Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
الزمر
Az-Zumar
The Troops · Meccan · 75 ayahs
39:1Page 458
تَنزِيلُ ٱلۡكِتَٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡحَكِيمِ ١
The revelation of the Book [i.e., the Qur’ān] is from Allāh, the Exalted in Might, the Wise.
क़ुरआन उस अल्लाह की ओर से उतारा गया है, जो सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, वह अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है। वह अल्लाह के सिवा किसी और की ओर से अवतरित नहीं हुआ है।
39:2Page 458
إِنَّآ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكَ ٱلۡكِتَٰبَ بِٱلۡحَقِّ فَٱعۡبُدِ ٱللَّهَ مُخۡلِصٗا لَّهُ ٱلدِّينَ ٢
Indeed, We have sent down to you the Book, [O Muḥammad], in truth. So worship Allāh, [being] sincere to Him in religion.
(ऐ रसूल!) हमने आपकी ओर यह सत्य पर आधारित क़ुरआन उतारा है। चुनाँचे उसके सभी समाचार सत्य हैं और उसके सभी नियम न्यायपूर्ण हैं। इसलिए एकेश्वरवादी होकर, उसके लिए तौहीद (एकेश्वरवाद) को शिर्क से शुद्ध (पवित्र) रखते हुए, अल्लाह की इबादत करें।
39:3Page 458
أَلَا لِلَّهِ ٱلدِّينُ ٱلۡخَالِصُۚ وَٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ أَوۡلِيَآءَ مَا نَعۡبُدُهُمۡ إِلَّا لِيُقَرِّبُونَآ إِلَى ٱللَّهِ زُلۡفَىٰٓ إِنَّ ٱللَّهَ يَحۡكُمُ بَيۡنَهُمۡ فِي مَا هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي مَنۡ هُوَ كَٰذِبٞ كَفَّارٞ ٣
Unquestionably, for Allāh is the pure religion.1 And those who take protectors besides Him [say], "We only worship them that they may bring us nearer to Allāh in position." Indeed, Allāh will judge between them concerning that over which they differ. Indeed, Allāh does not guide he who is a liar and [confirmed] disbeliever.
सुन लो, शिर्क से खाली धर्म केवल अल्लाह के लिए है। और जिन लोगों ने अल्लाह के सिवा मूर्तियों और ताग़ूतों को संरक्षक बना रखा है, जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा करते हैं और उनकी पूजा करने का कारण बयान करते हुए कहते हैं : हम इनकी पूजा केवल इसलिए करते हैं कि ये हमें अल्लाह से निकट कर दें, हमारी ज़रूरतों को उसके सामने रखें और उसके निकट हमारी सिफ़ारिश करें। निश्चय अल्लाह क़ियामत के दिन एकेश्वरवादी मोमिनों और बहुदेववादी काफ़िरों के बीच, उस तौहीद के बारे में फ़ैसला कर देगा, जिसके विषय में वे मतभेद किया करते थे। निःसंदेह अल्लाह उस व्यक्ति को सत्य की राह नहीं दिखाता, जो अल्लाह पर झूठ गढ़ने वाला है, उसकी ओर साझी की निस्बत करता है, तथा अल्लाह की मिली हुई नेमतों की बहुत नाशुक्री करने वाला है।
39:4Page 458
لَّوۡ أَرَادَ ٱللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدٗا لَّٱصۡطَفَىٰ مِمَّا يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ سُبۡحَٰنَهُۥۖ هُوَ ٱللَّهُ ٱلۡوَٰحِدُ ٱلۡقَهَّارُ ٤
If Allāh had intended to take a son, He could have chosen from what He creates whatever He willed. Exalted is He; He is Allāh, the One, the Prevailing.1
अगर अल्लाह संतान बनाना चाहता, तो अपनी मख़लूक़ में से जिसे चाहता, अवश्य चुन लेता और उसे बेटे के समान बना देता। अल्लाह उन बातों से पवित्र एवं सर्वोच्च है, जो ये मुश्रिक लोग कहते हैं। वह अपने अस्तित्व, गुणों और कार्यों में अकेला है, उनमें उसका कोई भी साझी नहीं है। वह अपनी सारी मख़लूक़ पर हावी (प्रभावी) है।
39:5Page 458
خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّۖ يُكَوِّرُ ٱلَّيۡلَ عَلَى ٱلنَّهَارِ وَيُكَوِّرُ ٱلنَّهَارَ عَلَى ٱلَّيۡلِۖ وَسَخَّرَ ٱلشَّمۡسَ وَٱلۡقَمَرَۖ كُلّٞ يَجۡرِي لِأَجَلٖ مُّسَمًّىۗ أَلَا هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡغَفَّٰرُ ٥
He created the heavens and earth in truth. He wraps the night over the day and wraps the day over the night and has subjected the sun and the moon, each running [its course] for a specified term. Unquestionably, He is the Exalted in Might, the Perpetual Forgiver.1
उसने आकाशों और धरती को एक व्यापक हिकमत के तहत बनाया है, व्यर्थ नहीं, जैसा कि ये अत्याचारी कहते हैं। वह रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है। चुनाँचे उन दोनों में से एक आता है, तो दूसरा चला जाता है। उसने सूरज और चाँद को वश में कर रखा है। दोनों में से हर एक, एक निर्धारित समय के लिए चल रहा है जो इस जीवन का अंत है। सुन लो, वह पवित्र अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है और उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, तथा वह अपने तौबा करने वाले बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है।
39:6Page 459
خَلَقَكُم مِّن نَّفۡسٖ وَٰحِدَةٖ ثُمَّ جَعَلَ مِنۡهَا زَوۡجَهَا وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلۡأَنۡعَٰمِ ثَمَٰنِيَةَ أَزۡوَٰجٖۚ يَخۡلُقُكُمۡ فِي بُطُونِ أُمَّهَٰتِكُمۡ خَلۡقٗا مِّنۢ بَعۡدِ خَلۡقٖ فِي ظُلُمَٰتٖ ثَلَٰثٖۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡ لَهُ ٱلۡمُلۡكُۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ فَأَنَّىٰ تُصۡرَفُونَ ٦
He created you from one soul. Then He made from it its mate, and He produced for you from the grazing livestock eight mates.1 He creates you in the wombs of your mothers, creation after creation, within three darknesses.2 That is Allāh, your Lord; to Him belongs dominion. There is no deity except Him, so how are you averted?
