Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
An-Nisa 4:163–176
4:163Page 104
۞ إِنَّآ أَوۡحَيۡنَآ إِلَيۡكَ كَمَآ أَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ نُوحٖ وَٱلنَّبِيِّـۧنَ مِنۢ بَعۡدِهِۦۚ وَأَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰٓ إِبۡرَٰهِيمَ وَإِسۡمَٰعِيلَ وَإِسۡحَٰقَ وَيَعۡقُوبَ وَٱلۡأَسۡبَاطِ وَعِيسَىٰ وَأَيُّوبَ وَيُونُسَ وَهَٰرُونَ وَسُلَيۡمَٰنَۚ وَءَاتَيۡنَا دَاوُۥدَ زَبُورٗا ١٦٣
Indeed, We have revealed to you, [O Muḥammad], as We revealed to Noah and the prophets after him. And We revealed to Abraham, Ishmael, Isaac, Jacob, the Descendants,1 Jesus, Job, Jonah, Aaron, and Solomon; and to David We gave the book [of Psalms].
हमने (ऐ रसूल!) आपकी ओर वैसे ही वह़्य (प्रकाशना) भेजी है, जैसे कि हमने आपसे पहले के नबियों की ओर वह़्य भेजी थी। इसलिए आप कोई अनोखे रसूल नहीं हैं। चुनाँचे हमने नूह की ओर वह़्य भेजी तथा उनके बाद आने वाले नबियों की ओर वह़्य भेजी, और हमने इबराहीम की ओर, उनके दोनों सुपुत्रों इसमाईल एवं इसहाक़ की ओर, तथा याक़ूब बिन इसहाक़ की ओर और असबात (यानी याक़ूब अलैहिस्सलाम के बेटों से निकलने वाले बनी इसराईल के बारह वंशों में होने वाले नबियों) की ओर वह़्य भेजी। तथा हमने ईसा, अय्यूब, यूनुस, हारून और सुलैमान की ओर वह़्य भेजी, और हमने दाऊद अलैहिस्सलाम को ज़बूर नामी पुस्तक दी।
4:164Page 104
وَرُسُلٗا قَدۡ قَصَصۡنَٰهُمۡ عَلَيۡكَ مِن قَبۡلُ وَرُسُلٗا لَّمۡ نَقۡصُصۡهُمۡ عَلَيۡكَۚ وَكَلَّمَ ٱللَّهُ مُوسَىٰ تَكۡلِيمٗا ١٦٤
And [We sent] messengers about whom We have related [their stories] to you before and messengers about whom We have not related to you. And Allāh spoke to Moses with [direct] speech.
हमने कुछ रसूल ऐसे भेजे, जिनके वृत्तांत हमने आपसे क़ुरआन में बयान कर दिए हैं, तथा कुछ रसूल ऐसे भेजे जिनके बारे में हमने आपसे उसमें कुछ बयान नहीं किया और किसी हिकमत के तहत उसमें उनका उल्लेख करना छोड़ दिया। तथा अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम से उनके सम्मान में उन्हें नबी बनाने के संबंध में - बिना मध्यस्थता के - वास्तविक रूप से बात की, जैसा उसकी महिमा के योग्य है।
4:165Page 104
رُّسُلٗا مُّبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ لِئَلَّا يَكُونَ لِلنَّاسِ عَلَى ٱللَّهِ حُجَّةُۢ بَعۡدَ ٱلرُّسُلِۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمٗا ١٦٥
[We sent] messengers as bringers of good tidings and warners so that mankind will have no argument against Allāh after the messengers. And ever is Allāh Exalted in Might and Wise.
हमने उन्हें अल्लाह पर ईमान लाने वालों को अच्छे प्रतिफल की शुभ सूचना देने वाला तथा उसके साथ कुफ़्र करने वालों को दर्दनाक यातना से डराने वाला बनाकर भेजा, ताकि रसूलों को भेजने के बाद लोगों के लिए अल्लाह के ख़िलाफ़ कोई तर्क न रह जाए, जिसे वे बहाना बना सकें। तथा अल्लाह अपने राज्य में प्रभुत्वशाली, अपने फ़ैसले में हिकमत वाला है।
4:166Page 104
لَّٰكِنِ ٱللَّهُ يَشۡهَدُ بِمَآ أَنزَلَ إِلَيۡكَۖ أَنزَلَهُۥ بِعِلۡمِهِۦۖ وَٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ يَشۡهَدُونَۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًا ١٦٦
But Allāh bears witness to that which He has revealed to you. He has sent it down with His knowledge, and the angels bear witness [as well]. And sufficient is Allāh as Witness.
यदि यहूद आपका इनकार करते हैं, तो अल्लाह उस क़ुरआन की प्रामाणिकता के संबंध में आपकी पुष्टि करता है, जो उसने (ऐ रसूल!) आपकी ओर उतारा है। अल्लाह ने उसमें अपना वह ज्ञान उतारा है, जिससे वह अपने बंदों को अवगत कराना चाहता है, कि वह किन चीज़ों को पसंद करता और उनसे प्रसन्न होता है या किन चीज़ों को नापसंद करता और उनसे नफरता करता है। अल्लाह की गवाही के साथ फ़रिश्ते भी उसकी सच्चाई की गवाही देते हैं जो आप लेकर आए हैं। तथा अल्लाह गवाह के रूप में पर्याप्त है। क्योंकि उसकी गवाही के बाद किसी दूसरे की गवाही की ज़रूरत नहीं।
4:167Page 104
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَصَدُّواْ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ قَدۡ ضَلُّواْ ضَلَٰلَۢا بَعِيدًا ١٦٧
Indeed, those who disbelieve and avert [people] from the way of Allāh have certainly gone far astray.
निःसंदेह जिन लोगों ने आपके नबी होने का इनकार किया और लोगों को इस्लाम के मार्ग से रोका, निश्चय वे सत्य से बहुत दूर जा पड़े।
4:168Page 104
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَظَلَمُواْ لَمۡ يَكُنِ ٱللَّهُ لِيَغۡفِرَ لَهُمۡ وَلَا لِيَهۡدِيَهُمۡ طَرِيقًا ١٦٨
Indeed, those who disbelieve and commit wrong [or injustice] - never will Allāh forgive them, nor will He guide them to a path,
जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलों के साथ कुफ़्र किया और कुफ़्र पर बने रहकर ख़ुद पर ज़ुल्म किया, अल्लाह उनके कुफ़्र पर अटल रहने को कभी क्षमा नहीं करेगा, और न ही उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने वाला मार्ग दर्शाएगा।
4:169Page 104
إِلَّا طَرِيقَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٗا ١٦٩
Except the path of Hell; they will abide therein forever. And that, for Allāh, is [always] easy.
सिवाय उस रास्ते के जो जहन्नम में प्रवेश की ओर ले जाता है, जिसमें वे सदा-सर्वदा रहने वाले हैं। और यह काम अल्लाह के लिए बहुत ही आसान है, क्योंकि कोई भी चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती।
4:170Page 104
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدۡ جَآءَكُمُ ٱلرَّسُولُ بِٱلۡحَقِّ مِن رَّبِّكُمۡ فَـَٔامِنُواْ خَيۡرٗا لَّكُمۡۚ وَإِن تَكۡفُرُواْ فَإِنَّ لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمٗا ١٧٠
O mankind, the Messenger has come to you with the truth from your Lord, so believe; it is better for you. But if you disbelieve - then indeed, to Allāh belongs whatever is in the heavens and earth. And ever is Allāh Knowing and Wise.
ऐ लोगो! रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम तुम्हारे पास मार्गदर्शन और सत्य धर्म के साथ अल्लाह की ओर से आए हैं। अतः वह तुम्हारे पास जो कुछ लाए हैं उसपर ईमान ले आओ, यह दुनिया तथा आख़िरत में तुम्हारे लिए बेहतर होगा। यदि तुम अल्लाह के साथ कुफ़्र करते हो, तो अल्लाह तुम्हारे ईमान से बेनियाज़ है, तुम्हारा कुफ़्र करना उसे नुक़सान नहीं पहुँचाएगा। क्योंकि जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में तथा इन दोनों के बीच है, सब उसके अधिकार में है। तथा अल्लाह उसके बारे में जानने वाला है जो मार्गदर्शन का पात्र है, इसलिए उसके लिए मार्गदर्शन को आसान बना देता है, और जो उसका हक़दार नहीं है, इसलिए उसे उससे अंधा कर देता है। वह अपनी बातों, कार्यों, विधान और नियति में पूर्ण हिकमत वाला है।
4:171Page 105
يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لَا تَغۡلُواْ فِي دِينِكُمۡ وَلَا تَقُولُواْ عَلَى ٱللَّهِ إِلَّا ٱلۡحَقَّۚ إِنَّمَا ٱلۡمَسِيحُ عِيسَى ٱبۡنُ مَرۡيَمَ رَسُولُ ٱللَّهِ وَكَلِمَتُهُۥٓ أَلۡقَىٰهَآ إِلَىٰ مَرۡيَمَ وَرُوحٞ مِّنۡهُۖ فَـَٔامِنُواْ بِٱللَّهِ وَرُسُلِهِۦۖ وَلَا تَقُولُواْ ثَلَٰثَةٌۚ ٱنتَهُواْ خَيۡرٗا لَّكُمۡۚ إِنَّمَا ٱللَّهُ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ سُبۡحَٰنَهُۥٓ أَن يَكُونَ لَهُۥ وَلَدٞۘ لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ وَكِيلٗا ١٧١
O People of the Scripture, do not commit excess in your religion1 or say about Allāh except the truth. The Messiah, Jesus the son of Mary, was but a messenger of Allāh and His word which He directed to Mary and a soul [created at a command] from Him. So believe in Allāh and His messengers. And do not say, "Three"; desist - it is better for you. Indeed, Allāh is but one God. Exalted is He above having a son. To Him belongs whatever is in the heavens and whatever is on the earth. And sufficient is Allāh as Disposer of affairs.
(ऐ रसूल!) आप इंजील वाले ईसाइयों से कह दें : तुम अपने धर्म में सीमा से परे मत जाओ तथा ईसा अलैहिस्सलाम के बारे में अल्लाह पर सत्य के अलावा कुछ भी न कहो। मरयम के बेटे ईसा मसीह अलैहिस्सलाम केवल अल्लाह के रसूल हैं, जिन्हें उसने सच्चाई के साथ भेजा। अल्लाह ने उन्हें अपने उस शब्द से पैदा किया, जिसे उसने जिबरील के साथ मरयम के पास भेजा। वह शब्द उसका 'कुन' (अर्थात् हो जा) कहना था, तो वह हो गए। यह दरअसल अल्लाह की ओर से एक फूँक थी, जो जिबरील ने अल्लाह की आज्ञा से (फूँक) मारी थी। अतः अल्लाह और उसके सभी रसूलों पर बिना किसी भेद (अंतर) के ईमान लाओ और यह मत कहो कि पूज्य तीन हैं। इस झूठी और भ्रष्ट बात से बाज़ आ जाओ! तुम्हारा इसे त्यागना तुम्हारे लिए दुनिया और आख़िरत में बेहतर होगा। अल्लाह केवल एक ही पूज्य है। वह साझी तथा संतान से सर्वोच्च है। क्योंकि वह हर चीज़ से बेनियाज़ है, जो कुछ आकाशों एवं धरती तथा उन दोनों के बीच में है, उन सबका मालिक वही है। तथा आकाशों और धरती की सारी चीज़ों के संरक्षक और उनके प्रबंधक के रूप में अल्लाह काफ़ी है।
4:172Page 105
لَّن يَسۡتَنكِفَ ٱلۡمَسِيحُ أَن يَكُونَ عَبۡدٗا لِّلَّهِ وَلَا ٱلۡمَلَٰٓئِكَةُ ٱلۡمُقَرَّبُونَۚ وَمَن يَسۡتَنكِفۡ عَنۡ عِبَادَتِهِۦ وَيَسۡتَكۡبِرۡ فَسَيَحۡشُرُهُمۡ إِلَيۡهِ جَمِيعٗا ١٧٢
Never would the Messiah disdain to be a servant of Allāh, nor would the angels near [to Him]. And whoever disdains His worship and is arrogant - He will gather them to Himself all together.
ईसा बिन मरयम अलैहिस्सलाम अल्लाह का बंदा होने से कदापि उपेक्षा और संकोच नहीं करेंगे, और न ही वे फ़रिश्ते जिन्हें अल्लाह ने अपना निकटवर्ती बनाया और उनके पद को ऊँचा किया है, अल्लाह के बंदे होने से उपेक्षा करते हैं। तो फिर तुम ईसा को एक पूज्य कैसे बनाते हो?! तथा शिर्क करने वाले लोग फ़रिश्तों को पूज्य कैसे बनाते हैं?! जो कोई भी अल्लाह की इबादत से उपेक्षा करे और अपने को उससे ऊँचा समझे, तो (ज्ञात रहना चाहिए कि) अल्लाह क़ियामत के दिन सबको अपने पास इकट्ठा करेगा और वह हर एक को वह प्रतिफल देगा, जिसके वह योग्य है।
4:173Page 105
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَيُوَفِّيهِمۡ أُجُورَهُمۡ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضۡلِهِۦۖ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ ٱسۡتَنكَفُواْ وَٱسۡتَكۡبَرُواْ فَيُعَذِّبُهُمۡ عَذَابًا أَلِيمٗا وَلَا يَجِدُونَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيّٗا وَلَا نَصِيرٗا ١٧٣
And as for those who believed and did righteous deeds, He will give them in full their rewards and grant them extra from His bounty. But as for those who disdained and were arrogant, He will punish them with a painful punishment, and they will not find for themselves besides Allāh any protector or helper.
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उसके रसूलों को सच्चा माना तथा विशुद्ध रूप से अल्लाह के लिए, उसके बताए हुए तरीक़े के अनुसार अच्छे कार्य किए, तो अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का प्रतिफल बिना कम किए देगा, तथा अपने अनुग्रह और उपकार से उन्हें उससे अधिक भी देगा। परंतु जिन लोगों ने अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञाकारिता से उपेक्षा किया तथा अहंकार करते हुए अपने आपको उससे ऊँचा समझा, तो वह उन्हें दर्दनाक यातना देगा। तथा वे अल्लाह के सिवा किसी को नहीं पाएँगे, जो उनका संरक्षक बनकर उन्हें लाभ पहुँचाए और मददगार बनकर उन्हें नुक़सान से बचा सके।
4:174Page 105
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ قَدۡ جَآءَكُم بُرۡهَٰنٞ مِّن رَّبِّكُمۡ وَأَنزَلۡنَآ إِلَيۡكُمۡ نُورٗا مُّبِينٗا ١٧٤
O mankind, there has come to you a conclusive proof from your Lord, and We have sent down to you a clear light.1
ऐ लोगो! तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक स्पष्ट तर्क आया है, जो बहाने को काट देता है और शक को दूर कर देता है - और वह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं - तथा हमने तुम्हारी ओर एक स्पष्ट प्रकाश उतारा है, जो कि यह क़ुरआन है।
4:175Page 105
فَأَمَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ بِٱللَّهِ وَٱعۡتَصَمُواْ بِهِۦ فَسَيُدۡخِلُهُمۡ فِي رَحۡمَةٖ مِّنۡهُ وَفَضۡلٖ وَيَهۡدِيهِمۡ إِلَيۡهِ صِرَٰطٗا مُّسۡتَقِيمٗا ١٧٥
So those who believe in Allāh and hold fast to Him - He will admit them to mercy from Himself and bounty and guide them to Himself on a straight path.
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और उस क़ुरआन को मज़बूती से पकड़ लिया, जो उनके नबी पर उतारा गया है, तो अल्लाह उनपर दया करते हुए उन्हें जन्नत में दाखिल करेगा। तथा उनके प्रतिफल को बढ़ा देगा और उनके दर्जों को ऊँचा करेगा, तथा उन्हें सीधे मार्ग पर चलने का सामर्थ्य प्रदान करेगा, जिसमें कोई टेढ़ नहीं, जो कि वह रास्ता है जो सदा निवास के बाग़ों की ओर ले जाने वाला है।
4:176Page 106
يَسۡتَفۡتُونَكَ قُلِ ٱللَّهُ يُفۡتِيكُمۡ فِي ٱلۡكَلَٰلَةِۚ إِنِ ٱمۡرُؤٌاْ هَلَكَ لَيۡسَ لَهُۥ وَلَدٞ وَلَهُۥٓ أُخۡتٞ فَلَهَا نِصۡفُ مَا تَرَكَۚ وَهُوَ يَرِثُهَآ إِن لَّمۡ يَكُن لَّهَا وَلَدٞۚ فَإِن كَانَتَا ٱثۡنَتَيۡنِ فَلَهُمَا ٱلثُّلُثَانِ مِمَّا تَرَكَۚ وَإِن كَانُوٓاْ إِخۡوَةٗ رِّجَالٗا وَنِسَآءٗ فَلِلذَّكَرِ مِثۡلُ حَظِّ ٱلۡأُنثَيَيۡنِۗ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمۡ أَن تَضِلُّواْۗ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمُۢ ١٧٦
They request from you a [legal] ruling. Say, "Allāh gives you a ruling concerning one having neither descendants nor ascendants [as heirs]." If a man dies, leaving no child but [only] a sister, she will have half of what he left. And he inherits from her if she [dies and] has no child. But if there are two sisters [or more], they will have two thirds of what he left. If there are both brothers and sisters, the male will have the share of two females.1 Allāh makes clear to you [His law], lest you go astray. And Allāh is Knowing of all things.
(ऐ रसूल!) लोग आपसे पूछते हैं कि आप उन्हें 'कलाला' की विरासत के विषय में शरई हुक्म से सूचित करें। 'कलाला' उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसकी मृत्यु हो जाए और उसने पिता या कोई संतान न छोड़ी हो। आप कह दीजिए : अल्लाह उसका हुक्म बयान करता है : यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए और उसका न पिता जीवित हो न कोई संतान हो, जबकि उसकी कोई सगी अथवा बाप शरीक बहन हो, तो बहन को फ़र्ज़ (क़ुरआन में निर्दिष्ट हिस्से) के रूप में छोड़े हुए धन का आधा हिस्सा मिलेगा। तथा उसका सगा या अल्लाती (बाप शरीक) भाई 'असबा' (जिस का हिस्सा निर्दिष्ट न हो) के तौर पर उसके छोड़े हुए धन का वारिस होगा, यदि उसके साथ कोई फ़र्ज़ (निर्दिष्ट हिस्से) वाला न हो। किंतु यदि उसके साथ कोई फ़र्ज़ (निर्दिष्ट हिस्से) वाला मौजूद हो, तो वह उसका हिस्सा निकालने के बाद शेष धन का वारिस होगा। यदि सगी या बाप शरीक बहनें एक से अधिक हों, तो फ़र्ज़ (निर्दिष्ट हिस्से) के रूप में उन्हें दो-तिहाई मिलेगा। तथा यदि सगे या बाप शरीक भाई और बहन दोनों हों, तो वे 'असबा' के रूप में "पुरुष के लिए दो महिलाओं के बराबर हिस्सा है।" के नियम के अनुसार वारिस होंगे इस प्रकार कि उनमें से पुरुष का हिस्सा महिला के हिस्से का दोगुना होगा। अल्लाह तुम्हारे लिए 'कलाला' का नियम तथा विरासत के अन्य प्रावधान स्पष्ट रूप से बयान करता है, ताकि तुम उसके मामले में पथभ्रष्ट न हो जाओ, और अल्लाह हर चीज़ को जानने वाला है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences