Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Al-An'am 6:109–140
6:109Page 141
وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ لَئِن جَآءَتۡهُمۡ ءَايَةٞ لَّيُؤۡمِنُنَّ بِهَاۚ قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡأٓيَٰتُ عِندَ ٱللَّهِۖ وَمَا يُشۡعِرُكُمۡ أَنَّهَآ إِذَا جَآءَتۡ لَا يُؤۡمِنُونَ ١٠٩
And they swear by Allāh their strongest oaths that if a sign came to them, they would surely believe in it. Say, "The signs are only with [i.e., from] Allāh." And what will make you perceive that even if it [i.e., a sign] came, they would not believe.
बहुदेववादियों ने अपनी सबसे मज़बूत शपथ लेते हुए अल्लाह की क़सम खाई : निःसंदेह यदि मुहम्मद उनके पास उन निशानियों में से कोई निशानी लेकर आए, जिनका उन्होंने सुझाव दिया है, तो वे अवश्य ही उसपर ईमान ले आएँगे। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : निशानियाँ मेरे पास नहीं हैं कि मैं उन्हें उतार दूँ। बल्कि वे अल्लाह के पास हैं, वह जब चाहे उन्हें उतारता है। और (ऐ मोमिनो!) तुम्हें क्या मालूम कि जब ये निशानियाँ उनके प्रस्ताव के अनुसार आ जाएँ, वे उनपर ईमान नहीं लाएँगे? बल्कि वे अपने हठ और इनकार पर बने रहेंगे; क्योंकि वे मार्गदर्शन नहीं चाहते हैं।
6:110Page 141
وَنُقَلِّبُ أَفۡـِٔدَتَهُمۡ وَأَبۡصَٰرَهُمۡ كَمَا لَمۡ يُؤۡمِنُواْ بِهِۦٓ أَوَّلَ مَرَّةٖ وَنَذَرُهُمۡ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ ١١٠
And We will turn away their hearts and their eyes just as they refused to believe in it [i.e., the revelation] the first time. And We will leave them in their transgression, wandering blindly.
हम उनके दिलों और उनकी आँखों को, उनके तथा सच्चाई के मार्ग पर चलने के बीच रुकावट डालकर फेर देंगे, जैसे हम उनके हठ के कारण पहली बार उनके और क़ुरआन पर ईमान लाने के बीच रुकावट बन गए थे। तथा हम उन्हें उनकी गुमराही और अपने रब के विरुद्ध सरकशी (विद्रोह) में भ्रमित भटकता छोड़ देंगे।
6:111Page 142
۞ وَلَوۡ أَنَّنَا نَزَّلۡنَآ إِلَيۡهِمُ ٱلۡمَلَٰٓئِكَةَ وَكَلَّمَهُمُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَحَشَرۡنَا عَلَيۡهِمۡ كُلَّ شَيۡءٖ قُبُلٗا مَّا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُوٓاْ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ يَجۡهَلُونَ ١١١
And even if We had sent down to them the angels [with the message] and the dead spoke to them [of it] and We gathered together every [created] thing in front of them, they would not believe unless Allāh should will. But most of them, [of that], are ignorant.
यदि हम उन्हें जवाब देते हुए उनकी प्रस्तावित चीज़ को ले आते, चुनाँचे हम उनके पास फ़रिश्ते उतार देते और वे उन्हें अपनी आँखों से देख लेते, तथा मरे हुए लोग उनसे बातें करते और आप जो कुछ लेकर आए हैं उसमें उन्हें आपकी सच्चाई की ख़बर देते, एवं हम उनके लिए वह सब कुछ इकट्ठा कर देते, जो उन्होंने सुझाव दिया था, जिन्हें वे आमने-सामने देख लेते; तो भी वे उस चीज़ पर ईमान न लाते जो आप लेकर आए हैं, परंतु यह कि अल्लाह उनमें से जिसे मार्गदर्शन दिखाना चाहे। लेकिन उनमें से अधिकतर लोग इस बात से अनजान हैं। इसलिए वे अल्लाह का सहारा नहीं लेते ताकि वह उन्हें मार्गदर्शन का सामर्थ्य प्रदान करे।
6:112Page 142
وَكَذَٰلِكَ جَعَلۡنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوّٗا شَيَٰطِينَ ٱلۡإِنسِ وَٱلۡجِنِّ يُوحِي بَعۡضُهُمۡ إِلَىٰ بَعۡضٖ زُخۡرُفَ ٱلۡقَوۡلِ غُرُورٗاۚ وَلَوۡ شَآءَ رَبُّكَ مَا فَعَلُوهُۖ فَذَرۡهُمۡ وَمَا يَفۡتَرُونَ ١١٢
And thus We have made for every prophet an enemy - devils from mankind and jinn, inspiring to one another decorative speech in delusion. But if your Lord had willed, they would not have done it, so leave them and that which they invent.
जिस प्रकार हमने इन बहुदेववादियों की शत्रुता के साथ आपकी परीक्षा ली, उसी प्रकार हमने आपसे पहले के हर नबी की परीक्षा ली। चुनाँचे हमने उनमें से प्रत्येक नबी के लिए सरकश मनुष्यों में से कुछ दुश्मन एवं सरकश जिन्नों में से कुछ दुश्मन बना दिए, जो एक-दूसरे के दिल में बुरी बातें डालते हैं, चुनाँचे वे उन्हें धोखा देने के लिए उनके लिए झूठ को सुशोभित करके प्रस्तुत करते हैं। और यदि अल्लाह चाहता कि वे ऐसा न करें, तो वे ऐसा नहीं करते। लेकिन अल्लाह ने परीक्षण के तौर पर उनके लिए ऐसा चाहा था। अतः आप उन्हें और जो कुछ वे कुफ़्र और झूठ गढ़ते हैं, उसे छोड़ दें और उनकी परवाह न करें।
6:113Page 142
وَلِتَصۡغَىٰٓ إِلَيۡهِ أَفۡـِٔدَةُ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ وَلِيَرۡضَوۡهُ وَلِيَقۡتَرِفُواْ مَا هُم مُّقۡتَرِفُونَ ١١٣
And [it is] so the hearts of those who disbelieve in the Hereafter will incline toward it [i.e., deceptive speech] and that they will be satisfied with it and that they will commit that which they are committing.
और ताकि उन लोगों के दिल जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते उस (बुरी) बात की ओर झुक जाएँ, जो वे एक-दूसरे के दिलों में डालते हैं, और ताकि वे लोग उसे अपने लिए स्वीकार कर लें और उसे अपने लिए पसंद कर लें, और ताकि वे भी वही अवज्ञा और पाप करने लग जाएँ, जो ये लोग करने वाले हैं।
6:114Page 142
أَفَغَيۡرَ ٱللَّهِ أَبۡتَغِي حَكَمٗا وَهُوَ ٱلَّذِيٓ أَنزَلَ إِلَيۡكُمُ ٱلۡكِتَٰبَ مُفَصَّلٗاۚ وَٱلَّذِينَ ءَاتَيۡنَٰهُمُ ٱلۡكِتَٰبَ يَعۡلَمُونَ أَنَّهُۥ مُنَزَّلٞ مِّن رَّبِّكَ بِٱلۡحَقِّۖ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُمۡتَرِينَ ١١٤
[Say], "Then is it other than Allāh I should seek as judge while it is He who has revealed to you the Book [i.e., the Qur’ān] explained in detail?" And those to whom We [previously] gave the Scripture know that it is sent down from your Lord in truth, so never be among the doubters.
ऐ रसूल! आप इन बहुदेववादियों से, जो अल्लाह के साथ उसके अलावा को पूजते हैं, कह दें : क्या यह तर्कसंगत है कि मैं अपने और तुम्हारे बीच अल्लाह के अलावा किसी अन्य को न्यायकर्ता स्वीकार करूं? जबकि अल्लाह ही है, जिसने तुम्हारे ऊपर क़ुरआन को अवतरित किया है जो हर चीज़ को पूर्ण रूप से स्पष्ट करने वाला है। तथा यहूदी लोग जिन्हें हमने तौरात दी और ईसाई लोग जिन्हें हमने इंजील प्रदान की, इस तथ्य को जानते हैं कि क़ुरआन आपपर सत्य के साथ उतारा गया है। क्योंकि उन्होंने अपनी पुस्तकों में इसके प्रमाण पाए हैं। अतः आप उसपर शक करने वालों में से न बनें, जो हमने आपकी ओर वह़्य की है।
6:115Page 142
وَتَمَّتۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدۡقٗا وَعَدۡلٗاۚ لَّا مُبَدِّلَ لِكَلِمَٰتِهِۦۚ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ ١١٥
And the word of your Lord has been fulfilled in truth and in justice. None can alter His words, and He is the Hearing, the Knowing.
क़ुरआन बातों और ख़बरों में सत्य की पराकाष्ठा को पहुँचा हुआ है। उसकी बातों को कोई बदलने वाला नहीं। वह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उन्हें जानने वाला है। इसलिए उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है, और वह उन लोगों को बदला देगा जो उसकी बातों को बदलने की चेष्टा करते हैं।
6:116Page 142
وَإِن تُطِعۡ أَكۡثَرَ مَن فِي ٱلۡأَرۡضِ يُضِلُّوكَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَإِنۡ هُمۡ إِلَّا يَخۡرُصُونَ ١١٦
And if you obey most of those upon the earth, they will mislead you from the way of Allāh. They follow not except assumption, and they are not but misjudging.1
यदि मान लिया जाए कि (ऐ रसूल!) आपने पृथ्वी पर रहने वाले अधिकांश लोगों का पालन किया, तो वे आपको अल्लाह के धर्म से गुमराह कर देंगे। क्योंकि यह अल्लाह की सुन्नत (परंपरा) रही है कि सत्य कम लोगों के पास होता है। जबकि अधिकांश लोग केवल अनुमान का पालन करते हैं जिसका कोई आधार नहीं होता। क्योंकि उन्हें यह गुमान था कि उनके पूज्य उन्हें अल्लाह के निकट कर देते हैं। हालाँकि वे इसके बारे में झूठ बोलते हैं।
6:117Page 142
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ مَن يَضِلُّ عَن سَبِيلِهِۦۖ وَهُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُهۡتَدِينَ ١١٧
Indeed, your Lord is most knowing of who strays from His way, and He is most knowing of the [rightly] guided.
निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार उसे सबसे अधिक जानता है जो उसके मार्ग से भटक जाता है, तथा वह उन लोगों को भी सबसे अधिक जानने वाला है जो उसके मार्ग पर निर्देशित हैं, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है।
6:118Page 142
فَكُلُواْ مِمَّا ذُكِرَ ٱسۡمُ ٱللَّهِ عَلَيۡهِ إِن كُنتُم بِـَٔايَٰتِهِۦ مُؤۡمِنِينَ ١١٨
So eat of that [meat] upon which the name of Allāh has been mentioned,1 if you are believers in His verses [i.e., revealed law].
तो (ऐ लोगो!) उस पशु में से खाओ, जिसपर ज़बह़ करते समय अल्लाह का नाम लिया गया है, यदि तुम वास्तव में उसके स्पष्ट प्रमाणों पर ईमान रखने वाले हो।
6:119Page 143
وَمَا لَكُمۡ أَلَّا تَأۡكُلُواْ مِمَّا ذُكِرَ ٱسۡمُ ٱللَّهِ عَلَيۡهِ وَقَدۡ فَصَّلَ لَكُم مَّا حَرَّمَ عَلَيۡكُمۡ إِلَّا مَا ٱضۡطُرِرۡتُمۡ إِلَيۡهِۗ وَإِنَّ كَثِيرٗا لَّيُضِلُّونَ بِأَهۡوَآئِهِم بِغَيۡرِ عِلۡمٍۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُعۡتَدِينَ ١١٩
And why should you not eat of that upon which the name of Allāh has been mentioned while He has explained in detail to you what He has forbidden you, excepting that to which you are compelled.1 And indeed do many lead [others] astray through their [own] inclinations without knowledge. Indeed, your Lord - He is most knowing of the transgressors.
(ऐ ईमान वालो!) अल्लाह के नाम पर ज़बह किए हुए जानवर को खाने से तुम्हें कौन-सी चीज़ रोकती है, जबकि अल्लाह ने तुम्हारे लिए वे चीज़ें स्पष्ट रूप से बयान कर दी हैं, जो उसने तुमपर हराम की हैं। अतः तुम्हारे लिए उन्हें छोड़ देना अनिवार्य है, यह और बात है कि ज़रूरत तुम्हें उन्हें खाने पर मजबूर कर दे। क्योंकि ज़रूरत निषिद्ध चीज़ को अनुमेय कर देती है। निःसंदेह बहुत-से बहुदेववादी अज्ञानतावश अपने भ्रष्ट विचारों के कारण अपने अनुयायियों को सत्य से दूर रखते हैं। क्योंकि वे उस चीज़ को वैध ठहराते हैं, जो अल्लाह ने उनपर हराम की है, जैसे मृत जानवर आदि, और उस चीज़ को हराम ठहराते हैं, जो अल्लाह ने उनके लिए हलाल की है, जैसे बह़ीरा, वसीला और ह़ामी इत्यादि। निःसंदेह आपका रब (ऐ रसूल!) उन लोगों को अधिक जानता है, जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं और वह उन्हें अपनी सीमाओं का उल्लंघन करने का बदला देगा।
6:120Page 143
وَذَرُواْ ظَٰهِرَ ٱلۡإِثۡمِ وَبَاطِنَهُۥٓۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَكۡسِبُونَ ٱلۡإِثۡمَ سَيُجۡزَوۡنَ بِمَا كَانُواْ يَقۡتَرِفُونَ ١٢٠
And leave [i.e., desist from] what is apparent of sin and what is concealed thereof. Indeed, those who earn [blame for] sin will be recompensed for that which they used to commit.
(ऐ लोगो!) प्रत्यक्ष रूप से और गुप्त रूप से पाप करना छोड़ दो। निःसंदेह जो लोग गुप्त रूप से या खुले रूप से पाप करते हैं, शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उनके किए हुए पाप का बदला देगा।
6:121Page 143
وَلَا تَأۡكُلُواْ مِمَّا لَمۡ يُذۡكَرِ ٱسۡمُ ٱللَّهِ عَلَيۡهِ وَإِنَّهُۥ لَفِسۡقٞۗ وَإِنَّ ٱلشَّيَٰطِينَ لَيُوحُونَ إِلَىٰٓ أَوۡلِيَآئِهِمۡ لِيُجَٰدِلُوكُمۡۖ وَإِنۡ أَطَعۡتُمُوهُمۡ إِنَّكُمۡ لَمُشۡرِكُونَ ١٢١
And do not eat of that upon which the name of Allāh has not been mentioned, for indeed, it is grave disobedience. And indeed do the devils inspire their allies [among men] to dispute with you. And if you were to obey them, indeed, you would be associators [of others with Him].1
(ऐ मुसलमानो!) उस जानवर का मांस न खाओ, जिसपर अल्लाह का नाम नहीं लिया गया है, चाहे उसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया है या नहीं। क्योंकि उसमें से खाना निश्चित रूप से अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकलकर उसकी अवज्ञा में प्रस्थान है। निःसंदेह शैतान अपने दोस्तों के मन में संशय डालते रहते हैं, ताकि वे तुमसे मृत मांस खाने के बारे में बहस करें। और यदि (ऐ मुसलमानो!) तुमने - मृत मांस को अनुमेय करने हेतु - उनके डाले जाने वाले संदेहों को स्वीकार कर लिया, तो तुम और वे बहुदेववाद में समान हैं।
6:122Page 143
أَوَمَن كَانَ مَيۡتٗا فَأَحۡيَيۡنَٰهُ وَجَعَلۡنَا لَهُۥ نُورٗا يَمۡشِي بِهِۦ فِي ٱلنَّاسِ كَمَن مَّثَلُهُۥ فِي ٱلظُّلُمَٰتِ لَيۡسَ بِخَارِجٖ مِّنۡهَاۚ كَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِلۡكَٰفِرِينَ مَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ١٢٢
And is one who was dead and We gave him life and made for him light by which to walk among the people like one who is in darkness, never to emerge therefrom? Thus it has been made pleasing to the disbelievers that which they were doing.
क्या वह व्यक्ति, जो अल्लाह के उसे हिदायत देने से पहले मुर्दा था (क्योंकि वह कुफ़्र, अज्ञानता और पापों में लिप्त था), फिर हमने उसको ईमान, ज्ञान और आज्ञाकारिता का मार्गदर्शन प्रदान करके जीवित किया : उस आदमी के बराबर है, जो कुफ़्र, अज्ञानता और पापों के अंधेरों में पड़ा है जिनसे वह बाहर नहीं निकल सकता, उसके लिए सारे रास्ते भ्रमित और अंधेरे हो गए हैं?! जिस प्रकार इन मुश्रिकों के लिए उनका शिर्क पर क़ायम रहना तथा मृत जानवर का मांस खाना और झूठ के साथ बहस करना सुंदर बना दिया गया है, उसी प्रकार काफिरों के लिए उन पापों को सुंदर बना दिया गया है, जो वे किया करते थे, ताकि क़ियामत के दिन उन्हें उनके बदले में दर्दनाक यातना दी जाए।
6:123Page 143
وَكَذَٰلِكَ جَعَلۡنَا فِي كُلِّ قَرۡيَةٍ أَكَٰبِرَ مُجۡرِمِيهَا لِيَمۡكُرُواْ فِيهَاۖ وَمَا يَمۡكُرُونَ إِلَّا بِأَنفُسِهِمۡ وَمَا يَشۡعُرُونَ ١٢٣
And thus We have placed within every city the greatest of its criminals to conspire therein. But they conspire not except against themselves, and they perceive [it] not.
जिस प्रकार मक्का में हुआ कि बहुदेववादियों के प्रमुखों ने अल्लाह के रास्ते से रोकने का काम किया, उसी तरह हमने हर बस्ती में सरदार और महापुरुष बनाए, जो शैतान के मार्ग की ओर बुलाने तथा रसूलों और उनके अनुयायियों से लड़ने की खातिर अपनी चालें चलते हैं। हालाँकि तथ्य यह है कि उनकी चालें खुद उन्हीं पर लौट आती हैं, लेकिन वे अपनी अज्ञानता और इच्छाओं का अनुसरण करने के कारण इसे महसूस नहीं करते हैं।
6:124Page 143
وَإِذَا جَآءَتۡهُمۡ ءَايَةٞ قَالُواْ لَن نُّؤۡمِنَ حَتَّىٰ نُؤۡتَىٰ مِثۡلَ مَآ أُوتِيَ رُسُلُ ٱللَّهِۘ ٱللَّهُ أَعۡلَمُ حَيۡثُ يَجۡعَلُ رِسَالَتَهُۥۗ سَيُصِيبُ ٱلَّذِينَ أَجۡرَمُواْ صَغَارٌ عِندَ ٱللَّهِ وَعَذَابٞ شَدِيدُۢ بِمَا كَانُواْ يَمۡكُرُونَ ١٢٤
And when a sign comes to them, they say, "Never will we believe until we are given like that which was given to the messengers of Allāh." Allāh is most knowing of where [i.e., with whom] He places His message. There will afflict those who committed crimes debasement before Allāh and severe punishment for what they used to conspire.
जब काफ़िरों के प्रमुखों के पास अल्लाह द्वारा उसके नबी पर उतारी हुई निशानियों में से कोई निशानी आती है, तो वे कहते हैं : हम कदापि ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि अल्लाह हमें भी उसी जैसा प्रदान कर दे, जो उसने निबयों को नुबुव्वत तथा रिसालत प्रदान की है। तो अल्लाह ने उन्हें उत्तर दिया कि वह उसे अधिक जानने वाला है जो रिसालत (पैग़ंबरी) के लिए योग्य है और उसके बोझ को उठा सकता है। इसलिए वह उसे नुबुव्वत तथा रिसालत के लिए विशिष्ट कर लेता है। शीघ्र ही इन सरकशों को उनके सत्य से अभिमान के कारण अपमान और तिरस्कार, तथा उनकी चालबाज़ी (छल) के कारण कड़ी यातना का सामना करना पड़ेगा।
6:125Page 144
فَمَن يُرِدِ ٱللَّهُ أَن يَهۡدِيَهُۥ يَشۡرَحۡ صَدۡرَهُۥ لِلۡإِسۡلَٰمِۖ وَمَن يُرِدۡ أَن يُضِلَّهُۥ يَجۡعَلۡ صَدۡرَهُۥ ضَيِّقًا حَرَجٗا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِي ٱلسَّمَآءِۚ كَذَٰلِكَ يَجۡعَلُ ٱللَّهُ ٱلرِّجۡسَ عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ ١٢٥
So whoever Allāh wants to guide - He expands his breast to [contain] Islām; and whoever He wants to send astray1 - He makes his breast tight and constricted as though he were climbing into the sky. Thus does Allāh place defilement upon those who do not believe.
जिस व्यक्ति को अल्लाह हिदायत के मार्ग पर ले जाना चाहता है, उसके सीने को खोल देता है तथा उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए तैयार कर देता है। और जिसे वह विफल करना चाहता है और उसे हिदायत की तौफ़ीक़ नहीं देना चाहता, उसके सीने को सच्चाई को स्वीकार करने से बहुत संकीर्ण कर देता है, ताकि उसके हृदय में सत्य का प्रवेश असंभव हो जाए। जिस तरह कि उसका आसमान की ओर चढ़ना असंभव है और वह स्वयं ऐसा करने में असमर्थ है। तथा जैसे अल्लाह ने पथभ्रष्ट व्यक्ति की स्थिति को इस तरह की गंभीर संकट की स्थिति बना दी है, उसी तरह वह उन लोगों को यातना से ग्रस्त करता है, जो उसपर ईमान नहीं लाते।
6:126Page 144
وَهَٰذَا صِرَٰطُ رَبِّكَ مُسۡتَقِيمٗاۗ قَدۡ فَصَّلۡنَا ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَذَّكَّرُونَ ١٢٦
And this is the path of your Lord, [leading] straight. We have detailed the verses for a people who remember.
यह धर्म जो हमने (ऐ रसूल!) आपके लिए निर्धारित किया है, अल्लाह का वह सीधा मार्ग है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं। हमने उसके लिए निशानियाँ स्पष्ट कर दी हैं, जिसके पास समझ-बूझ है जिसके द्वारा वह अल्लाह के बारे में समझ सकता है।
6:127Page 144
۞ لَهُمۡ دَارُ ٱلسَّلَٰمِ عِندَ رَبِّهِمۡۖ وَهُوَ وَلِيُّهُم بِمَا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ ١٢٧
For them will be the Home of Peace [i.e., Paradise] with their Lord. And He will be their protecting friend because of what they used to do.
उनके लिए एक घर है, जिसमें वे हर नुक़सान से सुरक्षित रहेंगे। यह घर जन्नत है। तथा अल्लाह उनका सहायक और समर्थक है, उनके उन अच्छे कामों के बदले जो वे किया करते थे।
6:128Page 144
وَيَوۡمَ يَحۡشُرُهُمۡ جَمِيعٗا يَٰمَعۡشَرَ ٱلۡجِنِّ قَدِ ٱسۡتَكۡثَرۡتُم مِّنَ ٱلۡإِنسِۖ وَقَالَ أَوۡلِيَآؤُهُم مِّنَ ٱلۡإِنسِ رَبَّنَا ٱسۡتَمۡتَعَ بَعۡضُنَا بِبَعۡضٖ وَبَلَغۡنَآ أَجَلَنَا ٱلَّذِيٓ أَجَّلۡتَ لَنَاۚ قَالَ ٱلنَّارُ مَثۡوَىٰكُمۡ خَٰلِدِينَ فِيهَآ إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُۚ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٞ ١٢٨
And [mention, O Muḥammad], the Day when He will gather them together [and say], "O company of jinn, you have [misled] many of mankind." And their allies among mankind will say, "Our Lord, some of us made use of others, and we have [now] reached our term which You appointed for us." He will say, "The Fire is your residence, wherein you will abide eternally, except for what Allāh wills. Indeed, your Lord is Wise and Knowing."
और (ऐ रसूल!) याद करें, जिस दिन अल्लाह मानव जाति और जिन्नों को इकट्ठा करेगा, फिर अल्लाह कहेगा : ऐ जिन्नों के समूह! तुमने इनसानों को खूब गुमराह किया तथा उन्हें अल्लाह के मार्ग से रोक दिया। इसपर इनसानों में से उनके अनुयायी अपने रब को जवाब देते हुए कहेंगे : ऐ हमारे रब! हममें से प्रत्येक ने अपने साथी से लाभ उठाया है। चुनाँचे जिन्न ने इनसान की आज्ञाकारिता का लाभ उठाया, और इनसान ने अपनी इच्छाओं की पूर्ति का लाभ उठाया। और हम उस अवधि तक पहुँच गए, जो तूने हमारे लिए नियत कर रखी थी। तो अब यह क़ियामत का दिन है। अल्लाह कहेगा : आग ही तुम्हारा ठिकाना है, जिसमें तुम हमेशा रहोगे, सिवाय उसके जो अल्लाह चाहे, जो कि उनके क़ब्रों से उठने से लेकर उनके अपने गंतव्य जहन्नम की ओर जाने के बीच की अवधि है। यही वह अवधि है, जिसको अल्लाह ने उनके हमेशा जहन्नम में रहने से अलग किया है। निश्चय ही आपका रब (ऐ रसूल!) अपनी तक़दीर तथा प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, अपने बंदों और उनमें से उन लोगों के बारे में सब कुछ जानने वाला है जो यातना के योग्य हैं।
6:129Page 144
وَكَذَٰلِكَ نُوَلِّي بَعۡضَ ٱلظَّٰلِمِينَ بَعۡضَۢا بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ ١٢٩
And thus will We make some of the wrongdoers allies of others for what they used to earn.1
जिस प्रकार हमने सरकश जिन्नों को कुछ इनसानों का दोस्त बना दिया और उन्हें उनपर हावी कर दिया, ताकि वे उन्हें पथभ्रष्ट करते रहें, उसी प्रकार हम प्रत्येक अत्याचारी को एक अत्याचारी का दोस्त बना देते हैं, जो उसे बुराई करने पर उभारता और उसके लिए प्रेरित करता है, तथा उसे भलाई से नफरत दिलाता और उसके प्रति उसमें अरुचि पैदा करता है। यह दरअसल उन पापों के प्रतिफल के रूप में है, जो वे कमाया करते थे।
6:130Page 144
يَٰمَعۡشَرَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ أَلَمۡ يَأۡتِكُمۡ رُسُلٞ مِّنكُمۡ يَقُصُّونَ عَلَيۡكُمۡ ءَايَٰتِي وَيُنذِرُونَكُمۡ لِقَآءَ يَوۡمِكُمۡ هَٰذَاۚ قَالُواْ شَهِدۡنَا عَلَىٰٓ أَنفُسِنَاۖ وَغَرَّتۡهُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَا وَشَهِدُواْ عَلَىٰٓ أَنفُسِهِمۡ أَنَّهُمۡ كَانُواْ كَٰفِرِينَ ١٣٠
"O company of jinn and mankind,1 did there not come to you messengers from among you, relating to you My verses and warning you of the meeting of this Day of yours?" They will say, "We bear witness against ourselves"; and the worldly life had deluded them, and they will bear witness against themselves that they were disbelievers.
हम क़ियामत के दिन उनसे कहेंगे : ऐ इनसानों और जिन्नों के समूह! क्या तुम्हारे पास तुम्हारे ही वर्ग (मानव जाति) से रसूल नहीं आए, जो तुम्हें वह पढ़कर सुनाते हों जो अल्लाह ने उनपर अवतरित किया है, और तुम्हें इस दिन के भेंट अर्थात् क़ियामत के दिन से डराते हों? वे कहेंगे : बिलकुल आए थे। आज हम अपने विरुद्ध इक़रार करते हैं कि तेरे रसूलों ने हमें संदेश पहुँचा दिया, तथा हम इस दिन के भेंट का भी इक़रार करते हैं। परंतु हमने तेरे रसूलों को झुठला दिया था तथा इस दिन के भेंट के बारे में उनकी बात को अस्वीकार कर दिया था। दरअसल, इस दुनिया के जीवन ने उन्हें अपने अलंकरण, शोभा और क्षणभंगुर आनंद के साथ धोखा दिया, तथा वे स्वयं ही स्वीकार करेंगे कि वे दुनिया में अल्लाह तथा उसके रसूलों का इनकार करने वाले थे। हालाँकि इस स्वीकारोक्ति और ईमान से उन्हें कुछ भी लाभ नहीं होगा, क्योंकि उसका समय समाप्त हो चुका।
6:131Page 144
ذَٰلِكَ أَن لَّمۡ يَكُن رَّبُّكَ مُهۡلِكَ ٱلۡقُرَىٰ بِظُلۡمٖ وَأَهۡلُهَا غَٰفِلُونَ ١٣١
That is because your Lord would not destroy the cities for wrongdoing1 while their people were unaware.
इनसानों तथा जिन्नों की ओर रसूल भेजकर इसलिए हुज्जत तमाम कर दी गई, ताकि किसी को उसके गुनाह की सज़ा इस हाल में न दी जाए कि उसकी ओर कोई रसूल न भेजा गया हो और उसके पास धर्म का संदेश न पहुँचा हो। अतः हमने किसी समुदाय को उसके पास रसूल भेजने के बाद ही दंडित किया।
6:132Page 145
وَلِكُلّٖ دَرَجَٰتٞ مِّمَّا عَمِلُواْۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ ١٣٢
And for all are degrees [i.e., positions resulting] from what they have done. And your Lord is not unaware of what they do.
उनमें से प्रत्येक के लिए अपने कर्मों के अनुसार दरजे हैं। अतः थोड़ी-बहुत बुराई करने वाला और अधिक बुराई करने वाला, दोनों बराबर नहीं हो सकते तथा अनुसरण करने वाला और जिसका अनुसरण किया गया है, दोनों बराबर नहीं हो सकते। जैसे कि सभी अच्छे कार्य करने वालों का बदला बराबर नहीं हो सकता। तथा आपका पालनहार उससे अनजान नहीं है जो कुछ वे कर रहे थे, बल्कि वह उसके बारे में जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है, और वह उन्हें उनके कार्यों का बदला देगा।
6:133Page 145
وَرَبُّكَ ٱلۡغَنِيُّ ذُو ٱلرَّحۡمَةِۚ إِن يَشَأۡ يُذۡهِبۡكُمۡ وَيَسۡتَخۡلِفۡ مِنۢ بَعۡدِكُم مَّا يَشَآءُ كَمَآ أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوۡمٍ ءَاخَرِينَ ١٣٣
And your Lord is the Free of need, the possessor of mercy. If He wills, He can do away with you and give succession after you to whomever He wills, just as He produced you from the descendants of another people.
और (ऐ रसूल!) आपका रब अपने बंदों से बेनियाज़ है। उसे न उनकी आवश्यकता है, न उनकी इबादत की, और न ही उनके इनकार से उसे कोई नुक़सान होता है। वह उनसे अपनी इस बेनियाज़ी के बावजूद, उनपर दया करता है। यदि वह (ऐ अवज्ञाकारी बंदो!) तुम्हें नष्ट करना चाहे, तो अपनी यातना भेजकर तुम्हें जड़ से उखाड़ फेंके और तुम्हें विनष्ट करने के बाद अपनी इच्छा के अनुसार ऐसे लोगों को ले आए, जो उसपर ईमान रखें और उसकी आज्ञा मानें। जैसा कि उसने तुम्हें अन्य लोगों के वंश से पैदा किया जो तुमसे पहले थे।
6:134Page 145
إِنَّ مَا تُوعَدُونَ لَأٓتٖۖ وَمَآ أَنتُم بِمُعۡجِزِينَ ١٣٤
Indeed, what you are promised is coming, and you will not cause failure [to Allāh].1
(ऐ काफ़िरो!) तुमसे जिस पुनर्जीवन, दोबारा उठाए जाने, हिसाब-किताब और सज़ा का वादा किया जा रहा है, वह अनिवार्य रूप से आने वाला है और तुम अपने पालनहार की पकड़ से भागकर नहीं निकल सकते। क्योंकि वह तुम्हारे माथे की लट को पकड़े हुए है और तुम्हें अपनी यातना से दंडित करने वाला है।
6:135Page 145
قُلۡ يَٰقَوۡمِ ٱعۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمۡ إِنِّي عَامِلٞۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ مَن تَكُونُ لَهُۥ عَٰقِبَةُ ٱلدَّارِۚ إِنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلظَّٰلِمُونَ ١٣٥
Say, "O my people, work according to your position; [for] indeed, I am working. And you are going to know who will have succession in the home.1 Indeed, the wrongdoers will not succeed."
(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए : ऐ मेरे समुदाय के लोगो! अपने मार्ग पर और जिस कुफ़्र तथा पथभ्रष्टता में पड़े हो, उस पर अडिग रहो। मैंने स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाकर तुमपर हुज्जत तमाम कर दी और प्रमाण स्थापित कर दिया। अतः मुझे तुम्हारे कुफ़्र तथा पथभ्रष्टता की कोई परवाह नहीं है। बल्कि मैं जिस सत्य पर क़ायम हूँ उसपर अडिग रहूँगा। फिर तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा कि किसे दुनिया में विजय प्राप्त होती है, कौन धरती का वारिस होता है तथा किसे आख़िरत की खुशियाँ प्राप्त होती हैं। निश्चित रूप से बहुदेववादियों को न तो इस दुनिया में सफलता प्राप्त होगी, और न ही आख़िरत में। बल्कि उनका परिणाम घाटा एवं नुक़सान है, भले ही उन्होंने इस दुनिया में जो कुछ आनंद लिया हो, उसका आनंद लिया।
6:136Page 145
وَجَعَلُواْ لِلَّهِ مِمَّا ذَرَأَ مِنَ ٱلۡحَرۡثِ وَٱلۡأَنۡعَٰمِ نَصِيبٗا فَقَالُواْ هَٰذَا لِلَّهِ بِزَعۡمِهِمۡ وَهَٰذَا لِشُرَكَآئِنَاۖ فَمَا كَانَ لِشُرَكَآئِهِمۡ فَلَا يَصِلُ إِلَى ٱللَّهِۖ وَمَا كَانَ لِلَّهِ فَهُوَ يَصِلُ إِلَىٰ شُرَكَآئِهِمۡۗ سَآءَ مَا يَحۡكُمُونَ ١٣٦
And they [i.e., the polytheists] assign to Allāh from that which He created of crops and livestock a share and say, "This is for Allāh," by their claim, "and this is for our 'partners' [associated with Him]." But what is for their "partners" does not reach Allāh, while what is for Allāh - this reaches their "partners." Evil is that which they rule.
अल्लाह के साथ शिर्क करने वालों ने यह तरीक़ा निकाला कि अल्लाह की पैदा की हुई फसलों और मवेशियों में से उसके लिए एक हिस्सा निर्धारित कर दिया और यह दावा किया कि वह (हिस्सा) अल्लाह का है, और दूसरा हिस्सा उनकी मूर्तियों और थानों के लिए है। फिर उन्होंने जो हिस्सा अपने साझियों के लिए आवंटित किया है, वह उन मसरफ़ों तक नहीं पहुँचता, जिनमें ख़र्च करना अल्लाह ने धर्मसंगत बनाया है, जैसे ग़रीब और मिसकीन लोग। तथा उन्होंने जो हिस्सा अल्लाह के लिए निर्धारित किया है, वह उनके साझियों यानी मूर्तियों को पहुँच जाता है, वह उनके हितों में खर्च किया जा सकता है। उनका यह निर्णय और विभाजन बहुत बुरा है।
6:137Page 145
وَكَذَٰلِكَ زَيَّنَ لِكَثِيرٖ مِّنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ قَتۡلَ أَوۡلَٰدِهِمۡ شُرَكَآؤُهُمۡ لِيُرۡدُوهُمۡ وَلِيَلۡبِسُواْ عَلَيۡهِمۡ دِينَهُمۡۖ وَلَوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا فَعَلُوهُۖ فَذَرۡهُمۡ وَمَا يَفۡتَرُونَ ١٣٧
And likewise, to many of the polytheists their partners1 have made [to seem] pleasing the killing of their children in order to bring about their destruction and to cover them with confusion in their religion. And if Allāh had willed, they would not have done so. So leave them and that which they invent.
जिस तरह शैतान ने बहुदेववादियों के लिए इस अन्यायपूर्ण निर्णय को सुंदर बना दिया है, उसी तरह बहुत-से बहुदेववादियों के लिए उनके साझी शैतानों ने यह सुशोभित किया है कि वे गरीबी के डर से अपने बच्चों की हत्या कर दें; ताकि वह उनसे उस आत्मा की हत्या कराकर उन्हें नष्ट कर दे, जिसकी नाहक़ हत्या करना अल्लाह ने निषिद्ध ठहराया है, और ताकि वह उनपर उनके धर्म को गड्डमड्ड कर दे, फिर वे यह न जान सकें कि क्या वैध है और क्या अवैध। और यदि अल्लाह चाहता कि वे ऐसा न करें, तो वे ऐसा नहीं करते, परंतु अल्लाह ने अपनी व्यापक हिकमत के तहत ऐसा ही चाहा। अतः (ऐ रसूल!) आप इन बहुदेववादियों तथा अल्लाह पर इनके मिथ्यारोपण को छोड़ दें। क्योंकि इससे आपको कोई नुक़सान नहीं होगा, और उनका मामला अल्लाह को सौंप दें।
6:138Page 146
وَقَالُواْ هَٰذِهِۦٓ أَنۡعَٰمٞ وَحَرۡثٌ حِجۡرٞ لَّا يَطۡعَمُهَآ إِلَّا مَن نَّشَآءُ بِزَعۡمِهِمۡ وَأَنۡعَٰمٌ حُرِّمَتۡ ظُهُورُهَا وَأَنۡعَٰمٞ لَّا يَذۡكُرُونَ ٱسۡمَ ٱللَّهِ عَلَيۡهَا ٱفۡتِرَآءً عَلَيۡهِۚ سَيَجۡزِيهِم بِمَا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ ١٣٨
And they say, "These animals1 and crops are forbidden; no one may eat from them except whom we will," by their claim. And there are those [camels] whose backs are forbidden [by them]2 and those upon which the name of Allāh is not mentioned3 - [all of this] an invention of untruth about Him.4 He will punish them for what they were inventing.
तथा बहुदेववादियों ने कहा : ये पशुधन और फसलें निषिद्ध हैं, जिनमें से केवल वही खा सकते हैं, जिन्हें वे चाहें, जैसे मूर्तियों के सेवक आदि। यह उनका अपना ख़याल और घड़ी हुई बात है। और (उन्होंने यह भी कहा कि) ये ऐसे मवेशी हैं जिनकी पीठें हराम (वर्जित) हैं; न उनकी सवारी की जाएगी और न ही उनपर बोझ लादा जाएगा। इन जानवरों से मुराद बहीरा (वह ऊँटनी जिसके पाँच बच्चे हो जाएँ और उसका कान चीरकर उसे छोड़ दिया जाए), साइबा (वह ऊँटनी जिसे मूर्तियों के लिए छोड़ दिया जाए) और हामी (वह नर ऊँट जिसकी नस्ल से दस बच्चे पैदा हो जाएँ और उसे आज़ाद कर दिया जाए) हैं। इन जानवरों को ज़बह करते समय वे अल्लाह का नाम लेने के बजाय अपनी मूर्तियों का नाम लेते थे। उन्होंने यह सब अल्लाह के विरुद्ध यह झूठ गढ़ते हुए किया कि यह उसकी ओर से है। अल्लाह शीघ्र ही उन्हें अपनी यातना से दंडित करेगा, क्योंकि वे अल्लाह पर झूठे आरोप लगाते थे।
6:139Page 146
وَقَالُواْ مَا فِي بُطُونِ هَٰذِهِ ٱلۡأَنۡعَٰمِ خَالِصَةٞ لِّذُكُورِنَا وَمُحَرَّمٌ عَلَىٰٓ أَزۡوَٰجِنَاۖ وَإِن يَكُن مَّيۡتَةٗ فَهُمۡ فِيهِ شُرَكَآءُۚ سَيَجۡزِيهِمۡ وَصۡفَهُمۡۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٞ ١٣٩
And they say, "What is in the bellies of these animals1 is exclusively for our males and forbidden to our females. But if it is [born] dead, then all of them have shares therein." He will punish them for their description.2 Indeed, He is Wise and Knowing.
उन्होंने यह भी कहा कि इन 'साइबा' एवं 'बहीरा' आदि जानवरों के पेट में जो बच्चे हैं, यदि वह जीवित पैदा हुआ है, तो वह हमारे पुरुषों के लिए अनुमेय और हमारी महिलाओं के लिए निषिद्ध है, और यदि उनके पेट में जो बच्चे हैं मृत पैदा हों, तो उसे पुरुष एवं महिला सब खा सकते हैं। शीघ्र ही अल्लाह उन्हें उनके ऐसा कहने का वह बदला देगा जिसके वे योग्य हैं। वह अपने विधान तथा अपनी सृष्टि के मामलों के प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, उनके बारे में सब कुछ जानने वाला है।
6:140Page 146
قَدۡ خَسِرَ ٱلَّذِينَ قَتَلُوٓاْ أَوۡلَٰدَهُمۡ سَفَهَۢا بِغَيۡرِ عِلۡمٖ وَحَرَّمُواْ مَا رَزَقَهُمُ ٱللَّهُ ٱفۡتِرَآءً عَلَى ٱللَّهِۚ قَدۡ ضَلُّواْ وَمَا كَانُواْ مُهۡتَدِينَ ١٤٠
They will have lost who killed their children in foolishness without knowledge and prohibited what Allāh had provided for them, inventing untruth about Allāh. They have gone astray and were not [rightly] guided.
वे लोग नष्ट हो गए, जिन्होंने अपनी नासमझी एवं अज्ञानता के कारण अपनी संतान की हत्या की और अल्लाह के दिए हुए जानवरों को, झूठे तौर पर अल्लाह की ओर निसबत करके हराम ठहरा लिया। निश्चय वे सीधे रास्ते से दूर हो गए और वे उस पर निर्देशित नहीं थे।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences