Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
الرحمن
Ar-Rahman
The Beneficent · Medinan · 78 ayahs
अर-रहमान' व्यापक दया वाला।
उसने लोगों को क़ुरआन सिखाया, उसका याद करना आसान करके और उसके अर्थ को समझना सुगम बनाकर।
उसने इनसान को ठीक-ठाक बनाया और उसे अच्छी शक्ल-सूरत दी।
उसे सिखाया कि अपने दिल की बात को मौखिक और लिखित रूप में कैसे व्यक्त करे।
सूरज और चाँद दोनों की गति निर्धारित की। दोनों एक सटीक गणना के अनुसार चल रहे हैं; ताकि लोगों को वर्षों की गिनती और हिसाब का ज्ञान प्राप्त हो।
और बिना तने वाले पौधे और पेड़ अल्लाह को, उसके आदेश के अधीन होकर और उसके प्रति समर्पित होकर सजदा करते हैं।
55:7Page 531
وَٱلسَّمَآءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ ٱلۡمِيزَانَ ٧
And the heaven He raised and imposed the balance
तथा उसने आकाश को धरती के ऊपर उसके छत के रूप में ऊँचा किया। तथा धरती पर न्याय को स्थापित किया और अपने बंदों को उसका आदेश दिया।
उसने न्याय को इसलिए स्थापित किया, ताकि (ऐ लोगो!) तुम अन्याय न करो और माप-तौल में धोखाधड़ी से काम न लो।
55:9Page 531
وَأَقِيمُواْ ٱلۡوَزۡنَ بِٱلۡقِسۡطِ وَلَا تُخۡسِرُواْ ٱلۡمِيزَانَ ٩
And establish weight in justice and do not make deficient the balance.
और अपने बीच न्याय के साथ तौल को सीधा रखो और जब तुम दूसरों को नाप या तौलकर दो, तो नाप या तौल में कमी न करो।
और उसने धरती को प्राणियों के लिए उसपर रहने योग्य बनाया।
55:11Page 531
فِيهَا فَٰكِهَةٞ وَٱلنَّخۡلُ ذَاتُ ٱلۡأَكۡمَامِ ١١
Therein is fruit and palm trees having sheaths [of dates]
उसमें ऐसे पेड़ हैं जो फल देते हैं, तथा आवरणों वाले खजूर के वृक्ष हैं जिनमें से खजूर बनते हैं।
और उसमें भूसे वाले अनाज जैसे गेहूँ और जौ हैं, तथा उसमें ऐसे पौधे हैं, जिनकी सुगंध तुम्हें अच्छी लगती है।
55:13Page 531
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٣
So which of the favors of your Lord would you deny?1
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:14Page 531
خَلَقَ ٱلۡإِنسَٰنَ مِن صَلۡصَٰلٖ كَٱلۡفَخَّارِ ١٤
He created man from clay like [that of] pottery.
उसने आदम अलैहिस्सलाम को पकी हुई मिट्टी की तरह, बजने वाली सूखी मिट्टी से पैदा किया।
55:15Page 531
وَخَلَقَ ٱلۡجَآنَّ مِن مَّارِجٖ مِّن نَّارٖ ١٥
And He created the jinn from a smokeless flame of fire.
और जिन्नों के पिता को धुआँ रहित आग की ज्वाला से पैदा किया।
55:16Page 531
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٦
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:17Page 532
رَبُّ ٱلۡمَشۡرِقَيۡنِ وَرَبُّ ٱلۡمَغۡرِبَيۡنِ ١٧
[He is] Lord of the two sunrises and Lord of the two sunsets.1
वह सर्दी और गर्मी में सूर्य के उदय होने के दोनों स्थानों और उसके अस्त होने के दोनों स्थानों का रब है।
55:18Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ١٨
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
अल्लाह ने खारे और मीठे दो सागरों को मिला दिया, जो आँखों को आपस में मिलते हुए दिखते हैं।
55:20Page 532
بَيۡنَهُمَا بَرۡزَخٞ لَّا يَبۡغِيَانِ ٢٠
Between them is a barrier so neither of them transgresses.
(जबकि) उन दोनों के बीच एक अवरोध है, जो उन्हें एक-दूसरे पर हावी होने से रोकता है; ताकि मीठा पानी, मीठा और नमकीन पानी, नमकीन बना रहे।
55:21Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢١
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:22Page 532
يَخۡرُجُ مِنۡهُمَا ٱللُّؤۡلُؤُ وَٱلۡمَرۡجَانُ ٢٢
From both of them emerge pearl and coral.
दोनों सागरों से छोटे और बड़े मोती निकलते हैं।
55:23Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٣
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:24Page 532
وَلَهُ ٱلۡجَوَارِ ٱلۡمُنشَـَٔاتُ فِي ٱلۡبَحۡرِ كَٱلۡأَعۡلَٰمِ ٢٤
And to Him belong the ships [with sails] elevated in the sea like mountains.
और केवल उसी पवित्र और महान अल्लाह का अधिकार चलता है, पहाड़ों की तरह समुद्र में चलने वाले जहाज़ों पर।
55:25Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٥
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
धरती के ऊपर मौजूद सभी प्राणी अनिवार्य रूप से नष्ट होने वाले हैं।
55:27Page 532
وَيَبۡقَىٰ وَجۡهُ رَبِّكَ ذُو ٱلۡجَلَٰلِ وَٱلۡإِكۡرَامِ ٢٧
And there will remain the Face1 of your Lord, Owner of Majesty and Honor.
और (ऐ रसूल!) आपके रब का चेहरा, जो महानता और अपने बंदों पर उपकार और कृतज्ञता वाला है, बाक़ी रहेगा। उसपर कभी भी विनाश नहीं आएगा।
55:28Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٢٨
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:29Page 532
يَسۡـَٔلُهُۥ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ كُلَّ يَوۡمٍ هُوَ فِي شَأۡنٖ ٢٩
Whoever is within the heavens and earth asks Him; every day He is in [i.e., bringing about] a matter.1
आकाशों में जो भी फ़रिश्ते हैं तथा धरती पर जो भी जिन्न और इनसान हैं, सब अपनी ज़रूरतें उसी से माँगते हैं। हर दिन वह अपने बंदों से संबंधित किसी कार्य में होता है; जैसे जीवन देना, मारना, रोज़ी देना, इत्यादि।
55:30Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٠
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
हम जल्द ही (ऐ जिन्नो और इनसानो!) तुम्हारे हिसाब के लिए फ़ारिग़ होंगे और हर एक को वह सवाब या सज़ा देंगे, जिसका वह हक़दार है।
55:32Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٢
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:33Page 532
يَٰمَعۡشَرَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ إِنِ ٱسۡتَطَعۡتُمۡ أَن تَنفُذُواْ مِنۡ أَقۡطَارِ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ فَٱنفُذُواْۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلۡطَٰنٖ ٣٣
O company of jinn and mankind, if you are able to pass beyond the regions of the heavens and the earth, then pass. You will not pass except by authority [from Allāh].
जब अल्लाह क़ियामत के दिन जिन्नों और इनसानों को इकट्ठा करेगा, तो कहेगा : ऐ जिन्नों और इनसानों के समूह! अगर तुम अपने लिए आकाशों और धरती के किसी किनारे से भाग निकलने का कोई रास्ता खोज सको, तो ऐसा करो। लेकिन तुम बिना शक्ति और प्रमाण के ऐसा हरगिज़ नहीं कर पाओगे। और तुम्हारे पास वह कहाँ है?
55:34Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٤
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:35Page 532
يُرۡسَلُ عَلَيۡكُمَا شُوَاظٞ مِّن نَّارٖ وَنُحَاسٞ فَلَا تَنتَصِرَانِ ٣٥
There will be sent upon you a flame of fire and smoke,1 and you will not defend yourselves.
तुम दोनों पर (ऐ जिन्नो और इनसानो!) धुआँ रहित आग का ज्वाला और लौ से मुक्त धुआँ छोड़ा जाएगा, फिर तुम अपने आपको को उससे बचा नहीं पाओगे।
55:36Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٦
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:37Page 532
فَإِذَا ٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتۡ وَرۡدَةٗ كَٱلدِّهَانِ ٣٧
And when the heaven is split open and becomes rose-colored like oil1 -
फिर जब आसमान फट जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतरें, तो वह अपने रंग की चमक में तेल की तरह लाल हो जाएगा।
55:38Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٣٨
So which of the favors of your Lord would you deny? -
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:39Page 532
فَيَوۡمَئِذٖ لَّا يُسۡـَٔلُ عَن ذَنۢبِهِۦٓ إِنسٞ وَلَا جَآنّٞ ٣٩
Then on that Day none will be asked about his sin among men or jinn.1
फिर उस महान दिन किसी इनसान या किसी जिन्न से उसके गुनाह के बारे में नहीं पूछा जाएगा। क्योंकि अल्लाह उनके कर्मों को जानता है।
55:40Page 532
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٠
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:41Page 533
يُعۡرَفُ ٱلۡمُجۡرِمُونَ بِسِيمَٰهُمۡ فَيُؤۡخَذُ بِٱلنَّوَٰصِي وَٱلۡأَقۡدَامِ ٤١
The criminals will be known by their marks, and they will be seized by the forelocks and the feet.
क़ियामत के दिन अपराधियों को उनके निशान से पहचाना जाएगा, जो उनके चेहरे का कालापन और उनकी आँखों का नीलापन है। फिर उनके माथे के बालों को उनके पैरों से मिलाकर पकड़ा जाएगा और उन्हें जहन्नम में डाल दिया जाएगा।
55:42Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٢
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:43Page 533
هَٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِي يُكَذِّبُ بِهَا ٱلۡمُجۡرِمُونَ ٤٣
This is Hell, which the criminals deny.
और उन्हें फटकारते हुए कहा जाएगा : यह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग दुनिया में झुठलाते थे, उनकी आँखों के सामने है और वे इसका इनकार नहीं कर सकते।
55:44Page 533
يَطُوفُونَ بَيۡنَهَا وَبَيۡنَ حَمِيمٍ ءَانٖ ٤٤
They will circulate between it and scalding water, heated [to the utmost degree].
वे उसके और अत्यंत गर्म पानी के बीच चक्कर लगा रहे होंगे।
55:45Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٥
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:46Page 533
وَلِمَنۡ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ ٤٦
But for he who has feared the position of his Lord1 are two gardens -
जो व्यक्ति आख़िरत में अपने रब के सामने खड़े होने से डरा, अतः वह ईमान लाया और नेक कार्य किया - उसके लिए दो बाग़ हैं।
55:47Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٧
So which of the favors of your Lord would you deny? -
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
वे दोनों बाग़ बड़ी-बड़ी, ताज़ी और फलदार शाखाओं वाले हैं।
55:49Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٤٩
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
उन दोनों बाग़ों में दो जल स्रोत हैं, जो उनके बीच पानी के साथ गुज़रते हैं।
55:51Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥١
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:52Page 533
فِيهِمَا مِن كُلِّ فَٰكِهَةٖ زَوۡجَانِ ٥٢
In both of them are of every fruit, two kinds.
उन दोनों बाग़ों में हर तरह के स्वादिष्ट फलों के दो प्रकार हैं।
55:53Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٣
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:54Page 533
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ فُرُشِۭ بَطَآئِنُهَا مِنۡ إِسۡتَبۡرَقٖۚ وَجَنَى ٱلۡجَنَّتَيۡنِ دَانٖ ٥٤
[They are] reclining on beds whose linings are of silk brocade, and the fruit of the two gardens is hanging low.
वे ऐसे बिछौनों पर तकिया लगाए होंगे, जिनके अस्तर मोटे रेशम के होंगे। तथा दोनों बाग़ों से तोड़े जाने वाले फल एवं मेवे बहुत निकट होंगे, जिन्हें आदमी खड़े, बैठे और लेटे हुए तोड़ सकेगा।
55:55Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٥
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:56Page 533
فِيهِنَّ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرۡفِ لَمۡ يَطۡمِثۡهُنَّ إِنسٞ قَبۡلَهُمۡ وَلَا جَآنّٞ ٥٦
In them are women limiting [their] glances,1 untouched2 before them by man or jinnī -
उनमें ऐसी स्त्रियाँ हैं, जिनकी निगाहें अपने पतियों तक ही सीमित हैं। उन्हें उनके पतियों से पहले किसी जिन्न या इनसान ने हाथ नहीं लगाया।
55:57Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٧
So which of the favors of your Lord would you deny? -
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
वे इतनी सुंदर और निखरे हुए रंग की होंगी, मानो माणिक और मूँगा हैं।
55:59Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٥٩
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:60Page 533
هَلۡ جَزَآءُ ٱلۡإِحۡسَٰنِ إِلَّا ٱلۡإِحۡسَٰنُ ٦٠
Is the reward for good [anything] but good?
जिसने अपने रब का आज्ञापालन उत्तम ढंग से किया, उसका बदला इसके सिवा क्या है कि अल्लाह उसे उत्तम प्रतिफल प्रदान करे?!
55:61Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦١
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:62Page 533
وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ ٦٢
And below them both [in excellence] are two [other] gardens -
तथा इन दोनों पूर्वोक्त बाग़ों के अलावा दो अन्य बाग़ हैं।
55:63Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٣
So which of the favors of your Lord would you deny? -
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
इन दोनों बाग़ों की हरियाली बहुत अधिक है।
55:65Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٥
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
इन दोनों बाग़ों में दो जल स्रोत हैं, जिनसे बड़ी तेज़ी से पानी उबल रहा है, उनके पानी का उबलना बंद नहीं होता।
55:67Page 533
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٧
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:68Page 534
فِيهِمَا فَٰكِهَةٞ وَنَخۡلٞ وَرُمَّانٞ ٦٨
In both of them are fruit and palm trees and pomegranates.
इन दोनों बाग़ों में बहुत-से फल, बड़े-बड़े खजूर के पेड़ और अनार हैं।
55:69Page 534
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٦٩
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
इन जन्नतों में अच्छी नैतिकता और सुंदर चेहरों वाली स्त्रियाँ हैं।
55:71Page 534
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧١
So which of the favors of your Lord would you deny? -
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
हूरें, जो उनकी रक्षा के लिए खेमों में रखी गई होंगी।
55:73Page 534
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٣
So which of the favors of your Lord would you deny? -
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:74Page 534
لَمۡ يَطۡمِثۡهُنَّ إِنسٞ قَبۡلَهُمۡ وَلَا جَآنّٞ ٧٤
Untouched before them by man or jinnī -
उनके पतियों से पहले कोई इनसान या जिन्न उनके पास नहीं आया।
55:75Page 534
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٥
So which of the favors of your Lord would you deny? -
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:76Page 534
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ رَفۡرَفٍ خُضۡرٖ وَعَبۡقَرِيٍّ حِسَانٖ ٧٦
Reclining on green cushions and beautiful fine carpets.
वे हरे गिलाफों वाले तकियों और सुंदर बिछौनों पर टेक लगाए हुए होंगे।
55:77Page 534
فَبِأَيِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ٧٧
So which of the favors of your Lord would you deny?
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
55:78Page 534
تَبَٰرَكَ ٱسۡمُ رَبِّكَ ذِي ٱلۡجَلَٰلِ وَٱلۡإِكۡرَامِ ٧٨
Blessed is the name of your Lord, Owner of Majesty and Honor.
तुम्हारे पालनहार के नाम की भलाई बहुत अधिक और बड़ी है, जो महानता और अपने बंदों पर उपकार और कृतज्ञता वाला है।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences