Al-MukhtasarAn‑Naml · 27:51–93

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

An-Naml 27:51–93

27:51Page 381

فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ مَكۡرِهِمۡ أَنَّا دَمَّرۡنَٰهُمۡ وَقَوۡمَهُمۡ أَجۡمَعِينَ ٥١

Then look how was the outcome of their plan - that We destroyed them and their people, all.

तो (ऐ रसूल!) आप ग़ौर कीजिए कि उनकी साज़िश और चाल का परिणाम कैसा रहा? हमने उन्हें अपनी ओर से यातना देकर सबको विनष्ट कर दिया।

27:52Page 381

فَتِلۡكَ بُيُوتُهُمۡ خَاوِيَةَۢ بِمَا ظَلَمُوٓاْۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ ٥٢

So those are their houses, desolate because of the wrong they had done. Indeed in that is a sign for people who know.

तो ये उनके घर हैं जिनकी दीवारें उनकी छतों समेत गिर गई हैं और अपने निवासियों से खाली हैं, ऐसा उनके अत्याचार के कारण हुआ है। इन लोगों को उनके अत्याचार के कारण जो यातना पहुँची है, उसमें उन लोगों के लिए निश्चय एक सबक़ है जो ईमान रखते हैं, क्योंकि वही लोग हैं जो निशानियों से सबक़ हासिल करते हैं।

27:53Page 381

وَأَنجَيۡنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَكَانُواْ يَتَّقُونَ ٥٣

And We saved those who believed and used to fear Allāh.

और हमने सालेह अलैहिस्सलाम के समुदाय में से उन लोगों को बचा लिया, जो अल्लाह पर ईमान लाए तथा अल्लाह से उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर डरते थे।

27:54Page 381

وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦٓ أَتَأۡتُونَ ٱلۡفَٰحِشَةَ وَأَنتُمۡ تُبۡصِرُونَ ٥٤

And [mention] Lot, when he said to his people, "Do you commit immorality1 while you are seeing?2

और (ऐ रसूल!) लूत अलैहिस्सलाम को याद करें, जब उन्होंने अपनी जाति से, उन्हें फटकार लगाते तथा उनकी निंदा करते हुए कहा : क्या तुम अपने क्लबों में खुले तौर पर घिनौना काम - लिवात - करते हो, जबकि तुम एक-दूसरे को देखते हो?!

27:55Page 381

أَئِنَّكُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ شَهۡوَةٗ مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٞ تَجۡهَلُونَ ٥٥

Do you indeed approach men with desire instead of women? Rather, you are a people behaving ignorantly."

क्या वाक़ई तुम औरतों को छोड़कर कामवासना की पूर्ति के लिए मर्दों के पास जाते हो! तुम शुद्धता या संतान नहीं चाहते, केवल एक पशु वासना की पूर्ति चाहते हो।बल्कि, तुम ऐसे लोग हो जिन्हें अपने ऊपर अनिवार्य ईमान, पवित्रता और पापों से दूरी का भी ज्ञान नहीं है।

27:56Page 382

۞ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَخۡرِجُوٓاْ ءَالَ لُوطٖ مِّن قَرۡيَتِكُمۡۖ إِنَّهُمۡ أُنَاسٞ يَتَطَهَّرُونَ ٥٦

But the answer of his people was not except that they said, "Expel the family of Lot from your city. Indeed, they are people who keep themselves pure."

उनकी जाति के पास इसके सिवा कोई उत्तर नहीं था कि उन्होंने कहा : लूत के परिवार को अपनी बस्ती से निकाल दो। ये ऐसे लोग हैं जो गंदगी और अशुद्धता से बड़े पवित्र बनते हैं। उन्होंने यह बात लूत के परिवार का मज़ाक उड़ाते हुए कही थी, जो उनके द्वारा किए जाने वाले घिनौने कामों में हिस्सा नहीं लेते थे, बल्कि उन्हें करने पर उनकी निंदा करते थे।

27:57Page 382

فَأَنجَيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُۥ قَدَّرۡنَٰهَا مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ ٥٧

So We saved him and his family, except for his wife; We destined her to be of those who remained behind.

अतः हमने उन्हें और उनके घर वालों को बचा लिया, केवल उनकी पत्नी को छोड़कर। हमने उसके बारे में यह फैसला कर दिया था कि वह यातना में बाक़ी रहने वालों में से होगी, ताकि वह हलाक होने वालों में से हो जाए।

27:58Page 382

وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرٗاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ ٥٨

And We rained upon them a rain [of stones], and evil was the rain of those who were warned.

हमने उनपर आसमान से पत्थर बरसाए, तो यह उन लोगों के लिए बहुत बुरी और विनाशकारी बारिश थी, जो यातना से डराए गए थे, परंतु वे नहीं माने।

27:59Page 382

قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ وَسَلَٰمٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ ٱلَّذِينَ ٱصۡطَفَىٰٓۗ ءَآللَّهُ خَيۡرٌ أَمَّا يُشۡرِكُونَ ٥٩

Say, [O Muḥammad], "Praise be to Allāh, and peace upon His servants whom He has chosen. Is Allāh better or what they associate with Him?"

(ऐ रसूल!) आप कह दें : सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है उसकी नेमतों पर, तथा उसकी ओर से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सहाबा के लिए उसकी उस यातना से सुरक्षा (हिफ़ाज़त) है, जिसके साथ लूत और सालेह (अलैहिमस्सलाम) की जाति के लोग दंडित किए गए। क्या सत्य पूज्य अल्लाह जिसके हाथ में हर चीज़ का राज्य है, बेहतर है अथवा बहुदेववादियों द्वारा पूजे जाने वाले देवता, जो किसी लाभ और हानि के मालिक नहीं हैं?!

27:60Page 382

أَمَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَنۢبَتۡنَا بِهِۦ حَدَآئِقَ ذَاتَ بَهۡجَةٖ مَّا كَانَ لَكُمۡ أَن تُنۢبِتُواْ شَجَرَهَآۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمٞ يَعۡدِلُونَ ٦٠

[More precisely], is He [not best] who created the heavens and the earth and sent down for you rain from the sky, causing to grow thereby gardens of joyful beauty which you could not [otherwise] have grown the trees thereof? Is there a deity with Allāh?1 [No], but they are a people who ascribe equals [to Him].

अथवा वह (बेहतर) है, जिसने बिना किसी पूर्व नमूने के आकाशों एवं धरती को पैदा किया तथा उसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए आकाश से बारिश का पानी उतारा, फिर हमने उससे सुंदर और भव्य बगीचे उगाए। तुम्हारे लिए संभव नहीं था कि तुम उन बागों के पेड़ों को उगाते, क्योंकि तुम ऐसा करने में अक्षम थे। अतः अल्लाह ही है जिसने उन्हें उगाया। क्या किसी अन्य पूज्य ने अल्लाह के साथ यह सब काम किया है?! नहीं! बल्कि वे ऐसे लोग हैं जो सत्य से भटक जाते हैं, इसलिए अन्यायपूर्ण रूप से सृष्टिकर्ता को सृष्टि के बराबर कर देते हैं।

27:61Page 382

أَمَّن جَعَلَ ٱلۡأَرۡضَ قَرَارٗا وَجَعَلَ خِلَٰلَهَآ أَنۡهَٰرٗا وَجَعَلَ لَهَا رَوَٰسِيَ وَجَعَلَ بَيۡنَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ حَاجِزًاۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ٦١

Is He [not best] who made the earth a stable ground and placed within it rivers and made for it firmly set mountains and placed between the two seas a barrier? Is there a deity with Allāh? [No], but most of them do not know.

अथवा वह (बेहतर) है, जिसने धरती को स्थिर बनाया, जो अपने ऊपर मौजूद चीज़ों के साथ हिलती-डुलती नहीं है, तथा उसके भीतर बहने वाली नदियों को बनाया और उसके लिए स्थिर पर्वत बनाए, तथा दो समुद्रों : खारे और मीठे के बीच एक विभाजक बनाया, जो खारे पानी को मीठे पानी के साथ मिलने से रोकता है ताकि उसका स्वाद ख़राब न हो और वह पीने के लिए उपयुक्त न रह जाए। क्या किसी (अन्य) पूज्य ने अल्लाह के साथ यह सारा काम किया है?! कदापि नहीं, बल्कि उनके अधिकांश लोग (अल्लाह की महानता को) नहीं जानते। यदि वे जानते होते तो अल्लाह की किसी सृष्टि को कभी उसका साझी नहीं बनाते।

27:62Page 382

أَمَّن يُجِيبُ ٱلۡمُضۡطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكۡشِفُ ٱلسُّوٓءَ وَيَجۡعَلُكُمۡ خُلَفَآءَ ٱلۡأَرۡضِۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ قَلِيلٗا مَّا تَذَكَّرُونَ ٦٢

Is He [not best] who responds to the desperate one when he calls upon Him and removes evil and makes you inheritors of the earth?1 Is there a deity with Allāh? Little do you remember.

अथवा वह (बेहतर) है कि जब कोई कष्ट में पड़ा हुआ व्याकुल व्यक्ति उसे पुकारता है, तो उसकी पुकार सुनता है, तथा इनसान जब रोग और निर्धनता का शिकार होता है, तो उसे इनसे मुक्ति प्रदान करता है, और तुम्हें धरती में उत्तराधिकारी बनाता है, तुम पीढ़ी दर पीढ़ी एक-दूसरे के उत्तराधिकारी बनते हो। क्या कोई (अन्य) पूज्य है जो अल्लाह के साथ यह सारा काम करता है?! कदापि नहीं, तुम बहुत कम उपदेश और सीख ग्रहण करते हो।

27:63Page 382

أَمَّن يَهۡدِيكُمۡ فِي ظُلُمَٰتِ ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِ وَمَن يُرۡسِلُ ٱلرِّيَٰحَ بُشۡرَۢا بَيۡنَ يَدَيۡ رَحۡمَتِهِۦٓۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ تَعَٰلَى ٱللَّهُ عَمَّا يُشۡرِكُونَ ٦٣

Is He [not best] who guides you through the darknesses of the land and sea and who sends the winds as good tidings before His mercy? Is there a deity with Allāh? High is Allāh above whatever they associate with Him.

अथवा वह (बेहतर) है, जो थल एवं जल के अँधेरों में विभिन्न स्थलचिह्नों एवं नक्षत्रों द्वारा तुम्हें मार्गदर्शन प्रदान करता है। तथा जो हवाओं को उस वर्षा से पूर्व शुभ सूचना बनाकर भेजता है, जिसके द्वारा वह अपने बंदों पर दया करता है। क्या कोई (अन्य) पूज्य है, जो अल्लाह के साथ यह सारा काम करता है?! अल्लाह उनके उसकी सृष्टियों को उसका साझी बनाने से पाक है।

27:64Page 383

أَمَّن يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ وَمَن يَرۡزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِۗ أَءِلَٰهٞ مَّعَ ٱللَّهِۚ قُلۡ هَاتُواْ بُرۡهَٰنَكُمۡ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٦٤

Is He [not best] who begins creation and then repeats it and who provides for you from the heaven and earth? Is there a deity with Allāh? Say, "Produce your proof, if you should be truthful."

अथवा वह (बेहतर) है, जो गर्भ के अंदर चरण दर चरण सृष्टि की शुरुआत करता है, फिर उसे मृत्यु देने के बाद पुनः जीवित करेगा। और जो तुम्हें आकाश से उसकी ओर से उतरने वाली वर्षा के द्वारा जीविका प्रदान करता है, तथा तुम्हें धरती से उसमें पौधे उगाकर जीविका देता है? क्या कोई (अन्य) पूज्य है, जो अल्लाह के साथ यह सब करता है?! (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें : तुम जिस शिर्क पर क़ायम हो, उसपर अपने प्रमाण प्रस्तुत करो, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि तुम सत्य पर हो?

27:65Page 383

قُل لَّا يَعۡلَمُ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ ٱلۡغَيۡبَ إِلَّا ٱللَّهُۚ وَمَا يَشۡعُرُونَ أَيَّانَ يُبۡعَثُونَ ٦٥

Say, "None in the heavens and earth knows the unseen except Allāh, and they do not perceive when they will be resurrected."

(ऐ रसूल!) आप कह दें कि आकाशों में मौजूद फ़रिश्ते और धरती में मौजूद इनसान ग़ैब (परोक्ष) को नहीं जानते। बल्कि एकमात्र अल्लाह ही उसे जानता है। तथा अल्लाह के सिवा आकाशों एवं धरती में मौजूद सभी प्राणी यह नहीं जानते कि वे बदले के लिए कब पुनः जीवित किए जाएँगे।

27:66Page 383

بَلِ ٱدَّٰرَكَ عِلۡمُهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِۚ بَلۡ هُمۡ فِي شَكّٖ مِّنۡهَاۖ بَلۡ هُم مِّنۡهَا عَمُونَ ٦٦

Rather, their knowledge is arrested concerning the Hereafter. Rather, they are in doubt about it. Rather, they are, concerning it, blind.

अथवा क्या निरंतर उन्हें आख़िरत के बारे में ज्ञान होता रहा, तो वे इसके बारे में निश्चित हैं? नहीं! बल्कि वे आख़िरत के बारे में संदेह और विस्मय के शिकार हैं। बल्कि, उनकी अंतर्दृष्टि उससे अंधी हो गई है।

27:67Page 383

وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبٗا وَءَابَآؤُنَآ أَئِنَّا لَمُخۡرَجُونَ ٦٧

And those who disbelieve say, "When we have become dust as well as our forefathers, will we indeed be brought out [of the graves]?

तथा काफ़िरों ने इनकार करते हुए कहा : क्या जब हम (और हमारे बाप-दादा) मर जाएँगे और मिट्टी बन जाएँगे, तो क्या यह संभव है कि हमें पुनः जीवित किया जाएगा?

27:68Page 383

لَقَدۡ وُعِدۡنَا هَٰذَا نَحۡنُ وَءَابَآؤُنَا مِن قَبۡلُ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّآ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ ٦٨

We have been promised this, we and our forefathers, before. This is not but legends of the former peoples."

निश्चय हमसे वादा किया गया है और इससे पहले हमारे बाप-दादा पिता से भी वादा किया गया था कि हम सभी को पुनर्जीवित किया जाएगा, लेकिन हमने उस वादे की पूर्ति नहीं देखी। हम सब से किया गया यह वादा पहले लोगों की झूठी कथाएँ हैं, जो उन्होंने अपनी पुस्तकों में लिख रखी हैं।

27:69Page 383

قُلۡ سِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ ٦٩

Say, [O Muḥammad], "Proceed [i.e., travel] through the land and observe how was the end of the criminals."

(ऐ रसूल!) आप मरणोपरांत पुनः जीवित कर उठाए जाने का इनकार करने वालों से कह दें : धरती के किसी भी हिस्से में चलो-फिरो, फिर विचार करो कि पुनर्जीवन को झुठलाने वाले अपराधियों का परिणाम कैसा रहा? हमने इसका इनकार करने के कारण उन्हें नष्ट कर दिया।

27:70Page 383

وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمۡ وَلَا تَكُن فِي ضَيۡقٖ مِّمَّا يَمۡكُرُونَ ٧٠

And grieve not over them or be in distress from what they conspire.

इन मुश्रिकों के आपके बुलावे से मुँह फेरने के कारण आप शोक न करें, और उनकी साज़िशों से आपका दिल तंग न हो। क्योंकि अल्लाह उनके विरुद्ध आपकी सहायता करेगा।

27:71Page 383

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٧١

And they say, "When is [the fulfillment of] this promise, if you should be truthful?"

आपके समुदाय के मरणोपरांत पुनः जीवित कर उठाए जाने का इनकार करने वाले काफ़िर कहते हैं : तुम और ईमान वाले जिस यातना का हमसे वादा करते हो, वह कब आएगी, यदि तुम उसमें सच्चे हो, जिसका तुम दावा करते हो?

27:72Page 383

قُلۡ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعۡضُ ٱلَّذِي تَسۡتَعۡجِلُونَ ٧٢

Say, "Perhaps it is close behind you [i.e., very near] - some of that for which you are impatient.

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : जिस यातना की तुम जल्दी मचा रहे हो, संभव है कि उसका कुछ हिस्सा तुम्हारे निकट आ गया हो।

27:73Page 383

وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَشۡكُرُونَ ٧٣

And indeed, your Lord is the possessor of bounty for the people, but most of them are not grateful."

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार लोगों पर अति दयावान है कि वह लोगों के कुफ़्र और पापों के बावजूद उन्हें यातना देने में जल्दी नहीं करता। लेकिन अधिकांश लोग अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा नहीं करते।

27:74Page 383

وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعۡلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمۡ وَمَا يُعۡلِنُونَ ٧٤

And indeed, your Lord knows what their breasts conceal and what they declare.

और निःसंदेह आपका पालनहार जानता है जो उसके बंदों के दिल छिपाए हुए हैं तथा वे जो कुछ प्रकट करते हैं, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह उन्हें इसके लिए प्रतिफल देगा।

27:75Page 383

وَمَا مِنۡ غَآئِبَةٖ فِي ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ إِلَّا فِي كِتَٰبٖ مُّبِينٍ ٧٥

And there is nothing concealed1 within the heaven and the earth except that it is in a clear Register.2

जो भी वस्तु आकाश में लोगों से ओझल है, या धरती में लोगों से ओझल है, वह एक स्पष्ट किताब अर्थात् लौह़े-महफ़ूज़ में लिखित रूप से मौजूद है।

27:76Page 383

إِنَّ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ أَكۡثَرَ ٱلَّذِي هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ ٧٦

Indeed, this Qur’ān relates to the Children of Israel most of that over which they disagree.

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित होने वाला यह क़ुरआन बनी-इसराईल के सामने उन अधिकांश बातों का वर्णन करता है, जिनमें वे विभेद करते हैं तथा उनकी पथभ्रष्टता को उजागर करता है।

27:77Page 384

وَإِنَّهُۥ لَهُدٗى وَرَحۡمَةٞ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ ٧٧

And indeed, it is guidance and mercy for the believers.

और निःसंदेह यह (क़ुरआन) उन मोमिनों के लिए मार्गदर्शन और दया है जो इसकी शिक्षाओं पर अमल करने वाले हैं।

27:78Page 384

إِنَّ رَبَّكَ يَقۡضِي بَيۡنَهُم بِحُكۡمِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡعَلِيمُ ٧٨

Indeed, your Lord will judge between them by His [wise] judgement. And He is the Exalted in Might, the Knowing.

निश्चय (ऐ रसूल!) आपका रब क़ियामत के दिन लोगों के बीच अर्थात् उनके ईमान वालों और उनके काफ़िरों के बीच अपने न्याय से फ़ैसला करेगा। अतः वह मोमिन पर दया करेगा और काफ़िर को यातना देगा। तथा वही सब पर प्रभुत्वशाली है जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है और उसे कोई पराजित नहीं कर सकता, वह सब कुछ जानने वाला है, उसपर सत्यनिष्ठ और असत्यता का पालन करने वाले गड्डमड्ड नहीं हो सकते।

27:79Page 384

فَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱللَّهِۖ إِنَّكَ عَلَى ٱلۡحَقِّ ٱلۡمُبِينِ ٧٩

So rely upon Allāh; indeed, you are upon the clear truth.

अतः आप अल्लाह पर भरोसा करें, तथा अपने सभी मामलों में उसी पर निर्भर रहें। निःसंदेह आप स्पष्ट सत्य पर हैं।

27:80Page 384

إِنَّكَ لَا تُسۡمِعُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَلَا تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوۡاْ مُدۡبِرِينَ ٨٠

Indeed, you will not make the dead hear, nor will you make the deaf hear the call when they have turned their backs retreating.

(ऐ रसूल!) आप उन मरे हुए लोगों को नहीं सुना सकते, जिनके दिल अल्लाह के इनकार के कारण मर चुके हैं। तथा जिनके कानों को अल्लाह ने सत्य सुनने से बहरा कर दिया है, आप उन्हें (भी) वह बात नहीं सुना सकते, जिसकी ओर आप उन्हें बुला रहे हैं, जबकि वे आपसे मुँह फेरकर पलट जाएँ।

27:81Page 384

وَمَآ أَنتَ بِهَٰدِي ٱلۡعُمۡيِ عَن ضَلَٰلَتِهِمۡۖ إِن تُسۡمِعُ إِلَّا مَن يُؤۡمِنُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُم مُّسۡلِمُونَ ٨١

And you cannot guide the blind away from their error. You will only make hear those who believe in Our verses so they are Muslims [i.e., submitting to Allāh].

तथा आप उन्हें सत्य मार्ग नहीं दिखा सकते, जिनकी अंतर्दृष्टि सत्य से अंधी हो गई है। अतः आप उनके लिए शोक न करें और न अपने आप को थकाएँ। आप सत्य बात केवल उन्हीं को समझा सकते हैं, जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं, सो वही अल्लाह के आदेशों का पालन करने वाले हैं।

27:82Page 384

۞ وَإِذَا وَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِمۡ أَخۡرَجۡنَا لَهُمۡ دَآبَّةٗ مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ تُكَلِّمُهُمۡ أَنَّ ٱلنَّاسَ كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا لَا يُوقِنُونَ ٨٢

And when the word [i.e., decree] befalls them,1 We will bring forth for them a creature from the earth speaking to them, [saying] that the people were, of Our verses, not certain [in faith].

जब उनके कुफ़्र एवं पापों पर अडिग रहने के कारण यातना उनपर साबित और आवश्यक हो जाएगी, तथा केवल बुरे लोग ही शेष रह जाएँगे, तो हम क़ियामत के निकट होने पर उनके लिए क़ियामत की बड़ी निशानियों में से एक निशानी निकालेंगे, और वह (निशानी) धरती का एक जानवर है, जो लोगों से इस तरह बात करेगा जो वे समझेंगे, कि लोग हमारे नबी पर उतरने वाली हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे।

27:83Page 384

وَيَوۡمَ نَحۡشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٖ فَوۡجٗا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُمۡ يُوزَعُونَ ٨٣

And [warn of] the Day when We will gather from every nation a company of those who deny Our signs, and they will be [driven] in rows

तथा (ऐ रसूल!) उस दिन को याद कीजिए, जब हम प्रत्येक समुदाय से उनके प्रमुखों का एक समूह इकट्ठा करेंगे, उन लोगों में से जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे। उनमें से प्रथम व्यक्ति से लेकर अंतिम तक को प्रस्तुत किया जाएगा, फिर वे हिसाब-किताब की ओर हाँककर ले जाए जाएँगे।

27:84Page 384

حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُو قَالَ أَكَذَّبۡتُم بِـَٔايَٰتِي وَلَمۡ تُحِيطُواْ بِهَا عِلۡمًا أَمَّاذَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٨٤

Until, when they arrive [at the place of Judgement], He will say, "Did you deny My signs while you encompassed them not in knowledge, or what [was it that] you were doing?"

उनको हाँका जाता रहेगा, यहाँ तक कि जब वे अपने हिसाब-किताब के स्थान पर पहुँच जाएँगे, तो अल्लाह उनको फटकारते हुए कहेगा : क्या तुमने मेरी उन आयतों को झुठलाया था जो मेरे एकेश्वरवाद को दर्शाने वाली थीं और मेरी शरीयत को सम्मिलित थीं, जबकि तुम्हें उनके असत्य होने का पूर्ण ज्ञान नहीं था कि तुम्हारे लिए उनका झुठलाना उचित होता! या तुमने उनके साथ कौन-सा रवैया अपनाया था, पुष्टि करने का या झुठलाने का?!

27:85Page 384

وَوَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِم بِمَا ظَلَمُواْ فَهُمۡ لَا يَنطِقُونَ ٨٥

And the decree will befall them1 for the wrong they did, and they will not [be able to] speak.

अल्लाह के इनकार तथा उसकी आयतों को झुठलाकर अत्याचार करने के कारण उनपर यातना आ पहुँचेगी। अतः वे अपने बचाव के संदर्भ में कोई बात नहीं कर सकेंगे, क्योंकि वे ऐसा करने में असमर्थ और उनके तर्क अमान्य होंगे।

27:86Page 384

أَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا جَعَلۡنَا ٱلَّيۡلَ لِيَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ ٨٦

Do they not see that We made the night that they may rest therein and the day giving sight? Indeed in that are signs for a people who believe.

क्या मरणोपरांत पुनः जीवित किए जाने को झुठलाने वाले ये लोग नहीं देखते कि हमने रात बनाई, ताकि वे उसमें सोकर आराम कर सकें, तथा दिन को प्रकाशमान बनाया, ताकि उसमें देख सकें और अपने कामों के लिए निकल सकें। इस बार-बार होने वाली मृत्यु और उसके बाद जी उठने में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए स्पष्ट निशानियाँ हैं।

27:87Page 384

وَيَوۡمَ يُنفَخُ فِي ٱلصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُۚ وَكُلٌّ أَتَوۡهُ دَٰخِرِينَ ٨٧

And [warn of] the Day the Horn will be blown, and whoever is in the heavens and whoever is on the earth will be terrified except whom Allāh wills. And all will come to Him humbled.

और (ऐ रसूल!) याद करें उस दिन को, जब सूर फूँकने के कार्य पर नियुक्त फ़रिश्ता नरसिंघा में द्वितीय बार फूँकेगा, तो आकाशों एवं धरती में मौजूद सारी चीज़ें घबरा जाएँगी, सिवाय उसके जिसे अल्लाह ने अपनी कृपा से इस घबराहट से अलग कर दिया। उस दिन अल्लाह के सभी प्राणी उसके पास आज्ञाकारी एवं हीन होकर आएँगे।

27:88Page 384

وَتَرَى ٱلۡجِبَالَ تَحۡسَبُهَا جَامِدَةٗ وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ ٱلسَّحَابِۚ صُنۡعَ ٱللَّهِ ٱلَّذِيٓ أَتۡقَنَ كُلَّ شَيۡءٍۚ إِنَّهُۥ خَبِيرُۢ بِمَا تَفۡعَلُونَ ٨٨

And you see the mountains, thinking them motionless,1 while they will pass as the passing of clouds. [It is] the work of Allāh, who perfected all things. Indeed, He is Aware of that which you do.

उस दिन तुम पहाड़ों को देखकर सोचोगे कि वे स्थिर हैं, हिल नहीं रहे हैं, जबकि वास्तव में वे बादलों की तरह तेज गति से चल रहे होंगे। यह अल्लाह की कारीगरी है, अतः वही है जो उन्हें चला रहा है। निःसंदेह वह भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम करते हो, तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह शीघ्र ही तुम्हें उनका बदला देगा।

27:89Page 385

مَن جَآءَ بِٱلۡحَسَنَةِ فَلَهُۥ خَيۡرٞ مِّنۡهَا وَهُم مِّن فَزَعٖ يَوۡمَئِذٍ ءَامِنُونَ ٨٩

Whoever comes [at Judgement] with a good deed will have better than it, and they, from the terror of that Day, will be safe.

जो कोई क़ियामत के दिन ईमान और नेक कामों के साथ आएगा, उसके लिए जन्नत होगी, और वे अल्लाह के उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के कारण क़ियामत के दिन की घबराहट से सुरक्षित होंगे।

27:90Page 385

وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَكُبَّتۡ وُجُوهُهُمۡ فِي ٱلنَّارِ هَلۡ تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٩٠

And whoever comes with an evil deed1 - their faces will be overturned into the Fire, [and it will be said], "Are you recompensed except for what you used to do?"

परंतु जो कुफ़्र और पाप के साथ आएगा, तो उनके लिए नरक है जिसमें उन्हें उनके चेहरों के बल डाला जाएगा, तथा उनसे उन्हें डाँटते और अपमानित करते हुए कहा जाएगा : क्या तुम्हें उसके सिवा किसी और चीज़ का बदला दिया जाएगा, जो तुम दुनिया में कुफ़्र और पाप किया करते थे?

27:91Page 385

إِنَّمَآ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ رَبَّ هَٰذِهِ ٱلۡبَلۡدَةِ ٱلَّذِي حَرَّمَهَا وَلَهُۥ كُلُّ شَيۡءٖۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ ٩١

[Say, O Muḥammad], "I have only been commanded to worship the Lord of this city,1 who made it sacred and to whom [belongs] all things. And I am commanded to be of the Muslims [i.e., those who submit to Allāh]

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : मुझे तो केवल यही आदेश दिया गया है कि मैं मक्का (नगर) के पालनहार की उपासना करूँ, जिसने इसे प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्रदान किया है। अतः इसमें रक्त नहीं बहाया जाएगा, इसमें किसी पर अत्याचार नहीं किया जाएगा, इसके शिकार को नहीं मारा जाएगा और यहाँ के पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। वही पवित्र अल्लाह हर वस्तु का मालिक है। तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह के आगे समर्पण करने वालों, उसके आज्ञाकारियों में से हो जाऊँ।

27:92Page 385

وَأَنۡ أَتۡلُوَاْ ٱلۡقُرۡءَانَۖ فَمَنِ ٱهۡتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهۡتَدِي لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن ضَلَّ فَقُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُنذِرِينَ ٩٢

And to recite the Qur’ān." And whoever is guided is only guided for [the benefit of] himself; and whoever strays - say, "I am only [one] of the warners."

तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं लोगों को क़ुरआन पढ़कर सुनाऊँ। फिर जो इससे मार्गदर्शन प्राप्त करे तथा इसमें जो कुछ है उसके अनुसार काम करे, तो उसके मार्गदर्शन प्राप्त करने का लाभ स्वंय उसी को होगा। परंतु जो उससे भटककर गुमराह हो जाए और उसका इनकार कर दे तथा उसमें जो कुछ है उसके अनुसार कार्य न करे, तो आप कह दें : मैं तो केवल चेतावनी देने वालों में से हूँ, मैं तुम्हें अल्लाह की यातना के बारे में चेतावनी देता हूँ, और तुम्हें सीधे रास्ते पर चलाना मेरे हाथ में नहीं है।

27:93Page 385

وَقُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ سَيُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ فَتَعۡرِفُونَهَاۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعۡمَلُونَ ٩٣

And say, "[All] praise is [due] to Allāh. He will show you His signs, and you will recognize them. And your Lord is not unaware of what you do."

और (ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह की अनगिनत नेमतों के लिए हर प्रकार की प्रशंसा उसी के लिए है। शीघ्र ही अल्लाह तुम्हें स्वंय तुम्हारे अंदर, तथा आकाश एवं धरती और जीविका में अपनी निशानियाँ दिखाएगा। तो तुम उन्हें ऐसे पहचान लोगे कि वह तुम्हें सच्चाई को मानने के लिए मार्गदर्शन करेगा। तथा तुम्हारा पालनहार उससे बेख़बर नहीं है जो कुछ तुम करते हो, बल्कि वह उससे अवगत है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है और शीघ्र ही वह तुम्हें उसका बदला देगा।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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