Al-MukhtasarAl-'Ankabut · 29:42–69

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

Al-'Ankabut 29:42–69

29:42Page 401

إِنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا يَدۡعُونَ مِن دُونِهِۦ مِن شَيۡءٖۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ٤٢

Indeed, Allāh knows whatever thing they call upon1 other than Him. And He is the Exalted in Might, the Wise.

निश्चय पवित्र एवं सर्वोच्च अल्लाह जनता है जिसे वे उसके अलावा पूजते हैं। उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। तथा वह सबपर प्रभुत्वशाली है जिसे पराजित नहीं किया जा सकता, अपनी रचना, नियति और प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला है।

29:43Page 401

وَتِلۡكَ ٱلۡأَمۡثَٰلُ نَضۡرِبُهَا لِلنَّاسِۖ وَمَا يَعۡقِلُهَآ إِلَّا ٱلۡعَٰلِمُونَ ٤٣

And these examples We present to the people, but none will understand them except those of knowledge.

हम इन उदाहरणों को लोगों के लिए प्रस्तुत करते हैं, ताकि उन्हें जगाया जा सके, उन्हें सच्चाई से अवगत कराया जा सके और उसकी ओर उनका मार्गदर्शन किया जा सके। और इन्हें ठीक से वही समझ सकते हैं, जो अल्लाह की शरीयत और उसकी हिकमतों को जानने वाले हैं।

29:44Page 401

خَلَقَ ٱللَّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ ٤٤

Allāh created the heavens and the earth in truth. Indeed in that is a sign for the believers.

पवित्र एवं सर्वोच्च अल्लाह ने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया, उसने उन्हें असत्य के साथ और व्यर्थ नहीं बनाया। निश्चय इस रचना में मोमिनों के लिए अल्लाह की शक्ति की स्पष्ट निशानी है। क्योंकि केवल ईमानवाले ही अल्लाह की सृष्टि को पवित्र सृष्टिकर्ता के अस्तित्व के लिए प्रमाण बनाते हैं। रही बात काफिरों की, तो वे क्षितिज (ब्रह्मांड) में तथा स्वंय अपने भीतर मौजूद निशानियों से यूँ ही गुज़र जाते हैं, वे सृष्टिकर्ता की महानता और उसकी क्षमता की ओर उनका ध्यान आकर्षित नहीं करती हैं।

29:45Page 401

ٱتۡلُ مَآ أُوحِيَ إِلَيۡكَ مِنَ ٱلۡكِتَٰبِ وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَۖ إِنَّ ٱلصَّلَوٰةَ تَنۡهَىٰ عَنِ ٱلۡفَحۡشَآءِ وَٱلۡمُنكَرِۗ وَلَذِكۡرُ ٱللَّهِ أَكۡبَرُۗ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تَصۡنَعُونَ ٤٥

Recite, [O Muḥammad], what has been revealed to you of the Book and establish prayer. Indeed, prayer prohibits immorality and wrongdoing, and the remembrance of Allāh is greater. And Allāh knows that which you do.

(ऐ रसूल!) आप लोगों के समक्ष उस क़ुरआन को पढ़ें, जिसकी अल्लाह ने आपकी ओर वह़्य की है, तथा सबसे पूर्ण तरीके से नमाज़ अदा करें। बेशक पूर्ण विधि के साथ पढ़ी जाने वाली नमाज़ उसके पढ़ने वाले को पापों तथा बुराइयों में पड़ने से रोकती है; क्योंकि यह दिल के अंदर एक प्रकाश पैदा कर देती है, जो पाप करने से रोकता है और अच्छे कर्म करने के लिए मार्गदर्शन करता है। और निश्चय अल्लाह का स्मरण हर चीज से बड़ा और महान है। और जो कुछ तुम करते हो, अल्लाह उसे जानता है, तुम्हारे कार्यों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कार्यों का प्रतिफल देगा, यदि भला है, तो भला (बदला) और यदि बुरा है, तो बुरा (बदला)।

29:46Page 402

۞ وَلَا تُجَٰدِلُوٓاْ أَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ إِلَّا بِٱلَّتِي هِيَ أَحۡسَنُ إِلَّا ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ مِنۡهُمۡۖ وَقُولُوٓاْ ءَامَنَّا بِٱلَّذِيٓ أُنزِلَ إِلَيۡنَا وَأُنزِلَ إِلَيۡكُمۡ وَإِلَٰهُنَا وَإِلَٰهُكُمۡ وَٰحِدٞ وَنَحۡنُ لَهُۥ مُسۡلِمُونَ ٤٦

And do not argue with the People of the Scripture except in a way that is best, except for those who commit injustice among them, and say, "We believe in that which has been revealed to us and revealed to you. And our God and your God is one; and we are Muslims [in submission] to Him."

(ऐ ईमान वालो!) तुम यहूदियों और ईसाइयों के साथ सबसे अच्छे एवं आदर्श तरीक़े से ही संवाद और वाद-विवाद करो, और वह उपदेश और स्पष्ट तर्कों के साथ इस्लाम की ओर बुलाना है। परंतु उनमें से जिन लोगों ने हठ और अहंकार के साथ अन्याय किया और तुम्हारे ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी, तो तुम उनसे लड़ाई करो, यहाँ तक कि वे इस्लाम ग्रहण कर लें या अपमानित होकर 'जिज़्या' अदा करें। तथा यहूदियों एवं ईसाइयों से कहो : हम उस क़ुरआन पर ईमान रखते हैं, जो अल्लाह ने हमारी ओर उतारा है, तथा हम उस तौरात एवं इंजील पर भी ईमान रखते हैं, जो तुम्हारी ओर उतारे गए हैं। तथा हमारा और तुम्हारा पूज्य एक ही है, जिसकी पूज्यता, परमेश्वरत्व और पूर्णता में उसका कोई साझीदार नहीं है। और हम अकेले उसी के प्रति आज्ञाकारी और विनम्र हैं।

29:47Page 402

وَكَذَٰلِكَ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَۚ فَٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يُؤۡمِنُونَ بِهِۦۖ وَمِنۡ هَٰٓؤُلَآءِ مَن يُؤۡمِنُ بِهِۦۚ وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَّا ٱلۡكَٰفِرُونَ ٤٧

And thus We have sent down to you the Book [i.e., the Qur’ān]. And those to whom We [previously] gave the Scripture believe in it. And among these [people of Makkah] are those who believe in it. And none reject Our verses except the disbelievers.

जिस तरह हमने आपसे पहले के नबियों पर किताबें उतारी थीं, उसी तरह हमने आप पर क़ुरआन उतारा है। तो तौरात पढ़ने वालों में से कुछ लोग (जैसे कि अब्दुल्लाह बिन सलाम) इसपर ईमान रखते हैं; क्योंकि वे अपनी किताबों में आपका विवरण पाते हैं। तथा इन मुश्रिकों में से भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो इसपर ईमान रखते हैं। और हमारी आयतों का इनकार केवल वही काफ़िर करते हैं, जो सत्य के स्पष्ट होने के बावजूद उसके इनकार के रास्ते पर चलने के आदी हैं।

29:48Page 402

وَمَا كُنتَ تَتۡلُواْ مِن قَبۡلِهِۦ مِن كِتَٰبٖ وَلَا تَخُطُّهُۥ بِيَمِينِكَۖ إِذٗا لَّٱرۡتَابَ ٱلۡمُبۡطِلُونَ ٤٨

And you did not recite before it any scripture, nor did you inscribe one with your right hand. Then [i.e., otherwise] the falsifiers would have had [cause for] doubt.

और (ऐ रसूल) आप क़ुरआन से पहले न कोई किताब पढ़ेते थे और न अपने दाहिने हाथ से कुछ लिखते थे। क्योंकि आप 'उम्मी' (अनपढ़) हैं, लिखना और पढ़ना नहीं जानते हैं।और अगर आप पढ़ना और लिखना जानते होते, तो अज्ञानी लोग आपकी नुबुव्वत के बारे में अवश्य संदेह करते और यह तर्क देते कि आप पिछली किताबों की बातें लिखा करते थे।

29:49Page 402

بَلۡ هُوَ ءَايَٰتُۢ بَيِّنَٰتٞ فِي صُدُورِ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡعِلۡمَۚ وَمَا يَجۡحَدُ بِـَٔايَٰتِنَآ إِلَّا ٱلظَّٰلِمُونَ ٤٩

Rather, it [i.e., the Qur’ān] is distinct verses [preserved] within the breasts of those who have been given knowledge. And none reject Our verses except the wrongdoers.

बल्कि आप पर उतरने वाला क़ुरआन स्पष्ट आयतों पर आधारित है, जो उन ईमान वाले लोगों के दिलों में सुरक्षित है, जिन्हें ज्ञान दिया गया है। और हमारी आयतों का इनकार केवल वही लोग करते हैं, जो अल्लाह के साथ कुफ़्र और शिर्क करके अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।

29:50Page 402

وَقَالُواْ لَوۡلَآ أُنزِلَ عَلَيۡهِ ءَايَٰتٞ مِّن رَّبِّهِۦۚ قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡأٓيَٰتُ عِندَ ٱللَّهِ وَإِنَّمَآ أَنَا۠ نَذِيرٞ مُّبِينٌ ٥٠

But they say, "Why are not signs sent down to him from his Lord?" Say, "The signs are only with Allāh, and I am only a clear warner."

और मुश्रिकों ने कहा : मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उनके पालनहार की ओर से कुछ निशानियाँ (चमत्कार) क्यों नहीं उतारी गईं, जैसे कि उनसे पहले के रसूलों पर उतारी गई थीं? (ऐ रसूल!) आप इन प्रस्तावकों से कह दें : निशानियाँ तो केवल अल्लाह के हाथ में हैं, वह जब चाहे उन्हें उतारता है। उन्हें उतारना मेरा काम नहीं है। मैं तो मात्र तुम्हें, स्पष्ट रूप से, अल्लाह की यातना से डराने वाला हूँ।

29:51Page 402

أَوَلَمۡ يَكۡفِهِمۡ أَنَّآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ يُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَرَحۡمَةٗ وَذِكۡرَىٰ لِقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ ٥١

And is it not sufficient for them that We revealed to you the Book [i.e., the Qur’ān] which is recited to them? Indeed in that is a mercy and reminder for a people who believe.

क्या निशानियों का प्रस्ताव देने वाले इन लोगों के लिए यह काफ़ी नहीं है कि हमने (ऐ रसूल) आपपर क़ुरआन उतारा है, जो उनके सामने पढ़ा जाता है? निःसंदेह उनपर उतरने वाले क़ुरआन में उन लोगों के लिए दया और उपदेश है, जो ईमान रखते हैं। क्योंकि वही लोग क़ुरआन की शिक्षाओं से लाभान्वित होते हैं। इसलिए जो कुछ उनपर उतारा गया है, वह उनके द्वारा सुझाई गई पिछले रसूलों पर उतरने वाली निशानियों से कहीं बेहतर है।

29:52Page 402

قُلۡ كَفَىٰ بِٱللَّهِ بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡ شَهِيدٗاۖ يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۗ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱلۡبَٰطِلِ وَكَفَرُواْ بِٱللَّهِ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ ٥٢

Say, "Sufficient is Allāh between me and you as Witness. He knows what is in the heavens and earth. And they who have believed in falsehood and disbelieved in Allāh - it is those who are the losers."

(ऐ रसूल) आप कह दें : मैं जो कुछ लेकर आया हूँ, उसमें मेरी सच्चाई पर तथा तुम्हारे उसे झुठलाने पर अल्लाह गवाह के तौर पर काफ़ी है। वह आकाशों में मौजूद सारी चीज़ों और धरती की सारी चीज़ों को जानता है। उन दोनों में से कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। तथा जिन लोगों ने असत्य अर्थात् अल्लाह के अलावा पूजी जाने वाली प्रत्येक चीज़ को माना और एकमात्र इबादत के हक़दार अल्लाह का इनकार किया, वही लोग घाटे में पड़ने वाले हैं, क्योंकि उन्होंने ईमान के बदले कुफ़्र को चुना है।

29:53Page 403

وَيَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ وَلَوۡلَآ أَجَلٞ مُّسَمّٗى لَّجَآءَهُمُ ٱلۡعَذَابُۚ وَلَيَأۡتِيَنَّهُم بَغۡتَةٗ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ ٥٣

And they urge you to hasten the punishment. And if not for [the decree of] a specified term, punishment would have reached them. But it will surely come to them suddenly while they perceive not.

(ऐ रसूल) आपने मुश्रिकों को जिस यातना से डराया है, वे आपसे उसके लिए जल्दी मचा रहे हैं। अगर अल्लाह ने उनकी यातना के लिए एक समय निर्धारित न किया होता, जिससे वह आगे-पीछे नहीं हो सकती, तो उनके पास वह यातना अवश्य आ जाती, जिसकी वे माँग कर रहे हैं। तथा निश्चित रूप से वह उनपर अचानक अवश्य आएगी, जबकि उन्हें उसका अनुमान भी न होगा।

29:54Page 403

يَسۡتَعۡجِلُونَكَ بِٱلۡعَذَابِ وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمُحِيطَةُۢ بِٱلۡكَٰفِرِينَ ٥٤

They urge you to hasten the punishment. And indeed, Hell will be encompassing of the disbelievers

वे लोग आपसे उस यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं, जिसका आपने उनसे वादा किया है। हालाँकि जहन्नम, जिसका अल्लाह ने काफ़िरों से वादा किया है, निश्चित रूप से उन्हें घेरने वाला है, जिसकी यातना से वे बच नहीं सकते।

29:55Page 403

يَوۡمَ يَغۡشَىٰهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِن فَوۡقِهِمۡ وَمِن تَحۡتِ أَرۡجُلِهِمۡ وَيَقُولُ ذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٥٥

On the Day the punishment will cover them from above them and from below their feet and it is said, "Taste [the result of] what you used to do."

जिस दिन यातना उन्हें उनके ऊपर से ढाँप लेगी और उनके पैरों के नीचे उनके लिए बिस्तर बन जाएगी, और अल्लाह उन्हें फटकारते हुए कहेगा : तुम जो शिर्क और पाप किया करते थे, उसका प्रतिफल चखो।

29:56Page 403

يَٰعِبَادِيَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ أَرۡضِي وَٰسِعَةٞ فَإِيَّٰيَ فَٱعۡبُدُونِ ٥٦

O My servants who have believed, indeed My earth is spacious, so worship only Me.

ऐ मेरे बंदो जो मुझपर ईमान लाए हो, उस धरती से हिजरत (पलायन) कर जाओ, जहाँ तुम मेरी इबादत नहीं कर सकते। निःसंदेह मेरी धरती विशाल है। इसलिए अकेले मेरी ही इबादत करो और किसी को भी मेरा साझी न बनाओ।

29:57Page 403

كُلُّ نَفۡسٖ ذَآئِقَةُ ٱلۡمَوۡتِۖ ثُمَّ إِلَيۡنَا تُرۡجَعُونَ ٥٧

Every soul will taste death. Then to Us will you be returned.

मृत्यु का डर तुम्हें हिजरत से न रोके। क्योंकि हर प्राणी मृत्यु का स्वाद चखने वाला है। फिर तुम्हें क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए हमारे ही पास लौटकर आना है।

29:58Page 403

وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ لَنُبَوِّئَنَّهُم مِّنَ ٱلۡجَنَّةِ غُرَفٗا تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ نِعۡمَ أَجۡرُ ٱلۡعَٰمِلِينَ ٥٨

And those who have believed and done righteous deeds - We will surely assign to them of Paradise [elevated] chambers beneath which rivers flow, wherein they abide eternally. Excellent is the reward of the [righteous] workers

जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उससे निकट करने वाले अच्छे कार्य किए, हम उन्हें जन्नत में ऊँचे-ऊँचे भवनों में निवास देंगे, जिनके नीचे से नहरे बहती हैं। वे उनमें हमेशा के लिए रहेंगे, उनमें उन्हें विनाश का सामना नहीं होगा। अल्लाह की आज्ञा के अनुसार काम करने वालों का यह क्या ही अच्छा बदला है।

29:59Page 403

ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَعَلَىٰ رَبِّهِمۡ يَتَوَكَّلُونَ ٥٩

Who have been patient and upon their Lord rely.

अल्लाह की आज्ञा का पालन करने वाले उन लोगों का बदला क्या ही अच्छा है, जिन्होंने उसकी आज्ञाकारिता पर और उसकी अवज्ञा से बचने पर धैर्य से काम लिया, तथा वे अपने सभी कामों में केवल अपने पालनहार ही पर भरोसा रखते हैं।

29:60Page 403

وَكَأَيِّن مِّن دَآبَّةٖ لَّا تَحۡمِلُ رِزۡقَهَا ٱللَّهُ يَرۡزُقُهَا وَإِيَّاكُمۡۚ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ ٦٠

And how many a creature carries not its [own] provision. Allāh provides for it and for you. And He is the Hearing, the Knowing.

धरती पर चलने वाले सभी जानवर - अपनी बहुतायत के बावजूद - जो अपनी रोज़ी एकत्र नहीं कर सकते और न ही उसे उठा सकते हैं, अल्लाह उन्हें जीविका प्रदान करता है और तुम्हें भी जीविका प्रदान करता है। इसलिए तुम्हारे लिए भूख के डर से हिजरत छोड़ने के लिए कोई बहाना नहीं है। वह तुम्हारी बातों को सुनने वाला, तुम्हारे इरादों और कार्यों को जानने वाला है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।

29:61Page 403

وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۖ فَأَنَّىٰ يُؤۡفَكُونَ ٦١

If you asked them, "Who created the heavens and earth and subjected the sun and the moon?" they would surely say, "Allāh." Then how are they deluded?

(ऐ रसूल) यदि आप इन मुश्रिकों से पूछें कि आकाशों को किसने पैदा किया? और धरती को किसने पैदा किया? तथा सूर्य और चाँद को किसने वशीभूत किया, जो एक-दूसरे के बाद आते-जाते हैं? तो वे अवश्य कहेंगे : उन्हें अल्लाह ने पैदा किया है। तो फिर वे अकेले अल्लाह पर ईमान लाने से कैसे फेर दिए जाते हैं और उसके सिवा ऐसे देवताओं की पूजा करते हैं, जो किसी लाभ या हानि के मालिक नहीं हैं?

29:62Page 403

ٱللَّهُ يَبۡسُطُ ٱلرِّزۡقَ لِمَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦ وَيَقۡدِرُ لَهُۥٓۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ ٦٢

Allāh extends provision for whom He wills of His servants and restricts for him. Indeed Allāh is, of all things, Knowing.

अल्लाह अपने बंदों में से जिसपर चाहता है जीविका का विस्तार कर देता है और जिसपर चाहता है जीविका तंग कर देता है; वह ऐसा किसी हिकमत के तहत करता है जिसे वही जानता है। निःसंदेह अल्लाह हर चीज़ को अच्छी तरह जानने वाला है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है। इसलिए उसके बंदों के लिए उपयुक्त कोई भी उपाय उससे गुप्त नहीं है।

29:63Page 403

وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّن نَّزَّلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَحۡيَا بِهِ ٱلۡأَرۡضَ مِنۢ بَعۡدِ مَوۡتِهَا لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۚ قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ ٦٣

And if you asked them, "Who sends down rain from the sky and gives life thereby to the earth after its lifelessness?" they would surely say, "Allāh." Say, "Praise to Allāh"; but most of them do not reason.

और (ऐ रसूल) यदि आप मुश्रिकों से पूछें : किसने आकाश से बारिश बरसाई, फिर उसके द्वारा धरती पर पौधे उगा दिए, जबकि वह बंजर पड़ी थी? तो वे अवश्य कहेंगे : आसमान से बारिश बरसाने वाला और धरती पर पौधे उगाने वाला अल्लाह है। (ऐ रसलू) आप कह दें : हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने तुम्हारे खिलाफ तर्क को स्पष्ट कर दिया। बल्कि बात यह है कि उनमें से अधिकतर लोग नहीं समझते हैं। क्योंकि अगर वे समझते होते, तो उन मूर्तियों को अल्लाह का साझी न बनाते, जो न लाभ पहुँचा सकती हैं और न हानि।

29:64Page 404

وَمَا هَٰذِهِ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَآ إِلَّا لَهۡوٞ وَلَعِبٞۚ وَإِنَّ ٱلدَّارَ ٱلۡأٓخِرَةَ لَهِيَ ٱلۡحَيَوَانُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ ٦٤

And this worldly life is not but diversion and amusement. And indeed, the home of the Hereafter - that is the [eternal] life, if only they knew.

और यह सांसारिक जीवन (जिसमें उसकी मनपसंद चीज़ें और लाभ के सामान शामिल हैं) उन लोगों के दिलों के लिए, जो इससे चिपके हुए हैं, केवल मनोरंजन और खेल है, जो जल्द ही समाप्त हो जाता है। और निश्चित रूप से आखिरत का घर ही वास्तविक जीवन है, क्योंकि वही बाक़ी रहने वाला है। अगर वे इस तथ्य से अवगत होते, तो नाश होने वाले को बाक़ी रहने वाले पर प्राथमिकता न देते।

29:65Page 404

فَإِذَا رَكِبُواْ فِي ٱلۡفُلۡكِ دَعَوُاْ ٱللَّهَ مُخۡلِصِينَ لَهُ ٱلدِّينَ فَلَمَّا نَجَّىٰهُمۡ إِلَى ٱلۡبَرِّ إِذَا هُمۡ يُشۡرِكُونَ ٦٥

And when they board a ship, they supplicate Allāh, sincere to Him in religion [i.e., faith and hope]. But when He delivers them to the land, at once they associate others with Him

जब मुश्रिक लोग समुद्र में नौकाओं पर सवार होते हैं, तो निष्ठापूर्वक अकेले अल्लाह ही को पुकारते हैं कि उन्हें डूबने से बचा ले। फिर जब वह उन्हें डूबने से बचा लेता है, तो वे बहुदेववादी हो जाते हैं उसके साथ अपने देवताओं को पुकारने लगते हैं।

29:66Page 404

لِيَكۡفُرُواْ بِمَآ ءَاتَيۡنَٰهُمۡ وَلِيَتَمَتَّعُواْۚ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ ٦٦

So that they will deny what We have granted them, and they will enjoy themselves. But they are going to know.1

वे बहुदेववादी हो जाते हैं, ताकि हमारी दी हुई नेमतों की नाशुक्री करें और सांसारिक जीवन की शोभा का आनंद लें। अतः जब वे मरेंगे तो अपने बुरे परिणाम को जान लेंगे।

29:67Page 404

أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا جَعَلۡنَا حَرَمًا ءَامِنٗا وَيُتَخَطَّفُ ٱلنَّاسُ مِنۡ حَوۡلِهِمۡۚ أَفَبِٱلۡبَٰطِلِ يُؤۡمِنُونَ وَبِنِعۡمَةِ ٱللَّهِ يَكۡفُرُونَ ٦٧

Have they not seen that We made [Makkah] a safe sanctuary, while people are being taken away1 all around them? Then in falsehood do they believe, and in the favor of Allāh they disbelieve?

क्या अपने ऊपर अल्लाह की नेमत का इनकार करने वाले इन लोगों ने, जब अल्लाह ने उन्हें डूबने से बचाया था, उसकी एक और नेमत को नहीं देखा; जो यह है कि हमने उनके लिए एक हरम बनाया है, जिसमें उनके रक्त और धन सुरक्षित रहते हैं, जबकि उनके अलावा दूसरे लोगों पर हमले किए जाते हैं, फिर उन्हें मार दिया जाता है, तथा उन्हें पकड़ लिया जाता है और उनकी पत्नियों और बच्चों को बंदी बना लिया जाता है और उनके धनों को लूट लिया जाता है। क्या (फिर भी) वे अपने तथाकथित असत्य पूज्यों पर ईमान रखते हैं और अपने ऊपर अल्लाह की नेमत (कृपा) का इनकार करते हैं, इसलिए उसपर अल्लाह का शुक्रिया अदा नहीं करते हैं?!

29:68Page 404

وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَوۡ كَذَّبَ بِٱلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُۥٓۚ أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡكَٰفِرِينَ ٦٨

And who is more unjust than one who invents a lie about Allāh or denies the truth when it has come to him? Is there not in Hell a [sufficient] residence for the disbelievers?

उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कोई नहीं है, जिसने अल्लाह पर झूठ गढ़कर उसके लिए साझीदार ठहराया, या उस सत्य को झुठला दिया जो उसका रसूल लेकर आया है। इसमें कोई शक नहीं है कि जहन्नम में काफ़िरों और उन जैसे लोगों के लिए एक निवास स्थान है।

29:69Page 404

وَٱلَّذِينَ جَٰهَدُواْ فِينَا لَنَهۡدِيَنَّهُمۡ سُبُلَنَاۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَمَعَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٦٩

And those who strive for Us - We will surely guide them to Our ways.1 And indeed, Allāh is with the doers of good.

जिन लोगों ने हमारी प्रसन्नता की खोज में अपने आपसे संघर्ष किया, हम उन्हें सीधे रास्ते पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करेंगे। और निःसंदेह अल्लाह सहायता, समर्थन और मार्गदर्शन के साथ नेकी करने वालों के साथ है।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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