Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Al-Ahzab 33:69–73
33:69Page 427
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَكُونُواْ كَٱلَّذِينَ ءَاذَوۡاْ مُوسَىٰ فَبَرَّأَهُ ٱللَّهُ مِمَّا قَالُواْۚ وَكَانَ عِندَ ٱللَّهِ وَجِيهٗا ٦٩
O you who have believed, be not like those who abused Moses; then Allāh cleared him of what they said. And he, in the sight of Allāh, was distinguished.
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! तुम अपने रसूल को कष्ट न पहुँचाओ। अन्यथा, तुम उन लोगों के समान हो जाओगे, जिन्होंने मूसा अलैहिस्सलाम को कष्ट पहुँचाया था, जैसे कि उन्होंने उनके शरीर में दोष होने का आरोप लगाया था, परंतु अल्लाह ने उन्हें उनके मिथ्यारोप से बरी कर दिया। चुनाँचे उन लोगों के लिए यह स्पष्ट हो गया कि मूसा अलैहिस्सलाम उस दोष से पवित्र हैं जो उन्होंने उनके बारे में मढ़ा था। दरअसल, मूसा अलैहिस्सलाम अल्लाह के निकट बड़े प्रतिष्ठावान थे, जिसका अनुरोध अस्वीकार नहीं किया जाता, और उसका प्रयास विफल नहीं होता।
33:70Page 427
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَقُولُواْ قَوۡلٗا سَدِيدٗا ٧٠
O you who have believed, fear Allāh and speak words of appropriate justice.
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह से डरो, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर। तथा ठीक और सच्ची बात कहो।
33:71Page 427
يُصۡلِحۡ لَكُمۡ أَعۡمَٰلَكُمۡ وَيَغۡفِرۡ لَكُمۡ ذُنُوبَكُمۡۗ وَمَن يُطِعِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ فَقَدۡ فَازَ فَوۡزًا عَظِيمًا ٧١
He will [then] amend for you your deeds and forgive you your sins. And whoever obeys Allāh and His Messenger has certainly attained a great attainment.
यदि तुम अल्लाह से डरते रहे तथा ठीक और सच्ची बात करते रहे, तो वह तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्मों को सुधार देगा, उन्हें तुमसे स्वीकार कर लेगा तथा तुम्हारे गुनाहों को इस तरह मिटा देगा कि उनपर तुम्हारी पकड़ नहीं करेगा। और जो अल्लाह और उसके रसूल का आज्ञापालन करे, उसने बहुत बड़ी सफलता प्राप्त कर ली, जिसके समान कोई अन्य सफलता नहीं है और वह अल्लाह की प्रसन्नता की प्राप्ति और जन्नत में प्रवेश है।
33:72Page 427
إِنَّا عَرَضۡنَا ٱلۡأَمَانَةَ عَلَى ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَٱلۡجِبَالِ فَأَبَيۡنَ أَن يَحۡمِلۡنَهَا وَأَشۡفَقۡنَ مِنۡهَا وَحَمَلَهَا ٱلۡإِنسَٰنُۖ إِنَّهُۥ كَانَ ظَلُومٗا جَهُولٗا ٧٢
Indeed, We offered the Trust1 to the heavens and the earth and the mountains, and they declined to bear it and feared it; but man [undertook to] bear it. Indeed, he was unjust and ignorant.2
हमने शरई जिम्मेदारियों और संरक्षित किए जाने वाले धनों और रहस्यों को आकाशों पर, धरती पर तथा पर्वतों पर पेश किए, तो उन्होंने उसे उठाने से इनकार कर दिया और उसके परिणाम से डर गए। परंतु इनसान ने उसे उठा लिया। निश्चय ही वह स्वंय पर अत्याचार करने वाला और उसे उठाने के परिणाम से अनभिज्ञ है।
33:73Page 427
لِّيُعَذِّبَ ٱللَّهُ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتِ وَٱلۡمُشۡرِكِينَ وَٱلۡمُشۡرِكَٰتِ وَيَتُوبَ ٱللَّهُ عَلَى ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِۗ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورٗا رَّحِيمَۢا ٧٣
[It1 was] so that Allāh may punish the hypocrite men and hypocrite women and the men and women who associate others with Him and that Allāh may accept repentance from the believing men and believing women. And ever is Allāh Forgiving and Merciful.
मनुष्य ने अल्लाह की निर्धारित तक़दीर के अनुसार उस अमानत को उठा लिया; ताकि अल्लाह मुनाफ़िक़ (पाखंडी) पुरुषों और मुनाफ़िक़ (पाखंडी) स्त्रियों तथा मुश्रिक (अनेकेश्वरवादी) पुरुषों और मुश्रिक (अनेकेश्वरवादी) स्त्रियों को उनके निफ़ाक़ (पाखंड) और अल्लाह के साथ शिर्क (यानी उसका साझी बनाने) की सज़ा दे। और ताकि अल्लाह ऐसे मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों की तौबा स्वीकार करे, जिन्होंने शरई ज़िम्मेदारियों की अमानत अच्छे ढंग से उठाई। और अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा प्रदान करनेवाला और उनपर दया करनेवाला है।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences