Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
الإنفطار
Al-Infitar
The Cleaving · Meccan · 19 ayahs
जब आकाश फट जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतर सकें।
और जब तारे झड़कर बिखर जाएँगे।
और जब समुद्रों को एक-दूसरे पर लिए खोल दिया जाएगा और वे मिश्रित हो जाएँगे।
82:4Page 587
وَإِذَا ٱلۡقُبُورُ بُعۡثِرَتۡ ٤
And when the [contents of] graves are scattered [i.e., exposed],
और जब क़ब्रों की मिट्टी को पलट दिया जाएगा, ताकि उनमें मौजूद मुर्दों को पुनर्जीवित किया जाए।
82:5Page 587
عَلِمَتۡ نَفۡسٞ مَّا قَدَّمَتۡ وَأَخَّرَتۡ ٥
A soul will [then] know what it has put forth and kept back.
उस समय हर प्राणी जान लेगा, जो काम उसने किया है और जो काम उसने विलंबित कर दिया और उसे नहीं किया।
82:6Page 587
يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡإِنسَٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلۡكَرِيمِ ٦
O mankind, what has deceived you concerning your Lord, the Generous,
ऐ अपने रब का इनकार करने वाले इनसान! आख़िर किस बात ने तुझे अपने रब के आदेश का उल्लंघन करने पर उभारा, जब उसने तुझे मोहलत दी और अपने अनुग्रह से तुझे दंडित करने में जल्दी नहीं की?!
82:7Page 587
ٱلَّذِي خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ ٧
Who created you, proportioned you, and balanced you?
जो तुझे अनस्तित्व से अस्तित्व में लाया और उसने तुझे ठीक-ठाक अंगों वाला, संतुलित शरीर वाला बनाया।
82:8Page 587
فِيٓ أَيِّ صُورَةٖ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ ٨
In whatever form He willed has He assembled you.
उसने तुझे जिस रूप में बनाना चाहा, बना दिया। और उसने तुझपर यह उपकार किया कि तुझे गधे, बंदर, कुत्ते या किसी और चीज़ के रूप में नहीं बनाया।
(ऐ धोखे में पड़े हुए लोगो) मामला ऐसा नहीं है, जैसा तुमने समझ रखा है। बल्कि सच्चाई यह है कि तुम बदले के दिन को झुठलाते हो, इसलिए उसके लिए तैयारी नहीं करते हो।
निःसंदेह तुमपर ऐसे फ़रिश्ते नियुक्त हैं, जो तुम्हारे कर्मों का संरक्षण करते हैं।
जो अल्लाह के यहाँ सम्माननीय हैं, लिखने वाले हैं, तुम्हारे कर्मों को लिखते हैं।
तुम जो कार्य भी करते हो, वे उसे जानते हैं। इसलिए वे उसे लिख लेते हैं।
निःसंदेह बहुत अधिक भलाई और नेकी करने वाले लोग क़ियामत के दिन स्थायी आनंद में होंगे।
और दुराचारी लोग ऐसी आग में होंगे, जो उनपर भड़क रही होगी।
82:15Page 587
يَصۡلَوۡنَهَا يَوۡمَ ٱلدِّينِ ١٥
They will [enter to] burn therein on the Day of Recompense,
वे उसमें बदले के दिन प्रवेश करेंगे और उसकी गरमी को झेलेंगे।
और वे उससे कभी ग़ायब होने वाले नहीं हैं, बल्कि उसमें हमेशा रहेंगे।
82:17Page 587
وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ ١٧
And what can make you know what is the Day of Recompense?
और (ऐ रसूल) आपको किस चीज़ ने मालूम करवाया कि बदले का दिन क्या है?!
82:18Page 587
ثُمَّ مَآ أَدۡرَىٰكَ مَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ ١٨
Then, what can make you know what is the Day of Recompense?
फिर आपको किस चीज़ ने मालूम करवाया कि बदले का दिन क्या है?!
82:19Page 587
يَوۡمَ لَا تَمۡلِكُ نَفۡسٞ لِّنَفۡسٖ شَيۡـٔٗاۖ وَٱلۡأَمۡرُ يَوۡمَئِذٖ لِّلَّهِ ١٩
It is the Day when a soul will not possess for another soul [power to do] a thing; and the command, that Day, is [entirely] with Allāh.
जिस दिन कोई किसी को लाभ नहीं पहुँचा सकेगा और उस दिन सारा मामला केवल अल्लाह के हाथ में होगा। वह जो चाहेगा, करेगा। किसी के हाथ में कुछ नहीं होगा।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences