Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Al-Hajj 22:39–77
22:39Page 337
أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَٰتَلُونَ بِأَنَّهُمۡ ظُلِمُواْۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ عَلَىٰ نَصۡرِهِمۡ لَقَدِيرٌ ٣٩
Permission [to fight] has been given to those who are being fought,1 because they were wronged. And indeed, Allāh is competent to give them victory.
अल्लाह ने उन ईमान वालों को युद्ध की अनुमति दे दी है, जिनसे मुश्रिक लोग युद्ध करते हैं, क्योंकि उनके दुश्मनों की ओर से उनपर बड़ा अत्याचार हुआ है, और निश्चय अल्लाह युद्ध के बिना ही ईमान वालों को उनके शत्रुओं पर विजय प्रदान करने की शक्ति रखता है, लेकिन उसकी हिकमत की अपेक्षा यह है कि वह मोमिनों को काफ़िरों से युद्ध के माध्यम से आज़माए।
22:40Page 337
ٱلَّذِينَ أُخۡرِجُواْ مِن دِيَٰرِهِم بِغَيۡرِ حَقٍّ إِلَّآ أَن يَقُولُواْ رَبُّنَا ٱللَّهُۗ وَلَوۡلَا دَفۡعُ ٱللَّهِ ٱلنَّاسَ بَعۡضَهُم بِبَعۡضٖ لَّهُدِّمَتۡ صَوَٰمِعُ وَبِيَعٞ وَصَلَوَٰتٞ وَمَسَٰجِدُ يُذۡكَرُ فِيهَا ٱسۡمُ ٱللَّهِ كَثِيرٗاۗ وَلَيَنصُرَنَّ ٱللَّهُ مَن يَنصُرُهُۥٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ ٤٠
[They are] those who have been evicted from their homes without right - only because they say, "Our Lord is Allāh." And were it not that Allāh checks the people, some by means of others, there would have been demolished monasteries, churches, synagogues, and mosques in which the name of Allāh is much mentioned [i.e., praised]. And Allāh will surely support those who support Him [i.e., His cause]. Indeed, Allāh is Powerful and Exalted in Might.
वे लोग जिन्हें काफ़िरों ने उनके घरों से अन्यायपूर्ण तरीक़े से निकाल दिया, न कि उनके द्वारा किए गए किसी अपराध के कारण, उन्होंने केवल इतना कहा था : हमारा पालनहार अल्लाह है, उसके सिवा हमारा कोई पालनहार नहीं है। और अगर अल्लाह नबियों और ईमान वालों के लिए दुश्मनों से युद्ध करना धर्मसंगत न बनाया होता, तो वे इबादत के स्थानों पर हमला करते और संतों के आश्रम, ईसाइयों के गिरजे, यहूदियों के पूजा स्थल और मुसलमानों की मस्जिदों को ध्वस्त कर देते, जिनमें मुसलमान अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते हैं। निश्चय अल्लाह ज़रूर उसकी मदद करेगा, जो उसके धर्म और नबी की मदद करने वाला है। निःसंदेह अल्लाह उसकी मदद करने में सक्षम है, जो उसके धर्म की मदद करता है। वह प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता।
22:41Page 337
ٱلَّذِينَ إِن مَّكَّنَّٰهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ أَقَامُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَءَاتَوُاْ ٱلزَّكَوٰةَ وَأَمَرُواْ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَنَهَوۡاْ عَنِ ٱلۡمُنكَرِۗ وَلِلَّهِ عَٰقِبَةُ ٱلۡأُمُورِ ٤١
[And they are] those who, if We give them authority in the land, establish prayer and give zakāh and enjoin what is right and forbid what is wrong. And to Allāh belongs the outcome of [all] matters.
ये लोग जिनसे विजय का वादा किया गया है, वे हैं कि यदि हम उन्हें उनके दुश्मनों पर विजय देकर धर्ती में उन्हें आधिपत्य प्रदान करें, तो वे पूर्ण रूप से नमाज़ पढ़ेंगे, अपने धन की ज़कात देंगे, शरीयत ने जिन कामों का आदेश दिया है उनका हुक्म देंगे और जिन कामों से रोका है उनसे रोकेंगे। और सवाब तथा सज़ा देने के संबंध में सभी मामले केवल अल्लाह ही की ओर लौटते हैं।
22:42Page 337
وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدۡ كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحٖ وَعَادٞ وَثَمُودُ ٤٢
And if they deny you, [O Muḥammad] - so, before them, did the people of Noah and ʿAad and Thamūd deny [their prophets],
और (ऐ रसूल!) यदि आपकी जाति के लोग आपको झुठलाते हैं, तो आप सब्र से काम लें। क्योंकि आप पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिसे उसकी जाति के लोगों ने झुठलाया हो। आपकी जाति से पहले नूह अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने नूह अलैहिस्सलाम को, आद जाति के लोगों ने हूद अलैहिस्सलाम को और समूद जाति के लोगों ने सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाया।
तथा इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने इबराहीम अलैहिस्सलाम को और लूत अलैहिस्सलाम की जाति ने लूत अलैहिस्सलाम को झुठलाया।
22:44Page 337
وَأَصۡحَٰبُ مَدۡيَنَۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰۖ فَأَمۡلَيۡتُ لِلۡكَٰفِرِينَ ثُمَّ أَخَذۡتُهُمۡۖ فَكَيۡفَ كَانَ نَكِيرِ ٤٤
And the inhabitants of Madyan. And Moses was denied, so I prolonged enjoyment for the disbelievers; then I seized them, and how [terrible] was My reproach.
तथा मदयन वालों ने शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाया, और फ़िरऔन और उसकी जाति के लोगों ने मूसा अलैहिस्सलाम को झुठलाया, तो मैंने उन्हें ढील देते हुए उनको यातना देने में देरी की, फिर उन्हें यातना से ग्रस्त कर दिया। तो विचार करो कि उनके प्रति मेरा इनकार कैसा था? मैंने उनके कुफ़्र के कारण उन्हें नष्ट कर दिया।
22:45Page 337
فَكَأَيِّن مِّن قَرۡيَةٍ أَهۡلَكۡنَٰهَا وَهِيَ ظَالِمَةٞ فَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَبِئۡرٖ مُّعَطَّلَةٖ وَقَصۡرٖ مَّشِيدٍ ٤٥
And how many a city did We destroy while it was committing wrong - so it is [now] fallen into ruin1 - and [how many] an abandoned well and [how many] a lofty palace.2
कितनी ही ऐसी बस्तियाँ हैं, जिन्हें हमने एक उन्मूलन करने वाली यातना के द्वारा नष्ट कर दिया (जबकि वे अपने कुफ़्र के कारण अत्याचारी थीं)। तो उनके घर ध्वस्त होकर निवासियों से खाली पड़े हैं। तथा कितने ऐसे कुएँ हैं, जो उनपर पानी लेने के लिए आने वालों से उनके विनाश के कारण खाली पड़े हैं, और कितने ऐसे ऊँचे-ऊँचे अलंकृत महल हैं, जो अपने निवासियों को यातना से नहीं बचा सके।
22:46Page 337
أَفَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَتَكُونَ لَهُمۡ قُلُوبٞ يَعۡقِلُونَ بِهَآ أَوۡ ءَاذَانٞ يَسۡمَعُونَ بِهَاۖ فَإِنَّهَا لَا تَعۡمَى ٱلۡأَبۡصَٰرُ وَلَٰكِن تَعۡمَى ٱلۡقُلُوبُ ٱلَّتِي فِي ٱلصُّدُورِ ٤٦
So have they not traveled through the earth and have hearts by which to reason and ears by which to hear? For indeed, it is not eyes that are blinded, but blinded are the hearts which are within the breasts.
क्या रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाई हुई शिक्षाओं का इनकार करने वाले ये लोग धरती में नहीं चले-फिरे, ताकि उन विनष्ट बस्तियों के निशान (खंडहर) देखें, और अपने मन से विचार करके शिक्षा ग्रहण करें, तथा उनकी कहानियों को मानने के उद्देश्य से सुनकर सीख लें, क्योंकि असल अंधापन आँख का अंधापन नहीं है, बल्कि विनाशकारी अंधापन अंतर्दृष्टि का अंधापन है, जिसके बाद इनसान न शिक्षा ग्रहण करता है और न सीख प्राप्त करता है।
22:47Page 338
وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ وَلَن يُخۡلِفَ ٱللَّهُ وَعۡدَهُۥۚ وَإِنَّ يَوۡمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلۡفِ سَنَةٖ مِّمَّا تَعُدُّونَ ٤٧
And they urge you to hasten the punishment. But Allāh will never fail in His promise. And indeed, a day with your Lord is like a thousand years of those which you count.
और (ऐ रसूल!) आपकी जाति के काफ़िरों को जब दुनिया एवं आख़िरत की यातना से डराया जाता है, तो उसे जल्दी लाने की माँग करने लगते हैं, हालाँकि अल्लाह ने उनसे जो वादा किया है, वह उसके विरुद्ध हरगिज़ नहीं करेगा। दुनिया की यातना का एक अंश वह पराजय भी है, जिसका सामना उन्हें बद्र के दिन करना पड़ा, और आख़िरत की यातना का एक दिन, कष्टदायक होने के कारण, तुम्हारी दुनिया की गिनती के अनुसार एक हज़ार साल के बराबर है।
22:48Page 338
وَكَأَيِّن مِّن قَرۡيَةٍ أَمۡلَيۡتُ لَهَا وَهِيَ ظَالِمَةٞ ثُمَّ أَخَذۡتُهَا وَإِلَيَّ ٱلۡمَصِيرُ ٤٨
And for how many a city did I prolong enjoyment while it was committing wrong. Then I seized it, and to Me is the [final] destination.
और कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं, जिन्हें मैंने यातना में मोहलत दी, जबकि वे अपने कुफ़्र के कारण अत्याचारी थीं, और उन्हें ढील देने के उद्देश्य से उन्हें दंडित करने में जल्दी नहीं की। फिर मैंने उन्हें विनाशकारी यातना से ग्रस्त कर दिया। और केवल मेरी ही ओर क़ियामत के दिन उन सब को लौटना है, फिर मैं उन्हें उनके कुफ़्र के कारण स्थायी यातना से ग्रस्त करूँगा।
22:49Page 338
قُلۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ إِنَّمَآ أَنَا۠ لَكُمۡ نَذِيرٞ مُّبِينٞ ٤٩
Say, "O people, I am only to you a clear warner."
(ऐ नबी!) आप कह दें : ऐ लोगो! मैं तो केवल तुम्हें डराने वाला हूँ। मैं तुम्हें वह संदेश पहुँचाता हूँ, जिसे देकर मैं भेजा गया हूँ, अपने डराने में स्पष्ट हूँ।
22:50Page 338
فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَهُم مَّغۡفِرَةٞ وَرِزۡقٞ كَرِيمٞ ٥٠
And those who have believed and done righteous deeds - for them is forgiveness and noble provision.
तो जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए उनके रब की ओर से उनके गुनाहों की क्षमा है और जन्नत में सम्मान की रोज़ी है, जो कभी ख़त्म नहीं होगी।
22:51Page 338
وَٱلَّذِينَ سَعَوۡاْ فِيٓ ءَايَٰتِنَا مُعَٰجِزِينَ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ ٥١
But the ones who strove against Our verses, [seeking] to cause failure1 - those are the companions of Hellfire.
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाने के लिए दौड़-भाग की, यह अनुमान करते हुए कि वे अल्लाह को विवश कर देंगे और उससे बच निकलेंगे, इसलिए वह उन्हें अज़ाब नहीं दे सकेगा। यही लोग नरकवासी हैं, जो उसके साथ वैसे ही रहेंगे जैसे एक मित्र अपने मित्र के साथ रहता है।
22:52Page 338
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ مِن رَّسُولٖ وَلَا نَبِيٍّ إِلَّآ إِذَا تَمَنَّىٰٓ أَلۡقَى ٱلشَّيۡطَٰنُ فِيٓ أُمۡنِيَّتِهِۦ فَيَنسَخُ ٱللَّهُ مَا يُلۡقِي ٱلشَّيۡطَٰنُ ثُمَّ يُحۡكِمُ ٱللَّهُ ءَايَٰتِهِۦۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ ٥٢
And We did not send before you any messenger or prophet except that when he spoke [or recited], Satan threw into it [some misunderstanding]. But Allāh abolishes that which Satan throws in; then Allāh makes precise His verses.1 And Allāh is Knowing and Wise.
हमने (ऐ रसूल!) आपसे पहले जिस रसूल या नबी को भेजा, (उसके साथ यह हुआ कि) जब वह अल्लाह की किताब पढ़ता, तो शैतान उसके पाठ में ऐसी चीज़ मिला देता, जिसके द्वारा वह लोगों को इस भ्रम में डाल देता कि वह अल्लाह की वह़्य में से है, तो अल्लाह शैतान की मिलाई हुई बात को मिटा देता और अपनी आयतों को सुदृढ़ कर देता। अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है, उससे कोई चीज़ छिपी नहीं रहती, अपनी रचना, नियति तथा प्रबंधन में हिकमत वाला है।
22:53Page 338
لِّيَجۡعَلَ مَا يُلۡقِي ٱلشَّيۡطَٰنُ فِتۡنَةٗ لِّلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٞ وَٱلۡقَاسِيَةِ قُلُوبُهُمۡۗ وَإِنَّ ٱلظَّٰلِمِينَ لَفِي شِقَاقِۭ بَعِيدٖ ٥٣
[That is] so He may make what Satan throws in [i.e., asserts] a trial for those within whose hearts is disease1 and those hard of heart. And indeed, the wrongdoers are in extreme dissension.
शैतान नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पढ़ने के समय कुछ बातें डालकर संदेह पैदा करता है, ताकि अल्लाह शैतान जो कुछ संशय डालता है उसे मुनाफ़िक़ों के लिए और उन मुश्रिकों के लिए जिनके दिल सख़्त हैं, एक परीक्षण बना दे। तथा मुनाफ़िक़ों और मुश्रिकों में से अत्याचारी लोग, अल्लाह और उसके रसूल की दुश्मनी में पड़े हुए हैं तथा सत्य एवं हिदायत से दूर हैं।
22:54Page 338
وَلِيَعۡلَمَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَيُؤۡمِنُواْ بِهِۦ فَتُخۡبِتَ لَهُۥ قُلُوبُهُمۡۗ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِلَىٰ صِرَٰطٖ مُّسۡتَقِيمٖ ٥٤
And so those who were given knowledge may know that it is the truth from your Lord and [therefore] believe in it, and their hearts humbly submit to it. And indeed is Allāh the Guide of those who have believed to a straight path.
और ताकि जिन लोगों को अल्लाह ने ज्ञान दिया है, वे निश्चित हो जाएँ कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला क़ुरआन ही वह सत्य है, जिसकी अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की है। इस प्रकार उनका उसपर ईमान बढ़ जाए और उनके हृदय उसके अधीन हो जाएँ और उसके सामने झुक जाएँ। निःसंदेह अल्लाह अपने ऊपर ईमान रखने वालों को, उनके उसके आगे झुकने के प्रतिफल के तौर पर, सत्य का सीधा मार्ग दिखाने वाला है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
22:55Page 338
وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فِي مِرۡيَةٖ مِّنۡهُ حَتَّىٰ تَأۡتِيَهُمُ ٱلسَّاعَةُ بَغۡتَةً أَوۡ يَأۡتِيَهُمۡ عَذَابُ يَوۡمٍ عَقِيمٍ ٥٥
But those who disbelieve will not cease to be in doubt of it until the Hour comes upon them unexpectedly or there comes to them the punishment of a barren Day.1
अल्लाह का इनकार करने वाले और उसके रसूल को झुठलाने वाले, आप पर अल्लाह की ओर से उतरने वाले क़ुरआन के बारे में निरंतर संदेह ही में पड़े रहेंगे, यहाँ तक कि उनके इसी हाल में रहते हुए अचानक उनके पास क़ियामत आ जाए, या उनपर ऐसे दिन की यातना आ जाए, जिसमें उन पर कोई दया या भलाई न होगी, और वह उनके लिए क़ियामत का दिन है।
22:56Page 339
ٱلۡمُلۡكُ يَوۡمَئِذٖ لِّلَّهِ يَحۡكُمُ بَيۡنَهُمۡۚ فَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فِي جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ ٥٦
[All] sovereignty that Day is for Allāh;1 He will judge between them. So they who believed and did righteous deeds will be in the Gardens of Pleasure.
क़ियामत के दिन (जिस दिन इन लोगों के पास वह यातना आ जाएगी, जिसका उनसे वादा किया जाता था) संपूर्ण बादशाहत केवल अल्लाह की होगी, इसमें उसका कोई विरोधी नहीं होगा। वह महिमावान मोमिनों और काफ़िरों के बीच फ़ैसला करेगा। वह उनमें से प्रत्येक लिए उसी का निर्णय करेगा जिसका वह हक़दार होगा। चुनाँचे जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, उनके लिए एक महान बदला है और वह कभी खत्म न होने वाली अनंत आनंद की जन्नतें हैं।
22:57Page 339
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَا فَأُوْلَٰٓئِكَ لَهُمۡ عَذَابٞ مُّهِينٞ ٥٧
And they who disbelieved and denied Our signs - for those there will be a humiliating punishment.
जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और हमारे रसूलों पर उतरने वाली हमारी आयतों को झुठलाया, उन्हीं के लिए अपमानजनक यातना है, जिसके द्वारा अल्लाह उन्हें जहन्नम में अपमानित करेगा।
22:58Page 339
وَٱلَّذِينَ هَاجَرُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوٓاْ أَوۡ مَاتُواْ لَيَرۡزُقَنَّهُمُ ٱللَّهُ رِزۡقًا حَسَنٗاۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ خَيۡرُ ٱلرَّٰزِقِينَ ٥٨
And those who emigrated for the cause of Allāh and then were killed or died - Allāh will surely provide for them a good provision. And indeed, it is Allāh who is the best of providers.
जिन लोगों ने अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने और उसके धर्म को सर-बुलंद करने के लिए अपना घरबार और वतन छोड़ा, फिर उसके रास्ते में जिहाद करते हुए मारे गए या मर गए, निश्चय अल्लाह उन्हें जन्नत में बेहतरीन स्थायी रोज़ी देगा, जो कभी खत्म न होगी। और पवित्र अल्लाह ही सबसे उत्तम रोज़ी देने वाला है।
22:59Page 339
لَيُدۡخِلَنَّهُم مُّدۡخَلٗا يَرۡضَوۡنَهُۥۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٞ ٥٩
He will surely cause them to enter an entrance with which they will be pleased, and indeed, Allāh is Knowing and Forbearing.
निश्चित रूप से अल्लाह उन्हें ऐसे स्थान में अवश्य दाखिल करेगा, जिससे वे प्रसन्न हो जाएँगे और वह जन्नत है। निःसंदेह अल्लाह उनके कार्यों और इरादों को जानता है, और वह अत्यंत सहनशील है क्योंकि उसने उन्हें उनकी कोताहियों पर दंडित करने में जल्दी नहीं की।
22:60Page 339
۞ ذَٰلِكَۖ وَمَنۡ عَاقَبَ بِمِثۡلِ مَا عُوقِبَ بِهِۦ ثُمَّ بُغِيَ عَلَيۡهِ لَيَنصُرَنَّهُ ٱللَّهُۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٞ ٦٠
That [is so]. And whoever responds [to injustice] with the equivalent of that with which he was harmed and then is tyrannized - Allāh will surely aid him. Indeed, Allāh is Pardoning and Forgiving.1
यह जिसका उल्लेख किया गया है; अल्लाह के रास्ते में अपना घरबार छोड़ने वालों को जन्नत में दाखिल करना और अत्याचार करने वाले से उसके अत्याचार का उसी के समान बदला लेने की अनुमति ताकि उसके लिए उस पर कोई पाप न हो। फिर यदि अत्याचारी दोबारा अत्याचार करे, तो अल्लाह उसकी अवश्य मदद करेगा जिसपर अत्याचार किया गया है। निःसंदेह अल्लाह ईमान वालों के गुनाहों को माफ़ करने वाला, उन्हें क्षमा करने वाला है।
22:61Page 339
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ يُولِجُ ٱلَّيۡلَ فِي ٱلنَّهَارِ وَيُولِجُ ٱلنَّهَارَ فِي ٱلَّيۡلِ وَأَنَّ ٱللَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٞ ٦١
That1 is because Allāh causes the night to enter the day and causes the day to enter the night and because Allāh is Hearing and Seeing.
अत्याचार के शिकार व्यक्ति की यह मदद इसलिए है, क्योंकि अल्लाह जो चाहे उसे करने में सक्षम है। और उसकी क्षमता में से रात को दिन में दाखिल करना और दिन को रात में दाखिल करना है; इस प्रकार कि वह उन दोनों में से एक में वृद्धि करता और दूसरे में कमी करता है। और यह कि अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है। इनमें से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है और वह उन्हें उनका बदला देगा।
22:62Page 339
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ هُوَ ٱلۡبَٰطِلُ وَأَنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡعَلِيُّ ٱلۡكَبِيرُ ٦٢
That is because Allāh is the True Reality, and that which they call upon other than Him is falsehood, and because Allāh is the Most High, the Grand.
रात को दिन में दाखिल करने और दिन को रात में दाखिल करने का यह क्रम इसलिए है, क्योंकि अल्लाह ही सत्य है, उसका धर्म सत्य है, उसका वादा सत्य है और उसका ईमान वालों की मदद करना सत्य है, और यह कि मुश्रिक लोग जिन मूर्तियों की अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हैं, वे झूठी और निराधार हैं, और यह कि अल्लाह ही अपनी मख़्लूक़ से व्यक्तित्व, सम्मान और शक्ति की दृष्टि से बहुत ऊँचा है, जो बहुत महान है, जिसके लिए बड़ाई, महानता और प्रताप है।
22:63Page 339
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَتُصۡبِحُ ٱلۡأَرۡضُ مُخۡضَرَّةًۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٞ ٦٣
Do you not see that Allāh has sent down rain from the sky and the earth becomes green? Indeed, Allāh is Subtle1 and Aware.2
(ऐ रसूल!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने आकाश से कुछ बारिश बरसाया, फिर धरती उसपर बारिश उतरने के बाद अपने उगाए हुए पौधों के साथ हरी-भरी हो जाती है। निश्चय अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दया करने वाला है कि उनके लिए बारिश उतारा और उनके लिए धरती पर पौधे उगाए, उनके हितों से पूरी तरह अवगत है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
22:64Page 339
لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ ٱلۡغَنِيُّ ٱلۡحَمِيدُ ٦٤
To Him belongs what is in the heavens and what is on the earth. And indeed, Allāh is the Free of need, the Praiseworthy.
जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, उन सब का मालिक अकेला अल्लाह है, और अल्लाह ही वह बेनियाज़ है, जिसे अपनी किसी मख़लूक़ की आवश्यकता नहीं है, हर हाल में प्रशंसनीय है।
22:65Page 340
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي ٱلۡأَرۡضِ وَٱلۡفُلۡكَ تَجۡرِي فِي ٱلۡبَحۡرِ بِأَمۡرِهِۦ وَيُمۡسِكُ ٱلسَّمَآءَ أَن تَقَعَ عَلَى ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِٱلنَّاسِ لَرَءُوفٞ رَّحِيمٞ ٦٥
Do you not see that Allāh has subjected to you whatever is on the earth and the ships which run through the sea by His command? And He restrains the sky from falling upon the earth, unless by His permission. Indeed Allāh, to the people, is Kind and Merciful.
(ऐ रसूल!) क्या आपने नहीं देखा कि अल्लाह ने तुम्हारे लाभों तथा तुम्हारी आवश्यकताओं के लिए धरती के ऊपर मौजूद जानदारों और निर्जीव वस्तुओं को आपके तथा लोगों के वश में कर दिया है, और नावों को तुम्हारे वश में कर दिया है कि वे उसके आदेश और उसके वशीकरण से समुद्र में एक शहर (देश) से दूसरे शहर (देश) की ओर जाती हैं, और उसी ने आसमान को थाम रखा है ताकि उसकी अनुमति के बिना ज़मीन पर न गिरे। अगर वह उसे ज़मीन के ऊपर गिरने की अनुमति दे दे, तो वह गिर जाए। निःसंदेह अल्लाह लोगों के लिए अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है, क्योंकि उसने उनके अत्याचार के बावजूद इन वस्तुओं को उनके वश में कर रखा है।
22:66Page 340
وَهُوَ ٱلَّذِيٓ أَحۡيَاكُمۡ ثُمَّ يُمِيتُكُمۡ ثُمَّ يُحۡيِيكُمۡۗ إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَكَفُورٞ ٦٦
And He is the one who gave you life; then He causes you to die and then will [again] give you life. Indeed, mankind is ungrateful.
अल्लाह वही है, जिसने तुम्हें अनस्तित्व से अस्तित्व में लाकर जीवन प्रदान किया, फिर जब तुम्हारी आयु समाप्त हो जाएगी, तो तुम्हें मौत देगा, फिर तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हारे कर्मों का हिसाब लेने और तुम्हें उनका बदला देने के लिए तुम्हें फिर से जीवित करेगा। निश्चय इनसान, अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत करके, उसकी नेमतों का (जबकि वे स्पष्ट हैं) बहुत ज़्यादा इनकार करने वाला है।
22:67Page 340
لِّكُلِّ أُمَّةٖ جَعَلۡنَا مَنسَكًا هُمۡ نَاسِكُوهُۖ فَلَا يُنَٰزِعُنَّكَ فِي ٱلۡأَمۡرِۚ وَٱدۡعُ إِلَىٰ رَبِّكَۖ إِنَّكَ لَعَلَىٰ هُدٗى مُّسۡتَقِيمٖ ٦٧
For every [religious] community We have appointed rites which they perform. So, [O Muḥammad], let them [i.e., the disbelievers] not contend with you over the matter but invite [them] to your Lord. Indeed, you are upon straight guidance.
हर समुदाय के लोगों के लिए हमने एक शरीयत बनाई है, और वे अपनी शरीयत के अुनसार कार्य करते हैं। इसलिए (ऐ रसूल!) मुश्रिकों और अन्य धर्मों के लोगों को आपकी शरीयत के बारे में हरगिज़ झगड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि आप उनकी तुलना में सत्य के अधिक योग्य हैं। जबकि वे असत्य पर चलने वाले हैं। तथा आप लोगों को अल्लाह के लिए तौहीद को ख़ालिस करने की ओर बुलाएँ। निःसंदेह आप तो निश्चय एक सीधे रास्ते पर हैं, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
22:68Page 340
وَإِن جَٰدَلُوكَ فَقُلِ ٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا تَعۡمَلُونَ ٦٨
And if they dispute with you, then say, "Allāh is most knowing of what you do.
और यदि वे तर्क स्पष्ट हो जाने के बाद भी आपके साथ बहस करने से बाज़ न आएँ, तो धमकी के तौर पर यह कहते हुए उनके मामले को अल्लाह के हवाले कर दें कि : तुम जो कुछ कर रहे हो, उससे अल्लाह अच्छी तरह अवगत है। तुम्हारे कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
22:69Page 340
ٱللَّهُ يَحۡكُمُ بَيۡنَكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ فِيمَا كُنتُمۡ فِيهِ تَخۡتَلِفُونَ ٦٩
Allāh will judge between you on the Day of Resurrection concerning that over which you used to differ."
अल्लाह अपने मोमिन और काफ़िर बंदों के बीच क़ियामत के दिन धर्म के उस मामले में फ़ैसला कर देगा, जिसके बारे में वे दुनिया में मतभेद किया करते थे।
22:70Page 340
أَلَمۡ تَعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِۚ إِنَّ ذَٰلِكَ فِي كِتَٰبٍۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٞ ٧٠
Do you not know that Allāh knows what is in the heaven and earth? Indeed, that is in a Record.1 Indeed that, for Allāh, is easy.
(ऐ रसूल!) क्या आप नहीं जानते कि अल्लाह आसमान की सारी चीज़ों को जानता है और धरती की सारी चीज़ों को जानता है। इन दोनों की कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। इन सारी बातों का ज्ञान लौहे महफ़ूज़ (संरक्षित पट्टिका) में अंकित है और इन चीज़ों का ज्ञान अल्लाह पर आसान है।
22:71Page 340
وَيَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَمۡ يُنَزِّلۡ بِهِۦ سُلۡطَٰنٗا وَمَا لَيۡسَ لَهُم بِهِۦ عِلۡمٞۗ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِن نَّصِيرٖ ٧١
And they worship besides Allāh that for which He has not sent down authority and that of which they have no knowledge. And there will not be for the wrongdoers any helper.
और मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करते हैं, जिनकी पूजा करने का अल्लाह ने अपनी पुस्तकों में कोई प्रमाण नहीं उतारा है, तथा इसके लिए उनके पास ज्ञान का भी कोई सबूत नहीं है। उनका प्रमाण केवल अपने बाप-दादा का अंधा अनुकरण है। और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं, जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके।
22:72Page 340
وَإِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتُنَا بَيِّنَٰتٖ تَعۡرِفُ فِي وُجُوهِ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ ٱلۡمُنكَرَۖ يَكَادُونَ يَسۡطُونَ بِٱلَّذِينَ يَتۡلُونَ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتِنَاۗ قُلۡ أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرّٖ مِّن ذَٰلِكُمُۚ ٱلنَّارُ وَعَدَهَا ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ ٧٢
And when Our verses are recited to them as clear evidences, you recognize in the faces of those who disbelieve disapproval. They are almost on the verge of assaulting those who recite to them Our verses. Say, "Then shall I inform you of [what is] worse than that?1 [It is] the Fire which Allāh has promised those who disbelieve, and wretched is the destination."
और जब उनके सामने हमारे क़ुरआन की स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो आप अल्लाह के साथ कुफ़्र करने वालों के चेहरों में, क़ुरआन सुनने के समय उनकी त्योरी से उसकी अस्वीकृति को पहचान लेंगे। क़रीब होंगे कि वे क्रोध की तीव्रता से उन लोगों पर धावा बोल दें, जो उनके सामने हमारी आयतें पढ़ते हैं। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें : क्या मैं तुम्हें वह चीज़ बताऊँ, जो तुम्हारे क्रोध और तुम्हारे मुँह बनाने से अधिक बुरी है? वह आग है, जिसमें अल्लाह ने काफ़िरों को दाखिल करने का वादा किया है। और वह बहुत बुरा ठिकाना है, जहाँ उन्हें जाना है।
22:73Page 341
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ ضُرِبَ مَثَلٞ فَٱسۡتَمِعُواْ لَهُۥٓۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ لَن يَخۡلُقُواْ ذُبَابٗا وَلَوِ ٱجۡتَمَعُواْ لَهُۥۖ وَإِن يَسۡلُبۡهُمُ ٱلذُّبَابُ شَيۡـٔٗا لَّا يَسۡتَنقِذُوهُ مِنۡهُۚ ضَعُفَ ٱلطَّالِبُ وَٱلۡمَطۡلُوبُ ٧٣
O people, an example is presented, so listen to it. Indeed, those you invoke besides Allāh will never create [as much as] a fly, even if they gathered together for it [i.e., that purpose]. And if the fly should steal from them a [tiny] thing, they could not recover it from him. Weak are the pursuer and pursued.1
ऐ लोगो! एक उदाहरण दिया जा रहा है, इसे ध्यान से सुनो और सीख ग्रहण करो। तुम अल्लाह के सिवा जिन मूर्तियों तथा अन्य वस्तुओं को पूजते हो, वे अपनी विवशता के कारण कभी एक मक्खी जैसी छोटी-सी चीज़ भी पैदा नहीं करेंगे। बल्कि अगर वे उसे पैदा करने के लिए सबके सब इकट्ठे हो जाएँ, तब भी उसे पैदा नहीं कर पाएँगे। और यदि मक्खी उनके पास मौजूद खुशबू या कोई और चीज़ ले उड़े, तो वे मक्खी से उसे छुड़ा नहीं सकते। इनके मक्खी को पैदा करने और उससे अपनी चीज़ों को छुड़ाने में असमर्थता से; यह स्पष्ट हो गया कि वे इससे बड़ा कुछ करने में असमर्थ हैं, फिर तुम - इनकी लाचारी के बावजूद - अल्लाह के सिवा इनकी पूजा कैसे करते हो?! कमज़ोर है यह तालिब, अर्थात् वह पूजी जाने वाली मूर्ति जो मक्खी से अपनी छीनी हुई चीज़ भी छुड़ा नहीं सकती, और कमज़ोर है यह मतलूब अर्थात् मक्खी।
22:74Page 341
مَا قَدَرُواْ ٱللَّهَ حَقَّ قَدۡرِهِۦٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ ٧٤
They have not appraised Allāh with true appraisal.1 Indeed, Allāh is Powerful and Exalted in Might.
उन्होंने अल्लाह का आदर-सम्मान नहीं किया, जैसा कि उसका आदर-सम्मान करना चाहिए, जब उन्होंने उसके साथ उसके कुछ प्राणियों की पूजा की। निःसंदेह अल्लाह अत्यंत शक्तिशाली है। उसकी शक्ति और क्षमता का एक नमूना यह है कि उसने आकाशों और धरती तथा उनके अंदर मौजूद सारी चीज़ों को पैदा किया, वह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, इसके विपरीत मुश्रिकों की मूर्तियाँ कमज़ोर और हीन हैं, कुछ भी पैदा नहीं कर सकतीं।
22:75Page 341
ٱللَّهُ يَصۡطَفِي مِنَ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةِ رُسُلٗا وَمِنَ ٱلنَّاسِۚ إِنَّ ٱللَّهَ سَمِيعُۢ بَصِيرٞ ٧٥
Allāh chooses from the angels messengers and from the people. Indeed, Allāh is Hearing and Seeing.
अल्लाह तआला फ़रिश्तों में से कुछ संदेशवाहकों को चुनता है और इसी तरह इनसानों में से कुछ संदेशवाहकों को चुनता है। चुनाँचे वह कुछ फ़रिश्तों को नबियों के पास भेजता है, जैसे जिबरील अलैहिस्सलाम को इनसानों में से रसूलों के पास भेजा, तथा इनसानों में से रसूलों को लोगों के पास भेजता है। निःसंदेह अल्लाह उन बातों को सुनने वाला है, जो मुश्रिक लोग उसके रसूलों के बारे में कहते हैं, उसे देखने वाला है, जिसे वह अपने संदेश के लिए चुनता है।
22:76Page 341
يَعۡلَمُ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَمَا خَلۡفَهُمۡۚ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرۡجَعُ ٱلۡأُمُورُ ٧٦
He knows what is [presently] before them and what will be after them.1 And to Allāh will be returned [all] matters.
वह सर्वशक्तिमान फ़रिश्तों और इनसानों में से अपने संदेशवाहकों के उनके पैदा होने के पहले और उनके मरने के बाद के हालात से अवगत है। और उसी की ओर क़ियामत के दिन सारे मामले लौटाए जाएँगे, जब वह अपने बंदों को दोबारा जीवित करेगा और उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।
22:77Page 341
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱرۡكَعُواْ وَٱسۡجُدُواْۤ وَٱعۡبُدُواْ رَبَّكُمۡ وَٱفۡعَلُواْ ٱلۡخَيۡرَ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ۩ ٧٧
O you who have believed, bow and prostrate and worship your Lord and do good - that you may succeed.
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अपनी नमाज़ में केवल अल्लाह के लिए रुकू' और सजदा करो, और अच्छे कार्य करो, जैसे सदक़ा (दान), रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार और अन्य चीजें। इस आशा में कि तुम अपने उद्देश्य की प्राप्ति में सफल हो जाओ और भय से मुक्ति पा जाओ।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences