Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Al-Ma'idah 5:58–91
5:58Page 118
وَإِذَا نَادَيۡتُمۡ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ ٱتَّخَذُوهَا هُزُوٗا وَلَعِبٗاۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ قَوۡمٞ لَّا يَعۡقِلُونَ ٥٨
And when you call to prayer, they take it in ridicule and amusement. That is because they are a people who do not use reason.
इसी तरह, वे उस समय (भी) मज़ाक उड़ाते और खेलते हैं, जब तुम नमाज़ के लिए अज़ान देते हो, जो कि अल्लाह की निकटता का सबसे महान कार्य है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह की उपासना के अर्थ और उन विधानों को नहीं समझते जो उसने लोगों के लिए बनाए हैं।
5:59Page 118
قُلۡ يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ هَلۡ تَنقِمُونَ مِنَّآ إِلَّآ أَنۡ ءَامَنَّا بِٱللَّهِ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡنَا وَمَآ أُنزِلَ مِن قَبۡلُ وَأَنَّ أَكۡثَرَكُمۡ فَٰسِقُونَ ٥٩
Say, "O People of the Scripture, do you resent us except [for the fact] that we have believed in Allāh and what was revealed to us and what was revealed before and because most of you are defiantly disobedient?"
(ऐ रसूल!) आप अह्ले किताब के उपहास करने वालों से कह दें : क्या तुम हमें केवल इस बात का दोष देते हो कि हम अल्लाह पर ईमान लाए, और उसपर जो हमारी ओर उतारा गया और उसपर भी जो हमसे पहले के लोगों पर उतारा गया, तथा इस बात पर ईमान लाए कि तुममें से अधिकांश लोग ईमान और आदेशों का पालन छोड़कर अल्लाह की आज्ञाकारिता से बाहर हैं?! इस तरह तुम हमें जिस चीज़ का दोष देते हो, वह हमारे लिए प्रशंसा की बात है, निंदनीय नहीं।
5:60Page 118
قُلۡ هَلۡ أُنَبِّئُكُم بِشَرّٖ مِّن ذَٰلِكَ مَثُوبَةً عِندَ ٱللَّهِۚ مَن لَّعَنَهُ ٱللَّهُ وَغَضِبَ عَلَيۡهِ وَجَعَلَ مِنۡهُمُ ٱلۡقِرَدَةَ وَٱلۡخَنَازِيرَ وَعَبَدَ ٱلطَّٰغُوتَۚ أُوْلَٰٓئِكَ شَرّٞ مَّكَانٗا وَأَضَلُّ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ ٦٠
Say, "Shall I inform you of [what is] worse than that1 as penalty from Allāh? [It is that of] those whom Allāh has cursed and with whom He became angry and made of them apes and pigs and slaves of ṭāghūt.2 Those are worse in position and further astray from the sound way."
(ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या मैं तुम्हें उन लोगों के बारे में बताऊँ, जो इनकी तुलना में दोष के अधिक योग्य हैं और अधिक कठोर सज़ा के हक़दार हैं? वे इनके पूर्वज ही हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से निकाल दिया, उनपर क्रोधित हुआ, उन्हें विरूपण के बाद वानर और सूअर बना दिया और उनमें से कुछ लोगों को ताग़ूत का पुजारी बना दिया। 'ताग़ूत' कहते हैं जिसकी अल्लाह के अलावा इस हाल में पूजा कि जाए कि वह उससे सहमत हो। ये लोग जिनका उल्लेख किया गया है, क़ियामत के दिन सबसे खराब स्थिति में होंगे, तथा सीधे रास्ते से बहुत भटके हुए होंगे।
5:61Page 118
وَإِذَا جَآءُوكُمۡ قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَقَد دَّخَلُواْ بِٱلۡكُفۡرِ وَهُمۡ قَدۡ خَرَجُواْ بِهِۦۚ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِمَا كَانُواْ يَكۡتُمُونَ ٦١
And when they come to you, they say, "We believe." But they have entered with disbelief [in their hearts], and they have certainly left with it. And Allāh is most knowing of what they were concealing.
(ऐ ईमान वालो!) जब उनमें से मुनाफ़िक़ लोग तुम्हारे पास आते हैं, तो वे अपने निफ़ाक़ के कारण तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वे प्रवेश करते और निकलते समय कुफ़्र में लिप्त होते हैं, उससे अलग नहीं होते। तथा अल्लाह उस कुफ़्र को अच्छी तरह जानता है जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं, यदि वे तुम्हारे सामने ईमान को ज़ाहिर करते हैं और वह शीघ्र ही उन्हें उसका प्रतिफल देगा।
5:62Page 118
وَتَرَىٰ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ يُسَٰرِعُونَ فِي ٱلۡإِثۡمِ وَٱلۡعُدۡوَٰنِ وَأَكۡلِهِمُ ٱلسُّحۡتَۚ لَبِئۡسَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ٦٢
And you see many of them hastening into sin and aggression and the devouring of [what is] unlawful. How wretched is what they have been doing.
(ऐ रसूल!) आप देखेंगे कि बहुत से यहूदी और मुनाफ़िक़ पाप करने के लिए जल्दी करते हैं, जैसे कि झूठ बोलना, दूसरों पर अत्याचार करना और लोगों के माल को निषिद्ध तरीक़े से खाना। बहुत बुरा है जो कुछ वे कर रहे हैं।
5:63Page 118
لَوۡلَا يَنۡهَىٰهُمُ ٱلرَّبَّٰنِيُّونَ وَٱلۡأَحۡبَارُ عَن قَوۡلِهِمُ ٱلۡإِثۡمَ وَأَكۡلِهِمُ ٱلسُّحۡتَۚ لَبِئۡسَ مَا كَانُواْ يَصۡنَعُونَ ٦٣
Why do the rabbis and religious scholars not forbid them from saying what is sinful and devouring what is unlawful? How wretched is what they have been practicing.
उनके इमाम (पथ-प्रदर्शक) और विद्वान उन्हें झूठ बोलने, झूठी गवाही देने तथा अवैध रूप से लोगों का धन खाने से क्यों नहीं रोकते? उनके इमामों और विद्वानों का रवैया जो उन्हें बुराई करने से मना नहीं करते, बहुत बुरा है।
5:64Page 118
وَقَالَتِ ٱلۡيَهُودُ يَدُ ٱللَّهِ مَغۡلُولَةٌۚ غُلَّتۡ أَيۡدِيهِمۡ وَلُعِنُواْ بِمَا قَالُواْۘ بَلۡ يَدَاهُ مَبۡسُوطَتَانِ يُنفِقُ كَيۡفَ يَشَآءُۚ وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُم مَّآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ طُغۡيَٰنٗا وَكُفۡرٗاۚ وَأَلۡقَيۡنَا بَيۡنَهُمُ ٱلۡعَدَٰوَةَ وَٱلۡبَغۡضَآءَ إِلَىٰ يَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ كُلَّمَآ أَوۡقَدُواْ نَارٗا لِّلۡحَرۡبِ أَطۡفَأَهَا ٱللَّهُۚ وَيَسۡعَوۡنَ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَسَادٗاۚ وَٱللَّهُ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُفۡسِدِينَ ٦٤
And the Jews say, "The hand of Allāh is chained."1 Chained are their hands, and cursed are they for what they say. Rather, both His hands are extended; He spends however He wills. And that which has been revealed to you from your Lord will surely increase many of them in transgression and disbelief. And We have cast among them animosity and hatred until the Day of Resurrection. Every time they kindled the fire of war [against you], Allāh extinguished it. And they strive throughout the land [causing] corruption, and Allāh does not like corrupters.
जब यहूदी कठिनाई और अकाल से पीड़ित हुए, तो कहने लगे : अल्लाह का हाथ दान करने तथा प्रदान करने से रुका हुआ है, उसके पास जो कुछ है उसे हमसे रोक रखा है। सुन लो, उनके हाथ भलाई करने और दान करने से बाँध दिए गए, और वे अपने इस कथन के कारण अल्लाह की दया से वंचित कर दिए गए। बल्कि अल्लाह सर्वशक्तिमान के दोनों हाथ भलाई और दान के साथ खुले हुए हैं, वह जैसे चाहता है, खर्च करता है। कभी विस्तार करता और कभी तंगी करता है। न कोई उसे रोकने वाला है, न कोई मजबूर करने वाला। और (ऐ रसूल!) आपकी ओर जो उतारा गया है, वह यहूदियों को सीमा के उल्लंघन और इनकार ही में बढ़ाता है; क्योंकि उनके दिल ईर्ष्या से भरे हुए हैं। तथा हमने यहूदियों के संप्रदायों के बीच शत्रुता और द्वेष डाल दिया। जब भी वे युद्ध के लिए इकट्ठे होते हैं और उसकी तैयारी करते हैं या उसे भड़काने की साज़िश रचते हैं, तो अल्लाह उन्हें तितर-बितर कर देता है और उनकी शक्ति छीन लेता है। तथा वे निरंतर ऐसा कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे धरती पर उपद्रव हो, जैसे कि इस्लाम को खत्म करने और उसके विरुद्ध साज़िश रचने का प्रयास। और अल्लाह उपद्रव करने वालों से प्रेम नहीं करता।
5:65Page 119
وَلَوۡ أَنَّ أَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ ءَامَنُواْ وَٱتَّقَوۡاْ لَكَفَّرۡنَا عَنۡهُمۡ سَيِّـَٔاتِهِمۡ وَلَأَدۡخَلۡنَٰهُمۡ جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ ٦٥
And if only the People of the Scripture had believed and feared Allāh, We would have removed from them their misdeeds and admitted them to Gardens of Pleasure.
यदि यहूदी और ईसाई मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा लाई हुई शरीयत पर ईमान ले आते तथा पापों से बचकर अल्लाह से डरते, तो हम अवश्य उनके द्वारा किए गए पापों को उनसे दूर कर देते, भले ही वे बहुत थे। तथा हम अवश्य उन्हें क़ियामत के दिन नेमतों वाली जन्नतों में दाख़िल करते, जिसमें वे निर्बाध नेमतों का आनंद लेते।
5:66Page 119
وَلَوۡ أَنَّهُمۡ أَقَامُواْ ٱلتَّوۡرَىٰةَ وَٱلۡإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِم مِّن رَّبِّهِمۡ لَأَكَلُواْ مِن فَوۡقِهِمۡ وَمِن تَحۡتِ أَرۡجُلِهِمۚ مِّنۡهُمۡ أُمَّةٞ مُّقۡتَصِدَةٞۖ وَكَثِيرٞ مِّنۡهُمۡ سَآءَ مَا يَعۡمَلُونَ ٦٦
And if only they had upheld [the law of] the Torah, the Gospel, and what has been revealed to them from their Lord [i.e., the Qur’ān], they would have consumed [provision] from above them and from beneath their feet.1 Among them are a moderate [i.e., acceptable] community, but many of them - evil is that which they do.
