Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Ar-Ra'd 13:32–43
13:32Page 253
وَلَقَدِ ٱسۡتُهۡزِئَ بِرُسُلٖ مِّن قَبۡلِكَ فَأَمۡلَيۡتُ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ ثُمَّ أَخَذۡتُهُمۡۖ فَكَيۡفَ كَانَ عِقَابِ ٣٢
And already were [other] messengers ridiculed before you, and I extended the time of those who disbelieved; then I seized them, and how [terrible] was My penalty.
आप पहले रसूल नहीं हैं, जिसे उसके समुदाय ने झुठलाया और उसका मज़ाक़ उड़ाया है। (ऐ रसूल) आपसे पहले भी कई समुदायों ने अपने रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया और उन्हें झुठलाया है। तो मैंने उन लोगों को मोहलत दी जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया था, यहाँ तक कि उन्हें विश्वास हो गया कि मैं उन्हें नष्ट करने वाला नहीं हूँ। फिर मैंने मोहलत के बाद उन्हें तरह-तरह की यातना से ग्रस्त कर दिया, तो आपने उनके लिए मेरी सज़ा को कैसा पाया? निश्चय वह एक कड़ी सज़ा थी।
13:33Page 253
أَفَمَنۡ هُوَ قَآئِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفۡسِۭ بِمَا كَسَبَتۡۗ وَجَعَلُواْ لِلَّهِ شُرَكَآءَ قُلۡ سَمُّوهُمۡۚ أَمۡ تُنَبِّـُٔونَهُۥ بِمَا لَا يَعۡلَمُ فِي ٱلۡأَرۡضِ أَم بِظَٰهِرٖ مِّنَ ٱلۡقَوۡلِۗ بَلۡ زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ مَكۡرُهُمۡ وَصُدُّواْ عَنِ ٱلسَّبِيلِۗ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٖ ٣٣
Then is He who is a maintainer of every soul, [knowing] what it has earned, [like any other]? But to Allāh they have attributed partners. Say, "Name them. Or do you inform Him of that1 which He knows not upon the earth or of what is apparent [i.e., alleged] of speech?"2 Rather, their [own] plan has been made attractive to those who disbelieve, and they have been averted from the way. And whomever Allāh sends astray - there will be for him no guide.
तो क्या जो सभी सृष्टि की जीविका के संरक्षण का ज़िम्मेदार, हर प्राणी के कार्यों की निगरानी करने वाला है, चुनाँचे वह उसे उसके कार्यों का बदला देगा, वह उपासना किए जाने के अधिक योग्य है, या ये मूर्तियाँ जिन्हें इस बात का कोई अधिकार नहीं कि उनकी पूजा की जाए? हालाँकि काफ़िरों ने उन्हें अन्यायपूर्वक और झूठमूठ अल्लाह का साझी बना लिया है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम हमें उन साझियों के नाम बताओ, जिनकी तुमने अल्लाह के साथ पूजा की है, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो। या क्या तुम अल्लाह को ऐसे साझियों के बारे में बता रहे हो, जिन्हें वह धरती में नहीं जानता? या फिर तुम उसे एक ऊपरी बात बता रहे हो, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है? बल्कि, शैतान ने इनकार करने वालों की नज़र में उनके छल को सुंदर बना दिया है, जिसके कारण वे अल्लाह का इनकार कर बैठे हैं और शैतान ने उन्हें हिदायत के रास्ते से हटा दिया है। और जिसे अल्लाह हिदायत के मार्ग से दूर कर दे, उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं, जो उसका मार्गदर्शन कर सके।
13:34Page 253
لَّهُمۡ عَذَابٞ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَشَقُّۖ وَمَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاقٖ ٣٤
For them will be punishment in the life of [this] world, and the punishment of the Hereafter is more severe. And they will not have from Allāh any protector.
इस सांसारिक जीवन ही में उनके लिए यातना है कि उन्हें मोमिनों के हाथों क़त्ल एवं क़ैद का सामना करना पड़ेगा। जबकि आख़िरत की यातना जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, उनके लिए दुनिया की यातना से अधिक कठोर और भारी है। क्योंकि उसमें तीव्रता और निर्बाध स्थायित्व होगा। और उन्हें क़ियामत के दिन अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला भी न होगा।
13:35Page 254
۞ مَّثَلُ ٱلۡجَنَّةِ ٱلَّتِي وُعِدَ ٱلۡمُتَّقُونَۖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ أُكُلُهَا دَآئِمٞ وَظِلُّهَاۚ تِلۡكَ عُقۡبَى ٱلَّذِينَ ٱتَّقَواْۚ وَّعُقۡبَى ٱلۡكَٰفِرِينَ ٱلنَّارُ ٣٥
The example [i.e., description] of Paradise, which the righteous have been promised, is [that] beneath it rivers flow. Its fruit is lasting, and its shade. That is the consequence for the righteous, and the consequence for the disbelievers is the Fire.
उस जन्नत की विशेषता जिसका अल्लाह ने उन लोगों से वादा किया है, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरने वाले हैं, यह है कि उसके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, उसके फल, दुनिया के फलों के विपरीत, स्थायी हैं, जो कभी खत्म नहीं होंगे और उसकी छाया भी स्थायी है, जो न कभी समाप्त होगी और न छोटी होगी। यही उन लोगों का परिणाम है, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहे। और काफ़िरों का परिणाम आग है, जिसमें वे प्रवेश करेंगे और हमेशा के लिए उसी में रहेंगे।
13:36Page 254
وَٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يَفۡرَحُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَۖ وَمِنَ ٱلۡأَحۡزَابِ مَن يُنكِرُ بَعۡضَهُۥۚ قُلۡ إِنَّمَآ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱللَّهَ وَلَآ أُشۡرِكَ بِهِۦٓۚ إِلَيۡهِ أَدۡعُواْ وَإِلَيۡهِ مَـَٔابِ ٣٦
And [the believers among] those to whom We have given the [previous] Scripture rejoice at what has been revealed to you, [O Muḥammad], but among the [opposing] factions are those who deny part of it [i.e., the Qur’ān]. Say, "I have only been commanded to worship Allāh and not associate [anything] with Him. To Him I invite, and to Him is my return."
जिन यहूदियों को हमने तौरात दी और जिन ईसाइयों को हमने इंजील दी, वे उस (क़ुरआन) से प्रसन्न होते हैं, जो (ऐ रसूल!) आपपर उतारा गया है; क्योंकि वह उनकी पुस्तकों की कुछ बातों से सहमति रखता है। तथा यहूदियों और ईसाइयों के संप्रदायों में से कुछ लोग आपकी ओर अवतिरत पुस्तक के कुछ भाग का इनकार करते हैं, जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाता, या जो उनके परिवर्तन और विकृति को उजागर करता है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं केवल उसी की इबादत करूँ और उसके साथ उसके अलावा को साझी न बनाऊँ। मैं केवल उसी की ओर बुलाता हूँ और उसके अलावा किसी और की ओर नहीं बुलाता। और केवल उसी की ओर मेरा लौटना है। तौरात और इंजील ने भी यही शिक्षा दी है।
13:37Page 254
وَكَذَٰلِكَ أَنزَلۡنَٰهُ حُكۡمًا عَرَبِيّٗاۚ وَلَئِنِ ٱتَّبَعۡتَ أَهۡوَآءَهُم بَعۡدَ مَا جَآءَكَ مِنَ ٱلۡعِلۡمِ مَا لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن وَلِيّٖ وَلَا وَاقٖ ٣٧
And thus We have revealed it as an Arabic legislation.1 And if you should follow their inclinations after what has come to you of knowledge, you would not have against Allāh any ally or any protector.
और जैसे हमने पिछली पुस्तकों को उनके समुदायों की भाषा में उतारा था, उसी प्रकार हमने (ऐ रसूल!) आपपर क़ुरआन को अरबी भाषा में सच्चाई को स्पष्ट करने वाला एक निर्णायक फ़रमान बनाकर उतारा है। और यदि (ऐ रसूल!) आपने अपने पास उस ज्ञान के आ जाने के पश्चात जो अल्लाह ने आपको सिखाया है, किताब वालों की इच्छाओं का पालन किया उनके उस चीज़ को हटाने की सौदेबाज़ी में जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाती, तो अल्लाह के मुक़ाबले में आपका कोई संरक्षक नहीं होगा, जो आपके मामले को संभाले और आपके दुश्मनों के खिलाफ़ आपकी सहायता करे, और न ही आपको अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला होगा।
13:38Page 254
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَا رُسُلٗا مِّن قَبۡلِكَ وَجَعَلۡنَا لَهُمۡ أَزۡوَٰجٗا وَذُرِّيَّةٗۚ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأۡتِيَ بِـَٔايَةٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۗ لِكُلِّ أَجَلٖ كِتَابٞ ٣٨
And We have already sent messengers before you and assigned to them wives and descendants. And it was not for a messenger to come with a sign except by permission of Allāh. For every term is a decree.
(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले रसूलों को मनुष्यों ही में से भेजे। इसलिए आप (दूसरे) रसूलों से अलग कोई (अनोखे) रसूल नहीं हैं। तथा हमने अन्य सभी मनुष्यों की तरह उनके लिए पत्नियाँ और बच्चे बनाए। हमने उन्हें फ़िरिश्ते नहीं बनाए,जो न शादी करते हैं और न बच्चे जनते हैं। और आप भी उन्हीं रसूलों में से हैं, जो मनुष्य थे, शादी-ब्याह करते थे और बच्चे पैदा करते थे, तो फिर आपके ऐसा होने पर इन मुश्रिकों को आश्चर्य क्यों होता है?! तथा किसी रसूल के बस की बात नहीं है कि अल्लाह की अनुमति के बिना अपनी ओर से कोई निशानी ले आए। हर मामले के लिए जिसका अल्लाह ने फ़ैसला किया है एक किताब है, जिसमें वह उल्लिखित है और उसका एक निर्धारित समय है, जो आगे-पीछे नहीं हो सकता।
13:39Page 254
يَمۡحُواْ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ وَيُثۡبِتُۖ وَعِندَهُۥٓ أُمُّ ٱلۡكِتَٰبِ ٣٩
Allāh eliminates what He wills or confirms, and with Him is the Mother of the Book.1
अल्लाह जिस भलाई, या बुराई, या सौभाग्य, या दुर्भाग्य को चाहता है, मिटा देता है और उनमें से जिसे चाहता है बाक़ी रखता है। और उसी के पास 'लौह़ -ए- महफ़ूज़' है। वह उन सब का संदर्भ है, और जो कुछ भी मिटाया जाता या बाक़ी रखा जाता है, उसी के अनुसार होता है, जो उसमें अंकित है।
13:40Page 254
وَإِن مَّا نُرِيَنَّكَ بَعۡضَ ٱلَّذِي نَعِدُهُمۡ أَوۡ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِنَّمَا عَلَيۡكَ ٱلۡبَلَٰغُ وَعَلَيۡنَا ٱلۡحِسَابُ ٤٠
And whether We show you part of what We promise them or take you in death, upon you is only the [duty of] notification, and upon Us is the account.
(ऐ नबी!) यदि हम आपकी मृत्यु से पहले आपको उस यातना का कुछ भाग दिखा दें जिसका हम उनसे वादा करते हैं, तो यह हमारा काम है, या उसे आपको दिखाने से पहले ही आपको मौत दे दें, तो आपका काम केवल उसको पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का हमने आपको आदेश दिया है। आपका काम उन्हें बदला देना या उनका हिसाब लेना नहीं है। क्योंकि यह हमारा काम है।
13:41Page 254
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا نَأۡتِي ٱلۡأَرۡضَ نَنقُصُهَا مِنۡ أَطۡرَافِهَاۚ وَٱللَّهُ يَحۡكُمُ لَا مُعَقِّبَ لِحُكۡمِهِۦۚ وَهُوَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ ٤١
Have they not seen that We set upon the land, reducing it from its borders?1 And Allāh decides; there is no adjuster of His decision. And He is swift in account.
क्या इन काफ़िरों ने यह नहीं देखा कि हम कुफ़्र की धरती पर आते हैं, इस्लाम का प्रसार कर और मुसलमानों को उसपर विजय प्रदान करके उसे उसके किनारों से कम कर देते हैं। और अल्लाह जो कुछ चाहता है, आदेश देता है और अपने बंदों के बीच फ़ैसला करता है। उसके फ़ैसले को कोई टालने वाला, या उसमें संशोधन करने वाला, या उसे बदलने वाला नहीं है। वह महिमावान बहुत शीघ्र हिसाब लेने वाला है, वह अगले और पिछले सभी लोगों का एक ही दिन में हिसाब ले लेगा।
13:42Page 254
وَقَدۡ مَكَرَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَلِلَّهِ ٱلۡمَكۡرُ جَمِيعٗاۖ يَعۡلَمُ مَا تَكۡسِبُ كُلُّ نَفۡسٖۗ وَسَيَعۡلَمُ ٱلۡكُفَّٰرُ لِمَنۡ عُقۡبَى ٱلدَّارِ ٤٢
And those before them had plotted, but to Allāh belongs the plan entirely. He knows what every soul earns, and the disbelievers will know for whom is the final home.
पिछले समुदायों ने अपने नबियों के साथ छल किया, चालें चलीं और उनकी लाई हई बातों को झुठलाया। परंतु उन्होंने उनके ख़िलाफ़ उपाय (साज़िश) करके क्या कर लिया? कुछ नहीं; क्योंकि प्रभावी उपाय केवल अल्लाह का उपाय है, किसी और का नहीं। तथा वह महिमावान् (अल्लाह) ही है, जो सारी सृष्टि के सभी कर्मों को जानता है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और उस समय इन झुठलाने वालों को पता चल जाएगा कि वे अल्लाह पर ईमान न लाने में कितने गलत थे और ईमान वाले लोग कितने सही थे। इसलिए उन्होंने जन्नत और अच्छा परिणाम प्राप्त किया।
13:43Page 255
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَسۡتَ مُرۡسَلٗاۚ قُلۡ كَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدَۢا بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡ وَمَنۡ عِندَهُۥ عِلۡمُ ٱلۡكِتَٰبِ ٤٣
And those who have disbelieved say, "You are not a messenger." Say, [O Muḥammad], "Sufficient is Allāh as Witness between me and you, and [the witness of] whoever has knowledge of the Scripture."1
जिन लोगों ने कुफ़्र की नीति अपनाई, वे कहते हैं : (ऐ मुहम्मद!) आप अल्लाह द्वारा भेजे नहीं गए हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मेरे और तुम्हारे बीच, इस बात पर अल्लाह गवाह के रूप में काफ़ी है कि मैं अपने पालनहार की ओर से तुम्हारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजा गया हूँ, तथा उनकी भी गवाही काफ़ी है, जिनके पास आकाशीय ग्रंथों का ज्ञान है, जिनमें मेरी विशेषताएँ वर्णित हैं। और जिसकी सत्यता का साक्षी अल्लाह है, उसे किसी के झुठलाने से कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences