Al-Mukhtasar · Tafsir · in Hindi
Al-Ma'idah 5:92–120
5:92Page 123
وَأَطِيعُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُواْ ٱلرَّسُولَ وَٱحۡذَرُواْۚ فَإِن تَوَلَّيۡتُمۡ فَٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ ٩٢
And obey Allāh and obey the Messenger and beware. And if you turn away - then know that upon Our Messenger is only [the responsibility for] clear notification.
शरीयत के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से दूर रहकर अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो तथा अवज्ञा से सावधान रहो। फिर यदि तुम उससे मुँह मोड़ो, तो जान लो कि हमारे रसूल का दायित्व केवल उस संदेश को पहुँचा देना है, जिसका अल्लाह ने उन्हें पहुँचाने का आदेश दिया है और वह उसे पहुँचा चुके हैं। इसलिए यदि तुम मार्गदर्शन अपना लो, तो इसमें तुम्हारा ही लाभ है, और यदि बुरे कर्म करो, तो तुम्हारा ही नुक़सान होगा।
5:93Page 123
لَيۡسَ عَلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ جُنَاحٞ فِيمَا طَعِمُوٓاْ إِذَا مَا ٱتَّقَواْ وَّءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ ثُمَّ ٱتَّقَواْ وَّءَامَنُواْ ثُمَّ ٱتَّقَواْ وَّأَحۡسَنُواْۚ وَٱللَّهُ يُحِبُّ ٱلۡمُحۡسِنِينَ ٩٣
There is not upon those who believe and do righteousness [any] blame concerning what they have eaten [in the past] if they [now] fear Allāh and believe and do righteous deeds, and then fear Allāh and believe, and then fear Allāh and do good; and Allāh loves the doers of good.
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए, तथा उसकी निकटता प्राप्त करने के लिए अच्छे कर्म किए, उनपर उसमें कोई पाप नहीं जो उन्होंने शराब का उसके निषिद्ध होने से पहले सेवन किया था, यदि वे निषिद्ध चीज़ों से परहेज़ करते थे, अपने ऊपर अल्लाह के क्रोध से डरने वाले, उसपर ईमान रखने वाले, अच्छे कर्म करने वाले थे, फिर अल्लाह के प्रति उनका ध्यान बढ़ गया यहाँ तक कि वे उसकी इस तरह इबादत करने लगें, मानो कि वे उसे देख रहे हों, और अल्लाह उन लोगों से प्रेम करता है जो उसकी इस तरह इबादत करते हैं कि मानो वे उसे देख रहे हों; क्योंकि वे उसमें हमेशा अल्लाह के निरीक्षण का आभास करने वाले होते हैं। और यह स्थिति मोमिन को अपने काम को अच्छी तरह और पूर्ण रूप से करने के लिए प्रेरित करती है।
5:94Page 123
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَيَبۡلُوَنَّكُمُ ٱللَّهُ بِشَيۡءٖ مِّنَ ٱلصَّيۡدِ تَنَالُهُۥٓ أَيۡدِيكُمۡ وَرِمَاحُكُمۡ لِيَعۡلَمَ ٱللَّهُ مَن يَخَافُهُۥ بِٱلۡغَيۡبِۚ فَمَنِ ٱعۡتَدَىٰ بَعۡدَ ذَٰلِكَ فَلَهُۥ عَذَابٌ أَلِيمٞ ٩٤
O you who have believed, Allāh will surely test you through something of the game that your hands and spears [can] reach, that Allāh may make evident those who fear Him unseen. And whoever transgresses after that - for him is a painful punishment.
ऐ ईमान वालो! अल्लाह तुम्हारी इस तरह परीक्षा लेगा कि वह जंगली शिकार में से कुछ तुम्हारे पास ले आएगा, जबकि तुम एहराम की अवस्था में होगे। उनमें से छोटे शिकार को तुम अपने हाथों से पकड़ोगे और बड़े शिकार को अपने भालों से, ताकि अल्लाह जान ले (प्रत्यक्ष रूप से जानना जिसपर बंदों की पकड़ होती है) कि कौन अल्लाह के ज्ञान पर पूर्ण ईमान रखने की वजह से उससे बिन देखे डरता है। इसलिए वह अपने उस स्रष्टा के डर से शिकार करने से रुक जाता है, जिससे उसका कार्य छिपा नहीं रहता है। अतः जो हद से आगे बढ़े और ह़ज्ज या उम्रा के एहराम की हालत में शिकार करे, तो उसके लिए क़ियामत के दिन दर्दनाक अज़ाब है; क्योंकि उसने वह कार्य किया है जिससे अल्लाह ने मना किया था।
5:95Page 123
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَقۡتُلُواْ ٱلصَّيۡدَ وَأَنتُمۡ حُرُمٞۚ وَمَن قَتَلَهُۥ مِنكُم مُّتَعَمِّدٗا فَجَزَآءٞ مِّثۡلُ مَا قَتَلَ مِنَ ٱلنَّعَمِ يَحۡكُمُ بِهِۦ ذَوَا عَدۡلٖ مِّنكُمۡ هَدۡيَۢا بَٰلِغَ ٱلۡكَعۡبَةِ أَوۡ كَفَّٰرَةٞ طَعَامُ مَسَٰكِينَ أَوۡ عَدۡلُ ذَٰلِكَ صِيَامٗا لِّيَذُوقَ وَبَالَ أَمۡرِهِۦۗ عَفَا ٱللَّهُ عَمَّا سَلَفَۚ وَمَنۡ عَادَ فَيَنتَقِمُ ٱللَّهُ مِنۡهُۚ وَٱللَّهُ عَزِيزٞ ذُو ٱنتِقَامٍ ٩٥
O you who have believed, do not kill game while you are in the state of iḥrām.1 And whoever of you kills it intentionally - the penalty is an equivalent from sacrificial animals to what he killed, as judged by two just men among you as an offering [to Allāh] delivered to the Kaʿbah, or an expiation: the feeding of needy people or the equivalent of that in fasting, that he may taste the consequence of his matter [i.e., deed]. Allāh has pardoned what is past; but whoever returns [to violation], then Allāh will take retribution from him. And Allāh is Exalted in Might and Owner of Retribution.2
ऐ ईमान वालो! हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में जंगली शिकार न मारो। तथा तुममें से जो व्यक्ति जान-बूझकर शिकार मारे, तो उसने जो शिकार मारा है उसी के समान उसपर ऊँट, या गाय, या बकरी में से बदला (दंड) अनिवार्य है, जिसका निर्णय मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्ति करेंगे। और जिस पशु का वे निर्णय कर दें, उसके साथ वही किया जाएगा जो हज्ज की क़ुर्बानी के जानवर के साथ किया जाता है। अर्थात् उसे मक्का भेजा जाएगा और हरम में ज़बह किया जाएगा, या उस जानवर की क़ीमत के बराबर खाद्य पदार्थ हरम के निर्धनों को दिया जाएगा, हर निर्धन को आधा सा'। या हर आधे सा' खाद्य पदार्थ के बदले एक दिन रोज़ा रखना होगा। यह सब इसलिए कि शिकार करने वाला अपने किए के परिणाम का स्वाद चख ले। अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया, जो अतीत में हरम का शिकार मारा गया और एहराम की स्थिति में जो भूमि का शिकार मारा गया उसके हराम ठहराए जाने से पहले। जो व्यक्ति हराम घोषित होने के बाद भी ऐसा करेगा, अल्लाह उसे उसपर यातना देकर उससे बदला लेगा। अल्लाह बहुत शक्तिशाली, ताक़त वाला है और उसकी शक्ति में से एक यह है कि वह उससे बदला लेता है जो उसकी अवज्ञा करता है, यदि वह चाहे, उसे कोई ऐसा करने से रोक नहीं सकता।
5:96Page 124
أُحِلَّ لَكُمۡ صَيۡدُ ٱلۡبَحۡرِ وَطَعَامُهُۥ مَتَٰعٗا لَّكُمۡ وَلِلسَّيَّارَةِۖ وَحُرِّمَ عَلَيۡكُمۡ صَيۡدُ ٱلۡبَرِّ مَا دُمۡتُمۡ حُرُمٗاۗ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ ٱلَّذِيٓ إِلَيۡهِ تُحۡشَرُونَ ٩٦
Lawful to you is game from the sea and its food as provision for you and the travelers,1 but forbidden to you is game from the land as long as you are in the state of iḥrām. And fear Allāh to whom you will be gathered.
अल्लाह ने तुम्हारे लिए जलीय जानवरों का शिकार करना तथा उस जानवर को हलाल कर दिया है, जो समुद्र तुम्हारे लिए फेंक देता है, चाहे वह जीवित हो या मृत, यह तुममें से उसके लाभ के लिए है जो निवासी है या यात्री है जिसके साथ वह खुद की आपूर्ति करता है, तथा उसने तुमपर भूमि का शिकार करना हराम कर दिया है जब तक कि तुम हज्ज या उम्रा के एहराम की स्थिति में हो। तथा अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, उससे डरो। क्योंकि उसी अकेले की ओर तुम क़ियामत के दिन लौटाए जाओगे, फिर वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा।
5:97Page 124
۞ جَعَلَ ٱللَّهُ ٱلۡكَعۡبَةَ ٱلۡبَيۡتَ ٱلۡحَرَامَ قِيَٰمٗا لِّلنَّاسِ وَٱلشَّهۡرَ ٱلۡحَرَامَ وَٱلۡهَدۡيَ وَٱلۡقَلَٰٓئِدَۚ ذَٰلِكَ لِتَعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ يَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِ وَأَنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَيۡءٍ عَلِيمٌ ٩٧
Allāh has made the Kaʿbah, the Sacred House, standing1 for the people and [has sanctified] the sacred months and the sacrificial animals and the garlands [by which they are identified]. That is so you may know that Allāh knows what is in the heavens and what is in the earth and that Allāh is Knowing of all things.
अल्लाह ने सम्मानित घर काबा को लोगों के लिए स्थापना का साधन बनाया है, जिसके साथ उनके धार्मिक हितों जैसे नमाज़, रोज़ा, ह़ज्ज एवं उम्रा की, तथा उनके सांसारिक हितों की स्थापना होती है, जैसे हरम में सुरक्षा एवं शांति और वहाँ हर चीज़ के फलों का पहुँचना। तथा उसने सम्मानित महीनों अर्थात् : ज़ुल-क़ा'दा, ज़ुल-ह़िज्जा, मुहर्रम और रजब को उनके लिए स्थापना का कारण बनाया है कि वे उनमें दूसरों कि ओर से लड़ाई से सुरक्षित रहते हैं, इसी तरह ह़ज्ज की क़ुर्बानी के जानवरों तथा उन पट्टों को जो यह इंगित करते हैं कि वे हरम के लिए ले जाए गए हैं, उनके लिए स्थापना का साधन बनाया है, क्योंकि वे अपने स्वामियों को हानि पहुँचाए जाने से बचाते हैं। अल्लाह ने तुमपर यह उपकार इसलिए किया ताकि तुम जान लो कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में तथा जो कुछ धरती में है, और यह कि अल्लाह हर चीज़ को ख़ूब जानने वाला है। क्योंकि उसका - तुम्हारे लिए हितों को लाने और तुमसे नुक़सान को उनके आने से पहले दूर करने के लिए - इन नियमों को बनाना, इस बात का प्रमाण है कि वह बंदों के हितों की चीज़ों को जानता है।
5:98Page 124
ٱعۡلَمُوٓاْ أَنَّ ٱللَّهَ شَدِيدُ ٱلۡعِقَابِ وَأَنَّ ٱللَّهَ غَفُورٞ رَّحِيمٞ ٩٨
Know that Allāh is severe in penalty and that Allāh is Forgiving and Merciful.
(ऐ लोगो!) यह जान लो कि निःसंदेह अल्लाह उसे बहुत कठोर दंड देने वाला है, जो उसकी अवज्ञा करे, तथा तौबा करने वाले को बहुत क्षमा करने वाला, उसपर बड़ा दयालु है।
5:99Page 124
مَّا عَلَى ٱلرَّسُولِ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُۗ وَٱللَّهُ يَعۡلَمُ مَا تُبۡدُونَ وَمَا تَكۡتُمُونَ ٩٩
Not upon the Messenger is [responsibility] except [for] notification. And Allāh knows whatever you reveal and whatever you conceal.
रसूल का दायित्व केवल यह है कि उस उपदेश को पहुँचा दे, जिसको पहुँचाने का अल्लाह ने उसे आदेश दिया है, उसकी यह ज़िम्मेदारी नहीं कि लोगों को हिदायत की तौफीक़ दे, क्योंकि यह केवल अल्लाह के हाथ में है, तथा अल्लाह उसे जानता है जो कुछ तुम मार्गदर्शन या पथभ्रष्टता में से प्रकट करते और छिपाते हो। और वह तुम्हें उसका बदला देगा।
5:100Page 124
قُل لَّا يَسۡتَوِي ٱلۡخَبِيثُ وَٱلطَّيِّبُ وَلَوۡ أَعۡجَبَكَ كَثۡرَةُ ٱلۡخَبِيثِۚ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ يَٰٓأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ لَعَلَّكُمۡ تُفۡلِحُونَ ١٠٠
Say, "Not equal are the evil and the good, although the abundance of evil might impress you." So fear Allāh, O you of understanding, that you may be successful.
(ऐ रसूल!) आप कह दें कि कोई भी अपवित्र (बुरी) चीज़ किसी भी पवित्र (अच्छी) चीज़ के बराबर नहीं है, यद्यपि अपवित्र (बुरी) चीज़ की बहुतायत आपको भली लगे। क्योंकि उसकी बहुतायत उसकी श्रेष्ठता का संकेत नहीं देती है। अतः (ऐ बुद्धि वालो!) अपवित्र को छोड़कर और पवित्र को करके अल्लाह से डरो, ताकि तुम्हें जन्नत प्राप्त हो।
5:101Page 124
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَا تَسۡـَٔلُواْ عَنۡ أَشۡيَآءَ إِن تُبۡدَ لَكُمۡ تَسُؤۡكُمۡ وَإِن تَسۡـَٔلُواْ عَنۡهَا حِينَ يُنَزَّلُ ٱلۡقُرۡءَانُ تُبۡدَ لَكُمۡ عَفَا ٱللَّهُ عَنۡهَاۗ وَٱللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٞ ١٠١
O you who have believed, do not ask about things which, if they are shown to you, will distress you. But if you ask about them while the Qur’ān is being revealed, they will be shown to you. Allāh has pardoned it [i.e., that which is past]; and Allāh is Forgiving and Forbearing.
ऐ ईमान वालो! अपने रसूल से उन चीज़ों के संबंध में प्रश्न न करो, जिनकी तुम्हें कोई ज़रूरत नहीं है, और जो तुम्हारे धर्म के मामले में तुम्हारी मदद नहीं करती हैं। यदि वे तुम्हारे लिए प्रकट कर दी जाएँ, तो उनमें पाई जाने वाली कठिनाई के कारण तुम्हें बुरी लगेंगी। यदि तुम इन चीज़ों के बारे में जिनके बारे में पूछने से तुम्हें मना किया गया है उस समय प्रश्न करोगे जब रसूल पर वह़्य उतारी जाती है, तो वे तुम्हारे लिए स्पष्ट कर दी जाएँगी, और यह अल्लाह के लिए बड़ा आसान है। अल्लाह ने उन चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर दिया है जिनके बारे में क़ुरआन खामोश है। अतः उनके बारे में प्रश्न न करो, क्योंकि अगर तुम उनके बारे में प्रश्न करोगे, तो तुम्हें उनके आदेश का बाध्य कर दिया जाएगा। तथा अल्लाह अपने बंदों के पापों को क्षमा करने वाला है यदि वे तौबा करते हैं, अत्यंत सहनशील है उन्हें उनपर दंडित नहीं करता है।
5:102Page 124
قَدۡ سَأَلَهَا قَوۡمٞ مِّن قَبۡلِكُمۡ ثُمَّ أَصۡبَحُواْ بِهَا كَٰفِرِينَ ١٠٢
A people asked such [questions] before you; then they became thereby disbelievers.1
तुमसे पहले भी कुछ लोगों ने इसी तरह की बातों के बारे में प्रश्न किए थे, फिर जब उन्हें उनका बाध्य कर दिया गया, तो उन्होंने उनके अनुसार कार्य नहीं किया। इसलिए वे उसके कारण काफ़िर हो गए।
5:103Page 124
مَا جَعَلَ ٱللَّهُ مِنۢ بَحِيرَةٖ وَلَا سَآئِبَةٖ وَلَا وَصِيلَةٖ وَلَا حَامٖ وَلَٰكِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ يَفۡتَرُونَ عَلَى ٱللَّهِ ٱلۡكَذِبَۖ وَأَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡقِلُونَ ١٠٣
Allāh has not appointed [such innovations as] baḥīrah or sā’ibah or waṣīlah or ḥām.1 But those who disbelieve invent falsehood about Allāh, and most of them do not reason.
अल्लाह ने चौपायों को हलाल किया है। चुनाँचे उसने उनमें से उन जानवरों को हराम नहीं किया है, जिन्हें मुश्रिकों ने अपनी मूर्तियों के लिए अपने ऊपर हराम ठहरा लिया है। जैसे कि बहीरा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसके कान एक निश्चित संख्या में बच्चे जनने के बाद काट दिए जाते थे। तथा साइबा, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जो एक निश्चित उम्र तक पहुँचने पर उनकी मूर्तियों के लिए छोड़ दी जाती थी। तथा वसीला, जो उस ऊँटनी को कहा जाता है, जिसने लगातार दो मादा बच्चे जने हों। तथा हामी, जो उस नर ऊँट को कहा जाता है, जिसकी पुश्त से कई ऊँट जन्म ले चुके हों। (अल्लाह ने इन्हें हराम नहीं किया), परंतु काफ़िरों ने झूठ-मूठ और मिथ्यारोपण करते हुए यह दावा किया कि अल्लाह ने उक्त जानवरों को हराम किया है, तथा अधिकांश काफ़िर सत्य और असत्य, हलाल और हराम के बीच अंतर नहीं करते हैं।
5:104Page 125
وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ تَعَالَوۡاْ إِلَىٰ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ وَإِلَى ٱلرَّسُولِ قَالُواْ حَسۡبُنَا مَا وَجَدۡنَا عَلَيۡهِ ءَابَآءَنَآۚ أَوَلَوۡ كَانَ ءَابَآؤُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ شَيۡـٔٗا وَلَا يَهۡتَدُونَ ١٠٤
And when it is said to them, "Come to what Allāh has revealed and to the Messenger," they say, "Sufficient for us is that upon which we found our fathers." Even though their fathers knew nothing, nor were they guided?
जब अल्लाह पर कुछ चौपायों को हराम ठहराने का झूठा आरोप लगाने वाले इन लोगों से कहा जाता है : अल्लाह के उतारे हुए क़ुरआन की ओर आओ, तथा रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सुन्नत की ओर आओ, ताकि तुम हलाल और हराम को पहचान सको, तो वे कहते हैं : हमने जिन विश्वासों, कथनों और कार्यों को अपने पूर्वजों से लिया है और हमें विरासत में मिला है, वही हमारे लिए काफ़ी हैं। उनके लिए यह कैसे काफ़ी है जबकि उनके पूर्वज कुछ नहीं जानते थे, और न तो उन्हें सत्य का मार्गदर्शन प्राप्त था?! इसलिए उनका अनुसरण वही करेगा, जो उनसे अधिक अज्ञानी और उनसे अधिक मार्ग से भटका हुआ होगा। अतः वे अज्ञानी और पथभ्रष्ट हैं।
5:105Page 125
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ عَلَيۡكُمۡ أَنفُسَكُمۡۖ لَا يَضُرُّكُم مَّن ضَلَّ إِذَا ٱهۡتَدَيۡتُمۡۚ إِلَى ٱللَّهِ مَرۡجِعُكُمۡ جَمِيعٗا فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ١٠٥
O you who have believed, upon you is [responsibility for] yourselves. Those who have gone astray will not harm you when you have been guided. To Allāh is your return all together; then He will inform you of what you used to do.
ऐ ईमान वालो! तुम अपनी चिंता करो। अतः अपने आपको ऐसा कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध करो, जिससे तुम्हारा सुधार हो। यदि तुम स्वयं मार्गदर्शन पा चुके, तो लोगों में से जो व्यक्ति गुमराह हो गया और उसने तुम्हारी बात नहीं मानी, वह तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाएगा। तथा तुम्हारे मार्गदर्शन प्राप्त होने की अपेक्षा यह कि तुम भलाई का आदेश दो और बुराई से रोको। क़ियामत के दिन तुम्हें अकेले अल्लाह ही की ओर लौटकर जाना है, फिर वह तुम्हें बताएगा कि तुम दुनिया में क्या किया करते थे और तुम्हें उसका बदला देगा।
5:106Page 125
يَٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ شَهَٰدَةُ بَيۡنِكُمۡ إِذَا حَضَرَ أَحَدَكُمُ ٱلۡمَوۡتُ حِينَ ٱلۡوَصِيَّةِ ٱثۡنَانِ ذَوَا عَدۡلٖ مِّنكُمۡ أَوۡ ءَاخَرَانِ مِنۡ غَيۡرِكُمۡ إِنۡ أَنتُمۡ ضَرَبۡتُمۡ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَأَصَٰبَتۡكُم مُّصِيبَةُ ٱلۡمَوۡتِۚ تَحۡبِسُونَهُمَا مِنۢ بَعۡدِ ٱلصَّلَوٰةِ فَيُقۡسِمَانِ بِٱللَّهِ إِنِ ٱرۡتَبۡتُمۡ لَا نَشۡتَرِي بِهِۦ ثَمَنٗا وَلَوۡ كَانَ ذَا قُرۡبَىٰ وَلَا نَكۡتُمُ شَهَٰدَةَ ٱللَّهِ إِنَّآ إِذٗا لَّمِنَ ٱلۡأٓثِمِينَ ١٠٦
O you who have believed, testimony [should be taken] among you when death approaches one of you at the time of bequest - [that of] two just men from among you or two others from outside if you are traveling through the land and the disaster of death should strike you. Detain them after the prayer and let them both swear by Allāh if you doubt [their testimony, saying], "We will not exchange it [i.e., our oath] for a price [i.e., worldly gain], even if he should be a near relative, and we will not withhold the testimony of [i.e., ordained by] Allāh. Indeed, we would then be of the sinful."
ऐ ईमान वालो! यदि तुममें से किसी की मृत्यु का समय मौत की किसी निशानी के प्रकट होने के साथ निकट आ जाए, तो वह अपनी वसीयत पर मुसलमानों में से दो न्यायप्रिय व्यक्तियों को, या मुसलमानों की अनुपस्थिति के कारण ज़रूरत पड़ने पर काफ़िरों में से दो आदमियों को गवाह बना दे, यदि तुम यात्रा कर रहे हो और तुमपर मृत्यु आ पहुँचे। यदि तुम्हें उन दोनों की गवाही के विषय में संदेह हो, तो किसी नमाज़ के बाद उन्हें रोक लो और वे दोनों अल्लाह की क़सम खाएँ कि : वे दोनों अल्लाह की ओर से मिले हुए अपने हिस्से (यानी अपनी क़सम) को किसी मुआवज़े के बदले नहीं बेचेंगे, और न उसके साथ किसी संबंधी का पक्ष लेंगे (लाभ पहुँचाएँगे), तथा वे दोनों अपने पास मौजूद अल्लाह की किसी गवाही को नहीं छिपाएँगे, और यदि उन्होंने ऐसा किया तो वे दोनों अल्लाह की अवज्ञा करने वाले पापियों में से होंगे।
5:107Page 125
فَإِنۡ عُثِرَ عَلَىٰٓ أَنَّهُمَا ٱسۡتَحَقَّآ إِثۡمٗا فَـَٔاخَرَانِ يَقُومَانِ مَقَامَهُمَا مِنَ ٱلَّذِينَ ٱسۡتَحَقَّ عَلَيۡهِمُ ٱلۡأَوۡلَيَٰنِ فَيُقۡسِمَانِ بِٱللَّهِ لَشَهَٰدَتُنَآ أَحَقُّ مِن شَهَٰدَتِهِمَا وَمَا ٱعۡتَدَيۡنَآ إِنَّآ إِذٗا لَّمِنَ ٱلظَّٰلِمِينَ ١٠٧
But if it is found that those two were guilty of sin [i.e., perjury], let two others stand in their place [who are] foremost [in claim] from those who have a lawful right. And let them swear by Allāh, "Our testimony is truer than their testimony, and we have not transgressed. Indeed, we would then be of the wrongdoers."
यदि क़सम खिलाने के बाद यह स्पष्ट हो जाए कि उन दोनों ने गवाही अथवा क़सम में झूठ बोला है, या उन दोनों की ख़यानत (विश्वासघात) प्रकट हो जाए; तो उनके स्थान पर मरे हुए व्यक्ति के निकटतम संबंधियों में से दो व्यक्ति खड़े होकर सत्य की गवाही दें या क़सम खाएँ। वे दोनों अल्लाह की क़सम खाते हुए कहें : निश्चय उनके झूठ और ख़यानत पर हमारी गवाही, उन दोनों की अपनी सच्चाई और अमानत पर गवाही से अधिक सच्ची है, और हमने झूठी क़सम नहीं खाई है। यदि हमने झूठी गवाही दी है, तो निश्चय हम उन अत्याचारियों में से होंगे जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।
5:108Page 125
ذَٰلِكَ أَدۡنَىٰٓ أَن يَأۡتُواْ بِٱلشَّهَٰدَةِ عَلَىٰ وَجۡهِهَآ أَوۡ يَخَافُوٓاْ أَن تُرَدَّ أَيۡمَٰنُۢ بَعۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡۗ وَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَٱسۡمَعُواْۗ وَٱللَّهُ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡفَٰسِقِينَ ١٠٨
That is more likely that they will give testimony according to its [true] objective, or [at least] they would fear that [other] oaths might be taken after their oaths. And fear Allāh and listen [i.e., obey Him]; and Allāh does not guide the defiantly disobedient people.
दोनों गवाहों की गवाही में संदेह होने पर उन्हें नमाज़ के बाद क़सम खिलाने और उनकी गवाही को रद्द करने का जो उल्लेख किया गया है, यह इस बात के अधिक क़रीब है कि वे दोनों गवाही का निष्पादन उसके शरई तरीक़े के अनुसार करें। अतः वे गवाही को विकृत न करें या उसमें बदलाव न करें या ख़यानत (विश्वासघात) न करें। तथा यह इस तथ्य के अधिक क़रीब है कि वे इस बात से डरें कि वारिसों की क़सम उन दोनों की क़सम को ख़ारिज कर देगी, चुनाँचे वे लोग उन दोनों की गवाही के विपरीत क़सम खा लेंगे, इस तरह वे दोनों बेनक़ाब हो जाएँगे। गवाही और क़सम में झूठ और ख़यानत (विश्वासघात) को त्यागकर अल्लाह से डरो, तथा तुम्हें जिस बात का आदेश दिया गया है उसे सुनो और स्वीकार करो। और अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसके आज्ञापालन से निकल जाने वाले हैं।
5:109Page 126
۞ يَوۡمَ يَجۡمَعُ ٱللَّهُ ٱلرُّسُلَ فَيَقُولُ مَاذَآ أُجِبۡتُمۡۖ قَالُواْ لَا عِلۡمَ لَنَآۖ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلۡغُيُوبِ ١٠٩
[Be warned of] the Day when Allāh will assemble the messengers and say, "What was the response you received?" They will say, "We have no knowledge. Indeed, it is You who is Knower of the unseen" -
ऐ लेगो! क़ियामत के दिन को याद करो, जब अल्लाह सभी रसूलों को इकट्ठा करेगा। फिर उनसे कहेगा : तुम्हारे उन समुदायों ने, जिनकी ओर तुम्हें भेजा गया था, तुम्हें क्या जवाब दिया? वे उसका जवाब अल्लाह को सौंपते हुए कहेंगे : हमें कुछ ज्ञान नहीं। बल्कि सारा ज्ञान - ऐ हमारे पालनहार! - केवल तुझे ही है, निःसंदेह तू ही एक अकेला है जो अनदेखी चीज़ों को जानता है।
5:110Page 126
إِذۡ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ٱذۡكُرۡ نِعۡمَتِي عَلَيۡكَ وَعَلَىٰ وَٰلِدَتِكَ إِذۡ أَيَّدتُّكَ بِرُوحِ ٱلۡقُدُسِ تُكَلِّمُ ٱلنَّاسَ فِي ٱلۡمَهۡدِ وَكَهۡلٗاۖ وَإِذۡ عَلَّمۡتُكَ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحِكۡمَةَ وَٱلتَّوۡرَىٰةَ وَٱلۡإِنجِيلَۖ وَإِذۡ تَخۡلُقُ مِنَ ٱلطِّينِ كَهَيۡـَٔةِ ٱلطَّيۡرِ بِإِذۡنِي فَتَنفُخُ فِيهَا فَتَكُونُ طَيۡرَۢا بِإِذۡنِيۖ وَتُبۡرِئُ ٱلۡأَكۡمَهَ وَٱلۡأَبۡرَصَ بِإِذۡنِيۖ وَإِذۡ تُخۡرِجُ ٱلۡمَوۡتَىٰ بِإِذۡنِيۖ وَإِذۡ كَفَفۡتُ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ عَنكَ إِذۡ جِئۡتَهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنۡهُمۡ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٞ مُّبِينٞ ١١٠
[The Day] when Allāh will say, "O Jesus, Son of Mary, remember My favor upon you and upon your mother when I supported you with the Pure Spirit [i.e., the angel Gabriel] and you spoke to the people in the cradle and in maturity; and [remember] when I taught you writing and wisdom and the Torah and the Gospel; and when you designed from clay [what was] like the form of a bird with My permission, then you breathed into it, and it became a bird with My permission; and you healed the blind [from birth] and the leper with My permission; and when you brought forth the dead with My permission; and when I restrained the Children of Israel from [killing] you when you came to them with clear proofs and those who disbelieved among them said, "This is not but obvious magic."
तथा याद करो, जब अल्लाह (क़ियामत के दिन) ईसा अलैहिस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ मरयम के पुत्र ईसा! तुम अपने ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो जब मैंने तुम्हें बिना पिता के बनाया था, और अपनी माता मरयम अलैहस्सलाम के ऊपर मेरे अनुग्रह को याद करो, जब मैंने उसे उसके समय की महिलाओं के ऊपर चुन लिया। तथा अपने ऊपर मेरी उस नेमत को याद करो जो मैंने तुम्हें उस समय प्रदान की, जब मैंने तुम्हें जिबरील (अलैहिस्सलाम) द्वारा शक्ति प्रदान की, तुम लोगों से बात करते थे - जबकि तुम दूध पीते बच्चे थे - उन्हें अल्लाह की ओर बुलाते थे, तथा तुम अपनी अधेड़ आयु में उनसे उस चीज़ के बारे में बात करते थे जिसके साथ मैंने तुम्हें उनकी ओर भेजा था। मैंने तुमपर एक अनुग्रह यह किया कि तुम्हें लिखना सिखाया और उस तौरात का ज्ञान प्रदान किया जो मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारी गई थी और उस इंजील की शिक्षा दी जो तुमपर उतारी गई, और मैंने तुम्हें शरीयत के रहस्य, उसके फ़ायदे तथा उसकी हिकमतें बताईं। तुम्हारे ऊपर मेरी नेमतों में से एक यह है कि तुम मिट्टी से पक्षी के रूप समान आकृति बनाते थे, फिर उसमें फूँक मारते थे, तो वह पक्षी बन जाती थी। तथा तुम जन्म से अंधे को उसकी अंधता से चंगा कर देते थे और कोढ़ी को रोगमुक्त कर देते थे, तो उसकी त्वचा स्वस्थ हो जाती थी। तथा तुम मुर्दों को अल्लाह से उन्हें पुनर्जीवित करने की दुआ करके उन्हें पुनर्जीवित कर देते थे। यह सब मेरी अनुमति से संपन्न होता था। मैंने तुमपर जो उपकार किया, उनमें से एक यह भी है कि मैंने बनी इसराईल को उस समय तुमसे दूर कर दिया जब वे तुम्हें मार डालने ही वाले थे, जब तुम उनके पास स्पष्ट चमत्कार लेकर आए थे। तो उन्होंने उनका इनकार कर दिया, और कहा : यह ईसा जो कुछ लेकर आए हैं एक स्पष्ट जादू के सिवा कुछ नहीं।
5:111Page 126
وَإِذۡ أَوۡحَيۡتُ إِلَى ٱلۡحَوَارِيِّـۧنَ أَنۡ ءَامِنُواْ بِي وَبِرَسُولِي قَالُوٓاْ ءَامَنَّا وَٱشۡهَدۡ بِأَنَّنَا مُسۡلِمُونَ ١١١
And [remember] when I inspired to the disciples, "Believe in Me and in My messenger [i.e., Jesus]." They said, "We have believed, so bear witness that indeed we are Muslims [in submission to Allāh]."
तथा तुम अपने ऊपर मेरे इस उपकार को भी याद करो कि मैंने तुम्हें कुछ सहायक प्रदान किए जब मैंने हवारियों (साथियों) के दिल में यह बात डाल दी कि वे मुझ पर और तुम पर ईमान लाएँ। तो उन्होंने आज्ञा मानी और जवाब देते हुए कहा : हम ईमान लाए, और - ऐ हमारे रब! - तू गवाह रह कि हम तेरे आज्ञाकारी और अधीन हैं।
5:112Page 126
إِذۡ قَالَ ٱلۡحَوَارِيُّونَ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ هَلۡ يَسۡتَطِيعُ رَبُّكَ أَن يُنَزِّلَ عَلَيۡنَا مَآئِدَةٗ مِّنَ ٱلسَّمَآءِۖ قَالَ ٱتَّقُواْ ٱللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَ ١١٢
[And remember] when the disciples said, "O Jesus, Son of Mary, can your Lord1 send down to us a table [spread with food] from the heaven?" [Jesus] said, "Fear Allāh, if you should be believers."
उस समय को याद करो, जब हवारियों ने कहा कि क्या आपका पालनहार, यदि आप उससे दुआ करें, तो हमपर आकाश से एक थाल (भोजन सहित दस्तर-ख़्वान) उतार सकता है? तो ईसा (अलैहिस्सलाम) उन्हें अल्लाह से डरने और जो कुछ उन्होंने माँगा था, उसे त्यागने का आदेश देकर उन्हें उत्तर दिया। क्योंकि हो सकता है उसमें उनकी कोई परीक्षा हो, और उनसे कहा : जीविका की तलाश में अपने रब पर भरोसा करो, यदि तुम मोमिन हो।
5:113Page 126
قَالُواْ نُرِيدُ أَن نَّأۡكُلَ مِنۡهَا وَتَطۡمَئِنَّ قُلُوبُنَا وَنَعۡلَمَ أَن قَدۡ صَدَقۡتَنَا وَنَكُونَ عَلَيۡهَا مِنَ ٱلشَّٰهِدِينَ ١١٣
They said, "We wish to eat from it and let our hearts be reassured and know that you have been truthful to us and be among its witnesses."
हवारियों ने ईसा से कहा : हम चाहते हैं कि इस दस्तर-ख़्वान से खाएँ, और हमारे दिल अल्लाह की शक्ति की पूर्णता से और इस बात से आश्वस्त हो जाएँ कि आप उसके रसूल हैं, तथा हम निश्चित रूप से जान लें कि आप अल्लाह के पास से जो कुछ लेकर आए हैं, उसमें आपने हमसे सच्च कहा है, और हम उन लोगों के लिए इस बात के साक्षी बन जाएँ, जो यहाँ मौजूद नहीं हैं।
5:114Page 127
قَالَ عِيسَى ٱبۡنُ مَرۡيَمَ ٱللَّهُمَّ رَبَّنَآ أَنزِلۡ عَلَيۡنَا مَآئِدَةٗ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ تَكُونُ لَنَا عِيدٗا لِّأَوَّلِنَا وَءَاخِرِنَا وَءَايَةٗ مِّنكَۖ وَٱرۡزُقۡنَا وَأَنتَ خَيۡرُ ٱلرَّٰزِقِينَ ١١٤
Said Jesus, the son of Mary, "O Allāh, our Lord, send down to us a table [spread with food] from the heaven to be for us a festival for the first of us and the last of us and a sign from You. And provide for us, and You are the best of providers."
ईसा अलैहिस्सलाम ने उनके अनुरोध का उत्तर दिया और अल्लाह से यह कहते हुए दुआ की : हे हमारे रब! हमपर खाने का एक दस्तर-ख़्वान उतार दे, जिसके उतरने के दिन को हम एक पर्व बनाकर तेरे लिए आभार प्रकट करते हुए उसका सम्मान करें, तथा वह तेरे एकत्व (एकमात्र पूज्य होने) की निशानी और प्रमाण, तथा जिस चीज़ के साथ मैं भेजा गया हूँ उसकी सच्चाई का प्रमाण हो। तथा हमें ऐसी जीविका प्रदान कर, जो तेरी इबादत करने में हमारी मदद करे, और - ऐ हमारे रब! - तू सबसे उत्तम जीविका प्रदान करने वाला है।
5:115Page 127
قَالَ ٱللَّهُ إِنِّي مُنَزِّلُهَا عَلَيۡكُمۡۖ فَمَن يَكۡفُرۡ بَعۡدُ مِنكُمۡ فَإِنِّيٓ أُعَذِّبُهُۥ عَذَابٗا لَّآ أُعَذِّبُهُۥٓ أَحَدٗا مِّنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ ١١٥
Allāh said, "Indeed, I will send it down to you, but whoever disbelieves afterwards from among you - then indeed will I punish him with a punishment by which I have not punished anyone among the worlds."
अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम की दुआ क़बूल कर ली और फरमाया : मैं यह दस्तर-ख़्वान उतारने वाला हूँ, जो तुमने अपने ऊपर उतारने की माँग की है। अतः जो कोई भी उसके उतरने के बाद कुफ्र करे, वह केवल खुद को दोषी ठहराए। क्योंकि मैं उसे ऐसी कड़ी यातना दूँगा, जो किसी और को नहीं दूँगा। क्योंकि उसने प्रकाशमान (स्पष्ट) निशानी देखी, इसलिए उसका कुफ़्र हठ का कुफ़्र है। तथा अल्लाह ने उनसे अपना वचन पूरा किया, सो उसे उनपर उतार दिया।
5:116Page 127
وَإِذۡ قَالَ ٱللَّهُ يَٰعِيسَى ٱبۡنَ مَرۡيَمَ ءَأَنتَ قُلۡتَ لِلنَّاسِ ٱتَّخِذُونِي وَأُمِّيَ إِلَٰهَيۡنِ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ قَالَ سُبۡحَٰنَكَ مَا يَكُونُ لِيٓ أَنۡ أَقُولَ مَا لَيۡسَ لِي بِحَقٍّۚ إِن كُنتُ قُلۡتُهُۥ فَقَدۡ عَلِمۡتَهُۥۚ تَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِي وَلَآ أَعۡلَمُ مَا فِي نَفۡسِكَۚ إِنَّكَ أَنتَ عَلَّٰمُ ٱلۡغُيُوبِ ١١٦
And [beware the Day] when Allāh will say, "O Jesus, Son of Mary, did you say to the people, 'Take me and my mother as deities besides Allāh?'" He will say, "Exalted are You! It was not for me to say that to which I have no right. If I had said it, You would have known it. You know what is within myself, and I do not know what is within Yourself. Indeed, it is You who is Knower of the unseen.
और उस समय को याद करो, जब अल्लाह तआला क़ियामत के दिन ईसा बिन मरयम अलैहिमस्सलाम को संबोधित करते हुए कहेगा : ऐ ईसा बिन मरयम! क्या तुमने लोगों से कहा था : मुझे और मेरी माँ को अल्लाह के अलावा पूज्य बना लो? तो ईसा अलैहिस्सलाम अपने पालनहार की पवित्रता बयान करते हुए कहेंगे : मेरे लिए उचित ही नहीं कि मैं उनसे सत्य के अलावा कुछ कहूँ। और यदि मान लिया जाए कि मैंने ऐसा कहा था, तो निश्चय तुझे उसका ज्ञान है, क्योंकि तुझसे कुछ भी छिपा नहीं है। तू जानता है जो कुछ मैं अपने दिल में छिपाता हूँ, और मुझे नहीं पता जो तेरे मन में है। निश्चय अकेला तू ही है जो हर परोक्ष (अनुपस्थित), हर छिपी हुई और हर प्रत्यक्ष चीज़ को जानता है।
5:117Page 127
مَا قُلۡتُ لَهُمۡ إِلَّا مَآ أَمَرۡتَنِي بِهِۦٓ أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمۡۚ وَكُنتُ عَلَيۡهِمۡ شَهِيدٗا مَّا دُمۡتُ فِيهِمۡۖ فَلَمَّا تَوَفَّيۡتَنِي كُنتَ أَنتَ ٱلرَّقِيبَ عَلَيۡهِمۡۚ وَأَنتَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ ١١٧
I said not to them except what You commanded me - to worship Allāh, my Lord and your Lord. And I was a witness over them as long as I was among them; but when You took me up, You were the Observer over them, and You are, over all things, Witness.
ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से कहा : मैंने उनसे केवल वही कहा, जो कुछ तूने मुझे कहने का आदेश दिया था कि उन्हें एकमात्र तेरी इबादत करने का आदेश दूँ। और जब तक मैं उनके बीच मौजूद था तो वे जो कुछ कहते थे मैं उसकी निगरानी करता था। फिर जब तूने मुझे जीवित आकाश पर उठाकर उनके बीच मेरे रहने की अवधि का समापन कर दिया, तो - ऐ मेरे रब! - तू ही उनके कर्मों का संरक्षक था, और तू हर चीज़ का साक्षी है, कोई भी चीज़ तुझसे छिपी नहीं। अतः जो कुछ मैंने उनसे कहा और जो कुछ उन्होंने मेरे बाद कहा, वह तुझसे छिपा नहीं।
5:118Page 127
إِن تُعَذِّبۡهُمۡ فَإِنَّهُمۡ عِبَادُكَۖ وَإِن تَغۡفِرۡ لَهُمۡ فَإِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ ١١٨
If You should punish them - indeed they are Your servants; but if You forgive them - indeed it is You who is the Exalted in Might, the Wise."
(ऐ मेरे पालनहार!) यदि तू उन्हें दंड दे, तो बेशक वे तेरे बंदे हैं, तू उनके साथ जो चाहे करे, और यदि तू उनमें से ईमान लाने वालों पर उपकार करते हुए उन्हें क्षमा कर दे, तो कोई तुझे उससे रोकने वाला नहीं। क्योंकि तू सबपर प्रभुत्वशाली है जिसे पराजित नहीं किया जा सकता, तथा अपने प्रबंधन में हिकमत वाला है।
5:119Page 127
قَالَ ٱللَّهُ هَٰذَا يَوۡمُ يَنفَعُ ٱلصَّٰدِقِينَ صِدۡقُهُمۡۚ لَهُمۡ جَنَّٰتٞ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ خَٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدٗاۖ رَّضِيَ ٱللَّهُ عَنۡهُمۡ وَرَضُواْ عَنۡهُۚ ذَٰلِكَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ ١١٩
Allāh will say, "This is the Day when the truthful will benefit from their truthfulness." For them are gardens [in Paradise] beneath which rivers flow, wherein they will abide forever, Allāh being pleased with them, and they with Him. That is the great attainment.
अल्लाह ईसा अलैहिस्सलाम से कहेगा : यह एक ऐसा दिन है जब सच्चे इरादों, कर्मों और बातों वालों को उनकी सच्चाई लाभ देगी। उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके महलों तथा पेड़ों के नीचे से नहरें प्रवाहित हैं, वे उनमें सदा सर्वदा के लिए रहेंगे, उन्हें कभी मृत्यु नहीं आएगी। अल्लाह उनसे प्रसन्न होगा, अतः वह उनसे कभी नाराज़ नहीं होगा तथा वे शाश्वत आनंद प्राप्त होने के कारण अल्लाह से प्रसन्न होंगे। यह प्रतिफल और (अल्लाह का) उनसे प्रसन्न होना ही महान सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं।
5:120Page 127
لِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا فِيهِنَّۚ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرُۢ ١٢٠
To Allāh belongs the dominion of the heavens and the earth and whatever is within them. And He is over all things competent.
आकाशों तथा धरती का राज्य अकेले अल्लाह ही का है, वही उनका स्रष्टा और उनके मामलों का प्रबंध करने वाला है, तथा उनमें विद्यमान् सभी प्राणियों का राज्य उसी का है, तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है, उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती।
Text: Quranic Universal Library (Tarteel), via spa5k/tafsir_api (MIT), at a fixed version. The ayahs: Quran Foundation. Sources and licences