Al-MukhtasarYunus · 10:34–73

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

Yunus 10:34–73

10:34Page 213

قُلۡ هَلۡ مِن شُرَكَآئِكُم مَّن يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥۚ قُلِ ٱللَّهُ يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥۖ فَأَنَّىٰ تُؤۡفَكُونَ ٣٤

Say, "Are there of your 'partners' any who begins creation and then repeats it?" Say, "Allāh begins creation and then repeats it, so how are you deluded?"

(ऐ रसूल!) आप इन बहुदेववादियों से कह दें : क्या तुम्हारे ठहराए हुए साझीदारों में, जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो, कोई ऐसा है, जो पूर्व उदाहरण के बिना उत्पत्ति का आरंभ करे और फिर उसकी मृत्यु के पश्चात् उसे पुनर्जीवित करेॽ आप उनसे कह दें कि अल्लाह ही पूर्व उदाहरण के बिना उत्पत्ति का आरंभ करता है और फिर वही उसकी मृत्यु के पश्चात् उसे पुनर्जीवित करेगा। तो फिर (ऐ बहुदेववादियो!) तुम लोग सत्य से असत्य की ओर कैसे फिरे जा रहे होॽ!

10:35Page 213

قُلۡ هَلۡ مِن شُرَكَآئِكُم مَّن يَهۡدِيٓ إِلَى ٱلۡحَقِّۚ قُلِ ٱللَّهُ يَهۡدِي لِلۡحَقِّۗ أَفَمَن يَهۡدِيٓ إِلَى ٱلۡحَقِّ أَحَقُّ أَن يُتَّبَعَ أَمَّن لَّا يَهِدِّيٓ إِلَّآ أَن يُهۡدَىٰۖ فَمَا لَكُمۡ كَيۡفَ تَحۡكُمُونَ ٣٥

Say, "Are there of your 'partners' any who guides to the truth?" Say, "Allāh guides to the truth. So is He who guides to the truth more worthy to be followed or he who guides not unless he is guided? Then what is [wrong] with you - how do you judge?"

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : क्या तुम्हारे ठहराए हुए उन साझीदारों में, जिनकी तुम अल्लाह के अलावा पूजा करते हो, कोई ऐसा है, जो सत्य की ओर मार्गदर्शन करेॽ आप उनसे कह दें : केवल अल्लाह ही सत्य की ओर मार्गदर्शन करता है। तो क्या जो लोगों को सीधा रास्ता दिखाए और उसकी ओर लोगों को बुलाए, वह इसका अधिक योग्य है कि उसका अनुसरण किया जाए या कि तुम्हारे वे पूज्य जो स्वयं ही मार्ग नहीं पाते, जबतक कि कोई दूसरा उन्हें मार्ग न दिखा देॽ! फिर तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसे व्यर्थ फ़ैसले करते हो, जब यह दावा करते हो कि वे अल्लाह के साझीदार हैंॽ! अल्लाह तुम्हारे कथन से बहुत ऊँचा है।

10:36Page 213

وَمَا يَتَّبِعُ أَكۡثَرُهُمۡ إِلَّا ظَنًّاۚ إِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغۡنِي مِنَ ٱلۡحَقِّ شَيۡـًٔاۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِمَا يَفۡعَلُونَ ٣٦

And most of them follow not except assumption. Indeed, assumption avails not against the truth at all. Indeed, Allāh is Knowing of what they do.

बहुदेववादियों में से अधिकांश लोग केवल उसी का अनुसरण करते हैं जिसका उन्हें कोई ज्ञान नहीं है। वे केवल भ्रम और संशय का पालन करते हैं। निश्चय संशय न तो ज्ञान का स्थान ले सकता और न ही उससे बेनियाज़ कर सकता है। वे जो कुछ कर रहे हैं, अल्लाह उसे भली-भाँति जानने वाला है। उनके कार्यों में से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है और वह जल्द ही उन्हें उसका बदला देगा।

10:37Page 213

وَمَا كَانَ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانُ أَن يُفۡتَرَىٰ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلَٰكِن تَصۡدِيقَ ٱلَّذِي بَيۡنَ يَدَيۡهِ وَتَفۡصِيلَ ٱلۡكِتَٰبِ لَا رَيۡبَ فِيهِ مِن رَّبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٣٧

And it was not [possible] for this Qur’ān to be produced by other than Allāh, but [it is] a confirmation of what was before it and a detailed explanation of the [former] Scripture, about which there is no doubt,1 from the Lord of the worlds.

