Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Al-Hijr 15:69–99
इस अश्लीलता को छोड़कर अल्लाह से डरो और अपने इस जघन्य कार्य से मुझे अपमानित न करो।
15:70Page 265
قَالُوٓاْ أَوَلَمۡ نَنۡهَكَ عَنِ ٱلۡعَٰلَمِينَ ٧٠
They said, "Have we not forbidden you from [protecting] people?"
उनकी जाति ने उनसे कहा : क्या हमने आपको किसी भी व्यक्ति को अतिथि बनाने से मना नहीं किया?
15:71Page 266
قَالَ هَٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِيٓ إِن كُنتُمۡ فَٰعِلِينَ ٧١
[Lot] said, "These are my daughters1 - if you would be doers [of lawful marriage]."
लूत अलैहिस्सलाम ने अपने अतिथियों के सामने अपने लिए उज़्र प्रस्तुत करते हुए अपनी जाति के लोगों से कहा : ये तुम्हारी कुल स्त्रियों में से मेरी बेटियाँ हैं। अतः यदि तुम अपनी कामवासना की पूर्ति चाहते हो, तो इनसे शादी कर लो।
15:72Page 266
لَعَمۡرُكَ إِنَّهُمۡ لَفِي سَكۡرَتِهِمۡ يَعۡمَهُونَ ٧٢
By your life, [O Muḥammad], indeed they were, in their intoxication, wandering blindly.
(ऐ रसूल!) आपके जीवन की क़सम, निःसंदेह लूत अलैहिस्सलाम की जाति के लोग अपनी कामवासना की प्रबलता में भटक रहे थे।
अंततः उनके सूरज निकलने के समय में प्रवेश करते ही उन्हें एक तेज़ विनाशकारी आवाज़ ने पकड़ लिया।
15:74Page 266
فَجَعَلۡنَا عَٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِمۡ حِجَارَةٗ مِّن سِجِّيلٍ ٧٤
And We made the highest part [of the city] its lowest and rained upon them stones of hard clay.
तो हमने उनकी बस्तियों को ऊपर-नीचे पलट दिया और उनपर कंकड़ के पत्थर बरसाए।
15:75Page 266
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٖ لِّلۡمُتَوَسِّمِينَ ٧٥
Indeed in that are signs for those who discern.
लूत अलैहिस्सलाम की जाति पर उतरने वाले विनाश की घटना में, सोच-विचार करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।
15:76Page 266
وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٖ مُّقِيمٍ ٧٦
And indeed, they [i.e., those cities] are [situated] on an established road.
लूत अलैहिस्सलाम की जाति की बस्तियाँ एक स्थायी रास्ते (सार्वजनिक मार्ग) पर स्थित हैं, वहाँ से गुज़रने वाले यात्री उन्हें देख सकते हैं।
15:77Page 266
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ ٧٧
Indeed in that is a sign for the believers.
यह जो कुछ घटित हुआ, इसमें ईमान वालों के लिए एक निशानी है, जिससे वे सीख ले सकते हैं।
15:78Page 266
وَإِن كَانَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡأَيۡكَةِ لَظَٰلِمِينَ ٧٨
And the companions of the thicket [i.e., the people of Madyan] were [also] wrongdoers,
घने पेड़ों वाली बस्ती वाले, शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति के लोग भी अत्याचारी थे। क्योंकि उन्होंने अल्लाह का इनकार किया था और उसके रसूल शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाया था।
15:79Page 266
فَٱنتَقَمۡنَا مِنۡهُمۡ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٖ مُّبِينٖ ٧٩
So We took retribution from them, and indeed, both [cities] are on a clear highway.
तो हमने उनसे प्रतिशोध (बदला) लिया। चुनाँचे उन्हें यातना ने पकड़ लिया। और लूत अलैहिस्सलाम की जाति की बस्तियाँ और शुऐब अलैहिस्सलाम के मानने वालों के घर ऐसे मार्ग पर स्थित हैं जो वहाँ से गुज़रने वाले के लिए बिल्कुल स्पष्ट है।
15:80Page 266
وَلَقَدۡ كَذَّبَ أَصۡحَٰبُ ٱلۡحِجۡرِ ٱلۡمُرۡسَلِينَ ٨٠
And certainly did the companions of al-Ḥijr1 [i.e., the Thamūd] deny the messengers.
और समूद की जाति अर्थात् ह़िज्र (हिजाज़ और शाम के बीच एक स्थान) के रहने वालों ने अपने नबी सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाकर सभी रसूलों को झुठलाया।
15:81Page 266
وَءَاتَيۡنَٰهُمۡ ءَايَٰتِنَا فَكَانُواْ عَنۡهَا مُعۡرِضِينَ ٨١
And We gave them Our signs, but from them they were turning away.
और हमने उन्हें उनके सच्चे नबी होने के प्रमाण और निशानियाँ दी थीं, जिनमें से एक निशानी ऊँटनी थी। परंतु उन्होंने उन प्रमाणों से सीख नहीं लिया और उनकी कोई परवाह नहीं की।
15:82Page 266
وَكَانُواْ يَنۡحِتُونَ مِنَ ٱلۡجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ ٨٢
And they used to carve from the mountains, houses, feeling secure.
वे पहाड़ों को काटते थे ताकि अपने लिए घर बनाकर उनमें भयमुक्त होकर निवास करें।
अंततः उनके सुबह के समय में प्रवेश करते ही, उन्हें यातना के चीत्कार ने पकड़ लिया।
15:84Page 266
فَمَآ أَغۡنَىٰ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ ٨٤
So nothing availed them [from] what they used to earn.
परंतु उनके कमाए हुए धन और उनके घर उनसे अल्लाह की यातना को टाल न सके।
15:85Page 266
وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَأٓتِيَةٞۖ فَٱصۡفَحِ ٱلصَّفۡحَ ٱلۡجَمِيلَ ٨٥
And We have not created the heavens and earth and that between them except in truth. And indeed, the Hour is coming; so forgive with gracious forgiveness.
हमने आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की समस्त चीज़ों को बिना हिकमत के व्यर्थ (निरुद्देश्य) पैदा नहीं किया है। हमने यह सब सत्य के साथ पैदा किया है और निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। अतः (ऐ रसूल!) आप झुठलाने वालों को नज़रअंदाज़ कर दें और उन्हें भले तौर पर क्षमा कर दें।
15:86Page 266
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلۡخَلَّٰقُ ٱلۡعَلِيمُ ٨٦
Indeed, your Lord - He is the Knowing Creator.
निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही हर चीज़ को पैदा करने वाला और उसका ज्ञान रखने वाला है।
15:87Page 266
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَٰكَ سَبۡعٗا مِّنَ ٱلۡمَثَانِي وَٱلۡقُرۡءَانَ ٱلۡعَظِيمَ ٨٧
And We have certainly given you, [O Muḥammad], seven of the often repeated [verses]1 and the great Qur’ān.
और हमने आपको सूरतुल-फ़ातिहा प्रदान की, जो सात आयतें हैं और वही महान क़ुरआन है।
15:88Page 266
لَا تَمُدَّنَّ عَيۡنَيۡكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعۡنَا بِهِۦٓ أَزۡوَٰجٗا مِّنۡهُمۡ وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمۡ وَٱخۡفِضۡ جَنَاحَكَ لِلۡمُؤۡمِنِينَ ٨٨
Do not extend your eyes toward that by which We have given enjoyment to [certain] categories of them [i.e., the disbelievers], and do not grieve over them. And lower your wing [i.e., show kindness] to the believers.
हमने काफ़िरों के विभिन्न प्रकार के लोगों को, नष्ट हो जाने वाली जीवन की जो सामग्रियाँ दे रखी हैं, आप उनकी ओर न देखें और उनके झुठलाने पर दुखी न हों और मोमिनों के प्रति विनम्रता अपनाएँ।
15:89Page 266
وَقُلۡ إِنِّيٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلۡمُبِينُ ٨٩
And say, "Indeed, I am the clear warner" -
(ऐ रसूल!) आप कह दें कि मैं यातना से खुले तौर पर सावधान करने वाला हूँ।
15:90Page 266
كَمَآ أَنزَلۡنَا عَلَى ٱلۡمُقۡتَسِمِينَ ٩٠
Just as We had revealed [scriptures] to the separators1
मैं तुम्हें इस बात से डराता हूँ कि तुमपर उसी तरह की यातना आए, जिस तरह की यातना अल्लाह ने उन लोगो पर अवतिरत की थी, जिन्होंने अल्लाह की किताबों को विभिन्न भागों में बाँट दिया था। चुनाँचे वे कुछ भागों पर ईमान रखते थे और कुछ भागों का इनकार करते थे।
जिन्होंने क़ुरआन को खंड-खंड कर डाला। चुनाँचे उन्होंने कहा : यह जादू है, या कहानत (ज्योतिष) है, या शे'र (काव्य) है।
15:92Page 267
فَوَرَبِّكَ لَنَسۡـَٔلَنَّهُمۡ أَجۡمَعِينَ ٩٢
So by your Lord, We will surely question them all
अतः (ऐ रसूल!) आपके पालनहार की क़सम! हम क़ियामत के दिन उन सभी लोगों से अवश्य पूछेंगे, जिन्होंने क़ुरआन को खंड-खंड बना लिया।
हम उनसे कुफ़्र और गुनाहों के बारे में अवश्य पूछेंगे, जो वे दुनिया में किया करते थे।
15:94Page 267
فَٱصۡدَعۡ بِمَا تُؤۡمَرُ وَأَعۡرِضۡ عَنِ ٱلۡمُشۡرِكِينَ ٩٤
Then declare what you are commanded1 and turn away from the polytheists.2
अतः (ऐ रसूल!) अल्लाह ने आपको जिसकी ओर लोगों को बुलाने का आदेश दिया है, उसकी घोषणा कर दें और मुश्रिक लोग जो कुछ कहते और करते हैं, उस पर ध्यान न दें।
15:95Page 267
إِنَّا كَفَيۡنَٰكَ ٱلۡمُسۡتَهۡزِءِينَ ٩٥
Indeed, We are sufficient for you against the mockers
आप उनसे न डरें। क्योंकि हम क़ुरैश के मज़ाक़ उड़ाने वाले कुफ़्र के प्रमुखों की चालों को नाकाम बनाने के लिए आपकी ओर से काफ़ी हैं।
15:96Page 267
ٱلَّذِينَ يَجۡعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَۚ فَسَوۡفَ يَعۡلَمُونَ ٩٦
Who make [equal] with Allāh another deity. But they are going to know.
जो अल्लाह के साथ अन्य पूज्य बनाते हैं। अतः वे अपने शिर्क का बुरा परिणाम जान लेंगे।
15:97Page 267
وَلَقَدۡ نَعۡلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدۡرُكَ بِمَا يَقُولُونَ ٩٧
And We already know that your breast is constrained by what they say.
और निश्चय हम जानते हैं कि (ऐ रसूल!) उनके आपको झुठलाने और आपका मज़ाक़ उड़ाने के कारण आपका सीना तंग होता है।
15:98Page 267
فَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ ٱلسَّٰجِدِينَ ٩٨
So exalt [Allāh] with praise of your Lord and be of those who prostrate [to Him].
अतः आप अल्लाह को उन चीज़ों से पाक करके जो उसके योग्य नहीं हैं, तथा उसके पूर्णता के गुणों के साथ उसकी प्रशंसा करते हुए अल्लाह का आश्रय लें, तथा अल्लाह की उपासना करने वालों, उसके लिए नमाज़ पढ़ने वालों में से हो जाएँ। क्योंकि इसमें आपके दिल की तंगी का इलाज है।
15:99Page 267
وَٱعۡبُدۡ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأۡتِيَكَ ٱلۡيَقِينُ ٩٩
And worship your Lord until there comes to you the certainty [i.e., death].
तथा जब तक आप जीवित हैं, अपने रब की इबादत करना जारी रखें और उसपर क़ायम रहें, यहाँ तक कि इसी अवस्था में आपके पास मौत आ जाए।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences