Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
التغابن
At-Taghabun
The Mutual Disillusion · Medinan · 18 ayahs
64:1Page 556
يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۖ لَهُ ٱلۡمُلۡكُ وَلَهُ ٱلۡحَمۡدُۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ ١
Whatever is in the heavens and whatever is on the earth is exalting Allāh.1 To Him belongs dominion, and to Him belongs [all] praise, and He is over all things competent.
आकाशों और धरती में मौजूद सभी प्राणी अल्लाह के हर प्रकार की कमी और अपूर्णता के गुणों से पवित्र होने का वर्णन करते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं। केवल उसी की बादशाहत है, इसलिए उसके सिवा कोई दूसरा बादशाह नहीं है, और उसी के लिए अच्छी प्रशंसा है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, कोई चीज़ उसे विवश नहीं कर सकती।
64:2Page 556
هُوَ ٱلَّذِي خَلَقَكُمۡ فَمِنكُمۡ كَافِرٞ وَمِنكُم مُّؤۡمِنٞۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٌ ٢
It is He who created you, and among you is the disbeliever, and among you is the believer. And Allāh, of what you do, is Seeing.
वही है, जिसने (ऐ लोगो!) तुम्हें पैदा किया। फिर तुममें से कोई उसके साथ कुफ़्र करने वाला है और उसका ठिकाना जहन्नम है, तथा तुममें से कोई उसपर ईमान रखने वाला है और उसका ठिकाना जन्नत है। और तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह उसे खूब जानने वाला है, उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
64:3Page 556
خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِٱلۡحَقِّ وَصَوَّرَكُمۡ فَأَحۡسَنَ صُوَرَكُمۡۖ وَإِلَيۡهِ ٱلۡمَصِيرُ ٣
He created the heavens and earth in truth and formed you and perfected your forms; and to Him is the [final] destination.
उसने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया, उन्हें व्यर्थ नहीं बनाया। तथा उसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे रूप बनाए, तो अपने उपकार और अनुग्रह से तुम्हारे रूप अच्छे बनाए। हालाँकि, यदि वह चाहता, तो उन्हें बदसूरत बना देता। और क़ियामत के दिन केवल उसी की ओर लौटकर जाना है। फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा। यदि अच्छा काम है, तो अच्छा बदला और यदि बुरा है, तो बुरा।
64:4Page 556
يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَيَعۡلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعۡلِنُونَۚ وَٱللَّهُ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ٤
He knows what is within the heavens and earth and knows what you conceal and what you declare. And Allāh is Knowing of that within the breasts.
वह जानता है जो कुछ आकाशों में है और वह जानता है जो कुछ धरती में है, तथा वह जानता है जो काम तुम छिपाकर करते और वह जानता है जो काम तुम खुल्लम-खुल्ला करते हो। और अल्लाह दिलों के अंदर छिपी भलाई या बुराई को भी जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
64:5Page 556
أَلَمۡ يَأۡتِكُمۡ نَبَؤُاْ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن قَبۡلُ فَذَاقُواْ وَبَالَ أَمۡرِهِمۡ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ ٥
Has there not come to you the news of those who disbelieved before? So they tasted the bad consequence of their affair, and they will have a painful punishment.
क्या तुम्हारे पास (ऐ मुश्रिको) पिछली झुठलाने वाली जातियों, जैसे नूह अलैहिस्सलाम की जाति तथा आद और समूद इत्यादि की खबर नहीं पहुँची है, जिन्होंने इस दुनिया में अपने कुफ़्र की सज़ा का स्वाद चखा और आख़िरत में उनके लिए एक दर्दनाक यातना है?! क्यों नहीं, तुम्हारे पास उनकी खबर आ चुकी है। अतः उनके परिणाम से नसीहत प्राप्त करो और अल्लाह के सामने तौबा कर लो, इससे पहले कि तुम्हारे साथ भी वही कुछ हो, जो उनके साथ हुआ था।
64:6Page 556
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُۥ كَانَت تَّأۡتِيهِمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَقَالُوٓاْ أَبَشَرٞ يَهۡدُونَنَا فَكَفَرُواْ وَتَوَلَّواْۖ وَّٱسۡتَغۡنَى ٱللَّهُۚ وَٱللَّهُ غَنِيٌّ حَمِيدٞ ٦
That is because their messengers used to come to them with clear evidences, but they said, "Shall human beings guide us?" and disbelieved and turned away. And Allāh dispensed [with them]; and Allāh is Free of need and Praiseworthy.
यह यातना उन्हें इस कारण पहुँची कि उनके रसूल उनके पास अल्लाह की ओर से स्पष्ट प्रमाणों और प्रत्यक्ष तर्कों के साथ आते थे, तो उन्होंने रसूल के मानव जाति से होने का खंडन करते हुए कहा : क्या मनुष्य हमें सत्य का मार्गदर्शन करेंगे?!इस तरह उन्होंने इनकार किया और उनपर ईमान लाने से उपेक्षा किया। लेकिन उन्होंने अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। और अल्लाह ने उनके ईमान और आज्ञाकारिता की परवाह न की, क्योंकि उनकी आज्ञाकारिता उसे किसी चीज़ में बढ़ाती नहीं है। और अल्लाह बेनियाज़ है, अपने बंदों का ज़रूरतमंद नहीं है, अपनी बातों और कार्यों में प्रशंसनीय है।
64:7Page 556
زَعَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَن لَّن يُبۡعَثُواْۚ قُلۡ بَلَىٰ وَرَبِّي لَتُبۡعَثُنَّ ثُمَّ لَتُنَبَّؤُنَّ بِمَا عَمِلۡتُمۡۚ وَذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٞ ٧
Those who disbelieve have claimed that they will never be resurrected. Say, "Yes, by my Lord, you will surely be resurrected; then you will surely be informed of what you did. And that, for Allāh, is easy."
अल्लाह का इनकार करने वालों ने समझ रखा है कि अल्लाह उनकी मृत्यु के बाद उन्हें जीवित करके नहीं उठाएगा। (ऐ रसूल) आप इन पुनर्जीवन का इनकार करने वालों से कह दें : क्यों नहीं, मेरे पालनहार की क़सम, निश्चय तुम क़ियामत के दिन ज़रूर उठाए जाओगे। फिर निश्चय तुम दुनिया में किए हुए कर्मो से अवगत कराए जाओगे। और यह पुनर्जीवित करके उठाना अल्लाह के लिए आसान है। क्योंकि उसने तुम्हें पहली बार पैदा किया है, अतः वह मौत के बाद तुम्हें हिसाब और बदले के लिए पुनः जीवित करके उठाने की भी शक्ति रखता है।
64:8Page 556
فَـَٔامِنُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَٱلنُّورِ ٱلَّذِيٓ أَنزَلۡنَاۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعۡمَلُونَ خَبِيرٞ ٨
So believe in Allāh and His Messenger and the light [i.e., the Qur’ān] which We have sent down. And Allāh is Aware of what you do.
तो तुम (ऐ लोगो) अल्लाह पर ईमान ले आओ और उसके रसूल पर ईमान ले आओ, और उस क़ुरआन पर ईमान ले आओ जिसे हमने अपने रसूल पर उतारा है। और अल्लाह तुम्हारे कार्यों से अवगत है। उससे तुम्हारा कोई काम छिपा नहीं है। और वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
64:9Page 556
يَوۡمَ يَجۡمَعُكُمۡ لِيَوۡمِ ٱلۡجَمۡعِۖ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلتَّغَابُنِۗ وَمَن يُؤۡمِنۢ بِٱللَّهِ وَيَعۡمَلۡ صَٰلِحٗا يُكَفِّرۡ عَنۡهُ سَيِّـَٔاتِهِۦ وَيُدۡخِلۡهُ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۚ ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ٩
The Day He will assemble you for the Day of Assembly - that is the Day of Deprivation.1 And whoever believes in Allāh and does righteousness - He will remove from him his misdeeds and admit him to gardens beneath which rivers flow, wherein they will abide forever. That is the great attainment.
और (ऐ रसूल!) उस दिन को याद करें, जिस दिन अल्लाह तुम्हें क़ियामत के दिन एकत्रित करेगा, ताकि तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला दे। जिस दिन काफ़िरों की हानि और उनका घाटा सामने आ जाएगा। क्योंकि ईमान वाले जन्नत के अंदर जहन्नमियों के घरों के वारिस बनेंगे, और जहन्नमी जहन्नम के अंदर जन्नतियों के ठिकानों के वारिस होंगे। और जो अल्लाह पर ईमान लाएगा और अच्छे कार्य करेगा, अल्लाह उसकी बुराइयों को मिटा देगा और ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बह रही होंगी। वे वहाँ हमेशा रहेंगे। न वे कभी वहाँ से निकलेंगे और न कभी उनसे उसकी नेमतें बाधित होंगी। यह जो उन्होंने प्राप्त किया, वही महान सफलता है, जिसकी बराबरी कोई अन्य सफलता नहीं कर सकती।
64:10Page 557
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَكَذَّبُواْ بِـَٔايَٰتِنَآ أُوْلَٰٓئِكَ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِ خَٰلِدِينَ فِيهَاۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ ١٠
But the ones who disbelieved and denied Our verses - those are the companions of the Fire, abiding eternally therein; and wretched is the destination.
और जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और हमारी उन आयतों को झुठलाया, जिन्हें हमने अपने रसूल पर उतारा है, वही लोग जहन्नमी हैं, जो उसमें हमेशा रहने वाले हैं। और उनका ठिकाना बहुत बुरा ठिकाना है।
64:11Page 557
مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ إِلَّا بِإِذۡنِ ٱللَّهِۗ وَمَن يُؤۡمِنۢ بِٱللَّهِ يَهۡدِ قَلۡبَهُۥۚ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٞ ١١
No disaster strikes except by permission of Allāh. And whoever believes in Allāh - He will guide his heart. And Allāh is Knowing of all things.
किसी को उसकी जान, या उसके धन, या उसकी संतान में जो भी विपत्ति पहुँचती है, वह अल्लाह के निर्णय और उसकी नियति के अनुसार होती है। और जो अल्लाह, उसके निर्णय और उसकी नियति पर ईमान लाएगा, अल्लाह उसके दिल को अपने आदेश के आगे समर्पण करने तथा अपने निर्णय से संतुष्ट होने की तौफ़ीक़ प्रदान करेगा। और अल्लाह हर वस्तु को भली-भाँति जानता है। उससे कुछ भी छिपा नहीं है।
64:12Page 557
وَأَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَۚ فَإِن تَوَلَّيۡتُمۡ فَإِنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ ١٢
And obey Allāh and obey the Messenger; but if you turn away - then upon Our Messenger is only [the duty of] clear notification.
तथा अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो। फिर यदि तुम उसके रसूल के लाए हुए संदेश से मुँह फेर लो, तो इस विमुखता का पाप तुम पर होगा। और हमारे रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का हमने उन्हें आदेश दिया गया है। और उन्होंने वह संदेश तुम्हें पहुँचा भी दिया है, जिसे पहुँचाने का उन्हें आदेश दिया गया था।
64:13Page 557
ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلۡيَتَوَكَّلِ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ١٣
Allāh - there is no deity except Him. And upon Allāh let the believers rely.
अल्लाह ही सत्य पूज्य है। उसके सिवा कोई सत्य पूज्य (सच्चा माबूद) नहीं। और केवल अल्लाह ही पर, ईमान वालों को अपने सभी मामलों में भरोसा करना चाहिए।
64:14Page 557
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِنَّ مِنۡ أَزۡوَٰجِكُمۡ وَأَوۡلَٰدِكُمۡ عَدُوّٗا لَّكُمۡ فَٱحۡذَرُوهُمۡۚ وَإِن تَعۡفُواْ وَتَصۡفَحُواْ وَتَغۡفِرُواْ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٌ ١٤
O you who have believed, indeed, among your spouses and your children are enemies to you, so beware of them. But if you pardon and overlook and forgive - then indeed, Allāh is Forgiving and Merciful.
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! निश्चय तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी संतान में से कुछ तुम्हारे दुश्मन हैं; क्योंकि वे तुम्हें अल्लाह के ज़िक्र और उसके मार्ग में जिहाद से गाफ़िल कर देते हैं और तुम्हें हतोत्साहित करते हैं। अतः सावधान रहो कि कहीं वे तुम्हें प्रभावित न कर दें। और यदि तुम उनकी गलतियों को माफ़ कर दो, उन्हें नज़रअंदाज़ कर दो और उनपर पर्दा डाल दो, तो अल्लाह तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा और तुम पर दया करेगा। और जैसा काम होता है, वैसा ही फल मिलता है।
64:15Page 557
إِنَّمَآ أَمۡوَٰلُكُمۡ وَأَوۡلَٰدُكُمۡ فِتۡنَةٞۚ وَٱللَّهُ عِندَهُۥٓ أَجۡرٌ عَظِيمٞ ١٥
Your wealth and your children are but a trial, and Allāh has with Him a great reward.
निश्चय तुम्हारे धन तथा तुम्हारी संतान तुम्हारे लिए परीक्षा और आज़माइश हैं। क्योंकि वे तुम्हें हराम कमाई करने और अल्लाह के आज्ञापालन को छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। और अल्लाह के पास उसके लिए एक महान प्रतिफल है, जो संतान की आज्ञाकारिता पर तथा धन में व्यस्तता पर अल्लाह की आज्ञाकारिता को प्राथमिकता दे।और वह बड़ा प्रतिफल जन्नत है।
64:16Page 557
فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ مَا ٱسۡتَطَعۡتُمۡ وَٱسۡمَعُواْ وَأَطِيعُواْ وَأَنفِقُواْ خَيۡرٗا لِّأَنفُسِكُمۡۗ وَمَن يُوقَ شُحَّ نَفۡسِهِۦ فَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ ١٦
So fear Allāh as much as you are able and listen and obey and spend [in the way of Allāh]; it is better for your selves. And whoever is protected from the stinginess of his soul - it is those who will be the successful.
अतः अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, डरते रहो, जितना तुम उसका आज्ञापालन करने में सक्षम हो। तथा अल्लाह एवं उसके रसूल की बात सुनो और उनका पालन करो और अल्लाह के दिए हुए धन को भलाई के रास्तों में खर्च करो। और जिसे अल्लाह उसके दिल की लालच (कंजूसी) से सुरक्षित रखे, दरअसल वही लोग अपनी मनोकांक्षा की पूर्ति में सफल होने वाले और उस चीज़ से मुक्ति पाने वाले हैं, जिससे वे डरते हैं।
64:17Page 557
إِن تُقۡرِضُواْ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا يُضَٰعِفۡهُ لَكُمۡ وَيَغۡفِرۡ لَكُمۡۚ وَٱللَّهُ شَكُورٌ حَلِيمٌ ١٧
If you loan Allāh a goodly loan, He will multiply it for you and forgive you. And Allāh is [most] Appreciative1 and Forbearing,2
अगर तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दोगे, इस प्रकार कि उसके रास्ते में अपना धन खर्च करोगे, तो वह एक नेकी को दस से सात सौ गुना, बल्कि बहुत अधिक गुना करके तुम्हारे प्रतिफल को बढ़ा देगा और तुम्हारे पापों को क्षमा कर देगा। अल्लाह बहुत गुणग्राही है, वह थोड़े से काम के लिए बहुत अधिक प्रतिफल देता है। अत्यंत सहनशील है, सज़ा देने में जल्दी नहीं करता।
64:18Page 557
عَٰلِمُ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ١٨
Knower of the unseen and the witnessed, the Exalted in Might, the Wise.
अलाह महिमावान गायब (अनुपस्थित) और हाज़िर (मौजूद) सभी चीज़ों को जानता है। उनमें से कोई चीज़ भी उससे छिपी नहीं है। वह प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। वह अपनी रचना, विधान और तक़दीर (निर्णय) में हिकमत वाला है।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences