Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
At-Tawbah 9:65–98
9:65Page 197
وَلَئِن سَأَلۡتَهُمۡ لَيَقُولُنَّ إِنَّمَا كُنَّا نَخُوضُ وَنَلۡعَبُۚ قُلۡ أَبِٱللَّهِ وَءَايَٰتِهِۦ وَرَسُولِهِۦ كُنتُمۡ تَسۡتَهۡزِءُونَ ٦٥
And if you ask them, they will surely say, "We were only conversing and playing." Say, "Is it Allāh and His verses and His Messenger that you were mocking?"
और यदि (ऐ रसूल!) आप मुनाफ़िक़ों से उसके बारे में पूछें, जो उन्होंने व्यंग्य किया है और मोमिनों को बुरा-भला कहा है, जबकि अल्लाह ने आपको उसके बारे में सूचित कर दिया, तो वे अवश्य कहेंगे : हम तो यूँ ही बातचीत और हँसी-मज़ाक़ कर रहे थे, हम गंभीर मुद्रा में नहीं थे। (ऐ रसूल!) आप कह दें : क्या तुम अल्लाह, उसकी आयतों और उसके रसूल का मज़ाक़ उड़ा रहे थे?!
9:66Page 197
لَا تَعۡتَذِرُواْ قَدۡ كَفَرۡتُم بَعۡدَ إِيمَٰنِكُمۡۚ إِن نَّعۡفُ عَن طَآئِفَةٖ مِّنكُمۡ نُعَذِّبۡ طَآئِفَةَۢ بِأَنَّهُمۡ كَانُواْ مُجۡرِمِينَ ٦٦
Make no excuse; you have disbelieved [i.e., rejected faith] after your belief. If We pardon one faction of you - We will punish another faction because they were criminals.
तुम ये झूठे बहाने न बनाओ, क्योंकि तुमने उपहास करके अपने छिपे हुए कुफ़्र को प्रकाश में ला दिया है। यदि हम तुम्हारे एक समूह को, निफ़ाक़ से किनारा करने, उससे तौबा करने और अल्लाह के लिए निष्ठावान हो जाने के कारण क्षमा कर दें, तो भी तुम्हारे एक समूह को, उसके निफ़ाक़ पर बने रहने और उससे तौबा न करने के कारण अवश्य यातना देंगे।
9:67Page 197
ٱلۡمُنَٰفِقُونَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتُ بَعۡضُهُم مِّنۢ بَعۡضٖۚ يَأۡمُرُونَ بِٱلۡمُنكَرِ وَيَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلۡمَعۡرُوفِ وَيَقۡبِضُونَ أَيۡدِيَهُمۡۚ نَسُواْ ٱللَّهَ فَنَسِيَهُمۡۚ إِنَّ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ هُمُ ٱلۡفَٰسِقُونَ ٦٧
The hypocrite men and hypocrite women are of one another. They enjoin what is wrong and forbid what is right and close their hands.1 They have forgotten Allāh, so He has forgotten them [accordingly]. Indeed, the hypocrites - it is they who are the defiantly disobedient.
मुनाफ़िक़ पुरुष और महिलाएँ, सबके सब निफ़ाक़ की स्थितियों में एक जैसे हैं, और वे मोमिनों के विपरीत हैं। वे बुराई का आदेश देते हैं, भलाई से रोकते हैं और अपने धन में कंजूसी करते हैं। इसलिए वे उसे अल्लाह के रास्ते में खर्च नहीं करते हैं। उन्होंने अल्लाह की आज्ञा का पालन करना छोड़ दिया, तो अल्लाह ने भी उन्हें अपनी तौफ़ीक़ से वंचित कर दिया। निश्चय मुनाफ़िक़ लोग ही अल्लाह के आज्ञापालन और सत्य के मार्ग से निकलकर उसकी अवज्ञा और गुमराही के मार्ग की ओर जाने वाले हैं।
9:68Page 197
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱلۡمُنَٰفِقَٰتِ وَٱلۡكُفَّارَ نَارَ جَهَنَّمَ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ هِيَ حَسۡبُهُمۡۚ وَلَعَنَهُمُ ٱللَّهُۖ وَلَهُمۡ عَذَابٞ مُّقِيمٞ ٦٨
Allāh has promised the hypocrite men and hypocrite women and the disbelievers the fire of Hell, wherein they will abide eternally. It is sufficient for them. And Allāh has cursed them, and for them is an enduring punishment.
अल्लाह ने मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों से, जिन्होंने तौबा नहीं की, उन्हें जहन्नम की आग में दाख़िल करने का वादा किया है, जिसमें वे हमेशा के लिए रहेंगे। यह उन्हें दंड के रूप में पर्याप्त होगा, तथा अल्लाह उन्हें अपनी दया से निष्कासित कर देगा और उनके लिए निरंतर यातना होगी।
9:69Page 198
كَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُمۡ كَانُوٓاْ أَشَدَّ مِنكُمۡ قُوَّةٗ وَأَكۡثَرَ أَمۡوَٰلٗا وَأَوۡلَٰدٗا فَٱسۡتَمۡتَعُواْ بِخَلَٰقِهِمۡ فَٱسۡتَمۡتَعۡتُم بِخَلَٰقِكُمۡ كَمَا ٱسۡتَمۡتَعَ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِكُم بِخَلَٰقِهِمۡ وَخُضۡتُمۡ كَٱلَّذِي خَاضُوٓاْۚ أُوْلَٰٓئِكَ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡخَٰسِرُونَ ٦٩
[You disbelievers are] like those before you; they were stronger than you in power and more abundant in wealth and children. They enjoyed their portion [of worldly enjoyment], and you have enjoyed your portion as those before you enjoyed their portion, and you have engaged [in vanities] like that in which they engaged. [It is] those whose deeds have become worthless in this world and in the Hereafter, and it is they who are the losers.
(ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुम, कुफ़्र और मज़ाक उड़ाने के मामले में अपने से पहले झुठलाने वाले समुदायों की तरह हो। वे तुमसे अधिक शक्तिशाली और अधिक धन और संतान वाले थे। चुनाँचे उन्होंने सांसारिक सुखों और इच्छाओं के अपने लिखे हिस्से का आनंद लिया। फिर तुमने उसमें से अपने लिए नियत हिस्से का आनंद लिया, जैसा कि पिछले झुठलाने वाले समुदायों ने अपने हिस्से का आनंद लिया था। तथा तुमने उसी तरह सत्य को झुठलाया और रसूल पर दोष लगाया, जिस तरह उन्होंने सत्य को झुठलाया और अपने रसूलों पर दोष लगाया था। ये इन निंदनीय गुणों से विशेषित लोग ही हैं, जिनके कर्म कुफ़्र के कारण अल्लाह की दृष्टि में भ्रष्ट होने की वजह से व्यर्थ हो गए और यही वास्तविक नुकसान उठाने वाले लोग हैं, जिन्होंने खुद को विनाश के स्थानों में ले जाकर अपना नुकसान किया है।
9:70Page 198
أَلَمۡ يَأۡتِهِمۡ نَبَأُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ قَوۡمِ نُوحٖ وَعَادٖ وَثَمُودَ وَقَوۡمِ إِبۡرَٰهِيمَ وَأَصۡحَٰبِ مَدۡيَنَ وَٱلۡمُؤۡتَفِكَٰتِۚ أَتَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِۖ فَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيَظۡلِمَهُمۡ وَلَٰكِن كَانُوٓاْ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ ٧٠
Has there not reached them the news of those before them - the people of Noah and [the tribes of] ʿAad and Thamūd and the people of Abraham and the companions [i.e., dwellers] of Madyan and the towns overturned?1 Their messengers came to them with clear proofs. And Allāh would never have wronged them, but they were wronging themselves.
क्या इन मुनाफ़िक़ों के पास यह खबर नहीं आई कि झुठलाने वाले समुदायों ने क्या किया, और उन्हें क्या दंड दिया गया : जैसे नूह अलैहिस्सलाम की जाति, हूद अलैहिस्सलाम की जाति, सालेह अलैहिस्सलाम की जाति, इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति, मदयन वाले और लूत अलैहिस्सलाम की जाति की बस्तियों वाले; उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाणों और खुले तर्कों के साथ आए। फिर अल्लाह ऐसा न था कि उनपर अत्याचार करता; क्योंकि उनके रसूलों ने उन्हें सावधान कर दिया था। परंतु वे अल्लाह के साथ कुफ़्र करने और उसके रसूलों को झुठलाने के कारण खुद अपने ऊपर अत्याचार करते थे।
9:71Page 198
وَٱلۡمُؤۡمِنُونَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتُ بَعۡضُهُمۡ أَوۡلِيَآءُ بَعۡضٖۚ يَأۡمُرُونَ بِٱلۡمَعۡرُوفِ وَيَنۡهَوۡنَ عَنِ ٱلۡمُنكَرِ وَيُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَيُطِيعُونَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥٓۚ أُوْلَٰٓئِكَ سَيَرۡحَمُهُمُ ٱللَّهُۗ إِنَّ ٱللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٞ ٧١
The believing men and believing women are allies of one another. They enjoin what is right and forbid what is wrong and establish prayer and give zakāh and obey Allāh and His Messenger. Those - Allāh will have mercy upon them. Indeed, Allāh is Exalted in Might and Wise.
तथा ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली स्त्रियाँ एक-दूसरे के समर्थक और मददगार हैं; क्योंकि ईमान ने उन्हें एक-दूसरे से जोड़ दिया है। वे भलाई अर्थात हर उस कार्य का आदेश देते हैं, जो अल्लाह को पसंद है, जैसे तौहीद और नमाज़ आदि, और बुराई अर्थात हर उस कार्य से रोकते हैं, जिससे अल्लाह घृणा करता है, जैसे कुफ़्र और सूद आदि, तथा पूरी नमाज़ को पूर्णतम तरीक़े से अदा करते हैं और अल्लाह तथा उसके रसूल का कहा मानते हैं। ये लोग जो इन प्रशंसनीय गुणों से सुसज्जित हैं, अल्लाह उन्हें अपनी दया में प्रवेश करेगा। निःसंदेह अल्लाह सब पर प्रभुत्वशाली है, उसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता। वह अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में हिकमत वाला है।
9:72Page 198
وَعَدَ ٱللَّهُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ وَٱلۡمُؤۡمِنَٰتِ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَا وَمَسَٰكِنَ طَيِّبَةٗ فِي جَنَّٰتِ عَدۡنٖۚ وَرِضۡوَٰنٞ مِّنَ ٱللَّهِ أَكۡبَرُۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ٧٢
Allāh has promised the believing men and believing women gardens beneath which rivers flow, wherein they abide eternally, and pleasant dwellings in gardens of perpetual residence; but approval from Allāh is greater. It is that which is the great attainment.
अल्लाह ने ईमान वाले पुरुषों तथा ईमान वाली स्त्रियों से वादा किया है कि वह क़ियामत के दिन उन्हें ऐसी जन्नतों में प्रवेश करेगा, जिनके महलों के नीचे से नहरें प्रवाहित होंगी, जहाँ वे हमेशा रहेंगे, उसमें न उन्हें कभी मौत आएगी और न उनकी नेमतें खत्म होंगी। तथा अल्लाह ने उनसे स्थायी बाग़ों में अच्छे आवासों में प्रवेश देने का वादा किया है। और उनपर अल्लाह की उतरने वाली प्रसन्नता, इन सबसे बढ़कर है। यही बदला, जिसका उल्लेख किया गया, बहुत बड़ी कामयाबी है, जिसके बराबर कोई कामयाबी नहीं हो सकती।
9:73Page 199
يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّبِيُّ جَٰهِدِ ٱلۡكُفَّارَ وَٱلۡمُنَٰفِقِينَ وَٱغۡلُظۡ عَلَيۡهِمۡۚ وَمَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُۖ وَبِئۡسَ ٱلۡمَصِيرُ ٧٣
O Prophet, fight against the disbelievers and the hypocrites and be harsh upon them. And their refuge is Hell, and wretched is the destination.
(ऐ रसूल!) आप काफ़िरों के साथ तलवार से जिहाद करें और मुनाफ़िक़ों के साथ ज़ुबान एवं तर्क से जिहाद करें, तथा उन दोनों पक्षों पर सख़्ती करें। क्योंकि वे इसी के योग्य हैं। और क़ियामत के दिन उनका ठिकाना जहन्नम है और वह बहुत बुरा स्थान है।
9:74Page 199
يَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ مَا قَالُواْ وَلَقَدۡ قَالُواْ كَلِمَةَ ٱلۡكُفۡرِ وَكَفَرُواْ بَعۡدَ إِسۡلَٰمِهِمۡ وَهَمُّواْ بِمَا لَمۡ يَنَالُواْۚ وَمَا نَقَمُوٓاْ إِلَّآ أَنۡ أَغۡنَىٰهُمُ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ مِن فَضۡلِهِۦۚ فَإِن يَتُوبُواْ يَكُ خَيۡرٗا لَّهُمۡۖ وَإِن يَتَوَلَّوۡاْ يُعَذِّبۡهُمُ ٱللَّهُ عَذَابًا أَلِيمٗا فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِۚ وَمَا لَهُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ مِن وَلِيّٖ وَلَا نَصِيرٖ ٧٤
They swear by Allāh that they did not say [anything against the Prophet (ﷺ)] while they had said the word of disbelief and disbelieved after their [pretense of] Islām and planned that which they were not to attain.1 And they were not resentful except [for the fact] that Allāh and His Messenger had enriched them of His bounty.2 So if they repent, it is better for them; but if they turn away, Allāh will punish them with a painful punishment in this world and the Hereafter. And there will not be for them on earth any protector or helper.
ये मुनाफ़िक़ अल्लाह की झूठी शपथ खाकर कहते हैं : आपको उनके विषय में जो बात पहुँची है कि उन्होंने आपको बुरा-भला कहा है और आपके धर्म पर दोष लगाया है, वह बात उन्होंने नहीं कही है। हालाँकि निःसंदेह उन्होंने कुफ़्र की ओर ले जाने वाली वह बात सचमुच कही है, जिसकी सूचना आपको मिली है और उन्होंने ईमान का प्रदर्शन करने के बाद कुफ़्र का प्रदर्शन किया है। तथा उन्होंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की हत्या करने का इरादा किया, जिसमें वे सफल न हो सके। उन्होंने उस चीज़ को नकार दिया, जिसे नकारा नहीं जाता और वह यह कि अल्लाह ने उनपर अनुग्रह करते हुए उन्हें उस ग़नीमत के धन द्वारा समृद्ध कर दिया, जो उसने अपने नबी को प्रदान किया। अब यदि वे अपने निफ़ाक से तौबा कर लें, तो यह उनके लिए निफ़ाक़ पर जमे रहने से बेहतर होगा। और यदि तौबा करने से मुँह फेर लें, तो अल्लाह उन्हें दुनिया में क़त्ल और क़ैद के रूप में दर्दनाक यातना से पीड़ित करेगा तथा वह आखिरत में उन्हें आग से दर्दनाक अज़ाब देगा। और उनका कोई संरक्षक नहीं होगा, जो उनकी सहायता करके उन्हें अज़ाब से बचा सके, और न कोई सहायक होगा, जो उनपर से अज़ाब को दूर कर सके।
9:75Page 199
۞ وَمِنۡهُم مَّنۡ عَٰهَدَ ٱللَّهَ لَئِنۡ ءَاتَىٰنَا مِن فَضۡلِهِۦ لَنَصَّدَّقَنَّ وَلَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ ٧٥
And among them are those who made a covenant with Allāh, [saying], "If He should give us from His bounty, we will surely spend in charity, and we will surely be among the righteous."
मुनाफ़िक़ो में से कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अल्लाह को यह कहते हुए वचन दिया था : यदि अल्लाह ने हमें अपने अनुग्रह से कुछ प्रदान किया, तो हम अवश्य ज़रूरतमंदों को दान करेंगे और अच्छे कार्य करने वालों में से हो जाएँगे।
9:76Page 199
فَلَمَّآ ءَاتَىٰهُم مِّن فَضۡلِهِۦ بَخِلُواْ بِهِۦ وَتَوَلَّواْ وَّهُم مُّعۡرِضُونَ ٧٦
But when He gave them from His bounty, they were stingy with it and turned away while they refused.
फिर जब अल्लाह ने उन्हें अपने अनुग्रह में से कुछ प्रदान कर दिया, तो उन्होंने अल्लाह से किए हुए अपने वादे को पूरा नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपने धन को रोक लिया और दान में कुछ भी नहीं दिया और ईमान से मुँह मोड़ते हुए फिर गए।
9:77Page 199
فَأَعۡقَبَهُمۡ نِفَاقٗا فِي قُلُوبِهِمۡ إِلَىٰ يَوۡمِ يَلۡقَوۡنَهُۥ بِمَآ أَخۡلَفُواْ ٱللَّهَ مَا وَعَدُوهُ وَبِمَا كَانُواْ يَكۡذِبُونَ ٧٧
So He penalized them with hypocrisy in their hearts until the Day they will meet Him - because they failed Allāh in what they promised Him and because they [habitually] used to lie.
तो इसका परिणाम यह हुआ कि अल्लाह ने उनके दिलों में क़ियामत के दिन तक के लिए निफ़ाक़ को स्थिर कर दिया; उनके अल्लाह के वादे को तोड़ने और झूठ बोलने पर उनके लिए दंड के रूप में।
9:78Page 199
أَلَمۡ يَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ سِرَّهُمۡ وَنَجۡوَىٰهُمۡ وَأَنَّ ٱللَّهَ عَلَّٰمُ ٱلۡغُيُوبِ ٧٨
Did they not know that Allāh knows their secrets and their private conversations and that Allāh is the Knower of the unseen?
क्या इन मुनाफ़िक़ों को यह नहीं मालूम कि अल्लाह उस छल-कपट और चाल को जानता है, जो वे अपनी सभाओं में छिपाते हैं और यह कि अल्लाह परोक्ष की सभी बातों को अच्छी तरह जानने वाला है? इसलिए उनके कामों में से कुछ भी उससे छिपा नहीं है और वह उन्हें उनका बदला देगा।
9:79Page 199
ٱلَّذِينَ يَلۡمِزُونَ ٱلۡمُطَّوِّعِينَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ فِي ٱلصَّدَقَٰتِ وَٱلَّذِينَ لَا يَجِدُونَ إِلَّا جُهۡدَهُمۡ فَيَسۡخَرُونَ مِنۡهُمۡ سَخِرَ ٱللَّهُ مِنۡهُمۡ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٌ ٧٩
Those who criticize the contributors among the believers concerning [their] charities and [criticize] the ones who find nothing [to spend] except their effort, so they ridicule them - Allāh will ridicule them, and they will have a painful punishment.
जो लोग स्वेच्छापूर्वक दान देने वाले मोमिनों को अल्प-दान देने का ताना देते हैं, जो केवल थोड़ी-सी चीज़ पाते हैं जो उनकी भरसक परिश्रम का परिणाम होता है। इसलिए ये उनका उपहास करते हुए कहते हैं : उनके इस दान से क्या होने वाला है?! उनके ईमान वालों का उपहास करने के बदले के तौर पर अल्लाह ने उनका उपहास किया और उनके लिए दर्दनाक यातना है।
9:80Page 200
ٱسۡتَغۡفِرۡ لَهُمۡ أَوۡ لَا تَسۡتَغۡفِرۡ لَهُمۡ إِن تَسۡتَغۡفِرۡ لَهُمۡ سَبۡعِينَ مَرَّةٗ فَلَن يَغۡفِرَ ٱللَّهُ لَهُمۡۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمۡ كَفَرُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡفَٰسِقِينَ ٨٠
Ask forgiveness for them, [O Muḥammad], or do not ask forgiveness for them. If you should ask forgiveness for them seventy times - never will Allāh forgive them. That is because they disbelieved in Allāh and His Messenger, and Allāh does not guide the defiantly disobedient people.
(ऐ रसूल!) आप उनके लिए क्षमा याचना करें अथवा न करें। यदि आप उनके लिए सत्तर बार भी क्षमा याचना करें, तो यह अपनी बहुतायत के बावजूद उनके लिए अल्लाह की क्षमा की प्राप्ति तक कभी नहीं पहुँचाएगी। क्योंकि वे अल्लाह और उसके रसूल का इनकार करने वाले हैं और अल्लाह जान बूझकर अपनी शरीयत के दायरे से निकल जाने वालों को सत्य की तौफ़ीक़ नहीं देता।
9:81Page 200
فَرِحَ ٱلۡمُخَلَّفُونَ بِمَقۡعَدِهِمۡ خِلَٰفَ رَسُولِ ٱللَّهِ وَكَرِهُوٓاْ أَن يُجَٰهِدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمۡ وَأَنفُسِهِمۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَقَالُواْ لَا تَنفِرُواْ فِي ٱلۡحَرِّۗ قُلۡ نَارُ جَهَنَّمَ أَشَدُّ حَرّٗاۚ لَّوۡ كَانُواْ يَفۡقَهُونَ ٨١
Those who remained behind1 rejoiced in their staying [at home] after [the departure of] the Messenger of Allāh and disliked to strive with their wealth and their lives in the cause of Allāh and said, "Do not go forth in the heat." Say, "The fire of Hell is more intense in heat" - if they would but understand.
तबूक के युद्ध से पीछे छोड़ दिए गए मुनाफ़िक़, अल्लाह के रसूल के आदेश का उल्लंघन करते हुए, अल्लाह के मार्ग में जिहाद से अपने बैठ रहने पर प्रसन्न हुए, तथा उन्होंने अपने धन एवं प्राण के साथ अल्लाह के मार्ग में मोमिनों की तरह जिहाद करने को नापसंंद किया, और अपने मुनाफ़िक़ भाइयों को हतोत्साहित करते हुए कहा : इस गर्मी में न निकलो। क्योंकि तबूक का युद्ध सख़्त गर्मी के दिनों में हुआ था। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : जहन्नम की आग, जो मुनाफ़िक़ों की प्रतीक्षा कर रही है, इस गर्मी से कहीं ज़्यादा गर्म है, जिससे वे भागे हैं, यदि वे जानते होते।
9:82Page 200
فَلۡيَضۡحَكُواْ قَلِيلٗا وَلۡيَبۡكُواْ كَثِيرٗا جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ ٨٢
So let them laugh a little and [then] weep much as recompense for what they used to earn.
अतः जिहाद से पीछे रहने वाले इन मुनाफ़िक़ों को अपने नश्वर सांसारिक जीवन में थोड़ा हँसना चाहिए और उन्हें अपने बाक़ी रहने वाले आखिरत के जीवन में बहुत ज़्यादा रोना चाहिए। यह उस कुफ़्र, पाप और अवज्ञा का बदला है, जो उन्होंने दुनिया में कमाया है।
9:83Page 200
فَإِن رَّجَعَكَ ٱللَّهُ إِلَىٰ طَآئِفَةٖ مِّنۡهُمۡ فَٱسۡتَـٔۡذَنُوكَ لِلۡخُرُوجِ فَقُل لَّن تَخۡرُجُواْ مَعِيَ أَبَدٗا وَلَن تُقَٰتِلُواْ مَعِيَ عَدُوًّاۖ إِنَّكُمۡ رَضِيتُم بِٱلۡقُعُودِ أَوَّلَ مَرَّةٖ فَٱقۡعُدُواْ مَعَ ٱلۡخَٰلِفِينَ ٨٣
If Allāh should return you to a faction of them [after the expedition] and then they ask your permission to go out [to battle], say, "You will not go out with me, ever, and you will never fight with me an enemy. Indeed, you were satisfied with sitting [at home] the first time, so sit [now] with those who stay behind."
तो (ऐ नबी!) यदि अल्लाह आपको इन मुनाफ़िक़ों के किसी समूह की ओर वापस लाए, जो अपने निफ़ाक़ पर क़ायम हो। फिर वह आपके साथ किसी अन्य युद्ध में निकलने की अनुमति माँगे, तो आप उनसे कह दें : (ऐ मुनाफ़िक़ो!) तुम मेरे साथ अल्लाह की राह में जिहाद के लिए कभी नहीं निकलोगे। यह तुम्हारे लिए एक सज़ा के तौर पर और तुम्हारे मेरे साथ मौजूद होने से निष्कर्षित होने वाली बुराइयों से बचाव के रूप में है। तुम तबूक के युद्ध में पीछे बैठ रहने पर खुश थे, इसलिए पीछे रहने वाले बीमारों, स्त्रियों और बच्चों के साथ बैठे रहो।
9:84Page 200
وَلَا تُصَلِّ عَلَىٰٓ أَحَدٖ مِّنۡهُم مَّاتَ أَبَدٗا وَلَا تَقُمۡ عَلَىٰ قَبۡرِهِۦٓۖ إِنَّهُمۡ كَفَرُواْ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَمَاتُواْ وَهُمۡ فَٰسِقُونَ ٨٤
And do not pray [the funeral prayer, O Muḥammad], over any of them who has died - ever - or stand at his grave. Indeed, they disbelieved in Allāh and His Messenger and died while they were defiantly disobedient.
इन मुनाफ़िक़ों में से कोई मर जाए, तो (ऐ रसूल!) आप उसका कभी जनाज़ा न पढ़ना और न उसकी क़ब्र पर उसकी क्षमा की प्रार्थना के लिए खड़े होना। क्योंकि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया है और अल्लाह की अवज्ञा करते हुए मरे हैं। और जो कोई ऐसा हो, उसका न तो जनाज़ा पढ़ा जाएगा और न उसके लिए दुआ की जाएगी।
9:85Page 200
وَلَا تُعۡجِبۡكَ أَمۡوَٰلُهُمۡ وَأَوۡلَٰدُهُمۡۚ إِنَّمَا يُرِيدُ ٱللَّهُ أَن يُعَذِّبَهُم بِهَا فِي ٱلدُّنۡيَا وَتَزۡهَقَ أَنفُسُهُمۡ وَهُمۡ كَٰفِرُونَ ٨٥
And let not their wealth and their children impress you. Allāh only intends to punish them through them in this world and that their souls should depart [at death] while they are disbelievers.
और (ऐ रसूल!) आपको इन मुनाफ़िक़ों के धन तथा उनकी संतान आश्चर्यचकित न करें। अल्लाह तो यह चाहता है कि उन्हें इनके द्वारा सांसारिक जीवन में यातना दे, क्योंकि वे इस रास्ते में आने वाली कठिनाइयों और विपत्तियों को झेलते हैं, और यह कि उनके प्राण उनके शरीर से इस दशा में निकलें कि वे काफ़िर हों।
9:86Page 200
وَإِذَآ أُنزِلَتۡ سُورَةٌ أَنۡ ءَامِنُواْ بِٱللَّهِ وَجَٰهِدُواْ مَعَ رَسُولِهِ ٱسۡتَـٔۡذَنَكَ أُوْلُواْ ٱلطَّوۡلِ مِنۡهُمۡ وَقَالُواْ ذَرۡنَا نَكُن مَّعَ ٱلۡقَٰعِدِينَ ٨٦
And when a sūrah was revealed [enjoining them] to believe in Allāh and to fight with His Messenger, those of wealth among them asked your permission [to stay back] and said, "Leave us to be with them who sit [at home]."
तथा जब अल्लाह अपने नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर कोई सूरत उतारता है, जिसमें अल्लाह पर ईमान लाने तथा उसके रास्ते में जिहाद करने का आदेश होता है, तो उन मुनाफ़िक़ों में से धनवान लोग आपसे पीछे रहने की अनुमति माँगते हैं और कहते हैं : आप हमें छोड़ दें कि हम कमज़ोरों और अपाहिजों जैसे बहाने वाले लोगों के साथ पीछे रह जाएँ।
9:87Page 201
رَضُواْ بِأَن يَكُونُواْ مَعَ ٱلۡخَوَالِفِ وَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَهُمۡ لَا يَفۡقَهُونَ ٨٧
They were satisfied to be with those who stay behind, and their hearts were sealed over, so they do not understand.
इन मुनाफ़िक़ों ने अपने लिए अपमान और रुसवाई को पसंद कर लिया, जब वे बहाने वाले लोगों के साथ (जिहाद से) पीछे रह जाने पर संतुष्ट हो गए, तथा अल्लाह ने उनके कुफ़्र एवं निफ़ाक़ के कारण उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः वे नहीं जानते कि किस चीज़ में उनका हित है।
9:88Page 201
لَٰكِنِ ٱلرَّسُولُ وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ مَعَهُۥ جَٰهَدُواْ بِأَمۡوَٰلِهِمۡ وَأَنفُسِهِمۡۚ وَأُوْلَٰٓئِكَ لَهُمُ ٱلۡخَيۡرَٰتُۖ وَأُوْلَٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُفۡلِحُونَ ٨٨
But the Messenger and those who believed with him fought with their wealth and their lives. Those will have [all that is] good and it is those who are the successful.
जहाँ तक रसूल और उनके साथ के ईमान वालों का सवाल है, तो वे इन लोगों की तरह अल्लाह के मार्ग में जिहाद से पीछे नहीं रहे। बल्कि उन्होंने अल्लाह के मार्ग में अपने धन तथा प्राण के साथ जिहाद किया। जिसके परिणामस्वरूप अल्लाह के पास उनका बदला उनके लिए सांसारिक लाभों की प्राप्ति था जैसे कि विजय और ग़नीमत के धन, तथा परलोक में भी लाभ प्राप्त होगा, जिसमें जन्नत में प्रवेश, वांछित उद्देश्य की प्राप्ति और भय से मुक्ति शामिल है।
9:89Page 201
أَعَدَّ ٱللَّهُ لَهُمۡ جَنَّٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَاۚ ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ٨٩
Allāh has prepared for them gardens beneath which rivers flow, wherein they will abide eternally. That is the great attainment.
अल्लाह ने उनके लिए ऐसे स्वर्ग तैयार किए हैं, जिनके महलों के नीचे से नहरें बहती हैं। वे वहाँ हमेशा के लिए रहेंगे, कभी भी नष्ट नहीं होंगे। यही बदला ही वह बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं हो सकती।
9:90Page 201
وَجَآءَ ٱلۡمُعَذِّرُونَ مِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ لِيُؤۡذَنَ لَهُمۡ وَقَعَدَ ٱلَّذِينَ كَذَبُواْ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥۚ سَيُصِيبُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ ٩٠
And those with excuses among the bedouins came to be permitted [to remain], and they who had lied1 to Allāh and His Messenger sat [at home]. There will strike those who disbelieved among them a painful punishment.
मदीना और उसके आस-पास के देहातियों में से कुछ लोग, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास बहाने लेकर आए, ताकि आप उन्हें अल्लाह के रास्ते में जिहाद के लिए निकलने से पीछे रहने की अनुमति प्रदान कर दें। जबकि कुछ अन्य लोग भी पीछे रह गए, जिन्होंने जिहाद में न निकलने का बिल्कुल भी कोई बहाना पेश नहीं किया; क्योंकि वे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को सच्चा नहीं मानते थे और अल्लाह के वादे पर विश्वास नहीं करते थे। ये लोग अपने इस कुफ़्र के कारण एक दर्दनाक और कष्टदायी यातना से पीड़ित होंगे।
9:91Page 201
لَّيۡسَ عَلَى ٱلضُّعَفَآءِ وَلَا عَلَى ٱلۡمَرۡضَىٰ وَلَا عَلَى ٱلَّذِينَ لَا يَجِدُونَ مَا يُنفِقُونَ حَرَجٌ إِذَا نَصَحُواْ لِلَّهِ وَرَسُولِهِۦۚ مَا عَلَى ٱلۡمُحۡسِنِينَ مِن سَبِيلٖۚ وَٱللَّهُ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٩١
There is not upon the weak or upon the ill or upon those who do not find anything to spend any discomfort [i.e., guilt] when they are sincere to Allāh and His Messenger. There is not upon the doers of good any cause [for blame]. And Allāh is Forgiving and Merciful.
महिलाओं, बच्चों, बीमारों, बुज़ुर्गों, अंधों और उन गरीबों पर जिनके पास युद्ध की तैयारी में खर्च करने को कुछ नहीं होता, इन सभी लोगों पर जिहाद में निकलने से पीछे रहने में कोई गुनाह नहीं है; क्योंकि उनके पास उचित बहाने मौजूद हैं, जबकि वे अल्लाह और उसके रसूल के प्रति निष्ठावान हों और उसकी शरीयत पर अमल करें। इन बहाने वालों में से भलाई करने वालों को दंडित करने के लिए कोई रास्ता नहीं है। और अल्लाह भलाई करने वालों के पापों को क्षमा करने वाला, उनपर दया करने वाला है।
9:92Page 201
وَلَا عَلَى ٱلَّذِينَ إِذَا مَآ أَتَوۡكَ لِتَحۡمِلَهُمۡ قُلۡتَ لَآ أَجِدُ مَآ أَحۡمِلُكُمۡ عَلَيۡهِ تَوَلَّواْ وَّأَعۡيُنُهُمۡ تَفِيضُ مِنَ ٱلدَّمۡعِ حَزَنًا أَلَّا يَجِدُواْ مَا يُنفِقُونَ ٩٢
Nor [is there blame] upon those who, when they came to you for you to take them along, you said, "I can find nothing upon which to carry you."1 They turned back while their eyes overflowed with tears out of grief that they could not find something to spend [for the cause of Allāh].
इसी तरह आपसे पीछे रहने वाले उन लोगों पर भी कोई पाप नहीं है, कि जब वे (ऐ रसूल!) आपके पास यह अनुरोध लेकर आए कि आप उनके लिए सवारी का प्रबंध कर दें, और आपने उनसे कहा कि मैं तुम्हारे लिए सवारी की व्यवस्था करने के लिए कुछ नहीं पाता; तो वे आपके पास से इस दशा में वापस हुए कि उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे, उन्हें इस बात का अफसोस था कि उन्हें खुद अपने पास से या आपके पास से वह नहीं मिला जो वे खर्च करें।
9:93Page 201
۞ إِنَّمَا ٱلسَّبِيلُ عَلَى ٱلَّذِينَ يَسۡتَـٔۡذِنُونَكَ وَهُمۡ أَغۡنِيَآءُۚ رَضُواْ بِأَن يَكُونُواْ مَعَ ٱلۡخَوَالِفِ وَطَبَعَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ فَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ ٩٣
The cause [for blame] is only upon those who ask permission of you while they are rich. They are satisfied to be with those who stay behind, and Allāh has sealed over their hearts, so they do not know.
जब अल्लाह ने यह स्पष्ट कर दिया कि बहाने वाले लोगों को दंडित करने का कोई रास्ता नहीं है, तो उन लोगों का उल्लेख किया, जो दंड और पकड़ के योग्य हैं। चुनाँचे फरमाया : सज़ा और पकड़ के हक़दार वे लोग हैं, जो (ऐ रसूल!) आपसे युद्ध से पीछे रहने की अनुमति माँगते हैं। हालाँकि उनके पास युद्ध की तैयारी के साधन मौजूद हैं। उन्होंने घरों में पीछे रहने वाली स्त्रियों के साथ रहकर अपने लिए अपमान और रुसवाई से संतुष्ट हो गए, तथा अल्लाह ने उनके दिलों पर मुहर लगा दी। अतः कोई उपदेश उनपर असर नहीं करता। और इस मुहर लगने के कारण उन्हें पता ही नहीं है कि कौन-सा काम उनके हित में है ताकि उसे अपनाएँ और किसमें उनका अहित है ताकि उससे दूर रहें।
9:94Page 202
يَعۡتَذِرُونَ إِلَيۡكُمۡ إِذَا رَجَعۡتُمۡ إِلَيۡهِمۡۚ قُل لَّا تَعۡتَذِرُواْ لَن نُّؤۡمِنَ لَكُمۡ قَدۡ نَبَّأَنَا ٱللَّهُ مِنۡ أَخۡبَارِكُمۡۚ وَسَيَرَى ٱللَّهُ عَمَلَكُمۡ وَرَسُولُهُۥ ثُمَّ تُرَدُّونَ إِلَىٰ عَٰلِمِ ٱلۡغَيۡبِ وَٱلشَّهَٰدَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٩٤
They will make excuses to you when you have returned to them. Say, "Make no excuse - never will we believe you. Allāh has already informed us of your news [i.e., affair]. And Allāh will observe your deeds, and [so will] His Messenger; then you will be taken back to the Knower of the unseen and the witnessed,1 and He will inform you of what you used to do."
जिहाद से पीछे रह जाने वाले मुनाफिक़, मुसलमानों के जिहाद से लौटने के समय, उनके सामने कमज़ोर और बेतुके बहाने पेश करेंगे। ऐसे में, अल्लाह अपने नबी और मोमिनों को उन्हें यह जवाब देने का निर्देश देता है : झूठे बहाने मत करो, जो कुछ तुमने हमें बताया है हम कदापि उसपर विश्वास नहीं करेंगे। अल्लाह ने हमें तुम्हारे दिलों की कुछ बातें बता दी हैं। अल्लाह और उसके रसूल देखेंगे : क्या तुम लोग तौबा करते हो, ताकि अल्लाह तुम्हारी तौबा स्वीकार कर ले, या तुम अपने निफ़ाक़ ही पर जमे रहते हो? फिर तुम अल्लाह की ओर लौटाए जाओगे, जो हर चीज़ का ज्ञान रखता है। तो वह तुम्हें बताएगा जो कुछ तुम किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा। अतः तुम तौबा और सत्कर्म में जल्दी करो।
9:95Page 202
سَيَحۡلِفُونَ بِٱللَّهِ لَكُمۡ إِذَا ٱنقَلَبۡتُمۡ إِلَيۡهِمۡ لِتُعۡرِضُواْ عَنۡهُمۡۖ فَأَعۡرِضُواْ عَنۡهُمۡۖ إِنَّهُمۡ رِجۡسٞۖ وَمَأۡوَىٰهُمۡ جَهَنَّمُ جَزَآءَۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ ٩٥
They will swear by Allāh to you when you return to them that you would leave them alone. So leave them alone; indeed they are evil; and their refuge is Hell as recompense for what they had been earning.
ये पीछे रह जाने वाले लोग, जब (ऐ ईमान वालो!) तुम उनकी ओर वापस जाओगे तो अपने झूठे बहानों की पुष्टि के लिए, अल्लाह की क़समें खाएँगे; ताकि तुम उनकी भर्त्सना और निंदा करने से रुक जाओ। अतः आप उन्हें उनकी हालत पर छोड़ दें, क्रोधित व्यक्ति के छोड़ने की तरह। निश्चय ये अशुद्ध और दुष्ट हृदय वाले हैं और इनका ठिकाना जहाँ ये शरण लेंगे, जहन्नम है। यह बदला है उस पाखंड और पाप का, जो वे कमाया करते थे।
9:96Page 202
يَحۡلِفُونَ لَكُمۡ لِتَرۡضَوۡاْ عَنۡهُمۡۖ فَإِن تَرۡضَوۡاْ عَنۡهُمۡ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يَرۡضَىٰ عَنِ ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡفَٰسِقِينَ ٩٦
They swear to you so that you might be satisfied with them. But if you should be satisfied with them - indeed, Allāh is not satisfied with a defiantly disobedient people.
(ऐ ईमान वालो!) ये पीछे रह जाने वाले लोग, तुम्हारे आगे क़समें खाएँगे; ताकि तुम उनसे खुश हो जाओ और उनके बहाने स्वीकार कर लो। पर तुम उनसे खुश न होना। यदि तुम उनसे खुश हो गए, तो तुम अपने पालनहार की अवहेलना करने वाले ठहरोगे। क्योंकि अल्लाह कुफ़्र और निफ़ाक़ के द्वारा उसकी आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले लोगों से खुश नहीं होता। अतः (ऐ मुसलमानो!) ऐसे लोगों से खुश होने से सावधान रहो, जिनसे अल्लाह प्रसन्न नहीं होता।
9:97Page 202
ٱلۡأَعۡرَابُ أَشَدُّ كُفۡرٗا وَنِفَاقٗا وَأَجۡدَرُ أَلَّا يَعۡلَمُواْ حُدُودَ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ عَلَىٰ رَسُولِهِۦۗ وَٱللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٞ ٩٧
The bedouins are stronger in disbelief and hypocrisy and more likely not to know the limits of what [laws] Allāh has revealed to His Messenger. And Allāh is Knowing and Wise.
देहात के रहने वाले यदि अविश्वास या पाखंड के मार्ग पर चल पड़ें, तो उनका कुफ्र अन्य शहरी क्षेत्र के लोगों के कुफ़्र से अधिक गंभीर और उनका पाखंड उन लोगों की तुलना में अधिक सख़्त होगा। तथा ये लोग इस बात के अधिक योग्य हैं कि धर्म से अनभिज्ञ हों और इनके बारे में इस बात की अधिक संभावना है कि धार्मिक कर्तव्यों, सुन्नतों तथा उन आदेशों के नियमों को न जानें, जिन्हें अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारा है। क्योंकि वे उजड्डपन, अक्खड़पन और लोगों के साथ मेल-मिलाप और संपर्क के अभाव से पीड़ित हैं। अल्लाह उनकी स्थितियों को जानने वाला है। उनकी कोई बात उससे छिपी नहीं है। वह अपने प्रबंधन और अपने विधान में हिकमत वाला है।
9:98Page 202
وَمِنَ ٱلۡأَعۡرَابِ مَن يَتَّخِذُ مَا يُنفِقُ مَغۡرَمٗا وَيَتَرَبَّصُ بِكُمُ ٱلدَّوَآئِرَۚ عَلَيۡهِمۡ دَآئِرَةُ ٱلسَّوۡءِۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٞ ٩٨
And among the bedouins are some who consider what they spend as a loss1 and await for you turns of misfortune. Upon them will be a misfortune of evil. And Allāh is Hearing and Knowing.
देहात में रहने वाले पाखंडियों में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अल्लाह के मार्ग में खर्च किए हुए धन को घाटा और जुर्माना समझते हैं, क्योंकि उनका भ्रम है कि यदि उन्होंने खर्च किया तो उन्हें प्रतिफल नहीं मिलेगा और अगर खर्च नहीं किया तो अल्लाह उन्हें दंडित नहीं करेगा। किंतु इसके बावजूद कभी-कभी दिखावा और अपने बचाव के लिए खर्च कर देते हैं। वे इस बात की प्रतीक्षा में रहते हैं कि (ऐ ईमान वालो!) तुमपर कोई बुराई उतर पड़े और उन्हें तुमसे छुटकारा मिल जाए। वे जिस बुराई और गंभीर परिणाम वाले कालचक्र के मुसलमानों पर उतरने की कामना कर रहे हैं, अल्लाह उसे ईमान वालों के बजाय, स्वयं उन्हीं पर उतार दे। वे जो कुछ कहते हैं अल्लाह उसे सुनने वाला और जो कुछ छिपाते हैं उसे जानने वाला है।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences