Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Ash-Shu'ara 26:220–227
आप अपनी नमाज़ में जो क़ुरआन और दुआएँ पढ़ते हैं, वह उसे सुनने वाला और आपकी नीयत को भली-भाँति जानने वाला है।
26:221Page 376
هَلۡ أُنَبِّئُكُمۡ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ ٱلشَّيَٰطِينُ ٢٢١
Shall I inform you upon whom the devils descend?
क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान, जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि इस क़ुरआन को लेकर उतरे हैं, किस पर उतरते हैं?
शैतान हर झूठ बोलने वाले, बहुत पाप और अवज्ञा करने वाले काहिन पर उतरते हैं।
26:223Page 376
يُلۡقُونَ ٱلسَّمۡعَ وَأَكۡثَرُهُمۡ كَٰذِبُونَ ٢٢٣
They pass on what is heard,1 and most of them are liars.
शैतान चोरी से फ़रिश्तों की बातें सुन लेते हैं, फिर अपने काहिन मित्रों तक उन्हें पहुँचा देते हैं। और अधिकांश काहिन झूठे होते हैं। यदि उनकी कोई एक बात सत्य होती है, तो उसके साथ सौ झूठ मिला देते हैं।
26:224Page 376
وَٱلشُّعَرَآءُ يَتَّبِعُهُمُ ٱلۡغَاوُۥنَ ٢٢٤
And the poets - [only] the deviators follow them.
और कवि लोग जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उन्हीं में से हैं, उनका अनुसरण तो केवल वे लोग करते हैं जो मार्गदर्शन और धार्मिकता के मार्ग से भटके हुए हैं, जो उनके कहे हुए काव्य का वर्णन करते हैं।
26:225Page 376
أَلَمۡ تَرَ أَنَّهُمۡ فِي كُلِّ وَادٖ يَهِيمُونَ ٢٢٥
Do you not see that in every valley they roam1
और क्या (ऐ रसूल!) आपने नहीं देखा कि उनकी गुमराही की निशानियों में से एक यह है कि वे हर वादी में भटकते फिरते हैं। कभी प्रशंसा की वादी में सिर मारते हैं, तो कभी निंदा की वादी में, और कभी इन दोनों के अलावा किसी और वादी में।
26:226Page 376
وَأَنَّهُمۡ يَقُولُونَ مَا لَا يَفۡعَلُونَ ٢٢٦
And that they say what they do not do? -
और यह कि वे झूठ बोलते हैं। चुनाँचे वे कहते हैं : हमने यह किया है, जबकि उन्होंने उसे नहीं किया होता है।
26:227Page 376
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَذَكَرُواْ ٱللَّهَ كَثِيرٗا وَٱنتَصَرُواْ مِنۢ بَعۡدِ مَا ظُلِمُواْۗ وَسَيَعۡلَمُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ أَيَّ مُنقَلَبٖ يَنقَلِبُونَ ٢٢٧
Except those [poets] who believe and do righteous deeds and remember Allāh often and defend [the Muslims]1 after they were wronged. And those who have wronged are going to know to what [kind of] return they will be returned.
सिवाय उन कवियों के, जो ईमान लाए और नेक कर्म किए, और अल्लाह को बहुत याद किया, तथा अपने शत्रुओं से उनके अत्याचार से पीड़ित होने के बाद बदला लिया, जैसे हस्सान बिन साबित रज़ियल्लाहु अन्हु l और शीघ्र ही वे लोग जान लेंगे, जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क करके तथा उसके बंदों पर ज़्यादती करके अत्याचार किया, कि वे लौटने की कौन-सी जगह लौटकर जाएँगे। वे एक विकट स्थिति और सटीक हिसाब-किताब की ओर पलटकर जाएँगे।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences