Al-MukhtasarQaf · 50:1–45

Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi

ق

Qaf

The Letter "Qaf" · Meccan · 45 ayahs

50:1Page 518

قٓۚ وَٱلۡقُرۡءَانِ ٱلۡمَجِيدِ ١

Qāf.1 By the honored Qur’ān...2

{क़ाफ़} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।। अल्लाह ने महान क़ुरआन की क़सम खाई है क्योंकि उसके अर्थ बहुत व्यापक तथा उसकी भलाइयाँ और बरकतें बहुत अधिक हैं; कि तुम क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए ज़रूर उठाए जाओगे।

50:2Page 518

بَلۡ عَجِبُوٓاْ أَن جَآءَهُم مُّنذِرٞ مِّنۡهُمۡ فَقَالَ ٱلۡكَٰفِرُونَ هَٰذَا شَيۡءٌ عَجِيبٌ ٢

But they wonder that there has come to them a warner from among themselves, and the disbelievers say, "This is an amazing thing.

उनके इनकार करने का कारण यह नहीं था कि वे आपसे झूठ बोलने की उम्मीद करते थे, क्योंकि वे आपकी सच्चाई जानते थे। बल्कि, उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनके पास, फ़रिश्तों में से न होकर, उन्हीं में से एक डराने वाला रसूल आया। उन्होंने आश्चर्य चकित होकर कहा : एक मानव रसूल का हमारे पास आना बड़ी विचित्र बात है!

50:3Page 518

أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابٗاۖ ذَٰلِكَ رَجۡعُۢ بَعِيدٞ ٣

When we have died and have become dust, [we will return to life]? That is a distant [i.e., unlikely] return."

क्या जब हम मर गए और मिट्टी हो गए, तो दोबारा जीवित करके उठाए जाएँगे?! यह दोबारा जीवित होना और हमारे शरीर में उनके सड़-गल जाने के बाद जीवन की वापसी एक असंभावित चीज़ है, यह नहीं हो सकता।

50:4Page 518

قَدۡ عَلِمۡنَا مَا تَنقُصُ ٱلۡأَرۡضُ مِنۡهُمۡۖ وَعِندَنَا كِتَٰبٌ حَفِيظُۢ ٤

We know what the earth diminishes [i.e., consumes] of them, and with Us is a retaining record.

निश्चय हमें मालूम है कि उनकी मृत्यु के बाद धरती उनके शरीर का क्या खाती और नष्ट करती है, उसमें से कुछ भी हमसे छिपा नहीं है। तथा हमारे पास एक पुस्तक है, जो उन सभी चीज़ों को सुरक्षित रखने वाली है, जो अल्लाह उनके जीवन के दौरान और उनकी मृत्यु के बाद उनके लिए निर्धारित करता है।

50:5Page 518

بَلۡ كَذَّبُواْ بِٱلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمۡ فَهُمۡ فِيٓ أَمۡرٖ مَّرِيجٍ ٥

But they denied the truth when it came to them, so they are in a confused condition.

बल्कि इन मुश्रिकों ने क़ुरआन को झुठला दिया, जब रसूल उसे उनके पास लेकर आए। अतः वे एक उलझी हुई स्थिति में हैं, उसके बारे में किसी एक चीज़ पर स्थिर नहीं हैं।

50:6Page 518

أَفَلَمۡ يَنظُرُوٓاْ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَوۡقَهُمۡ كَيۡفَ بَنَيۡنَٰهَا وَزَيَّنَّٰهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجٖ ٦

Have they not looked at the heaven above them - how We structured it and adorned it and [how] it has no rifts?

क्या इन पुनर्जीवन का इनकार करने वालों ने अपने ऊपर फैले आकाश पर विचार नहीं किया कि हमने कैसे उसकी रचना की और उसे बनाया तथा उसे उन सितारों से सजाया, जो हमने उसमें रखे हैं, तथा उसमें कोई दरारें नहीं हैं, जो उसे दोषपूर्ण बनाती हों?! अतः जिसने इस आकाश को बनाया, वह मरे हुए लोगों को फिर से जीवित करने में असमर्थ नहीं है।

50:7Page 518

وَٱلۡأَرۡضَ مَدَدۡنَٰهَا وَأَلۡقَيۡنَا فِيهَا رَوَٰسِيَ وَأَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجِۭ بَهِيجٖ ٧

And the earth - We spread it out and cast therein firmly set mountains and made grow therein [something] of every beautiful kind,

और हमने धरती को फैलाकर उसे रहने योग्य बनाया और उसमें मज़बूत पहाड़ गाड़ दिए, ताकि वह हिले-डुले नहीं, और उसमें हर प्रकार के अच्छी दृष्टि वाले पौधे और वृक्ष उगाए।

50:8Page 518

تَبۡصِرَةٗ وَذِكۡرَىٰ لِكُلِّ عَبۡدٖ مُّنِيبٖ ٨

Giving insight and a reminder for every servant who turns [to Allāh].

हमने यह सब हर उस बंदे को दिखाने और याद दिलाने के उद्देश्य से पैदा किया, जो आज्ञाकारिता के साथ अपने पालनहार की ओर लौटने वाला है।

50:9Page 518

وَنَزَّلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ مُّبَٰرَكٗا فَأَنۢبَتۡنَا بِهِۦ جَنَّٰتٖ وَحَبَّ ٱلۡحَصِيدِ ٩

And We have sent down blessed rain from the sky and made grow thereby gardens and grain from the harvest

और हमने आकाश से बहुत लाभ और भलाई वाला पानी उतारा, फिर उस पानी से हमने बाग़ उगाए, तथा जौ आदि के दाने उगाए, जिन्हें तुम काटते हो।

50:10Page 518

وَٱلنَّخۡلَ بَاسِقَٰتٖ لَّهَا طَلۡعٞ نَّضِيدٞ ١٠

And lofty palm trees having fruit arranged in layers -

और उस पानी से लंबे-लंबे ऊँचे खजूर के पेड़ उगाए, जिनके गुच्छे गुथे हुए और एक दूसरे के ऊपर हैं।

50:11Page 518

رِّزۡقٗا لِّلۡعِبَادِۖ وَأَحۡيَيۡنَا بِهِۦ بَلۡدَةٗ مَّيۡتٗاۚ كَذَٰلِكَ ٱلۡخُرُوجُ ١١

As provision for the servants, and We have given life thereby to a dead land. Thus is the emergence [i.e., resurrection].

हमने इसमें से जो कुछ उगाया, उसे बंदों की रोज़ी के लिए उगाया, जिससे वे खाते हैं। और इसके साथ हमने एक ऐसे शहर को पुनर्जीवित कर दिया जिसमें कोई वनस्पति नहीं है। जिस तरह हमने इस बारिश से एक वनस्पति रहित शहर को पुनर्जीवित किया, उसी तरह हम मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित करेंगे। चुनाँचे वे जीवित होकर बाहर निकलेंगे।

50:12Page 518

كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحٖ وَأَصۡحَٰبُ ٱلرَّسِّ وَثَمُودُ ١٢

The people of Noah denied before them,1 and the companions of the well2 and Thamūd

(ऐ रसूल!) आपको झुठलाने वाले इन लोगों से पहले भी कई समुदाय अपने नबियों को झुठला चुके हैं। चुनाँचे नूह की जाति, कुएँ वालों और समूद ने झुठलाया।

50:13Page 518

وَعَادٞ وَفِرۡعَوۡنُ وَإِخۡوَٰنُ لُوطٖ ١٣

And ʿAad and Pharaoh and the brothers [i.e., people] of Lot

तथा आद, फ़िरऔन और लूत की जाति ने झुठलाया।

50:14Page 518

وَأَصۡحَٰبُ ٱلۡأَيۡكَةِ وَقَوۡمُ تُبَّعٖۚ كُلّٞ كَذَّبَ ٱلرُّسُلَ فَحَقَّ وَعِيدِ ١٤

And the companions of the thicket and the people of Tubbaʿ. All denied the messengers, so My threat was justly fulfilled.

शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति 'ऐका' वालों ने और यमन के राजा तुब्ब' की जाति के लोगों ने (अपने रसूल को) झुठलाया। इन सभी जातियों के लोगों ने अल्लाह के उन रसूलों को झुठलाया जिन्हें उसने भेजा था। सो उनपर अल्लाह के अज़ाब का वादा साबित (प्रमाणित) हो गया।

50:15Page 518

أَفَعَيِينَا بِٱلۡخَلۡقِ ٱلۡأَوَّلِۚ بَلۡ هُمۡ فِي لَبۡسٖ مِّنۡ خَلۡقٖ جَدِيدٖ ١٥

Did We fail in the first creation? But they are in confusion over a new creation.

क्या हम तुम्हें पहली बार पैदा करने में असमर्थ रहे थे कि तुम्हें दोबारा जीवित करने में असमर्थ रहेंगे?! बल्कि वे अपनी पहली रचना के बाद दूसरी रचना के बारे में संदेह में पड़े हुए हैं।

50:16Page 519

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ وَنَعۡلَمُ مَا تُوَسۡوِسُ بِهِۦ نَفۡسُهُۥۖ وَنَحۡنُ أَقۡرَبُ إِلَيۡهِ مِنۡ حَبۡلِ ٱلۡوَرِيدِ ١٦

And We have already created man and know what his soul whispers to him, and We are closer1 to him than [his] jugular vein.

निःसंदेह हमने इनसान को पैदा किया और हम उन विचारों और ख़यालों से अवगत हैं, जो उसके दिल में आते हैं। और हम उससे उसके गले की उस नस से भी अधिक क़रीब हैं जो दिल से जुड़ी होती है।

50:17Page 519

إِذۡ يَتَلَقَّى ٱلۡمُتَلَقِّيَانِ عَنِ ٱلۡيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ قَعِيدٞ ١٧

When the two receivers [i.e., recording angels] receive,1 seated on the right and on the left.

जब दो लेने वाले फ़रिश्ते उसके अमल को लेते हैं। उनमें से एक उसके दाहिनी ओर बैठा है, और दूसरा उसके बाईं ओर बैठा है।

50:18Page 519

مَّا يَلۡفِظُ مِن قَوۡلٍ إِلَّا لَدَيۡهِ رَقِيبٌ عَتِيدٞ ١٨

He [i.e., man] utters no word except that with him is an observer prepared [to record].

वह कोई बात नहीं बोलता, परंतु उसके पास एक निरीक्षक फ़रिश्ता उसकी बात लिखने के लिए उपस्थित होता है।

50:19Page 519

وَجَآءَتۡ سَكۡرَةُ ٱلۡمَوۡتِ بِٱلۡحَقِّۖ ذَٰلِكَ مَا كُنتَ مِنۡهُ تَحِيدُ ١٩

And the intoxication of death will bring the truth; that is what you were trying to avoid.

और मौत की सख़्ती उस सच्चाई के साथ आ गई, जिससे बचने का कोई उपाय नहीं है। यही है वह जिससे (ऐ बेख़बर इनसान!) तू कतराता और भागता था।

50:20Page 519

وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِۚ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلۡوَعِيدِ ٢٠

And the Horn will be blown. That is the Day of [carrying out] the threat.

और सूर (नरसिंघा) में फूँक मारने पर नियुक्त फ़रिश्ते ने दूसरी बार फूँक मार दी। यही क़ियामत का दिन, काफ़िरों और पापियों के लिए यातना की धमकी का दिन है।

50:21Page 519

وَجَآءَتۡ كُلُّ نَفۡسٖ مَّعَهَا سَآئِقٞ وَشَهِيدٞ ٢١

And every soul will come, with it a driver and a witness.1

और हर व्यक्ति इस हाल में आएगा कि उसके साथ एक फ़रिश्ता उसे हाँकने के लिए और एक फ़रिश्ता उसके विरुद्ध उसके कामों की गवाही देने के लिए होगा।

50:22Page 519

لَّقَدۡ كُنتَ فِي غَفۡلَةٖ مِّنۡ هَٰذَا فَكَشَفۡنَا عَنكَ غِطَآءَكَ فَبَصَرُكَ ٱلۡيَوۡمَ حَدِيدٞ ٢٢

[It will be said], "You were certainly in unmindfulness of this, and We have removed from you your cover,1 so your sight, this Day, is sharp."

और इस हाँककर लाए गए व्यक्ति से कहा जाएगा : निश्चय तुम दुनिया में इस दिन से बहुत ग़ाफ़िल थे; क्योंकि तुम अपनी इच्छाओं और सुखों से धोखा खा गए थे। अब तुम जिस यातना और पीड़ा को देख रहे हो, उसके द्वारा हमने तुम्हारी गफ़लत का परदा हटा दिया। सो आज तुम्हारी निगाह बड़ी तेज़ है, जिससे तुम उस चीज़ का बोध कर सकते हो, जिससे तुम गफ़लत में पड़े थे।

50:23Page 519

وَقَالَ قَرِينُهُۥ هَٰذَا مَا لَدَيَّ عَتِيدٌ ٢٣

And his companion, [the angel], will say, "This [record] is what is with me, prepared."

और फ़रिश्तों में से उसपर नियुक्त उसका साथी कहेगा : यह मेरे पास उसके काम का विवरण है, जो बिना किसी कमी-बेशी के मौजूद है।

50:24Page 519

أَلۡقِيَا فِي جَهَنَّمَ كُلَّ كَفَّارٍ عَنِيدٖ ٢٤

[Allāh will say], "Throw into Hell every obstinate disbeliever,

और अल्लाह हाँककर लाने वाले और गवाही देने वाले, दोनों फ़रिश्तों से कहेगा : हर सत्य के इनकार करने वाले और उससे दुराग्रह रखने वाले को जहन्नम में डाल दो।

50:25Page 519

مَّنَّاعٖ لِّلۡخَيۡرِ مُعۡتَدٖ مُّرِيبٍ ٢٥

Preventer of good, aggressor, and doubter,

जो अपने ऊपर अल्लाह के अनिवार्य किए हुए अधिकार को बहुत रोकने वाला, अल्लाह की सीमाओं को लाँघने वाला, उसने वादे या धमकी के बारे में जो सूचना दी है उसमें संदेह करने वाला है।

50:26Page 519

ٱلَّذِي جَعَلَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ فَأَلۡقِيَاهُ فِي ٱلۡعَذَابِ ٱلشَّدِيدِ ٢٦

Who made [as equal] with Allāh another deity; then throw him into the severe punishment."

जिसने अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बना लिया, जिसे वह उसके साथ इबादत में साझी ठहराता है। अतः तुम दोनों उसे कठोर यातना में डाल दो।

50:27Page 519

۞ قَالَ قَرِينُهُۥ رَبَّنَا مَآ أَطۡغَيۡتُهُۥ وَلَٰكِن كَانَ فِي ضَلَٰلِۭ بَعِيدٖ ٢٧

His [devil] companion will say, "Our Lord, I did not make him transgress, but he [himself] was in extreme error."

शैतानों में से उसका साथी उससे अलगाव प्रकट करते हुए कहेगा : ऐ हमारे पालनहार! मैंने उसे गुमराह नहीं किया था। परंतु वह खुद ही सत्य से परे दूर की गुमराही में पड़ा हुआ था।

50:28Page 519

قَالَ لَا تَخۡتَصِمُواْ لَدَيَّ وَقَدۡ قَدَّمۡتُ إِلَيۡكُم بِٱلۡوَعِيدِ ٢٨

[Allāh] will say, "Do not dispute before Me, while I had already presented to you the threat [i.e., warning].

अल्लाह ने कहा : तुम मेरे पास मत झगड़ो। क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं है। क्योंकि मैंने तुम्हें दुनिया ही में अपने रसूलों के माध्यम से मेरा इनकार करने वाले और मेरी अवज्ञा करने वाले को सख्त धमकी से सावधान कर दिया था।

50:29Page 519

مَا يُبَدَّلُ ٱلۡقَوۡلُ لَدَيَّ وَمَآ أَنَا۠ بِظَلَّٰمٖ لِّلۡعَبِيدِ ٢٩

The word [i.e., decree] will not be changed with Me, and never will I be unjust to the servants."

मेरे यहाँ बात बदली नहीं जाती और मेरा वादा नहीं टूटता, तथा मैं बंदों पर उनके अच्छे कामों को कम करके या उनके बुरे कामों को बढ़ाकर अत्याचार नहीं करता।बल्कि मैं उन्हें उनके किए का बदला देता हूँ।

50:30Page 519

يَوۡمَ نَقُولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ ٱمۡتَلَأۡتِ وَتَقُولُ هَلۡ مِن مَّزِيدٖ ٣٠

On the Day We will say to Hell, "Have you been filled?" and it will say, "Are there some more,"

जिस दिन हम जहन्नम से कहेंगे : क्या तू उन काफ़िरों और पापियों से भर गया, जो तेरे अंदर डाले गए हैं? तो वह अपने रब को जवाब देगा : क्या कुछ और भी है? उसका यह कहना अपने रब के लिए क्रोध के तौर पर वृद्धि के अनुरोध के लिए होगा।

50:31Page 519

وَأُزۡلِفَتِ ٱلۡجَنَّةُ لِلۡمُتَّقِينَ غَيۡرَ بَعِيدٍ ٣١

And Paradise will be brought near to the righteous, not far,

और जन्नत उन लोगों के लिए निकट कर दी जाएगी, जो अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से परहेज़ करके, डरने वाले हैं। चुनाँचे वे उसमें मौजूद नेमतों को देखेंगे, वह उनसे दूर नहीं होगी।

50:32Page 519

هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظٖ ٣٢

[It will be said], "This is what you were promised - for every returner [to Allāh] and keeper [of His covenant].

और उनसे कहा जाएगा : यही है जिसका अल्लाह ने तुमसे वादा किया था, हर उस व्यक्ति के लिए जो अपने रब की ओर तौबा के द्वारा बहुत लौटने वाला है, उसके पालनहार ने उसे जिस चीज़ के लिए बाध्य किया है, उसका संरक्षण करने वाला है।

50:33Page 519

مَّنۡ خَشِيَ ٱلرَّحۡمَٰنَ بِٱلۡغَيۡبِ وَجَآءَ بِقَلۡبٖ مُّنِيبٍ ٣٣

Who feared the Most Merciful in the unseen and came with a heart returning [in repentance].

जो परोक्ष में अल्लाह से डरा, जहाँ उसे अल्लाह के सिवा कोई नहीं देखता, और अल्लाह से ऐसे शुद्ध हृदय के साथ मिला, जो अल्लाह की ओर ध्यान करने वाला और उसकी ओर बहुत ज़्यादा लौटने वाला है।

50:34Page 519

ٱدۡخُلُوهَا بِسَلَٰمٖۖ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلۡخُلُودِ ٣٤

Enter it in peace. This is the Day of Eternity."

उनसे कहा जाएगा : जिस चीज़ को तुम नापसंद करते हो, उससे सुरक्षा और सलामती के साथ जन्नत में प्रवेश कर जाओ। यही हमेशा रहने का दिन है, जिसके बाद कोई विनाश नहीं है।

50:35Page 519

لَهُم مَّا يَشَآءُونَ فِيهَا وَلَدَيۡنَا مَزِيدٞ ٣٥

They will have whatever they wish therein, and with Us is more.

उनके लिए उसके अंदर वह सारी अनंत नेमतें होंगी, जो वे चाहेंगे। और हमारे पास इससे भी अधिक ऐसी नेमतें हैं, जिन्हें न किसी आँख ने देखा है, न किसी कान ने सुना है और न किसी मानव हृदय ने कभी सोचा है, और इसी में - सबसे महान - सर्वशक्तिमान अल्लाह का दर्शन शामिल है।

50:36Page 520

وَكَمۡ أَهۡلَكۡنَا قَبۡلَهُم مِّن قَرۡنٍ هُمۡ أَشَدُّ مِنۡهُم بَطۡشٗا فَنَقَّبُواْ فِي ٱلۡبِلَٰدِ هَلۡ مِن مَّحِيصٍ ٣٦

And how many a generation before them did We destroy who were greater than them in [striking] power and had explored throughout the lands. Is there any place of escape?

हमने मक्का के इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, जो इनसे अधिक शक्तिशाली थे। उन्होंने नगरों को छान मारा, शायद उन्हें यातना से भागने का कोई स्थान मिल जाए, पर उन्हें वह नहीं मिला।

50:37Page 520

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكۡرَىٰ لِمَن كَانَ لَهُۥ قَلۡبٌ أَوۡ أَلۡقَى ٱلسَّمۡعَ وَهُوَ شَهِيدٞ ٣٧

Indeed in that is a reminder for whoever has a heart or who listens while he is present [in mind].

पिछले समुदायों के विनाश का जो यह उल्लेख किया गया है, निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए याद-दहानी और उपदेश है, जिसके पास समझने वाला दिल हो, या वह उसपर अपना कान लगाए इस हाल में कि उसका दिल उपस्थित हो, असावधान न हो।

50:38Page 520

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبٖ ٣٨

And We did certainly create the heavens and earth and what is between them in six days, and there touched Us no weariness.

निश्चय हमने आकाशों और धरती को, तथा जो कुछ आकाशों और धरती के बीच है; छह दिनों में पैदा किया, जबकि हम उन्हें एक पल में बनाने की क्षमता रखते हैं, और हमें कोई थकान नहीं हुई, जैसा कि यहूदी कहते हैं।

50:39Page 520

فَٱصۡبِرۡ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ قَبۡلَ طُلُوعِ ٱلشَّمۡسِ وَقَبۡلَ ٱلۡغُرُوبِ ٣٩

So be patient, [O Muḥammad], over what they say and exalt [Allāh] with praise of your Lord before the rising of the sun and before its setting,

अतः जो कुछ यहूदी और अन्य लोग कहते हैं, (ऐ रसूल!) आप उसपर धैर्य रखें और अपने रब के लिए, उसकी प्रशंसा करते हुए, सूर्योदय से पहले फ़ज्र की नमाज़ पढ़ें और उसके अस्त होने से पहले अस्र की नमाज़ पढ़ें।

50:40Page 520

وَمِنَ ٱلَّيۡلِ فَسَبِّحۡهُ وَأَدۡبَٰرَ ٱلسُّجُودِ ٤٠

And [in part] of the night exalt Him and after prostration [i.e., prayer].

और रात के कुछ भाग में फिर उसके लिए नमाज़ पढ़ें और नमाज़ों के बाद उसकी पवित्रता (तसबीह) का वर्णन करें।

50:41Page 520

وَٱسۡتَمِعۡ يَوۡمَ يُنَادِ ٱلۡمُنَادِ مِن مَّكَانٖ قَرِيبٖ ٤١

And listen on the Day when the Caller1 will call out from a place that is near -

और (ऐ रसूल!) ध्यान से सुनें, जिस दिन सूर में दूसरी बार फूँक मारने पर नियुक्त फ़रिश्ता निकट स्थान से आवाज़ देगा।

50:42Page 520

يَوۡمَ يَسۡمَعُونَ ٱلصَّيۡحَةَ بِٱلۡحَقِّۚ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلۡخُرُوجِ ٤٢

The Day they will hear the blast [of the Horn] in truth. That is the Day of Emergence [from the graves].

जिस दिन सभी लोग दोबारा जीवित होकर उठने की तेज़ आवाज़ को उस सत्य के साथ सुनेंगे जिसमें कोई संदेह नहीं। जिस दिन लोग यह आवाज़ सुनेंगे, वही मरे हुए लोगों के अपनी कब्रों से हिसाब और बदले के लिए निकलने का दिन है।

50:43Page 520

إِنَّا نَحۡنُ نُحۡيِۦ وَنُمِيتُ وَإِلَيۡنَا ٱلۡمَصِيرُ ٤٣

Indeed, it is We who give life and cause death, and to Us is the destination

निश्चय हम ही जीवन देते हैं और हम ही मारते हैं। हमारे सिवा न कोई जीवन देने वाला है और न मारने वाला है। और बंदों को क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए केवल हमारी ही ओर लौटकर आना है।

50:44Page 520

يَوۡمَ تَشَقَّقُ ٱلۡأَرۡضُ عَنۡهُمۡ سِرَاعٗاۚ ذَٰلِكَ حَشۡرٌ عَلَيۡنَا يَسِيرٞ ٤٤

On the Day the earth breaks away from them [and they emerge] rapidly; that is a gathering easy for Us.

जिस दिन धरती उनसे फटेगी और वे तेज़ी से दौड़ते हुए निकलेंगे। यह एकत्र करना हमारे लिए आसान है।

50:45Page 520

نَّحۡنُ أَعۡلَمُ بِمَا يَقُولُونَۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيۡهِم بِجَبَّارٖۖ فَذَكِّرۡ بِٱلۡقُرۡءَانِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ ٤٥

We are most knowing of what they say, and you are not over them a tyrant.1 But remind by the Qur’ān whoever fears My threat.

हम उसे अधिक जानने वाले हैं, जो कुछ ये झुठलाने वाले कहते हैं। और (ऐ रसूल!) आप उनपर कोई थोपे हुए नहीं हैं कि उन्हें ईमान लाने पर मजबूर करें। आप तो केवल उस चीज़ को पहुँचाने वाले हैं, जिसे पहुँचाने का अल्लाह ने आपको आदेश दिया है। अतः आप क़ुरआन के साथ उस व्यक्ति को उपदेश दें, जो काफ़िरों और अवज्ञाकारियों के लिए मेरी धमकी से डरता है; क्योंकि डरने वाला ही याद दिलाए जाने (उपदेश दिए जाने) पर याद करता और उपदेश ग्रहण करता है।

Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences

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Ayat al-Kursi36Al-Kahfpage 42juz 15Bukhari 1Muslim 2999

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