर उन्होंने उसमें से एक भाग पर अमल करना छोड़ दिया, जिसका उन्हें उपदेश दिया गया था, जैसा कि यहूदियों में से उनके पूर्वजों ने किया था। तथा हमने उनके बीच क़ियामत के दिन तक के लिए शत्रुता तथा सख़्त घृणा डाल दी। अतः वे आपस में लड़ने वाले बन गए, वे एक-दूसरे को काफ़िर कहने लगे। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें बताएगा जो कुछ वे किया करते थे और उन्हें उसका बदला देगा।
5:15Page 110
يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ قَدۡ جَآءَكُمۡ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمۡ كَثِيرٗا مِّمَّا كُنتُمۡ تُخۡفُونَ مِنَ ٱلۡكِتَٰبِ وَيَعۡفُواْ عَن كَثِيرٖۚ قَدۡ جَآءَكُم مِّنَ ٱللَّهِ نُورٞ وَكِتَٰبٞ مُّبِينٞ ١٥
O People of the Scripture, there has come to you Our Messenger making clear to you much of what you used to conceal of the Scripture and overlooking much.1 There has come to you from Allāh a light and a clear Book [i.e., the Qur’ān]
ऐ किताब वालो! अर्थात् तौरात वाले यहूदियो और इंजील वाले ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो तुम्हारे लिए उनमें से बहुत-सी बातों को स्पष्ट रूप से बयान करते हैं, जो तुम अपने ऊपर उतरने वाली किताब में से छिपाया करते थे, तथा उसमें से बहुत कुछ नज़रअंदाज़ कर देते हैं जिसमें तुम्हें बेनक़ाब करने के सिवा कोई लाभ नहीं। क़ुरआन तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से एक पुस्तक के रूप में आया है, और यह एक प्रकाश है जिससे प्रकाश प्राप्त किया जाता है, तथा हर उस चीज़ के लिए एक स्पष्ट पुस्तक है, जिसकी लोगों के अपने सांसारिक और आख़िरत के मामलों में आवश्यकता होती है।
5:16Page 110
يَهۡدِي بِهِ ٱللَّهُ مَنِ ٱتَّبَعَ رِضۡوَٰنَهُۥ سُبُلَ ٱلسَّلَٰمِ وَيُخۡرِجُهُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِ بِإِذۡنِهِۦ وَيَهۡدِيهِمۡ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ١٦
By which Allāh guides those who pursue His pleasure to the ways of peace1 and brings them out from darknesses into the light, by His permission, and guides them to a straight path.
अल्लाह इस किताब के द्वारा उन लोगों को, जो उसे प्रसन्न करने वाली चीज़ों जैसे ईमान और अच्छे कर्म का अनुसरण करते हैं, अल्लाह की यातना से सुरक्षा के रास्तों का मार्गदर्शन करता है, जो कि जन्नत की ओर ले जाने वाले रास्ते हैं। तथा उन्हें अपनी अनुमति से कुफ़्र और अवज्ञा के अँधेरे से बाहर निकालकर ईमान और आज्ञाकारिता के प्रकाश में लाता है, और उन्हें सीधे रास्ते, इस्लाम के मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करता है।
5:17Page 110
لَّقَدۡ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡمَسِيحُ ٱبۡنُ مَرۡيَمَۚ قُلۡ فَمَن يَمۡلِكُ مِنَ ٱللَّهِ شَيۡـًٔا إِنۡ أَرَادَ أَن يُهۡلِكَ ٱلۡمَسِيحَ ٱبۡنَ مَرۡيَمَ وَأُمَّهُۥ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ جَمِيعٗاۗ وَلِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَاۚ يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ١٧
They have certainly disbelieved who say that Allāh is Christ, the son of Mary. Say, "Then who could prevent Allāh at all if He had intended to destroy Christ, the son of Mary, or his mother or everyone on the earth?" And to Allāh belongs the dominion of the heavens and the earth and whatever is between them. He creates what He wills, and Allāh is over all things competent.
निश्चय ईसाइयों में से उन लोगों ने कुफ़्र किया, जिनका कहना है कि निःसंदेह अल्लाह मरयम का पुत्र मसीह ही है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मरयम के बेटे ईसा मसीह को विनष्ट करने से, उनकी माँ (मरयम) को विनष्ट करने से तथा धरती पर उपस्थित सभी लोगों को विनष्ट करने से, अल्लाह को कौन रोक सकता है यदि वह उन्हें नष्ट करना चाहे?! यदि कोई भी उसे इससे रोकने में सक्षम नहीं है, तो यह इंगित करता है कि अल्लाह के अलावा कोई पूज्य नहीं है और यह कि : ईसा बिन मरयम, उनकी माता तथा शेष सृष्टि सब अल्लाह की रचना हैं। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। वह जो चाहता है, पैदा करता है और उसने जिन चीज़ों को पैदा करना चाहा है, उनमें से ईसा अलैहिस्सलाम भी हैं। चुनाँचे वह उसके बंदे और उसके रसूल हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
5:18Page 111
وَقَالَتِ ٱلۡيَهُودُ وَٱلنَّصَٰرَىٰ نَحۡنُ أَبۡنَٰٓؤُاْ ٱللَّهِ وَأَحِبَّٰٓؤُهُۥۚ قُلۡ فَلِمَ يُعَذِّبُكُم بِذُنُوبِكُمۖ بَلۡ أَنتُم بَشَرٞ مِّمَّنۡ خَلَقَۚ يَغۡفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُۚ وَلِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَاۖ وَإِلَيۡهِ ٱلۡمَصِيرُ ١٨
But the Jews and the Christians say, "We are the children of Allāh and His beloved." Say, "Then why does He punish you for your sins?" Rather, you are human beings from among those He has created. He forgives whom He wills, and He punishes whom He wills. And to Allāh belongs the dominion of the heavens and the earth and whatever is between them, and to Him is the [final] destination.
यहूदी और ईसाई दोनों ने दावा किया कि वे अल्लाह के पुत्र और उसके प्रिय हैं। (ऐ रसूल!) आप उनके जवाब में कह दें : अल्लाह तुम्हें तुम्हारे द्वारा किए गए पापों के कारण दंड क्यों देता है?! यदि तुम उसके प्रियजन होते, जैसा कि तुमने दावा किया है, तो वह तुम्हें इस दुनिया में हत्या और विरूपण के साथ तथा परलोक में आग के द्वारा दंड न देता; क्योंकि वह जिसे प्यार करता है उसे यातना नहीं देता है। बल्कि तुम भी अन्य सभी मनुष्यों की तरह मनुष्य हो। जो उनमें से अच्छा कर्म करेगा, वह उसे जन्नत का प्रतिफल देगा, और जो कोई भी बुराई करेगा, वह उसे (जहन्नम की) आग से दंडित करेगा। अल्लाह जिसे चाहता है, अपनी कृपा से क्षमा करता है और वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से दंडित करता है। तथा आकाशों और धरती का राज्य और जो कुछ उनके बीच है उसका राज्य अल्लाह ही के लिए है। और अकेले उसी की ओर लौटकर जाना है।
5:19Page 111
يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ قَدۡ جَآءَكُمۡ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمۡ عَلَىٰ فَتۡرَةٖ مِّنَ ٱلرُّسُلِ أَن تَقُولُواْ مَا جَآءَنَا مِنۢ بَشِيرٖ وَلَا نَذِيرٖۖ فَقَدۡ جَآءَكُم بَشِيرٞ وَنَذِيرٞۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ١٩
O People of the Scripture, there has come to you Our Messenger to make clear to you [the religion] after a period [of suspension] of messengers, lest you say, "There came not to us any bringer of good tidings or a warner." But there has come to you a bringer of good tidings and a warner. And Allāh is over all things competent.
ऐ किताब वाले यहूदियो तथा ईसाइयो! तुम्हारे पास हमारे रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं। वह ऐसे समय में आए हैं जब रसूलों का आगमन एक समय से बंद था तथा उनके आगमन की सख़्त आवश्यकता थी। ताकि तुम क्षमाप्रार्थी बनकर यह न को : हमारे पास कोई रसूल नहीं आया, जो हमें अल्लाह के प्रतिफल की शुभ सूचना देता और हमें उसके दंड से सावधान करता। अतः (अब) तुम्हारे पास मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ चुके हैं, जो उसके प्रतिफल की शुभ सूचना देने वाले और उसके दंड से सावधान करने वाले हैं। तथा अल्लाह हर चीज़ की क्षमता रखने वाला है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। और रसूलों को भेजना और उनके क्रम को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर समाप्त कर देना उसकी क्षमता में से है।
5:20Page 111
وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَةَ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ إِذۡ جَعَلَ فِيكُمۡ أَنۢبِيَآءَ وَجَعَلَكُم مُّلُوكٗا وَءَاتَىٰكُم مَّا لَمۡ يُؤۡتِ أَحَدٗا مِّنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٢٠
And [mention, O Muḥammad], when Moses said to his people, "O my people, remember the favor of Allāh upon you when He appointed among you prophets and made you possessors1 and gave you that which He had not given anyone among the worlds.
(ऐ रसूल!) उस समय को याद करो, जब मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति बनी इसराईल से कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने दिलों से तथा अपनी ज़बानों से अपने ऊपर अल्लाह की उस नेमत को याद करो जब उसने तुममें से कुछ नबी बनाए, जो तुम्हें मार्गदर्शन की ओर बुलाते थे, तथा तुम्हें बादशाह बनाए कि तुम खुद के मामलों के मालिक हो गए जबकि तुम दास और ग़ुलाम हुआ करते थे, तथा उसने तुम्हें अपनी नेमतों में से वह प्रदान किया, जो उसने तुम्हारे समय में दुनिया वालों में से किसी को भी नहीं दिया।
5:21Page 111
يَٰقَوۡمِ ٱدۡخُلُواْ ٱلۡأَرۡضَ ٱلۡمُقَدَّسَةَ ٱلَّتِي كَتَبَ ٱللَّهُ لَكُمۡ وَلَا تَرۡتَدُّواْ عَلَىٰٓ أَدۡبَارِكُمۡ فَتَنقَلِبُواْ خَٰسِرِينَ ٢١
O my people, enter the blessed land [i.e., Palestine] which Allāh has assigned to you and do not turn back [from fighting in Allāh's cause] and [thus] become losers."
मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! उस पवित्र भूमि (यानी बैतुल मक़दिस तथा उसके आसपास के क्षेत्र) में प्रवेश करो, जिसमें प्रवेश करने और वहाँ के काफ़िरों से लड़ाई करने का अल्लाह ने तुमसे वादा किया था, तथा शक्तिशाली लोगों के सामने हार मत मानो, अन्यथा तुम्हारा परिणाम इस दुनिया और आख़िरत में घाटा होगा।
5:22Page 111
قَالُواْ يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّ فِيهَا قَوۡمٗا جَبَّارِينَ وَإِنَّا لَن نَّدۡخُلَهَا حَتَّىٰ يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا فَإِن يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا فَإِنَّا دَٰخِلُونَ ٢٢
They said, "O Moses, indeed within it is a people of tyrannical strength, and indeed, we will never enter it until they leave it; but if they leave it, then we will enter."
उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा : ऐ मूसा! पवित्र भूमि में ऐसे लोग हैं, जो बड़े बली और शक्तिशाली हैं। और यह हमें उसमें प्रवेश करने से रोकता है। इसलिए जब तक वे उसमें हैं, तब तक हम उसमें हरगिज़ प्रवेश नहीं करेंगे; क्योंकि हमारे पास उनसे लड़ने की कोई शक्ति और क्षमता नहीं है। अतः यदि वे उससे निकल जाएँ, तो हम उसमें अवश्य प्रवेश करेंगे।
5:23Page 111
قَالَ رَجُلَانِ مِنَ ٱلَّذِينَ يَخَافُونَ أَنۡعَمَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمَا ٱدۡخُلُواْ عَلَيۡهِمُ ٱلۡبَابَ فَإِذَا دَخَلۡتُمُوهُ فَإِنَّكُمۡ غَٰلِبُونَۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَتَوَكَّلُوٓاْ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ ٢٣
Said two men from those who feared [to disobey] upon whom Allāh had bestowed favor, "Enter upon them through the gate, for when you have entered it, you will be predominant.1 And upon Allāh rely, if you should be believers."
मूसा अलैहिस्सलाम के साथियों में से दो व्यक्तियों ने, जो उन लोगों में से थे जो अल्लाह का भय रखते थे और उसकी यातना से डरते थे, अल्लाह ने उन दोनों को अपनी आज्ञाकारिता का सामर्थ्य प्रदान किया था, उन दोनों ने अपनी जाति के लोगों से मूसा अलैहिस्सलाम की आज्ञा का पालन करने का आग्रह करते हुए कहा : तुम शक्तिशाली लोगों पर शहर के दरवाज़े में प्रवेश कर जाओ। यदि तुम दरवाज़े में प्रवेश कर गए, तो तुम - अल्लाह की अनुमति से - उन्हें पराजित कर दोगे, अल्लाह की इस सुन्नत (नियम) पर भरोसा करते हुए कि अल्लाह पर ईमान और भौतिक साधनों को तैयार करने जैसे कारणों को अपनाने पर वह विजय प्रदान करता है। तथा यदि तुम सच्चे मोमिन हो, तो केवल अल्लाह ही पर भरोसा करो। क्योंकि ईमान आवश्यक रूप से अल्लाह ही पर भरोसा करने की अपेक्षा करता है।
5:24Page 112
قَالُواْ يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّا لَن نَّدۡخُلَهَآ أَبَدٗا مَّا دَامُواْ فِيهَا فَٱذۡهَبۡ أَنتَ وَرَبُّكَ فَقَٰتِلَآ إِنَّا هَٰهُنَا قَٰعِدُونَ ٢٤
They said, "O Moses, indeed we will not enter it, ever, as long as they are within it; so go, you and your Lord, and fight. Indeed, we are remaining right here."
बनी इसराईल में से मूसा की जाति के लोगों ने अपने नबी मूसा अलैहिस्सलाम के आदेश का उल्लंघन करने पर अडिग रहते हुए कहा : हम शहर में हरगिज़ प्रवेश नहीं करेंगे जब तक कि उसमें शक्तिशाली लोग मौजूद हैं। इसलिए ऐ मूसा! आप अपने पालनहार के साथ जाएँ और उन शक्तिशाली लोगों से लड़ें। जहाँ तक हमारी बात है, तो हम अपने स्थान पर रहेंगे, आपके साथ युद्ध करने के लिए नहीं निकलेंगे।
5:25Page 112
قَالَ رَبِّ إِنِّي لَآ أَمۡلِكُ إِلَّا نَفۡسِي وَأَخِيۖ فَٱفۡرُقۡ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡفَٰسِقِينَ ٢٥
[Moses] said, "My Lord, indeed I do not possess [i.e., control] except myself and my brother, so part us1 from the defiantly disobedient people."
मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने पालनहार से कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरा स्वयं अपने और अपने भाई हारून के अतिरिक्त किसी पर कोई अधिकार नहीं है। अतः तू हमारे तथा ऐसे लोगों के बीच अलगाव कर दे, जो तेरे तथा तेरे रसूल के आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences