Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Al-Baqarah 2:38–75
2:38Page 7
قُلۡنَا ٱهۡبِطُواْ مِنۡهَا جَمِيعٗاۖ فَإِمَّا يَأۡتِيَنَّكُم مِّنِّي هُدٗى فَمَن تَبِعَ هُدَايَ فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ٣٨
We said, "Go down from it, all of you. And when guidance comes to you from Me, whoever follows My guidance - there will be no fear concerning them, nor will they grieve.
हमने उनसे कहा : तुम सब जन्नत से धरती पर उतर जाओ। फिर यदि मेरे रसूलों के हाथों तुम्हारे पास कोई मार्गदर्शन आए, तो उसपर चलने वालों और मेरे रसूलों पर ईमान लाने वालों पर न तो आख़िरत में कोई डर है, और न ही वे दुनिया के छूटने पर दुखी होंगे।
2:39Page 7
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِۖ هُمۡ فِيهَا خَٰلِدُونَ ٣٩
And those who disbelieve and deny Our signs - those will be companions of the Fire; they will abide therein eternally."
जहाँ तक उन लोगों की बात है जिन्होंने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, तो वही लोग आग (जहन्नम) वाले हैं, वे उससे कभी बाहर नहीं निकलेंगे।
2:40Page 7
يَٰبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ وَأَوۡفُواْ بِعَهۡدِيٓ أُوفِ بِعَهۡدِكُمۡ وَإِيَّٰيَ فَٱرۡهَبُونِ ٤٠
O Children of Israel, remember My favor which I have bestowed upon you and fulfill My covenant [upon you] that I will fulfill your covenant [from Me], and be afraid of [only] Me.
ऐ अल्लाह के नबी याक़ूब के बेटो! तुम अपने ऊपर अल्लाह की लगातार नेमतों को याद करो और उनका शुक्रिया अदा करो और मुझपर तथा मेरे रसूलों पर ईमान लाने और मेरे निर्धारित किए हुए नियमों पर अमल करने के मेरे आदेश को पूरा करो। यदि तुम इसे पूरा करते हो, तो मैं दुनिया में सौभाग्यशाली जीवन तथा क़ियामत के दिन बेहतर बदले का तुमसे किया हुआ वादा पूरा करूँगा। तथा केवल मुझ ही से डरो और मेरी प्रतिज्ञा को मत तोड़ो।
2:41Page 7
وَءَامِنُواْ بِمَآ أَنزَلۡتُ مُصَدِّقٗا لِّمَا مَعَكُمۡ وَلَا تَكُونُوٓاْ أَوَّلَ كَافِرِۭ بِهِۦۖ وَلَا تَشۡتَرُواْ بِـَٔايَٰتِي ثَمَنٗا قَلِيلٗا وَإِيَّٰيَ فَٱتَّقُونِ ٤١
And believe in what I have sent down confirming that which is [already] with you, and be not the first to disbelieve in it. And do not exchange My signs for a small price, and fear [only] Me.
तथा उस क़ुरआन पर ईमान लाओ, जिसे मैंने मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा है, जो उसकी पुष्टि करने वाला है जो अल्लाह की तौह़ीद (एकेश्वरवाद) तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नुबुव्वत के विषय में तौरात में उसके विकृत होने से पूर्व आया है। तथा सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि तुम उसका इनकार करने वाले पहले दल बन जाओ। तथा मेरी उतारी हुई आयतों के बदले प्रतिष्ठा एवं पद के रूप में एक छोटी सी क़ीमत न लो, और मेरे क्रोध तथा मेरी यातना से डरो।
2:42Page 7
وَلَا تَلۡبِسُواْ ٱلۡحَقَّ بِٱلۡبَٰطِلِ وَتَكۡتُمُواْ ٱلۡحَقَّ وَأَنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ٤٢
And do not mix the truth with falsehood or conceal the truth while you know [it].
तथा उस सत्य को - जो मैंने अपने रसूलों पर उतारा है - उन झूठी बातों के साथ भ्रमित न करो जो तुम गढ़ते हो। तथा अपनी पुस्तकों में मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के विवरण के बारे में आए हुए सत्य को न छिपाओ, जबकि तुम उसे जानते हो और उसके बारे में निश्चित हो।
2:43Page 7
وَأَقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتُواْ ٱلزَّكَوٰةَ وَٱرۡكَعُواْ مَعَ ٱلرَّٰكِعِينَ ٤٣
And establish prayer and give zakāh1 and bow with those who bow [in worship and obedience].
नमाज़ को उसके अरकान, वाजिबात और सुन्नतों के साथ सम्पूर्ण तरीक़े से अदा करो, और अपने उन धनों की ज़कात निकालो जो अल्लाह ने तुम्हारे हाथों में रखा है, तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत में से अल्लाह के समक्ष झुकने वालों के साथ अल्लाह के सामने झुक जाओ।
2:44Page 7
۞ أَتَأۡمُرُونَ ٱلنَّاسَ بِٱلۡبِرِّ وَتَنسَوۡنَ أَنفُسَكُمۡ وَأَنتُمۡ تَتۡلُونَ ٱلۡكِتَٰبَۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ ٤٤
Do you order righteousness of the people and forget1 yourselves while you recite the Scripture? Then will you not reason?
कितनी बुरी बात है कि तुम दूसरों को तो ईमान और भलाई करने का आदेश दो, और अपने आपको भूलकर खुद उससे मुँह फेर लो, हालाँकि तुम तौरात पढ़ते हो, उसमें मौजूद अल्लाह के धर्म का पालन करने तथा उसके रसूलों पर विश्वास करने के आदेश से अवगत हो। तो क्या तुम अपनी बुद्धियों से लाभ नहीं उठाते?!
2:45Page 7
وَٱسۡتَعِينُواْ بِٱلصَّبۡرِ وَٱلصَّلَوٰةِۚ وَإِنَّهَا لَكَبِيرَةٌ إِلَّا عَلَى ٱلۡخَٰشِعِينَ ٤٥
And seek help through patience and prayer; and indeed, it is difficult except for the humbly submissive [to Allāh]
अपने सभी धार्मिक और सांसारिक मामलों में सब्र (धैर्य) के साथ मदद माँगो तथा नमाज़ के साथ जो तुम्हें अल्लाह के क़रीब लाती है और तुम्हें उससे जोड़ती है। अतः वह तुम्हारी मदद करता है और तुम्हारी रक्षा करता है और तुम्हारे नुक़सान को दूर कर देता है। और निश्चय नमाज़ क़ायम करना बहुत कठिन और भारी है, सिवाय उनके जो अपने पालनहार के प्रति समर्पित होने वाले हैं।
2:46Page 7
ٱلَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَٰقُواْ رَبِّهِمۡ وَأَنَّهُمۡ إِلَيۡهِ رَٰجِعُونَ ٤٦
Who are certain that they will meet their Lord and that they will return to Him.
इसका कारण यह है कि वही लोग हैं जो इस बात पर विश्वास रखते हैं कि वे अपने रब के पास आने वाले और क़ियामत के दिन उससे मिलने वाले हैं। और यह कि वे उसी के पास लौटने वाले हैं, ताकि वह उन्हें उनके कर्मों का प्रतिफल दे।
2:47Page 7
يَٰبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ وَأَنِّي فَضَّلۡتُكُمۡ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ ٤٧
O Children of Israel, remember My favor that I have bestowed upon you and that I preferred you over the worlds [i.e., peoples].
ऐ अल्लाह के नबी याक़ूब के बेटो! मेरी प्रदान की हुई धार्मिक एवं सांसारिक नेमतों को याद करो और याद रखो कि निःसंदेह मैंने ही तुम्हें तुम्हारे समय के लोगों पर नुबुव्वत एवं बादशाहत द्वारा प्रधानता प्रदान की।
2:48Page 7
وَٱتَّقُواْ يَوۡمٗا لَّا تَجۡزِي نَفۡسٌ عَن نَّفۡسٖ شَيۡـٔٗا وَلَا يُقۡبَلُ مِنۡهَا شَفَٰعَةٞ وَلَا يُؤۡخَذُ مِنۡهَا عَدۡلٞ وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ ٤٨
And fear a Day when no soul will suffice for another soul1 at all, nor will intercession be accepted from it, nor will compensation be taken from it, nor will they be aided.
तथा आदेशों का पालन करके और निषेधों को छोड़कर अपने और क़ियामत के दिन की यातना के बीच, बचाव का साधन अपनाओ। उस दिन कोई किसी के कुछ काम न आएगा, न उस दिन अल्लाह की अनुमति के बिना नुकसान को दूर करने या लाभ प्राप्त करने की किसी की सिफ़ारिश क़बूल की जाएगी, और न ही कोई छुड़ौती स्वीकार की जाएगी; चाहे ज़मीन के बराबर सोना ही क्यों न हो, और न उस दिन उनका कोई मददगार होगा। जब कोई सिफ़ारिशी, या छुड़ौती या मददगार काम नहीं आएगा, तो फिर भागने का स्थान कहाँ है?!
2:49Page 8
وَإِذۡ نَجَّيۡنَٰكُم مِّنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَسُومُونَكُمۡ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ يُذَبِّحُونَ أَبۡنَآءَكُمۡ وَيَسۡتَحۡيُونَ نِسَآءَكُمۡۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَآءٞ مِّن رَّبِّكُمۡ عَظِيمٞ ٤٩
And [recall] when We saved you [i.e., your forefathers] from the people of Pharaoh, who afflicted you with the worst torment, slaughtering your [newborn] sons and keeping your females alive. And in that was a great trial from your Lord.
ऐ बनी इसराईल! उस समय को याद करो, जब हमने तुम्हें फ़िरऔन के लोगों से छुड़ाया, जो तुम्हें नाना प्रकार की यातनाएँ देते थे; वे तुम्हारे बेटों को बुरी तरह ज़बह कर देते थे, ताकि तुम्हारा कोई अस्तित्व न रहे और तुम्हारी बेटियों को जीवित छोड़ देते थे, ताकि वे उनकी सेवा करने वाली स्त्रियां हो जाएँ। इससे उनका मक़सद तुम्हारा घोर अपमान करना था। तुम्हें फ़िरऔन और उसके अनुयायियों के अत्याचार से बचाना तुम्हारे पालनहार की ओर से एक बड़ी परीक्षा है; ताकि तुम उसका शुक्रिया अदा करो।
2:50Page 8
وَإِذۡ فَرَقۡنَا بِكُمُ ٱلۡبَحۡرَ فَأَنجَيۡنَٰكُمۡ وَأَغۡرَقۡنَآ ءَالَ فِرۡعَوۡنَ وَأَنتُمۡ تَنظُرُونَ ٥٠
And [recall] when We parted the sea for you and saved you and drowned the people of Pharaoh while you were looking on.
और तुम अपने ऊपर हमारी नेमतों में से इसे भी याद करो कि हमने तुम्हारे लिए सागर को फाड़ दिया और उसे तुम्हारे चलने के लिए एक सूखा रास्ता बना दिया। चुनाँचे हमने तुम्हें बचा लिया, और तुम्हारे दुश्मन फ़िरऔन और उसके अनुयायियों को तुम्हारी आँखों के सामने डुबो दिया, जबकि तुम उन्हें देख रहे थे।
2:51Page 8
وَإِذۡ وَٰعَدۡنَا مُوسَىٰٓ أَرۡبَعِينَ لَيۡلَةٗ ثُمَّ ٱتَّخَذۡتُمُ ٱلۡعِجۡلَ مِنۢ بَعۡدِهِۦ وَأَنتُمۡ ظَٰلِمُونَ ٥١
And [recall] when We made an appointment with Moses for forty nights. Then you took [for worship] the calf after him [i.e., his departure], while you were wrongdoers.
इन नेमतों में से यह भी याद रखो कि हमने मूसा अलैहिस्सलाम से चालीस रातों के लिए वादा किया, ताकि इसमें, प्रकाश और मार्गदर्शन के तौर पर, तौरात को उतारा जाए। फिर तुमने यह किया कि उस अवधि के दौरान बछड़े की पूजा करने लगे। और ऐसा करके तुम अत्याचार करने वाले थे।
2:52Page 8
ثُمَّ عَفَوۡنَا عَنكُم مِّنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ٥٢
Then We forgave you after that so perhaps you would be grateful.
फिर तुम्हारे तौबा (क्षमा याचना) कर लेने के बाद, हमने तुम्हें क्षमा कर दिया, चुनाँचे हमने तुम्हारी पकड़ नहीं की, ताकि तुम अल्लाह की अच्छी इबादत और आज्ञापालन करके उसका शुक्रिया अदा करो।
2:53Page 8
وَإِذۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡفُرۡقَانَ لَعَلَّكُمۡ تَهۡتَدُونَ ٥٣
And [recall] when We gave Moses the Scripture and criterion1 that perhaps you would be guided.
इन नेमतों में से इसे भी याद करो कि हमने मूसा अलैहिस्सलाम को सत्य तथा असत्य के बीच अंतर करने वाली तथा हिदायत एवं गुमराही के बीच फ़र्क़ करने वाली पुस्तक तौरात प्रदान की, ताकि तुम उसके द्वारा सत्य का मार्ग पा सको।
2:54Page 8
وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ يَٰقَوۡمِ إِنَّكُمۡ ظَلَمۡتُمۡ أَنفُسَكُم بِٱتِّخَاذِكُمُ ٱلۡعِجۡلَ فَتُوبُوٓاْ إِلَىٰ بَارِئِكُمۡ فَٱقۡتُلُوٓاْ أَنفُسَكُمۡ ذَٰلِكُمۡ خَيۡرٞ لَّكُمۡ عِندَ بَارِئِكُمۡ فَتَابَ عَلَيۡكُمۡۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلتَّوَّابُ ٱلرَّحِيمُ ٥٤
And [recall] when Moses said to his people, "O my people, indeed you have wronged yourselves by your taking of the calf [for worship]. So repent to your Creator and kill yourselves [i.e., the guilty among you]. That is best for [all of] you in the sight of your Creator." Then He accepted your repentance; indeed, He is the Accepting of Repentance, the Merciful.
इन नेमतों में से यह भी याद रखो कि अल्लाह ने तुम्हें बछड़े की पूजा से तौबा करने का सामर्थ्य प्रदान किया। जब मूसा अलैहिस्सलाम ने तुमसे कहा : तुमने बछड़े को उसकी इबादत करने के लिए पूज्य बनाकर अपने आप पर अत्याचार किया है। अतः पश्चाताप करो और अपने पैदा करने वाले की ओर लौट जाओ। इस प्रकार कि तुम एक-दूसरे को क़त्ल करो। इस तरह से पश्चाताप करना, तुम्हारे लिए कुफ़्र में बने रहने से बेहतर है जो कि आग में अमरता की ओर ले जाता है। चुनाँचे अल्लाह की तौफ़ीक़ और मदद से तुमने ऐसा कर लिया, तो उसने तुम्हारी तौबा क़बूल कर ली। क्योंकि वह बहुत ज़्यादा तौबा क़बूल करने वाला, अपने बंदों पर दया करने वाला है।
2:55Page 8
وَإِذۡ قُلۡتُمۡ يَٰمُوسَىٰ لَن نُّؤۡمِنَ لَكَ حَتَّىٰ نَرَى ٱللَّهَ جَهۡرَةٗ فَأَخَذَتۡكُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَأَنتُمۡ تَنظُرُونَ ٥٥
And [recall] when you said, "O Moses, we will never believe you until we see Allāh outright"; so the thunderbolt took you while you were looking on.
तथा उस समय को याद करो, जब तुम्हारे पूर्वजों ने मूसा अलैहिस्सलाम को साहसपूर्वक संबोधित करते हुए कहा था : हम तुमपर उस समय तक ईमान नहीं ला सकते, जब तक हम अल्लाह को अपनी आँखों से इस तरह न देख लें कि हमारे बीच कोई आड़ न हो। इसपर जलाने वाली आग ने तुम्हें पकड़ लिया, और तुम्हें मार डाला, जबकि तुम एक-दूसरे को देख रहे थे।
2:56Page 8
ثُمَّ بَعَثۡنَٰكُم مِّنۢ بَعۡدِ مَوۡتِكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ٥٦
Then We revived you after your death that perhaps you would be grateful.
फिर हमने तुम्हारे मरने के पश्चात तुम्हें पुनर्जीवित किया, ताकि तुम अल्लाह का अपने ऊपर इस उपकार पर शुक्रिया अदा करो।
2:57Page 8
وَظَلَّلۡنَا عَلَيۡكُمُ ٱلۡغَمَامَ وَأَنزَلۡنَا عَلَيۡكُمُ ٱلۡمَنَّ وَٱلسَّلۡوَىٰۖ كُلُواْ مِن طَيِّبَٰتِ مَا رَزَقۡنَٰكُمۡۚ وَمَا ظَلَمُونَا وَلَٰكِن كَانُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ ٥٧
And We shaded you with clouds and sent down to you manna and quails, [saying], "Eat from the good things with which We have provided you." And they wronged Us not - but they were [only] wronging themselves.
तुमपर हमारी एक कृपा यह है कि जब तुम धरती में भटक रहे थे, तो हमने तुम्हें सूर्य की गर्मी से छाया देने के लिए बादलों को भेजा। इसी तरह हमने अपनी नेमतों में से तुमपर शहद की तरह एक मीठा पेय, तथा बटेर के सदृश अच्छे माँस वाला एक छोटा पक्षी उतारा, और हमने तुमसे कहा : उन अच्छी चीजों में से खाओ जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं। उन्होंने इन नेमतों का इनकार और उनकी नाशुक्री करके हमारा कुछ नुक़सान नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपने हिस्से का सवाब कम करके और अपने आपको दंड से दो चार करके ख़ुद पर अत्याचार किया।
2:58Page 9
وَإِذۡ قُلۡنَا ٱدۡخُلُواْ هَٰذِهِ ٱلۡقَرۡيَةَ فَكُلُواْ مِنۡهَا حَيۡثُ شِئۡتُمۡ رَغَدٗا وَٱدۡخُلُواْ ٱلۡبَابَ سُجَّدٗا وَقُولُواْ حِطَّةٞ نَّغۡفِرۡ لَكُمۡ خَطَٰيَٰكُمۡۚ وَسَنَزِيدُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٥٨
And [recall] when We said, "Enter this city [i.e., Jerusalem] and eat from it wherever you will in [ease and] abundance, and enter the gate bowing humbly1 and say, 'Relieve us of our burdens [i.e., sins].' We will [then] forgive your sins for you, and We will increase the doers of good [in goodness and reward]."
अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों में से उस समय को याद करो जब हमने तुमसे कहा : बैतुल-मक़्दिस में प्रवेश कर जाओ और उसमें मौजूद अच्छी चीज़ों में से जिस स्थान से भी चाहो आनंदमय, विशाल भोजन खाओ। तथा जब तुम प्रवेश करो, तो अल्लाह के आगे सिर झुकाए हुए हो और अल्लाह से यह दुआ करते रहो : ऐ हमारे पालनहार! हमारे गुनाहों को मिटा दे; हम तुम्हारी दुआ क़बूल कर लेंगे और हम उन लोगों के सवाब को बढ़ा देंगे, जिन्होंने अच्छे काम किए।
2:59Page 9
فَبَدَّلَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ قَوۡلًا غَيۡرَ ٱلَّذِي قِيلَ لَهُمۡ فَأَنزَلۡنَا عَلَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ رِجۡزٗا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ بِمَا كَانُواْ يَفۡسُقُونَ ٥٩
But those who wronged changed [those words] to a statement other than that which had been said to them, so We sent down upon those who wronged a punishment [i.e., plague] from the sky because they were defiantly disobeying.
लेकिन उनमें से अत्याचारियों ने कार्यों को बदल दिया, और शब्दों को विकृत कर दिया। चुनाँचे वे अपने नितंबों पर घिसटते हुए दाख़िल हुए और अल्लाह के आदेश का मज़ाक़ उड़ाते हुए उन्होंने कहा : 'बाली में दाना'। जिसके परिणामस्वरूप अल्लाह ने उनमें से अत्याचार करने वालों पर, उनके शरीयत की सीमा से बाहर निकलने और आदेश का उल्लंघन करने के कारण आकाश से अज़ाब उतार दिया।
2:60Page 9
۞ وَإِذِ ٱسۡتَسۡقَىٰ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦ فَقُلۡنَا ٱضۡرِب بِّعَصَاكَ ٱلۡحَجَرَۖ فَٱنفَجَرَتۡ مِنۡهُ ٱثۡنَتَا عَشۡرَةَ عَيۡنٗاۖ قَدۡ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٖ مَّشۡرَبَهُمۡۖ كُلُواْ وَٱشۡرَبُواْ مِن رِّزۡقِ ٱللَّهِ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ ٦٠
And [recall] when Moses prayed for water for his people, so We said, "Strike with your staff the stone." And there gushed forth from it twelve springs, and every people [i.e., tribe] knew its watering place. "Eat and drink from the provision of Allāh, and do not commit abuse on the earth, spreading corruption."
तथा अपने ऊपर अल्लाह की उस नेमत को भी याद करो जब तुम चटियल मैदान में भटक रहे थे और तुम बहुत प्यासे थे, तो मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने रब से प्रार्थना की और उससे तुम्हारे लिए पानी माँगा। इसलिए हमने उन्हें अपनी लाठी पत्थर पर मारने का आदेश दिया। जब उन्होंने उसको मारा, तो उससे तुम्हारे गोत्रों की संख्या के अनुसार बारह सोते फूट पड़े और उनमें से पानी निकल आया। हमने हर गोत्र के लिए उसके पीने का विशिष्ट स्थान स्पष्ट कर दिया, ताकि उनके बीच कोई विवाद न हो, और हमने तुमसे कहा : अल्लाह की उस रोज़ी से खाओ और पियो, जो उसने तुम्हें बिना किसी परिश्रम या कार्य के प्रदान की है और धरती पर बिगाड़ फैलाते न फिरो।
2:61Page 9
وَإِذۡ قُلۡتُمۡ يَٰمُوسَىٰ لَن نَّصۡبِرَ عَلَىٰ طَعَامٖ وَٰحِدٖ فَٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُخۡرِجۡ لَنَا مِمَّا تُنۢبِتُ ٱلۡأَرۡضُ مِنۢ بَقۡلِهَا وَقِثَّآئِهَا وَفُومِهَا وَعَدَسِهَا وَبَصَلِهَاۖ قَالَ أَتَسۡتَبۡدِلُونَ ٱلَّذِي هُوَ أَدۡنَىٰ بِٱلَّذِي هُوَ خَيۡرٌۚ ٱهۡبِطُواْ مِصۡرٗا فَإِنَّ لَكُم مَّا سَأَلۡتُمۡۗ وَضُرِبَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلذِّلَّةُ وَٱلۡمَسۡكَنَةُ وَبَآءُو بِغَضَبٖ مِّنَ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ كَانُواْ يَكۡفُرُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَيَقۡتُلُونَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَواْ وَّكَانُواْ يَعۡتَدُونَ ٦١
And [recall] when you said, "O Moses, we can never endure one [kind of] food. So call upon your Lord to bring forth for us from the earth its green herbs and its cucumbers and its garlic and its lentils and its onions." [Moses] said, "Would you exchange what is better for what is less? Go into [any] settlement and indeed, you will have what you have asked." And they were covered with humiliation and poverty and returned with anger from Allāh [upon them]. That was because they [repeatedly] disbelieved in the signs of Allāh and killed the prophets without right. That was because they disobeyed and were [habitually] transgressing.
उस समय को याद करो, जब तुमने अपने रब की नेमत की नाशुक्री की। चुनाँचे मन्न और सलवा के रूप में अल्लाह की उतारी हुई रोज़ी को खाने से ऊब गए और कहने लगे : हम एक ही प्रकार के खाने पर संतोष नहीं कर सकते, जो नहीं बदलता है। फिर तुमने मूसा अलैहिस्सलाम से मुतालबा किया कि वह अल्लाह से दुआ करें कि वह तुम्हारे लिए धरती की उपज में से, जैसे उसकी फलियों एवं साग-सब्ज़ियों, उसकी ककड़ी, अनाज, मसूर और प्याज़ में से कोई खाना निकाले। इसपर मूसा अलैहिस्सलाम ने (तुम्हारे अनुरोध की निंदा करते हुए : क्या तुम मन्न और सलवा जैसे बेहतरीन और अधिक उदार भोजन के बदले एक कमतर और तुच्छ चीज़ को अपनाते हो, जबकि वह तुम्हारे पास बिना परेशानी और थकान के आता था?) फरमाया : तुम यहाँ की धरती से निकलकर किसी भी बस्ती में जा उतरो। तुम्हें वहाँ के खेतों और बाज़ारों में वह सब मिल जाएगा, जो तुमने माँगा है। उनके अपनी इच्छाओं का पालन करने और अल्लाह ने उनके लिए जो चुना था, उससे बार-बार मुँह फेरने के कारण; उन्हें अपमान, दरिद्रता और विपत्ति ने घेर लिया। साथ ही वे अल्लाह की ओर से भारी प्रकोप के साथ लौटे; क्योंकि उन्होंने उसके दीन से मुँह फेरा, उसकी आयतों का इनकार किया और उसके नबियों की अन्यायपूर्ण और आक्रामक तरीक़े से हत्या की; यह सब इस कारण हुआ कि उन्होंने अल्लाह की अवज्ञा की और वे उसकी सीमाओं को पार कर रहे थे।
2:62Page 10
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلنَّصَٰرَىٰ وَٱلصَّٰبِـِٔينَ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَلَهُمۡ أَجۡرُهُمۡ عِندَ رَبِّهِمۡ وَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ٦٢
Indeed, those who believed and those who were Jews or Christians or Sabeans [before Prophet Muḥammad (ﷺ)] - those [among them] who believed in Allāh and the Last Day and did righteousness - will have their reward with their Lord, and no fear will there be concerning them, nor will they grieve1.
इस उम्मत के जो लोग ईमान लाए, तथा इसी तरह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नबी बनने से पहले पिछले समुदायों, जैसे यहूदियों, ईसाइयों और साबियों - ये किसी नबी को मानने वालों का एक समूह था - में से जो ईमान लाए, इनमें से जो सही मायने में अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाए; तो उनका सवाब उनके रब के पास है। वे आख़िरत में जिस चीज़ का सामना करने वाले हैं उसके बारे में उन्हें कोई भय नहीं है, तथा दुनिया में से जो चीज़ उनसे छूट गई है, उसके लिए उन्हें कोई मलाल नहीं होगा।
2:63Page 10
وَإِذۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَكُمۡ وَرَفَعۡنَا فَوۡقَكُمُ ٱلطُّورَ خُذُواْ مَآ ءَاتَيۡنَٰكُم بِقُوَّةٖ وَٱذۡكُرُواْ مَا فِيهِ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ ٦٣
And [recall] when We took your covenant, [O Children of Israel, to abide by the Torah] and We raised over you the mount, [saying], "Take what We have given you with determination and remember what is in it that perhaps you may become righteous."
अल्लाह तथा उसके रसूलों पर ईमान लाने के उस पक्के वचन को याद करो, जो हमने तुमसे लिया था, और हमने तुम्हें डराने के लिए तथा वचन पर अमल न करने से सावधान करते हुए पहाड़ को तुम्हारे ऊपर उठा लिया, तुम्हें यह आदेश देते हुए कि हमारी उतारी हुई पुस्तक तौरात को पूरी शक्ति के साथ, बिना किसी लापरवाही और आलस्य के थाम लो, तथा जो कुछ उसमें है उसे याद कर लो और उसपर चिंतन-मनन करो। ताकि ऐसा करके, तुम अल्लाह के अज़ाब से बच जाओ।
2:64Page 10
ثُمَّ تَوَلَّيۡتُم مِّنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَۖ فَلَوۡلَا فَضۡلُ ٱللَّهِ عَلَيۡكُمۡ وَرَحۡمَتُهُۥ لَكُنتُم مِّنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٦٤
Then you turned away after that. And if not for the favor of Allāh upon you and His mercy, you would have been among the losers.
लेकिन अपने ऊपर दृढ़ वचन लिए जाने के बाद भी तुमने मुँह फेरा और अवज्ञा की। ऐसे में अगर अल्लाह ने अपनी कृपा से तुम्हें माफ़ न किया होता और अपनी दया से तुम्हारी तौबा क़बूल न करता, तो तुम इस विमुखता और अवज्ञा के कारण नुक़सान उठाने वालों में से होते।
2:65Page 10
وَلَقَدۡ عَلِمۡتُمُ ٱلَّذِينَ ٱعۡتَدَوۡاْ مِنكُمۡ فِي ٱلسَّبۡتِ فَقُلۡنَا لَهُمۡ كُونُواْ قِرَدَةً خَٰسِـِٔينَ ٦٥
And you had already known about those who transgressed among you concerning the sabbath, and We said to them, "Be apes, despised."
तुमने अपने उन पूर्वजों का समाचार संदेह रहित स्पष्ट रूप से जान लिया है, जिन्होंने शनिवार के दिन शिकार करके ज़्यादती की, जिसमें उनके लिए शिकार करना मना था। इसलिए उन्होंने इसके लिए यह चाल चली कि शनिवार से पहले जाल लगा दिया और रविवार को उसे निकाल लिया। चुनाँचे अल्लाह ने इन चालबाज़ों को उनकी चालबाज़ी की सज़ा के रूप में बहिष्कृत बंदर बना दिया।
2:66Page 10
فَجَعَلۡنَٰهَا نَكَٰلٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهَا وَمَا خَلۡفَهَا وَمَوۡعِظَةٗ لِّلۡمُتَّقِينَ ٦٦
And We made it a deterrent punishment for those who were present and those who succeeded [them] and a lesson for those who fear Allāh.
तो हमने इस आक्रामक बस्ती को इसके आस-पास की बस्तियों के लिए एक इबरत तथा इसके बाद आने वाले के लिए एक इबरत बना दिया। ताकि कोई उस जैसा अमल करके उसी तरह के अज़ाब का हक़दार न बने। तथा हमने उसे उन डरने वालों के लिए अनुस्मारक बना दिया, जो अल्लाह की सज़ा और उसकी सीमाओं का उल्लंघन करने वालों से उसके बदला लेने से डरते हैं।
2:67Page 10
وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوۡمِهِۦٓ إِنَّ ٱللَّهَ يَأۡمُرُكُمۡ أَن تَذۡبَحُواْ بَقَرَةٗۖ قَالُوٓاْ أَتَتَّخِذُنَا هُزُوٗاۖ قَالَ أَعُوذُ بِٱللَّهِ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡجَٰهِلِينَ ٦٧
And [recall] when Moses said to his people, "Indeed, Allāh commands you to slaughter a cow." They said, "Do you take us in ridicule?" He said, "I seek refuge in Allāh from being among the ignorant."
तथा अपने पूर्वजों के समाचार में से उस संवाद को याद करो, जो उनके और मूसा अलैहिस्सलाम के बीच हुआ। जब मूसा अलैहिस्सलाम ने उन्हें सूचित किया कि अल्लाह ने उन्हें एक गाय ज़बह करने का आदेश दिया है। तो उन्होंने अल्लाह के आदेश का पालन करने में जल्दी करने के बजाय हठपूर्वक कहा : क्या तुम हमारा मज़ाक़ उड़ा रहे हो?! मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा : मैं उन लोगों में शामिल होने से अल्लाह की शरण लेता हूँ, जो अल्लाह पर झूठ बोलते हैं और लोगों का मज़ाक़ उड़ाते हैं।
2:68Page 10
قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَۚ قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا فَارِضٞ وَلَا بِكۡرٌ عَوَانُۢ بَيۡنَ ذَٰلِكَۖ فَٱفۡعَلُواْ مَا تُؤۡمَرُونَ ٦٨
They said, "Call upon your Lord to make clear to us what it is." [Moses] said, "[Allāh] says, 'It is a cow which is neither old nor virgin, but median between that,' so do what you are commanded."
उन्होंने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : अपने रब से प्रार्थना करो कि वह हमें उस गाय का विवरण समझाए जिसे उसने हमें ज़बह करने का आदेश दिया है। उन्होंने उनसे कहा : अल्लाह कहता है : वह एक ऐसी गाय है जो न तो बूढ़ी है और न ही बछड़ी, बल्कि वह दोनों के बीच मध्यम आयु की है। अत: अपने रब की आज्ञा का पालन करने में जल्दी करो।
2:69Page 10
قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوۡنُهَاۚ قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ صَفۡرَآءُ فَاقِعٞ لَّوۡنُهَا تَسُرُّ ٱلنَّٰظِرِينَ ٦٩
They said, "Call upon your Lord to show us what is her color." He said, "He says, 'It is a yellow cow, bright in color - pleasing to the observers.'"
उन्होंने अपने तर्क-वितर्क और हठ को जारी रखते हुए मूसा अलैहिस्सलाम से कहा : अपने पालनहार से प्रार्थना करो कि वह हमें समझाए कि उसका रंग क्या है। तो मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : अल्लाह कहता है : वह एक बहुत ही पीली गाय है, जो हर किसी को भा जाती है जो उसे देखता है।
2:70Page 11
قَالُواْ ٱدۡعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ إِنَّ ٱلۡبَقَرَ تَشَٰبَهَ عَلَيۡنَا وَإِنَّآ إِن شَآءَ ٱللَّهُ لَمُهۡتَدُونَ ٧٠
They said, "Call upon your Lord to make clear to us what it is. Indeed, [all] cows look alike to us. And indeed we, if Allāh wills, will be guided."
फिर वे अपने हठ में हद से बढ़ते हुए कहने लगे : अपने पालनहार से प्रार्थना करो कि वह हमारे लिए इसके गुणों को और अधिक स्पष्ट कर दे; क्योंकि उपर्युक्त विशेषताओं वाली गायें बहुत हैं, उनमें से हम उसकी पहचान नहीं कर सकते। उन्होंने इस बात की पुष्टि भी की कि - यदि अल्लाह ने चाहा - तो वे ज़बह के लिए अपेक्षित गाय तक पहुँच जाएँगे।
2:71Page 11
قَالَ إِنَّهُۥ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٞ لَّا ذَلُولٞ تُثِيرُ ٱلۡأَرۡضَ وَلَا تَسۡقِي ٱلۡحَرۡثَ مُسَلَّمَةٞ لَّا شِيَةَ فِيهَاۚ قَالُواْ ٱلۡـَٰٔنَ جِئۡتَ بِٱلۡحَقِّۚ فَذَبَحُوهَا وَمَا كَادُواْ يَفۡعَلُونَ ٧١
He said, "He says, 'It is a cow neither trained to plow the earth nor to irrigate the field, one free from fault with no spot upon her.'" They said, "Now you have come with the truth." So they slaughtered her, but they could hardly do it.
मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा : अल्लाह तआला कहता है : वह गाय ऐसी है जो जुताई में काम करने और भूमि को सींचने के लिए सधाई हुई नहीं है, और वह दोषों से मुक्त है, तथा उसमें उसके पीले रंग के अलावा किसी और रंग का निशान नहीं है। तब उन्होंने कहा : अब तू सटीक विवरण के साथ आया है जो पूरी तरह से उस गाय का निर्धारण करता है। और उन्होंने उस गाय को ज़बह किया, जबकि वे वाद-विवाद और हठ के कारण क़रीब थे कि उसे ज़बह न करें।
2:72Page 11
وَإِذۡ قَتَلۡتُمۡ نَفۡسٗا فَٱدَّٰرَٰءۡتُمۡ فِيهَاۖ وَٱللَّهُ مُخۡرِجٞ مَّا كُنتُمۡ تَكۡتُمُونَ ٧٢
And [recall] when you slew a man and disputed1 over it, but Allāh was to bring out that which you were concealing.
तथा उस समय को याद करो, जब तुमने अपने ही में से एक व्यक्ति की हत्या कर दी, फिर आपस में लड़ने लगे। हर एक अपने आपको हत्या के आरोप से बचाने लगा और दूसरों पर आरोप धरने लगा, यहाँ तक कि तुम आपस में झगड़ बैठे। जबकि अल्लाह उस निर्दोष व्यक्ति की हत्या के मामले को प्रकाश में लाने वाला था, जिसे तुमे छिपा रहे थे।
2:73Page 11
فَقُلۡنَا ٱضۡرِبُوهُ بِبَعۡضِهَاۚ كَذَٰلِكَ يُحۡيِ ٱللَّهُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَيُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تَعۡقِلُونَ ٧٣
So We said, "Strike him [i.e., the slain man] with part of it."1 Thus does Allāh bring the dead to life, and He shows you His signs that you might reason.
तो हमने तुमसे कहा : मरे हुए व्यक्ति के शरीर पर उस गाय के किसी भाग से मारो, जिसे तुम्हें ज़बह करने का आदेश दिया गया था। क्योंकि हत्यारा कौन है यह बताने के लिए अल्लाह उसे पुनर्जीवित करेगा! चुनाँचे उन्होंने वैसा ही किया और उसने अपने हत्यारे को बता दिया। और इस मरे हुए व्यक्ति को फिर से जीवित करने की तरह, अल्लाह क़ियामत के दिन मरे हुओं को पुनर्जीवित करेगा। अल्लाह तुम्हें अपनी शक्ति के स्पष्ट प्रमाण दिखाता है, ताकि तुम उन्हें समझो और अल्लाह पर सही मायने में विश्वास रखो।
2:74Page 11
ثُمَّ قَسَتۡ قُلُوبُكُم مِّنۢ بَعۡدِ ذَٰلِكَ فَهِيَ كَٱلۡحِجَارَةِ أَوۡ أَشَدُّ قَسۡوَةٗۚ وَإِنَّ مِنَ ٱلۡحِجَارَةِ لَمَا يَتَفَجَّرُ مِنۡهُ ٱلۡأَنۡهَٰرُۚ وَإِنَّ مِنۡهَا لَمَا يَشَّقَّقُ فَيَخۡرُجُ مِنۡهُ ٱلۡمَآءُۚ وَإِنَّ مِنۡهَا لَمَا يَهۡبِطُ مِنۡ خَشۡيَةِ ٱللَّهِۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعۡمَلُونَ ٧٤
Then your hearts became hardened after that, being like stones or even harder. For indeed, there are stones from which rivers burst forth, and there are some of them that split open and water comes out, and there are some of them that fall down for fear of Allāh. And Allāh is not unaware of what you do.
फिर इन दिल में उतरने वाले सदुपदेशों और स्पष्ट चमत्कारों के बाद भी तुम्हारे दिल कठोर हो गए। यहाँ तक कि वे पत्थर की तरह, बल्कि उससे भी ज़्यादा सख़्त हो गए; क्योंकि ये अपने हाल में ज़रा भी परिवर्तन स्वीकार करने को तैयार नहीं, जबकि पत्थर परिवर्तित होते और स्थिति बदलते रहते हैं। चुनाँचे कुछ पत्थरों से नहरें फूट निकलती हैं और कुछ पत्थर फट जाते हैं और उनसे पानी के सोते निकल आते हैं, जिनसे इनसान और चौपाए लाभान्वित होते हैं, जबकि कुछ पत्थर अल्लाह के भय से पहाड़ों की ऊँचाइयों से गिर पड़ते हैं। परंतु तुम्हारे दिलों का हाल ऐसा नहीं है। तथा तुम जो कुछ कर रहे हो, अल्ल्लाह उससे से ग़ाफ़िल नहीं है। बल्कि वह उससे अवगत है और तुम्हें उसका बदला देगा।
2:75Page 11
۞ أَفَتَطۡمَعُونَ أَن يُؤۡمِنُواْ لَكُمۡ وَقَدۡ كَانَ فَرِيقٞ مِّنۡهُمۡ يَسۡمَعُونَ كَلَٰمَ ٱللَّهِ ثُمَّ يُحَرِّفُونَهُۥ مِنۢ بَعۡدِ مَا عَقَلُوهُ وَهُمۡ يَعۡلَمُونَ ٧٥
Do you covet [the hope, O believers], that they would believe for you while a party of them used to hear the words of Allāh and then distort it [i.e., the Torah] after they had understood it while they were knowing?
तो क्या - ऐ मोमिनो! - तुम यहूदियों की स्थिति की वास्तविकता और उनके हठ को जानने के बाद इस बात की आशा रखते हो कि वे ईमान ले आएँगे और तुम्हारी बात स्वीकार कर लेंगे?! जबकि उनके विद्वानों का एक समूह ऐसा रहा है, जो तौरात में उनपर उतरे हुए अल्लाह के वचनों को सुनते हैं; फिर वे उन्हें समझने और जानने के बाद उनके शब्दों और अर्थों को बदल देते हैं, जबकि वे अपने अपराध की गंभीरता को जानते हैं।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences