Al-MukhtasarAl‑Baqarah · 2:252–276

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

Al-Baqarah 2:252–276

2:252Page 41

تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱللَّهِ نَتۡلُوهَا عَلَيۡكَ بِٱلۡحَقِّۚ وَإِنَّكَ لَمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ ٢٥٢

These are the verses of Allāh which We recite to you, [O Muḥammad], in truth. And indeed, you are from among the messengers.

ये अल्लाह की खुली हुई स्पष्ट आयतें हैं, जो हम - ऐ नबी! - आपको सुनाते हैं, जिनमें सच्ची सूचनाएँ और न्यायसंगत विधान मौजूद हैं। और निःसंदेह आप सर्व संसार के पालनहार की ओर से भेजे गए रसूलों में से हैं।

2:253Page 42

۞ تِلۡكَ ٱلرُّسُلُ فَضَّلۡنَا بَعۡضَهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖۘ مِّنۡهُم مَّن كَلَّمَ ٱللَّهُۖ وَرَفَعَ بَعۡضَهُمۡ دَرَجَٰتٖۚ وَءَاتَيۡنَا عِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ٱلۡبَيِّنَٰتِ وَأَيَّدۡنَٰهُ بِرُوحِ ٱلۡقُدُسِۗ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقۡتَتَلَ ٱلَّذِينَ مِنۢ بَعۡدِهِم مِّنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَتۡهُمُ ٱلۡبَيِّنَٰتُ وَلَٰكِنِ ٱخۡتَلَفُواْ فَمِنۡهُم مَّنۡ ءَامَنَ وَمِنۡهُم مَّن كَفَرَۚ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا ٱقۡتَتَلُواْ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَفۡعَلُ مَا يُرِيدُ ٢٥٣

Those messengers - some of them We caused to exceed others. Among them were those to whom Allāh spoke, and He raised some of them in degree. And We gave Jesus, the son of Mary, clear proofs, and We supported him with the Pure Spirit [i.e., Gabriel]. If Allāh had willed, those [generations] succeeding them would not have fought each other after the clear proofs had come to them. But they differed, and some of them believed and some of them disbelieved. And if Allāh had willed, they would not have fought each other, but Allāh does what He intends.

ये रसूल जिनका हमने आपसे वर्णन किया है, उनमें से कुछ को हमने वह़्य, अनुयायियों और दर्जों के मामले में दूसरों पर श्रेष्ठता प्रदान की है। उनमें से कुछ वे हैं जिनसे अल्लाह ने बात की, जैसे- मूसा अलैहिस्सलाम, और उनमें से कुछ को ऊँचे पद प्रदान किए, जैसे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम; क्योंकि आपको सभी मानव जाति के लिए भेजा गया तथा आपपर नुबुव्वत (ईश्दूतत्व) की मुहर लगा दी गई (और ईश्दूतत्व का क्रम समाप्त हो गया) और आपकी उम्मत को दूसरी उम्मतों पर श्रेष्ठता दी गई। और हमने मरयम के पुत्र ईसा को, उनकी नुबुव्वत (ईश्दूतत्व) को प्रमाणित करने वाले स्पष्ट चमत्कार दिए; जैसे मरे हुए व्यक्ति को पुनर्जीवित करना और जन्मजात अंधे और कोढ़ी को ठीक करना। तथा अल्लाह के आदेश को पूरा करने के लिए शक्ति प्रदान करने हेतु, हमने जिबरील अलैहिस्सलाम के द्वारा उनका समर्थन किया। अगर अल्लाह चाहता, तो रसूलों के बाद आने वाले लोग, उनके पास स्पष्ट निशानियाँ आ जाने के पश्चात आपस में न लड़ते। परंतु उन लोगों ने विवाद किया और वे विभाजित हो गए; उनमें से कुछ अल्लाह पर ईमान लाए और कुछ ने उसका इनकार किया। अगर अल्लाह चाहता कि वे आपस में न लड़ें, तो वे आपस में न लड़ते, लेकिन अल्लाह जो चाहता है, करता है। अतः वह जिसे चाहता है अपनी दया और अनुग्रह से ईमान की हिदायत देता है और जिसे चाहता है अपने न्याय और हिकमत से गुमराह कर देता है।

2:254Page 42

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَنفِقُواْ مِمَّا رَزَقۡنَٰكُم مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا بَيۡعٞ فِيهِ وَلَا خُلَّةٞ وَلَا شَفَٰعَةٞۗ وَٱلۡكَٰفِرُونَ هُمُ ٱلظَّٰلِمُونَ ٢٥٤

O you who have believed, spend from that which We have provided for you before there comes a Day in which there is no exchange [i.e., ransom] and no friendship and no intercession. And the disbelievers - they are the wrongdoers.

ऐ अल्लाह पर ईमान लाने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! हमने तुम्हें विभिन्न हलाल (वैध) धन में से जो कुछ प्रदान किया है, उसमें से खर्च करो, इससे पहले कि क़ियामत का दिन आ जाए। उस समय, वहाँ न कोई क्रय-विक्रय होगा कि जिससे मनुष्य वह चीज़ प्राप्त कर सके जो उसे लाभ दे, न कोई दोस्ती होगी जो उसे संकट के समय में लाभ दे, और न ही कोई मध्यस्थता (सिफ़ारिश) होगी जो हानि को दूर करे या लाभ पहुँचाए। सिवाय इसके कि जब अल्लाह जिसे चाहे और जिससे वह प्रसन्न हो, अनुमति प्रदान कर दे। और काफ़िर लोग ही वास्तव में अत्याचारी हैं क्योंकि वे सर्वशक्तिमान अल्लाह का इनकार करते हैं।

2:255Page 42

ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلۡحَيُّ ٱلۡقَيُّومُۚ لَا تَأۡخُذُهُۥ سِنَةٞ وَلَا نَوۡمٞۚ لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ مَن ذَا ٱلَّذِي يَشۡفَعُ عِندَهُۥٓ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦۚ يَعۡلَمُ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَمَا خَلۡفَهُمۡۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيۡءٖ مِّنۡ عِلۡمِهِۦٓ إِلَّا بِمَا شَآءَۚ وَسِعَ كُرۡسِيُّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَۖ وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفۡظُهُمَاۚ وَهُوَ ٱلۡعَلِيُّ ٱلۡعَظِيمُ ٢٥٥

Allāh - there is no deity except Him, the Ever-Living,1 the Self-Sustaining.2 Neither drowsiness overtakes Him nor sleep. To Him belongs whatever is in the heavens and whatever is on the earth. Who is it that can intercede with Him except by His permission? He knows what is [presently] before them and what will be after them,3 and they encompass not a thing of His knowledge except for what He wills. His Kursī4 extends over the heavens and the earth, and their preservation tires Him not. And He is the Most High,5 the Most Great.6

अल्लाह वह है जिस अकेले के सिवा कोई भी वास्तविक रूप से इबादत के लायक़ नहीं है। वह जीवित है, एक पूर्ण जीवन वाला है जिसमें कोई मृत्यु या कमी नहीं है। हर चीज़ को सँभालने वाला है, जो स्वयं क़ायम है, अतः वह अपनी सारी सृष्टि से बेनियाज़ है। तथा उसी से सारी सृष्टि क़ायम है, इसलिए वे अपनी सभी स्थितियों में उससे बेनियाज़ नहीं हो सकते। उसके जीवन की पूर्णता और उसके संपूर्ण रूप से हर चीज़ को संभालने के कारण, उसे न कुछ ऊँघ आती है और न कोई नींद। जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, सबका अकेला वही मालिक है। उसकी अनुमति और सहमति के बिना किसी को भी उसके पास किसी के लिए सिफ़ारिश करने का अधिकार नहीं है। वह जानता है अपनी सृष्टि के पिछले मामलों को जो घटित हो चुके और जिनका वे भविष्य में सामना करने वाले हैं, जो अभी घटित नहीं हुए। और वे उस सर्वशक्तिमान के ज्ञान में से किसी भी चीज़ को अपने ज्ञान से नहीं घेर सकते, सिवाय उसके जिससे वह उन्हें स्वयं अवगत कराना चाहे। उसकी कुर्सी ने (जो उसके पाँव रखने का स्थान है) आकाशों और धरती को, उनकी विशालता और महानता के बावजूद घेर रखा है। उन दोनों का संरक्षण करना उसके लिए कुछ कठिन या भारी नहीं है। वह अपने अस्तित्व, अपनी नियति और अपने प्रभुत्व में सबसे ऊँचा, अपने राज्य और अधिकार में सबसे महान है।

2:256Page 42

لَآ إِكۡرَاهَ فِي ٱلدِّينِۖ قَد تَّبَيَّنَ ٱلرُّشۡدُ مِنَ ٱلۡغَيِّۚ فَمَن يَكۡفُرۡ بِٱلطَّٰغُوتِ وَيُؤۡمِنۢ بِٱللَّهِ فَقَدِ ٱسۡتَمۡسَكَ بِٱلۡعُرۡوَةِ ٱلۡوُثۡقَىٰ لَا ٱنفِصَامَ لَهَاۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ٢٥٦

There shall be no compulsion in [acceptance of] the religion. The right course has become distinct from the wrong. So whoever disbelieves in ṭāghūt1 and believes in Allāh has grasped the most trustworthy handhold with no break in it. And Allāh is Hearing and Knowing.

इस्लाम धर्म में प्रवेश करने के लिए किसी को भी मजबूर नहीं किया जाएगा; क्योंकि यह स्पष्ट सत्य धर्म है। अतः किसी को इसे ग्रहण करने के लिए मजबूर करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हिदायत, गुमराही से बिल्कुल स्पष्ट हो चुकी है। इसलिए जो व्यक्ति अल्लाह के अलावा पूजा की जाने वाली हर चीज़ का इनकार करे और उससे अलगाव प्रकट करे और केवल अल्लाह पर ईमान रखे; तो उसने क़ियामत के दिन मोक्ष के लिए धर्म की सबसे मज़बूत रस्सी पकड़ ली है, जो कभी नहीं टूटेगी। और अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कर्मों को जानने वाला है और वह उन्हें उनका बदला देगा।

2:257Page 43

ٱللَّهُ وَلِيُّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ يُخۡرِجُهُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَوۡلِيَآؤُهُمُ ٱلطَّٰغُوتُ يُخۡرِجُونَهُم مِّنَ ٱلنُّورِ إِلَى ٱلظُّلُمَٰتِۗ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ ٢٥٧

Allāh is the Ally1 of those who believe. He brings them out from darknesses into the light. And those who disbelieve - their allies are ṭāghūt. They take them out of the light into darknesses.2 Those are the companions of the Fire; they will abide eternally therein.

अल्लाह उन लोगों की देखभाल (संरक्षण) करता है जो उस पर ईमान लाए हैं, वह उन्हें सामर्थ्य प्रदान करता और उनकी सहायता करता है, तथा उन्हें कुफ़्र और अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ईमान और ज्ञान के प्रकाश में लाता है। और जिन लोगों ने कुफ़्र किया, उनके संरक्षक वे मूर्तियाँ और साझेदार हैं, जिन्होंने उनके लिए कुफ़्र को सुशोभित किया है। और उन्हें ईमान और ज्ञान के प्रकाश से निकालकर कुफ़्र और अज्ञानता के अँधियारों में डाल दिया है। वे लोग आग (दोज़ख़) वाले हैं, वे हमेशा उसी में रहेंगे।

2:258Page 43

أَلَمۡ تَرَ إِلَى ٱلَّذِي حَآجَّ إِبۡرَٰهِـۧمَ فِي رَبِّهِۦٓ أَنۡ ءَاتَىٰهُ ٱللَّهُ ٱلۡمُلۡكَ إِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِـۧمُ رَبِّيَ ٱلَّذِي يُحۡيِۦ وَيُمِيتُ قَالَ أَنَا۠ أُحۡيِۦ وَأُمِيتُۖ قَالَ إِبۡرَٰهِـۧمُ فَإِنَّ ٱللَّهَ يَأۡتِي بِٱلشَّمۡسِ مِنَ ٱلۡمَشۡرِقِ فَأۡتِ بِهَا مِنَ ٱلۡمَغۡرِبِ فَبُهِتَ ٱلَّذِي كَفَرَۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّٰلِمِينَ ٢٥٨

Have you not considered the one who argued with Abraham about his Lord [merely] because Allāh had given him kingship? When Abraham said, "My Lord is the one who gives life and causes death," he said, "I give life and cause death." Abraham said, "Indeed, Allāh brings up the sun from the east, so bring it up from the west." So the disbeliever was overwhelmed [by astonishment], and Allāh does not guide the wrongdoing people.

(ऐ नबी!) क्या आपने उस सरकश की जुर्अत (दुःसाहस) से अधिक आश्चर्यजनक चीज़ देखी, जिसने इबराहीम अलैहिस्सलाम से अल्लाह की रुबूबियत (ईश्वरत्व) और तौहीद (एकेश्वरवाद) के संबंध में बहस की? उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अल्लाह ने उसे राज्य प्रदान किया, जिससे वह सरकश हो गया। इसपर इबराहीम अलैहिस्सलाम ने उससे अपने पालनहार की विशेषताओं का वर्णन करते हुए कहा : मेरा रब वह है, जो प्राणियों को जीवन और मृत्यु देता है। उस सरकश ने दुराग्रह से कहा : मैं भी जीवन और मृत्यु देता हूँ, इस प्रकार कि मैं जिसे चाहता हूँ, क़त्ल कर देता हूँ और जिसे चाहता हूँ, छोड़ देता हूँ। तब इबराहीम अलैहिस्सलाम ने एक दूसरा उससे बड़ा तर्क प्रस्तुत किया, आपने उससे कहा : मेरा पालनहार, जिसकी मैं इबादत करता हूँ, पूर्व दिशा से सूर्य लाता है, अतः तू उसे पश्चिम की दिशा से ले आ। इसपर वह सरकश चकित रह गया और उससे कोई जवाब नहीं बन पड़ा, तथा तर्क की शक्ति से पराजित हो गया। और अल्लाह अत्याचारियों को, उनके अत्याचार और सरकशी के कारण, अपने पथ पर चलने की तौफीक़ नहीं देता।

2:259Page 43

أَوۡ كَٱلَّذِي مَرَّ عَلَىٰ قَرۡيَةٖ وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا قَالَ أَنَّىٰ يُحۡيِۦ هَٰذِهِ ٱللَّهُ بَعۡدَ مَوۡتِهَاۖ فَأَمَاتَهُ ٱللَّهُ مِاْئَةَ عَامٖ ثُمَّ بَعَثَهُۥۖ قَالَ كَمۡ لَبِثۡتَۖ قَالَ لَبِثۡتُ يَوۡمًا أَوۡ بَعۡضَ يَوۡمٖۖ قَالَ بَل لَّبِثۡتَ مِاْئَةَ عَامٖ فَٱنظُرۡ إِلَىٰ طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمۡ يَتَسَنَّهۡۖ وَٱنظُرۡ إِلَىٰ حِمَارِكَ وَلِنَجۡعَلَكَ ءَايَةٗ لِّلنَّاسِۖ وَٱنظُرۡ إِلَى ٱلۡعِظَامِ كَيۡفَ نُنشِزُهَا ثُمَّ نَكۡسُوهَا لَحۡمٗاۚ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُۥ قَالَ أَعۡلَمُ أَنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ ٢٥٩

Or [consider such an example] as the one who passed by a township which had fallen into ruin. He said, "How will Allāh bring this to life after its death?" So Allāh caused him to die for a hundred years; then He revived him. He said, "How long have you remained?" He [the man] said, "I have remained a day or part of a day." He said, "Rather, you have remained one hundred years. Look at your food and your drink; it has not changed with time. And look at your donkey; and We will make you a sign for the people. And look at the bones [of this donkey] - how We raise them and then We cover them with flesh." And when it became clear to him, he said, "I know that Allāh is over all things competent."

या क्या आपने उस व्यक्ति की तरह कोई आदमी देखा है, जिसका गुज़र एक ऐसी बस्ती से हुआ, जिसकी छतें गिर गई थीं, उसकी दीवारें ढह गई थीं और उसके निवासी नष्ट हो गए थे, इसलिए वह एक सुनसान उजाड़ बन गई थी? उस आदमी ने आश्चर्य से कहा : अल्लाह इस बस्ती के लोगों को मरने के बाद कैसे पुनर्जीवित करेगा?! तो अल्लाह ने उसे एक सौ साल के लिए मौत दे दी, फिर उसे जीवित किया और उससे पूछा : तू कितने समय तक मरा हुआ रहा? उसने उत्तर दिया : मैं एक दिन या उसका कुछ भाग रहा हूँ। अल्लाह ने उससे कहा : बल्कि, तू पूरे सौ साल रहा है। इसलिए तेरे साथ जो खाना और पानी था उसे देख। वह अपनी हालत पर बाक़ी है, उसमें कोई बदलाव नही आया। हालाँकि सबसे तेज़ बदलाव खाना और पानी में होता है। तथा तू अपने मरे हुए गधे को देख। हमने ऐसा इसलिए किया, ताकि हम तुझे लोगों के लिए इस बात की स्पष्ट निशानी बना दें कि अल्लाह उन्हें दोबारा ज़िंदा करने की पूरी शक्ति रखता है। तथा तू अपने गधे की हड्डियों को देख जो बिखरी हुई और अलग हो गई हैं, हम उन्हें कैसे उठाते हैं और उन्हें एक साथ जोड़ते हैं, फिर उसके बाद उनपर माँस चढ़ाते हैं और उन्हें फिर से जीवित कर देते हैं। जब उसने यह देखा, तो उसके लिए मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो गई और उसने अल्लाह की शक्ति को जान लिया। इसलिए उसने इसे स्वीकारते हुए कहा : मैं जानता हूँ कि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

2:260Page 44

وَإِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِـۧمُ رَبِّ أَرِنِي كَيۡفَ تُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰۖ قَالَ أَوَلَمۡ تُؤۡمِنۖ قَالَ بَلَىٰ وَلَٰكِن لِّيَطۡمَئِنَّ قَلۡبِيۖ قَالَ فَخُذۡ أَرۡبَعَةٗ مِّنَ ٱلطَّيۡرِ فَصُرۡهُنَّ إِلَيۡكَ ثُمَّ ٱجۡعَلۡ عَلَىٰ كُلِّ جَبَلٖ مِّنۡهُنَّ جُزۡءٗا ثُمَّ ٱدۡعُهُنَّ يَأۡتِينَكَ سَعۡيٗاۚ وَٱعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ ٢٦٠

And [mention] when Abraham said, "My Lord, show me how You give life to the dead." [Allāh] said, "Have you not believed?" He said, "Yes, but [I ask] only that my heart may be satisfied." [Allāh] said, "Take four birds and commit them to yourself.1 Then [after slaughtering them] put on each hill a portion of them; then call them - they will come [flying] to you in haste. And know that Allāh is Exalted in Might and Wise."

(ऐ नबी!) उस समय को याद कीजिए जब इबराहीम अलैहिस्सलाम ने कहा : ऐ मेरे रब! मुझे मेरी दृष्टि से दिखा कि मुर्दों को पुनर्जीवित करना कैसे होगा? अल्लाह ने उनसे कहा : क्या तुमने इस बात पर विश्वास नहीं किया? इबराहीम ने उत्तर दिया : क्यों नहीं, मैंने विश्वास किया, परंतु यह मेरे दिल के आश्वासन में वृद्धि के उद्देश्य से है। अल्लाह ने उन्हें आदेश किया और फरमाया : चार पक्षियों को ले लो, फिर उन्हें अपने से अच्छी तरह परचा लो और उनके टुकड़े-दुकड़े कर दो, फिर अपने आस-पास के पहाड़ों में से हर पहाड़ पर उनका एक हिस्सा रख दो, फिर उन्हें बुलाओ। वे तुम्हारे पास दोड़ते हुए आएँगे, उनमें जीवन लौट आया होगा। और ऐ इबराहीम! जान लो कि अल्लाह अपने राज्य में बहुत प्रभुत्वशाली और अपने आदेश, विधान और रचना में पूर्ण हिकमत वाला है।

2:261Page 44

مَّثَلُ ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنۢبَتَتۡ سَبۡعَ سَنَابِلَ فِي كُلِّ سُنۢبُلَةٖ مِّاْئَةُ حَبَّةٖۗ وَٱللَّهُ يُضَٰعِفُ لِمَن يَشَآءُۚ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٌ ٢٦١

The example of those who spend their wealth in the way of Allāh is like a seed [of grain] which grows seven spikes; in each spike is a hundred grains. And Allāh multiplies [His reward] for whom He wills. And Allāh is all-Encompassing and Knowing.

अल्लाह के मार्ग में अपना धन खर्च करने वाले मोमिनों के सवाब का उदहारण एक दाने की तरह है, जिसे किसान एक अच्छी भूमि में डालता है, फिर उससे सात बालियाँ निकलती हैं, जिनमें से प्रत्येक बाली में एक सौ दाने होते हैं। अल्लाह अपने बंदों में से जिसका चाहता है, सवाब बढ़ा देता है, चुनाँचे वह उन्हें उनका प्रतिफल बिना हिसाब देता है। और अल्लाह अनुग्रह और देने में बहुत विस्तार वाला है, वह ख़ूब जानता है कि कौन कई गुना बढ़ाकर दिए जाने का हक़दार है।

2:262Page 44

ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ لَا يُتۡبِعُونَ مَآ أَنفَقُواْ مَنّٗا وَلَآ أَذٗى لَّهُمۡ أَجۡرُهُمۡ عِندَ رَبِّهِمۡ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ٢٦٢

Those who spend their wealth in the way of Allāh and then do not follow up what they have spent with reminders [of it] or [other] injury will have their reward with their Lord, and there will be no fear concerning them, nor will they grieve.

जो लोग अपना धन अल्लाह की आज्ञाकारिता और उसकी प्रसन्नता की चीज़ों में खर्च करते हैं, फिर अपने खर्च करने के बाद कोई ऐसा काम नहीं करते, जो उसके प्रतिफल को नष्ट करने वाला हो, जैसे कि अपने शब्द या कर्म से लोगों पर उपकार जताना, उनके लिए उनका प्रतिफल उनके पालनहार के पास है। वे जिस चीज़ का सामना करने वाले है उसमें उनके लिए कोई भय नहीं है, और न ही वे, उन्हें प्राप्त नेमतों की महानता के कारण, बीत चुकी चीज़ों पर शोक करेंगे।

2:263Page 44

۞ قَوۡلٞ مَّعۡرُوفٞ وَمَغۡفِرَةٌ خَيۡرٞ مِّن صَدَقَةٖ يَتۡبَعُهَآ أَذٗىۗ وَٱللَّهُ غَنِيٌّ حَلِيمٞ ٢٦٣

Kind speech and forgiveness are better than charity followed by injury. And Allāh is Free of need and Forbearing.

एक अच्छी बात जिससे आप किसी ईमान वाले के दिल में खुशी ले आएँ, और जिस व्यक्ति ने आपके साथ दुर्व्यवहार किया है, क्षमा कर दें; यह उस दान से बेहतर है, जिसके बाद उस आदमी पर उपकार जताकर कष्ट दिया जाए, जिसपर दान किया गया है। और अल्लाह अपने बंदों से बहुत बेनियाज़, अत्यंत सहनशील है उन्हें दंड देने में जल्दी नहीं करता है।

2:264Page 44

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُبۡطِلُواْ صَدَقَٰتِكُم بِٱلۡمَنِّ وَٱلۡأَذَىٰ كَٱلَّذِي يُنفِقُ مَالَهُۥ رِئَآءَ ٱلنَّاسِ وَلَا يُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِۖ فَمَثَلُهُۥ كَمَثَلِ صَفۡوَانٍ عَلَيۡهِ تُرَابٞ فَأَصَابَهُۥ وَابِلٞ فَتَرَكَهُۥ صَلۡدٗاۖ لَّا يَقۡدِرُونَ عَلَىٰ شَيۡءٖ مِّمَّا كَسَبُواْۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ ٢٦٤

O you who have believed, do not invalidate your charities with reminders [of it] or injury as does one who spends his wealth [only] to be seen by the people and does not believe in Allāh and the Last Day. His example is like that of a [large] smooth stone upon which is dust and is hit by a downpour that leaves it bare. They are unable [to keep] anything of what they have earned. And Allāh does not guide the disbelieving people.

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जिसे दान दिया गया है, उसपर एहसान जताकर और उसे कष्ट पहुँचाकर अपने दान का प्रतिफल खराब न करो। क्योंकि ऐसा करने वाले का उदाहरण उस व्यक्ति के समान है जो अपना धन इस इरादे से खर्च करता है कि लोग उसे देखें और उसकी प्रशंसा करें। और वह एक काफ़िर व्यक्ति है, जो न अल्लाह पर और न क़ियामत के दिन और उसमें मौजूद सवाब एवं सज़ा पर ईमान रखता है। तो इसका उदाहरण एक चिकने पत्थर जैसा है, जिसपर मिट्टी पड़ी हो, फिर उसपर तेज़ बारिश हो जाए और वह पत्थर से मिट्टी को हटा दे और उसे चिकना छोड़ दे, उसपर कोई चीज़ न हो। इसी तरह दिखावा करने वालों का मामला है, उनके कार्यों और खर्च का सवाब समाप्त हो जाता है और उसमें से कुछ भी अल्लाह के पास बाक़ी नहीं रहता। और अल्लाह काफ़िरों को उसकी हिदायत नहीं देता, जिससे वह सर्वशक्तिमान प्रसन्न होता है और जो उन्हें उनके कार्यों और उनके खर्च में लाभ पहुँचाए।

2:265Page 45

وَمَثَلُ ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُمُ ٱبۡتِغَآءَ مَرۡضَاتِ ٱللَّهِ وَتَثۡبِيتٗا مِّنۡ أَنفُسِهِمۡ كَمَثَلِ جَنَّةِۭ بِرَبۡوَةٍ أَصَابَهَا وَابِلٞ فَـَٔاتَتۡ أُكُلَهَا ضِعۡفَيۡنِ فَإِن لَّمۡ يُصِبۡهَا وَابِلٞ فَطَلّٞۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٌ ٢٦٥

And the example of those who spend their wealth seeking means to the approval of Allāh and assuring [reward for] themselves is like a garden on high ground which is hit by a downpour - so it yields its fruits in double. And [even] if it is not hit by a downpour, then a drizzle [is sufficient]. And Allāh, of what you do, is Seeing.

उन ईमान वालों का उदाहरण, जो अपना धन अल्लाह की प्रसन्नता की तलाश में खर्च करते हैं, इस हाल में कि उनके दिल बिना किसी मजबूरी के अल्लाह के वादे की सच्चाई से आश्वस्त होते हैं, उस बाग़ के उदाहरण जैसा है, जो किसी अच्छे ऊँचे स्थान पर हो। जिसपर एक भारी बारिश बरसे, तो वह (बाग़) दुगना फल उत्पन्न करे। फिर यदि उसपर भारी वर्षा न हो, तो उस पर एक हल्की वर्षा हो, जो उस भूमि के अच्छी होने के कारण उसके लिए काफी हो। इसी तरह, निष्ठावान लोगों के खर्च को अल्लाह स्वीकार करता और उनके प्रतिफल को कई गुना कर देता है, भले ही वह कम हो। और अल्लाह जो कुछ तुम करते हो, उसे देख रहा है। उससे दिखावा करने वालों और निष्ठा के साथ खर्च करने वालों का हाल छिपा हुआ नहीं है और वह प्रत्येक को वह बदला देगा, जिसका वह योग्य है।

2:266Page 45

أَيَوَدُّ أَحَدُكُمۡ أَن تَكُونَ لَهُۥ جَنَّةٞ مِّن نَّخِيلٖ وَأَعۡنَابٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ لَهُۥ فِيهَا مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ وَأَصَابَهُ ٱلۡكِبَرُ وَلَهُۥ ذُرِّيَّةٞ ضُعَفَآءُ فَأَصَابَهَآ إِعۡصَارٞ فِيهِ نَارٞ فَٱحۡتَرَقَتۡۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّكُمۡ تَتَفَكَّرُونَ ٢٦٦

Would one of you like to have a garden of palm trees and grapevines underneath which rivers flow in which he has from every fruit? But he is afflicted with old age and has weak [i.e., immature] offspring, and it is hit by a whirlwind containing fire and is burned. Thus does Allāh make clear to you [His] verses that you might give thought.

क्या तुममें से किसी को पसंद है कि उसके पास खजूरों और अँगूरों का एक बाग़ हो, जिसके बीच से मीठा पानी बहता हो। उस बाग़ में उसके लिए प्रत्येक प्रकार के अच्छे फल हों। उस बाग़ के मालिक को बुढ़ापा आ पहुँचे और वह इतना बूढ़ा हो गया हो कि काम करने और कमाने में असमर्थ हो, तथा उसके कमज़ोर छोटे-छोटे बच्चे हों, जो काम न कर सकते हों। फिर उस बाग़ पर एक आँधी चले, जिसमें एक तेज़ आग हो और सारा बाग़ जलकर खाक हो जाए। हालाँकि अपने बुढ़ापे और अपने बच्चों की कमज़ोरी के कारण उसे इसकी सख़्त ज़रूरत थी?! अतः लोगों को दिखाने के लिए अपना धन खर्च करने वाले की स्थिति इसी आदमी की तरह है; वह क़ियामत के दिन अल्लाह के पास बिना नेकियों के आएगा, एक ऐसे समय में जब उसे उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होगी। इसी प्रकार अल्लाह तुम्हारे लिए वे चीज़ें खोल-खोलकर बयान करती है, जो दुनिया और आख़िरत में तुम्हें लाभ पहुँचाने वाली हैं, ताकि तुम उनपर चिंतन करो।

2:267Page 45

يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَنفِقُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا كَسَبۡتُمۡ وَمِمَّآ أَخۡرَجۡنَا لَكُم مِّنَ ٱلۡأَرۡضِۖ وَلَا تَيَمَّمُواْ ٱلۡخَبِيثَ مِنۡهُ تُنفِقُونَ وَلَسۡتُم بِـَٔاخِذِيهِ إِلَّآ أَن تُغۡمِضُواْ فِيهِۚ وَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ ٢٦٧

O you who have believed, spend from the good things which you have earned and from that which We have produced for you from the earth. And do not aim toward the defective therefrom, spending [from that] while you would not take it [yourself] except with closed eyes. And know that Allāh is Free of need and Praiseworthy.

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! जो अच्छा हलाल (वैध) धन तुमने कमाया है, उसमें से खर्च करो, और जो कुछ हमने तुम्हारे लिए पृथ्वी के पौधों में से निकाला है, उसमें से खर्च करो, और उसमें से रद्दी (दोषपूर्ण) चीज़ का इरादा न करो कि तुम उसे खर्च करो, हालाँकि यदि वह तुमको दी जाए, तो तुम उसे नहीं लोगो, सिवाय इसके कि तुम उसकी बुराई (ख़राबी) की उनदेखी कर जाओ। तो तुम अल्लाह के लिए वह चीज़ कैसे पसंद करते हो, जो तुम अपने लिए पसंद नहीं करते?! और जान लो कि अल्लाह तुम्हारे खर्च से बेनियाज़ है, अपने अस्तित्व और अपने कार्यों में प्रशंसनीय है।

2:268Page 45

ٱلشَّيۡطَٰنُ يَعِدُكُمُ ٱلۡفَقۡرَ وَيَأۡمُرُكُم بِٱلۡفَحۡشَآءِۖ وَٱللَّهُ يَعِدُكُم مَّغۡفِرَةٗ مِّنۡهُ وَفَضۡلٗاۗ وَٱللَّهُ وَٰسِعٌ عَلِيمٞ ٢٦٨

Satan threatens you with poverty and orders you to immorality, while Allāh promises you forgiveness from Him and bounty. And Allāh is all-Encompassing and Knowing.

शैतान तुम्हें ग़रीबी से डराता और कंजूसी पर उभारता है, तथा तुम्हें पाप और अवज्ञा करने के लिए बुलाता है। जबकि अल्लाह तुम्हारे पापों के लिए बड़ी क्षमा तथा व्यापक जीविका का वादा करता है। और अल्लाह विशाल अनुग्रह वाला, अपने बंदों की स्थितियों के बारे में ख़ूब जानने वाला है।

2:269Page 45

يُؤۡتِي ٱلۡحِكۡمَةَ مَن يَشَآءُۚ وَمَن يُؤۡتَ ٱلۡحِكۡمَةَ فَقَدۡ أُوتِيَ خَيۡرٗا كَثِيرٗاۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّآ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ ٢٦٩

He gives wisdom1 to whom He wills, and whoever has been given wisdom has certainly been given much good. And none will remember except those of understanding.

अल्लाह अपने बंदों में से जिसे चाहता है, उसे कथन में सत्यता एवं कार्य में शुद्धता प्रदान करता है और जिसे यह विशेषता दे दी गई, तो वास्तव में उसे बहुत भलाई दी गई। तथा अल्लाह की निशानियों से केवल वे पूर्ण बुद्धि वाले उपदेश ग्रहण करते हैं, जो अल्लाह के प्रकाश से प्रकाश प्राप्त करते और उसके मार्गदर्शन से निर्देश हासिल करते हैं।

2:270Page 46

وَمَآ أَنفَقۡتُم مِّن نَّفَقَةٍ أَوۡ نَذَرۡتُم مِّن نَّذۡرٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُهُۥۗ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنۡ أَنصَارٍ ٢٧٠

And whatever you spend of expenditures or make of vows - indeed, Allāh knows of it. And for the wrongdoers there are no helpers.

तुम अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए जो भी थोड़ा हो या बहुत खर्च करो, या तुम अपनी ओर से अल्लाह की आज्ञाकारिता का कोई कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हो जाओ, जिसके लिए तुम बाध्य नहीं किए गए हो; तो निःसंदेह अल्लाह वह सब जानता है। अतः उसमें से कोई भी चीज़ उसके पास बर्बाद नहीं होगी और वह तुम्हें उसका सबसे बड़ा बदला देगा। तथा उन अत्याचारियों के लिए, जो अपने ऊपर अनिवार्य चीज़ों को रोकने वाले, अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं, कोई मदद करने वाले नहीं होंगे, जो उनसे क़ियामत के दिन की सज़ा को दूर कर सकें।

2:271Page 46

إِن تُبۡدُواْ ٱلصَّدَقَٰتِ فَنِعِمَّا هِيَۖ وَإِن تُخۡفُوهَا وَتُؤۡتُوهَا ٱلۡفُقَرَآءَ فَهُوَ خَيۡرٞ لَّكُمۡۚ وَيُكَفِّرُ عَنكُم مِّن سَيِّـَٔاتِكُمۡۗ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ ٢٧١

If you disclose your charitable expenditures, they are good; but if you conceal them and give them to the poor, it is better for you, and He will remove from you some of your misdeeds [thereby]. And Allāh, of what you do, is [fully] Aware.

तुम जो कुछ भी दान में धन देते हो, यदि उसे दिखाकर दो तो तुम्हारा यह दान देना अच्छा है, परंतु यदि तमु उसे गुप्त रखते हुए ग़रीबों को दो, तो यह तुम्हारे लिए दिखाने से बेहतर है। क्योंकि यह इख़्लास (निष्ठा) के अधिक निकट है। तथा निष्ठावानों के दान में उनके पापों के लिए एक आवरण और उनके लिए क्षमा है। तथा अल्लाह तुम्हारे कार्यों से अवगत है। अतः तुम्हारी हालतों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।

2:272Page 46

۞ لَّيۡسَ عَلَيۡكَ هُدَىٰهُمۡ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ يَهۡدِي مَن يَشَآءُۗ وَمَا تُنفِقُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَلِأَنفُسِكُمۡۚ وَمَا تُنفِقُونَ إِلَّا ٱبۡتِغَآءَ وَجۡهِ ٱللَّهِۚ وَمَا تُنفِقُواْ مِنۡ خَيۡرٖ يُوَفَّ إِلَيۡكُمۡ وَأَنتُمۡ لَا تُظۡلَمُونَ ٢٧٢

Not upon you, [O Muḥammad], is [responsibility for] their guidance, but Allāh guides whom He wills. And whatever good you [believers] spend is for yourselves, and you do not spend except seeking the face [i.e., approval] of Allāh. And whatever you spend of good1 - it will be fully repaid to you, and you will not be wronged.

(ऐ नबी!) उन्हें सत्य को स्वीकार करने और उसका पालन करने की हिदायत देना और उन्हें उसपर तत्पर करना आपके ज़िम्मे नहीं है। आपका काम केवल उन्हें सत्य के लिए मार्गदर्शन करना और उन्हें उसके बारे में परिचय देना है। क्योंकि सत्य की तौफ़ीक़ देना और उसकी हिदायत प्रदान करना अल्लाह के हाथ में है। वह जिसे चाहता है, हिदायत प्रदान करता है। तथा तुम जो भी धन खर्च करोगे, उसका लाभ तुम्हारे पास ही आएगा, क्योंकि अल्लाह उससे बेनियाज़ है। और तुम्हारा खर्च केवल अल्लाह के लिए होना चाहिए। क्योंकि सच्चे ईमान वाले केवल अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए ही खर्च करते हैं। तथा तुम जो कुछ भी खर्च करोगे, चाहे थोड़ा या बहुत, तुम्हें उसका भरपूर बदला दिया जाएगा, उसमें कोई कमी नहीं की जाएगी। क्योंकि अल्लाह किसी पर अत्याचार नहीं करता।

2:273Page 46

لِلۡفُقَرَآءِ ٱلَّذِينَ أُحۡصِرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ لَا يَسۡتَطِيعُونَ ضَرۡبٗا فِي ٱلۡأَرۡضِ يَحۡسَبُهُمُ ٱلۡجَاهِلُ أَغۡنِيَآءَ مِنَ ٱلتَّعَفُّفِ تَعۡرِفُهُم بِسِيمَٰهُمۡ لَا يَسۡـَٔلُونَ ٱلنَّاسَ إِلۡحَافٗاۗ وَمَا تُنفِقُواْ مِنۡ خَيۡرٖ فَإِنَّ ٱللَّهَ بِهِۦ عَلِيمٌ ٢٧٣

[Charity is] for the poor who have been restricted for the cause of Allāh, unable to move about in the land. An ignorant [person] would think them self-sufficient because of their restraint, but you will know them by their [characteristic] sign. They do not ask people persistently [or at all]. And whatever you spend of good - indeed, Allāh is Knowing of it.

यह दान उन ग़रीबों को दो, जिन्हें अल्लाह के मार्ग में जिहाद ने आजीविका की तलाश में यात्रा करने से रोक दिया है। उनकी स्थिति से अनभिज्ञ व्यक्ति उन्हें उनके माँगने से बचने के कारण धनवान् समझता है। हालाँकि जो व्यक्ति उनसे परिचित है, वह उन्हें उनके लक्षणों से पहचानता है, क्योंकि उनके शरीर और कपड़ों पर आवश्यकता स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी पहचान यह भी है कि वे अन्य ग़रीब लोगों की तरह नहीं हैं, जो लोगों से माँगते हुए उनके पीछे पड़ जाते हैं। तथा तुम अपने धन इत्यादि में से जो कुछ भी ख़र्च करोगे, तो निश्चय अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है और वह तुम्हें उसका बहुत बड़ा बदला देगा।

2:274Page 46

ٱلَّذِينَ يُنفِقُونَ أَمۡوَٰلَهُم بِٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ سِرّٗا وَعَلَانِيَةٗ فَلَهُمۡ أَجۡرُهُمۡ عِندَ رَبِّهِمۡ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ٢٧٤

Those who spend their wealth [in Allāh's way] by night and by day, secretly and publicly - they will have their reward with their Lord. And no fear will there be concerning them, nor will they grieve.

जो लोग रात और दिन, छिपे और खुले, बिना किसी दिखावा और ख्याति के अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अपना धन खर्च करते हैं, तो उनके लिए उनका प्रतिफल क़ियामत के दिन उनके पालनहार के पास है। उनको अपने भविष्य के बारे में कोई डर नहीं है और न ही वे संसार की छूटी हुई चीज़ों का शोक करेंगे। यह सब अल्लाह की ओर से एक अनुग्रह और कृपा के तौर पर है।

2:275Page 47

ٱلَّذِينَ يَأۡكُلُونَ ٱلرِّبَوٰاْ لَا يَقُومُونَ إِلَّا كَمَا يَقُومُ ٱلَّذِي يَتَخَبَّطُهُ ٱلشَّيۡطَٰنُ مِنَ ٱلۡمَسِّۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ قَالُوٓاْ إِنَّمَا ٱلۡبَيۡعُ مِثۡلُ ٱلرِّبَوٰاْۗ وَأَحَلَّ ٱللَّهُ ٱلۡبَيۡعَ وَحَرَّمَ ٱلرِّبَوٰاْۚ فَمَن جَآءَهُۥ مَوۡعِظَةٞ مِّن رَّبِّهِۦ فَٱنتَهَىٰ فَلَهُۥ مَا سَلَفَ وَأَمۡرُهُۥٓ إِلَى ٱللَّهِۖ وَمَنۡ عَادَ فَأُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ ٢٧٥

Those who consume interest1 cannot stand [on the Day of Resurrection] except as one stands who is being beaten by Satan into insanity. That is because they say, "Trade is [just] like interest." But Allāh has permitted trade and has forbidden interest. So whoever has received an admonition from his Lord and desists may have what is past, and his affair rests with Allāh. But whoever returns [to dealing in interest or usury] - those are the companions of the Fire; they will abide eternally therein.

जो लोग ब्याज का लेन-देन करते और उसे लेते हैं, वे क़ियामत के दिन अपनी क़ब्रों से ऐसे उठेंगे, जैसे वह आदमी उठता है जिसे शैतान ने छू लिया हो। चुनाँचे वह अपनी क़ब्र से ऐसे लड़खड़ाते हुए उठेगा, जैसे मिर्गी से ग्रस्त व्यक्ति अपने उठने-बैठने में लड़खड़ाता है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि उन्होंने सूद का उपभोग करना जायज़ ठहरा लिया और उन्होंने अल्लाह के हलाल किए हुए व्यापार के मुनाफे और ब्याज के बीच कोई अंतर नहीं किया। उन्होंने कहा : व्यापार तो हलाल होने में ब्याज ही की तरह है। क्योंकि दोनों से धन में वृद्धि और बढ़ोतरी होती है। तो अल्लाह ने उनका खंडन किया, उनके क़यास को अमान्य करते हुए उन्हें झुठला दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि अल्लाह ने व्यापार को ह़लाल किया है; क्योंकि उसमें सामान्य और विशिष्ट लाभ है और ब्याज को हराम (अवैध) किया है; क्योंकि उसमें अत्याचार और लोगों का धन बिना मुआवज़े के अनुचित तरीक़े से खाना शामिल है। फिर जिसके पास उसके पालनहार की ओर से कोई उपदेश आए, जिसमें ब्याज से निषेध और उससे सावधान किया गया हो, तो वह उससे रुक जाए और अल्लाह से तौबा कर ले; तो इससे पहले जो कुछ ब्याज वह ले चुका है, उसके बारे में उसपर कोई पाप नहीं है। तथा उसके बाद भविष्य में जो कुछ वह करता है, उसका मामला अल्लाह के हवाले है। परंतु जो व्यक्ति अल्लाह की ओर से निषेधाज्ञा पहुँच जाने के बाद तथा उसपर तर्क स्थापित हो जाने के पश्चात दोबारा ब्याज लेने की ओर लौट आया; तो वह जहन्नम में प्रवेश करने और उसमें हमेशा रहने का भागी बन गया। यहाँ जहन्नम में हमेशा रहने का मतलब सूद को हलाल समझते हुए उसका उपभोग करना है या इसका अभिप्राय उसमें लंबे समय तक रहना है। क्योंकि जहन्नम में हमेशा के लिए केवल काफ़िरों को रहना है। तौहीद पर क़ायम रहने वाले लोग उसमें हमेशा के लिए नहीं रहेंगे।

2:276Page 47

يَمۡحَقُ ٱللَّهُ ٱلرِّبَوٰاْ وَيُرۡبِي ٱلصَّدَقَٰتِۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ كُلَّ كَفَّارٍ أَثِيمٍ ٢٧٦

Allāh destroys interest and gives increase for charities. And Allāh does not like every sinning disbeliever.

अल्लाह ब्याज के धन को नष्ट और समाप्त कर देता है; या तो ज़ाहिरी तौर पर उसे विनष्ट कर देता है या आंतरिक तौर पर उससे बरकत को छीन लेता है। तथा वह दान के प्रतिफल को कई गुना करके, उसे बढ़ाता और विकसित करता है। चुनाँचे वह एक नेकी को दस गुना से सात सौ गुना तक बल्कि उससे भी अधिक गुना तक कर देता है और दान करने वालों के धन में बरकत देता है। तथा अल्लाह किसी ऐसे व्यक्ति से प्रेम नहीं करता जो हठी काफिर हो, जो हराम को हलाल ठहराने वाला, अवज्ञा और कुकर्मों में लिप्त रहने वाला हो।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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