यदि यहूदी उसके अनुसार काम करते जो तौरात में है, तथा ईसाई उसके अनुसार काम करते जो इंजील में है और वे सभी उसके अनुसार काम करते जो उनपर क़ुरआन उतारा गया है - तो मैं उनके लिए बारिश उतारने और अन्न उगाने जैसे जीविका के साधन सुगम कर देता। किताब वालों में से कुछ लोग सत्य पर स्थिर मध्यम मार्ग वाले हैं। जबकि उनमें से बहुत से लोग ईमान न होने के कारण बुरे कार्य करने वाले हैं।
5:67Page 119
۞ يَٰٓأَيُّهَا ٱلرَّسُولُ بَلِّغۡ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَۖ وَإِن لَّمۡ تَفۡعَلۡ فَمَا بَلَّغۡتَ رِسَالَتَهُۥۚ وَٱللَّهُ يَعۡصِمُكَ مِنَ ٱلنَّاسِۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ ٦٧
O Messenger, announce that which has been revealed to you from your Lord, and if you do not, then you have not conveyed His message. And Allāh will protect you from the people. Indeed, Allāh does not guide the disbelieving people.
ऐ रसूल! जो कुछ आपके पालनहार की ओर से आपपर उतारा गया है, उसे पूरी तरह से पहुँचा दें, उसमें से कुछ भी न छिपाएँ। यदि आपने उसमें से कुछ भी छिपा लिया, तो आप अपने रब के संदेश को पहुँचाने वाले नहीं माने जाएँगे। (वस्तुतः अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर उस चीज़ को पहुँचा दिया है, जिसके पहुँचाने का आपको आदेश दिया गया था। अतः जो कोई भी इसके विपरीत दावा करे, तो निःसंदेह उसने अल्लाह के खिलाफ़ सबसे बड़ा झूठ बोला है)। तथा अल्लाह आज के बाद लोगों से आपकी रक्षा करेगा। इसलिए वे आप तक बुराई के साथ नहीं पहुँच सकते। अतः आपका काम केवल पहुँचा देना है। और अल्लाह उन काफ़िरों को मार्गदर्शन नहीं प्रदान करता, जो मार्गदर्शन नहीं चाहते हैं।
5:68Page 119
قُلۡ يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لَسۡتُمۡ عَلَىٰ شَيۡءٍ حَتَّىٰ تُقِيمُواْ ٱلتَّوۡرَىٰةَ وَٱلۡإِنجِيلَ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡكُم مِّن رَّبِّكُمۡۗ وَلَيَزِيدَنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُم مَّآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَ طُغۡيَٰنٗا وَكُفۡرٗاۖ فَلَا تَأۡسَ عَلَى ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡكَٰفِرِينَ ٦٨
Say, "O People of the Scripture, you are [standing] on nothing until you uphold [the law of] the Torah, the Gospel, and what has been revealed to you from your Lord [i.e., the Qur’ān]." And that which has been revealed to you from your Lord will surely increase many of them in transgression and disbelief. So do not grieve over the disbelieving people.
(ऐ रसूल!) आप कह दें : (ऐ यहूदियो तथा ईसाइयो!) तुम धर्म की किसी गणनीय चीज़ पर नहीं हो, यहाँ तक कि तुम उसके अनुसार काम करो जो कुछ तौरात और इंजील में है तथा उस क़ुरआन पर अमल करो जो तुमपर उतारा गया है, कि जिसपर ईमान लाए और उसकी शिक्षाओं पर अमल किए बिना तुम्हारा ईमान सही नहीं हो सकता। तथा निश्चय ही आपकी ओर आपके पालनहार की तरफ़ से जो पुस्तक उतारी गई है, वह बहुत से किताब वालों को, उनकी ईर्ष्या के कारण, सरकशी और कुफ़्र में अवश्य बढ़ा देगी।अतः आप इन काफ़िरों पर खेद न करें। तथा ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करने वाले हैं, वही आपके लिए काफ़ी हैं।
5:69Page 119
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَٱلَّذِينَ هَادُواْ وَٱلصَّٰبِـُٔونَ وَٱلنَّصَٰرَىٰ مَنۡ ءَامَنَ بِٱللَّهِ وَٱلۡيَوۡمِ ٱلۡأٓخِرِ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا فَلَا خَوۡفٌ عَلَيۡهِمۡ وَلَا هُمۡ يَحۡزَنُونَ ٦٩
Indeed, those who have believed [in Prophet Muḥammad (ﷺ)] and those [before him (ﷺ)] who were Jews or Sabeans or Christians - those [among them] who believed in Allāh and the Last Day and did righteousness - no fear will there be concerning them, nor will they grieve.1
मोमिन, यहूदी, साबी (ये किसी नबी को मानने वालों का एक समूह था) तथा ईसाई, इनमें से जो कोई भी अल्लाह तथा अंतिम दिन पर ईमान लाए और अच्छे कर्म करे, तो ऐसे लोगों को उस चीज़ के बारे में जिसका वे सामना करने वाले हैं न कोई भय है, और न ही दुनिया में से जो चीज़ उनसे छूट गई है, उसके लिए उन्हें कोई मलाल होगा।
5:70Page 119
لَقَدۡ أَخَذۡنَا مِيثَٰقَ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ وَأَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمۡ رُسُلٗاۖ كُلَّمَا جَآءَهُمۡ رَسُولُۢ بِمَا لَا تَهۡوَىٰٓ أَنفُسُهُمۡ فَرِيقٗا كَذَّبُواْ وَفَرِيقٗا يَقۡتُلُونَ ٧٠
We had already taken the covenant of the Children of Israel and had sent to them messengers. Whenever there came to them a messenger with what their souls did not desire, a party [of messengers] they denied, and another party they killed.
हमने बनी इसराईल से सुनने और मानने का दृढ़ वचन लिया, और हमने उनकी ओर रसूल भेजे ताकि उन्हें अल्लाह की शरीयत (नियम) पहुँचाएँ। परंतु उन्होंने उस वचन को तोड़ दिया जो उनसे लिया गया था, तथा उन्होंने अपनी इच्छाओं के पीछे चलते हुए उस चीज़ से उपेक्षा की जो उनके रसूल उनके पास लेकर आए थे, तथा उनमें से कुछ को झुठला दिया तथा कुछ को क़त्ल कर दिया।
5:71Page 120
وَحَسِبُوٓاْ أَلَّا تَكُونَ فِتۡنَةٞ فَعَمُواْ وَصَمُّواْ ثُمَّ تَابَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمۡ ثُمَّ عَمُواْ وَصَمُّواْ كَثِيرٞ مِّنۡهُمۡۚ وَٱللَّهُ بَصِيرُۢ بِمَا يَعۡمَلُونَ ٧١
And they thought there would be no [resulting] punishment, so they became blind and deaf. Then Allāh turned to them in forgiveness; then [again] many of them became blind and deaf. And Allāh is Seeing of what they do.
उन्होंने सोचा कि उनके अनुबंधों और वचनों को तोड़ने, तथा नबियों को झुठलाने और उन्हें क़त्ल करने के परिणामस्वरूप उन्हें कोई नुक़सान नहीं होगा। परंतु उसका वह परिणाम सामने आया जो उन्होंने नहीं सोचा था। चुनाँचे वे सत्य से अंधे हो गए, उन्हें उसका रास्ता नज़र नहीं आता, तथा वे उसे स्वीकार करने के इरादे से सुनने से बहरे हो गए। फिर अल्लाह ने अपने अनुग्रह से उनकी तौबा क़बूल की। फिर इसके बाद वे पुनः सत्य से अंधे हो गए, और उसे सुनने से बहरे हो गए। उनमें से बहुतों के साथ ऐसा हुआ। तथा वे जो कुछ करते हैं, अल्लाह उसे ख़ूब देखने वाला है। इसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें इसका बदला देगा।
5:72Page 120
لَقَدۡ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلۡمَسِيحُ ٱبۡنُ مَرۡيَمَۖ وَقَالَ ٱلۡمَسِيحُ يَٰبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمۡۖ إِنَّهُۥ مَن يُشۡرِكۡ بِٱللَّهِ فَقَدۡ حَرَّمَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِ ٱلۡجَنَّةَ وَمَأۡوَىٰهُ ٱلنَّارُۖ وَمَا لِلظَّٰلِمِينَ مِنۡ أَنصَارٖ ٧٢
They have certainly disbelieved who say, "Allāh is the Messiah, the son of Mary" while the Messiah has said, "O Children of Israel, worship Allāh, my Lord and your Lord." Indeed, he who associates others with Allāh - Allāh has forbidden him Paradise, and his refuge is the Fire. And there are not for the wrongdoers any helpers.
निःसंदेह उन ईसाइयों ने कुफ़्र किया, जिन्होंने कहा कि "अल्लाह तो ईसा बिन मरयम ही है।" क्योंकि उन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरे को पूज्य बना दिया। जबकि स्वयं ईसा बिन मरयम ने उनसे कहा था : ऐ बनी इसराईल! केवल अल्लाह की इबादत करो। क्योंकि वही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है। इसलिए हम उसके बंदे होने में बराबर हैं। इसका कारण यह है कि जो कोई भी अल्लाह के साथ उसके अलावा किसी भी चीज़ को साझी ठहराता है, तो अल्लाह ने उसे हमेशा के लिए जन्नत में प्रवेश करने से रोक दिया है, और उसका ठिकाना जहन्नम की आग है। उसके लिए अल्लाह के पास न कोई सहायक है, न कोई मददगार, और न ही कोई उद्धारकर्ता है जो उसे उस यातना से बचा सके, जिसकी वह प्रतीक्षा कर रहा है।
5:73Page 120
لَّقَدۡ كَفَرَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ ثَالِثُ ثَلَٰثَةٖۘ وَمَا مِنۡ إِلَٰهٍ إِلَّآ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۚ وَإِن لَّمۡ يَنتَهُواْ عَمَّا يَقُولُونَ لَيَمَسَّنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ ٧٣
They have certainly disbelieved who say, "Allāh is the third of three."1 And there is no god except one God. And if they do not desist from what they are saying, there will surely afflict the disbelievers among them a painful punishment.
उन ईसाइयों ने (भी) कुफ़्र किया, जो कहते हैं : अल्लाह तीन से बना है, वे हैं : पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा। अल्लाह उनकी इन बातों से बहुत बुलंद है। क्योंकि अल्लाह अनेक नहीं है। बल्कि वह केवल एक पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं। यदि वे इस जघन्य बात से नहीं रुके, तो उन्हें एक दर्दनाक यातना पहुँचेगी।
5:74Page 120
أَفَلَا يَتُوبُونَ إِلَى ٱللَّهِ وَيَسۡتَغۡفِرُونَهُۥۚ وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٧٤
So will they not repent to Allāh and seek His forgiveness? And Allāh is Forgiving and Merciful.
तो क्या ये लोग अपनी इस बात से, अल्लाह के समक्ष उससे तौबा करते हुए, पीछे नहीं हटते और उस शिर्क के लिए उससे क्षमा नहीं माँगते जो उन्होंने किया था?! तथा अल्लाह किसी भी गुनाह से तौबा करने वाले को क्षमा कर देने वाला है, भले ही वह गुनाह कुफ़्र ही क्यों न हो, वह ईमान वालों पर बहुत मेहरबान है।
5:75Page 120
مَّا ٱلۡمَسِيحُ ٱبۡنُ مَرۡيَمَ إِلَّا رَسُولٞ قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِهِ ٱلرُّسُلُ وَأُمُّهُۥ صِدِّيقَةٞۖ كَانَا يَأۡكُلَانِ ٱلطَّعَامَۗ ٱنظُرۡ كَيۡفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ ٱلۡأٓيَٰتِ ثُمَّ ٱنظُرۡ أَنَّىٰ يُؤۡفَكُونَ ٧٥
The Messiah, son of Mary, was not but a messenger; [other] messengers have passed on before him. And his mother was a supporter of truth. They both used to eat food.1 Look how We make clear to them the signs; then look how they are deluded.
मरयम के पुत्र ईसा मसीह (अल्लाह के) रसूलों में से एक रसूल के अलावा कुछ नहीं हैं। उन्हें भी उन्हीं रसूलों की तरह मौत से गुज़रना पड़ेगा। तथा उनकी माँ मरयम - अलैहस्सलाम - बहुत सच्ची तथा अल्लाह की बातों की पुष्टि करने वाली थीं और वे दोनों ही खाना खाया करते थे, क्योंकि उन्हें इसकी आवश्यकता थी। फिर भला वे भोजन की आवश्यकता के साथ पूज्य कैसे हो सकते हैं?! (ऐ रसूल!) आप चिंतनशील दृष्टि से देखें : हम उनके लिए उन निशानियों को किस प्रकार खोल-खोलकर बयान करते हैें, जो अल्लाह के एकेश्वरवाद को दर्शाती हैं तथा अल्लाह के अलावा की ओर उलूहियत (पूज्य होने) की निस्बत करने में उनकी अतिशयोक्ति की अमान्यता को इंगित करती हैं। इसके बावजूद वे इन निशानियों की उपेक्षा करते हैं। फिर आप एक चिंतनशील दृष्टि से देखें : अल्लाह के एकत्व को दर्शाने वाली इन स्पष्ट निशानियों के बावजूद, वे किस प्रकार सत्य से पूरी तरह से फेरे जाते हैं।
5:76Page 120
قُلۡ أَتَعۡبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَمۡلِكُ لَكُمۡ ضَرّٗا وَلَا نَفۡعٗاۚ وَٱللَّهُ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ ٧٦
Say, "Do you worship besides Allāh that which holds for you no [power of] harm or benefit while it is Allāh who is the Hearing, the Knowing?"
(ऐ रसूल!) आप उनके अल्लाह के अलावा की इबादत करने में उनके विरुद्ध तर्क देते हुए कह दें : क्या तुम ऐसी चीज़ की इबादत करते हो, जो न तुम्हें कोई लाभ पहुँचा सकती है और न तुमसे कोई नुक़सान दूर कर सकती है?! अतः वह अक्षम और विवश है, और अल्लाह विवशता से पाक है। तथा केवल अल्लाह ही तुम्हारी सभी बातों को सुनने वाला है, इसलिए उनमें से कोई भी चीज़ उससे नहीं छूटती है, तुम्हारे सभी कर्मों को जानने वाला है, इसलिए उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। तथा वह तुम्हें उनका बदला देगा।
5:77Page 121
قُلۡ يَٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لَا تَغۡلُواْ فِي دِينِكُمۡ غَيۡرَ ٱلۡحَقِّ وَلَا تَتَّبِعُوٓاْ أَهۡوَآءَ قَوۡمٖ قَدۡ ضَلُّواْ مِن قَبۡلُ وَأَضَلُّواْ كَثِيرٗا وَضَلُّواْ عَن سَوَآءِ ٱلسَّبِيلِ ٧٧
Say, "O People of the Scripture, do not exceed limits in your religion beyond the truth and do not follow the inclinations of a people who had gone astray before and misled many and have strayed from the soundness of the way."
(ऐ रसूल!) आप ईसाइयों से कह दें : तुम्हें सत्य का अनुसरण करने का जो आदेश दिया गया है, उसमें सीमा से आगे न बढ़ो, तथा तुम्हें जिनके सम्मान का हुक्म दिया गया है (जैसे कि नबी गण), उनका सम्मान करने में अतिशयोक्ति न करो कि उनके बारे में ईश्वरत्व की आस्था रखने लगो, जैसा कि तुमने ईसा बिन मरयम के साथ किया। तुमने ऐसा अपने उन पथभ्रष्ट पूर्वजों का अनुसरण करने के कारण किया है, जिन्होंने बहुत-से लोगों को सीधे मार्ग से भटकाया और खुद भी सत्य के मार्ग से भटक गए।
5:78Page 121
لُعِنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۢ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ عَلَىٰ لِسَانِ دَاوُۥدَ وَعِيسَى ٱبۡنِ مَرۡيَمَۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَواْ وَّكَانُواْ يَعۡتَدُونَ ٧٨
Cursed were those who disbelieved among the Children of Israel by the tongue of David and of Jesus, the son of Mary. That was because they disobeyed and [habitually] transgressed.
अल्लाह तआला बता रहा है कि उसने बनी इसराईल के काफ़िरों को अपनी दया से निष्कासित कर दिया। इसका वर्णन उस किताब में है, जो उसने दाऊद अलैहिस्सलाम पर उतारी अर्थात् ज़बूर, तथा उस किताब में है, जो उसने ईसा बिन मरयम पर अवतिरत की और वह इंजील है। दया से यह निष्कासन उनके द्वारा किए गए पापों और अल्लाह की वर्जनाओं की पवित्रता भंग करने के कारण था।
5:79Page 121
كَانُواْ لَا يَتَنَاهَوۡنَ عَن مُّنكَرٖ فَعَلُوهُۚ لَبِئۡسَ مَا كَانُواْ يَفۡعَلُونَ ٧٩
They used not to prevent one another from wrongdoing that they did. How wretched was that which they were doing.
वे एक-दूसरे को बुराई करने से रोकते नहीं थे। बल्कि उनमें से अवज्ञाकारी लोग उन पापों और बुराइयों को सार्वजनिक रूप से किया करते थे। क्योंकि उन्हें बुराई से रोकने वाला कोई नहीं था। बुराई से रोकना छोड़कर वे बहुत बुरा कर रहे थे।
5:80Page 121
تَرَىٰ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ يَتَوَلَّوۡنَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۚ لَبِئۡسَ مَا قَدَّمَتۡ لَهُمۡ أَنفُسُهُمۡ أَن سَخِطَ ٱللَّهُ عَلَيۡهِمۡ وَفِي ٱلۡعَذَابِ هُمۡ خَٰلِدُونَ ٨٠
You see many of them becoming allies of those who disbelieved [i.e., the polytheists]. How wretched is that which they have put forth for themselves in that Allāh has become angry with them, and in the punishment they will abide eternally.
(ऐ रसूल!) इन यहूदियों में से बहुत-से काफ़िरों को आप देखेंगे कि वे काफ़िरों से प्रेम करते हैं तथा उनकी ओर झुकाव रखते हैं, जबकि वे आपके प्रति शत्रुतापूर्ण हैं और एकेश्वरवादियों से शत्रुता रखते हैं। उनका काफ़िरों से दोस्ती रखने का यह कार्य बहुत बुरा है। क्योंकि यह अल्लाह के उनपर क्रोधित होने और उन्हें नरक की आग में डालने का कारण है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे, वहाँ से वे कभी न निकलेंगे।
5:81Page 121
وَلَوۡ كَانُواْ يُؤۡمِنُونَ بِٱللَّهِ وَٱلنَّبِيِّ وَمَآ أُنزِلَ إِلَيۡهِ مَا ٱتَّخَذُوهُمۡ أَوۡلِيَآءَ وَلَٰكِنَّ كَثِيرٗا مِّنۡهُمۡ فَٰسِقُونَ ٨١
And if they had believed in Allāh and the Prophet and in what was revealed to him, they would not have taken them as allies; but many of them are defiantly disobedient.
यदि ये यहूदी वास्तव में अल्लाह तथा उसके रसूल पर ईमान रखते होते, तो बहुदेववादियों को मित्र न बनाते कि मोमिनों को छोड़कर उनसे प्यार करते और उनकी ओर झुकाव रखते। क्योंकि उन्हें काफ़िरों को दोस्त बनाने से मना किया गया था। लेकिन इन यहूदियों में से बहुत-से लोग अल्लाह की आज्ञाकारिता और उसकी संरक्षकता तथा मोमिनों की संरक्षकता से बाहर हैं।
5:82Page 121
۞ لَتَجِدَنَّ أَشَدَّ ٱلنَّاسِ عَدَٰوَةٗ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱلۡيَهُودَ وَٱلَّذِينَ أَشۡرَكُواْۖ وَلَتَجِدَنَّ أَقۡرَبَهُم مَّوَدَّةٗ لِّلَّذِينَ ءَامَنُواْ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّا نَصَٰرَىٰۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّ مِنۡهُمۡ قِسِّيسِينَ وَرُهۡبَانٗا وَأَنَّهُمۡ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ ٨٢
You will surely find the most intense of the people in animosity toward the believers [to be] the Jews and those who associate others with Allāh; and you will find the nearest of them in affection to the believers those who say, "We are Christians." That is because among them are priests and monks and because they are not arrogant.
(ऐ रसूल!) आप उन लोगों के लिए, जो आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान लाने वाले हैं, सभी लोगों में सबसे बड़ी दुश्मनी रखने वाला यहूदियों को पाएँगे; क्योंकि उनके अंदर द्वेष, ईर्ष्या और अहंकार पाया जाता है, तथा मूर्तिपूजकों और अन्य शिर्क करने वालों को पाएँगे। तथा आप उन लोगों के लिए, जो आपपर और आपकी लाई हुई शरीयत पर ईमान लाने वाले हैं, उनमें से दोस्ती में सबसे निकट उन लोगों को पाएँगे, जो अपने बारे में कहते हैं कि : वे ईसाई हैं। ईमान वालों के साथ उनके स्नेह की निकटता का कारण यह है कि उनमें विद्वान हैं और उपासक हैं। और यह कि वे विनीत हैं, अभिमानी नहीं हैं, क्योंकि अभिमानी के हृदय में अच्छी बात प्रवेश नहीं करती।
5:83Page 122
وَإِذَا سَمِعُواْ مَآ أُنزِلَ إِلَى ٱلرَّسُولِ تَرَىٰٓ أَعۡيُنَهُمۡ تَفِيضُ مِنَ ٱلدَّمۡعِ مِمَّا عَرَفُواْ مِنَ ٱلۡحَقِّۖ يَقُولُونَ رَبَّنَآ ءَامَنَّا فَٱكۡتُبۡنَا مَعَ ٱلشَّٰهِدِينَ ٨٣
And when they hear what has been revealed to the Messenger, you see their eyes overflowing with tears because of what they have recognized of the truth. They say, "Our Lord, we have believed, so register us among the witnesses.
और इन लोगों (जैसे नजाशी और उनके साथियों) के दिल बड़े नरम हैं। यही कारण है कि क़ुरआन का पाठ सुनने के समय जब उन्हें पता चलता है कि वह सत्य है, तो विनम्रता से रोते हैं; क्योंकि वे उसे पहचानते हैं जो ईसा अलैहिस्सलाम लेकर आए थे। वे कहते हैं : ऐ हमारे रब! हम उसपर ईमान लाए, जो तूने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा है। अतः (ऐ हमारे रब!) हमें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत के साथ लिख ले, जो क़ियामत के दिन लोगों के ख़िलाफ हुज्जत (गवाही देने वाले) होंगे।
5:84Page 122
وَمَا لَنَا لَا نُؤۡمِنُ بِٱللَّهِ وَمَا جَآءَنَا مِنَ ٱلۡحَقِّ وَنَطۡمَعُ أَن يُدۡخِلَنَا رَبُّنَا مَعَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلصَّٰلِحِينَ ٨٤
And why should we not believe in Allāh and what has come to us of the truth? And we aspire that our Lord will admit us [to Paradise] with the righteous people."
वह कौन-सा कारण है जो हमें अल्लाह पर तथा उस सत्य पर ईमान लाने से रोकता है, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए हैं?! हालाँकि हम नबियों तथा उनके अनुयायियों के साथ जन्नत में प्रवेश करने की आशा करते हैं, जो अल्लाह के आज्ञाकारी हैं और उसकी सज़ा से डरने वाले हैं।
5:85Page 122
فَأَثَٰبَهُمُ ٱللَّهُ بِمَا قَالُواْ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ وَذَٰلِكَ جَزَآءُ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٨٥
So Allāh rewarded them for what they said1 with gardens [in Paradise] beneath which rivers flow, wherein they abide eternally. And that is the reward of doers of good.
इसलिए अल्लाह ने उनके ईमान लाने तथा सत्य को मानने के बदले में उन्हें ऐसे बाग़ प्रदान किए, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, जिनमें वे सदा सर्वदा के लिए रहेंगे। तथा यही उत्तमता के साथ सत्य का पालन करने और बिना शर्त के उसके अधीन होने वालों का प्रतिफल है।
5:86Page 122
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَحِيمِ ٨٦
But those who disbelieved and denied Our signs - they are the companions of Hellfire.
जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया, तथा अल्लाह की उन आयतों को झुठलाया, जो उसने अपने रसूल पर उतारी थीं, वही लोग सदैव धधकती आग में रहने वाले हैं, वे कभी भी उससे बाहर नहीं निकलेंगे।
5:87Page 122
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تُحَرِّمُواْ طَيِّبَٰتِ مَآ أَحَلَّ ٱللَّهُ لَكُمۡ وَلَا تَعۡتَدُوٓاْۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُحِبُّ ٱلۡمُعۡتَدِينَ ٨٧
O you who have believed, do not prohibit the good things which Allāh has made lawful to you and do not transgress. Indeed, Allāh does not like transgressors.
ऐ ईमान वालो! खाने, पीने और महिलाओं में से आनंददायक वैध चीज़ों को हराम न ठहराओ, उन्हें ज़ुह्द (दुनिया से अरूचि) या उपासना के रूप में निषिद्ध मत करो, तथा उसकी सीमा से आगे न बढ़ो, जो अल्लाह ने तुमपर हराम किया है। निःसंदेह अल्लाह उन लोगों से प्यार नहीं करता, जो उसकी सीमाओं का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वह उनसे नफ़रत करता है।
5:88Page 122
وَكُلُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ حَلَٰلٗا طَيِّبٗاۚ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ ٱلَّذِيٓ أَنتُم بِهِۦ مُؤۡمِنُونَ ٨٨
And eat of what Allāh has provided for you [which is] lawful and good. And fear Allāh, in whom you are believers.
अल्लाह अपनी जीविका में से जो कुछ तुम्हें प्रदान करता है, उसमें से इस हाल में खाओ कि वह हलाल और पवित्र (अच्छी) हो, उस समय नहीं अगर वह हराम हो जैसे कि बलपूर्वक ली गई या गंदी चीज़। तथा अल्लाह से, उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरो। क्योंकि अल्लाह वही है जिसपर तुम ईमान रखते हो और तुम्हारा उसपर ईमान रखना तुम्हारे लिए यह आवश्यक कर देता है कि तुम उससे डरो।
5:89Page 122
لَا يُؤَاخِذُكُمُ ٱللَّهُ بِٱللَّغۡوِ فِيٓ أَيۡمَٰنِكُمۡ وَلَٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا عَقَّدتُّمُ ٱلۡأَيۡمَٰنَۖ فَكَفَّٰرَتُهُۥٓ إِطۡعَامُ عَشَرَةِ مَسَٰكِينَ مِنۡ أَوۡسَطِ مَا تُطۡعِمُونَ أَهۡلِيكُمۡ أَوۡ كِسۡوَتُهُمۡ أَوۡ تَحۡرِيرُ رَقَبَةٖۖ فَمَن لَّمۡ يَجِدۡ فَصِيَامُ ثَلَٰثَةِ أَيَّامٖۚ ذَٰلِكَ كَفَّٰرَةُ أَيۡمَٰنِكُمۡ إِذَا حَلَفۡتُمۡۚ وَٱحۡفَظُوٓاْ أَيۡمَٰنَكُمۡۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ ٱللَّهُ لَكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ٨٩
Allāh will not impose blame upon you for what is meaningless1 in your oaths, but He will impose blame upon you for [breaking] what you intended of oaths. So its expiation2 is the feeding of ten needy people from the average of that which you feed your [own] families or clothing them or the freeing of a slave. But whoever cannot find [or afford it] - then a fast of three days [is required]. That is the expiation for oaths when you have sworn. But guard your oaths.3 Thus does Allāh make clear to you His verses [i.e., revealed law] that you may be grateful.
ऐ मोमिनो! अल्लाह तुमसे उन क़समों का कोई हिसाब नहीं लेगा, जो तुम्हारी ज़बानों पर बिना इरादे के आ जाती हैं। वह केवल तुमसे उस क़सम का हिसाब लेगा, जिसका तुमने दृढ़ निश्चय किया और अपने दिल से उसका पक्का इरादा किया और फिर उसे तोड़ दिया। जब तुम ऐसी क़सम को तोड़ दो, जिसका तुमने दृढ़ निश्चय किया था, तो तीन चीज़ों में से किसी एक चीज़ का करना तुमसे उसके पाप को मिटा देगा : अपने शहर के औसत भोजन से दस ग़रीबों को प्रत्येक ग़रीब के लिए आधा सा' के हिसाब से खाना खिलाना, या उन्हें ऐसे कपड़े पहनाना जो प्रथागत कपड़ा माना जाता है, अथवा एक मोमिन दास मुक्त करना। यदि अपनी क़सम का प्रायश्चित करने वाला इन तीनों चीज़ों में से कोई एक भी न पाए, तो वह अपनी क़सम का प्रायश्चित तीन दिन के रोज़े रखकर करेगा। (ऐ मोमिनो!) यह जिसका उल्लेख किया गया है, तुम्हारी क़समों का प्रायश्चित है - जब तुम अल्लाह की क़सम खा लो और उसे तोड़ दो। तथा अपनी क़समों की हिफ़ाज़त करते हुए अल्लाह की झूठी क़सम खाने से, तथा अल्लाह की बहुत अधिक क़सम खाने से और क़सम को न पूरी करने से बचो, सिवाय इसके कि क़सम पूरी न करना बेहतर हो। तो ऐसी स्थिति में जो कर्म अच्छा हो उसे करो तथा अपनी क़समों का प्रायश्चित करो। जिस प्रकार अल्लाह ने तुम्हारे लिए क़सम का कफ़्फ़ारा वर्णन किया है, उसी तरह वह तुम्हारे लिए हलाल व हराम को स्पष्ट करने वाले प्रावधानों को स्पष्ट करता है, ताकि तुम अल्लाह के आभारी बनो कि उसने तुम्हें उन चीज़ों का ज्ञान प्रदान किया है, जो तुम नहीं जानते थे।
5:90Page 123
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّمَا ٱلۡخَمۡرُ وَٱلۡمَيۡسِرُ وَٱلۡأَنصَابُ وَٱلۡأَزۡلَٰمُ رِجۡسٞ مِّنۡ عَمَلِ ٱلشَّيۡطَٰنِ فَٱجۡتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ ٩٠
O you who have believed, indeed, intoxicants, gambling, [sacrificing on] stone alters [to other than Allāh], and divining arrows are but defilement from the work of Satan, so avoid1 it that you may be successful.
ऐ ईमान वालो! नशा पैदा करने वाली चीज़ जिससे चेतना शून्य हो जाए, जुआ जिसमें दोनों पक्षों की ओर से धन लगा हो, वह पत्थर जिसके पास मुश्रिक लोग उसके सम्मान में जानवर ज़बह करते हैं अथवा जिसे उसकी पूजा करने के लिए लगाते हैं, और पाँसे के तीर जिनके द्वारा वे अपना अनदेखा भाग्य जानने की कोशिश करते थे, ये सब शैतान द्वारा शोभित किए गए पाप के काम हैं। अतः इनसे दूर रहो, ताकि तुम्हें दुनिया में अच्छा जीवन तथा आख़िरत में जन्नत का आनंद प्राप्त हो।
5:91Page 123
إِنَّمَا يُرِيدُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَن يُوقِعَ بَيۡنَكُمُ ٱلۡعَدَٰوَةَ وَٱلۡبَغۡضَآءَ فِي ٱلۡخَمۡرِ وَٱلۡمَيۡسِرِ وَيَصُدَّكُمۡ عَن ذِكۡرِ ٱللَّهِ وَعَنِ ٱلصَّلَوٰةِۖ فَهَلۡ أَنتُم مُّنتَهُونَ ٩١
Satan only wants to cause between you animosity and hatred through intoxicants and gambling and to avert you from the remembrance of Allāh and from prayer. So will you not desist?
मादक पदार्थों तथा जुए को सुंदर बनाकर शैतान का इरादा तो सिर्फ दिलों के बीच दुश्मनी और नफरत पैदा करना, तथा अल्लाह के स्मरण से और नमाज़ से ध्यान भटकाना है। तो क्या तुम (ऐ मोमिनो!) इन बुरे कामों को छोड़ने वाले हो? इसमें कोई संदेह नहीं कि यही तुम्हारे लिए उपयुक्त है, इसलिए बाज़ आ जाओ।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences