Al-MukhtasarAli 'Imran · 3:36–72

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

Ali 'Imran 3:36–72

3:36Page 54

فَلَمَّا وَضَعَتۡهَا قَالَتۡ رَبِّ إِنِّي وَضَعۡتُهَآ أُنثَىٰ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا وَضَعَتۡ وَلَيۡسَ ٱلذَّكَرُ كَٱلۡأُنثَىٰۖ وَإِنِّي سَمَّيۡتُهَا مَرۡيَمَ وَإِنِّيٓ أُعِيذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ ٱلرَّجِيمِ ٣٦

But when she delivered her, she said, "My Lord, I have delivered a female." And Allāh was most knowing of what she delivered, and the male is not like the female. "And I have named her Mary, and I seek refuge for her in You and [for] her descendants from Satan, the expelled [from the mercy of Allāh]."

फिर जब उनका गर्भ पूरा हो गया, तो उन्होंने उसे जन दिया जो उनके पेट में था और (वह उम्मीद कर रही थीं कि गर्भ पुरुष होगा, इसलिए) क्षमा चाहते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! यह तो मैंने बच्ची जनी है! और अल्लाह ज़्यादा जानने वाला है जो उन्होंने जना, और वह लड़का जिसकी वह आशा कर रही थीं, शक्ति और संरचना में उस लड़की के समान नहीं, जो उन्हें दी गई थी। तथा मैंने उसका नाम मरयम रखा है और मैंने उसे और उसकी संतान को तेरी दया से निष्कासित शैतान से तेरे संरक्षण में दे दिया है।

3:37Page 54

فَتَقَبَّلَهَا رَبُّهَا بِقَبُولٍ حَسَنٖ وَأَنۢبَتَهَا نَبَاتًا حَسَنٗا وَكَفَّلَهَا زَكَرِيَّاۖ كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيۡهَا زَكَرِيَّا ٱلۡمِحۡرَابَ وَجَدَ عِندَهَا رِزۡقٗاۖ قَالَ يَٰمَرۡيَمُ أَنَّىٰ لَكِ هَٰذَاۖ قَالَتۡ هُوَ مِنۡ عِندِ ٱللَّهِۖ إِنَّ ٱللَّهَ يَرۡزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيۡرِ حِسَابٍ ٣٧

So her Lord accepted her with good acceptance and caused her to grow in a good manner and put her in the care of Zechariah. Every time Zechariah entered upon her in the prayer chamber, he found with her provision. He said, "O Mary, from where is this [coming] to you?" She said, "It is from Allāh. Indeed, Allāh provides for whom He wills without account."

अल्लाह ने उनकी मन्नत को अच्छी तरह स्वीकार किया, और उन (मरयम) का अच्छी तरह पालन-पोषण किया, और अपने नेक बंदों के दिलों में उनके प्रति सहानुभूति पैदा कर दी और उनका अभिभावक ज़करिय्या अलैहिस्सलाम को बना दिया। जब भी ज़करिय्या अलैहिस्सलाम उनके पास उपासना स्थल में प्रवेश करते, उनके पास अच्छी-अच्छी खाने की चीज़ें पाते। यह देखकर ज़करिय्या अलैहिस्सलाम को आश्चर्य हुआ और मरयम को संबोधित करते हुए कहा : ऐ मरयम! तुम्हें यह जीविका कहाँ से मिली? उन्होंने उत्तर देते हुए कहा : यह जीविका अल्लाह की ओर से है। नि:संदेह अल्लाह जिसे चाहता है किसी हिसाब के बिना विस्तृत रोज़ी प्रदान करता है।

3:38Page 55

هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُۥۖ قَالَ رَبِّ هَبۡ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةٗ طَيِّبَةًۖ إِنَّكَ سَمِيعُ ٱلدُّعَآءِ ٣٨

At that, Zechariah called upon his Lord, saying, "My Lord, grant me from Yourself a good offspring. Indeed, You are the Hearer of supplication."

उसी समय, जब ज़करिय्या ने मरयम बिन्त इमरान के पास जीविका में अल्लाह के सामान्य नियम के विपरीत अल्लाह की जीविका देखी, तो उनके अंदर यह आशा पैदा हुई कि उनकी वृद्धावस्था और उनकी पत्नी के बाँझपन की स्थिति के बावजूद अल्लाह उन्हें संतान दे सकता है। चुनाँचे उन्होंने प्रार्थना की : ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक अच्छी संतान प्रदान कर। निःसंदेह तू प्रार्थना करने वाले की प्रार्थना सुनने वाला और उसे क़बूल करने वाला है।

3:39Page 55

فَنَادَتۡهُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ وَهُوَ قَآئِمٞ يُصَلِّي فِي ٱلۡمِحۡرَابِ أَنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكَ بِيَحۡيَىٰ مُصَدِّقَۢا بِكَلِمَةٖ مِّنَ ٱللَّهِ وَسَيِّدٗا وَحَصُورٗا وَنَبِيّٗا مِّنَ ٱلصَّٰلِحِينَ ٣٩

So the angels called him while he was standing in prayer in the chamber, "Indeed, Allāh gives you good tidings of John, confirming a word1 from Allāh and [who will be] honorable, abstaining [from women], and a prophet from among the righteous."

फ़रिश्तों ने उन्हें संबोधित करते हुए, जबकि वह अपने उपासना स्थल में नमाज़ पढ़ रहे थे, आवाज़ देकर कहा : अल्लाह तुम्हें एक पुत्र की शुभ सूचना देता है जो आपके हाँ पैदा होगा, जिसका नाम 'यह़या' होगा। उसकी विशेषता यह होगी कि वह 'अल्लाह के शब्द' अर्थात् मरयम के पुत्र ईसा की पुष्टि करने वाला होगा। (ईसा को 'अल्लाह का शब्द' इसलिए कहा गया क्योंकि वह एक विशेष तरीक़े से अल्लाह के एक शब्द ('कुन' यानी 'हो जा') से पैदा हुए थे) और यह लड़का ज्ञान तथा इबादत में अपने समुदाय का सरदार होगा, खुद को इच्छाओं से रोकने वाला होगा, जिनमें महिलाओं के निकट जाना भी शामिल है, अपने पालनहार की इबादत के लिए पूर्ण रूप से समर्पित होगा। तथा वह सदाचारियों में से एक नबी - भी - होगा।

3:40Page 55

قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَٰمٞ وَقَدۡ بَلَغَنِيَ ٱلۡكِبَرُ وَٱمۡرَأَتِي عَاقِرٞۖ قَالَ كَذَٰلِكَ ٱللَّهُ يَفۡعَلُ مَا يَشَآءُ ٤٠

He said, "My Lord, how will I have a boy when I have reached old age and my wife is barren?" He [the angel] said, "Such is Allāh; He does what He wills."

जब फरिश्तों ने ज़करिय्या को यह़्या की ख़ुशख़बरी दी, तो उन्होंने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे हाँ लड़का कैसे हो सकता है, जबकि मैं बूढ़ा हो चुका हूँ और मेरी पत्नी बाँझ है, उसके बच्चे नहीं होते?! तो अल्लाह ने उसे उत्तर देते हुए फरमाया : तुम्हारे बुढ़ापे और तुम्हारी पत्नी के बाँझपन के बावजूद, यह़या को पैदा करने का उदाहरण; अल्लाह के सामान्य नियम के विपरीत अन्य चीज़ों को पैदा करने की तरह है। क्योंकि अल्लाह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है। वह अपनी हिकमत तथा ज्ञान के अनुसार जो चाहता है, करता है।

3:41Page 55

قَالَ رَبِّ ٱجۡعَل لِّيٓ ءَايَةٗۖ قَالَ ءَايَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ ٱلنَّاسَ ثَلَٰثَةَ أَيَّامٍ إِلَّا رَمۡزٗاۗ وَٱذۡكُر رَّبَّكَ كَثِيرٗا وَسَبِّحۡ بِٱلۡعَشِيِّ وَٱلۡإِبۡكَٰرِ ٤١

He said, "My Lord, make for me a sign." He said, "Your sign is that you will not [be able to] speak to the people for three days except by gesture. And remember your Lord much and exalt [Him with praise] in the evening and the morning."

ज़करिय्या ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए इस बात की कोई निशानी बना दे कि मेरी पत्नी मुझसे गर्भवती है। अल्लाह ने कहा : तुमने जो निशानी माँगी है, वह यह है कि : तुम तीन दिन और तीन रात लोगों से बात नहीं कर सकते, सिवाय इशारा इत्यादि करके, जबकि तुम किसी दोष से पीड़ित नहीं होगे। अतः तुम दिन के अंत और उसकी शुरुआत में अधिक से अधिक अल्लाह को याद करो और उसकी पवित्रता का वर्णन करो।

3:42Page 55

وَإِذۡ قَالَتِ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرۡيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ ٱصۡطَفَىٰكِ وَطَهَّرَكِ وَٱصۡطَفَىٰكِ عَلَىٰ نِسَآءِ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٤٢

And [mention] when the angels said, "O Mary, indeed Allāh has chosen you and purified you and chosen you above the women of the worlds.

(ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब फ़रिश्तों ने मरयम अलैहस्सलाम से कहा : अल्लाह ने तुम्हें तुम्हारे प्रशंसनीय गुणों के कारण चुन लिया है, तुम्हें कमियों से शुद्ध किया है तथा तुम्हें तुम्हारे समय में सारी दुनिया की महिलाओं के ऊपर चुन लिया है।

3:43Page 55

يَٰمَرۡيَمُ ٱقۡنُتِي لِرَبِّكِ وَٱسۡجُدِي وَٱرۡكَعِي مَعَ ٱلرَّٰكِعِينَ ٤٣

O Mary, be devoutly obedient to your Lord and prostrate and bow with those who bow [in prayer]."

ऐ मरयम! नमाज़ में लंबे समय तक खड़ी रहो, अपने पालनहार को सजदा करो और उसके रुकू करने वाले नेक बंदों के साथ रुकू करो।

3:44Page 55

ذَٰلِكَ مِنۡ أَنۢبَآءِ ٱلۡغَيۡبِ نُوحِيهِ إِلَيۡكَۚ وَمَا كُنتَ لَدَيۡهِمۡ إِذۡ يُلۡقُونَ أَقۡلَٰمَهُمۡ أَيُّهُمۡ يَكۡفُلُ مَرۡيَمَ وَمَا كُنتَ لَدَيۡهِمۡ إِذۡ يَخۡتَصِمُونَ ٤٤

That is from the news of the unseen which We reveal to you, [O Muḥammad]. And you were not with them when they cast their pens1 as to which of them should be responsible for Mary. Nor were you with them when they disputed.

ज़करिय्या और मरयम अलैहिमस्सलाम के बारे में उपर्युक्त बातें परोक्ष (ग़ैब) की खबरों में से हैं, जो हम (ऐ रसूल!) आपकी ओर वह़्य करते हैं। और आप उन विद्वानों और नेक लोगों के पास उस समय उपस्थित नहीं थे, जब उन्होंने इस बारे में झगड़ा किया था कि मरयम के पालन-पोषण का अधिक योग्य कौन है, यहाँ तक कि उन्हें क़ुर'आ-अंदाज़ी का सहारा लेना पड़ा। चुनाँचे उन्होंने अपनी क़लमों को डाला, तो ज़करिय्या अलैहिस्सलाम की क़लम जीत गई।

3:45Page 55

إِذۡ قَالَتِ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَٰمَرۡيَمُ إِنَّ ٱللَّهَ يُبَشِّرُكِ بِكَلِمَةٖ مِّنۡهُ ٱسۡمُهُ ٱلۡمَسِيحُ عِيسَى ٱبۡنُ مَرۡيَمَ وَجِيهٗا فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِ وَمِنَ ٱلۡمُقَرَّبِينَ ٤٥

[And mention] when the angels said, "O Mary, indeed Allāh gives you good tidings of a word1 from Him, whose name will be the Messiah, Jesus, the son of Mary - distinguished in this world and the Hereafter and among those brought near [to Allāh].

(ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब फ़रिश्तों ने कहा : ऐ मरयम! अल्लाह तुम्हें एक ऐसे लड़के की ख़ुशख़बरी देता है, जिसकी रचना बिना पिता के होगी। उसकी रचना अल्लाह के एक शब्द से होगी, इस प्रकार कि वह कहेगा : "कुन" (हो जा) तो वह अल्लाह की आज्ञा से एक पुत्र हो जाएगा। उस बच्चे का नाम : 'मसीह ईसा बिन मरयम' है। उसका दुनिया और आख़िरत में एक महान स्थान होगा और वह अल्लाह के निकटवर्तियों में से होगा।

3:46Page 56

وَيُكَلِّمُ ٱلنَّاسَ فِي ٱلۡمَهۡدِ وَكَهۡلٗا وَمِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ ٤٦

He will speak to the people in the cradle and in maturity and will be of the righteous."

वह बात करने की आयु से पहले, शैशवावस्था ही में लोगों से बात करेगा और उस समय भी बात करेगा जब वह बड़ा हो जाएगा, उसकी शक्ति और उसका पुरुषत्व परिपूर्ण हो जाएगा। वह उन्हें ऐसी बातों के साथ संबोधित करेगा जिनमें उनके धार्मिक और सांसारिक मामलों की भलाई होगी। तथा वह अपने कथनों एवं कार्यों में सदाचारी लोगों में से होगा।

3:47Page 56

قَالَتۡ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي وَلَدٞ وَلَمۡ يَمۡسَسۡنِي بَشَرٞۖ قَالَ كَذَٰلِكِ ٱللَّهُ يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ إِذَا قَضَىٰٓ أَمۡرٗا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ ٤٧

She said, "My Lord, how will I have a child when no man has touched me?" [The angel] said, "Such is Allāh; He creates what He wills. When He decrees a matter, He only says to it, 'Be,' and it is.

मरयम ने इस बात से आश्चर्यचकित होकर कि उनके हाँ बिना पति के एक बेटा होगा, कहा : मेरे हाँ पुत्र कैसे होगा, जबकि कोई मनुष्य वैध अथवा अवैध तरीक़े से मेरे पास नहीं आया?! फ़रिश्ते ने उनसे कहा : जिस तरह अल्लाह तुम्हारे हाँ बिना बाप के लड़का पैदा करेगा, उसी तरह वह जो चाहता है, सामान्य नियम के विपरीत पैदा करता है। इसलिए जब वह किसी काम का इरादा कर लेता है, तो उससे कहता है : "हो जा" तो वह हो जाता है। अतः उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।

3:48Page 56

وَيُعَلِّمُهُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَٱلتَّوۡرَىٰةَ وَٱلۡإِنجِيلَ ٤٨

And He will teach him writing and wisdom1 and the Torah and the Gospel

अल्लाह उन्हें लिखना तथा कथन एवं कार्य में शुद्धता सिखाएगा, तथा उन्हें वह तौरात सिखाएगा, जिसे उसने मूसा अलैहिस्सलाम पर उतारा, और उन्हें उस इंजील की शिक्षा देगा, जो वह उनपर अवतरित करेगा।

3:49Page 56

وَرَسُولًا إِلَىٰ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ أَنِّي قَدۡ جِئۡتُكُم بِـَٔايَةٖ مِّن رَّبِّكُمۡ أَنِّيٓ أَخۡلُقُ لَكُم مِّنَ ٱلطِّينِ كَهَيۡـَٔةِ ٱلطَّيۡرِ فَأَنفُخُ فِيهِ فَيَكُونُ طَيۡرَۢا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۖ وَأُبۡرِئُ ٱلۡأَكۡمَهَ وَٱلۡأَبۡرَصَ وَأُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰ بِإِذۡنِ ٱللَّهِۖ وَأُنَبِّئُكُم بِمَا تَأۡكُلُونَ وَمَا تَدَّخِرُونَ فِي بُيُوتِكُمۡۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لَّكُمۡ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ ٤٩

And [make him] a messenger to the Children of Israel, [who will say], 'Indeed I have come to you with a sign from your Lord in that I design for you from clay [that which is] like the form of a bird, then I breathe into it and it becomes a bird by permission of Allāh. And I cure the blind [from birth] and the leper, and I give life to the dead - by permission of Allāh. And I inform you of what you eat and what you store in your houses. Indeed in that is a sign for you, if you are believers.

और (इसी प्रकार) अल्लाह उन्हें बनी इसराईल की ओर रसूल बनाकर भेजेगा। वह उनसे कहेंगे : मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ। मैं तुम्हारे पास ऐसी निशानी लाया हूँ, जो मेरी नुबुव्वत की सत्यता को प्रमाणित करने वाली है। जो यह है कि : मैं तुम्हारे लिए मिट्टी से पक्षी के रूप का एक आकार बनाता हूँ, फिर उसमें फूँक मारता हूँ, तो वह अल्लाह की अनुमति से जीवित पक्षी बन जाता है। और मैं चंगा कर देता हूँ उस व्यक्ति को जो जन्मजात अंधा है, तो वह देखने लगता है और उस व्यक्ति को जो कोढ़ से पीड़ित है, तो उसकी त्वचा ठीक हो जाती है। और मैं मुर्दों को ज़िंदा कर देता हूँ। और यह सब अल्लाह की अनुमति से होता है। और मैं तुम्हें उसके बारे में भी बता देता हूँ, जो तुम अपने घरों में खाते हो और जो संग्रह करते और छिपाकर रखते हो। निःसंदेह इन महान चीज़ों में जिनका मैंने तुमसे उल्लेख किया है, जो मनुष्य नहीं कर सकते; निश्चय इस बात की स्पष्ट निशानी है कि मैं तुम्हारी ओर अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ, यदि तुम ईमान लाना चाहते हो और और प्रमाणों को सच्चा मानते हो।

3:50Page 56

وَمُصَدِّقٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيَّ مِنَ ٱلتَّوۡرَىٰةِ وَلِأُحِلَّ لَكُم بَعۡضَ ٱلَّذِي حُرِّمَ عَلَيۡكُمۡۚ وَجِئۡتُكُم بِـَٔايَةٖ مِّن رَّبِّكُمۡ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ٥٠

And [I have come] confirming what was before me of the Torah and to make lawful for you some of what was forbidden to you. And I have come to you with a sign from your Lord, so fear Allāh and obey me.

इसी प्रकार, मैं तुम्हारे पास अपने से पूर्व उतरी हुई पुस्तक तौरात की पुष्टि करने वाला बनकर आया हूँ। तथा मैं इसलिए आया हूँ, ताकि तुम्हारे लिए सुगम और आसान बनाने के लिए तुम्हारे लिए कुछ ऐसी चीज़ों को वैध कर दूँ, जो पहले तुमपर हराम की गई थीं। तथा जो कुछ मैंने तुमसे कहा है, उसकी सत्यता पर मैं तुम्हारे पास एक स्पष्ट तर्क लेकर आया हूँ। अतः अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरो और मैं जिस बात की ओर तुम्हें बुलाता हूँ, उसमें मेरी आज्ञा का पालन करो।

3:51Page 56

إِنَّ ٱللَّهَ رَبِّي وَرَبُّكُمۡ فَٱعۡبُدُوهُۚ هَٰذَا صِرَٰطٞ مُّسۡتَقِيمٞ ٥١

Indeed, Allāh is my Lord and your Lord, so worship Him. That is the straight path.'"

ऐसा इसलिए है क्योंकि अल्लाह ही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। चुनाँचे वही अकेली आज्ञा मानने और डरने के योग्य है। अतः तुम अकेले उसी की इबादत करो। यह जो मैंने तुम्हें अल्लाह की इबादत करने और उससे डरने का आदेश दिया है, यही सीधा मार्ग है, जिसमें कोई टेढ़ नहीं।

3:52Page 56

۞ فَلَمَّآ أَحَسَّ عِيسَىٰ مِنۡهُمُ ٱلۡكُفۡرَ قَالَ مَنۡ أَنصَارِيٓ إِلَى ٱللَّهِۖ قَالَ ٱلۡحَوَارِيُّونَ نَحۡنُ أَنصَارُ ٱللَّهِ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَٱشۡهَدۡ بِأَنَّا مُسۡلِمُونَ ٥٢

But when Jesus felt [persistence in] disbelief from them, he said, "Who are my supporters for [the cause of] Allāh?" The disciples said, "We are supporters for Allāh. We have believed in Allāh and testify that we are Muslims [submitting to Him].

जब ईसा अलैहिस्सलाम को उनके कुफ़्र पर आग्रह का आभास हुआ, तो उन्होंने बनी इसराईल को संबोधित करते हुए कहा : अल्लाह की ओर बुलाने में मेरी सहायता कौन करेगा? उनके अनुयायियों में से चुनिंदा लोगों ने कहा : हम अल्लाह के धर्म के समर्थक हैं। हम अल्लाह पर ईमान लाए और हमने आपका अनुसरण किया। और - ऐ ईसा! - आप गवाह रहें कि हम अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानते हुए और उसकी आज्ञाकारिता के साथ उसके अधीन हैं।

3:53Page 57

رَبَّنَآ ءَامَنَّا بِمَآ أَنزَلۡتَ وَٱتَّبَعۡنَا ٱلرَّسُولَ فَٱكۡتُبۡنَا مَعَ ٱلشَّٰهِدِينَ ٥٣

Our Lord, we have believed in what You revealed and have followed the messenger [i.e., Jesus], so register us among the witnesses [to truth]."

ह़वारियों ने यह भी कहा : ऐ हमारे पालनहार! हम उस इंजील पर ईमान लाए जो तूने उतारा तथा हमने ईसा अलैहिस्सलाम का अनुसरण किया। अतः तू हमें उन सत्य की गवाही देने वालों में शामिल कर ले, जो तुझपर और तेरे रसूलों पर ईमान लाए।

3:54Page 57

وَمَكَرُواْ وَمَكَرَ ٱللَّهُۖ وَٱللَّهُ خَيۡرُ ٱلۡمَٰكِرِينَ ٥٤

And they [i.e., the disbelievers] planned, but Allāh planned. And Allāh is the best of planners.

बनी इसराईल के काफिरों ने साजिश रची और उन्होंने ईसा अलैहिस्सलाम की हत्या करने का प्रयास किया। तो अल्लाह ने उनके खिलाफ गुप्त योजना बनाई। इसलिए उसने उन्हें उनकी गुमराही में छोड़ दिया और एक अन्य व्यक्ति को ईसा अलैहिस्सलाम से मिलता जुलता रूप-रंग प्रदान कर दिया। और अल्लाह योजना बनाने वालों में सबसे अच्छा है। क्योंकि अल्लाह अपने दुश्मनों के विरूद्ध जो योजना बनाता है, उससे बढ़कर किसी की योजना नहीं हो सकती।

3:55Page 57

إِذۡ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَىٰٓ إِنِّي مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَجَاعِلُ ٱلَّذِينَ ٱتَّبَعُوكَ فَوۡقَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِۖ ثُمَّ إِلَيَّ مَرۡجِعُكُمۡ فَأَحۡكُمُ بَيۡنَكُمۡ فِيمَا كُنتُمۡ فِيهِ تَخۡتَلِفُونَ ٥٥

[Mention] when Allāh said, "O Jesus, indeed I will take you and raise you to Myself and purify [i.e., free] you from those who disbelieve and make those who follow you [in submission to Allāh alone] superior to those who disbelieve until the Day of Resurrection. Then to Me is your return, and I will judge between you concerning that in which you used to differ.

अल्लाह ने उनके विरुद्ध उस समय भी योजना बनाई, जब उसने ईसा अलैहिस्सलाम को संबोधित करते हुए कहा : ऐ ईसा! मैं तुम्हें मृत्यु के बिना क़ब्ज़ कर लूँगा, और तुम्हारे शरीर और आत्मा को अपने पास उठा लूँगा, तथा तुम्हें उन लोगों की गंदगी से शुद्ध और उनसे दूर कर दूँगा, जिन्होंने तुम्हारे साथ कुफ़्र किया और उन लोगों को जिन्होंने सच्चे धर्म पर तुम्हारा अनुसरण किया - जिसमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान लाना भी शामिल है - प्रमाण और प्रभुत्व एवं गौरव के साथ क़ियामत के दिन तक उन लोगों के ऊपर कर दूँगा, जिन्होंने तुम्हारा इनकार किया। फिर तुम्हें क़ियामत के दिन मेरी ही ओर लौटकर आना है। तो मैं तुम्हारे बीच सच्चाई के साथ उस चीज़ के बारे में फैसला करूँगा, जिसमें तुम मतभेद किया करते थे।

3:56Page 57

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَأُعَذِّبُهُمۡ عَذَابٗا شَدِيدٗا فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّٰصِرِينَ ٥٦

And as for those who disbelieved, I will punish them with a severe punishment in this world and the Hereafter, and they will have no helpers."

जिन लोगों ने आपका और उस सत्य का इनकार किया जो आप उनके पास लेकर आए, तो मैं उन्हें दुनिया में क़त्ल, क़ैद तथा अपमान आदि के द्वारा, तथा आख़िरत में आग की यातना के द्वारा कठोर दंड दूँगा। और उनके पास कोई सहायक न होंगे, जो उनसे यातना दूर कर सकें।

3:57Page 57

وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَيُوَفِّيهِمۡ أُجُورَهُمۡۗ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلظَّٰلِمِينَ ٥٧

But as for those who believed and did righteous deeds, He will give them in full their rewards, and Allāh does not like the wrongdoers.

और जो लोग आपपर और उस सत्य पर ईमान लाए जो आप उनके पास लेकर आए, और नमाज़, ज़कात, रोज़ा और रिश्तेदारों के साथ सद्व्यवहार इत्यादि जैसे अच्छे कर्म किए; अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा, उसमें कुछ कमी नहीं करेगा। यह बात मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व से पहले मसीह के अनुयायियों के बारे में है, जिनकी स्वयं मसीह ने शुभ सूचना दी थी। और अल्लाह अत्याचारियों से प्रेम नहीं करता। और सबसे बड़ा अत्याचार अल्लाह के साथ किसी को साझी बनाना तथा उसके रसूलों को झुठलाना है।

3:58Page 57

ذَٰلِكَ نَتۡلُوهُ عَلَيۡكَ مِنَ ٱلۡأٓيَٰتِ وَٱلذِّكۡرِ ٱلۡحَكِيمِ ٥٨

This is what We recite to you, [O Muḥammad], of [Our] verses and the precise [and wise] message [i.e., the Qur’ān].

यह जो हम आपको ईसा अलैहिस्सलाम का समाचार पढ़कर सुना रहे हैं, इस बात को प्रमाणित करने वाली स्पष्ट निशानियों में से है कि आपकी ओर जो कुछ उतारा गया है वह सत्य है। तथा वह डरने वालों के लिए दृढ़ उपदेश है, जिसमें बातिल (असत्य) का समावेश नहीं हो सकता।

3:59Page 57

إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ ٱللَّهِ كَمَثَلِ ءَادَمَۖ خَلَقَهُۥ مِن تُرَابٖ ثُمَّ قَالَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ ٥٩

Indeed, the example of Jesus to Allāh1 is like that of Adam. He created him from dust; then He said to him, "Be," and he was.

निःसंदहे अल्लाह के निकट ईसा अलैहिस्सलाम को पैदा करने का उदाहरण, आदम अलैहिस्सलाम को, बिना पिता और माता के, थोड़ी-सी मिट्टी से पैदा करन की तरह है। केवल अल्लाह ने उससे कहा : "मानव बन जा" तो वह वैसा ही हो गया, जैसा अल्लाह ने चाहा था। फिर ये लोग कैसे दावा करते हैं कि ईसा अलैहिस्सलाम पूज्य हैं, यह तर्क देते हुए कि वह बिना पिता के पैदा किए गए थे? हालाँकि वे स्वीकार करते हैं कि आदम अलैहिस्सलाम मानव हैं, जबकि वह बिना पिता और माता के पैदा किए गए थे?!

3:60Page 57

ٱلۡحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلۡمُمۡتَرِينَ ٦٠

The truth is from your Lord, so do not be among the doubters.

ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में जिस सच्चाई में कोई संदेह नहीं, वह वही है जो आपपर आपके पालनहार की ओर से उतरी है। अतः आप संदेह एवं संकोच करने वालों में से न बनें, बल्कि आपको उस सत्य पर दृढ़ रहना चाहिए जिस पर आप क़ायम हैं।

3:61Page 57

فَمَنۡ حَآجَّكَ فِيهِ مِنۢ بَعۡدِ مَا جَآءَكَ مِنَ ٱلۡعِلۡمِ فَقُلۡ تَعَالَوۡاْ نَدۡعُ أَبۡنَآءَنَا وَأَبۡنَآءَكُمۡ وَنِسَآءَنَا وَنِسَآءَكُمۡ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمۡ ثُمَّ نَبۡتَهِلۡ فَنَجۡعَل لَّعۡنَتَ ٱللَّهِ عَلَى ٱلۡكَٰذِبِينَ ٦١

Then whoever argues with you about it after [this] knowledge has come to you - say, "Come, let us call our sons and your sons, our women and your women, ourselves and yourselves, then supplicate earnestly [together] and invoke the curse of Allāh upon the liars [among us]."

(ऐ रसूल!) आपसे नजरान के ईसाइयों में से जो भी ईसा अलैहिस्सलाम के मामले में बहस करे, यह दावा करते हुए कि वह अल्लाह के बंदे नहीं हैं, इसके पश्चात कि उनके बारे में आपके पास सही ज्ञान आ चुका; तो उनसे कह दें : आओ, हम अपने पुत्रों और तुम्हारे पुत्रों, अपनी स्त्रियों और तुम्हारी स्त्रियों को बुला लें और अपने आपको और तुम्हें भी, और हम सब इकट्ठे हो जाएँ, और फिर अल्लाह से गिड़गिड़ाकर विनती करें कि वह हमारे और तुम्हारे बीच झूठ बोलने वालों पर अपना श्राप (ला'नत) भेजे।

3:62Page 58

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡقَصَصُ ٱلۡحَقُّۚ وَمَا مِنۡ إِلَٰهٍ إِلَّا ٱللَّهُۚ وَإِنَّ ٱللَّهَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ٦٢

Indeed, this is the true narration. And there is no deity except Allāh. And indeed, Allāh is the Exalted in Might, the Wise.

यह जो हमने आपको ईसा अलैहिस्सलाम के विषय में बताया, निश्चय वही सच्ची ख़बर है जिसमें कोई झूठ या संदेह नहीं है। तथा अकेले अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। निःसंदेह अल्लाह अपने राज्य में शक्तिशाली, तथा अपने प्रबंधन, आदेश और रचना में हिकमत वाला है।

3:63Page 58

فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَإِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمُۢ بِٱلۡمُفۡسِدِينَ ٦٣

But if they turn away, then indeed - Allāh is Knowing of the corrupters.

यदि वे उससे फिर जाएँ, जो आप लेकर आए हैं और वे आपके पीछे न चलें; तो यह उनकी भ्रष्टता (बिगाड़) के कारण है, और अल्लाह धरती पर बिगाड़ करने वालों को खूब जानने वाला है और वह उन्हें उसका बदला देगा।

3:64Page 58

قُلۡ يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ تَعَالَوۡاْ إِلَىٰ كَلِمَةٖ سَوَآءِۭ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَكُمۡ أَلَّا نَعۡبُدَ إِلَّا ٱللَّهَ وَلَا نُشۡرِكَ بِهِۦ شَيۡـٔٗا وَلَا يَتَّخِذَ بَعۡضُنَا بَعۡضًا أَرۡبَابٗا مِّن دُونِ ٱللَّهِۚ فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقُولُواْ ٱشۡهَدُواْ بِأَنَّا مُسۡلِمُونَ ٦٤

Say, "O People of the Scripture, come to a word that is equitable between us and you - that we will not worship except Allāh and not associate anything with Him and not take one another as lords instead of Allāh."1 But if they turn away, then say, "Bear witness that we are Muslims [submitting to Him]."

(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ किताब वाले यहूदियो और ईसाइयो! आओ, हम न्याय की एक ऐसी बात पर एकजुट हों, जिसमें हम सभी समान हैं : कि हम अकेले अल्लाह की इबादत करें। इसलिए हम उसके साथ उसके अलावा किसी और की इबादत न करें, चाहे उसका पद कितना ही बड़ा और उसका स्थान कितना ही ऊँचा हो। और हम एक दूसरे को रब न बनाएँ, जिनकी अल्लाह के सिवा पूजा की जाए और उनका आज्ञापालन किया जाए। यदि वे सत्य और न्याय की उस बात से मुँह मोड़ लें, जिसकी ओर आप उन्हें बुलाते हैं, तो (ऐ ईमान वालो!) तुम उनसे कह दो : तुम लोग गवाह रहो की हम अल्लाह के प्रति समर्पित और उसकी आज्ञा का पालन करने वाले हैं।

3:65Page 58

يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لِمَ تُحَآجُّونَ فِيٓ إِبۡرَٰهِيمَ وَمَآ أُنزِلَتِ ٱلتَّوۡرَىٰةُ وَٱلۡإِنجِيلُ إِلَّا مِنۢ بَعۡدِهِۦٓۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ ٦٥

O People of the Scripture, why do you argue about Abraham while the Torah and the Gospel were not revealed until after him? Then will you not reason?

ऐ किताब वालो! तुम लोग इबराहीम अलैहिस्सलाम के धर्म के विषय में बहस क्यों करते हो? चुनाँचे यहूदी दावा करता है कि इबराहीम अलैहिस्सलाम यहूदी थे और ईसाई दावा करता है कि वह ईसाई थे। हालाँकि तुम जानते हो कि यहूदी और ईसाई धर्म उनकी मृत्यु के एक लंबे समय के बाद प्रकट हुए। क्या तुम अपनी बुद्धियों से अपने कथन के मिथ्यात्व और अपने दावे की त्रुटि का बोध नहीं करते?!

3:66Page 58

هَٰٓأَنتُمۡ هَٰٓؤُلَآءِ حَٰجَجۡتُمۡ فِيمَا لَكُم بِهِۦ عِلۡمٞ فَلِمَ تُحَآجُّونَ فِيمَا لَيۡسَ لَكُم بِهِۦ عِلۡمٞۚ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ وَأَنتُمۡ لَا تَعۡلَمُونَ ٦٦

Here you are - those who have argued about that of which you have [some] knowledge, but why do you argue about that of which you have no knowledge? And Allāh knows, while you know not.

ऐ किताब वालो! तुमने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से अपने धर्म के मामले में तथा अपने ऊपर उतरी हुई पुस्तक के बारे में बहस किया, जिसका तुम्हें ज्ञान था, परंतु तुम इबराहीम अलैहिस्सलाम और उनके धर्म के संबंध में क्यों बहस करते हो, जिसका तुम्हें कोई ज्ञान नहीं है, जो न तो तुम्हारी पुस्तकों में है, और न तुम्हारे नबियों द्वारा लाया गया है?! वास्तव में, अल्लाह ही मामलों के तथ्यों और उनकी आंतरिक बातों को जानता है और तुम नहीं जानते।

3:67Page 58

مَا كَانَ إِبۡرَٰهِيمُ يَهُودِيّٗا وَلَا نَصۡرَانِيّٗا وَلَٰكِن كَانَ حَنِيفٗا مُّسۡلِمٗا وَمَا كَانَ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ ٦٧

Abraham was neither a Jew nor a Christian, but he was one inclining toward truth, a Muslim [submitting to Allāh]. And he was not of the polytheists.1

इबराहीम अलैहिस्सलाम न यहूदी धर्म पर थे और न ही ईसाई धर्म पर। बल्कि वह असत्य धर्मों से विमुख होकर अल्लाह के आज्ञाकारी और उसे ही एकमात्र पूज्य मानने वाले थे। तथा वह उन लोगों में से कदापि नहीं थे, जो अल्लाह का साझी बनाते हैं, जैसा कि अरब के बहुदेववादियों का दावा है कि वे लोग उन्हीं के धर्म पर हैं।

3:68Page 58

إِنَّ أَوۡلَى ٱلنَّاسِ بِإِبۡرَٰهِيمَ لَلَّذِينَ ٱتَّبَعُوهُ وَهَٰذَا ٱلنَّبِيُّ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۗ وَٱللَّهُ وَلِيُّ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٦٨

Indeed, the most worthy of Abraham among the people are those who followed him [in submission to Allāh] and this prophet [i.e., Muḥammad (ﷺ)] and those who believe [in his message]. And Allāh is the Ally1 of the believers.

इबराहीम अलैहिस्सलाम से निस्बत (संबंध) रखने का सबसे योग्य, वे लोग हैं जिन्होंने उसका अनुसरण किया, जो वह अपने समय में लाए थे। इसी तरह लोगों में इसके सबसे योग्य यह नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और वे लोग हैं जो इस उम्मत में से आपपर ईमान लाए। और अल्लाह ईमान वालों का समर्थक और संरक्षक है।

3:69Page 58

وَدَّت طَّآئِفَةٞ مِّنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ لَوۡ يُضِلُّونَكُمۡ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّآ أَنفُسَهُمۡ وَمَا يَشۡعُرُونَ ٦٩

A faction of the People of the Scripture wish they could mislead you. But they do not mislead except themselves, and they perceive [it] not.

ऐ ईमान वालो! अह्ले किताब यानी यहूदियों और ईसाइयों के धर्मगुरु चाहते हैं कि - ऐ ईमान वालो - तुम्हें उस सच्चाई से भटका दें जिसकी अल्लाह ने तुम्हें हिदायत दी है, हालाँकि वे केवल अपने-आप ही को गुमराह कर रहे हैं। क्योंकि उनका ईमान वालों को पथभ्रष्ट करने का प्रयास, स्वयं उन्हीं की गुमराही में वृद्धि करता है और वे अपने कार्यों के परिणामों को नहीं जानते।

3:70Page 58

يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لِمَ تَكۡفُرُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَأَنتُمۡ تَشۡهَدُونَ ٧٠

O People of the Scripture, why do you disbelieve in the verses of Allāh1 while you witness [to their truth]?

ऐ किताब वाले यहूदियो और ईसाइयो! तुम अल्लाह की उन आयतों का इनकार क्यों करते हो, जो तुमपर उतारी गई हैं और जो उनमें मुहम्मद - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम - की नुबुव्वत का सबूत है, जबकि तुम इस बात के गवाह हो कि वह (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ईश्दूत होना) सत्य है, जिसका तुम्हारी किताबों में प्रमाण है?!

3:71Page 59

يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لِمَ تَلۡبِسُونَ ٱلۡحَقَّ بِٱلۡبَٰطِلِ وَتَكۡتُمُونَ ٱلۡحَقَّ وَأَنتُمۡ تَعۡلَمُونَ ٧١

O People of the Scripture, why do you mix [i.e., confuse] the truth with falsehood and conceal the truth while you know [it]?

ऐ किताब वालो! तुम अपनी किताबों में उतारी गई सच्चाई को अपने पास से झूठ के साथ क्यों गड्डमड्ड करते हो, तथा जो कुछ उनमें सच्चाई और मार्गदर्शन है उन्हें छिपाते हो, जिनमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सच्चे नबी होने की बात भी शामिल है, जबकि तुम सत्य को असत्य से और मार्गदर्शन को पथभ्रष्टता से जानते हो?!

3:72Page 59

وَقَالَت طَّآئِفَةٞ مِّنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ ءَامِنُواْ بِٱلَّذِيٓ أُنزِلَ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَجۡهَ ٱلنَّهَارِ وَٱكۡفُرُوٓاْ ءَاخِرَهُۥ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ ٧٢

And a faction of the People of the Scripture say [to each other], "Believe in that which was revealed to the believers at the beginning of the day and reject it at its end that perhaps they will return [i.e., abandon their religion],

यहूदी विद्वानों के एक समूह ने कहा : तुम बाहरी रूप से दिन की शुरुआत में उस क़ुरआन पर ईमान लाओ जो मोमिनों पर उतारा गया है और उसके अंत में उसका इनकार कर दो। हो सकता है कि वे तुम्हारे ईमान लाने के पश्चात उसका इनकार करने के कारण अपने धर्म पर संदेह करने लगें, फिर यह कहते हुए उससे वापस लौट आएँ : वे लोग अल्लाह की पुस्तकों के बारे में हमसे अधिक जानकार हैं, और वे उससे पलट गए हैं।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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