(ऐ लोगो!) तुम्हारे पालनहार ने तुम्हें एक जान अर्थात् आदम से पैदा किया। फिर आदम से उनकी पत्नी ह़व्वा को पैदा किया। तथा तुम्हारे लिए ऊँटों, गायों, भेड़ों और बकरियों से आठ क़िस्म के जानवर पैदा किए, इनमें से हर प्रकार से नर और मादा बनाए। वह पवित्र अल्लाह तुम्हें तुम्हारी माताओं के पेटों में चरण-दर-चरण, पेट, गर्भाशय और झिल्ली के अंधेरों में पैदा करता है। वह जिसने यह सब पैदा किया, वही अल्लाह तुम्हारा पालनहार है। केवल उसी का राज्य है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं। तो तुम उसकी इबादत से मुँह मोड़कर ऐसे लोगों की इबादत की ओर कैसे फिरे जाते हो, जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते, बल्कि वे खुद पैदा किए जाते हैं?!
39:7Page 459
إِن تَكۡفُرُواْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَنِيٌّ عَنكُمۡۖ وَلَا يَرۡضَىٰ لِعِبَادِهِ ٱلۡكُفۡرَۖ وَإِن تَشۡكُرُواْ يَرۡضَهُ لَكُمۡۗ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزۡرَ أُخۡرَىٰۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرۡجِعُكُمۡ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَۚ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٧
If you disbelieve - indeed, Allāh is Free from need of you. And He does not approve for His servants disbelief. And if you are grateful, He approves [i.e., likes] it for you; and no bearer of burdens will bear the burden of another. Then to your Lord is your return, and He will inform you about what you used to do. Indeed, He is Knowing of that within the breasts.
(ऐ लोगो!) अगर तुम अपने रब की नाशुक्री (या कुफ़्र) करोगे, तो अल्लाह तुम्हारे ईमान से बेपरवाह है। तुम्हारे कुफ़्र से उसका कोई नुक़सान नहीं होने वाला। तुम्हारे कुफ़्र का नुक़सान तुम्हारी ही ओर लौटेगा। अल्लाह इस बात को पसंद नहीं करता कि उसके बंदे उसकी नाशुक्री करें, और वह उन्हें नाशुक्री का आदेश नहीं देता। क्योंकि अल्लाह अनैतिकता और बुरे काम का आदेश नहीं देता। और अगर तुम अल्लाह का उसकी नेमतों पर शुक्रिया अदा करो और उसपर ईमान ले आओ, तो वह तुम्हारे शुक्र को पसंद करेगा और तुम्हें उसका बदला देगा। तथा कोई प्राणी किसी दूसरे प्राणी के गुनाह का बोझ नहीं उठाएगा। बल्कि हर प्राणी की उसके किए हुए कर्मों पर पकड़ होगी। फिर क़ियामत के दिन तुम्हारी वापसी अकेले तुम्हारे पालनहार ही की ओर होगी, और वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या करते थे, और तुम्हें तुम्हारे कर्मों का प्रतिफल देगा। वह पवित्र अल्लाह अपने बंदों के दिलों की बातों को ख़ूब जानने वाला है। उनके दिलों की कोई बात उससे छिपी नहीं है।
39:8Page 459
۞ وَإِذَا مَسَّ ٱلۡإِنسَٰنَ ضُرّٞ دَعَا رَبَّهُۥ مُنِيبًا إِلَيۡهِ ثُمَّ إِذَا خَوَّلَهُۥ نِعۡمَةٗ مِّنۡهُ نَسِيَ مَا كَانَ يَدۡعُوٓاْ إِلَيۡهِ مِن قَبۡلُ وَجَعَلَ لِلَّهِ أَندَادٗا لِّيُضِلَّ عَن سَبِيلِهِۦۚ قُلۡ تَمَتَّعۡ بِكُفۡرِكَ قَلِيلًا إِنَّكَ مِنۡ أَصۡحَٰبِ ٱلنَّارِ ٨
And when adversity touches man, he calls upon his Lord, turning to Him [alone]; then when He bestows on him a favor from Himself, he forgets Him whom he called upon before,1 and he attributes to Allāh equals to mislead [people] from His way. Say, "Enjoy your disbelief for a little; indeed, you are of the companions of the Fire."
जब काफ़िर व्यक्ति को कोई बीमारी, धन की हानि और डूबने के डर जैसी कोई तकलीफ़ पहुँचती है, तो वह अपने पालनहार को पुकारता है कि उसे पहुँचने वाली तकलीफ़ को उससे दूर कर दे, इस हाल में कि वह केवल उसी की ओर लौटने वाला होता है। फिर जब अल्लाह उसे कोई नेमत प्रदान करता है, जैसे कि उसे पहुँचने वाली तकलीफ़ को उससे दूर कर देता है, तो वह पहले जिसके आगे गिड़गिड़ाता था, उसे छोड़ देता है, और वह अल्लाह है। तथा वह अल्लाह के साझी बनाकर, अल्लाह के सिवा उनकी पूजा करने लगता है। ताकि वह अन्य लोगों को उस रास्ते से भटका दे, जो अल्लाह की ओर पहुँचाने वाला है। (ऐ रसूल!) आप इस दशा वाले व्यक्ति से कह दें : अपने जीवन के बाक़ी हिस्सों के लिए अपने कुफ़्र का आनंद ले लो, जो कि बहुत थोड़ा समय है। क्योंकि तुम क़ियामत के दिन जहन्नम में जाने वालों में से हो, जो उसमें उस तरह रहने वाले हैं, जिस तरह एक साथी अपने साथी के साथ रहता है।
39:9Page 459
أَمَّنۡ هُوَ قَٰنِتٌ ءَانَآءَ ٱلَّيۡلِ سَاجِدٗا وَقَآئِمٗا يَحۡذَرُ ٱلۡأٓخِرَةَ وَيَرۡجُواْ رَحۡمَةَ رَبِّهِۦۗ قُلۡ هَلۡ يَسۡتَوِي ٱلَّذِينَ يَعۡلَمُونَ وَٱلَّذِينَ لَا يَعۡلَمُونَۗ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ ٩
Is one who is devoutly obedient during periods of the night, prostrating and standing [in prayer], fearing the Hereafter and hoping for the mercy of his Lord, [like one who does not]? Say, "Are those who know equal to those who do not know?" Only they will remember [who are] people of understanding.
क्या वह व्यक्ति जो अल्लाह की आज्ञा का पालन करने वाला है, रात की घड़ियों को अपने रब के सामने सजदा करते हुए और उसके दरबार में खड़े होकर इबादत में गुज़ारता है, आख़िरत की यातना से डरता है और अपने रब की दया की आशा रखता है, वह उत्तम है, या वह काफ़िर जो परेशानी के समय अल्लाह की इबादत करता है और खुशहाली के समय उसका इनकार करता है और अल्लाह के साथ साझीदार बनाता है?! (ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या वे लोग, जो अल्लाह से अवगत होने के कारण उसकी वाजिब की हुई चीज़ों को जानते हैं और वे लोग जो इनमें से कुछ भी नहीं जानते, बराबर हो सकते हैं?! इन दो समूहों के बीच का अंतर वही लोग जान सकते हैं, जिनके पास शुद्ध बुद्धि है।
39:10Page 459
قُلۡ يَٰعِبَادِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱتَّقُواْ رَبَّكُمۡۚ لِلَّذِينَ أَحۡسَنُواْ فِي هَٰذِهِ ٱلدُّنۡيَا حَسَنَةٞۗ وَأَرۡضُ ٱللَّهِ وَٰسِعَةٌۗ إِنَّمَا يُوَفَّى ٱلصَّٰبِرُونَ أَجۡرَهُم بِغَيۡرِ حِسَابٖ ١٠
Say,1 "O My servants who have believed, fear your Lord. For those who do good in this world is good, and the earth of Allāh is spacious. Indeed, the patient will be given their reward without account [i.e., limit]."
(ऐ रसूल!) आप मेरे उन बंदों से, जो मुझपर और मेरे रसूलों पर ईमान लाए हैं, कह दें : अपने पालनहार से डरो, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर। तुममें से जिन लोगों ने दुनिया में अच्छे कार्य किए, उनके लिए दुनिया में विजय (मदद), स्वास्थ्य और धन के रूप में, तथा आख़िरत में जन्नत के रूप में, भलाई है। और अल्लाह की धरती विशाल है। इसलिए उसमें हिजरत करो यहाँ तक कि तुम्हें ऐसी जगह मिल जाए, जहाँ तुम बिना रोक-टोक के अल्लाह की इबादत कर सको। सब्र करने वालों को क़ियामत के दिन उनका बदला, उसकी बहुतायत और विविधता के कारण, बिना गिनती किए या बिना मात्रा के दिया जाएगा।
39:11Page 460
قُلۡ إِنِّيٓ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ ٱللَّهَ مُخۡلِصٗا لَّهُ ٱلدِّينَ ١١
Say, [O Muḥammad], "Indeed, I have been commanded to worship Allāh, [being] sincere to Him in religion.
(ऐ रसूल!) आप कह दें : अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं केवल उसी की इबादत करूँ, उसके लिए इबादत को विशुद्ध करते हुए।
39:12Page 460
وَأُمِرۡتُ لِأَنۡ أَكُونَ أَوَّلَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ ١٢
And I have been commanded to be the first [among you] of the Muslims."
और उसने मुझे आदेश दिया है कि मैं इस उम्मत का सबसे पहला आज्ञाकारी और हुक्म मानने वाला बनूँ।
39:13Page 460
قُلۡ إِنِّيٓ أَخَافُ إِنۡ عَصَيۡتُ رَبِّي عَذَابَ يَوۡمٍ عَظِيمٖ ١٣
Say, "Indeed I fear, if I should disobey my Lord, the punishment of a tremendous Day."
(ऐ रसूल!) आप कह दें : यदि मैं अल्लाह की अवज्ञा करता हूँ और उसकी बात नहीं मानता, तो मुझे एक महान दिन की यातना का डर है और वह क़ियामत का दिन है।
39:14Page 460
قُلِ ٱللَّهَ أَعۡبُدُ مُخۡلِصٗا لَّهُۥ دِينِي ١٤
Say, "Allāh [alone] do I worship, sincere to Him in my religion,
(ऐ रसूल!) आप कह दें : मैं केवल अल्लाह की इबादत करता हूँ, उसी के लिए इबादत को ख़ालिस करते हुए। उसके साथ किसी अन्य की इबादत नहीं करता।
39:15Page 460
فَٱعۡبُدُواْ مَا شِئۡتُم مِّن دُونِهِۦۗ قُلۡ إِنَّ ٱلۡخَٰسِرِينَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ وَأَهۡلِيهِمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۗ أَلَا ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡخُسۡرَانُ ٱلۡمُبِينُ ١٥
So worship what you will besides Him." Say, "Indeed, the losers are the ones who will lose themselves and their families on the Day of Resurrection. Unquestionably, that is the manifest loss."
(ऐ मुश्रिको!) तुम उसके सिवा जिन मूर्तियों की भी चाहो, पूजा करो, (यह आदेश धमकी के लिए है)। (ऐ रसूल!) आप कह दें : वास्तविक घाटा उठाने वाले वे लोग हैं, जिन्होंने अपना घाटा किया और अपने घर वालों का घाटा किया। चुनाँचे वे उनसे नहीं मिल सके। क्योंकि वे अकेले जन्नत में दाखिल होने के कारण, या उनके साथ ही जहन्नम में जाने की वजह से, उनका साथ छोड़ दिए। इसलिए वे कभी नहीं मिलेंगे। सुन लो! वास्तव में यही स्पष्ट घाटा है, जिसमें कोई संदेह नहीं है।
39:16Page 460
لَهُم مِّن فَوۡقِهِمۡ ظُلَلٞ مِّنَ ٱلنَّارِ وَمِن تَحۡتِهِمۡ ظُلَلٞۚ ذَٰلِكَ يُخَوِّفُ ٱللَّهُ بِهِۦ عِبَادَهُۥۚ يَٰعِبَادِ فَٱتَّقُونِ ١٦
They will have canopies [i.e., layers] of fire above them and below them, canopies. By that Allāh threatens [i.e., warns] His servants. O My servants, then fear Me.
उनके लिए उनके ऊपर से धुआँ, लौ और गर्मी होगी और उनके नीचे से भी धुआँ, लौ और गर्मी होगी। इस उल्लिखित यातना के द्वारा अल्लाह अपने बंदों को डराता है। अतः ऐ मेरे बंदो! मेरे आदेशों का पालन करके और मेरे निषेधों से बचकर मुझसे डरो।
39:17Page 460
وَٱلَّذِينَ ٱجۡتَنَبُواْ ٱلطَّٰغُوتَ أَن يَعۡبُدُوهَا وَأَنَابُوٓاْ إِلَى ٱللَّهِ لَهُمُ ٱلۡبُشۡرَىٰۚ فَبَشِّرۡ عِبَادِ ١٧
But those who have avoided ṭāghūt,1 lest they worship it, and turned back to Allāh - for them are good tidings. So give good tidings to My servants
जो लोग मूर्तियों तथा अल्लाह के सिवा पूजी जाने वाली समस्त चीज़ों की पूजा से दूर रहे और अल्लाह की ओर तौबा करते हुए लौटे, उनके लिए मौत के समय, कब्र में और क़ियामत के दिन जन्नत की खुशख़बरी है। अतः (ऐ रसूल!) आप मेरे बंदों को खुशख़बरी सुना दें।
39:18Page 460
ٱلَّذِينَ يَسۡتَمِعُونَ ٱلۡقَوۡلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحۡسَنَهُۥٓۚ أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ هَدَىٰهُمُ ٱللَّهُۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمۡ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ ١٨
Who listen to speech and follow the best of it. Those are the ones Allāh has guided, and those are people of understanding.
जो बात को सुनते हैं और अच्छी और बुरी बात के बीच अंतर करते हैं, फिर उसमें पाए जाने वाले लाभ के लिए सबसे अच्छी बात का अनुसरण करते हैं। इन विशेषताओं से सुसज्जित लोग ही हैं, जिन्हें अल्लाह ने हिदायत की तौफ़ीक़ दी है। और वही लोग शुद्ध विवेक वाले हैं।
39:19Page 460
أَفَمَنۡ حَقَّ عَلَيۡهِ كَلِمَةُ ٱلۡعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِي ٱلنَّارِ ١٩
Then, is one who has deserved the decree of punishment [to be guided]? Then, can you save one who is in the Fire?
जिस व्यक्ति पर उसके कुफ़्र और गुमराही पर बने रहने के कारण यातना की बात सिद्ध हो चुकी, तो (ऐ रसूल!) उसके मार्गदर्शन और तौफ़ीक़ के लिए आपके पास कोई उपाय नहीं है। तो (ऐ रसूल!) क्या आप इस विशेषता वाले व्यक्ति को आग से बचा लेंगे?!
39:20Page 460
لَٰكِنِ ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْ رَبَّهُمۡ لَهُمۡ غُرَفٞ مِّن فَوۡقِهَا غُرَفٞ مَّبۡنِيَّةٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُۖ وَعۡدَ ٱللَّهِ لَا يُخۡلِفُ ٱللَّهُ ٱلۡمِيعَادَ ٢٠
But those who have feared their Lord - for them are chambers,1 above them chambers built high, beneath which rivers flow. [This is] the promise of Allāh. Allāh does not fail in [His] promise.
लेकिन जो लोग अपने पालनहार के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर उससे डरते रहे, उनके लिए ऊँचे-ऊँचे भवन हैं, जो एक के ऊपर एक बने हुए हैं, जिनके नीचे से नहरें बह रही हैं। अल्लाह ने उनसे इसका वादा किया है और अल्लाह अपना वादा नहीं तोड़ता।
39:21Page 460
أَلَمۡ تَرَ أَنَّ ٱللَّهَ أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَسَلَكَهُۥ يَنَٰبِيعَ فِي ٱلۡأَرۡضِ ثُمَّ يُخۡرِجُ بِهِۦ زَرۡعٗا مُّخۡتَلِفًا أَلۡوَٰنُهُۥ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَىٰهُ مُصۡفَرّٗا ثُمَّ يَجۡعَلُهُۥ حُطَٰمًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكۡرَىٰ لِأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ ٢١
Do you not see that Allāh sends down rain from the sky and makes it flow as springs [and rivers] in the earth; then He produces thereby crops of varying colors; then they dry and you see them turned yellow; then He makes them [scattered] debris. Indeed in that is a reminder for those of understanding.
तुम देख कर जानते हो कि अल्लाह ने आसमान से बारिश का पानी उतारा, फिर उसे चश्मों और स्रोतों में घुसा दिया। फिर वह इस पानी के साथ अलग-अलग रंगों की खेती निकालता है। फिर खेती सूख जाती है, तो तुम उसे (ऐ देखने वाले!) पीले रंग की देखते हो, जबकि वह पहले हरी-भरी थी। फिर उसके सूखने के बाद अल्लाह उसे चूरा-चूरा बना देता है। यह जो कुछ उल्लेख किया गया है, इसमें जीवित दिलों के लिए एक अनुस्मारक (उपदेश) है।
39:22Page 461
أَفَمَن شَرَحَ ٱللَّهُ صَدۡرَهُۥ لِلۡإِسۡلَٰمِ فَهُوَ عَلَىٰ نُورٖ مِّن رَّبِّهِۦۚ فَوَيۡلٞ لِّلۡقَٰسِيَةِ قُلُوبُهُم مِّن ذِكۡرِ ٱللَّهِۚ أُوْلَٰٓئِكَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٍ ٢٢
So is one whose breast Allāh has expanded to [accept] Islām and he is upon [i.e., guided by] a light from his Lord [like one whose heart rejects it]? Then woe to those whose hearts are hardened against the remembrance of Allāh. Those are in manifest error.
क्या वह आदमी, जिसके सीने को अल्लाह ने इस्लाम के लिए खोल दिया है, और उसने उसकी राह पा ली है, चुनाँचे वह अपने रब की ओर से अंतर्दृष्टि पर है, उस व्यक्ति के समान हो सकता है, जिसका दिल अल्लाह की याद से सख़्त हो गया है?! वे दोनों कभी भी बराबर नहीं हो सकते। चुनाँचे मोक्ष उनके लिए है जो हिदायत पाने वाले हैं और घाटा उन लोगों के लिए है, जिनके हृदय अल्लाह के स्मरण से कठोर हैं। ये लोग सत्य से स्पष्ट गुमराही में हैं।
39:23Page 461
ٱللَّهُ نَزَّلَ أَحۡسَنَ ٱلۡحَدِيثِ كِتَٰبٗا مُّتَشَٰبِهٗا مَّثَانِيَ تَقۡشَعِرُّ مِنۡهُ جُلُودُ ٱلَّذِينَ يَخۡشَوۡنَ رَبَّهُمۡ ثُمَّ تَلِينُ جُلُودُهُمۡ وَقُلُوبُهُمۡ إِلَىٰ ذِكۡرِ ٱللَّهِۚ ذَٰلِكَ هُدَى ٱللَّهِ يَهۡدِي بِهِۦ مَن يَشَآءُۚ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٍ ٢٣
Allāh has sent down the best statement: a consistent Book wherein is reiteration. The skins shiver therefrom of those who fear their Lord; then their skins and their hearts relax at the remembrance [i.e., mention] of Allāh. That is the guidance of Allāh by which He guides whom He wills. And one whom Allāh sends astray - for him there is no guide.
अल्लाह ने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर क़ुरआन उतारा है, जो सबसे उत्तम हदीस (बात) है। अल्लाह ने इसे परस्पर मिलता-जुलता उतारा है, इसका एक भाग दूसरे भाग से सच्चाई, अच्छाई, एकरूपता और विभेद-रहित होने में मिलता-जुलता है, जिसमें विभिन्न कहानियाँ और अहकाम (नियम), वादे और धमकियाँ, सत्यवादियों के गुण और असत्यवादियों की विशेषताएँ, आदि वर्णित हैं। इससे उन लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, जो अपने पालनहार से डरते हैं, जब वे उसमें वर्णित सज़ा के वादों और दंड की धमकियों को सुनते हैं। फिर जब वे उसमें मौजूद आशा और शुभ समाचार को सुनते हैं, तो उनके चमड़े और दिल नरम होकर अल्लाह के ज़िक्र की ओर प्रेरित हो जाते हैं। यह उपर्युक्त क़ुरआन और उसका प्रभाव, अल्लाह का मार्गदर्शन है, वह जिसे चाहता है उसका मार्गदर्शन प्रदान करता है। और जिसे अल्लाह विफल कर दे और उसे हिदायत की तौफ़ीक़ न दे, तो उसके लिए मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं है।
39:24Page 461
أَفَمَن يَتَّقِي بِوَجۡهِهِۦ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ وَقِيلَ لِلظَّٰلِمِينَ ذُوقُواْ مَا كُنتُمۡ تَكۡسِبُونَ ٢٤
Then is he who will shield with his face1 the worst of the punishment on the Day of Resurrection [like one secure from it]? And it will be said to the wrongdoers, "Taste what you used to earn."
क्या यह आदमी, जिसे अल्लाह ने हिदायत दी और दुनिया में उसे सफलता प्रदान की और आख़िरत में उसे जन्नत में दाखिल किया, उस आदमी के बराबर हो सकता है, जिसने कुफ़्र किया और कुफ़्र ही की अवस्था में मर गया, फिर अल्लाह ने उसके दोनों हाथों और पैरों को बेड़ियों में जकड़कर उसे जहन्नम में दाखिल कर दिया, जो आग से बचने के लिए अपने औंधे पड़े हुए चेहरे के सिवा किसी और अंग का प्रयोग नहीं कर सकता?! तथा कुफ़्र और पाप के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार करने वालों से फटकार के रूप में कहा जाएगा : जो कुछ तुम कुफ़्र और पाप किया करते थे उसका स्वाद चखो। क्योंकि यही तुम्हारा प्रतिफल है।
39:25Page 461
كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ فَأَتَىٰهُمُ ٱلۡعَذَابُ مِنۡ حَيۡثُ لَا يَشۡعُرُونَ ٢٥
Those before them denied, and punishment came upon them from where they did not perceive.
जो समुदाय इन बहुदेववादियों से पहले थे, उन्होंने भी झुठलाया, तो उनपर अचानक वहाँ से यातना आई कि उन्हें उसका आभास भी न था कि वे उसके लिए तौबा के द्वारा तैयारी करते।
39:26Page 461
فَأَذَاقَهُمُ ٱللَّهُ ٱلۡخِزۡيَ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَكۡبَرُۚ لَوۡ كَانُواْ يَعۡلَمُونَ ٢٦
So Allāh made them taste disgrace in worldly life. But the punishment of the Hereafter is greater, if they only knew.
तो अल्लाह ने इस यातना के ज़रिए उन्हें सांसारिक जीवन में अपमान, लज्जा और रुसवाई (फ़ज़ीहत) चखाई। और आख़िरत की यातना जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, इससे भी बड़ी और अधिक गंभीर है, अगर वे जानते होते।
39:27Page 461
وَلَقَدۡ ضَرَبۡنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانِ مِن كُلِّ مَثَلٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ ٢٧
And We have certainly presented for the people in this Qur’ān from every [kind of] example - that they might remember.
और हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाले इस क़ुरआन में, लोगों के लिए, भलाई और बुराई, सत्य और असत्य तथा ईमान और कुफ़्र और अन्य चीज़ों के बारे में तरह तरह के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं; इस आशा में कि लोग उन उदाहरणों से उपदेश ग्रहण करें, जो हमने उनसे बयान किया है, इसलिए वे सत्य पर अमल करें, और असत्य को छोड़ दें।
39:28Page 461
قُرۡءَانًا عَرَبِيًّا غَيۡرَ ذِي عِوَجٖ لَّعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ ٢٨
[It is] an Arabic Qur’ān, without any deviance1 that they might become righteous.2
हमने उसे अरबी भाषा में उतरने वाला क़ुरआन बनाया है। जिसमें किसी प्रकार का टेढ़ापन, कोई विचलन और कोई संदेह (गड़बड़) नहीं है। इस उम्मीद में कि लोग अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरें।
39:29Page 461
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلٗا رَّجُلٗا فِيهِ شُرَكَآءُ مُتَشَٰكِسُونَ وَرَجُلٗا سَلَمٗا لِّرَجُلٍ هَلۡ يَسۡتَوِيَانِ مَثَلًاۚ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ٢٩
Allāh presents an example: a man [i.e., slave] owned by quarreling partners and another belonging exclusively to one man - are they equal in comparison? Praise be to Allāh! But most of them do not know.
