Al-MukhtasarIbrahim · 14:36–52

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

Ibrahim 14:36–52

14:36Page 260

رَبِّ إِنَّهُنَّ أَضۡلَلۡنَ كَثِيرٗا مِّنَ ٱلنَّاسِۖ فَمَن تَبِعَنِي فَإِنَّهُۥ مِنِّيۖ وَمَنۡ عَصَانِي فَإِنَّكَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٣٦

My Lord, indeed they have led astray many among the people. So whoever follows me - then he is of me;1 and whoever disobeys me - indeed, You are [yet] Forgiving and Merciful.

ऐ मेरे पालनहार! मूर्तियों ने बहुत से लोगों को गुमराह किया है। क्योंकि उन्होंने यह सोचा कि ये मूर्तियाँ उनके लिए सिफ़ारिश करेंगी। इसलिए वे इनके फ़ितने (प्रलोभन) में पड़ गए और अल्लाह को छोड़कर इनकी पूजा की। अतः लोगों में से जिसने भी अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसके आज्ञापालन में मेरा अनुसरण किया, वह मेरे दल और मेरे अनुयायियों में से है। और जिसने मेरी अवज्ञा की और अल्लाह के एकेश्वरवाद और उसके आज्ञापालन में मेरा अनुसरण नहीं किया, तो (ऐ मेरे रब!) तू जिनके गुनाहों को क्षमा करना चाहे, क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।

14:37Page 260

رَّبَّنَآ إِنِّيٓ أَسۡكَنتُ مِن ذُرِّيَّتِي بِوَادٍ غَيۡرِ ذِي زَرۡعٍ عِندَ بَيۡتِكَ ٱلۡمُحَرَّمِ رَبَّنَا لِيُقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ فَٱجۡعَلۡ أَفۡـِٔدَةٗ مِّنَ ٱلنَّاسِ تَهۡوِيٓ إِلَيۡهِمۡ وَٱرۡزُقۡهُم مِّنَ ٱلثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَشۡكُرُونَ ٣٧

Our Lord, I have settled some of my descendants in an uncultivated valley near Your sacred House, our Lord, that they may establish prayer. So make hearts among the people incline toward them and provide for them from the fruits that they might be grateful.

ऐ हमारे पालनहार! मैंने अपनी कुछ संतान, अर्थात् अपने बेटे इसमाईल और उसके बेटों को तेरे सम्मानित घर के पास एक ऐसी घाटी में बसाया है, जिसमें कोई खेती या पानी नहीं है। ऐ हमारे पालनहार! मैंने उन्हें उसके पास इसलिए बसाया है कि वे उसमें नमाज़ क़ायम करें। इसलिए (ऐ मेरे रब!) लोगों के दिलों को इनकी ओर और इस नगर की ओर प्रलोभित कर दे, और उन्हें फलों से रोज़ी प्रदान कर, ताकि वे अपने ऊपर तेरे उपकार का शुक्रिया अदा करें।

14:38Page 260

رَبَّنَآ إِنَّكَ تَعۡلَمُ مَا نُخۡفِي وَمَا نُعۡلِنُۗ وَمَا يَخۡفَىٰ عَلَى ٱللَّهِ مِن شَيۡءٖ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا فِي ٱلسَّمَآءِ ٣٨

Our Lord, indeed You know what we conceal and what we declare, and nothing is hidden from Allāh on the earth or in the heaven.

ऐ हमारे पालनहार! तू हर उस चीज़ को जानता है, जिसे हम छिपाते हैं और जिसे हम प्रकट करते हैं। तथा धरती या आकाश में अल्लाह से कोई भी चीज़ छिपी नहीं है। बल्कि वह उसे जानता है। इसलिए उसकी ओर हमारी आवश्यकता और हमारी निर्धनता उससे छिपी नहीं है।

14:39Page 260

ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي وَهَبَ لِي عَلَى ٱلۡكِبَرِ إِسۡمَٰعِيلَ وَإِسۡحَٰقَۚ إِنَّ رَبِّي لَسَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ ٣٩

Praise to Allāh, who has granted to me in old age Ishmael and Isaac. Indeed, my Lord is the Hearer of supplication.

हर प्रकार का आभार और प्रशंसा उस अल्लाह महिमावान् के लिए है, जिसने नेक संतान प्रदान करने की मेरी दुआ स्वीकार कर ली। चुनाँचे उसने मेरे बुढ़ापे के बावजूद मुझे हाजर से इसमाईल और सारा से इसहाक़ प्रदान किया। निःसंदेह मेरा पवित्र पालनहार उसकी दुआ को सुनने वाला है, जो उससे दुआ करे।

14:40Page 260

رَبِّ ٱجۡعَلۡنِي مُقِيمَ ٱلصَّلَوٰةِ وَمِن ذُرِّيَّتِيۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلۡ دُعَآءِ ٤٠

My Lord, make me an establisher of prayer, and [many] from my descendants. Our Lord, and accept my supplication.

ऐ मेरे पालनहार! मुझे पूर्ण रूप से नमाज़ पढ़ने वाला बना और मेरी औलाद को भी नमाज़ क़ायम करने वालों में से बना। ऐ हमारे पालनहार! और मेरी दुआ स्वीकार कर और उसे अपने यहाँ स्वीकृत बना दे।

14:41Page 260

رَبَّنَا ٱغۡفِرۡ لِي وَلِوَٰلِدَيَّ وَلِلۡمُؤۡمِنِينَ يَوۡمَ يَقُومُ ٱلۡحِسَابُ ٤١

Our Lord, forgive me and my parents and the believers the Day the account is established."

ऐ हमारे पालनहार! मेरे पापों को क्षमा कर दे और मेरे माता-पिता के पापों को क्षमा कर दे। (यह प्रार्थना उन्होंने उस समय की थी जब उन्हें पता नहीं था कि उनके पिता अल्लाह के दुश्मन हैं। जब उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि वह अल्लाह के दुश्मन हैं, तो उनसे खुद को अलग कर लिया।) और ईमान वालों के गुनाहों को क्षमा कर दे, जिस दिन लोग अपने पालनहार के सामने हिसाब के लिए खड़े होंगे।

14:42Page 260

وَلَا تَحۡسَبَنَّ ٱللَّهَ غَٰفِلًا عَمَّا يَعۡمَلُ ٱلظَّٰلِمُونَۚ إِنَّمَا يُؤَخِّرُهُمۡ لِيَوۡمٖ تَشۡخَصُ فِيهِ ٱلۡأَبۡصَٰرُ ٤٢

And never think that Allāh is unaware of what the wrongdoers do. He only delays them [i.e., their account] for a Day when eyes will stare [in horror].

(ऐ रसूल!) आप हरगिज़ यह न समझें कि यदि अल्लाह अत्याचारियों की यातना को विलंबित कर रहा है, तो वह उनके झुठलाने और अल्लाह के रास्ते से रोकने आदि कार्यों से अनजान है। बल्कि वह उनसे अवगत है। उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। वह केवल उनकी यातना को क़ियामत के दिन तक विलंबित कर रहा है, जिस दिन आँखें, जो कुछ देख रही होंगी उसकी भयावहता के डर से, फटी की फटी रह जाएँगी।

14:43Page 261

مُهۡطِعِينَ مُقۡنِعِي رُءُوسِهِمۡ لَا يَرۡتَدُّ إِلَيۡهِمۡ طَرۡفُهُمۡۖ وَأَفۡـِٔدَتُهُمۡ هَوَآءٞ ٤٣

Racing ahead, their heads raised up, their glance does not come back to them,1 and their hearts are void.

जब लोग क़ब्रों से उठकर पुकारने वाले की ओर तेज़ी से भागेंगे, अपने सिर को उठाए हुए होंगे, वे घबराहट से आकाश की ओर देखेंगे, उनकी निगाहें उनकी ओर नहीं लौटेंगी, बल्कि वे जो कुछ भी देख रही होंगी उसके डर से खुली की खुली रह जाएँगी और उनके दिल ख़ाली होंगे, उस दिन के दृश्य की दहशत से उनमें कोई समझ-बूझ नहीं होगी।

14:44Page 261

وَأَنذِرِ ٱلنَّاسَ يَوۡمَ يَأۡتِيهِمُ ٱلۡعَذَابُ فَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ رَبَّنَآ أَخِّرۡنَآ إِلَىٰٓ أَجَلٖ قَرِيبٖ نُّجِبۡ دَعۡوَتَكَ وَنَتَّبِعِ ٱلرُّسُلَۗ أَوَلَمۡ تَكُونُوٓاْ أَقۡسَمۡتُم مِّن قَبۡلُ مَا لَكُم مِّن زَوَالٖ ٤٤

And, [O Muḥammad], warn the people of a Day when the punishment will come to them and those who did wrong will say, "Our Lord, delay us for a short term; we will answer Your call and follow the messengers." [But it will be said], "Had you not sworn, before, that for you there would be no cessation?1

(ऐ रसूल!) अपनी उम्मत को क़ियामत के दिन की यातना से डराएँ। उस समय कुफ़्र और शिर्क के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार करने वाले लोग कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमें मोहलत दे दे और हमसे यातना को टाल दे और हमें थोड़े समय के लिए दुनिया में वापस भेज दे, हम तुझपर ईमान लाएँगे और उन रसूलों का पालन करेंगे, जिन्हें तूने हमारी ओर भेजा था। तब उन्हें फटकार लगाते हुए जवाब दिया जाएगा : क्या तुमने दुनिया के जीवन में, मरणोपरांत पुनर्जीवित किए जाने का इनकार करते हुए यह क़सम नहीं खाई थी कि तुम्हें दुनिया के जीवन से आख़िरत की ओर स्थानांतरित नहीं होना है?!

14:45Page 261

وَسَكَنتُمۡ فِي مَسَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَتَبَيَّنَ لَكُمۡ كَيۡفَ فَعَلۡنَا بِهِمۡ وَضَرَبۡنَا لَكُمُ ٱلۡأَمۡثَالَ ٤٥

And you lived among the dwellings of those who wronged themselves, and it had become clear to you how We dealt with them. And We presented for you [many] examples."

और तुम अपने से पहले के उन समुदायों के रहने की जगहों में उतरे, जिन्होंने अल्लाह का इनकार करके अपने आप पर अत्याचार किया था, जैसे हूद और सालेह के समुदाय। और तुम्हारे लिए स्पष्ट हो गया कि हमने अन्हें कैसे विनष्ट किया और हमने अल्लाह की किताब में तुम्हारे लिए उदाहरण प्रस्तुत किए, ताकि तुम उपदेश ग्रहण करो, परन्तु तुमने उनसे उपदेश ग्रहण नहीं किया।

14:46Page 261

وَقَدۡ مَكَرُواْ مَكۡرَهُمۡ وَعِندَ ٱللَّهِ مَكۡرُهُمۡ وَإِن كَانَ مَكۡرُهُمۡ لِتَزُولَ مِنۡهُ ٱلۡجِبَالُ ٤٦

And they had planned their plan, but with Allāh is [recorded] their plan, even if their plan had been [sufficient] to do away with the mountains.1

अत्याचारी संप्रदायों के रहने के स्थानों में उतरने वाले इन लोगों ने अल्लाह के नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हत्या करने और आपके आमंत्रण (मिशन) को समाप्त करने की साज़िश रची। हालाँकि अल्लाह उनके उपाय से अवगत है, उससे कोई बात छिपी नहीं है। तथा इन लोगों का उपाय बहुत कमज़ोर है। चुनाँचे वह कमज़ोर होने के कारण पर्वत को या उसके अलावा किसी चीज़ को उसके स्थान से नहीं टाल सकता। जबकि उनके साथ अल्लाह के उपाय का मामला इसके विपरीत है।

14:47Page 261

فَلَا تَحۡسَبَنَّ ٱللَّهَ مُخۡلِفَ وَعۡدِهِۦ رُسُلَهُۥٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٞ ذُو ٱنتِقَامٖ ٤٧

So never think that Allāh will fail in His promise to His messengers. Indeed, Allāh is Exalted in Might and Owner of Retribution.1

(ऐ रसूल!) आप हरगिज़ यह न समझें कि अल्लाह, जिसने अपने रसूलों से विजय और धर्म को प्रभुत्व प्रदान करने का वादा किया था, रसूलों से अपने किए हुए वादे के ख़िलाफ़ करने वाला है। निःसंदेह अल्लाह प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी चीज़ का ज़ोर नहीं चलता और वह अपने दोस्तों को अवश्य प्रभुत्व प्रदान करेगा। वह अपने दुश्मनों तथा अपने रसूलों के दुश्मनों से सख़्त बदला लेने वाला है।

14:48Page 261

يَوۡمَ تُبَدَّلُ ٱلۡأَرۡضُ غَيۡرَ ٱلۡأَرۡضِ وَٱلسَّمَٰوَٰتُۖ وَبَرَزُواْ لِلَّهِ ٱلۡوَٰحِدِ ٱلۡقَهَّارِ ٤٨

[It will be] on the Day the earth will be replaced by another earth, and the heavens [as well], and they [i.e., all creatures] will come out before Allāh, the One, the Prevailing,

काफ़िरों से यह बदला क़ियामत के दिन लिया जाएगा, जिस दिन इस धरती को एक अन्य शुद्ध सफेद धरती से बदल दिया जाएगा, और आसमानों को दूसरे आसमानों से बदल दिया जाएगा। और लोग अपनी क़ब्रों से अपने शरीर और कर्मों के साथ प्रकट होंगे, उस अल्लाह के सामने खड़े होने के लिए, जो अपने राज्य और अपनी महिमा में अकेला है, ऐसा प्रभुत्वशाली है, जो सबको पराजित करता है और उसे पराजित नहीं किया जा सकता, तथा सब पर उसका प्रभुत्व है और उसपर किसी का प्रभुत्व नहीं हो सकता।

14:49–50Page 261

وَتَرَى ٱلۡمُجۡرِمِينَ يَوۡمَئِذٖ مُّقَرَّنِينَ فِي ٱلۡأَصۡفَادِ ٤٩

And you will see the criminals that Day bound together in irons,

سَرَابِيلُهُم مِّن قَطِرَانٖ وَتَغۡشَىٰ وُجُوهَهُمُ ٱلنَّارُ ٥٠

Their garments of liquid pitch and their faces covered by the Fire

(ऐ रसूल!) जिस दिन इस धरती को दूसरी धरती से बदल दिया जाएगा और आकाशों को बदल दिया जाएगा, उस दिन आप काफ़िरों और मुश्रिकों को देखेंगे कि एक-दूसरे के साथ बेड़ियों में जकड़े हुए होंगे। उनके हाथ और पैर जंजीरों के साथ उनके गले में बाँध दिए जाएँगे। उनके कपड़े जो वे पहनेंगे, तारकोल (एक अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ) के बने होंगे। और उनके विकृत चेहरे आग से झुलस रहे होंगे।

14:51Page 261

لِيَجۡزِيَ ٱللَّهُ كُلَّ نَفۡسٖ مَّا كَسَبَتۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَرِيعُ ٱلۡحِسَابِ ٥١

So that Allāh will recompense every soul for what it earned. Indeed, Allāh is swift in account.

ताकि अल्लाह हर प्राणी को उसका बदला दे, जो भी उसने अच्छा या बुरा किया है। निःसंदेह अल्लाह कार्यों का शीघ्र हिसाब लेने वाला है।

14:52Page 261

هَٰذَا بَلَٰغٞ لِّلنَّاسِ وَلِيُنذَرُواْ بِهِۦ وَلِيَعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا هُوَ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞ وَلِيَذَّكَّرَ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ ٥٢

This [Qur’ān] is notification for the people that they may be warned thereby and that they may know that He is but one God and that those of understanding will be reminded.

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला यह क़ुरआन अल्लाह की ओर से लोगों को सूचना देना (एक संदेश) है। और ताकि उन्हें इसमें मौजूद गंभीर धमकियों और भयभीत करने वाली चीज़ों से डराया जाए, और ताकि वे यह जान लें कि सत्य पूज्य अकेला अल्लाह ही है, फिर वे उसकी इबादत करें और उसके साथ किसी को साझी न बनाएँ। और ताकि सद्बुद्धि वाले लोग इससे सीख लें। क्योंकि वही लोग हैं जो उपदेशों और पाठों से लाभान्वित होते हैं।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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