यह क़ुरआन कोई ऐसी किताब नहीं है कि उसे गढ़ लिया जाए और अल्लाह के अलावा किसी और की ओर मंसूब कर दिया जाए, क्योंकि लोग निश्चित रूप से इस क़ुरआन जैसी किताब लाने में असमर्थ हैं। बल्कि यह क़ुरआन उससे पहले उतरने वाली किताबों की पुष्टि करने वाला तथा उन पुस्तकों में सार रूप से वर्णन किए गए अहकाम का विवरण प्रस्तुत करने वाला है। अतः इसमें कोई संदेह नहीं कि यह सभी प्राणियों के पालनहार सर्वशक्तिमान (अल्लाह) की ओर से उतारा गया है।

10:38Page 213

أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰهُۖ قُلۡ فَأۡتُواْ بِسُورَةٖ مِّثۡلِهِۦ وَٱدۡعُواْ مَنِ ٱسۡتَطَعۡتُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٣٨

Or do they say [about the Prophet (ﷺ)], "He invented it?" Say, "Then bring forth a sūrah like it and call upon [for assistance] whomever you can besides Allāh, if you should be truthful."

बल्कि, क्या ये बहुदेववादी कहते हैं : मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस क़ुरआन को अपनी तरफ़ से गढ़ लिया है और उसे अल्लाह की तरफ़ मंसूब कर दिया है? (ऐ रसूल!) आप उनका खंडन करते हुए कह दें : यदि (तुम्हारे कहने के अनुसार) मैं इसे अपनी तरफ़ से गढ़कर लाया हूँ, जबकि मैं तुम्हारे ही जैसा एक इनसान हूँ, तो तुम इसके समान एक सूरत ही ले आओ और अपनी सहायता के लिए जिसे बुला सकते हो, बुला लो, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि क़ुरआन मनगढ़ंत और झूठा है। सच्चाई यह है कि तुम ऐसा कभी नहीं कर पाओगे। यदि तुम भाषाविद तथा वाक्पटु होने के बावजूद ऐसा नहीं कर सकते, तो यह इस बात का प्रमाण है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से उतरने वाली पुस्तक है।

10:39Page 213

بَلۡ كَذَّبُواْ بِمَا لَمۡ يُحِيطُواْ بِعِلۡمِهِۦ وَلَمَّا يَأۡتِهِمۡ تَأۡوِيلُهُۥۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلظَّٰلِمِينَ ٣٩

Rather, they have denied that which they encompass not in knowledge and whose interpretation has not yet come to them. Thus did those before them deny. Then observe how was the end of the wrongdoers.

उन्होंने क़ुरआन को नहीं माना, बल्कि उसको समझने और उसमें मनन-चिंतन करने से पहले ही तथा जिस यातना से उन्हें डराया गया था उसके आने से पूर्व ही उन्होंने इस क़ुरआन को झुठलाने में जल्दी दिखाई, जबकि उस यातना के आने का समय क़रीब हो चुका था। इनके झुठलाने ही की तरह, पिछले समुदायों ने भी झुठलाया था, जिसके कारण उन्हें यातनाओं का सामना करना पड़ा। अतः (ऐ रसूल!) आप सोचें कि उन झुठलाने वाले समुदायों का अंत कैसा रहा? निश्चित रूप से अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया।

10:40Page 213

وَمِنۡهُم مَّن يُؤۡمِنُ بِهِۦ وَمِنۡهُم مَّن لَّا يُؤۡمِنُ بِهِۦۚ وَرَبُّكَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُفۡسِدِينَ ٤٠

And of them are those who believe in it, and of them are those who do not believe in it. And your Lord is most knowing of the corrupters.

बहुदेववादियों में से कुछ लोग अपनी मृत्यु से पहले क़ुरआन पर ईमान ले आएँगे और कुछ लोग अपने हठ और अहंकार के कारण मरते दम तक इसपर ईमान नहीं लाएँगे। (ऐ रसूल!) आपका पालनहार कुफ़्र पर जमे रहने वालों को सबसे ज़्यादा जानने वाला है और उन्हें उनके कुफ़्र का बदला देगा।

10:41Page 213

وَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل لِّي عَمَلِي وَلَكُمۡ عَمَلُكُمۡۖ أَنتُم بَرِيٓـُٔونَ مِمَّآ أَعۡمَلُ وَأَنَا۠ بَرِيٓءٞ مِّمَّا تَعۡمَلُونَ ٤١

And if they deny you, [O Muḥammad], then say, "For me are my deeds, and for you are your deeds. You are disassociated from what I do, and I am disassociated from what you do."

यदि (ऐ रसूल!) आपकी क़ौम के लोग आपको झुठलाएँ, तो उनसे कह दें : मेरे लिए मेरे कर्म का सवाब है और मुझे ही अपने कर्म की ज़िम्मेदारी उठानी है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म का सवाब है और तुम्हें ही उसका दंड झेलना है। जो कुछ मैं कर रहा हूँ उसके दंड से तुम बरी हो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसके दंड से मैं बरी हूँ।

10:42Page 213

وَمِنۡهُم مَّن يَسۡتَمِعُونَ إِلَيۡكَۚ أَفَأَنتَ تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ وَلَوۡ كَانُواْ لَا يَعۡقِلُونَ ٤٢

And among them are those who listen to you. But can you cause the deaf to hear [i.e., benefit from this hearing], although they will not use reason?

बहुदेववादियों में से कुछ लोग ऐसे हैं कि जब आप क़ुरआन पढ़ते हैं, तो वे (ऐ रसूल!) आपकी ओर कान लगा लेते हैं, परंतु मानने और पालन करने के उद्देश्य से नहीं। तो क्या आप उन लोगों को सुना सकते हैं, जिनसे सुनने की शक्ति छीन ली गई है?! इसी प्रकार आप इन लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखा सकते, जो सत्य को सुनने से बहरे हैं। अतः वे उसे समझते नहीं हैं।

10:43Page 214

وَمِنۡهُم مَّن يَنظُرُ إِلَيۡكَۚ أَفَأَنتَ تَهۡدِي ٱلۡعُمۡيَ وَلَوۡ كَانُواْ لَا يُبۡصِرُونَ ٤٣

And among them are those who look at you. But can you guide the blind although they will not [attempt to] see?

तथा बहुदेववादियों में से कुछ लोग ऐसे हैं, जो (ऐ रसूल!) आपकी ओर केवल अपनी बाह्य दृष्टि से देखते हैं, अपनी अंतर्दृष्टि से नहीं। तो क्या आप उन लोगों को प्रबुद्ध कर सकते हैं, जिन्होंने अपनी दृष्टि खो दी है?! निःसंदेह आप ऐसा नहीं कर सकते। इसी प्रकार आप अंतर्दृष्टि से वंचित व्यक्ति को सीधा मार्ग नहीं दिखा सकते।

10:44Page 214

إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَظۡلِمُ ٱلنَّاسَ شَيۡـٔٗا وَلَٰكِنَّ ٱلنَّاسَ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ ٤٤

Indeed, Allāh does not wrong the people at all, but it is the people who are wronging themselves.

निःसंदेह अल्लाह अपने बंदों पर अत्याचार करने से पाक है। वह उनपर कणभर भी अत्याचार नहीं करता, परंतु वे स्वयं ही असत्य के पक्षपात, अहंकार और हठ के कारण खुद को विनाश के साधनों में लाकर अपनी जानों पर अत्याचार करते हैं।

10:45Page 214

وَيَوۡمَ يَحۡشُرُهُمۡ كَأَن لَّمۡ يَلۡبَثُوٓاْ إِلَّا سَاعَةٗ مِّنَ ٱلنَّهَارِ يَتَعَارَفُونَ بَيۡنَهُمۡۚ قَدۡ خَسِرَ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِلِقَآءِ ٱللَّهِ وَمَا كَانُواْ مُهۡتَدِينَ ٤٥

And on the Day when He will gather them, [it will be] as if they had not remained [in the world] but an hour of the day, [and] they will know each other. Those will have lost who denied the meeting with Allāh and were not guided.

और जब क़ियामत के दिन अल्लाह लोगों को हिसाब-किताब के लिए एकत्र करेगा, तो उन्हें लगेगा कि वे अपने दुनिया के जीवन और क़ब्र में केवल दिन की एक घड़ी भर ठहरे थे, उससे ज़्यादा नहीं। वहाँ वे एक-दूसरे को पहचानेंगे। फिर उनके एक-दूसरे को पहचानने का सिलसिला क़ियामत के दिन की भयावहता को देखकर समाप्त हो जाएगा। वास्तव में, वे लोग घाटे में पड़ गए, जिन्होंने क़ियामत के दिन अपने पालनहार से मिलने को झुठलाया तथा वे दुनिया में दोबारा जीवित होने के दिन पर ईमान रखने वाले नहीं थे कि घाटे से बच सकें।

10:46Page 214

وَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعۡضَ ٱلَّذِي نَعِدُهُمۡ أَوۡ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيۡنَا مَرۡجِعُهُمۡ ثُمَّ ٱللَّهُ شَهِيدٌ عَلَىٰ مَا يَفۡعَلُونَ ٤٦

And whether We show you some of what We promise them, [O Muḥammad], or We take you in death, to Us is their return; then, [either way], Allāh is a witness concerning what they are doing.

और यदि हम (ऐ रसूल!) आपको उस यातना का कुछ हिस्सा जिसका हमने उनसे वादा किया है, आपकी मृत्यु से पहले दिखा दें, या हम आपको उससे पहले मृत्यु दे दें, तो दोनों स्थितियों में उन्हें हमारे पास ही लौटकर आना है। फिर जो कुछ वे कर रहे हैं अल्लाह उससे अवगत है, उससे उनकी कोई चीज़ छिपी नहीं है और वह शीघ्र ही उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।

10:47Page 214

وَلِكُلِّ أُمَّةٖ رَّسُولٞۖ فَإِذَا جَآءَ رَسُولُهُمۡ قُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡقِسۡطِ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ ٤٧

And for every nation is a messenger. So when their messenger comes,1 it will be judged between them in justice, and they will not be wronged.

पिछले समुदायों में से प्रत्येक समुदाय के लिए एक रसूल था, जो उनकी ओर भेजा गया था। फिर जब उस (रसूल) ने उन्हें वह संदेश पहुँचा दिया, जिसे पहुँचाने का उसे आदेश दिया गया था और लोगों ने उसे झुठला दिया, तो उनके तथा रसूल के बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर दिया गया। चुनाँचे अल्लाह ने अपनी कृपा से रसूल को बचा लिया और अपने न्याय से उन लोगों को नष्ट कर दिया। तथा उनके कर्मों का बदला देने में उनके साथ कुछ भी अन्याय नहीं किया जाता।

10:48Page 214

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٤٨

And they say, "When is [the fulfillment of] this promise, if you should be truthful?"

और ये काफ़िर लोग हठधर्मी करते हुए और चुनौती देते हुए कहते हैं : यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो, तो बताओ कि जिस यातना का तुमने हमसे वादा किया था, उसका समय कब आएगा?!

10:49Page 214

قُل لَّآ أَمۡلِكُ لِنَفۡسِي ضَرّٗا وَلَا نَفۡعًا إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُۗ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌۚ إِذَا جَآءَ أَجَلُهُمۡ فَلَا يَسۡتَـٔۡخِرُونَ سَاعَةٗ وَلَا يَسۡتَقۡدِمُونَ ٤٩

Say, "I possess not for myself any harm or benefit except what Allāh should will. For every nation is a [specified] term. When their time has come, then they will not remain behind an hour, nor will they precede [it]."

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मैं स्वयं अपने लिए न किसी हानि का मालिक हूँ कि स्वयं को उससे नुक़सान पहुँचाऊँ या ख़ुद से उसे हटा सकूँ, और न ही किसी लाभ का मालिक हूँ कि उससे स्वयं को फायदा पहुँचाऊँ। तो मैं किसी और को कैसे फायदा या नुक़सान पहुँचा सकता हूँ? सिवाय उसके जो अल्लाह उसमें से चाहे, तो फिर मैं उसके ग़ैब की बातों को कैसे जान सकता हूँ? प्रत्येक समुदाय, जिसे अल्लाह ने विनाश की धमकी दी है, उसके विनाश का एक समय निर्धारित है, जिसका ज्ञान केवल अल्लाह को है। अतः जब उसके विनाश का समय आ जाता है, तो वे उससे न कुछ पीछे रह सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं।

10:50Page 214

قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِنۡ أَتَىٰكُمۡ عَذَابُهُۥ بَيَٰتًا أَوۡ نَهَارٗا مَّاذَا يَسۡتَعۡجِلُ مِنۡهُ ٱلۡمُجۡرِمُونَ ٥٠

Say, "Have you considered: if His punishment should come to you by night or by day - for which [aspect] of it would the criminals be impatient?"1

(ऐ रसूल!) आप यातना की जल्दी मचाने वालों से कह दें : मुझे बताओ कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना रात या दिन के किसी समय आ जाए, तो आख़िर कौन-सी चीज़ है, जिसे तुम इस यातना से जल्दी चाहते हो?!

10:51Page 214

أَثُمَّ إِذَا مَا وَقَعَ ءَامَنتُم بِهِۦٓۚ ءَآلۡـَٰٔنَ وَقَدۡ كُنتُم بِهِۦ تَسۡتَعۡجِلُونَ ٥١

Then is it that when it has [actually] occurred you will believe in it? Now?1 And you were [once] for it impatient.2

क्या जिस यातना का तुमसे वादा किया गया है, उसके तुम्हारे ऊपर घटित हो जाने के बाद तुम ईमान लाओगे, जबकि उस समय किसी व्यक्ति को उसका ईमान लाभ नहीं देगा, जो उससे पहले ईमान नहीं लाया था? क्या तुम अब ईमान ला रहे हो, हालाँकि इससे पहले तुम यातना के लिए उसे झुठलाने के तौर पर जल्दी मचाया करते थे?!

10:52Page 214

ثُمَّ قِيلَ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ ذُوقُواْ عَذَابَ ٱلۡخُلۡدِ هَلۡ تُجۡزَوۡنَ إِلَّا بِمَا كُنتُمۡ تَكۡسِبُونَ ٥٢

Then it will be said to those who had wronged, "Taste the punishment of eternity; are you being recompensed except for what you used to earn?"

फिर उन्हें यातना में डाले जाने और उनकी ओर से उससे बाहर निकलने की माँग किए जाने के पश्चात उनसे कहा जाएगा : आख़िरत की स्थायी यातना का स्वाद चखो। क्या जो कुफ़्र और पाप तुम किया करते थे, तुम्हें उसके अलावा किसी और चीज़ का बदला दिया जाएगा?!

10:53Page 214

۞ وَيَسۡتَنۢبِـُٔونَكَ أَحَقٌّ هُوَۖ قُلۡ إِي وَرَبِّيٓ إِنَّهُۥ لَحَقّٞۖ وَمَآ أَنتُم بِمُعۡجِزِينَ ٥٣

And they ask information of you, [O Muḥammad], "Is it true?" Say, "Yes, by my Lord. Indeed, it is truth; and you will not cause failure [to Allāh]."

और (ऐ रसूल!) बहुदेववादी लोग आपसे पूछते हैं : क्या यह यातना, जिसका हमसे वादा किया गया है, सत्य है? आप उनसे कह दें : हाँ, (अल्लाह की क़सम!) निश्चय यह बिल्कुल सत्य है और तुम उससे बच नहीं सकते हो।

10:54Page 215

وَلَوۡ أَنَّ لِكُلِّ نَفۡسٖ ظَلَمَتۡ مَا فِي ٱلۡأَرۡضِ لَٱفۡتَدَتۡ بِهِۦۗ وَأَسَرُّواْ ٱلنَّدَامَةَ لَمَّا رَأَوُاْ ٱلۡعَذَابَۖ وَقُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡقِسۡطِ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ ٥٤

And if each soul that wronged had everything on earth, it would offer it in ransom. And they will confide regret when they see the punishment; and they will be judged in justice, and they will not be wronged.

यदि अल्लाह के साथ शिर्क करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को धरती का सारा बहुमूल्य धन प्राप्त हो जाए, तो वह उसे अपने आपको अल्लाह की यातना से छुड़ाने के बदले में दे देगा, यदि उसे ऐसा करने का अवसर प्रदान किया जाए। तथा बहुदेववादी लोग जब क़ियामत के दिन यातना को देखेंगे, तो अपने अविश्वास पर पछतावे को छिपाएँगे। और अल्लाह उनके बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर देगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें उनके कर्मों का बदला दिया जाएगा।

10:55Page 215

أَلَآ إِنَّ لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ أَلَآ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ٥٥

Unquestionably, to Allāh belongs whatever is in the heavens and the earth. Unquestionably, the promise of Allāh is truth, but most of them do not know.

सुन लो! जो कुछ आकाशों में है उसका मालिक और जो कुछ धरती में है उसका मालिक केवल अल्लाह है। याद रखो! निःसंदेह काफिरों को दंडित करने का अल्लाह का वादा सच्चा है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। परंतु अधिकांश लोग इस बात को नहीं जानते। अतः वे (इसके बारे में) संदेह करते हैं।

10:56Page 215

هُوَ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُ وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ ٥٦

He gives life and causes death, and to Him you will be returned.

वही पवित्र अल्लाह मरे हुए लोगों को जीवित करता है और जीवित लोगों को मौत देता है तथा क़ियामत के दिन तुम सब उसी की ओर लौटाए जाओगे। फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।

10:57Page 215

يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدۡ جَآءَتۡكُم مَّوۡعِظَةٞ مِّن رَّبِّكُمۡ وَشِفَآءٞ لِّمَا فِي ٱلصُّدُورِ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ ٥٧

O mankind, there has come to you instruction from your Lord and healing for what is in the breasts and guidance and mercy for the believers.

ऐ लोगो! तुम्हारे पास क़ुरआन आ गया है, जिसमें सदुपदेश, प्रोत्साहन और डरावा है। तथा वह दिलों के अंदर मौजूद संशय और शंका की बीमारी का इलाज, और सत्य के रास्ते के लिए मार्गदर्शन है, तथा उसमें ईमान वालों के लिए दया है; क्योंकि वही उससे लाभ उठाते हैं।

10:58Page 215

قُلۡ بِفَضۡلِ ٱللَّهِ وَبِرَحۡمَتِهِۦ فَبِذَٰلِكَ فَلۡيَفۡرَحُواْ هُوَ خَيۡرٞ مِّمَّا يَجۡمَعُونَ ٥٨

Say, "In the bounty of Allāh and in His mercy - in that let them rejoice; it is better than what they accumulate."

(ऐ रसूल!) आप लोगों से कह दें : मैं जो क़ुरआन तुम्हारे पास लेकर आया हूँ, वह अल्लाह की तरफ़ से तुमपर एक अनुकंपा और दया है। अतः अल्लाह ने इस क़ुरआन को उतारकर तुमपर जो अनुकंपा और दया की है, उसपर प्रसन्न हो, इनके सिवा किसी और बात पर नहीं। क्योंकि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो कुछ अपने पालनहार की तरफ़ से उनके पास लेकर आए हैं, वह दुनिया की उस नश्वर सामग्री से उत्तम है, जिसे वे इकट्ठा कर रहे हैं।

10:59Page 215

قُلۡ أَرَءَيۡتُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ لَكُم مِّن رِّزۡقٖ فَجَعَلۡتُم مِّنۡهُ حَرَامٗا وَحَلَٰلٗا قُلۡ ءَآللَّهُ أَذِنَ لَكُمۡۖ أَمۡ عَلَى ٱللَّهِ تَفۡتَرُونَ ٥٩

Say, "Have you seen what Allāh has sent down to you of provision of which you have made [some] lawful and [some] unlawful?" Say, "Has Allāh permitted you [to do so], or do you invent [something] about Allāh?"

(ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों (बहुदेववादियों) से कह दें : मुझे इस बारे में बताओ कि अल्लाह ने जो रोज़ी उतारकर तुमपर उपकार किया है, फिर तुमने उसमें अपनी इच्छाओं से काम लेते हुए कुछ को हराम ठहरा लिया है और कुछ को हलाल। आप उनसे पूछें : क्या जिन चीज़ों को तुमने हलाल ठहराया है, उन्हें हलाल ठहराने तथा जिन चीज़ों को तुमने हराम ठहराया है, उन्हें हराम ठहराने की अल्लाह ने तुम्हें अनुमति प्रदान की है, या तुम लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हो?!

10:60Page 215

وَمَا ظَنُّ ٱلَّذِينَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَشۡكُرُونَ ٦٠

And what will be the supposition of those who invent falsehood about Allāh on the Day of Resurrection?1 Indeed, Allāh is the possessor of bounty for the people, but most of them are not grateful.

जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं, वे क्या सोचते हैं कि क़ियामत के दिन उनके साथ क्या कुछ होने वाला है?! क्या वे यह समझते है कि उन्हें क्षमा कर दिया जाएगा?! यह बहुत दूर की बात है। वास्तव में अल्लाह लोगों पर बड़ा कृपालु है कि उन्हें मोहलत देता है और उन्हें दंड देने में जल्दी नहीं करता। परंतु उनमें से अधिकांश लोग अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों का इनकार करने वाले हैं। अतः वे उनके प्रति आभारी नहीं होते।

10:61Page 215

وَمَا تَكُونُ فِي شَأۡنٖ وَمَا تَتۡلُواْ مِنۡهُ مِن قُرۡءَانٖ وَلَا تَعۡمَلُونَ مِنۡ عَمَلٍ إِلَّا كُنَّا عَلَيۡكُمۡ شُهُودًا إِذۡ تُفِيضُونَ فِيهِۚ وَمَا يَعۡزُبُ عَن رَّبِّكَ مِن مِّثۡقَالِ ذَرَّةٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِي ٱلسَّمَآءِ وَلَآ أَصۡغَرَ مِن ذَٰلِكَ وَلَآ أَكۡبَرَ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٍ ٦١

And, [O Muḥammad], you are not [engaged] in any matter and do not recite any of the Qur’ān and you [people] do not do any deed except that We are witness over you when you are involved in it. And not absent from your Lord is any [part] of an atom's weight1 within the earth or within the heaven or [anything] smaller than that or greater but that it is in a clear register.

(ऐ रसूल!) आप जिस कार्य में भी होते हैं और क़ुरआन में से जो कुछ भी पढ़ते हैं, तथा (ऐ मोमिनों!) तुम जो काम भी करते हो, हम तुम्हें जानते हुए देख रहे होते हैं और तुम्हें सुन रहे होते हैं, जब तुम कार्य करना शुरू करते हो। तुम्हारे पालनहार के ज्ञान से आकाश या धरती में कणभर भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं होती। तथा इससे कम वज़न या इससे अधिक वज़न की कोई चीज़ नहीं है, परंतु वह एक स्पष्ट पुस्तक में दर्ज है, जो न कोई छोटी बात छोड़ती है और न बड़ी, बल्कि सबको अपने अंदर समाहित कर रखा है।

10:62Page 216

أَلَآ إِنَّ أَوۡلِيَآءَ ٱللَّهِ لَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ٦٢

Unquestionably, [for] the allies of Allāh there will be no fear concerning them, nor will they grieve -

सुन लो! निःसंदेह अल्लाह के मित्रों को न भविष्य में क़ियामत की भयावहता का डर होगा और न वे दुनिया के छूट जाने वाले आनंद पर शोकाकुल होंगे।

10:63Page 216

ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَكَانُواْ يَتَّقُونَ ٦٣

Those who believed and were fearing Allāh.

ये अल्लाह के मित्र वे लोग हैं, जो अल्लाह पर और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान रखते थे तथा अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते थे।

10:64Page 216

لَهُمُ ٱلۡبُشۡرَىٰ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِۚ لَا تَبۡدِيلَ لِكَلِمَٰتِ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ٦٤

For them are good tidings in the worldly life and in the Hereafter. No change is there in the words [i.e., decrees] of Allāh. That is what is the great attainment.

उनके लिए, उनके पालनहार की ओर से, दुनिया में प्रसन्नता प्रदान करने वाले अच्छे स्वप्न या लोगों की प्रशंसा के रूप में शुभ-सूचना है, तथा उनके लिए फ़रिश्तों की ओर से शुभ समाचार है जब उनके प्राण निकाले जाते हैं, तथा मृत्यु के बाद एवं प्रलय के दिन। अल्लाह ने उनसे जो वादा किया है, उसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा। यह प्रतिफल ही महान सफलता है; क्योंकि इसमें उद्देश्य की प्राप्ति एवं भय से मुक्ति है।

10:65Page 216

وَلَا يَحۡزُنكَ قَوۡلُهُمۡۘ إِنَّ ٱلۡعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعًاۚ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ ٦٥

And let not their speech grieve you. Indeed, honor [due to power] belongs to Allāh entirely. He is the Hearing, the Knowing.

(ऐ रसूल!) ये लोग आपके धर्म के बारे में जो तिरस्कार और लांछन की बातें करते हैं, आप उससे दुःखी न हों। निःसंदेह समस्त प्रभुत्व एवं आधिपत्य अल्लाह ही के लिए है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। वह उनकी बातों का सुनने वाला और उनके कार्यों का जानने वाला है और जल्द ही उन्हें उसका बदला देगा।

10:66Page 216

أَلَآ إِنَّ لِلَّهِ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِۗ وَمَا يَتَّبِعُ ٱلَّذِينَ يَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ شُرَكَآءَۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَإِنۡ هُمۡ إِلَّا يَخۡرُصُونَ ٦٦

Unquestionably, to Allāh belongs whoever is in the heavens and whoever is on the earth. And those who invoke other than Allāh do not [actually] follow [His] "partners." They follow not except assumption, and they are not but misjudging.

सुन लो! जो कोई आकाशों में है और जो कोई धरती में है, सब का मालिक एकमात्र अल्लाह है। और ये बहुदेववादी लोग जो अल्लाह को छोड़कर दूसरे साझीदारों की पूजा करते हैं, वे किस चीज़ का अनुसरण कर रहे हैं?! वास्तव में, वे केवल संदेह का पालन करते हैं, तथा अपने साझीदारों की अल्लाह की ओर निसबत करनें में मात्र झूठ बोल रहे हैं। अल्लाह उनकी बातों से सर्वोच्च एवं महान है।

10:67Page 216

هُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلَّيۡلَ لِتَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يَسۡمَعُونَ ٦٧

It is He who made for you the night to rest therein and the day, giving sight.1 Indeed in that are signs for a people who listen.

वही अकेला है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए रात बनाई, ताकि तुम उसमें हरकत (चलने-फिरने) और थकान से आराम पा सको और दिन को प्रकाशमान बनाया, ताकि उसमें जीवनयापन के लिए लाभदायक वस्तुओं की तलाश में दौड़-धूप कर सको। निःसंदेह इसमें उन लोगों के लिए स्पष्ट निशानियाँ हैं, जो मानने और स्वीकार करने के उद्देश्य से सुनते हैं।

10:68Page 216

قَالُواْ ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ وَلَدٗاۗ سُبۡحَٰنَهُۥۖ هُوَ ٱلۡغَنِيُّۖ لَهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ إِنۡ عِندَكُم مِّن سُلۡطَٰنِۭ بِهَٰذَآۚ أَتَقُولُونَ عَلَى ٱللَّهِ مَا لَا تَعۡلَمُونَ ٦٨

They1 have said, "Allāh has taken a son." Exalted is He; He is the [one] Free of need. To Him belongs whatever is in the heavens and whatever is in the earth. You have no authority2 for this [claim]. Do you say about Allāh that which you do not know?

बहुदेववादियों के एक समूह ने कहा : अल्लाह ने फ़रिश्तों को अपनी पुत्रियाँ बनाया है! अल्लाह उनके इस बात से पवित्र है। वह पवित्र अल्लाह अपनी सभी सृष्टियों से बेनियाज़ है। जो कुछ अकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सबका मालिक वही है। तुम्हारे पास (ऐ बहुदेववादियो!) तुम्हारे इस कथन का कोई प्रमाण नहीं है। क्या तुम बिना किसी प्रमाण के अल्लाह पर एक गंभीर बात कहते हो - कि तुम उसकी ओर संतान की निसबत करते हो - जिसकी सच्चाई तुम नहीं जानते?!

10:69Page 216

قُلۡ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَ لَا يُفۡلِحُونَ ٦٩

Say, "Indeed, those who invent falsehood about Allāh will not succeed."

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निःसंदेह जो लोग अल्लाह की ओर संतान की निसबत करके उसपर झूठ गढ़ते हैं, वे अपने उद्देश्य में कामयाब नहीं होंगे और न उस चीज़ से मुक्ति पा सकेंगे, जिससे वे डर रहे हैं।

10:70Page 216

مَتَٰعٞ فِي ٱلدُّنۡيَا ثُمَّ إِلَيۡنَا مَرۡجِعُهُمۡ ثُمَّ نُذِيقُهُمُ ٱلۡعَذَابَ ٱلشَّدِيدَ بِمَا كَانُواْ يَكۡفُرُونَ ٧٠

[For them is brief] enjoyment in this world; then to Us is their return; then We will make them taste the severe punishment because they used to disbelieve.

अतः वे संसार की सुख-सामग्रियों और नेमतों का जो आनंद ले रहे हैं, उससे धोखा न खाएँ। क्योंकि यह एक क्षणभंगुर थोड़ा-सा सुख है। फिर उन्हें क़ियामत के दिन हमारे ही पास लौटना है। फिर हम उन्हें उनके अल्लाह का इनकार करने और उसके रसूल को झुठलाने के कारण कठोर यातना का मज़ा चखाएँगे।

10:71Page 217

۞ وَٱتۡلُ عَلَيۡهِمۡ نَبَأَ نُوحٍ إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِن كَانَ كَبُرَ عَلَيۡكُم مَّقَامِي وَتَذۡكِيرِي بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَعَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡتُ فَأَجۡمِعُوٓاْ أَمۡرَكُمۡ وَشُرَكَآءَكُمۡ ثُمَّ لَا يَكُنۡ أَمۡرُكُمۡ عَلَيۡكُمۡ غُمَّةٗ ثُمَّ ٱقۡضُوٓاْ إِلَيَّ وَلَا تُنظِرُونِ ٧١

And recite to them the news of Noah, when he said to his people, "O my people, if my residence and my reminding of the signs of Allāh has become burdensome upon you - then I have relied upon Allāh. So resolve upon your plan and [call upon] your associates. Then let not your plan be obscure to you.1 Then carry it out upon me and do not give me respite.

(ऐ रसूल!) आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों (बहुदेववादियों) को नूह अलैहिस्सलाम का वृत्तांत सुनाएँ, जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि मेरा तुम्हारे बीच खड़ा होना तुमपर भारी लगता है तथा मेरा अल्लाह की आयतों द्वारा उपदेश देना और नसीहत करना तुम्हारे लिए कष्ट का कारण बन गया है, और तुमने मेरी हत्या का संकल्प कर लिया है, तो मैंने तुम्हारी साजिश को विफल करने में केवल अल्लाह पर भरोसा किया है। अतः तुम अपना मामला सुनिश्चित कर लो और मुझे मारने का पक्का इरादा कर लो, तथा मदद के लिए अपने देवी-देवताओं को भी बुला लो। फिर अपनी साजिश को एक अस्पष्ट रहस्य न रखो और फिर मुझे मारने की योजना बनाने के बाद जो तुम्हारे दिल में है, उसे कर डालो और मुझे एक क्षण के लिए भी मोहलत न दो।

10:72Page 217

فَإِن تَوَلَّيۡتُمۡ فَمَا سَأَلۡتُكُم مِّنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ ٧٢

And if you turn away [from my advice] - then no payment have I asked of you. My reward is only from Allāh, and I have been commanded to be of the Muslims [i.e., those who submit to Allāh]."

यदि तुमने मेरे (अल्लाह के धर्म की ओर) बुलावे से मुँह फेर लिया, तो तुम जानते हो कि मैंने तुम्हें अपने पालनहार का संदेश पहुँचाने पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगा है। तुम लोग मुझपर ईमान लाओ या कुफ़्र करो, मेरा सवाब (बदला) अल्लाह के ज़िम्मे है। अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं उन लोगों में से हो जाऊँ, जो आज्ञाकारित और सत्कर्म के साथ उसके अधीन रहने वाले हैं।

10:73Page 217

فَكَذَّبُوهُ فَنَجَّيۡنَٰهُ وَمَن مَّعَهُۥ فِي ٱلۡفُلۡكِ وَجَعَلۡنَٰهُمۡ خَلَٰٓئِفَ وَأَغۡرَقۡنَا ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَاۖ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُنذَرِينَ ٧٣

And they denied him, so We saved him and those with him in the ship and made them successors, and We drowned those who denied Our signs. Then see how was the end of those who were warned.

फिर भी उनकी क़ौम ने उन्हें झुठलाया और उनको सच्चा नहीं माना। अतः हमने उन्हें और उनके साथ नाव में सवार मोमिनों को बचा लिया और उन्हें उनसे पहले के लोगों का उत्तराधिकारी बना दिया। तथा जिन लोगों ने उनकी लाई हुई निशानियों और प्रमाणों को झुठलाया था, हमने उन्हें तूफ़ान (बाढ़) के द्वारा नष्ट कर दिया। अतः (ऐ रसूल!) आप सोचें कि जिन लोगों को नूह अलैहिस्सलाम ने सचेत किया था, पर वे ईमान नहीं लाए, उनका अंतिम परिणाम क्या हुआ?

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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