अल्लाह ने बहुदेववादी और एकेश्वरवादी का उदाहरण दिया है। एक व्यक्ति ऐसा है, जो परस्पर विरोधी भागीदारों के स्वामित्व में है; यदि वह उनमें से किसी एक को प्रसन्न करता है, तो किसी दूसरे को क्रोधित कर देता है। इस तरह वह हैरानी और उथल-पुथल में रहता है। जबकि दूसरा व्यक्ति एक ही आदमी के लिए विशिष्ट है। वही अकेला इसका मालिक है और यह उसकी मंशा को जानता है। इसलिए वह निश्चिंत और उसका मन शांत रहता है। ये दोनों व्यक्ति बराबर नहीं हो सकते। हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है। लेकिन उनमें से अधिकांश नहीं जानते हैं। इसलिए वे अल्लाह के साथ उसके अलावा को साझी ठहराते हैं।
39:30Page 461
إِنَّكَ مَيِّتٞ وَإِنَّهُم مَّيِّتُونَ ٣٠
Indeed, you are to die, and indeed, they are to die.
(ऐ रसूल!) निश्चय आप मरने वाले हैं और निश्चय वे भी अनिवार्य रूप से मरने वाले हैं।
39:31Page 461
ثُمَّ إِنَّكُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ عِندَ رَبِّكُمۡ تَخۡتَصِمُونَ ٣١
Then indeed you, on the Day of Resurrection, before your Lord, will dispute.
फिर (ऐ लोगो!) तुम क़ियामत के दिन अपने पालनहार के पास उन बातों को लेकर झगड़ोगे, जिनमें तुम वाद-विवाद किया करते हो। फिर यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन गलत है और कौन सही है।
39:32Page 462
۞ فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن كَذَبَ عَلَى ٱللَّهِ وَكَذَّبَ بِٱلصِّدۡقِ إِذۡ جَآءَهُۥٓۚ أَلَيۡسَ فِي جَهَنَّمَ مَثۡوٗى لِّلۡكَٰفِرِينَ ٣٢
So who is more unjust than one who lies about Allāh and denies the truth when it has come to him? Is there not in Hell a residence for the disbelievers?
उससे बड़ा ज़ालिम कोई नहीं, जो अल्लाह के साथ सहभागी, पत्नी एवं संतान संबंधित करता है, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं है। इसी तरह उससे बढ़कर अत्याचारी कोई नहीं, जो उस वह़्य को झुठलाए, जो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं। क्या अल्लाह का तथा उसके रसूल के लाए हुए संदेश का इनकार करने वालों का ठिकाना और निवास जहन्नम में नहीं है?! क्यों नहीं, निश्चित रूप से उनका ठिकाना और निवास उसी के अंदर है।
39:33Page 462
وَٱلَّذِي جَآءَ بِٱلصِّدۡقِ وَصَدَّقَ بِهِۦٓ أُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُتَّقُونَ ٣٣
And the one who has brought the truth [i.e., the Prophet (ﷺ)] and [they who] believed in it - those are the righteous.
जो नबी अथवा कोई अन्य व्यक्ति अपनी कथनी व करनी में सत्य लेकर आया और जिसने उसे मानते हुए उसकी पुष्टी की तथा उसके अनुसार अमल किया, वही लोग हक़ीक़त में अल्लाह का भय रखते हैं, जो अपने पालनहार के आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मना की हुई वस्तुओं से दूर रहते हैं।
39:34Page 462
لَهُم مَّا يَشَآءُونَ عِندَ رَبِّهِمۡۚ ذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٣٤
They will have whatever they desire with their Lord. That is the reward of the doers of good -
उनके लिए उनके पालनहार के यहाँ वह सारी कभी न ख़त्म होने वाली आनंद एवं सुख ही चीज़ें होंगी, जो वे चाहेंगे। यही बदला है उन सदाचारी बंदों का, जो अपने पैदा करने वाले अल्लाह तथा उसके बंदों के साथ अच्छा बरताव करते हैं।
39:35Page 462
لِيُكَفِّرَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ أَسۡوَأَ ٱلَّذِي عَمِلُواْ وَيَجۡزِيَهُمۡ أَجۡرَهُم بِأَحۡسَنِ ٱلَّذِي كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ٣٥
That Allāh may remove from them the worst of what they did and reward them their due for the best of what they used to do.
ताकि अल्लाह उनके बुरे कर्मों को, जो वे संसार में करते थे, क्षमा याचना एवं अपने पालनहार के सामने गिड़गिड़ाने के कारण माफ़ कर दे और उनके अच्छे कर्मों का, जो वे करते थे, प्रतिफल प्रदान करे।
39:36Page 462
أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِكَافٍ عَبۡدَهُۥۖ وَيُخَوِّفُونَكَ بِٱلَّذِينَ مِن دُونِهِۦۚ وَمَن يُضۡلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنۡ هَادٖ ٣٦
Is not Allāh sufficient for His Servant [i.e., Prophet Muḥammad (ﷺ)]? And [yet], they threaten you with those [they worship] other than Him. And whoever Allāh leaves astray - for him there is no guide.
क्या अल्लाह अपने बंदे मुहम्मद सल्ल्लाहु अलैहि व सल्लम के धार्मिक एवं सांसारिक हितों की रक्षा और उन्हें उनके शत्रु से बचाने के लिए काफ़ी नहीं है?! क्यों नही, निश्चय वह आपके लिए काफी है। तथा (ऐ रसूल!) वे लोग अपनी अज्ञानता और मूर्खता के कारण, आपको उन मूर्तियों से डराते हैं, जिन्हें वे अल्लाह को छोड़कर पूजते हैं कि वे आपको कोई हानि पहुँचा देंगी। तथा जिसे अल्लाह असहाय छोड़ दे और उसे हिदायत की तौफ़ीक न दे, तो उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं है, जो उसका मार्गदर्शन करे और उसे उसका सामर्थ्य प्रदान करे।
39:37Page 462
وَمَن يَهۡدِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِن مُّضِلٍّۗ أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِعَزِيزٖ ذِي ٱنتِقَامٖ ٣٧
And whoever Allāh guides - for him there is no misleader. Is not Allāh Exalted in Might and Owner of Retribution?
और जिसे अल्लाह सीधा रास्ता दिखा दे, उसे कोई गुमराह करने वाला राह से हटा नहीं सकता। क्या अल्लाह प्रभुत्वशाली नहीं है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता और वह अपना इनकार करने वाले तथा अवज्ञा करने वाले से बदला लेने वाला नहीं है?! अवश्य ही, वह बड़ा प्रभुत्वशाली और बदला लेने वाला है।
39:38Page 462
وَلَئِن سَأَلۡتَهُم مَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُۚ قُلۡ أَفَرَءَيۡتُم مَّا تَدۡعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ إِنۡ أَرَادَنِيَ ٱللَّهُ بِضُرٍّ هَلۡ هُنَّ كَٰشِفَٰتُ ضُرِّهِۦٓ أَوۡ أَرَادَنِي بِرَحۡمَةٍ هَلۡ هُنَّ مُمۡسِكَٰتُ رَحۡمَتِهِۦۚ قُلۡ حَسۡبِيَ ٱللَّهُۖ عَلَيۡهِ يَتَوَكَّلُ ٱلۡمُتَوَكِّلُونَ ٣٨
And if you asked them, "Who created the heavens and the earth?" they would surely say, "Allāh." Say, "Then have you considered1 what you invoke besides Allāh? If Allāh intended me harm, are they removers of His harm; or if He intended me mercy, are they withholders of His mercy?" Say, "Sufficient for me is Allāh; upon Him [alone] rely the [wise] reliers."
और यदि आप (ऐ रसूल) इन बहूदेववादियों से प्रश्न करें कि आकाशों तथा धरती को किसने पैदा किया है? तो वे अवश्य कहेंगे कि अल्लाह ने उन्हें पैदा किया है। आप उनकी विवशता को ज़ाहिर करने के लिए कहिए कि तुम मुझे उन मूर्तियों के बारे में बताओ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो कि यदि अल्लाह मुझे कोई हानि पहुँचाना चाहे, तो क्या ये उसकी हानि को मुझसे दूर कर सकती हैं? या मेरे साथ दया करना चाहे, तो क्या ये उसकी दया को रोक सकती हैं? आप कह दें कि मेरे लिए केवल अल्लाह ही काफ़ी है। उसी पर मैं अपने तमाम मामलों में भरोसा करता हूँ। और केवल उसीपर भरोसा करने वाले भरोसा करते हैं।
39:39Page 462
قُلۡ يَٰقَوۡمِ ٱعۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمۡ إِنِّي عَٰمِلٞۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ ٣٩
Say, "O my people, work according to your position, [for] indeed, I am working; and you are going to know
(ऐ रसूल) आप कह देंः ऐ मेरी जाति के लोगो! तुमने शिर्क की जिस परिस्थिति को अपने लिए पसंद कर लिया है, उसी के अनुसार अमल करते रहो। मैं भी अपने पालनहार के आदेश अनुसार अमल करते हुए, लोगों को एकेश्वरवाद तथा केवल एक अल्लाह की बंदगी की ओर बुलाता रहूँगा। फिर शीघ्र ही तुम्हें पता जल जाएगा कि किस रास्ते का किया अंजाम है।
39:40Page 462
مَن يَأۡتِيهِ عَذَابٞ يُخۡزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيۡهِ عَذَابٞ مُّقِيمٌ ٤٠
To whom will come a torment disgracing him and on whom will descend an enduring punishment."
तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा कि किसपर दुनिया में अपमानकारी यातना आएगी तथा आख़िरत में स्थायी सज़ा उतरेगी, जो न कभी रुकेगी, न कभी खत्म होगी।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences