Al-MukhtasarAn‑Nahl · 16:83–121

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

An-Nahl 16:83–121

16:83Page 276

يَعۡرِفُونَ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ ثُمَّ يُنكِرُونَهَا وَأَكۡثَرُهُمُ ٱلۡكَٰفِرُونَ ٨٣

They recognize the favor of Allāh; then they deny it. And most of them are disbelievers.

अल्लाह ने बहुदेववादियों को जो नेमतें दे रखी हैं, वे उन्हें अच्छी तरह पहचानते हैं, जिनमें एक नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को उनकी ओर रसूल बनाकर भेजना भी शामिल है। फिर वे उनके प्रति आभार प्रकट न करके और उसके रसूल को झुठलाकर, उसकी नेमतों का इनकार करते हैं। और उनमें से अधिकतर लोग अल्लाह की नेमतों का इनकार ही करने वाले हैं।

16:84Page 276

وَيَوۡمَ نَبۡعَثُ مِن كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيدٗا ثُمَّ لَا يُؤۡذَنُ لِلَّذِينَ كَفَرُواْ وَلَا هُمۡ يُسۡتَعۡتَبُونَ ٨٤

And [mention] the Day when We will resurrect from every nation a witness [i.e., their prophet]. Then it will not be permitted to the disbelievers [to apologize or make excuses], nor will they be asked to appease [Allāh].

और (ऐ रसूल!) याद करें, जिस दिन अल्लाह हर समुदाय के रसूल को खड़ा करेगा, जो उस समुदाय के मोमिन के ईमान और काफ़िर के कुफ़्र की गवाही देगा। फिर उसके बाद काफ़िरों को अपने कुफ़्र का बहाना पेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, और न ही वे दुनिया में वापस लौटाए जाएँगे कि अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के काम कर सकें। क्योंकि आख़िरत हिसाब का घर है, काम का घर नहीं।

16:85Page 276

وَإِذَا رَءَا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ ٱلۡعَذَابَ فَلَا يُخَفَّفُ عَنۡهُمۡ وَلَا هُمۡ يُنظَرُونَ ٨٥

And when those who wronged see the punishment, it will not be lightened for them, nor will they be reprieved.

और जब शिर्क करने वाले अत्याचारी लोग यातना को देख लेंगे, तो उनसे यातना कम नहीं की जाएगी और न ही उनसे यातना को टालकर उन्हें मोहलत दी जाएगी। बल्कि वे उसमें हमेशा-हमेशा के लिए प्रवेश करेंगे।

16:86Page 276

وَإِذَا رَءَا ٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْ شُرَكَآءَهُمۡ قَالُواْ رَبَّنَا هَٰٓؤُلَآءِ شُرَكَآؤُنَا ٱلَّذِينَ كُنَّا نَدۡعُواْ مِن دُونِكَۖ فَأَلۡقَوۡاْ إِلَيۡهِمُ ٱلۡقَوۡلَ إِنَّكُمۡ لَكَٰذِبُونَ ٨٦

And when those who associated others with Allāh see their "partners," they will say, "Our Lord, these are our partners [to You] whom we used to invoke [in worship] besides You." But they will throw at them the statement, "Indeed, you are liars."

और जब मुश्रिक लोग क़ियामत के दिन अपने उन पूज्यों को देख लेंगे, जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा किया करते थे, तो कहेंगे : ऐ हमारे पालनहार! यही हमारे वे साझी हैं, जिन्हें हम तुझे छोड़कर पूजा करते थे। ऐसा इस उद्देश्य से कहेंगे कि अपना बोझ उनपर डाल दें। तो अल्लाह उनके पूज्यों को बोलने की शक्ति प्रदान कर देगा और वे उनकी बात का खंडन करते हुए कहेंगे : (ऐ मुश्रिको!) निश्चय तुम अल्लाह के साथ एक साझी की पूजा करने में झूठे हो। क्योंकि उसके साथ कोई साझी ही नहीं कि उसकी पूजा की जाए।

16:87Page 276

وَأَلۡقَوۡاْ إِلَى ٱللَّهِ يَوۡمَئِذٍ ٱلسَّلَمَۖ وَضَلَّ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ ٨٧

And they will impart to Allāh that Day [their] submission, and lost from them is what they used to invent.

उस दिन शिर्क करने वाले अल्लाह के समक्ष समर्पण कर देंगे और अकेले उसी के आज्ञानुवर्ती बन जाएँगे, तथा उनका यह गढ़ा हुआ दावा हवा हो जाएगा कि उनकी मूर्तियाँ अल्लाह के निकट उनकी सिफ़ारिश करेंगी।

16:88Page 277

ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ زِدۡنَٰهُمۡ عَذَابٗا فَوۡقَ ٱلۡعَذَابِ بِمَا كَانُواْ يُفۡسِدُونَ ٨٨

Those who disbelieved and averted [others] from the way of Allāh - We will increase them in punishment over [their] punishment for what corruption they were causing.

जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और दूसरों को अल्लाह के मार्ग से रोका, वे अपने कुफ़्र के कारण जिस यातना के हक़दार थे, हम (उनके स्वयं भ्रष्ट होने तथा दूसरों को गुमराह करके भ्रष्टाचार पैदा करने के कारण) उनकी यातना उससे और अधिक कर देंगे।

16:89Page 277

وَيَوۡمَ نَبۡعَثُ فِي كُلِّ أُمَّةٖ شَهِيدًا عَلَيۡهِم مِّنۡ أَنفُسِهِمۡۖ وَجِئۡنَا بِكَ شَهِيدًا عَلَىٰ هَٰٓؤُلَآءِۚ وَنَزَّلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ تِبۡيَٰنٗا لِّكُلِّ شَيۡءٖ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُسۡلِمِينَ ٨٩

And [mention] the Day when We will resurrect among every nation a witness over them from themselves [i.e., their prophet]. And We will bring you, [O Muḥammad], as a witness over these [i.e., your nation]. And We have sent down to you the Book as clarification for all things and as guidance and mercy and good tidings for the Muslims.1

और (ऐ रसूल!) उस दिन को याद करें, जब हम हर समुदाय में एक रसूल को खड़ा करेंगे, जो उनके कुफ़्र या ईमान की गवाही देगा। यह रसूल उन्हीं के समुदाय से होगा और उन्हीं की भाषा में बात करेगा। और (ऐ रसूल!) हम आपको सभी समुदायों पर गवाह बनाकर लाएँगे। और हमने आपपर क़ुरआन को हर उस चीज़ को स्पष्ट करने के लिए उतारा है, जिसके स्पष्टीकरण की आवश्यकता है, जैसे कि हलाल एवं हराम, पुण्य एवं दंड, इत्यादि। तथा हमने उसे लोगों को सत्य का मार्ग दिखाने, उसपर ईमान लाने और उसके अनुसार कार्य करने वाले के लिए दया और अल्लाह पर ईमान रखने वालों के लिए उस स्थायी नेमत की शुभ सूचना के रूप में उतारा है, जिसकी उन्हें प्रतीक्षा है।

16:90Page 277

۞ إِنَّ ٱللَّهَ يَأۡمُرُ بِٱلۡعَدۡلِ وَٱلۡإِحۡسَٰنِ وَإِيتَآيِٕ ذِي ٱلۡقُرۡبَىٰ وَيَنۡهَىٰ عَنِ ٱلۡفَحۡشَآءِ وَٱلۡمُنكَرِ وَٱلۡبَغۡيِۚ يَعِظُكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ ٩٠

Indeed, Allāh orders justice and good conduct and giving [help] to relatives and forbids immorality and bad conduct and oppression. He admonishes you that perhaps you will be reminded.

अल्लाह अपने बंदों को न्याय का आदेश देता है कि बंदा अल्लाह के हक़ और बंदों के हक़ अदा करे और निर्णय करते समय बिना औचित्य के किसी को किसी पर वरीयता न दे। तथा वह उपकार का आदेश देता है कि बंदा अनुग्रह करते हुए ऐसे कार्य करे, जिसके लिए वह बाध्य नहीं है, जैसे कि स्वेच्छा से खर्च करना और अत्याचारी को क्षमा कर देना। और रिश्तेदारों को उनकी आवश्यकता की चीज़ें देने का आदेश देता है। और हर बुरी चीज़ से रोकता है, चाहे उसका संबंध बात से हो, जैसे- गंदी बात कहना या कार्य से, जैसे- व्यभिचार। और उससे रोकता है, जो शरीयत की नज़र में नापसंदीदा है और इसमें सारे पाप शामिल हैं। और अत्याचार तथा अहंकार से रोकता है। अल्लाह ने इस आयत में तुम्हें जिन बातों का आदेश दिया है और जिन कार्यों से रोका है, उनके निष्पादन का तुम्हें उपदेश देता है। इस उम्मीद में कि तुम उसके उपदेश पर ध्यान दो।

16:91Page 277

وَأَوۡفُواْ بِعَهۡدِ ٱللَّهِ إِذَا عَٰهَدتُّمۡ وَلَا تَنقُضُواْ ٱلۡأَيۡمَٰنَ بَعۡدَ تَوۡكِيدِهَا وَقَدۡ جَعَلۡتُمُ ٱللَّهَ عَلَيۡكُمۡ كَفِيلًاۚ إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا تَفۡعَلُونَ ٩١

And fulfill the covenant of Allāh when you have taken it, [O believers], and do not break oaths after their confirmation while you have made Allāh, over you, a security [i.e., witness]. Indeed, Allāh knows what you do.

अल्लाह या उसके बंदों को दिए हुए हर वचन को पूरा करो, और अल्लाह की क़सम खाकर क़समों को सुदृढ़ करने के बाद, उन्हें मत तोड़ो, हालाँकि तुमने अल्लाह को अपने आपपर गवाह बनाया है कि तुम अपनी क़समों को पूरा करोगे। निश्चय अल्लाह जानता है, जो कुछ तुम करते हो। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

16:92Page 277

وَلَا تَكُونُواْ كَٱلَّتِي نَقَضَتۡ غَزۡلَهَا مِنۢ بَعۡدِ قُوَّةٍ أَنكَٰثٗا تَتَّخِذُونَ أَيۡمَٰنَكُمۡ دَخَلَۢا بَيۡنَكُمۡ أَن تَكُونَ أُمَّةٌ هِيَ أَرۡبَىٰ مِنۡ أُمَّةٍۚ إِنَّمَا يَبۡلُوكُمُ ٱللَّهُ بِهِۦۚ وَلَيُبَيِّنَنَّ لَكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ مَا كُنتُمۡ فِيهِ تَخۡتَلِفُونَ ٩٢

And do not be like she who untwisted her spun thread after it was strong [by] taking your oaths as [means of] deceit between you because one community is more plentiful [in number or wealth] than another community.1 Allāh only tries you thereby. And He will surely make clear to you on the Day of Resurrection that over which you used to differ.

तुम प्रतिज्ञाओं को तोड़कर उस मूर्ख स्त्री की तरह मूर्ख और अल्पबुद्धि मत बनो, जिसने पूरी मेहनत से, अच्छी तरह ऊन या सूत काता, फिर उसे उधेड़कर रख दिया। उसने सूत कातने और उसे उधेड़ने में मेहनत की, लेकिन उसे वह नहीं मिला जो वह चाहती थी। तुम अपनी क़समों को एक-दूसरे को धोखा देने का साधन बनाते हो, ताकि तुम्हारा समुदाय तुम्हारे दुश्मन के समुदाय से अधिक और मज़बूत हो जाए। वास्तव में, अल्लाह तुम्हारा प्रतिज्ञाओं की पूर्ति के साथ परीक्षण करता है कि तुम उन्हें पूरा करते हो, या उन्हें तोड़ते हो? और अल्लाह क़ियामत के दिन उन सारे मामलों को निश्चित रूप से स्पष्ट कर देगा, जिनके बारे में तुम दुनिया में मतभेद किया करते थे। चुनाँचे वह बता देगा कि कौन सत्य पर था और कौन असत्य पर, तथा कौन सच्चा था और कौन झूठा।

16:93Page 277

وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ لَجَعَلَكُمۡ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ وَلَٰكِن يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهۡدِي مَن يَشَآءُۚ وَلَتُسۡـَٔلُنَّ عَمَّا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٩٣

And if Allāh had willed, He could have made you [of] one religion, but He sends astray whom He wills and guides whom He wills.1 And you will surely be questioned about what you used to do.

औ अगर अल्लाह चाहता तो तुम्हें एक ही समुदाय बना देता, जो सत्य मार्ग पर चल रहा होता, मगर अल्लाह जिसे चाहता है, अपने न्याय के अनुसार सत्य से दूर कर देता है और प्रतिज्ञाओं के अनुपालन से वंचित कर देता है। और जिसे चाहता है अपनी कृपा से उसका सामर्थ्य प्रदान करता है। और क़ियामत के दिन तुमसे उसके बारे में अवश्य पूछा जाएगा, जो तुम दुनिया में किया करते थे।

16:94Page 278

وَلَا تَتَّخِذُوٓاْ أَيۡمَٰنَكُمۡ دَخَلَۢا بَيۡنَكُمۡ فَتَزِلَّ قَدَمُۢ بَعۡدَ ثُبُوتِهَا وَتَذُوقُواْ ٱلسُّوٓءَ بِمَا صَدَدتُّمۡ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَلَكُمۡ عَذَابٌ عَظِيمٞ ٩٤

And do not take your oaths as [means of] deceit between you, lest a foot slip after it was [once] firm, and you would taste evil [in this world] for what [people] you diverted from the way of Allāh,1 and you would have [in the Hereafter] a great punishment.

और तुम अपनी क़समों को धोखे का साधन न बनाओ कि अपने मन की इच्छाओं का पालन करते हुए, एक-दूसरे को धोखा दो। चुनाँचे जब चाहो क़समें तोड़ दो और जब चाहो पूरा करो। क्योंकि अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम्हारे पैर सीधे मार्ग से, उसपर जमन के उपरांत भी, हट जाएंँगे और तुम स्वयं अल्लाह के रास्ते से भटकने और दूसरों को उससे भटकाने के कारण यातना चखोगे और तुम्हारे लिए कई गुना यातना होगी।

16:95Page 278

وَلَا تَشۡتَرُواْ بِعَهۡدِ ٱللَّهِ ثَمَنٗا قَلِيلًاۚ إِنَّمَا عِندَ ٱللَّهِ هُوَ خَيۡرٞ لَّكُمۡ إِن كُنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ٩٥

And do not exchange the covenant of Allāh for a small price. Indeed, what is with Allāh is best for you, if only you could know.

और अल्लाह की प्रतिज्ञा को थोड़ी सी क़ीमत से न बदलो कि उसकी प्रतिज्ञा को तोड़ दो और उसे पूरी न करो। वास्तविकता यह है कि इस संसार में अल्लाह जो विजय और ग़नीमत के धन प्रदान करेगा और आख़िरत में जो स्थायी आनंद प्रदान करेगा, वह तुम्हारे लिए उस थोड़े से मुआवज़े से बेहतर है, जो तुम्हें प्रतिज्ञा तोड़ने पर प्राप्त होता है, यदि तुम इस तथ्य को जानते हो।

16:96Page 278

مَا عِندَكُمۡ يَنفَدُ وَمَا عِندَ ٱللَّهِ بَاقٖۗ وَلَنَجۡزِيَنَّ ٱلَّذِينَ صَبَرُوٓاْ أَجۡرَهُم بِأَحۡسَنِ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ٩٦

Whatever you have will end, but what Allāh has is lasting. And We will surely give those who were patient their reward according to the best of what they used to do.

(ऐ लोगो!) जो धन, सुख-सामग्री और नेमतें तुम्हारे पास हैं, वे ख़त्म हो जाएँगी, भले ही वे बहुत अधिक हों। जबकि अल्लाह के पास जो बदला है, वह बाकी रहने वाला है। तो तुम कैसे बाक़ी रहने वाले पर एक नश्वर को वरीयता देते हो? और हम उन लोगों को, जो अपनी प्रतिज्ञाओं पर क़ायम रहे और उन्हें किसी हाल में नहीं तोड़ा, उनका बदला उनके उत्तम कार्यों के अनुसार प्रदान करेंगे। अतः हम उन्हें एक नेकी बदला दस गुना से, सात सौ गुना तक, बल्कि उससे भी अधिक गुना तक देंगे।

16:97Page 278

مَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا مِّن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَلَنُحۡيِيَنَّهُۥ حَيَوٰةٗ طَيِّبَةٗۖ وَلَنَجۡزِيَنَّهُمۡ أَجۡرَهُم بِأَحۡسَنِ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ٩٧

Whoever does righteousness, whether male or female, while he is a believer - We will surely cause him to live a good life, and We will surely give them their reward [in the Hereafter] according to the best of what they used to do.

जो भी शरीयत के अनुसार नेक काम करे, चाहे वह पुरुष हो या महिला, और वह अल्लाह पर ईमान रखने वाला हो, तो हम उसे अल्लाह के फ़ैसले से संतुष्टि और उसके साथ संतोष और नेक कार्यों की तौफ़ीक़ से भरा हुआ एक अच्छा जीवन प्रदान करेंगे और हम आख़िरत में उन्हें, दुनिया में उनके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों का, सर्वश्रेष्ठ बदला प्रदान करेंगे।

16:98Page 278

فَإِذَا قَرَأۡتَ ٱلۡقُرۡءَانَ فَٱسۡتَعِذۡ بِٱللَّهِ مِنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ ٱلرَّجِيمِ ٩٨

So when you recite the Qur’ān, [first] seek refuge in Allāh from Satan, the expelled [from His mercy].

अतः (ऐ मोमिन!) जब तुम क़ुरआन पढ़ना चाहो, तो अल्लाह से दुआ करो को वह तुम्हें अल्लाह की दया से निष्कासित शैतान के वसवसे (बुरे ख़याल) से सुरक्षित रखे।

16:99Page 278

إِنَّهُۥ لَيۡسَ لَهُۥ سُلۡطَٰنٌ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمۡ يَتَوَكَّلُونَ ٩٩

Indeed, there is for him no authority over those who have believed and rely upon their Lord.

शैतान का ज़ोर उन लोगों पर नहीं चलता, जो अल्लाह पर ईमान लाए और वे अपने सभी कार्यों में केवल अपने पालनहार पर भरोसा रखते हैं।

16:100Page 278

إِنَّمَا سُلۡطَٰنُهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ يَتَوَلَّوۡنَهُۥ وَٱلَّذِينَ هُم بِهِۦ مُشۡرِكُونَ ١٠٠

His authority is only over those who take him as an ally and those who through him associate others with Allāh.

बुरे ख़यालों द्वारा उसका प्रभुत्व तो केवल उन लोगों पर है, जो उसे अपना दोस्त बनाते हैं और उसके बहकावे में उसका पालन करते हैं, तथा उसके बहकाने के कारण अल्लाह का साझी बनाने वाले हैं, उसके साथ दूसरे की पूजा करते हैं।

16:101Page 278

وَإِذَا بَدَّلۡنَآ ءَايَةٗ مَّكَانَ ءَايَةٖ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا يُنَزِّلُ قَالُوٓاْ إِنَّمَآ أَنتَ مُفۡتَرِۭۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ١٠١

And when We substitute a verse in place of a verse - and Allāh is most knowing of what He sends down - they say, "You, [O Muḥammad], are but an inventor [of lies]." But most of them do not know.

जब हम क़ुरआन की किसी आयत का हुक्म दूसरी आयत के ज़रिए निरस्त करते हैं (और अल्लाह उसे अधिक जानने वाला है जो वह क़ुरआन में से किसी हिकमत के कारण निरस्त करता है और उसे भी जानने वाला है, जो वह उसमें से निरस्त नहीं करता है), तो वे कहते हैं : (ऐ मुहम्मद!) तुम तो झूठे हो, अल्लाह पर झूठ गढ़ते हो। बल्कि, उनमें से अधिकांश को यह नहीं पता कि निरस्त करना अल्लाह की व्यापक हिकमत के तहत होता है।

16:102Page 278

قُلۡ نَزَّلَهُۥ رُوحُ ٱلۡقُدُسِ مِن رَّبِّكَ بِٱلۡحَقِّ لِيُثَبِّتَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَهُدٗى وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُسۡلِمِينَ ١٠٢

Say, [O Muḥammad], "The Pure Spirit [i.e., Gabriel] has brought it down from your Lord in truth to make firm those who believe and as guidance and good tidings to the Muslims."

(ऐ रसूल!) उनसे कह दें : इस क़ुरआन को जिबरील अलैहिस्सलाम अल्लाह की ओर से, सत्य के साथ लेकर उतरे हैं, जिसमें कोई त्रुटि, या परिवर्तन या विकृति नहीं है। ताकि जब भी उसकी कोई नई आयत उतरे और उसमें से कुछ को निरस्त किया जाए, तो वह अल्लाह पर ईमान रखने वालों को उनके ईमान पर मज़बूत कर दे, और ताकि यह उनके लिए सत्य का मार्गदर्शन हो, और मुसलमानों के लिए उन्हें प्राप्त होने वाले उत्कृष्ट बदले की शुभ सूचना हो।

16:103Page 279

وَلَقَدۡ نَعۡلَمُ أَنَّهُمۡ يَقُولُونَ إِنَّمَا يُعَلِّمُهُۥ بَشَرٞۗ لِّسَانُ ٱلَّذِي يُلۡحِدُونَ إِلَيۡهِ أَعۡجَمِيّٞ وَهَٰذَا لِسَانٌ عَرَبِيّٞ مُّبِينٌ ١٠٣

And We certainly know that they say, "It is only a human being who teaches him [i.e., the Prophet (ﷺ)]." The tongue of the one they refer to is foreign,1 and this [recitation, i.e., Qur’ān] is [in] a clear Arabic language.

हम जानते हैं कि बहुदेववादियों का कहना है कि : मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को क़ुरआन तो एक इनसान सिखाता है। हालाँकि वे अपने दावे में झूठे हैं। क्योंकि जिसके बारे में उनका ख़याल है कि वह आपको क़ुरआन सिखाता है, उसकी भाषा ग़ैर-अरबी है, और यह क़ुरआन उच्च बलाग़त (आलंकारिक शैली) वाले स्पष्ट अरबी भाषा में उतरा है। फिर वे कैसे दावा करते हैं कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने) इसे एक गैर-अरब व्यक्ति से सीखा है?!

16:104Page 279

إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ لَا يَهۡدِيهِمُ ٱللَّهُ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ ١٠٤

Indeed, those who do not believe in the verses of Allāh - Allāh will not guide them, and for them is a painful punishment.

निःसंदेह जो लोग अल्लाह की आयतों पर विश्वास नहीं रखते कि वे उसी महिमावान की ओर से हैं, अल्लाह उन्हें सत्य की ओर मार्गदर्शन का सामर्थ्य नहीं देता जब तक कि वे अपने इस रवैये पर अटल हैं। तथा अल्लाह के इनकार और उसकी आयतों को झुठलाने के कारण उनके लिए दर्दनाक यातना है।

16:105Page 279

إِنَّمَا يَفۡتَرِي ٱلۡكَذِبَ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡكَٰذِبُونَ ١٠٥

They only invent falsehood who do not believe in the verses of Allāh, and it is those who are the liars.

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने पालनहार की ओर से जो कुछ लाए हैं, उसमें वह झूठे नहीं हैं। बल्कि झूठ तो वे लोग गढ़ते हैं, जो अल्लाह की आयतों को सत्य नहीं मानते। क्योंकि उन्हें न किसी यातना का डर है, और न ही उन्हें किसी प्रतिफल की उम्मीद है। ये लोग जो कुफ़्र की विशेषता रखने वाले हैं, वे झूठे हैं। क्योंकि झूठ बोलना उनकी आदत है जिसके वे आदी हो चुके हैं।

16:106Page 279

مَن كَفَرَ بِٱللَّهِ مِنۢ بَعۡدِ إِيمَٰنِهِۦٓ إِلَّا مَنۡ أُكۡرِهَ وَقَلۡبُهُۥ مُطۡمَئِنُّۢ بِٱلۡإِيمَٰنِ وَلَٰكِن مَّن شَرَحَ بِٱلۡكُفۡرِ صَدۡرٗا فَعَلَيۡهِمۡ غَضَبٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَلَهُمۡ عَذَابٌ عَظِيمٞ ١٠٦

Whoever disbelieves in [i.e., denies] Allāh after his belief...1 except for one who is forced [to renounce his religion] while his heart is secure in faith. But those who [willingly] open their breasts to disbelief, upon them is wrath from Allāh, and for them is a great punishment;

जिसने ईमान लाने के बाद अल्लाह के साथ कुफ़्र किया, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे कुफ़्र पर मजबूर किया जाए और वह अपनी ज़बान से कुफ़्र के शब्द का उच्चारण कर ले, जबकि उसका दिल ईमान से संतुष्ट हो और उसकी सच्चाई पर विश्वास रखने वाला हो (तो उसका हुक्म अलग है)। लेकिन जिसका सीना कुफ़्र के लिए खुला हो और वह ईमान के स्थान पर उसी को चुन ले और आज्ञाकारी रूप से अपनी ज़बान से उसका उच्चारण करे, तो वह इस्लाम से फिर जाने वाला है। अतः ऐसे लोगों पर अल्लाह का क्रोध है और उनके लिए बहुत बड़ी यातना है।

16:107Page 279

ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ ٱسۡتَحَبُّواْ ٱلۡحَيَوٰةَ ٱلدُّنۡيَا عَلَى ٱلۡأٓخِرَةِ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ ١٠٧

That is because they preferred the worldly life over the Hereafter and that Allāh does not guide the disbelieving people.

इस्लाम से उनका यह फिर जाना इस कारण हुआ कि उन्होंने अपने कुफ़्र के बदले में प्राप्त होने वाले दुनिया के थोड़े-से अंश को आख़िरत पर वरीयता दी। और यह कि अल्लाह काफ़िर समुदाय को ईमान की तौफ़ीक़ नहीं देता, बल्कि उन्हें असहाय छोड़ देता है।

16:108Page 279

أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ طَبَعَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ وَسَمۡعِهِمۡ وَأَبۡصَٰرِهِمۡۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡغَٰفِلُونَ ١٠٨

Those are the ones over whose hearts and hearing and vision Allāh has sealed, and it is those who are the heedless.

ईमान लाने के बाद उससे फिर जाने वाले लोगों के दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है, इसलिए वे उपदेशों को नहीं समझते, और उनके कानों में मुहर लगा दी है, इसलिए उन्हें लाभ उठाने के उद्देश्य से नहीं सुनते, और उनकी आँखों पर परदे डाल दिए हैं, इसलिए वे ईमान का प्रमाण प्रस्तुत करने वाली निशानियों को नहीं देखते। और यही लोग हैं, जो सौभाग्य और दुर्भाग्य के कारणों से, तथा उस यातना से ग़ाफ़िल हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार की है।

16:109Page 279

لَا جَرَمَ أَنَّهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ ١٠٩

Assuredly, it is they, in the Hereafter, who will be the losers.

वास्तव में, क़ियामत के दिन यही लोग घाटा उठाने वाले लोग हैं, जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ़्र करके खुद अपना नुक़सान किया, जो यदि उसी पर क़ायम रहते, तो वे जन्नत में प्रवेश करते।

16:110Page 279

ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ هَاجَرُواْ مِنۢ بَعۡدِ مَا فُتِنُواْ ثُمَّ جَٰهَدُواْ وَصَبَرُوٓاْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ ١١٠

Then, indeed your Lord, to those who emigrated after they had been compelled [to say words of disbelief] and thereafter fought [for the cause of Allāh] and were patient - indeed, your Lord, after that, is Forgiving and Merciful

फिर (ऐ रसूल!) आपका पालनहार उन कमज़ोर मोमिनों को क्षमा करने वाला और उनपर दया करने वाला है, जिन्होंने मक्का से मदीना की ओर हिजरत की, इसके पश्चात कि बहुदेववादियों ने उन्हें प्रताड़ित किया और उनके धर्म के मामले में उनका परीक्षण किया, यहाँ तक कि वे कुफ़्र का शब्द बोनले पर विवश हो गए, लेकिन उनके दिल ईमान से संतुष्ट थे। फिर उन्होंने अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया ताकि अल्लाह की बात सर्वोच्च हो और काफ़िरों की बात नीची रहे और इस मार्ग में आने वाले कष्ट पर धैर्य रखा। निश्चित रूप से आपका पालनहार उस परीक्षण के बाद जिससे वे परीक्षित किए गए और उस प्रताड़ना के बाद जिससे वे प्रताड़ित किए गए, यहाँ तक कि कुफ़्र का शब्द बोलने पर मजबूर हो गए; (आपका पालनहार) उन्हें बहुत क्षमा करने वाला और उनपर अत्यंत दया करने वाला है। क्योंकि उन्होंने कुफ़्र के शब्द का उच्चारण केवल मजबूर किए जाने पर किया था।

16:111Page 280

۞ يَوۡمَ تَأۡتِي كُلُّ نَفۡسٖ تُجَٰدِلُ عَن نَّفۡسِهَا وَتُوَفَّىٰ كُلُّ نَفۡسٖ مَّا عَمِلَتۡ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ ١١١

On the Day when every soul will come disputing [i.e., pleading] for itself, and every soul will be fully compensated for what it did, and they will not be wronged [i.e., treated unjustly].

और (ऐ रसूल!) उस दिन को याद करें, जिस दिन परिस्थिति इतनी गंभीर होगी कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी ओर से झगड़ रहा होगा। वह किसी दूसरे की ओर से नहीं झगड़ेगा। तथा हर इनसान को उसके अच्छे और बुरे कार्यों का पूरा बदला दिया जाएगा। और उनपर इस प्रकार का कोई अत्याचार नहीं होगा कि उनकी नेकियाँ घटा दी जाएँ या उनके गुनाह बढ़ा दिए जाएँ।

16:112Page 280

وَضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا قَرۡيَةٗ كَانَتۡ ءَامِنَةٗ مُّطۡمَئِنَّةٗ يَأۡتِيهَا رِزۡقُهَا رَغَدٗا مِّن كُلِّ مَكَانٖ فَكَفَرَتۡ بِأَنۡعُمِ ٱللَّهِ فَأَذَٰقَهَا ٱللَّهُ لِبَاسَ ٱلۡجُوعِ وَٱلۡخَوۡفِ بِمَا كَانُواْ يَصۡنَعُونَ ١١٢

And Allāh presents an example: a city [i.e., Makkah] which was safe and secure, its provision coming to it in abundance from every location, but it denied the favors of Allāh. So Allāh made it taste the envelopment of hunger and fear for what they had been doing.

अल्लाह ने एक बस्ती (जो कि मक्का है) का उदाहरण दिया है, जो सुरक्षित थी उसके निवासियों को कोई भय नहीं था, तथा स्थिरता व शांति वाली थी। जबकि लोग उसके आस-पास से उचक लिए जाते थे। उसकी रोज़ी हर स्थान से आसानी के साथ चली आ रही थी। फिर उसके वासियों ने अल्लाह की नेमतों का इनकार किया और उनका शुक्रिया अदा नहीं किया। तो अल्लाह ने बदले के तौर पर उन्हें भूख और सख़्त भय से ग्रस्त कर दिया, जो उनके शरीर पर घबराहट और कमज़ोरी के रूप में प्रकट हुआ, यहाँ तक कि वे दोनों उनके लिए कपड़े की तरह (चिमट जाने वाले) हो गए। ऐसा दरअसल उनके कुफ़्र एवं झुठलाने के कारण हुआ।

16:113Page 280

وَلَقَدۡ جَآءَهُمۡ رَسُولٞ مِّنۡهُمۡ فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمُ ٱلۡعَذَابُ وَهُمۡ ظَٰلِمُونَ ١١٣

And there had certainly come to them a Messenger from among themselves, but they denied him; so punishment overtook them while they were wrongdoers.

मक्का वालों के पास उन्हीं में से एक रसूल आया, जिसे वे सच्चाई और अमानतदारी के साथ जानते थे। यह रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम थे। लेकिन उन्होंने आपपर आपके पालनहार ने जो कुछ उतारा था, उसमें आपको झूठा ठहराया, तो उनपर भूख और भय के रूप में अल्लाह का अज़ाब उतरा। जबकि वे अल्लाह का साझी ठहराने और उसके रसूलों को झुठलाने के कारण अपने आपको विनाश में डालकर स्वयं पर अत्याचार करने वाले थे।

16:114Page 280

فَكُلُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ حَلَٰلٗا طَيِّبٗا وَٱشۡكُرُواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ إِن كُنتُمۡ إِيَّاهُ تَعۡبُدُونَ ١١٤

Then eat of what Allāh has provided for you [which is] lawful and good. And be grateful for the favor of Allāh, if it is [indeed] Him that you worship.

इसलिए, (ऐ बंदो!) अल्लाह की दी हुई वह वस्तुएँ जो खाने में अच्छी लगें और हलाल हों, खाओ, और अल्लाह की दी हुई नेमतों का, उन्हें अल्लाह की दी हुई नेमत मानकर और उसकी प्रसन्नता के कामों में लगाकर, शुक्रिया अदा करो, यदि तुम अकेले उसी की इबादत करते हो और उसके साथ किसी को साझी नहीं बनाते हो।

16:115Page 280

إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَيۡتَةَ وَٱلدَّمَ وَلَحۡمَ ٱلۡخِنزِيرِ وَمَآ أُهِلَّ لِغَيۡرِ ٱللَّهِ بِهِۦۖ فَمَنِ ٱضۡطُرَّ غَيۡرَ بَاغٖ وَلَا عَادٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ١١٥

He has only forbidden to you dead animals,1 blood, the flesh of swine, and that which has been dedicated to other than Allāh. But whoever is forced [by necessity], neither desiring [it] nor transgressing [its limit] - then indeed, Allāh is Forgiving and Merciful.

अल्लाह ने खाने की जो चीजें तुमपर हराम की हैं, वे इस प्रकार हैं : ज़बह किया जाने वाला वह जानवर जो ज़बह किए बिना मर जाए, बहता रक्त, सुअर अपने सभी हिस्सों सहित और वह जानवर जिसे ज़बह करने वाले ने अल्लाह के अलावा किसी और को भेंट के रूप में ज़बह किया हो। यह निषेध उस समय है, जब आदमी स्वेच्छा से खाए। अलबत्ता, अगर कोई व्यक्ति इन्हें खाने को मजबूर हो जाए और उनमें से कुछ खा ले, इस हाल में कि वह हराम का इच्छुक न हो और ज़रूरत की सीमा से आगे बढ़ने वाला न हो; तो उसपर कोई पाप नहीं है। क्योंकि अल्लाह क्षमा करने वाला है। उसने जो कुछ खाया है, उसे माफ़ कर देगा। उसपर दया करने वाला है कि उसे आवश्यकता पड़ने पर इसकी अनुमति प्रदान कर दी।

16:116Page 280

وَلَا تَقُولُواْ لِمَا تَصِفُ أَلۡسِنَتُكُمُ ٱلۡكَذِبَ هَٰذَا حَلَٰلٞ وَهَٰذَا حَرَامٞ لِّتَفۡتَرُواْ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَ لَا يُفۡلِحُونَ ١١٦

And do not say about what your tongues assert of untruth, "This is lawful and this is unlawful," to invent falsehood about Allāh. Indeed, those who invent falsehood about Allāh will not succeed.

और (ऐ मुश्रिको!) तुम उसके कारण जो तुम्हारी ज़बानें अल्लाह पर झूठ कहती हैं, यह न कहो कि यह चीज़ हलाल है और यह चीज़ हराम है; इस उद्देश्य से कि उस चीज़ को हराम ठहराकर जो अल्लाह ने हराम नहीं किया, या उस चीज़ को हलाल ठहराकर जो उसने हलाल नहीं किया, अल्लाह पर झूठ गढ़ो। निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़ते हैं, वे न किसी उद्देश्य में सफल होते हैं, और न किसी भय से छुटकारा पाते हैं।

16:117Page 280

مَتَٰعٞ قَلِيلٞ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ ١١٧

[It is but] a brief enjoyment, and they will have a painful punishment.

इस दुनिया में उनके लिए अपनी इच्छाओं का पालन करने के कारण थोड़ा-सा तुच्छ सामान है, और क़ियामत के दिन उनके लिए दर्दनाक यातना है।

16:118Page 280

وَعَلَى ٱلَّذِينَ هَادُواْ حَرَّمۡنَا مَا قَصَصۡنَا عَلَيۡكَ مِن قَبۡلُۖ وَمَا ظَلَمۡنَٰهُمۡ وَلَٰكِن كَانُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ ١١٨

And to those who are Jews We have prohibited that which We related to you before.1 And We did not wrong them [thereby], but they were wronging themselves.

विशेष रूप से यहूदियों पर हमने वे चीज़ें हराम कीं, जिनका वर्णन हम इससे पहले आपके सामने कर चुके हैं। (जैसाकि सूरतुल्-अन्आम की आयत संख्या : 146 में है)। इन चीज़ों को हराम करके हमने उनपर अत्याचार नहीं किया। बल्कि सज़ा के कारणों को अपनाकर, वे स्वंय अपने ऊपर अत्याचार करते थे। इसलिए हमने उन्हें उनकी सरकशी का बदला दिया, और सज़ा के तौर पर इन वस्तुओं को उनपर हराम कर दिया।

16:119Page 281

ثُمَّ إِنَّ رَبَّكَ لِلَّذِينَ عَمِلُواْ ٱلسُّوٓءَ بِجَهَٰلَةٖ ثُمَّ تَابُواْ مِنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ وَأَصۡلَحُوٓاْ إِنَّ رَبَّكَ مِنۢ بَعۡدِهَا لَغَفُورٞ رَّحِيمٌ ١١٩

Then, indeed your Lord, to those who have done wrong out of ignorance and then repent after that and correct themselves - indeed, your Lord, thereafter, is Forgiving and Merciful.

फिर (ऐ रसूल!) आपका पालनहार उन लोगों के लिए जिन्होंने बुरे कर्म किए उनके परिणामों से अनभिज्ञ होने के कारण, भले ही वे जानबूझकर किए हों, फिर उन्होंने बुरे कार्य करने के बाद अल्लाह के समक्ष तौबा कर ली और अपने उन कार्यों का सुधार कर लिया जिनमें खराबी थी, तो आपका पालनहार तौबा कर लेने के बाद उनके गुनाहों को माफ़ करने वाला, उन पर दया करने वाला है।

16:120Page 281

إِنَّ إِبۡرَٰهِيمَ كَانَ أُمَّةٗ قَانِتٗا لِّلَّهِ حَنِيفٗا وَلَمۡ يَكُ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ ١٢٠

Indeed, Abraham was a [comprehensive] leader,1 devoutly obedient to Allāh, inclining toward truth, and he was not of those who associate others with Allāh.

निःसंदेह इबराहीम अलैहिस्सलाम सभी अच्छे गुणों से सुसज्जित, सदैव अपने पालनहार का आज्ञापालन करने वाले और सभी धर्मों से विमुख होकर इस्लाम की ओेर आकृष्ट थे। तथा वह कभी भी शिर्क करने वालों में से नहीं थे।

16:121Page 281

شَاكِرٗا لِّأَنۡعُمِهِۚ ٱجۡتَبَىٰهُ وَهَدَىٰهُ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ١٢١

[He was] grateful for His favors. He [i.e., Allāh] chose him and guided him to a straight path.

वह अल्लाह की ओर से प्राप्त होने वाली नेमतों के प्रति आभार प्रकट करने वाले थे। अल्लाह ने उन्हें नुबुव्वत (ईशदूतत्व) के लिए चुन लिया था और सीधे धर्म इस्लाम की ओर उनका मार्गदर्शन किया था।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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