Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Yunus 10:74–109
10:74Page 217
ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِۦ رُسُلًا إِلَىٰ قَوۡمِهِمۡ فَجَآءُوهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْ بِمَا كَذَّبُواْ بِهِۦ مِن قَبۡلُۚ كَذَٰلِكَ نَطۡبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلۡمُعۡتَدِينَ ٧٤
Then We sent after him messengers to their peoples, and they came to them with clear proofs. But they were not to believe in that which they had denied before.1 Thus We seal over the hearts of the transgressors.
फिर कुछ समय के बाद, हमने नूह अलैहिस्सलाम के पश्चात् बहुत-से रसूल उनकी क़ौमों की ओर भेजे। तो वे रसूल अपने समुदायों के पास निशानियों और प्रमाणों के साथ आए। परंतु रसूलों को झुठलाने के उनके पिछले आग्रह के कारण उनमें ईमान लाने की कोई इच्छा नहीं थी। अतः अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। जिस प्रकार हमने पिछले रसूलों के अनुयायियों के दिलों पर मुहर लगा दी थी, उसी प्रकार हम हर समय और जगह में उन काफ़िरों के दिलों पर मुहर लगा देते हैं, जो कुफ़्र के साथ अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।
10:75Page 217
ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِم مُّوسَىٰ وَهَٰرُونَ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِۦ بِـَٔايَٰتِنَا فَٱسۡتَكۡبَرُواْ وَكَانُواْ قَوۡمٗا مُّجۡرِمِينَ ٧٥
Then We sent after them Moses and Aaron to Pharaoh and his establishment with Our signs, but they behaved arrogantly and were a criminal people.
फिर कुछ समय के बाद, हमने इन रसूलों के पश्चात मूसा और उनके भाई हारून अलैहिमस्सलाम को मिस्र के राजा फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों की ओर भेजा। हमने उन दोनों को उनकी सत्यता को दर्शाने वाली निशानियों के साथ भेजा था। परंतु उन्होंने घमंड के कारण उन दोनों के लाए हुए धर्म को मानने से इनकार कर दिया। दरअसल, वे अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूलों को झुठलाने के कारण अपराधी लोग थे।
10:76Page 217
فَلَمَّا جَآءَهُمُ ٱلۡحَقُّ مِنۡ عِندِنَا قَالُوٓاْ إِنَّ هَٰذَا لَسِحۡرٞ مُّبِينٞ ٧٦
So when there came to them the truth from Us, they said, "Indeed, this is obvious magic."
फिर जब फिरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों के पास वह धर्म आ गया, जिसे मूसा और हारून अलैहिमस्सलाम लेकर आए थे, तो उन लोगों ने मूसा अलैहिस्सलाम के लाए हुए धर्म की सत्यता को दर्शाने वाली निशानियों के बारे में कहा : निःसंदेह यह तो खुला जादू है, यह सत्य नहीं है।
10:77Page 217
قَالَ مُوسَىٰٓ أَتَقُولُونَ لِلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَكُمۡۖ أَسِحۡرٌ هَٰذَا وَلَا يُفۡلِحُ ٱلسَّٰحِرُونَ ٧٧
Moses said, "Do you say [thus] about the truth when it has come to you? Is this magic? But magicians will not succeed."
मूसा अलैहिस्सलाम ने उनकी निंदा करते हुए कहा : क्या तुम सत्य के बारे में, जबकि वह तुम्हारे पास आ गया है, ऐसा कहते हो कि वह जादू है?! कदापि नहीं, वह जादू नहीं है। निश्चय मैं जानता हूँ कि जादूगर कभी सफल नहीं होता। फिर मैं इसका उपयोग कैसे कर सकता हूँ?!
10:78Page 217
قَالُوٓاْ أَجِئۡتَنَا لِتَلۡفِتَنَا عَمَّا وَجَدۡنَا عَلَيۡهِ ءَابَآءَنَا وَتَكُونَ لَكُمَا ٱلۡكِبۡرِيَآءُ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَمَا نَحۡنُ لَكُمَا بِمُؤۡمِنِينَ ٧٨
They said, "Have you come to us to turn us away from that upon which we found our fathers and so that you two may have grandeur in the land? And we are not believers in you."
फिरऔन की क़ौम ने मूसा अलैहिस्सलाम को यह कहते हुए उत्तर दिया : क्या तुम इस जादू के साथ हमारे पास इसलिए आए हो, ताकि हमें उस धर्म से फेर दो, जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है, तथा तुम्हें और तुम्हारे भाई को राज्य प्राप्त हो जाए? हम (ऐ मूसा और हारून!) तुम्हारे लिए इस बात को स्वीकार करने वाले नहीं हैं कि तुम दोनों हमारी तरफ़ भेजे गए रसूल (संदेष्टा) हो।
10:79Page 218
وَقَالَ فِرۡعَوۡنُ ٱئۡتُونِي بِكُلِّ سَٰحِرٍ عَلِيمٖ ٧٩
And Pharaoh said, "Bring to me every learned magician."
फ़िरऔन ने अपनी क़ौम से कहा : मेरे पास हर ऐसे जादूगर को लेकर आओ, जिसे जादू में महारत हासिल हो और उसमें निपुण हो।
10:80Page 218
فَلَمَّا جَآءَ ٱلسَّحَرَةُ قَالَ لَهُم مُّوسَىٰٓ أَلۡقُواْ مَآ أَنتُم مُّلۡقُونَ ٨٠
So when the magicians came, Moses said to them, "Throw down whatever you will throw."
जब वे फ़िरऔन के पास जादूगरों को ले आए, तो मूसा अलैहिस्सलाम ने उनपर अपनी जीत के बारे में आश्वस्त होकर उनसे कहा : (ऐ जादूगरो!) तुम्हें जो कुछ डालना है, डालो।
10:81Page 218
فَلَمَّآ أَلۡقَوۡاْ قَالَ مُوسَىٰ مَا جِئۡتُم بِهِ ٱلسِّحۡرُۖ إِنَّ ٱللَّهَ سَيُبۡطِلُهُۥٓ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُصۡلِحُ عَمَلَ ٱلۡمُفۡسِدِينَ ٨١
And when they had thrown, Moses said, "What you have brought is [only] magic. Indeed, Allāh will expose its worthlessness. Indeed, Allāh does not amend the work of corrupters.
फिर जब उन्होंने अपने पास मौजूद जादू को फेंक दिया, तो मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : जो कुछ तुमने दिखाया है, वह जादू है। निःसंदेह अल्लाह, जो कुछ तुमने किया है, उसे इस तरह विनष्ट कर देगा कि उसका कोई निशान नहीं रहेगा। वास्तव में, तुम लोग अपने जादू द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करने वाले हो, और अल्लाह बिगाड़ पैदा करने वाले के कार्य को नहीं सुधारता है।
10:82Page 218
وَيُحِقُّ ٱللَّهُ ٱلۡحَقَّ بِكَلِمَٰتِهِۦ وَلَوۡ كَرِهَ ٱلۡمُجۡرِمُونَ ٨٢
And Allāh will establish the truth by His words, even if the criminals dislike it."
अल्लाह अपने पूर्वनियति शब्दों के साथ तथा अपने शरई शब्दों में विद्यमान प्रमाणों एवं तर्कों के साथ सत्य को स्थापित और सशक्त कर देता है, भले ही फिरऔनियों के अपराधी काफिरों को बुरा लगे।
10:83Page 218
فَمَآ ءَامَنَ لِمُوسَىٰٓ إِلَّا ذُرِّيَّةٞ مِّن قَوۡمِهِۦ عَلَىٰ خَوۡفٖ مِّن فِرۡعَوۡنَ وَمَلَإِيْهِمۡ أَن يَفۡتِنَهُمۡۚ وَإِنَّ فِرۡعَوۡنَ لَعَالٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَإِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ ٨٣
But no one believed Moses, except [some] offspring [i.e., youths] among his people, for fear of Pharaoh and his establishment that they would persecute them. And indeed, Pharaoh was haughty within the land, and indeed, he was of the transgressors.
मूसा अलैहिस्सलाम की क़ौम ने मुँह फेरने की ठान रखी थी। चुनाँचे मूसा अलैहिस्सलाम पर (उनके प्रत्यक्ष निशानियों और स्पष्ट प्रमाणों को लाने के बाद भी) उनकी क़ौम बनू इसराईल के केवल कुछ युवाओं ने विश्वास किया, जबकि वे फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सरदारों से डरे हुए थे कि उनका मामला अगर प्रकाश में आ गया, तो वे उन्हें यातना में डालकर उन्हें उनके ईमान से विचलित न कर दें। दरअसल, फिरऔन अभिमानी तथा मिस्र और उसके लोगों पर हावी व मुसल्लत था। तथा निःसंदेह वह कुफ़्र, बनू इसराईल की हत्या करने और उन्हें यातना देने में हद से आगे बढ़ा हुआ था।
10:84Page 218
وَقَالَ مُوسَىٰ يَٰقَوۡمِ إِن كُنتُمۡ ءَامَنتُم بِٱللَّهِ فَعَلَيۡهِ تَوَكَّلُوٓاْ إِن كُنتُم مُّسۡلِمِينَ ٨٤
And Moses said, "O my people, if you have believed in Allāh, then rely upon Him, if you should be Muslims [i.e., submitting to Him]."
मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यदि तुम अल्लाह पर सच्चा ईमान रखते हो, तो केवल अल्लाह ही पर भरोसा करो, अगर तुम आज्ञाकारी हो। क्योंकि अल्लाह पर भरोसा तुमसे बुराई को दूर कर देगा और तुम्हारे लिए भलाई लाएगा।
10:85Page 218
فَقَالُواْ عَلَى ٱللَّهِ تَوَكَّلۡنَا رَبَّنَا لَا تَجۡعَلۡنَا فِتۡنَةٗ لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّٰلِمِينَ ٨٥
So they said, "Upon Allāh do we rely. Our Lord, make us not [objects of] trial for the wrongdoing people
तो उन्होंने मूसा अलैहिस्सलाम को जवाब देते हुए कहा : हमने केवल अल्लाह पर भरोसा किया है। ऐ हमारे पालनहार! तू हमपर अत्याचारियों को प्रभुत्व प्रदान न कर कि वे यातना, हत्या और प्रलोभन द्वारा हमें हमारे धर्म से भटका दें।
10:86Page 218
وَنَجِّنَا بِرَحۡمَتِكَ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡكَٰفِرِينَ ٨٦
And save us by Your mercy from the disbelieving people."
और (ऐ हमारे पालनहार!) अपनी दया से हमें फ़िरऔन की काफ़िर क़ौम के हाथों से मुक्ति प्रदान कर, क्योंकि उन्होंने हमें गुलाम बनाकर रखा है और हमें यातना और हत्या द्वारा प्रताड़ित किया है।
10:87Page 218
وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰ وَأَخِيهِ أَن تَبَوَّءَا لِقَوۡمِكُمَا بِمِصۡرَ بُيُوتٗا وَٱجۡعَلُواْ بُيُوتَكُمۡ قِبۡلَةٗ وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَۗ وَبَشِّرِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٨٧
And We inspired to Moses and his brother, "Settle your people in Egypt in houses and make your houses [facing the] qiblah1 and establish prayer and give good tidings to the believers."
और हमने मूसा और उनके भाई हारून अलैहिमस्सलाम की ओर वह़्य (प्रकाशना) भेजी कि तुम दोनों अपनी क़ौम के लिए मिस्र में एक अल्लाह की उपासना हेतु कुछ घर बनाओ और अपने घरों का रुख क़िबला (बैतुल मक़्दिस) की दिशा में रखो तथा संपूर्ण रूप से नमाज़ अदा करो। तथा (ऐ मूसा!) आप ईमान वालों को यह प्रसन्नतापूर्ण सूचना दे दें कि अल्लाह उनकी मदद करेगा, उन्हें समर्थन देगा, उनके दुश्मनों का विनाश करेगा और उन्हें धर्ती में ख़लीफा (उत्तराधिकारी) बनाएगा।
10:88Page 218
وَقَالَ مُوسَىٰ رَبَّنَآ إِنَّكَ ءَاتَيۡتَ فِرۡعَوۡنَ وَمَلَأَهُۥ زِينَةٗ وَأَمۡوَٰلٗا فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا رَبَّنَا لِيُضِلُّواْ عَن سَبِيلِكَۖ رَبَّنَا ٱطۡمِسۡ عَلَىٰٓ أَمۡوَٰلِهِمۡ وَٱشۡدُدۡ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَلَا يُؤۡمِنُواْ حَتَّىٰ يَرَوُاْ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ ٨٨
And Moses said, "Our Lord, indeed You have given Pharaoh and his establishment splendor and wealth in the worldly life, our Lord, that they may lead [men] astray from Your way. Our Lord, obliterate their wealth and harden their hearts so that they will not believe until they see the painful punishment."
मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! तूने फ़िरऔन और उसकी क़ौम की अशराफिया को दुनिया की चमक-दमक और शोभा-सामग्री प्रदान की है और उन्हें इस सांसारिक जीवन में धन-संपत्ति दी है, परंतु जो कुछ तूने उन्हें दिया उसके लिए उन्होंने तेरा शुक्रिया अदा नहीं किया। बल्कि उन्होंने उनका इस्तेमाल तेरे रास्ते से लोगों को भटकाने के लिए किया। ऐ हमारे रब! उनके धन को तबाह और नष्ट कर दे और उनके हृदय को इतना कठोर बना दे कि वे उस समय तक ईमान न लाएँ जबतक कि दर्दनाक यातना को अपने सामने न देख लें, जिस समय उनके ईमान से उन्हें कोई फ़ायदा न होगा।
10:89Page 219
قَالَ قَدۡ أُجِيبَت دَّعۡوَتُكُمَا فَٱسۡتَقِيمَا وَلَا تَتَّبِعَآنِّ سَبِيلَ ٱلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَ ٨٩
[Allāh] said, "Your supplication has been answered."1 So remain on a right course and follow not the way of those who do not know."
अल्लाह ने फरमाया : मैंने (ऐ मूसा और हारून!) तुम दोनों की फ़िरऔन और उसकी क़ौम की अशराफिया के विरूद्ध दुआ को स्वीकार कर लिया। अतः तुम दोनों अपने धर्म पर जमे रहो और उससे मुँह फेरकर उन अज्ञानियों के मार्ग का अनुसरण न करो, जो सत्य के मार्ग का ज्ञान नहीं रखते।
10:90Page 219
۞ وَجَٰوَزۡنَا بِبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱلۡبَحۡرَ فَأَتۡبَعَهُمۡ فِرۡعَوۡنُ وَجُنُودُهُۥ بَغۡيٗا وَعَدۡوًاۖ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَدۡرَكَهُ ٱلۡغَرَقُ قَالَ ءَامَنتُ أَنَّهُۥ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱلَّذِيٓ ءَامَنَتۡ بِهِۦ بَنُوٓاْ إِسۡرَٰٓءِيلَ وَأَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ ٩٠
And We took the Children of Israel across the sea, and Pharaoh and his soldiers pursued them in tyranny and enmity until, when drowning overtook him, he said, "I believe that there is no deity except that in whom the Children of Israel believe, and I am of the Muslims."
और हमने सागर को फाड़ने के बाद बनी इसराईल के लिए उसे पार करना आसान बना दिया, यहाँ तक कि उन्होंने उसे सुरक्षित रूप से पार कर लिया। फिर फ़िरऔन और उसके सैनिकों ने अत्याचार और ज़्यादती करते हुए उनका पीछा किया। यहाँ तक कि जब सागर के दोनों भाग उसपर मिल गए और वह डूबने लगा और बचने की कोई उम्मीद न रही, तो कहने लगा : मैं ईमान ले आया कि उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, जिसपर बनी इसराईल ईमान लाए हैं और मैं अल्लाह के आज्ञाकारियों में से हूँ।
10:91Page 219
ءَآلۡـَٰٔنَ وَقَدۡ عَصَيۡتَ قَبۡلُ وَكُنتَ مِنَ ٱلۡمُفۡسِدِينَ ٩١
Now? And you had disobeyed [Him] before and were of the corrupters?
क्या तू जीवन से निराश होने के बाद अब ईमान ला रहा है?! हालाँकि (ऐ फ़िरऔन!) तू अल्लाह की यातना उतरने से पहले, उसका इनकार करके और उसके रास्ते से रोककर, अल्लाह की अवज्ञा करता रहा है और तू बिगाड़ पैदा करने वालों में से था, क्योंकि तू स्वयं पथभ्रष्ट था और दूसरों को भी पथभ्रष्ट करता था।
10:92Page 219
فَٱلۡيَوۡمَ نُنَجِّيكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُونَ لِمَنۡ خَلۡفَكَ ءَايَةٗۚ وَإِنَّ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلنَّاسِ عَنۡ ءَايَٰتِنَا لَغَٰفِلُونَ ٩٢
So today We will save you in body1 that you may be to those who succeed you a sign. And indeed, many among the people, of Our signs, are heedless.
आज हम तुझे (ऐ फिरऔन!) समुद्र से निकाल लेंगे और तुझे एक ऊँचे स्थान पर डाल देंगे, ताकि तेरे बाद आने वाले लोग तुझसे सीख ग्रहण करें। वास्तव में अधिकतर लोग हमारे तर्कों और हमारी शक्ति के प्रमाणों से अनभिज्ञ हैं, उनमें सोच-विचार नहीं करते।
10:93Page 219
وَلَقَدۡ بَوَّأۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ مُبَوَّأَ صِدۡقٖ وَرَزَقۡنَٰهُم مِّنَ ٱلطَّيِّبَٰتِ فَمَا ٱخۡتَلَفُواْ حَتَّىٰ جَآءَهُمُ ٱلۡعِلۡمُۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقۡضِي بَيۡنَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كَانُواْ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ ٩٣
And We had certainly settled the Children of Israel in an agreeable settlement and provided them with good things. And they did not differ until [after] knowledge had come to them. Indeed, your Lord will judge between them on the Day of Resurrection concerning that over which they used to differ.
और हमने बनी इसराईल को शाम (लेवंत) की धन्य भूमि में एक सुखद स्थान और एक मनभावन ठिकाना दिया और उन्हें हलाल व शुद्ध चीज़ों से जीविका प्रदान की। फिर उन्होंने अपने धर्म के मामले में मतभेद नहीं किया, यहाँ तक कि उनके पास क़ुरआन आ गया, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उन गुणों एवं विशेषताओं की पुष्टि करने वाला है, जो उन्होंने तौरात में पढ़ा था। फिर जब उन लोगों ने इसका इनकार कर दिया, तो उनके क्षेत्रों को छीन लिया गया। निश्चय ही (ऐ रसूल!) आपका पालनहार क़ियामत के दिन उनके बीच उस चीज़ के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे मतभेद कर रहे थे। फिर वह उनमें से सत्यवादी और असत्यवादी को वह बदला देगा, जिसका उन दोनों में से प्रत्येक हक़दार होगा।
10:94Page 219
فَإِن كُنتَ فِي شَكّٖ مِّمَّآ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ فَسۡـَٔلِ ٱلَّذِينَ يَقۡرَءُونَ ٱلۡكِتَٰبَ مِن قَبۡلِكَۚ لَقَدۡ جَآءَكَ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُمۡتَرِينَ ٩٤
So if you are in doubt, [O Muḥammad], about that which We have revealed to you, then ask those who have been reading the Scripture before you. The truth has certainly come to you from your Lord, so never be among the doubters.
यदि (ऐ रसूल!) आप उस क़ुरआन की सच्चाई के बारे में, जो हमने आपकी ओर उतारा है, संदेह और अचरज में हैं, तो ईमान लाने वाले उन यहूदियों से पूछ लें जो तौरात पढ़ते हैं और उन ईसाइयों से पूछ लें जो इंजील पढ़ते हैं। वे आपको बताएँगे कि आपपर जो उतारा गया है, वह सत्य है; क्योंकि वे अपनी पुस्तकों में उसका विवरण पाते हैं। निःसंदेह आपके पास आपके पालनहार की ओर से वह सत्य आया है, जिसमें कोई संदेह नहीं है। अतः आप कदापि संदेह करने वालों में से न हों।
10:95Page 219
وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ فَتَكُونَ مِنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٩٥
And never be of those who deny the signs of Allāh and [thus] be among the losers.1
और आप कदापि उन लोगों में से न हों, जिन्होंने अल्लाह के तर्कों एवं प्रमाणों को झुठला दिया। अन्यथा इसकी वजह से आप उन घाटा उठाने वाले लोगों में से हो जाएँगे, जिन्होंने अपने अविश्वास के कारण अपने आपको विनाश से ग्रस्त करके खुद अपना घाटा किया। यह सारी चेतावनी शक और इनकार के खतरे एवं गंभीरता को बयान करने के लिए है, अन्यथा नबी इस बात से मा'सूम (पवित्र) हैं कि उनकी ओर से इस तरह की कोई बात सामने आए।
10:96Page 219
إِنَّ ٱلَّذِينَ حَقَّتۡ عَلَيۡهِمۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ لَا يُؤۡمِنُونَ ٩٦
Indeed, those upon whom the word [i.e., decree] of your Lord has come into effect will not believe,
निःसंदेह जिन लोगों के विषय में अल्लाह का फ़ैसला सिद्ध हो चुका है कि वे कुफ़्र पर जमे रहने के कारण कुफ़्र ही पर मरेंगे, वे कभी भी ईमान नहीं लाएँगे।
10:97Page 219
وَلَوۡ جَآءَتۡهُمۡ كُلُّ ءَايَةٍ حَتَّىٰ يَرَوُاْ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ ٩٧
Even if every sign should come to them, until they see the painful punishment.
यद्यपि उनके पास प्रत्येक धार्मिक अथवा ब्रह्मांडीय निशानी आ जाए। यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना अपनी आँखों से देख लें, तब वे ईमान ले आएँगे, जबकि उस समय ईमान लाना उनको लाभ नहीं देगा।
10:98Page 220
فَلَوۡلَا كَانَتۡ قَرۡيَةٌ ءَامَنَتۡ فَنَفَعَهَآ إِيمَٰنُهَآ إِلَّا قَوۡمَ يُونُسَ لَمَّآ ءَامَنُواْ كَشَفۡنَا عَنۡهُمۡ عَذَابَ ٱلۡخِزۡيِ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَمَتَّعۡنَٰهُمۡ إِلَىٰ حِينٖ ٩٨
Then has there not been a [single] city that believed so its faith benefited it except the people of Jonah? When they believed, We removed from them the punishment of disgrace in worldly life and gave them enjoyment [i.e., provision] for a time.
ऐसा नहीं हुआ है कि जिन बस्तियों की ओर हमने अपने रसूलों को भेजा था, उनमें से कोई बस्ती यातना देखने से पहले सार्थक रूप से ईमान लाई हो, फिर यातना देखने से पहले ईमान लाने के कारण उसका ईमान उसे लाभ पहुँचाया हो, सिवाय यूनुस अलैहिस्सलाम की क़ौम के, कि जब वे सच्चा ईमान ले आए, तो हमने सांसारिक जीवन में उनके ऊपर से अपमान व तिरस्कार के अज़ाब को हटा दिया और उन्हें उनकी समय सीमा समाप्त होने तक (दुनिया की सामग्रियों से) लाभान्वित होने का अवसर प्रदान किया।
10:99Page 220
وَلَوۡ شَآءَ رَبُّكَ لَأٓمَنَ مَن فِي ٱلۡأَرۡضِ كُلُّهُمۡ جَمِيعًاۚ أَفَأَنتَ تُكۡرِهُ ٱلنَّاسَ حَتَّىٰ يَكُونُواْ مُؤۡمِنِينَ ٩٩
And had your Lord willed, those on earth would have believed - all of them entirely. Then, [O Muḥammad], would you compel the people in order that they become believers?
और यदि (ऐ रसूल!) आपका पालनहार धरती में मौजूद सभी लोगों को ईमान वाला बनाना चाहता, तो सभी लोग अवश्य ईमान ले आते, परंतु अपनी हिकमत के कारण उसने ऐसा नहीं चाहा। अतः वह जिसे चाहता है, अपने न्याय से गुमराह कर देता है और जिसे चाहता है, अपनी कृपा से मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसलिए आप लोगों को ईमान लाने पर मजबूर नहीं कर सकते। क्योंकि उन्हें ईमान लाने की तौफ़ीक़ देना केवल अल्लाह के हाथ में है।
10:100Page 220
وَمَا كَانَ لِنَفۡسٍ أَن تُؤۡمِنَ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۚ وَيَجۡعَلُ ٱلرِّجۡسَ عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يَعۡقِلُونَ ١٠٠
And it is not for a soul [i.e., anyone] to believe except by permission of Allāh, and He will place defilement1 upon those who will not use reason.
किसी भी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना अपने आप ईमान ले आए। अतः अल्लाह की इच्छा के बिना ईमान नहीं पाया जा सकता। इसलिए आप उनपर अफ़सोस न करें। अल्लाह उन लोगों पर यातना और अपमान डाल देता है, जो उसके प्रमाणों व तर्कों तथा उसके आदेशों और निषेधों को नहीं समझते हैं।
10:101Page 220
قُلِ ٱنظُرُواْ مَاذَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَمَا تُغۡنِي ٱلۡأٓيَٰتُ وَٱلنُّذُرُ عَن قَوۡمٖ لَّا يُؤۡمِنُونَ ١٠١
Say, "Observe what is in the heavens and the earth." But of no avail will be signs or warners to a people who do not believe.
(ऐ रसूल!) आप उन मुश्रिकों से, जो आपसे निशानियों का प्रश्न करते हैं, कह दें : विचार करो कि आकाशों और धरती में अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसकी शक्ति को इंगित करने वाली क्या-क्या निशानियाँ हैं। जो लोग, अविश्वास पर अपने हठ के कारण, ईमान लाने को तैयार नहीं हैं, उन्हें निशानियों, तर्कों और संदेशवाहकों का उतारना कोई लाभ नहीं देता।
10:102Page 220
فَهَلۡ يَنتَظِرُونَ إِلَّا مِثۡلَ أَيَّامِ ٱلَّذِينَ خَلَوۡاْ مِن قَبۡلِهِمۡۚ قُلۡ فَٱنتَظِرُوٓاْ إِنِّي مَعَكُم مِّنَ ٱلۡمُنتَظِرِينَ ١٠٢
So do they wait except for like [what occurred in] the days of those who passed on before them? Say, "Then wait; indeed, I am with you among those who wait."
तो क्या ये झुठलाने वाले लोग उसी तरह की घटनाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनसे अल्लाह ने इनसे पहले के झुठलाने वाले समुदायों को ग्रस्त किया था?! आप (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए : तुम अल्लाह की यातना की प्रतीक्षा करो, मैं (भी) तुम्हारे साथ अपने पालनहार के वादे की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।
10:103Page 220
ثُمَّ نُنَجِّي رُسُلَنَا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۚ كَذَٰلِكَ حَقًّا عَلَيۡنَا نُنجِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ١٠٣
Then We will save Our messengers and those who have believed. Thus, it is an obligation upon Us that We save the believers.1
फिर हम उनपर दंड उतार देते हैं और अपने रसूलों को बचा लेते हैं, तथा उनके साथ ईमान लाने वालों को भी बचा लेते हैं। इसलिए वे उस यातना से पीड़ित नहीं होते, जिससे उनकी क़ौम ग्रस्त होती है। जिस प्रकार हमने उन रसूलों और उनके साथ मोमिनों को बचा लिया, ऐसे ही हम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को और आपके साथ मोमिनों को बचा लेंगे। यह बचाना हमपर एक सिद्ध अधिकार है।
10:104Page 220
قُلۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِن كُنتُمۡ فِي شَكّٖ مِّن دِينِي فَلَآ أَعۡبُدُ ٱلَّذِينَ تَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلَٰكِنۡ أَعۡبُدُ ٱللَّهَ ٱلَّذِي يَتَوَفَّىٰكُمۡۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ١٠٤
Say, [O Muḥammad], "O people, if you are in doubt as to my religion - then I do not worship those which you worship besides Allāh; but I worship Allāh, who causes your death. And I have been commanded to be of the believers
(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ लोगो! यदि तुम मेरे उस धर्म के विषय में संदेह में हो, जिसकी ओर मैं तुम्हें आमंत्रित करता हूँ और वह तौहीद (एकेश्वरवाद) का धर्म है, तो मैं तुम्हारे धर्म के भ्रष्ट होने के बारे में निश्चित हूँ, इसलिए मैं उसका अनुसरण नहीं करता। तथा मैं उनकी पूजा नहीं करता, जिनकी तुम अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हो। परंतु मैं उस अल्लाह की इबादत करता हूँ, जो तुम्हें मौत देता है और उसने मुझे आदेश दिया है कि मैं उसके धर्म के प्रति निष्ठावान मोमिनों (विश्वासियों) में से रहूँ।
10:105Page 220
وَأَنۡ أَقِمۡ وَجۡهَكَ لِلدِّينِ حَنِيفٗا وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ ١٠٥
And [commanded], 'Direct your face [i.e., self] toward the religion, inclining to truth, and never be of those who associate others with Allāh;
तथा उसने मुझे यह भी आदेश दिया है कि मैं सत्य धर्म पर स्थापित रहूँ और सभी धर्मों से विमुख होकर उसी पर स्थिर रहूँ, और मुझे इस बात से मना किया है कि मैं उसके साथ शिर्क करने वालों में से होऊँ।
10:106Page 220
وَلَا تَدۡعُ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكَ وَلَا يَضُرُّكَۖ فَإِن فَعَلۡتَ فَإِنَّكَ إِذٗا مِّنَ ٱلظَّٰلِمِينَ ١٠٦
And do not invoke1 besides Allāh that which neither benefits you nor harms you, for if you did, then indeed you would be of the wrongdoers.'"2
(ऐ रसूल!) आप अल्लाह के सिवा उन मूर्तियों और प्रतिमाओं इत्यादि को न पुकारें, जो न किसी लाभ के मालिक हैं कि आपको लाभ पहुँचा सकें और न किसी हानि के मालिक हैं कि आपको हानि पहुँचा सकें। क्योंकि यदि आपने उनकी पूजा की, तो फिर आप अल्लाह के अधिकार और स्वयं के अधिकार पर अतिक्रमण करने वाले अत्याचारियों में से हो जाएँगे।
10:107Page 221
وَإِن يَمۡسَسۡكَ ٱللَّهُ بِضُرّٖ فَلَا كَاشِفَ لَهُۥٓ إِلَّا هُوَۖ وَإِن يُرِدۡكَ بِخَيۡرٖ فَلَا رَآدَّ لِفَضۡلِهِۦۚ يُصِيبُ بِهِۦ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ ١٠٧
And if Allāh should touch you with adversity, there is no remover of it except Him; and if He intends for you good, then there is no repeller of His bounty. He causes it to reach whom He wills of His servants. And He is the Forgiving, the Merciful.
यदि अल्लाह (ऐ रसूल!) आपको किसी विपत्ति से पीड़ित कर दे और आप उसे अपने से दूर करना चाहें, तो पवित्र अल्लाह के सिवा कोई उसे दूर करने वाला नहीं, और यदि वह आपके साथ भलाई का इरादा कर ले, तो कोई उसके अनुग्रह को रोक नहीं सकता। वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, अपने अनुग्रह से सम्मानित करता है। अतः उसे कोई विवश करने वाला नहीं। तथा वह अपने तौबा करने वाले बंदों को बहुत क्षमा करने वाला, उनपर अत्यंत दयावान है।
10:108Page 221
قُلۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدۡ جَآءَكُمُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكُمۡۖ فَمَنِ ٱهۡتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهۡتَدِي لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن ضَلَّ فَإِنَّمَا يَضِلُّ عَلَيۡهَاۖ وَمَآ أَنَا۠ عَلَيۡكُم بِوَكِيلٖ ١٠٨
Say, "O mankind, the truth has come to you from your Lord, so whoever is guided is only guided for [the benefit of] his soul, and whoever goes astray only goes astray [in violation] against it. And I am not over you a manager."
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : ऐ लोगो! तुम्हारे पालनहार की ओर से अवतिरत क़ुरआन तुम्हारे पास आ गया है। अतः जो कोई सीधा मार्ग अपनाएगा और उसपर ईमान लाएगा, उसका लाभ उसी को प्राप्त होगा, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों की आज्ञाकारिता से निस्पृह है। और जो कोई पथभ्रष्टता का मार्ग अपनाएगा, उसकी पथभ्रष्टता का प्रभाव केवल उसी पर होगा, क्योंकि अल्लाह को उसके बंदों की अवज्ञा से हानि नहीं पहुँच सकती। और मैं तुम्हारे ऊपर कोई निरीक्षक नहीं हूँ कि तुम्हारे कर्मों का संरक्षण करूँ और तुमसे उनका हिसाब लूँ।
10:109Page 221
وَٱتَّبِعۡ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيۡكَ وَٱصۡبِرۡ حَتَّىٰ يَحۡكُمَ ٱللَّهُۚ وَهُوَ خَيۡرُ ٱلۡحَٰكِمِينَ ١٠٩
And follow what is revealed to you, [O Muḥammad], and be patient until Allāh will judge. And He is the best of judges.
और (ऐ रसूल!) आप उस चीज़ का अनुसरण करें, जो आपका पालनहार आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) करता है और उसके अनुसार कार्य करें, तथा आपकी क़ौम के जो लोग आपके विरोधी हैं उनके कष्ट पर, और जिस चीज़ के पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया है, उसके पहुँचाने पर धैर्य से काम लें। तथा आप निरंतर इसी व्यवहार पर बने रहें, यहाँ तक कि अल्लाह उनके बारे में अपना फ़ैसला कर दे, इस प्रकार कि वह आपको इस दुनिया में उनपर विजय प्रदान कर दे और आख़िरत में उन्हें दंडित करे, यदि उनकी मृत्यु उनके कुफ़्र की अवस्था में हो।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences